August 09, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    “राम के नाम पर कब्ज़ा… और सुशासन के नाम पर मौन! दुर्ग निगम में ‘चयनात्मक बुलडोज़र नीति’ पर उठे सवाल”

         दुर्ग / शौर्यपथ / शहर की व्यस्ततम सड़क और सरकारी भूमि पर बने राम रसोई के कथित अवैध निर्माण ने अब दुर्ग नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आश्चर्य यह है कि यह अवैध कब्ज़ा न तो निगम के अतिक्रमण विभाग की नज़र में आता है और न ही महापौर श्रीमती अलका बाघमार एवं आयुक्त सुमित अग्रवाल की सक्रियता में कोई हलचल पैदा करता है—जबकि दोनों के पास इस अवैध निर्माण/अनिबंध की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध होने की पुष्टि जनप्रतिनिधियों और नागरिकों द्वारा की जा रही है।

    स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि—
    “क्या किसी बड़े लाभ या दबाव के कारण निगम प्रशासन इस अवैध निर्माण पर मौन साधे हुए है?”

    सुशासन की दुहाई, पर कार्रवाई का अभाव

    चुनाव के दौरान सुशासन लाने की बात कहकर जनता के सामने हाथ जोड़कर वोट मांगने वाली महापौर अलका बाघमार आज उसी सुशासन की रक्षा करने में कहीं दिखाई नहीं दे रहीं।
    वहीं आयुक्त सुमित अग्रवाल के विभाग पर आरोप है कि—

    गरीबों की ठेले-गुमटी पर तुरंत बुलडोज़र चल जाता है,पर सरकारी ज़मीन पर बने अवैध होटल पर कार्रवाई की फाइल तक नहीं हिलती।निगम के इस दोहरे रवैए ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर भारी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    भगवान राम के नाम पर होटल व्यापार और निगम की चुप्पी

    स्थानीय नागरिकों व व्यापारियों का कहना है कि “भगवान राम के नाम पर होटल व्यवसाय करने वालों का अवैध कब्ज़ा निगम प्रशासन के संरक्षण में फलफूल रहा है।”यह भी आरोप है कि सड़क और भूमि दोनों पर किए गए कब्ज़े से प्रतिदिन बड़े पैमाने पर यातायात प्रभावित होता है, पर निगम प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए है।

    सुशासन मंत्री की छवि पर भी असर

    नगरीय निकाय मंत्री व उपमुख्यमंत्री अरुण साव के सुशासन अभियान को भी दुर्ग निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। एक ओर मंत्री के जन्मदिन पर पोस्टर लगाने की होड़ लगी,
    वहीं दूसरी ओर उन्हीं मंत्री की सुशासन नीतियों को दुर्ग निगम के जिम्मेदार लोग पूरी तरह नकार रहे हैं।

    जनता कह रही—वायदे कागज़ों में, कार्रवाई कहीं नहीं

    दुर्ग निगम की वर्तमान स्थिति को लेकर जनता में गहरी नाराज़गी है। चुनावी वादे आज पूरी तरह बेमानी दिखाई दे रहे हैं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह सवाल लगातार उठ रहा है कि—
    “क्या दुर्ग में कानून केवल गरीबों पर ही लागू होता है?”

    निगम प्रशासन का यह मौन न सिर्फ सुशासन की अवधारणा पर चोट है बल्कि जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की निष्पक्षता और ईमानदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

    “दुनिया से मिलने का समय — जनता से नहीं।”

    दुर्ग / शौर्यपथ / जनता के समस्या-समाधान के लिए बने लगभग हर सरकारी द्वार पर आज आम नागरिकों को इंतज़ार, धक्का-मुक्की और निराशा ही हाथ लग रही है। दुर्ग निगम क्षेत्र के दो सबसे बड़े जिम्मेदार — महापौर श्रीमती अलका बाघमार और आयुक्त सुमित अग्रवाल — बड़े-बड़े कार्यक्रमों, संगठनों और आयुक्त मीटिंगों में व्यस्त दिखते हैं; वहीं जो लोग जीवन-यापन, सड़क-नालियों, स्वच्छता, कब्जा, पेंशन या राहत के लिए इन अधिकारियों से मिलने आते हैं, उन्हें महापुरुषों के कक्षों के सामने बस एक ही चीज़ देखने को मिलती है — इंतज़ार।
    नागरिकों के मुताबिक़ निगम कक्ष और महापौर कार्यालय के बाहर घंटों पापड़ बेलने के बावजूद भी मिलने का समय नहीं मिलता। शिकायतकर्ता, बुजुर्ग, माँ-बच्चे और छोटे व्यापारी—सब अपने मसलों के साथ प्रशासनिक दरवाज़ों पर भटकते हुए नजर आते हैं।

    क्या है समस्या — सीधे शब्दों में

    किसी तय ‘जनसुबिधा-समय’ (public hour) का अभाव: आयुक्त व महापौर द्वारा आम जनता से मिलने के लिए कोई सार्वजनिक, नियमित समय निर्धारित नहीं है।

    पहुँच आसान, पर मिलने का रास्ता मुश्किल: कुछ खास लोगों और पदाधिकारियों से मुलाकात सहजता से हो जाती है; सामान्य नागरिकों के लिए वही विभाग अक्सर ‘सुलभ’ नहीं बन पाते।

    शिकायतों का फ़ॉलो-अप गायब: शिकायत दर्ज कराने के बाद भी आवेदक को आगे की जानकारी या समाधान नहीं मिलता; बार-बार निगम चक्कर काटने की नौबत आती है।

    आचरण में पक्षपात के आरोप: शिकायतकर्ता कहते हैं कि मामलों में पक्षपात या अनियमित प्राथमिकता दिए जाने की छवि बन रही है — और यही प्रशासनिक भरोसे को चोट पहुंचा रहा है।

    धरातल पर असर — जनता की तकलीफें

    जो लोग सीधे मिलकर समस्याएँ बताना चाहते हैं, जैसे कि सड़क की दिक्कत, अवैध कब्जा, पेंशन का मुद्दा या सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी शिकायत — उन्हें कई बार लंबा इंतज़ार, अनदेखा किया जाना या प्राथमिकता न मिलना पड़ता है। इससे छोटे-व्यापारी, बुज़ुर्ग और कमजोर तबके के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। शहरी शासन पर विश्वास कम होना शुरू हो गया है — यही सबसे बड़ा प्रश्न है।

    प्रशासनिक जवाबदेही — क्या चाहिए?

    नागरिकों की लगातार बढ़ती नाराज़गी को देखते हुए कुछ त्वरित और व्यावहारिक सुझावः

    1. साप्ताहिक ‘जनसुनवाई-घंटे’ तय करें — उसी समय पर हर सप्ताह महापौर/आयुक्त आम नागरिक मिलें।
    2. ऑनलाइन अपॉइंटमेंट व ट्रैकिंग — शिकायत-रिकॉर्ड और फॉलो-अप के लिए डिजिटल सिस्टम (टोकन/अपॉइंटमेंट) सार्वजनिक करें।
    3. नोडल अधिकारी व शिकायत समाधान टीम — हर वार्ड के लिए जिम्मेदार अधिकारी/नोडल प्वाइंट घोषित हों।
    4. पारदर्शिता रिपोर्ट — हर महीने सार्वजनिक करें कि कितनी शिकायतें मिली, कितनी निस्तारित हुईं और किनसे निपटा गया।
    5. खुले दरवाज़े की नीति — ‘विशेष मुलाक़ात’ और ‘सार्वजनिक मुलाक़ात’ में स्पष्ट अंतर रखें; विशेष मुलाक़ात के निर्णय का रेकॉर्ड भी सार्वजनिक हो।

    “जब समय है बाहर कार्यक्रमों के लिए, पर जनता के लिए नहीं”

    नागरिकों का तर्क है कि महापौर और आयुक्त सार्वजनिक-कार्यक्रमों, बैठकों और निजी मुलाकातों में समय दे देते हैं पर वही समय सीधे मिलने के लिए जनता को नहीं मिल पाता। सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग अक्सर ‘सुलभता’ के वादे करते हैं — पर जमीन पर वह वादा खोखला दिखता है। यह कटाक्ष केवल नाराज़गी नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि अगर प्रशासन ने समयबद्धता और सार्वजनिक पहुँच सुनिश्चित नहीं की, तो जनता का भरोसा और घटेगा — और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

    दुर्ग के नागरिक आज भी उम्मीद करते हैं कि उनके चुने हुए जनप्रतिनिधि और सौंपे गए प्रशासक कम से कम मिलने का समय दें। महापौर अलका बाघमार और आयुक्त सुमित अग्रवाल के पास बड़े-बड़े एजेंडे और कार्यक्रम हों, यह स्वीकार्य है — पर जनता की आवाज़ सुनना और समस्याओं का समय पर निस्तारण करना ही सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रशासनिक व्यस्तता को जनता की पहुँच से ऊपर नहीं रखा जा सकता — वरना ‘सुलभ सरकार’ का नार बनकर रह जाएगा।

    दुर्ग / शौर्यपथ / सोमवार 25 नवंबर को दुर्ग जिले में तकनीकी विकास, प्रशासनिक निर्णय, सुरक्षा व्यवस्था, आगजनी, राजनीतिक गर्माहट और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अहम घटनाक्रम सामने आए। जिले में पूरे दिन एक के बाद एक घटनाएं चर्चाओं में रहीं। प्रस्तुत है दिनभर की प्रमुख गतिविधियों का संपूर्ण विशेष समाचार—

     दुर्ग में आईटी पार्क की शुरुआत — युवाओं के लिए बड़े अवसरों का दौर शुरू

    दुर्ग शहर के लिए गर्व की बात है कि तकनीकी नवाचार का नया अध्याय शुरू हो चुका है। जिले में प्रस्तावित आईटी पार्क में एआई आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यह पार्क डिजिटल प्रगति को गति देगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, प्रशिक्षण और स्टार्टअप के नए अवसर खोलेगा।
    विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी पार्क दुर्ग को मध्य भारत के प्रमुख तकनीकी केंद्रों में शामिल कर सकता है।

    धान खरीदी शुरू—150 में से 70 मिलर इस बार अपात्र, शासन के सामने नई चुनौती

    सहकारी समितियों की हड़ताल के बीच शासन ने तय समय पर धान खरीदी शुरू की, परन्तु दुर्ग में एक बड़ा बदलाव देखा गया।
    पिछले वर्ष 150 राइस मिलर धन उठाव के लिए पात्र थे, जबकि इस वर्ष केवल 80 मिलर्स को पात्रता मिली है।
    70 मिलर्स अपात्र पाए गए— इसका प्रमुख कारण यह है कि उन्होंने पिछले वर्ष का चावल एफसीआई में जमा नहीं किया।
    यह स्थिति अब शासन के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई है।

    अवैध कब्जे को हटाने पहुंची निगम टीम पर विवाद, मामला थाने पहुंचा

    भिलाई निगम की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान जोन-1 नेहरू नगर में महिला और निगम टीम के बीच विवाद हो गया।
    महिला का आरोप — बिना नोटिस कार्रवाई।
    निगम का आरोप — आबंटित भूमि से अधिक हिस्से पर अवैध निर्माण।
    दोनों पक्षों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई, फिलहाल एफआईआर नहीं, जांच जारी है।

    फोम फैक्ट्री में भीषण आग—6 दमकलों की मदद से नियंत्रण

    कुम्हारी के मुरमुंडा क्षेत्र स्थित फोम मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में अचानक भीषण आग लग गई।
    आग की लपटों से क्षेत्र के लोग घबरा गए और भारी भीड़ जमा हो गई।
    6 दमकलें पहुंचीं और आग पर काबू पाया गया।
    प्लांट के अंदर रखा सारा सामान जलकर खाक हो गया।
    फैक्ट्री मालिक व कर्मचारी मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लेते रहे।

    महिला पार्षद और बेटी पर मारपीट का आरोप — वीडियो वायरल

    भिलाई चरौदा में वार्ड की महिला पार्षद माया यादव और उनकी बेटी पर निवासी संध्या सिंह के साथ डंडों से मारपीट का आरोप लगा है।
    पुराने विवाद के चलते यह घटना होने का दावा।
    दोनों पक्षों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई।
    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल, पुलिस जांच में जुटी।

    तांत्रिक आरोपी थाने से फरार — तीन पुलिसकर्मी लाइन अटैच

    जामुल पुलिस द्वारा पकड़े गए तांत्रिक आरोपी हेमंत अग्रवाल के भिलाई-3 थाने से फरार होने पर एसएसपी ने बड़ी कार्रवाई की है।
    रोजनामचा में दर्ज नहीं, थाने के बाहर बैठा छोड़ दिया गया— ऐसी गंभीर लापरवाही सामने आई।
    तीन पुलिसकर्मी—

    प्रधान आरक्षक दिनेश कुमार,आरक्षक रत्नेश शुक्ला,आरक्षक चेतराम को लाइन अटैच कर दिया गया।

     गाइडलाइन शुल्क बढ़ोतरी के विरोध में हंगामा — भाजपा अध्यक्ष का वाहन रोका गया

    कलेक्ट्रेट के सामने जमीन व्यवसायियों का पंजीयन शुल्क बढ़ोतरी के विरोध में चल रहा प्रदर्शन सोमवार को अचानक गरमा गया।
    इसी दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के वाहन को प्रदर्शनकारियों ने रोकने की कोशिश की।
    भाजपा कार्यकर्ताओं और व्यापारियों में धक्का-मुक्की हुई।
    पुलिस की सक्रियता से स्थिति संभली।
    यह घटना पूरे दिन जिले और सोशल मीडिया पर चर्चा में रही।

    संस्थानों में आवारा कुत्तों से सुरक्षा कड़ी — सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर निगम सक्रिय

    सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में दुर्ग निगम ने विभिन्न संस्थानों में आवारा कुत्तों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं।
    नागरिकों, बच्चों और मरीजों की सुरक्षा के उद्देश्य से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    निगम ने आम जनता से स्वच्छता एवं जनहित में सहयोग की अपील की है।

    वार्ड 15 सिकोला बस्ती के सामाजिक भवन का शिक्षा मंत्री ने निरीक्षण किया

    दुर्ग नगर निगम के वार्ड 15 में निर्माणाधीन सामाजिक भवन का स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने निरीक्षण किया।
    उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता, प्रगति और उपयोगिता की समीक्षा की तथा अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण करने के निर्देश दिए।
    यह भवन क्षेत्र के लिए सांस्कृतिक, सामाजिक तथा सार्वजनिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा।

    धान खरीदी में तकनीकी सुधार से किसान खुश — तेज प्रक्रिया, बेहतर सुविधा

    राज्य में धान खरीदी के पहले ही दिन किसानों ने इस बार तेज प्रक्रिया और बेहतर सुविधा का अनुभव बताया।
    ग्राम जजगीर के किसान गौकरण साहू ने 139 क्विंटल धान बेचकर बताया कि—

    तुंहर टोकन तुंहर ऐप से घर में बैठकर टोकन मिल गया

    केंद्रों में बिजली, संचार और भंडारण की व्यवस्था बेहतर
    किसान लगातार शासन की नई तकनीकी व्यवस्थाओं से संतुष्टि जाहिर कर रहे हैं।

     समापन

    सोमवार को दुर्ग जिले में तकनीकी विकास, राजनीतिक टकराव, कानून-व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और कृषि प्रबंधन से जुड़े बड़े और महत्वपूर्ण घटनाक्रमों ने पूरे जिले को चर्चा में बनाए रखा।
    दुर्ग के आईटी पार्क की घोषणा जहां भविष्य की उम्मीद जगाती है, वहीं पुलिस लापरवाही, आगजनी और राजनीतिक हंगामे ने कई गंभीर सवाल भी खड़े किए।

    पोषण तत्वों के साथ ही रोजगार के अवसरों की दी जानकारी

    रायपुर / शौर्यपथ / एनआईएफ़टीईएम के छात्रों ने मोटे अनाज में पाए जाने वाले फ़ाइबर, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स के महत्व के साथ ही इनके नियमित उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी महिलाओं को मोटे अनाज आधारित उत्पादों से होने वाली आमदनी और बाज़ार संभावनाओं के बारे में भी बताया गया।

    प्रशिक्षण में स्व-सहायता समूह की 25 महिलाओं की रही सहभागिता
    हरियाणा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट द्वारा महुआ पर स्थापित सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस में विगत दिवस मोटे अनाज के पोषण तत्वों और इनके उपयोग से बेकरी उत्पाद बनाने संबंधी हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग आयोजित की गई। इस प्रशिक्षण में स्व सहायता समूह की 25 महिलाओं ने सहभागिता की।

    मोटे अनाज का उपयोग बढ़ाकर पोषण स्तर में करना है वृद्धि
    कार्यक्रम का उद्देश्य नान खटाई, न्यूट्रीबार, कुकीज़ जैसे बेकरी आइटम्स में मोटे अनाज का उपयोग बढ़ाकर इनके पोषण स्तर में वृद्धि करना और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। यह प्रशिक्षण जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

    स्थानीय समुदायों को खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता से है जोड़ना
    जशपुर में एनआईएफ़टीईएम टीम वैल्यू-एडेड फ़ूड प्रोडक्ट्स के उत्पादन के साथ-साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। यह पूरी पहल स्थानीय समुदायों को खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ग्राम अंगीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत की जा रही है। इस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. प्रसन्ना कुमार जी.वी. और अभिमन्यु गौर कर रहे हैं, जबकि यह कार्यक्रम एनआईएफ़टीईएम के डायरेक्टर डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय के निर्देशन में संचालित हो रहा है। कार्यक्रम के संचालन और विभिन्न गतिविधियों के समन्वय में मिशन मैनेजर श्री विजय शरण प्रसाद और जय जंगल एफपीसी जशपुर के डायरेक्टर समर्थ जैन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    दैनिक शौर्यपथ महासमुन्द ब्यूरो संतराम कुर्रे

    महासमुंद / शौर्यपथ / राज्य शासन के निर्देशानुसार धान खरीदी प्रणाली को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किए जाने हेतु इस वर्ष टोकन जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक सरल तथा किसान हितैषी बनाया गया है। किसानों की सुविधा के लिए नवीन टोकन व्यवस्था लागू करते हुए निर्धारित पात्रता के आधार पर टोकन जारी किए जा रहे हैं।
    शासन द्वारा जारी व्यवस्था के अनुसार 2 एकड़ तक भूमि वाले किसानों को अधिकतम 1 टोकन, 2 से 10 एकड़ तक के कृषकों को अधिकतम 2 टोकन तथा 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को अधिकतम 3 टोकन की पात्रता निर्धारित की गई है।
    किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने टोकन तुहर ऐप की सुविधा उपलब्ध कराई है। इसके माध्यम से कुल उपलब्ध टोकनों में से 80 प्रतिशत टोकन लघु एवं सीमांत किसानों के लिए तथा 20 प्रतिशत टोकन दीर्घ किसानों के लिए आरक्षित किए गए हैं। किसान अपनी सुविधानुसार ऐप में लॉगिन कर निर्धारित मानदंडों के अनुसार टोकन प्राप्त कर सकते हैं।
    किसानों द्वारा आवेदन करने की तिथि से अगले सात खरीदी दिवस तक का टोकन जारी किया जा सकता है।
    समितियों के माध्यम से टोकन वितरण रविवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन प्रातः 9:30 बजे से सायं 5:00 बजे तक किया जा रहा है। वहीं टोकन तुहर ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन प्राप्त करने की सुविधा प्रतिदिन प्रातः 8:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक उपलब्ध है।
    जिला प्रशासन ने किसानों से अपील किया है कि वे नवीन टोकन व्यवस्था का लाभ उठाते हुए अपने निर्धारित समय में ही धान लेकर खरीदी केंद्र पहुंचे। शासन-प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं, जिससे खरीदी प्रक्रिया सुचारू, पारदर्शी और किसानों के हित में संचालित हो।

    ब्यूरो प्रमुख संतराम कुर्रे

    महासमुन्द / शौर्यपथ / शहीद भगत सिंह खेल मैदान में चल रहे पिथौरा प्रीमियम लीग के सेमीफाइनल मैच का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष स्वप्निल तिवारी अध्यक्षता कर रहे संघ के संरक्षक पवन गुप्ता विशेष अतिथि परमित सिंह निशु माटा ऋषिकेश शुक्ला राजेश मिश्रा विजय गुप्ता मनराखन ठाकुर राजेश बंसल नानू सोनी ने खिलाड़ियो का परिचय प्राप्त कर सेमीफाइनल मैच का शुभारंभ किया।
    उपस्थित खिलाड़ियो एवं दर्शकों को संबोधित करते हुवे मुख्य अतिथि के आसंदी से श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष स्वप्निल तिवारी ने कहा कि पिथौरा का नाम खेल आयोजनो के लिये प्रदेश भर में जाना जाता है समय समय पर आयोजित होने वाले ऐसे खेल आयोजन पिथौरा क्षेत्र के खेल प्रतिभाओ को आगे लाने मिल का पत्थर साबित हो रहे है जिसका परिणाम है कि प्रदेश स्तर पर हमारे क्षेत्र के खिलाड़ियो का चयन हो रहा है ऐसे आयोजनों के लिये आयोजकों की मेहनत और लगन सराहनीय है।
    इस अवसर पर आयोजन समिति के कौशलदास मानिकपुरी नवीन साहू सुनील यादव मोहम्मद कलीम मोहम्मद असलम सैलेन्द्र सिन्हा कुशल यादव राहुल चौधरी जय साहू विकास डड़सेना बाबू रौतिया भीमा रौतिया हर्ष पटेल मुख्य रूप सें उपस्थित थे।

    केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने NCB और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम को दी बधाई

    नई दिल्ली / एजेंसी (पीआईबी ) केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन “Crystal Fortress” के तहत मेगा ट्रांस-नेशनल मेथामफेटामाइन कार्टेल के भंडाफोड़ के लिए NCB और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम को बधाई दी। X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार बहुत तेज़ी से ड्रग कार्टेल को खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स की जांच के लिए Top-to-bottom और bottom-to-top अप्रोच को सख्ती से अपनाते हुए, नई दिल्ली में ₹262 करोड़ कीमत का 328 kg मेथामफेटामाइन की ज़ब्ती और दो लोगों को गिरफ्तारी से एक बड़ी कामयाबी मिली।
    श्री शाह ने कहा कि यह ऑपरेशन प्रधानमंत्री मोदी के नशामुक्त भारत के विज़न की दिशा में कई एजेंसियों के बीच सीमलैस तालमेल का एक शानदार उदाहरण था। NCB और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम को बधाई।
    एक बड़ी कामयाबी में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (OPS ब्रांच) ने स्पेशल सेल (CI) दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर 20.11.2025 को ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस के तहत छतरपुर, दिल्ली के एक घर से करीब 328 किलोग्राम हाई-क्वालिटी मेथामफेटामाइन ज़ब्त कर एक ट्रांस-नेशनल ट्रैफिकिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस एक समन्वित और इंटेलिजेंस-ड्रिवन अभियान था जो सिंथेटिक ड्रग की अधिक मात्रा वाले नेटवर्क को टारगेट कर रहा था।
    यह अहम कार्रवाई पिछले कुछ महीनों से खुफिया जानकारी और तकनीकी इंटरसेप्ट्स के आधार पर लगातार की जा रही जांच का नतीजा है, जिससे एक ट्रैफिकिंग चेन का पता चला और यह बड़ी कामयाबी मिली।
    पकड़े गए दो लोगों, जिनमें नागालैंड की एक महिला भी शामिल है और जिसके घर से बड़ी मात्रा में ज़ब्ती की गई थी, को नागालैंड पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा, दूसरे लोगों की पहचान भी हो गई है। इनमें विदेश से काम करने वाला गिरोह का सरगना भी शामिल है। वह पिछले साल दिल्ली में NCB द्वारा 82.5 किलोग्राम हाई-ग्रेड कोकीन ज़ब्ती के मामले में भी वांछित है। इंटरनेशनल एनफोर्समेंट पार्टनर्स के साथ मिलकर, उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
    यह दिल्ली में मेथमफेटामाइन की सबसे बड़ी ज़ब्ती में से एक है। शुरुआती जांच से पता चला है कि यह कार्टेल कई कूरियर, सेफ-हाउस और लेयर्ड हैंडलर के ज़रिए काम कर रहा था और दिल्ली को भारत और विदेशी बाज़ार में इसके डिस्ट्रीब्यूशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
    ऑपरेशन “क्रिस्टल फोर्ट्रेस” सिंथेटिक ड्रग कार्टेल और उनके ट्रांस-नेशनल नेटवर्क को खत्म करने के प्रति NCB की प्रतिबद्धता को दिखाता है। ड्रग ट्रैफिकिंग से लड़ने के लिए, देशवासी NCB की मदद करें। कोई भी व्यक्ति MANAS- नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर-1933 पर कॉल कर नशीले पदार्थों की बिक्री से जुड़ी जानकारी शेयर कर सकता है।

       रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को स्कूलों के आसपास आवारा कुत्तों और मवेशियों की निगरानी का जिम्मा सौंपे जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे शिक्षकों का अपमान बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है, वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत बच्चों की सुरक्षा और मध्यान भोजन की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
    दरअसल, छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय ने हाल ही में एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत स्कूलों के प्राचार्य अथवा संस्था प्रमुख को “नोडल अधिकारी” नियुक्त किया गया है। इन नोडल अधिकारियों को स्कूल परिसर या आसपास घूमने वाले आवारा कुत्तों और मवेशियों की जानकारी स्थानीय निकायों — ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम — को देने की जिम्मेदारी दी गई है।
    यह आदेश बलौदा बाजार के एक स्कूल में हुई घटना के बाद जारी हुआ, जहां एक कुत्ते ने मध्यान भोजन को जूठा कर दिया था। इस मामले में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार पर जुर्माना लगाया था और प्रत्येक छात्र को क्षतिपूर्ति राशि देने का निर्देश दिया था। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि “सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ही यह कदम उठाया गया है ताकि भविष्य में बच्चों के भोजन की स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।”
    वहीं इस आदेश को लेकर शिक्षकों में नाराजगी है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि उन्हें पहले ही कई गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल किया जाता है, ऐसे में इस नए कार्य से पढ़ाई पर ध्यान देना और कठिन हो जाएगा। कुछ शिक्षकों ने व्यंग्य करते हुए कहा, “अब हम पढ़ाएं या कुत्ते गिनें?”
    राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “गुरुजी बच्चों को पढ़ाएं या कुत्तों को भगाएं? यह आदेश शिक्षकों का सार्वजनिक अपमान है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर अफसरशाही हावी है और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है।
    वहीं, इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरण दास महंत ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि, “अगर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है तो उस पर टिप्पणी नहीं की जा सकती, लेकिन शिक्षकों पर लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों का दबाव बढ़ने से शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है।”
    फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक निर्देश से शुरू होकर अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। शिक्षक संगठनों ने आदेश रद्द करने की मांग की है, वहीं सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपने रुख पर कायम है।

       दुर्ग / शौर्यपथ / वर्ष के अंतिम महीनों में अपराध नियंत्रण को लेकर दुर्ग पुलिस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में शनिवार, 23 नवंबर को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने पुलिस कंट्रोल रूम, सेक्टर-6 भिलाई में जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों की अपराध समीक्षा बैठक ली। बैठक में लंबित प्रकरणों के शीघ्र और प्रभावी निराकरण पर विशेष जोर दिया गया।
    एसएसपी अग्रवाल ने निर्देश दिए कि सभी जांच अधिकारी लंबित मामलों में पर्याप्त और ठोस साक्ष्य एकत्र करें ताकि केस को अदालत में मजबूती दी जा सके। उन्होंने कहा कि हर प्रकरण का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता का पुलिस पर विश्वास और अधिक मजबूत हो।
    बैठक के दौरान एसएसपी ने निगरानी एवं गुण्डा बदमाशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने, अवैध कार्यों में लिप्त आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा सक्रिय चाकूबाजों और नशेड़ियों को सूचीबद्ध कर उनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को कायम रखना पुलिस का सर्वोच्च दायित्व है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
    इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) सुखनंदन राठौर, एएसपी (ग्रामीण) अभिषेक झा, एएसपी (IUCAW) पद्मश्री तंवर, एसडीओपी धमधा एलेक्ज़ेंडर किरो, एसडीओपी पाटन अनूप लकड़ा, डीएसपी आकर्षि कश्यप सहित जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारी उपस्थित रहे।
    पुलिस विभाग के मुताबिक, अपराध नियंत्रण की दिशा में ठोस नीतियों और समय-समय पर आयोजित होने वाली ऐसी समीक्षा बैठकों से जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

        दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग (PSC) के परीक्षा परिणाम में दुर्ग जिले के प्रतिभागियों ने शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम गौरवान्वित किया है। इसी उपलक्ष्य में शनिवार को पुलिस कंट्रोल रूम स्थित कार्यालय में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) विजय अग्रवाल ने चयनित अभ्यर्थियों का सम्मान किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
    कार्यक्रम में SSP अग्रवाल ने सभी सफल प्रतिभागियों को पुष्पगुच्छ और दुर्ग पुलिस की ओर से मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोकसेवा आयोग से चयनित पद अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण होते हैं, इसलिए कार्य के दौरान हमेशा जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए अभ्यर्थियों को करियर में सफलता के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
    दुर्ग जिले से डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित हुए प्रतिभागियों में देवेश साहू (प्रथम रैंक), स्वप्निल वर्मा (द्वितीय रैंक) और यशवंत देवांगन (तृतीय रैंक) शामिल हैं। इसके अलावा राजेश साहू (DSP), कनक प्रभा सिंह (सहायक संचालक, समाज कल्याण विभाग), खुशबू जानी (लेखा अधिकारी), भूपेंद्र जंघेल (वाणिज्य कर निरीक्षक), तथा प्रवीण, मिथिलेश नेताम और आनंद स्वर्णकार (आबकारी उप निरीक्षक) पदों पर चयनित हुए हैं।
    इस सम्मान समारोह में एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर, एएसपी ग्रामीण अभिषेक झा, एएसपी IUCW पद्मश्री तंवर, एसडीओपी पाटन अनूप लकड़ा, एसडीओपी धमधा अलेक्जेंडर किरो, डीएसपी आकर्षी कश्यप, रक्षित निरीक्षक नीलकंठ वर्मा सहित अनेक पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। दुर्ग के इन प्रतिभाशाली युवाओं की सफलता ने पूरे जिले में गर्व और प्रेरणा का माहौल बना दिया है।

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