August 17, 2026
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    रायपुर

    रायपुर (6089)

    रायपुर/शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली "वॉटर वुमन" के नाम से विख्यात शिप्रा पाठक ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने शिप्रा पाठक के पर्यावरण संरक्षण और विशेष रूप से सिंदूर पौधरोपण को जन-जन तक पहुंचाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने शिप्रा पाठक को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि शिप्रा पाठक ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए किए गए कार्यों के लिए व्यापक स्तर पर पहचान प्राप्त की है। उनके नेतृत्व में सिंदूर पौधरोपण अभियान ने न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया है, बल्कि आम लोगों को पेड़ लगाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित भी किया है।इस अवसर पर बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रोफेसर हरिशंकर सिंह भी उपस्थित थे।
      मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिप्रा पाठक के पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्य समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है और ऐसे प्रयासों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

     रायपुर /शौर्यपथ /प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और संतुलित बनाने की दिशा में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से बेहतर परिणाम मिले हैं। प्रदेश में युक्तियुक्तकरण के पूर्व कुल 453 विद्यालय शिक्षक विहीन थे। युक्तियुक्तकरण के पश्चात एक भी विद्यालय शिक्षक विहीन नहीं है। इसी प्रकार युक्तियुक्तकरण के पश्चात प्रदेश के 5936 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में से 4728 विद्यालयों में शिक्षकों की पदस्थापना की गई है जो कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक सार्थक कदम है, जिससे निःसंदेह उन विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा और अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिलेगा।
       बस्तर एवं सरगुजा संभाग के कुछ जिलों में शिक्षकों की कमी के कारण लगभग 1208 विद्यालय एकल शिक्षकीय रह गये हैं। निकट भविष्य में प्रधान पाठक एवं व्याख्याता की पदोन्नति तथा लगभग 5000 शिक्षकों की सीधी भर्ती के द्वारा शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में पूर्ति कर दी जावेगी, जिससे कोई भी विद्यालय एकल शिक्षकीय नहीं रहेगा तथा अन्य विद्यालयों में भी जहां शिक्षकों की कमी है, शिक्षकों की पूर्ति की जाएगी।
      युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया, शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में निहित प्रावधानों के तहत की गई है, प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक स्तर पर 2008 के सेटअप की प्रासंगिकता नहीं रह गई है। ऐसे अधिकारी-कर्मचारी जो किसी भी प्रकार की अनियमितता में संलिप्त पाये गये, उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई है।

    तीन दशकों बाद हुई शिक्षकों की कमी दूर
    रायपुर/शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू युक्तियुक्तकरण नीति से गांव के स्कूलों की रौनक बढ़ गई है। स्कूली बच्चे भी अब खुशी-खुशी स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से एकल शिक्षकीय शालाओं में अब दो-दो शिक्षकों की पदस्थापना से बच्चों की पढ़ाई अब बेहतर हो गई है। 3 दशकों से महासमुंद जिले के प्राथमिक शाला मुडियाडीह (पासीद) और प्राथमिक शाला नाँदबारू शाला एक शिक्षकीय थी।
    ग्रामीणों ने बताया कि तीन दशकों से इन विद्यालयों में एकमात्र शिक्षक के भरोसे शिक्षा व्यवस्था चल रही थी। सीमित संसाधनों और भारी जिम्मेदारियों के बावजूद शिक्षकगण पूरी निष्ठा से कार्य करते रहे, लेकिन कई शैक्षणिक गतिविधियाँ प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही थीं। प्राथमिक शाला मुडियाडीह (पासीद) और प्राथमिक शाला नाँदबारू, जो 1994-95 से एकल शिक्षक विद्यालय के रूप में संचालित हो रहे थे।
    सत्र 2024-25 में छत्तीसगढ़ शासन की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत इन विद्यालयों को पहली बार दो-दो शिक्षक मिले हैं। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि इन विद्यालयों के लिए शैक्षणिक परिवर्तन का सकारात्मक पल था। दूसरे शिक्षक के आने से बच्चों के चेहरे पर नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है। यहां पढ़ाई अब नियमित और व्यवस्थित हुई है। इसके अलावा खेलकूद, सांस्कृतिक, गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

    शासन की सख्त निगरानी में किसानों को खाद वितरण
    रायपुर/शौर्यपथ /खरीफ सीजन की तैयारी के तहत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य के किसानों को आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। विभिन्न जिलों में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और पोटाश जैसे प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण किया गया है तथा प्रशासन की सतत निगरानी में इनका वितरण भी किया जा रहा है।
    सरगुजा जिले से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक कुल 14,791 क्विंटल उर्वरकों का भंडारण किया गया है, जिसमें से 12,893 क्विंटल खाद किसानों को वितरित की जा चुकी है। शेष 1,898 क्विंटल खाद भंडारण में उपलब्ध है, जिसे किसानों की मांग के अनुरूप वितरित की जा रही है। यूरिया की 7,862 क्विंटल मात्रा में से 6,884 क्विंटल वितरण किया गया है और 978 क्विंटल शेष है। डीएपी का 1,276 क्विंटल भंडारण में था, जिसमें से 1,092 क्विंटल किसानों को प्रदान किया गया और 184 क्विंटल अभी भी उपलब्ध है। एनपीके की 4,066 क्विंटल मात्रा में से 3,815 क्विंटल का वितरण हो चुका है और 251 क्विंटल शेष है। एसएसपी के 811 क्विंटल में से 537 क्विंटल वितरित किए गए हैं तथा 274 क्विंटल शेष हैं। वहीं पोटाश की 776 क्विंटल मात्रा में से 565 क्विंटल का वितरण हो चुका है और 211 क्विंटल अब भी भंडारण में मौजूद हैं।
    सरगुजा जिले के कलेक्टर ने खाद वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसानों को समय पर, पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से खाद उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सहकारी समिति अथवा विक्रेताओं द्वारा अनावश्यक भंडारण या कालाबाजारी की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले के विभिन्न विकासखंडों में उर्वरक वितरण की निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो भंडारण केंद्रों और विक्रय समितियों का औचक निरीक्षण करेंगी। शासन का उद्देश्य है कि प्रदेश के सभी कृषकों को आवश्यक उर्वरक समयबद्ध और उचित दर पर उपलब्ध हों, जिससे खरीफ सीजन की बुआई और उत्पादन में कोई रुकावट न आए।

    स्कूलों को मिले नए शिक्षक, पढ़ाई में आई रफ्तार
    रायपुर/शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ शासन की युक्तियुक्तकरण नीति से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के तीन प्राथमिक शालाओं अमोदी, बस्ती पारा और डोभट्टी में वर्षों से एकल शिक्षक व्यवस्था के कारण बाधित हो रही पढ़ाई को अब नए शिक्षकों की नियुक्ति से नई दिशा मिल गई है। गांववासियों और प्रधानपाठकों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह पहल बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगी।
    इन स्कूलों में अब बच्चों की हँसी, किताबों की सरसराहट और शिक्षक की आवाज़ फिर से सुनाई देने लगी है। पहले जहां एक शिक्षक को ही सभी कक्षाओं का बोझ उठाना पड़ता था, अब दो-दो शिक्षकों की व्यवस्था से शिक्षण प्रक्रिया संतुलित और प्रभावी हो गई है।
    शिक्षकों की नियुक्ति बनी उम्मीद की किरण
    प्राथमिक शाला डोभट्टी के प्रधानपाठक श्री बंजारे बताते हैं, पहले अकेले सभी कक्षाओं को संभालना कठिन था। अब दूसरे शिक्षक की नियुक्ति से बच्चों को सही मार्गदर्शन मिल रहा है और उनकी पढ़ाई में रूचि भी बढ़ी है। अमोदी-बस्ती पारा प्राथमिक शाला के प्रधानपाठक श्री घनश्याम साहू ने बताया कि नए शिक्षक के आने से विद्यालय में ऊर्जा का संचार हुआ है। बच्चों के स्तर में सुधार हो रहा है और अभिभावक भी अब पढ़ाई को लेकर अधिक उत्साहित हैं।
    शिक्षा का केंद्र बनते जा रहे गांव के स्कूल
    अब ये स्कूल सिर्फ भवन नहीं, बल्कि गाँव के बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य की नींव बनते जा रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और अभिभावक भी शासन की इस पहल से संतुष्ट हैं।

    रायपुर /शौर्यपथ /राज्यपाल रमेन डेका ने प्रेस अधिकारी श्रीमती हर्षा पौराणिक और सहायक लेखाधिकारी श्री मनीष पाण्डेय के स्थानांतरण पर उन्हें नये दायित्वों तथा उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
      राज्यपाल ने कहा कि शासकीय सेवा के दौरान स्थानांतरण एक प्रक्रिया है जिससे हर शासकीय सेवक को गुजरना पड़ता है। जहां भी कार्य करें अपना सर्वश्रेष्ठ दें। शासकीय दायित्वों के साथ अपने परिवार को भी समय दें।
    राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर प्रसन्ना ने कहा कि आज सोशल मीडिया के दौर में जनसंपर्क का कार्य एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही राजभवन के लेखाजोखा का कार्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों अधिकारियों द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन कुशलता पूर्वक किया गया। उन्होंने नये दायित्वों के लिए दोनों को बधाई दी।
    इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, उप सचिव श्रीमती हिना अनिमेष नेताम सहित राजभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

    छत्तीसगढ़ वन विभाग का संकल्प परंपरागत ज्ञान और कानूनी अधिकारों के समन्वय से सतत वन प्रबंधन
     रायपुर /शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ वन विभाग ने अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों प्रकार के वन संसाधन अधिकारों की मान्यता एवं वितरण में देश के अग्रणी राज्यों में रहते हुए सक्रिय, सकारात्मक और सराहनीय भूमिका निभाई है। अब तक प्रदेश में 4,78,641 व्यक्तिगत अधिकार तथा 4,349 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं, जिससे कुल 20,06,224 हेक्टेयर क्षेत्र पर कानूनी अधिकार प्रदान कर लाखों वनवासी परिवारों को सशक्त बनाया गया है। यह उपलब्धि प्रदेश की प्रशासनिक प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और सतत विकास के प्रति दृढ़ निष्ठा का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
    वन विभाग द्वारा सीएफआरआर क्रियान्वयन के दौरान मॉड्यूल प्रबंधन योजनाओं और दिशा-निर्देशों के अभाव में फील्ड अधिकारियों को केवल एक परामर्श जारी किया गया था, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सामुदायिक प्रबंधन योजनाएं राष्ट्रीय वर्किंग प्लान कोड, 2023 से वैज्ञानिक रूप से समन्वित हों। इस परामर्श की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि बिना स्पष्ट ढांचे के फील्ड स्तर पर क्रियान्वयन में असंगति उत्पन्न हो रही थी, जिससे भविष्य में वनों की पारिस्थितिकी के क्षतिग्रस्त होने, स्वीकृत कार्य योजनाओं से टकराव और समुदाय तथा विभागीय विवाद जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका थी। कुछ संस्थाओं एवं ग्राम सभाओं द्वारा इसे अधिकार सीमित करने के प्रयास के रूप में देखा गया, जबकि वास्तव में विभाग का उद्देश्य केवल पारदर्शी, टिकाऊ और कानूनी रूप से मजबूत प्रबंधन की पूर्व तैयारी करना था।
    दिनांक 15.05.2025 को कार्यालय से जारी पत्र केवल एक अंतरिम प्रक्रिया-संबंधी व्यवस्था थी, जिसमें उल्लेख किया गया था कि मॉडल योजना जारी होने तक केवल स्वीकृत योजनाएं ही लागू की जाएं। इस पत्र में एक टंकण त्रुटि के कारण वन विभाग को ‘नोडल एजेंसी’ लिखा गया था, जबकि वास्तविक शब्द ‘समन्वयक’ था। इस त्रुटि को 23.06.2025 के परिपत्र से विधिवत सुधार दिया गया। उक्त पत्र तथा स्पष्टीकरण के कारण उत्पन्न भ्रम को दृष्टिगत रखते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार दोनों पत्रों को दिनांक 03.07.2025 को वापस ले लिया गया है।
    सीएफआरआर क्रियान्वयन को और सुदृढ़ बनाने हेतु छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को औपचारिक अनुरोध भेजे गए हैं, जिनमें अनुरोध किया गया है कि राष्ट्रीय वर्किंग प्लान कोड, 2023 के अनुरूप मॉडल सामुदायिक प्रबंधन योजनाएं तथा विस्तृत क्रियान्वयन दिशा-निर्देश जल्द से जल्द जारी किए जाएं एवं ग्राम सभा प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों के लिए समग्र प्रशिक्षण मॉड्यूल / हैंडबुक प्रकाशित की जाए।
    छत्तीसगढ़ वन विभाग यह स्पष्ट करता है कि सीएफआरआर का क्रियान्वयन प्रदेश में पूरी पारदर्शिता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं सहभागिता के साथ किया गया है तथा आगे भी परंपरागत ज्ञान को सम्मान देते हुए सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जाता रहेगा।

    रायपुर/शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम उनके रायपुर स्थित निवास कार्यालय में यादव समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। यह प्रतिनिधिमंडल विधायक  गजेंद्र यादव के नेतृत्व में पहुंचा था।
    मुख्यमंत्री  साय से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधियों के साथ समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने समाज की एकता, सहयोग और प्रगति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार समाज के विकास में हरसंभव मदद करेगी।
    इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल में  महापौर राजनांदगांव  मधुसूदन यादव तथा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से यादव समाज के पदाधिकारी माधव लाल यादव,  बोधन यादव, गुलेंद्र यादव ,  देवेंद्र यादव,  परमानंद यादव, जगमोहन लाल यादव, श्री खेमराज यादव आदि शामिल रहे।

      रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से  उनके निवास कार्यालय में पंथी नृत्य दल ने सौजन्य मुलाकात की। पंथी नृत्य दल के सदस्यों ने बताया कि वे 13 से 24 फरवरी 2025 तक मिस्र (इजिप्ट) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके है। मुख्यमंत्री साय ने पंथी नृत्य दल के सभी कलाकारों को अपने कला-प्रदर्शन के माध्यम से विदेश की धरती पर छत्तीसगढ़ की माटी की सुगंध बिखेरने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विधायक श्री खुशवंत सिंह साहेब उपस्थित थे।

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