August 08, 2026
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    कांग्रेसजनों ने झीरम के शहीदों को नमन किया

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      रायपुर/शौर्यपथ /झीरम हमले की 12वीं बरसी पर राजीव भवन में कांग्रेसजनों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस अवसर पर एआईसीसी महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजली अर्पित किया। शहीदों के लिये दो मिनिट का मौन रख कर नमन किया गया।
     इस अवसर पर एआईसीसी महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद हमारी सरकार ने एसआईटी बनाकर षड़यंत्र की जांच करने का प्रयास किया। एनआईए ने इस मामले की जांच बंद कर दिया था, एनआईए ने 24 सितंबर 2014 को अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल किये, इसके बाद 28 सिंतबर 2015 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश किया, अर्थात एनआईए ने जांच बंद कर दिया था, एनआईए ने किसी भी पीड़ित से पूछताछ नहीं किया, जो संदिग्ध नक्सली थे किसी के खिलाफ आरोप पत्र नहीं दाखिल नहीं किया। लेकिन जैसे ही राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया एनआईए ने फिर से जांच शुरू कर दिया और राज्य की एजेंसी के जांच को बाधित किया। कानूनन जब तक एनआईए मामले की फाइल राज्य को वापस नहीं करती एसआईटी जांच शुरू नहीं कर सकती थी। कांग्रेस के पूर्ववर्ती राज्य सरकार द्वारा बार-बार मांगे जाने के बावजूद एनआईए ने झीरम की केस फाइल नहीं दिया। एनआईए ने भी एसआईटी की जांच को रोकने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया, बाद में हाईकोर्ट ने एनआईए के स्टे को खारिज कर दिया। एनआईए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गयी जहां सुप्रीम कोर्ट ने 21 नवंबर 2023 को एनआईए की याचिका को खारिज कर दिया। लेकिन तब तक राज्य में सरकार बदल गयी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्य की एसआईटी के जांच के रास्ते खुल गये। राज्य सरकार दरभा थाने में पीड़ित परिवारों की रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी की जांच शुरू करें। आज तथाकथित शराब घोटाला, कोल घोटाला सभी ईडी, आईटी, सीबीआई जांच कर रही राज्य की ईओडब्ल्यू भी जांच कर रही लेकिन झीरम में राज्य की एजेंसी को जांच करने से रोकने केंद्र सरकार कोर्ट गयी थी। झीरम मामले के 12 साल पूरे होने के बावजूद पीड़ितों के परिजनो और घायलों को न्याय नहीं मिला। भाजपा की सरकारों ने हमेशा झीरम की जांच को रोकने का प्रयास किया। झीरम हमले में कई घायलों और पीड़ितों और प्रभावितों तक से अब तक एनआईए ने बयान नहीं लिये है। यह आरोप पीड़ित और उनके परिजनों ने लगाया है। आखिर इतनी परदेदारी क्यों? किसको बचाने के लिये जांच को रोका जाता है? भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को भय है कि झीरम का सच आने से उनके षड़यंत्र बेनकाब हो जायेंगे। मुझे दुख है कि सरकार में रहते केंद्र सरकार के अवरोध के कारण जांच नहीं हो पाई।
    नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि आज का दिन कांग्रेस के लिए बेहद पीड़ा का दिन है। हमने अपने नेताओं को खोया था। मैं शहीद नेताओं को अपनी श्रद्धांजली अर्पित करता हूं। आज भी छत्तीसगढ़ की जनता जानना चाहती है कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा को घोर नक्सल इलाके में ही क्यो हटाया गया था? झीरम नरसंहार भाजपा के लिए उसकी तत्कालीन सरकार द्वारा की गई चूक मात्र हो सकती है तथा उसकी तत्कालीन सरकार द्वारा किया गया एक षड्यंत्र मात्र हो सकता है। कांग्रेस के लिए झीरम वह घाव है जो कभी नहीं भर सकता। यह घटना देश के लोकतंत्र के माथे पर लगा वह कलंक है जो कभी नहीं मिट सकता।
     श्रद्धांजली सभा में पूर्व सांसद छाया वर्मा, कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला, गिरीश दुबे, उधो वर्मा, पंकज शर्मा, ज्ञानेश शर्मा, विनोद वर्मा, महेन्द्र छाबड़ा, सुरेन्द्र शर्मा, धनंजय सिंह ठाकुर, घनश्याम राजू तिवारी, सुरेन्द्र वर्मा, डॉ. अजय साहू, राम गिडलानी, चंद्रदेव राय, श्रीकुमार मेनन, शिवसिंह ठाकुर, आकाश तिवारी, एजाज ढेबर, सुनील बाजारी, सलाम रिजवी, दीपा बग्गा, कमलाकांत शुक्ला, दिलीप चौहान, पप्पू बंजारे, अविनय दुबे, बबीता नत्थानी, शब्बीर खान, आनंद मिश्रा, नवीन चंद्राकर, प्रशांत ठेंगड़ी, देवकुमार साहू, दिनेश शुक्ला, पिंकी बाघ, भुवनेश्वरी डहरिया, पुष्पराज वैद्य, अखिलेश जोशी, ओम श्रीवास, अनिल रायचुरा, शनाया परविन, सुंदर जोगी उपस्थित थे।

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