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एनआईटी रायपुर के सामने बनी दुकानों और यूथ हब को हटाने पहुंचा प्रशासन
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बताया युवाओं के साथ अन्याय
रायपुर। शौर्यपथ। राजधानी रायपुर में एनआईटी के सामने बने ‘यूथ हब’ को हटाने की कार्रवाई को लेकर शनिवार को राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आया। प्रशासन के आदेश पर सुबह से ही क्रेन और बुलडोजर के साथ अमला मौके पर पहुंचा और हटाने की कार्रवाई शुरू की। इसी बीच कांग्रेस नेताओं ने इसे जनविरोधी कदम बताते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया।पूर्व विधायक विकास उपाध्याय शुक्रवार रात से ही व्यापारियों और युवाओं के साथ धरने पर डटे रहे।
देर रात से शुरू हुआ यह विरोध शनिवार सुबह भी जारी रहा। उपाध्याय ने कहा कि भाजपा सरकार गरीबों की दुकानों को उजाड़ रही है और युवाओं से उनकी सुविधाएँ छीन रही है।इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि "छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार हर चीज अडानी को सौंपने में लगी है और अब रायपुर के यूथ हब को उजाड़ रही है।
"वहीं, प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और प्रभावित लोगों को पूर्व सूचना दी गई थी। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार रायपुर की सांस्कृतिक और युवाओं की पहचान को मिटाने का काम कर रही है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा धान का समर्थन मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का निर्णय किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर आया है। इसका सकारात्मक प्रभाव जिलेभर के किसानों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा है।
अंबागढ़ चौकी विकासखण्ड के ग्राम कलकसा के किसान श्री धनेश राम आज कौड़ीकसा उपार्जन केंद्र में 52 क्विंटल धान विक्रय के लिए पहुंचे थे। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि इस वर्ष उन्होंने धान विक्रय टोकन स्वयं मोबाइल ऐप के माध्यम से प्राप्त किया, जिससे प्रक्रिया आसान और सुविधाजनक हो गई।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार लागू किए गए इस डिजिटल नवाचार ने किसानों के लिए धान विक्रय की पारंपरिक जटिलताओं को काफी कम कर दिया है। अब किसान अपने मोबाइल फोन पर कुछ ही मिनटों में धान विक्रय के लिए टोकन काट सकते हैं और निर्धारित समय पर उपार्जन केंद्र पहुंचकर बिना किसी बाधा के अपना धान बेच सकते हैं।
कृषक श्री धनेश राम ने बताया कि उपार्जन केंद्र में कर्मचारियों का व्यवहार सहयोगपूर्ण था, तौल-कांटे सही थे, बारदाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध था तथा साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर थी। इसके कारण किसान निश्चिंत होकर अपनी उपज बेच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष उनकी फसल की पैदावार भी अच्छी हुई है, जिससे परिवार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने धान का उचित मूल्य उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
रायपुर, / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राज्यभर के सभी धान खरीदी केंद्रों में खरीदी प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित रूप से जारी है। इसी क्रम में आज जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम नारायणपुर धान खरीदी केंद्र में किसान राजकुमार भगत अपने धान की बिक्री के लिए पहुँचे। उन्होंने बताया कि उनका ऑनलाइन टोकन आसानी से कट गया और उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।
राजकुमार भगत ने कहा कि वे हर वर्ष इसी केंद्र में धान बेचते हैं और इस बार भी सभी व्यवस्थाएँ बेहद सुव्यवस्थित हैं। उन्होंने खरीदी केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं जैसे—ऑनलाइन टोकन जारी व्यवस्था, माइक्रो एटीएम, पर्याप्त बारदाना, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर संतोष प्रकट किया।प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी प्रबंध किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक किसान को धान खरीदी की प्रक्रिया सहज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो। इसके लिए प्रशासनिक टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
क्या है माइक्रो एटीएम सुविधा?
धान उपार्जन केंद्रों में किसानों की त्वरित जरूरतों को पूरा करने हेतु छत्तीसगढ़ सरकार ने माइक्रो एटीएम सुविधा उपलब्ध कराई है। इस सुविधा के माध्यम से किसान 2,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की राशि तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की इस पहल से किसानों को बैंक की शाखाओं में लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं पड़ती, और धान बेचने के तुरंत बाद आवश्यक राशि आसानी से मिल जाती है।
यह सुविधा किसानों की तत्काल आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में अत्यंत मददगार साबित हो रही है और संपूर्ण धान खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुविधाजनक, सुगम एवं किसान-फ्रेंडली बना रही है।
रायपुर / शौर्यपथ / आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी के निर्देशन में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर के तत्वाधान में भारत सरकार की महत्वपूर्ण पहल “सर्कुलर ईकोनॉमी एवं वेस्ट मैनेजमेंट (Waste to Wealth)” विषय पर बिलासपुर संभाग के लिए एक दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम प्लेनेटेरियम, व्यापार विहार, बिलासपुर में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल के सदस्य सचिव श्री आर. अगसिमनी ने की।
कार्यक्रम की रूपरेखा वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. सुरेश चंद ने प्रस्तुत की, वहीं स्वागत उद्बोधन क्षेत्रीय अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव द्वारा दिया गया। कार्यशाला में सर्कुलर ईकोनॉमी व वेस्ट मैनेजमेंट के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की गई। मंडल मुख्यालय रायपुर के मुख्य रसायनज्ञ श्री राजेन्द्र प्रसाद वासुदेव ने उद्योग प्रतिनिधियों को वेस्ट टू वेल्थ, ईपीआर (Extended Producer Responsibility) एवं इससे मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल बिलासपुर के मुख्य रसायनज्ञ श्री सूरज कुमार धुर्वे ने फ्लाई ऐश मैनेजमेंट तथा MOEF की अधिसूचनाओं एवं दिशानिर्देशों पर उपयोगी जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उद्योग प्रतिनिधि, ई-वेस्ट, बैटरी वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट, टायर वेस्ट व यूज़्ड ऑयल रिसायकलर उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ में स्थापित एकमात्र टीएसडीएफ मेसर्स केसदा वेस्ट मैनेजमेंट द्वारा AFR तकनीक की जानकारी दी गई। श्री राहुल झा ने ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग एवं क्रिटिकल मिनरल रिकवरी पर प्रस्तुति दी।
एनटीपीसी सीपत, बिलासपुर के श्री पंकज शर्मा तथा एनटीपीसी लारा, रायगढ़ के डॉ. सुधीर दहिया ने फ्लाई ऐश के पर्यावरण-अनुकूल उपयोग के उदाहरण और उपलब्धियों को साझा किया। कार्यशाला के समापन अवसर पर सदस्य सचिव श्री आर. अगसिमनी ने उद्योगों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की और आश्वस्त किया कि मंडल सर्कुलर ईकोनॉमी व ईपीआर से संबंधित औद्योगिक आवेदनों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करेगा, जिससे उद्योगों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज देश में चार श्रम संहिताओं के ऐतिहासिक क्रियान्वयन पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रम सुधारों का यह महत्वपूर्ण निर्णय देश के 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों के अधिकार, सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की एक अभूतपूर्व गारंटी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का दिन भारत के श्रम क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है। चारों श्रम संहिताओं के लागू होने से न्यूनतम वेतन का अधिकार, महिलाओं को समान वेतन का प्रावधान, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, प्रत्येक श्रमिक के लिए सामाजिक सुरक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा और ओवरटाइम पर डबल वेतन जैसी व्यवस्थाएँ पूरे देश में सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से न केवल श्रमिक वर्ग को लाभ मिलेगा, बल्कि औद्योगिक वातावरण अधिक पारदर्शी, संतुलित और श्रमिक-हितैषी होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जिस समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया है, श्रम संहिताओं का लागू होना उस दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने कहा कि भारत की कार्यशील जनसंख्या राष्ट्र की उत्पादन शक्ति और आर्थिक समृद्धि की आधारशिला है, और उनके अधिकारों का संरक्षण किसी भी सशक्त राष्ट्र की प्राथमिकता है। यह संहिताएँ देश की श्रम शक्ति को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण प्रदान करेंगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले इस निर्णय के लिए वह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के प्रति आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुधार नई अर्थव्यवस्था, बेहतर औद्योगिक संबंधों और मजबूत श्रम बाजार का आधार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से देशभर में रोजगार, उत्पादन, निवेश और औद्योगिक विकास की गति और अधिक मजबूत होगी, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित “छत्तीसगढ़ 25 साल बेमिसाल” कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने राज्य की 25 वर्ष की स्वर्णिम विकास यात्रा पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि छत्तीसगढ़ की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने बस्तर सहित पूरे प्रदेश में विकास में बाधक नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। सुरक्षा कैंप स्थापित किए जाने से सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की पहुंच सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में किए जा रहे प्रयासों से नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अपने मूल स्वरूप में भयमुक्त होकर प्रदेश के विकास में बेहतर भागीदारी देगा। श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से बस्तर की संस्कृति और प्रतिभा को दुनिया ने देखा है। बस्तर में शांति, समृद्धि और खुशहाली के नए युग का आरंभ हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति पूरी दृढ़ता से लागू है। पूर्व में जो अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुए, उस पर कड़ा प्रहार किया गया है, जिसका परिणाम भी सभी देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने भूखमरी जैसे अभिशाप को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए थे, जिसके तहत गरीब परिवारों को अनाज उपलब्ध कराया गया। साथ ही, जरूरतमंद परिवारों को आज आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के सुशासन के सपनों को साकार करने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की लगभग सभी गारंटियों को पूरा कर दिया गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण ‘चरण पादुका योजना’ को भी पुनः प्रारंभ किया गया है।
मुख्यमंत्री ने नई उद्योग नीति के आकर्षक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अब तक राज्य सरकार को पौने आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास में योगदान देने वाले विभिन्न संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री अलोक सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) परीक्षा-2024 में सफलता प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि युवा शक्ति की कड़ी मेहनत, अनुशासन, निरंतर तैयारी और समर्पित प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को प्रदेश की सेवा में एक नई शुरुआत के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी ने हमेशा उत्कृष्टता, साहस और लगन का परिचय दिया है। इस परीक्षा में सफल हुए सभी प्रतिभागियों ने अपने धैर्य और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता से यह सिद्ध किया है कि प्रदेश की नई पीढ़ी प्रशासनिक सेवाओं में एक सशक्त स्थान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि निरंतर मेहनत और दृढ़ निश्चय से प्राप्त यह सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि ये नवचयनित अधिकारी सुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन की नई ऊँचाइयों को स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को जनोन्मुखी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, और इन नई नियुक्तियों से शासन-प्रशासन में नई ऊर्जा का संचार होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी युवा अधिकारी छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, सामाजिक न्याय, गरीबी उन्मूलन, महिला-शिक्षा सशक्तिकरण और ग्रामीण उन्नति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि इन सफल प्रतिभागियों की उपलब्धि प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने कहा कि यह सफलता संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और अनुशासन के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे निरंतर सीखते रहें, स्वयं को बेहतर बनाते रहें और जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं।
मुख्यमंत्री ने सभी सफल अभ्यर्थियों को उज्ज्वल, सुखद एवं सफल जीवन की मंगलकामनाएँ देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार उनके साथ है और हर स्तर पर एक संवेदनशील, पारदर्शी और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने में उनका सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
रायपुर/ शौर्यपथ /
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान उपार्जन को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किया गया तुंहर टोकन मोबाइल ऐप किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। धान खरीदी तिहार के बीच इस डिजिटल नवाचार ने उपार्जन केंद्रों में लगने वाली भीड़, समय की बर्बादी और पारंपरिक जटिलताओं को काफी हद तक कम कर दिया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में लागू की गई इस व्यवस्था से किसान अब अपने मोबाइल से कुछ ही मिनटों में धान विक्रय हेतु टोकन निकाल पा रहे हैं और निर्धारित समय पर आसानी से केंद्र पहुंचकर धान बेच रहे हैं।
शुक्रवार को 52 किसानों ने मोबाइल से काटा टोकन
अम्बिकापुर जिले के उपार्जन केंद्रों में शुक्रवार को 52 किसानों ने तुंहर टोकन ऐप का उपयोग कर घर बैठे धान का टोकन काटा। बढ़ती लोकप्रियता यह दर्शाती है कि डिजिटल सुविधा ने किसानों का विश्वास तेजी से जीता है।
अम्बिकापुर विकासखंड के आदिमजाति सेवा सहकारी समिति मेड्राकला में पहुंचने वाले ग्राम भिट्ठीकला के कृषक श्री श्याम राजवाड़े और श्री मिलन राम ने बताया कि मोबाइल ऐप से टोकन काटने के बाद केंद्र में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
श्री श्याम राजवाड़े ने कहा कि उन्होंने 26 क्विंटल धान का टोकन कुछ ही मिनटों में घर बैठे निकाल लिया। पूर्व में केंद्र में जाकर टोकन लेने में समय और श्रम दोनों लगते थे, पर अब आते ही बारदाना मिला और धान की तौल भी तत्काल हो गई। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य देने के निर्णय की सराहना की।
इसी तरह किसान श्री मिलन राम ने बताया कि उन्होंने 62 क्विंटल धान का टोकन मोबाइल ऐप से काटा। बार-बार केंद्र नहीं आना पड़ा और पहुंचते ही बारदाना व तौल की प्रक्रिया बिना किसी बाधा पूरी हुई। उन्होंने कहा कि इस बार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह किसान-मित्र साबित हो रही है।
डिजिटल नवाचार से बढ़ी पारदर्शिता और सुविधा
तुंहर टोकन ऐप के जरिए किसानों को अब लंबी लाइनों से मुक्ति,समय और श्रम की बचत,टोकन प्रक्रिया में पारदर्शिता,भीड़-भाड़ और अव्यवस्था में कमी
जैसे सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। किसानों की संतुष्टि यह साबित करती है कि राज्य सरकार की यह डिजिटल पहल सफल रही है और धान विक्रय को अधिक सरल, तेज और भरोसेमंद बनाकर किसानों को बड़ी राहत दी है।
रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेशभर की तरह धमतरी जिले में भी खरीफ उपार्जन वर्ष 2025-26 की शुरुआत 15 नवंबर से सुचारू रूप से हो चुकी है। खरीदी केंद्रों में जहाँ किसानों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता दिखाई दे रही है, वहीं गांवों में श्रमिक परिवारों के बीच भी खुशी का माहौल है। धान खरीदी से जुड़े कार्यों ने ग्रामीण श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के लिए रोजगार एवं अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ा दिए हैं, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था में नई जान आई है।
संबलपुर गांव के खरीदी केंद्र में काम कर रहीं ईश्वरी यादव और विद्या मरकाम जैसी महिलाएँ इस बदलाव का सशक्त उदाहरण हैं। धान के कट्टों की सिलाई और भराई में व्यस्त ये महिलाएँ बताती हैं कि खरीफ सीजन उनके लिए उम्मीद और आत्मनिर्भरता का समय बन गया है। गांव की 5-6 महिलाएँ मिलकर प्रतिदिन 400 से 500 कट्टे तैयार करती हैं, जिससे प्रत्येक महिला को सीजन के दौरान लगभग 20 से 22 हजार रुपये की आय हो जाती है। यह राशि उनके परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहारा साबित होती है।
इन महिलाओं का कहना है कि पहले उन्हें मजदूरी के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब धान खरीदी केंद्रों में मिल रहा स्थानीय कार्य उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध करा रहा है। भुगतान समय पर होता है और कार्य के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे उनमें आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
धान खरीदी प्रक्रिया किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ हमालों, परिवहनकर्ताओं, तौलदारों, डेटा-एंट्री ऑपरेटरों और सहायक कर्मचारियों के लिए भी व्यापक रोजगार सृजित करती है। सुगम व्यवस्था और पारदर्शी प्रक्रिया ने इस सीजन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बना दिया है।
सरकार द्वारा समय पर समर्थन मूल्य भुगतान, सुरक्षित भंडारण व्यवस्था और खरीदी केंद्रों में बेहतर प्रबंधन ने ग्रामीण जनता के भरोसे को और मजबूत किया है। खरीफ उपार्जन 2025-26 न केवल कृषि उत्पादन का महत्वपूर्ण चरण है, बल्कि यह महिलाओं को रोजगार से जोड़कर, गांवों को सशक्त बनाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला प्रेरक माध्यम भी बनकर उभरा है।
रायपुर / शौर्यपथ / वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित कोपरा जलाशय को राज्य सरकार ने प्रस्तावित रामसर स्थल घोषित करने की दिशा में बड़ी पहल की है। प्राकृतिक और मानव निर्मित विशेषताओं से युक्त यह जलाशय पूरे क्षेत्र के लिए जलसंसाधन, सिंचाई और जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
कोपरा जलाशय के रामसर स्थल बनने से क्षेत्र को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी पहचान
वन मंत्री श्री कश्यप ने उम्मीद जताई है कि कोपरा जलाशय के रामसर स्थल बनने से क्षेत्र को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। गौरतलब है कि कोपरा जलाशय मुख्य रूप से वर्षा जल और आसपास के छोटे नालों से भरता है। यह जलाशय स्थानीय ग्रामीणों की जल आवश्यकताओं को पूरा करता है और किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। जलाशय के आसपास की भूमि अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है, जिससे क्षेत्र के कई गाँवों और छोटे कस्बों की कृषि पूरी तरह इस जलाशय पर निर्भर है।
जैव विविधता अत्यधिक समृद्ध मानी जाती है यहाँ की
इसके अलावा यह क्षेत्र वर्षभर विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों, जलचर जीवों और वनस्पतियों का सुरक्षित आवास बना रहता है। खासकर प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या यहाँ हर वर्ष दर्ज की जाती है। जलाशय में मछलियाँ, जलीय पौधे, उभयचर, सरीसृप और अनेक प्रकार के कीट-पतंगे बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे इसकी जैव विविधता अत्यधिक समृद्ध मानी जाती है।
दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण के लिए उपयुक्त स्थल
राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के अनुसार कोपरा जलाशय रिवर टर्न, कॉमन पोचार्ड और इजिप्शियन वल्चर जैसे दुर्लभ व महत्वपूर्ण पक्षियों के संरक्षण के लिए अत्यंत उपयुक्त स्थान है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह जलाशय रामसर मानदंड संख्या 02, 03 और 05 की पूर्णता करता है, जो इसे एक उत्कृष्ट वेटलैंड इकोसिस्टम का उदाहरण साबित करता है।
स्वीकृति मिलने पर पर्यटन संबंधी महत्व और बढ़ जाएगा
इसी महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे रामसर स्थल घोषित करने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। यदि इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है, तो कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण मिलेगा और इसका वैज्ञानिक, पर्यावरणीय तथा पर्यटन संबंधी महत्व और बढ़ जाएगा।
ग्रामीण आजीविका के विकास को मजबूत करने की तैयारी
सरकारी योजनाओं के तहत इस क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा ग्रामीण आजीविका विकास से जुड़ी गतिविधियों को और मजबूत करने की तैयारी है, ताकि स्थानीय आबादी और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
