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April 03, 2026
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कोरोना काल में भी स्वास्थ्य विभाग ने 95.93 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का पंजीयन कर पाया बेहतर लक्ष्य

  • hanumaan janmotsav

बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर जिले में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा नियमित रूप से की जा रही है । जांच से पूर्व स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सभी गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जाता है। पंजीयन उपरांत गर्भवती महिलाओं की समय-समय पर प्रसव पूर्व जांच कर टिटनेस का टीका दिया जाता है साथ ही जांच के लिए फालोअप भी किया जाता है। इस कार्य में एएनएम और मितानिन का कार्य काफी सराहनीय है। जब प्रसव हो जाता है तब मितानिन द्वारा प्रसव पश्चात जांच के तहत जच्चा बच्चा का 42 दिनों तक नियमित ख्याल रखा जाता है। स्वास्थ्य विभाग हर साल इसके लिए एक लक्ष्य निर्धारित करता है। इस बार लक्ष्य के सापेक्ष स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना काल में अच्छा कार्य किया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रमोद महाजन ने बताया कि साल 2020-21 में विभाग को 49,761 गर्भवतियों के पंजीयन का लक्ष्य दिया गया था। इसमें विभाग ने माह अप्रैल से जून तक मात्र तीन महीने में 95.93 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की है।
उन्होंने बताया कि तीन माह की प्रगति को देखें तो विभाग ने 12,440 गर्भवती पंजीयन के अनुपातिक लक्ष्य के सापेक्ष 11,934 पंजीयन करके अच्छी सफलता हासिल की है। जि़ले में प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के लिए 12,440 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन किया गया है जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र की गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि समय से गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और प्रसव पूर्व जांच होने से जोखिम की संभावनाएं काफी कम हो जाती हैं ।
नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच से समय से जटिलताओं की पहचान की जाती है और आवश्यक उपचार प्रदान किया जाता है जो कि मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु दर को कम करने में बहुत हद तक सहायक है । समय से पंजीयन से गर्भवती महिलाओं और नवजातों को सरकार द्वारा दी गयी सुविधायें भी आसानी से मिल जाती हैं।
गर्भवती की प्रसव पूर्व चार जांचें हैं बेहद जरूरी !
प्रथम चरण में गर्भधारण के तुरंत बाद या गर्भावस्था के पहले 3 महीने के अंदर जांच होती है। द्वितीय चरण में गर्भधारण के चौथे या छठे महीने में। तृतीय चरण में गर्भधारण के सातवें या आठवें महीने में तथा चतुर्थ चरण में गर्भधारण के नौवें महीने में जरूरी जांचे की जाती हैं। इसमें प्रत्येक गर्भवती के हीमोग्लोबिन की मात्रा अनुसार आईएफए, कैल्शियम के साथ साथ टीकाकरण, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह की स्क्रीनिंग की जाती है।

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