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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य शासन के वित्त विभाग ने आज 5000 शिक्षकों के पदों पर भर्ती की सहमति प्रदान कर दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री साय की उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को मज़बूत बनाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य की प्रगति की नींव होती है, और छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य है कि हर बच्चे तक ज्ञान और अवसर दोनों पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह भर्ती न केवल शिक्षण व्यवस्था को गति देगी बल्कि युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर भी सृजित करेगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने वित्त विभाग द्वारा दी गई सहमति को ‘नए छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम’ बताया। 5000 पदों हेतु शिक्षा विभाग शीघ्र भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ करेगा। इन पदों की पूर्ति से ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर होगी, जिससे शिक्षण की निरंतरता और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
राज्य शासन ने पिछले कुछ महीनों में शिक्षा सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। विद्यालय भवनों के निर्माण, डिजिटल शिक्षा सामग्री के प्रसार, और शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश में शिक्षकों की कमी लंबे समय से एक प्रमुख चुनौती रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सीमित थी। नई भर्ती से इन क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे बच्चों को अब अपने ही गाँव और क्षेत्र में बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, यह पहल प्रदेश में शिक्षण के स्तर को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने में सहायक सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा को सर्वांगीण विकास का आधार मानते हुए लगातार निवेश कर रही है। स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण से लेकर छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन और छात्र हितैषी योजनाओं तक, सरकार का फोकस हर स्तर पर शिक्षा के दायरे को व्यापक बनाना है। शिक्षकों की यह नई भर्ती उसी दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विज़न को साकार करने की दिशा में अग्रसर है। इस निर्णय से जहाँ शिक्षा प्रणाली को नई ऊर्जा मिलेगी, वहीं हजारों युवाओं के सपनों को साकार करने का मार्ग भी खुलेगा। यह पहल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘शिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़’ की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।
"मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी की मंशा के अनुरूप शिक्षा को राज्य की शीर्ष प्राथमिकता बनाया गया है। वित्त विभाग द्वारा 5000 शिक्षकों के पदों की भर्ती की सहमति देना इसी संकल्प का हिस्सा है। शिक्षा में किया गया प्रत्येक निवेश प्रदेश के भविष्य में किया गया निवेश है। इस निर्णय से स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी होगी, ग्रामीण व आदिवासी अंचलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ेगी और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए शिक्षा जैसे मूलभूत क्षेत्र को संसाधन उपलब्ध कराना हमारी सरकार की जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता दोनों है।" - वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी
"शिक्षा राज्य के विकास की सबसे सशक्त आधारशिला है। हमारी सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और हर विद्यालय में योग्य शिक्षक उपलब्ध हों। वित्त विभाग द्वारा 5000 शिक्षकों के पदों पर भर्ती की सहमति उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। यह निर्णय न केवल शिक्षा के क्षेत्र को सशक्त करेगा, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।" - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रवास की तैयारियों का लिया व्यापक जायज़ा: सभी तैयारियाँ निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने अधिकारियों को दिए निर्देश
रायपुर / शौर्यपथ /
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी छत्तीसगढ़ प्रवास के मद्देनज़र मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर में विभिन्न कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण कर तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ आगमन राज्य के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस दौरान प्रत्येक व्यवस्था उत्कृष्टता का प्रतीक बने और प्रदेश की संस्कृति, आत्मगौरव एवं प्रगति की झलक हर स्थल पर दृष्टिगोचर हो।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्थलों का किया निरीक्षण
मुख्यमंत्री साय ने सबसे पहले नवा रायपुर स्थित सत्य साईं हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा, सभागार व्यवस्था, मंच और आमंत्रित अतिथियों के बैठने की व्यवस्था का जायजा लिया।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री साय प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ध्यान केंद्र पहुँचे, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने ध्यान केंद्र के सभागार, मेडिटेशन रूम एवं बाहरी परिसर का निरीक्षण करते हुए सभी व्यवस्थाओं को समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।
ट्राइबल म्यूज़ियम बनेगा जनजातीय अस्मिता का प्रतीक
मुख्यमंत्री साय ने शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय जनजातीय समाज की वीरता, बलिदान और अस्मिता का अमर प्रतीक बनेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि संग्रहालय के प्रत्येक अनुभाग को इस प्रकार तैयार किया जाए कि वह आगंतुकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली अध्याय से गहराई से परिचित करा सके। उन्होंने प्रदर्शनी दीर्घाओं, मल्टीमीडिया गैलरी, स्मृति कक्ष और बाहरी परिसर की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।
राज्योत्सव स्थल बनेगा छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का दर्पण
मुख्यमंत्री साय ने नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल का भी दौरा किया और तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने मुख्य मंच, पार्किंग क्षेत्र, विभागीय डोम, प्रदर्शनी दीर्घा, वीआईपी दीर्घा और आमजन के लिए बनाए गए मार्गों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, संस्कृति और आत्मविश्वास का उत्सव है, इसलिए यह आयोजन उत्कृष्टता की नई मिसाल बने।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएँ और सुरक्षा, स्वच्छता तथा आमजन की सुविधा से जुड़े सभी बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, सचिव राहुल भगत सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
पटना। शौर्यपथ ।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) और इंडिया (I.N.D.I.A.) गठबंधन, यानी महागठबंधन—दोनों में कई प्रमुख और क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं। यहां दोनों गठबंधनों की पार्टियों का हाल का ब्यौरा प्रस्तुत है:
एनडीए (NDA) गठबंधन में शामिल पार्टियां
भारतीय जनता पार्टी (BJP)
जनता दल (यूनाइटेड) [JDU]
हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) – जीतन राम मांझी की पार्टी
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) [LJP (RV)] – चिराग पासवान की पार्टी
राष्ट्रीय लोक जनतांत्रिक मोर्चा (रालोमो) – उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी
वर्तमान चुनाव में एनडीए में कुल 5 प्रमुख पार्टियां शामिल हैं।
इंडिया (I.N.D.I.A.)/महागठबंधन में शामिल पार्टियां
राष्ट्रीय जनता दल (RJD)
कांग्रेस (INC)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) [CPI (ML)]
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) – मुकेश सहनी की पार्टी
महागठबंधन/इंडिया में फिलहाल 4 मुख्य पार्टियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिनमें वीआईपी की भी हाल ही में आमद हुई है।
अतिरिक्त जानकारी
दोनों गठबंधनों में क्षेत्रों के अनुसार कुछ छोटी पार्टियां और वैकल्पिक गठबंधन, सीटों के बंटवारे व स्थानीय समीकरण से भी जुड़ सकते हैं।
हालिया चुनावी समझौतों के कारण गठबंधनों में आंशिक बदलाव संभावित रहते हैं, किंतु ऊपर दी गई सूची वर्तमान हालत पर आधारित है।
पटना। शौर्यपथ ।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीतिक लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। इंडिया गठबंधन (महागठबंधन) ने पहली बार तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री और मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री के रूप में पेश करते हुए चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। कांग्रेस के दिग्गज अशोक गहलोत की मौजूदगी में सार्वजनिक मंच पर गठबंधन के सभी दल—आरजेडी, कांग्रेस, वामदलों और वीआईपी के नेताओं—ने महागठबंधन की एकजुटता पर मुहर लगाई।
इस बार महागठबंधन ने सामाजिक संतुलन साधने के लिए EBC, यादव, मुस्लिम और निषाद-मल्लाह वर्गों को जोड़ने का रणनीतिक दांव चला है। टिकट बंटवारे में कांग्रेस, आरजेडी, वाम दल और वीआईपी के उम्मीदवारों ने अपने-अपने परंपरागत आधार के साथ नई जातीय परतें जोड़ दी हैं, जिससे गठबंधन की ताकत कई गुना हो गई है। दूसरी ओर एनडीए पर आरोप लगे हैं कि वह महाराष्ट्र की तर्ज पर चुनाव जीतते ही मुख्यमंत्री बदलने की योजना बना रही है। विपक्ष का कहना है कि नीतीश कुमार का यह ‘आखिरी चुनाव’ होगा और उन्हें चुनाव बाद दरकिनार किया जा सकता है।
महागठबंधन ने महिलाओं की स्थिति, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और गरीब वर्ग की चिंता को चुनावी नरेटिव का हिस्सा बनाया। इंडिया गठबंधन के संदेश में साफ तौर पर यह झलक रहा है कि बिहार को एक नई शुरुआत की जरूरत है, और जनता को मुख्यमंत्रियों के चेहरों... और वादों के बीच धोखे में नहीं रहना चाहिए।
यह चुनाव अब केवल वोटों की नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण, असली मुद्दों और नेतृत्व की प्रामाणिकता की लड़ाई बन गया है। सभी दल अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं, लेकिन महागठबंधन की सामूहिक घोषणा और लक्ष्य अब बिहार की जनता को बदलाव की उम्मीद दे रही है।
✍️ संपादकीय विश्लेषण
दुर्ग। लोकतंत्र की जड़ें तभी मजबूत होती हैं जब सत्ता में बैठे लोग जनसेवा को प्राथमिकता दें और नैतिकता को अपना आदर्श बनाएं। परंतु विडंबना यह है कि आज राजनीति में नैतिकता का स्थान स्वार्थ ने ले लिया है। चुनाव के समय नेता जनता के द्वार पर हाथ जोड़कर सेवा का वादा करते हैं, लेकिन पद मिलते ही वही नेता जनसेवा के वादों को भुलाकर सरकारी तंत्र और संसाधनों के दुरुपयोग में लग जाते हैं।
सरकारी बंगले, जो प्रशासनिक जरूरतों और सार्वजनिक सेवा से जुड़े पदाधिकारियों के लिए आरक्षित होते हैं, आज राजनीतिक रसूख की पहचान बन गए हैं। नेताओं के लिए बंगले केवल निवास नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन के प्रतीक बन चुके हैं। और यही प्रवृत्ति लोकतंत्र की आत्मा पर सबसे गहरा आघात करती है।
? दुर्ग का उदाहरण: सम्मानित नाम के पीछे उठते सवाल
दुर्ग शहर का राजनीतिक इतिहास साक्षी है कि स्वर्गीय हेमचंद यादव का नाम आज भी सम्मान और सेवा के प्रतीक के रूप में लिया जाता है। उनका मिलनसार स्वभाव, सरल व्यक्तित्व और जनता से जुड़ाव ने उन्हें जननेता के रूप में स्थापित किया था।
परंतु अफसोस की बात यह है कि उनके जाने के वर्षों बाद भी, उनके नाम पर आवंटित सरकारी बंगले पर आज भी उनके परिजनों का कब्जा बना हुआ है — जबकि कोई संवैधानिक या सरकारी पद उनके पास नहीं है।
यह स्थिति केवल एक बंगले की नहीं, बल्कि नैतिकता की दीवारों में लगी दरार का प्रतीक है।
क्योंकि जहां जनता के लिए उपलब्ध सुविधाएं सीमित हैं, वहीं सत्ता की निकटता से लाभान्वित परिवार सरकारी संपत्ति को निजी उपयोग में बनाए रखते हैं।
⚖️ जब एक पूर्व मंत्री ने दी थी मिसाल...
प्रदेश की राजनीति में पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने एक बार नैतिक उदाहरण प्रस्तुत किया था। विधायक रिकेश सेन द्वारा उनके बंगले के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होते ही उन्होंने बिना किसी विवाद या टकराव के बंगला तत्काल खाली कर दिया।
यही वह राजनीतिक संस्कार था जो दिखाता है कि लोकतंत्र में पद से बड़ा नैतिक कर्तव्य होता है।
लेकिन आज जब जीत हेमचंद यादव जैसे युवा नेता, जिनकी पहचान अभी भी स्वर्गीय हेमचंद यादव की विरासत पर टिकी है, उसी सरकारी बंगले पर कब्जा बनाए रखते हैं, तो यह सवाल उठना लाजिमी है —
क्या यह वही "नैतिकता" है जिसकी बातें नेता जनता के सामने करते हैं?
?️ बंगला या प्रतीक — राजनीति का असली चेहरा
सरकारी बंगले की दीवारें केवल ईंट-पत्थर की नहीं होतीं, वे जनता के विश्वास की नींव होती हैं।
जब कोई नेता सरकारी संपत्ति पर पद छोड़ने के बाद भी कब्जा जमाए रखता है, तो यह जनता के विश्वास का दुरुपयोग है। यह वही जनता है जिसने उन्हें सम्मान, पहचान और पद सब कुछ दिया।
यदि जीत हेमचंद यादव वास्तव में अपने पिता की प्रतिष्ठा और सम्मान को जीवित रखना चाहते हैं, तो उन्हें चाहिए कि वे नैतिकता के आधार पर बंगले को स्वयं मुक्त करें।
यही कदम यह साबित करेगा कि वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत को केवल नाम से नहीं, बल्कि आचरण से भी जीवित रखे हुए हैं।
?️ निष्कर्ष:
लोकतंत्र में नैतिकता और आदर्श केवल भाषणों का विषय नहीं होने चाहिए, बल्कि वह आचरण में उतरने चाहिए।
सरकारी संपत्तियों पर कब्जा, चाहे किसी भी दल या व्यक्ति द्वारा किया गया हो, जनता के संसाधनों का दुरुपयोग है — और यह जनसेवा नहीं, सत्ता-सेवा का प्रतीक है।
आज जरूरत है कि जीत हेमचंद यादव जैसे युवा नेता उदाहरण पेश करें —
और दिखाएं कि नैतिकता की बात केवल कहने के लिए नहीं, निभाने के लिए होती है।
पटना। शौर्यपथ।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का एक नया और दिलचस्प चेहरा अब सामने आ रहा है—जहां छत्तीसगढ़ के दो यादव नेता अलग-अलग खेमों से बिहार की सियासत में मोर्चा संभाले हुए हैं। भाजपा से छत्तीसगढ़ के मंत्री गजेंद्र यादव और कांग्रेस से विधायक देवेंद्र यादव दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों के लिए बिहार के यादव वोट बैंक को साधने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
यादव समुदाय, जो कि बिहार की कुल आबादी का लगभग 14.26 प्रतिशत हिस्सा है, हर चुनाव में सत्ता की कुंजी साबित होता है। इसलिए इस बार दोनों राष्ट्रीय दलों ने अपने यादव नेताओं को बिहार के मैदान में उतारकर एक तरह से ‘यादव बनाम यादव’ सियासी संघर्ष की नींव रख दी है ।
गजेंद्र यादव को भाजपा नेतृत्व ने बिहार में एनडीए के पक्ष में यादव वोटों को आकर्षित करने की प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है। वे न केवल प्रदेश के एकमात्र यादव मंत्री हैं, बल्कि संगठन और प्रचार की कमान भी संभाले हुए हैं। वहीँ कांग्रेस के लिए देवेंद्र यादव, जो दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और बिहार चुनाव के सह प्रभारी भी हैं, लगातार बिहार में महागठबंधन को धार देने के लिए सक्रिय हैं। देवेंद्र यादव पर पार्टी में टिकट वितरण को लेकर विवादों के बावजूद कांग्रेस का विश्वास बरकरार है ।
छत्तीसगढ़ का ये यादव समीकरण बिहार में सिर्फ यादव वोट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों राज्यों की सियासत पर असर डालने लगा है। भाजपा की तरफ से गजेंद्र यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति का "संगठनिक स्तंभ" माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस में देवेंद्र यादव की भूमिका “भूपेश बघेल टीम” के हिस्से के रूप में देखी जा रही है—जो संगठन पुनर्जीवन का प्रयास कर रही है।
राजनीतिक रणनीतिकारों के अनुसार, बिहार की इस ‘यादव बनाम यादव’ जंग का असर ना केवल नीतीश-तेजस्वी समीकरण पर पड़ेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के राजनीतिक शक्ति-संतुलन को भी नया आयाम देगा। गजेंद्र यादव जहां भाजपा के लिए “यादव समुदाय का सेतु” बनना चाहते हैं, वहीं देवेंद्र यादव कांग्रेस के लिए “वोटर पुनःसंयोजन का प्रतीक” बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।
बिहार चुनाव 2025 न केवल प्रदेश की सत्ता का फैसला करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि यादव राजनीति की आवाज किस खेमे से अधिक गूंजेगी—गजेंद्र या देवेंद्र?
पटना। शौर्यपथ।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चुनावी समीकरणों में अप्रत्याशित बदलाव दिखाई देने लगे हैं। नामांकन पत्रों की जांच के बाद कई प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के पर्चे निरस्त कर दिए गए हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।
चुनाव आयोग की जानकारी के अनुसार, पहले चरण में 121 सीटों पर कुल 1314 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा था, जिनमें से 315 नामांकन रद्द कर दिए गए। वहीं दूसरे चरण की 122 सीटों के लिए हुई जांच में 519 उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हुए हैं ।
प्रमुख उम्मीदवार जिनके पर्चे रद्द हुए
मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में सबसे बड़ा झटका राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को लगा है। कैमूर जिले की मोहनिया सीट से आरजेडी प्रत्याशी श्वेता सुमन का नामांकन निर्वाचन आयोग ने रद्द कर दिया है। आयोग ने पाया कि श्वेता सुमन उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की मूल निवासी हैं और बिहार निर्वाचन सूची में उनका नाम दर्ज नहीं था। इस वजह से उनका नामांकन अमान्य करार दिया गया ।
सुगौली विधानसभा (मोतिहारी) से विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रत्याशी शशि भूषण सिंह का नामांकन अधूरी दस्तावेज़ी प्रक्रिया के चलते निरस्त हुआ है। वहीं मढ़ौरा (सारण) सीट से एनडीए घटक लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की उम्मीदवार सीमा सिंह का पर्चा भी तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया ।
इसके अलावा वाल्मीकिनगर (पश्चिमी चंपारण) से जनसुराज पार्टी के दीर्घ नारायण प्रसाद, लालगंज (वैशाली) से राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी की सीमा सुंदरी देवी, डेहरी (रोहतास) से बसपा के धनजी कुमार, और चिरैया (पूर्वी चंपारण) से आरएलजेपी के सलाउद्दीन समेत कई प्रत्याशियों के नामांकन भी खारिज हुए हैं ।
सियासी असर और दलों की रणनीति
आरजेडी और वीआईपी दोनों के लिए यह स्थिति झटका साबित हो रही है क्योंकि तीनों प्रभावित सीटें पहले से ही उनके लिए महत्वपूर्ण मानी जाती थीं। अब महागठबंधन को इन सीटों पर नए चेहरों की तलाश करनी होगी जबकि एनडीए की ओर से एलजेपी(आर) को भी मढ़ौरा सीट पर नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ रही है ।
निष्कर्ष
6 और 11 नवंबर को मतदान और 14 नवंबर को मतगणना से पहले नामांकन निरस्त होने की इस स्थिति ने बिहार की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पर्चे रद्द होना अभूतपूर्व है और इसका असर कई सीटों पर मुकाबले की दिशा तय कर सकता है
स्वास्थ्य शिक्षा और सेवाओं को नई दिशा — निविदा दरों की स्वीकृति के बाद जल्द शुरू होगा निर्माण
रायपुर / शौर्यपथ।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा देते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य में चार नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों सहित कुल छह महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं के लिए निविदा दरों को अनुमोदित किया गया है।
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) के नया रायपुर स्थित मुख्यालय में आयोजित 51वीं संचालक मंडल बैठक में इन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। इन सभी परियोजनाओं की कुल लागत 1,390 करोड़ रुपए से अधिक है। इस निर्णय से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को नई गति मिलेगी।
बैठक में चार नए मेडिकल कॉलेजों की भवन निर्माण परियोजनाओं के लिए निम्नानुसार निविदा दरों को स्वीकृति दी गई —
मनेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज – ₹323.03 करोड़
कबीरधाम मेडिकल कॉलेज – ₹318.27 करोड़
जांजगीर-चांपा मेडिकल कॉलेज – ₹318.27 करोड़
गीदम मेडिकल कॉलेज – ₹326.53 करोड़
इन कॉलेजों के निर्माण से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और युवाओं को डॉक्टर बनने के अधिक अवसर मिलेंगे।
इसके अलावा मनेंद्रगढ़ में 220 बिस्तर वाले अस्पताल भवन के निर्माण हेतु ₹28.48 करोड़ तथा बिलासपुर के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय और अस्पताल भवन के निर्माण हेतु ₹79.52 करोड़ की निविदा दर को भी मंजूरी दी गई है।
इन छह परियोजनाओं की निविदा दरों को स्वीकृति मिलने के बाद अब इनके निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होंगे। इनके पूर्ण होने पर प्रदेश की जनता को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ मिलेंगी, जिससे बड़े शहरों पर उपचार की निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा, “नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से न केवल चिकित्सा शिक्षा का दायरा बढ़ेगा बल्कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता भी सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील सोच और दूरदर्शी नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा मिल रही है। प्रदेश के हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है।”
सीजीएमएससी की 51वीं संचालक मंडल बैठक में अध्यक्ष दीपक म्हस्के, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रितेश अग्रवाल, वित्त विभाग, जीएसटी विभाग और कॉर्पोरेशन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा, गुणवत्ता मानकों और पारदर्शिता पर विशेष बल दिया गया। निर्णय लिया गया कि निर्माण कार्य समयबद्ध रूप से और उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ पूर्ण किए जाएंगे।
इन मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के शुरू होने से प्रदेश के युवाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन भी बढ़ेगा। साथ ही ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ में ऐसा स्वास्थ्य ढाँचा विकसित हो, जहाँ हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण और सुलभ चिकित्सा सुविधा मिले। राज्य सरकार जनता के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।”
खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने उज्ज्वला योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के दिए निर्देश
रायपुर / शौर्यपथ / भारत सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण और परिवारों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी गैस कनेक्शन जारी किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस निर्णय से देशभर में करोड़ों महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत नियद नेल्ला नार योजना में चिन्हांकित ग्रामों के बीपीएल परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर नए गैस कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे। “सुशासन तिहार” और “नियद नेल्लानार योजना” के अंतर्गत 1.59 लाख पात्र माताओं और बहनों को उज्ज्वला योजना के तहत बीपीएल परिवारों की महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ में उज्ज्वला योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आज खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने 16 अक्टूबर को तेल कंपनियों के अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के नए चरण में राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ स्वास्थ्य संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है।
बैठक में सचिव श्रीमती कंगाले ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत नवीन गैस कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया में गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में “नियद नेल्लानार योजना” के तहत चिन्हांकित ग्रामों में निवासरत पात्र बीपीएल परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन में विशेष प्राथमिकता दी जाए। इन ग्रामों की महिलाओं को सबसे पहले इस योजना का लाभ मिले, ताकि विकास और सशक्तिकरण की प्रक्रिया जमीनी स्तर पर महसूस की जा सके।
सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा कि चिन्हांकित ग्रामों में विशेष शिविरों का आयोजन करें, जहां उज्ज्वला योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों के आवेदन प्राप्त किए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि शिविरों के माध्यम से लाभार्थियों को योजना के लाभ, सुरक्षा उपायों और उपयोग के तौर-तरीकों की जानकारी दी जाए।
बैठक में डॉ. फरिहा आलम, संचालक (खाद्य नागरिक आपूर्ति), राज्य स्तरीय समन्वयक (तेल उद्योग), हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रबंधक सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि उज्ज्वला योजना के माध्यम से न केवल महिलाओं को स्वच्छ ईंधन का लाभ मिलेगा, बल्कि उनके श्रम, समय और स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी। यह पहल ग्रामीण जीवन में सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का नया अध्याय लिखेगी तथा नियद नेल्ला नार योजना के उद्देश्यों को गति प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लैलूंगा के भुईयांपानी में दीप महोत्सव कार्यक्रम में हुए शामिल
गुरुधाम में एक करोड़ रुपए की लागत से सर्वसुविधायुक्त भवन और महतारी सदन के लिए 29 लाख रुपए सहित कई घोषणाएं
रायपुर / शौर्यपथ / दीपावली के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज रायगढ़ जिले के लैलूंगा तहसील के ग्राम भुईयांपानी पहुँचे। यहाँ उन्होंने गुरुधाम में आयोजित दीप महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होकर अपने आराध्य संत गुरुदेव स्वामी धनपति पंडा जी एवं श्रीमती प्रेमशीला पंडा की प्रतिमाओं के समक्ष नमन कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दीपोत्सव हर घर में उजियारा और हर जीवन में सुख, समृद्धि, शांति एवं प्रेम का प्रकाश फैलाए। उन्होंने कहा कि गुरु का आशीर्वाद सदैव हम सब पर बना रहे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शिवमंदिर में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक किया तथा हनुमान मंदिर एवं वटवृक्ष की पूजा-अर्चना भी की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह संतों और प्रदेश की जनता का ही आशीर्वाद है कि एक किसान का बेटा मुख्यमंत्री बना है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल के 22 महीनों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी योजनाओं को धरातल पर उतारना उनकी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों के विकास के लिए राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और विकास के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है। धान खरीदी की सीमा 21 क्विंटल प्रति एकड़ कर दी गई है। धान का मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं। ई-गवर्नेंस प्रणाली की शुरुआत हो चुकी है और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। भूमिहीन मजदूर सहायता योजना, तेंदूपत्ता खरीदी 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा, रामलला दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना जैसी अनेक जनहितकारी योजनाएँ सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने गुरुधाम में एक करोड़ रुपए की लागत से सर्वसुविधायुक्त भवन का निर्माण, महतारी सदन के लिए 29 लाख रुपए के साथ ही गुरुधाम परिसर में हाईमास्ट लाइट की स्थापना, तालाब का सौंदर्यीकरण, बोर खनन एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए घोषणा की।
लोकसभा सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने उपस्थित सभी लोगों को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस संसार में गुरु से बढ़कर कोई नहीं है। गुरु ही वह प्रकाशस्तंभ हैं जो हमें अंधकारमय जीवन से निकालकर ज्ञान, अनुशासन और नैतिकता के पथ पर अग्रसर करते हैं। गुरु की प्रेरणा ही जीवन में सच्चा आनंद, आत्मिक शांति और सर्वाेच्च सुख प्रदान करती है। उनका मार्गदर्शन जीवन को अर्थपूर्ण बनाता है।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह, महापौर श्री जीवर्धन चौहान, संत सनातन धर्मदेवी संत समाज के अध्यक्ष श्री सहदेव पंडा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री दीपक सिदार, श्री सत्यानंद राठिया सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।
उच्च शिक्षा विभाग को कक्षाएं प्रारंभ करने की अनुमति
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में प्रावधानित 4 नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन महाविद्यालयों की स्थापना फरसाबहार (जिला-जशपुर), करडेगा (जिला-जशपुर), नगरनार (जिला-बस्तर) तथा किलेपाल (जिला-बस्तर) में की जाएगी।
मुख्यमंत्री की इस पहल से जशपुर एवं बस्तर जैसे जनजाति बहुल एवं भौगोलिक रूप से दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अब उनके इलाके में ही उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। दूरस्थ अंचलों की बेटियों और बेटों को अब कॉलेज की पढ़ाई के लिए अब अपने घरों से दूर अन्यत्र नही जाना पड़ेगा। उच्च शिक्षा की पहुंच हर इलाके में हो, इसके लिए राज्य सरकार शिक्षा के ढांचे को सुदृढ़ बना रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि शिक्षा ही प्रदेश के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है और सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि इन चारों महाविद्यालयों के लिए कुल 132 पदों (प्रति महाविद्यालय 33 पद) के सृजन की स्वीकृति के साथ ही कक्षाएं प्रारंभ करने की अनुमति भी राज्य शासन ने दे दी है। स्वीकृत पदों में प्राचार्य, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ाधिकारी, सहायक ग्रेड-1 एवं प्रयोगशाला कर्मी आदि शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री साय की इस पहल से आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं की शिक्षा, रोजगार एवं कौशल वृद्धि के अवसर बढ़ेंगे। प्रदेश में समान और संतुलित शैक्षणिक विकास को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को दीपपर्व की शुभकामनाएं देने बगिया में लगा रहा तांता ,मुख्यमंत्री ने सभी के सुख-समृद्धि की कामना की
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जशपुर स्थित गृह निवास बगिया में दीपावली के पावन पर्व पर शुभकामनाएं देने वालों का सिलसिला दिन भर जारी रहा। देर रात्रि तक जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने मुख्यमंत्री से भेंट कर दीपावली की शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी लोगों का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुख-समृद्धि की मंगलकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि दीपावली का पर्व, परस्पर सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जो समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें, जिससे कुम्हारों, कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल सके। उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल की भावना आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।‘
मुख्यमंत्री से भेंट के दौरान लोगों ने अपनी मांगें एवं समस्याएं भी उनके समक्ष रखी। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी निवेदनों को संज्ञान में लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को त्वरित और समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए। दीपावली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में चहुओर उत्साह का वातावरण रहा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
