August 07, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    शौर्यपथ / कोविड-19 के कारण करीब छह महीने ठप रहे हिमाचल प्रदेश के पर्यटन कारोबार से लॉकडाऊन के बादल हटते ही कारोबारियों के चेहरे पर रौनक की धूप खिलने लगी है क्योंकि पर्यटकों का रेला लौटने लगा है। एक अरसे बाद आज शहर के रिज मैदान, मालरोड सहित ऊपरी शिमला के प्रमुख पर्यटक स्थलों पर सैलानियों की चहल-पहल दिखी। शहर में दिनभर जगह-जगह जाम भी लगता रहा पर संभवत: इसका बुरा किसीने नहीं माना।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सप्ताहंत का लुत्फ उठाने प्रदेश के मुख्य पर्यटक स्थलों पर हजारों की तादाद में बाहरी राज्यों से पर्यटक पहुंचे हैं।
    पिछले 24 घंटों में राजधानी में 13400 गाड़ियां पहुंची हैं। एक होटल संचालक ने बताया कि शिमला के होटलों की ऑक्यूपेंसी 8० से 9० फीसदी तक चल रही है। उन्होंने बताया कि अनलॉक प्रक्रिया के तहत सीमा खोेले एक पखवाड़ा ही हुआ है और पर्यटकों की बुकिंग आनी शुरू हो गई है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार सर्दियों के दौरान पिछले साल से ज्यादा पर्यटक आने की उम्मीद है।
    होटल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अश्वनी सूद ने कहा कि जो लोग छह महीनों से घरों में कैद थे। अब वह पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। इससे होटल कारोबार में सुधार आना शुरू हो गया है। इस सप्ताहंत पर्यटकों की अच्छी खासी भीड़ का कारण शिमला का खुशनुमा मौसम भी है। इन दिनों शिमला में अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के करीब चल रहा है।

    सेहत / शौर्यपथ / कई लोगों की आदत होती है कि वो खाने के साथ कई चीजें भी अपनी थाली में शामिल कर लेते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले आपको जान लेना चाहिए कि आयुर्वेद के अनुसार किन चीजों को साथ खाने की मनाही की गई है। आइए, जानते हैं किन चीजों को एक साथ नहीं खाना चाहिए-
    दूध के साथ ये चीजें खाना हानिकारक
    उड़द की दाल, पनीर, अंडा, मीट
    उड़द की दाल खाने के बाद दूध नहीं पीना चाहिए। हरी सब्जिियां और मूली खाने के बाद भी दूध नहीं पीना चाहिए। अंडा, मीट, और पनीर खाने के बाद दूध पीने से बचना चाहिए। इनको एक साथ खाने से डाइजेशन में दिक्कअत आ सकती है।
    दही के साथ न खाएं ये चीजें
    खट्टे फल
    दही के साथ खासतौर पर खट्टे फल नहीं खाने खहिए। दरअसल, दही और फलों में अलग-अलग एंजाइम होते हैं। इस कारण वे पच नहीं पाते, इसलिए दोनों को साथ लेने की सलाह नहीं दी जाती।
    मछली
    दही की तासीर ठंडी है। उसे किसी भी गर्म चीज के साथ नहीं लेना चाहिए। मछली की तासीर काफी गर्म होती है, इसलिए उसे दही के साथ नहीं खाना चाहिए।
    शहद के साथ क्या न खाएं
    शहद को कभी गर्म करके नहीं खाना चाहिए। चढ़ते हुए बुखार में भी शहद का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में पित्त बढ़ता है। शहद और मक्ख न एक साथ नहीं खाना चाहिए। घी और शहद कभी साथ में नहीं खाना चाहिए। यहां तक कि पानी में मिलाकर भी शहद और घी का सेवन नुकसानदेह हो सकता है।
    इन चीजों को भी एक साथ खाने से करें परहेज
    - ठंडे पानी के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, खीरा, जामुन और मूंगफली नहीं खानी चाहिए।
    - खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई और कठहल नहीं खाना चाहिए।
    - चावल के साथ सिरका नहीं खाना चाहिए।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /‘वर्क फ्रॉम होम’ ने घर और दफ्तर के बीच की दीवार को धुंधला कर दिया है। कभी कुकर की सीटी तो कभी टीवी का शोरगुल, कभी फल-सब्जी वाले की आवाज तो कभी बच्चों की उछल-कूद, घर में बैठकर ऑफिस का काम निपटाना कतई आसान नहीं। ऐसे में मशहूर अमेरिकी आर्किटेक्ट फर्म ‘लॉरेल एंड वोल्फ’ के विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे उपाय सुझाए हैं, जो ‘वर्क फ्रॉम होम’ में होने वाली मुश्किलों को दूर करने के साथ ही उत्पादकता बढ़ाने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।
    घर का पसंदीदा कोना चुनें:
    घर में ऑफिस का सेटअप स्थापित करते समय यह मत भूलिए कि आपको वहां कम से कम आठ घंटे तो गुजारने ही हैं। ऑफिस टेबल को घर के किसी खाली कोने के बजाय खिड़की के पास लगाने की कोशिश करें, ताकि हर 15 से 20 मिनट पर स्क्रीन से ब्रेक लेकर हरियाली का दीदार कर सकें। अगर ऑफिस टेबल को खिड़की के पास स्थापित करने का विकल्प नहीं मौजूद है तो सामने की दीवार पर रंग-बिरंगी पेंटिंग लगाएं, जिससे न सिर्फ आपको ‘फील गुड’ हो, बल्कि ताजगी का एहसास भी बना रहे।
    रोशनी का खास ख्याल रखें:
    ‘वर्क फ्रॉम होम’ में घंटों कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन से चिपके रहने से आंखों की रोशनी प्रभावित होना लाजिमी है। ऐसे में घर में पर्याप्त मात्रा में धूप न आती हो तो उसकी भरपाई कृत्रिम लाइट से करें। कमरे की छत पर बल्ब लगाने के साथ ही डेस्क पर लैंप की व्यवस्था करें, ताकि स्क्रीन पर नजर टिकाए रहने के दौरान आंखों पर ज्यादा जोर न पड़े। ऑफिस सेटअप में एलईडी या व्हाइट लाइट का ही इस्तेमाल सुनिश्चित करें, क्योंकि ये आंखों को सुकून पहुंचाती हैं।
    नीली, पीली दीवारें फायदेमंद:
    ‘लॉरेल एंड वोल्फ’ के मुताबिक पीला-नारंगी रंग जहां ‘फील गुड’ हार्मोन का स्त्राव बढ़ाता है, वहीं नीला-हरा रंग स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ के उत्पादन में कमी लाता है। इसलिए ऑफिस सेटअप में दीवारों को इन रंगों में रंगवाना खासा फायदेमंद साबित हो सकता है। यही नहीं, ऑफिस जैसी ऊर्जा महसूस करने के लिए सामने की दीवार पर एक व्हाइट बोर्ड भी जरूर लगाएं। उस पर रोजाना के लिए निर्धारित काम के साथ ही प्रमुख फोन नंबर और मन में आने वाले विचार लिखते रहें।
    फर्नीचर आरामदायक होना जरूरी:
    -अगर आप सोचते हैं कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ बस चंद दिनों की बात है। ऐसे में टेबल या कुर्सी पर पैसे खर्च करने की क्या जरूरत है तो आप गलत हैं। जरूरत से ज्यादा ऊंची या नीची टेबल-कुर्सी पर बैठकर काम करने से आपको न सिर्फ पीठ, कमर, कंधे और गर्दन में दर्द की शिकायत सता सकती है, बल्कि चक्कर व सर्वाइकल स्पॉन्डलाइटिस की समस्या भी पनप सकती है। ‘वर्क फ्रॉम होम’ में बिस्तर पर लेटकर या बैठकर काम करने से भी बचें। इससे रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
    डेस्क पर छोटे-छोटे पौधे लगाएं:
    -पेड़-पौधे न सिर्फ आंखों को सुकून पहुंचाते हैं, बल्कि तनाव का एहसास घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में भी खासे असरदार पाए गए हैं। इसलिए ऑफिस डेस्क के आसपास बोनसाई या कैक्टस का पौधा लगाएं, जिनका रखरखाव बेहद आसान है। टेबल और फर्श पर सफेद या क्रीम चादर व रग बिछाएं, ताकि मन हमेशा शांत व तरोताजा बना रहे। पेन स्टैंड या फाइल बॉक्स खरीदने की जरूरत नहीं। घर में मौजूद पुराने डिब्बों या गत्ते को सजाकर पेन-फाइलें रखने के लिए इस्तेमाल करें। यह भी सुनिश्चित करें कि ऑफिस जोन टीवी से दूर हो।
    काम के बोझ तले दबे कर्मचारी:
    -59% कर्मचारियों ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ में ऑफिस से कहीं ज्यादा काम करने की बात कही
    -91% ने अतिरिक्त काम के बदले कोई भत्ता या छुट्टी न दिए जाने पर नाखुशी जाहिर की
    -87% का मानना है कि नियोक्ताओं को ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए पारदर्शी नीति बनानी चाहिए
    शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर असर:
    -56% में पीठ-कमर-कंधे में दर्द, 52% में अनिद्रा और 38% में सिरदर्द की समस्या पनपी
    -54% घर में रहते हुए भी बीवी-बच्चों, अभिभावकों के साथ अच्छे पल बिताने को तरसे
    -33% को लॉकडाउन के शुरुआती महीनों में छुट्टी न मिलने से बेचैनी की शिकायत हुई

    मनोरंजंन /शौर्यपथ / अमेजन प्राइम की पॉपुलर वेबसीरीज 'मिर्जापुर-2' के ट्रेलर का इंतजार खत्म होने वाला है। एक्टर पंकज त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया है कि मिर्जापुर-2 का ट्रेलर 6 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे रिलीज किया जाएगा। पंकज ने मिर्जापुर का नया पोस्टर जारी करते हुए कैप्शन लिखा- 'नोट कर लें कल 1 बजे ट्रेलर का प्रबंध कर रहे हैं।'
    वेबसीरीज के नए पोस्टर में कालीन भइया यानी पंकज त्रिपाठी और मुन्ना भैया यानी दिव्येंदु शर्मा को दिखाया गया है। जबकि कालीन भइया के चश्में में गुड्डू भइया यानी अली फजल बंदूक ताने दिख रहे हैं।
    ट्रेलर को लेकर फैन्स उत्साहित
    ट्रेलर के रिलीज डेट का ऐलान होने पर फैन्स बेहद उत्साहित हैं। एक्टर पंकज त्रिपाठी की पोस्ट पर फैन्स अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा- चलो आखिरकार ट्रेलर के इंतजार की घड़ी खत्म हुई। वहीं एक अन्य फैन ने लिखा- पूरी सीरीज का प्रबंध कीजिए कालीन भइया। एक यूजर ने लिखा- भइया रिलीज का इंतजार है।
    हाल ही में 'मिर्जापुर-2' का टीजर हुआ था। जिसमें गुड्डू कहते हैं, 'हमारा उद्देश्य एक ही है। जान से मारेंगे, क्योंकि खुलकर मारेंगे, तभी जी पाएंगे। 'मिर्जापुर' के दूसरे सीजन का दर्शकों को काफी लंबे समय से इंतजार है। आपको बता दें कि 'मिर्जापुर 2' वेबसीरीज 23 अक्टूबर को रिलीज होगी। आपको बता दें कि अली फजल, पंकज त्रिपाठी स्टारर इस गैंगस्टर ड्रामा के पहले सीजन 'मिर्जापुर' को 2018 के नवंबर में रिलीज किया गया था। पहले सीजन को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हमने अक्सर मंदिरों में आटे के दीये जलते हुए देखे हैं, लेकिन हम नहीं जानते कि ऐसा क्यों किया जाता है? आइए जानते हैं शास्त्रसम्मत कुछ बातें...
    1. वास्तव में आटे के दीपक का प्रयोग किसी बहुत बड़ी कामना की पूर्ति के लिए किया जाता है।
    2. अक्सर मन्नत के दिए आटे के बने होते हैं।
    3. अन्य दीपक की तुलना में आटे के दीप को शुभ और पवित्र माना गया है। मां अन्नपूर्णा का आशीष इस दीप को स्वत: ही मिल जाता है।
    4. मां दुर्गा, भगवान हनुमान, श्री गणेश, भोलेनाथ शंकर, भगवान विष्णु, भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम और श्री कृष्ण सभी के मंदिरों में आटे का दीप कामना पूर्ति के लिए जलाया जाता है।
    5. मुख्य रूप से तांत्रिक क्रियाओं में आटे का दीप जलाते हैं।
    6. कर्ज से मुक्ति, शीघ्र विवाह, नौकरी, बीमारी, संतान प्राप्ति, खुद का घर, गृह कलह, पति-पत्नी में विवाद, जमीन जायदाद, कोर्ट कचहरी में विजय, झूठे मुकदमे तथा घोर आर्थिक संकट के निवारण हेतु आटे के दीप संकल्प के अनुसार जलाए जाते हैं।
    7. ये दीप घटती और बढ़ती संख्या में लगाए जाते हैं। एक दीप से शुरुआत कर उसे 11 तक ले जाया जाता है। जैसे संकल्प के पहले दिन 1 फिर 2, 3, ,4 , 5 और 11 तक दीप जलाने के बाद 10, 9, 8, 7 ऐसे फिर घटते क्रम में दीप लगाए जाते हैं।
    8. आटे में हल्दी मिला कर गुंथा जाता है और हाथों से उसे दीप का आकार दिया जाता है। फिर उसमें घी या तेल डाल कर बत्ती सुलगाई जाती है।
    9. मन्नत पूरी होने के बाद एक साथ आटे के सारे संकल्पित दीये मंदिर में जाकर लगाए जाते हैं।
    10. अगर दीप की संख्या पूरी होने से पहले ही कामना पूरी हो जाए तो क्रम को खंडित न करें। संकल्प में माने गए दीप पूरे जलाएं। किसी भी अच्छे दिन, अच्छे वार के शुभ मुहूर्त और चौघड़िया में दीप जलाने का प्रण लिया जा सकता है। हर दीप के साथ कामना अवश्य बोलें।

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / बांसुरी प्रकृ‍‍ति का एक अनुपम वरदान है। भगवान श्री कृष्ण को बांसुरी अतिप्रिय है। वे इसे हमेशा अपने साथ रखते हैं। घर में जहां देवता बैठे हो वहां एक सुंदर सी बांसुरी लाकर रखना चाहिए।
    आइए जानें बांसुरी के बारे में >
    1. बांसुरी को बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है।
    2. बांसुरी की अभिव्यक्त शक्ति अत्यंत विविधतापूर्ण है, उससे मधुर संगीत बजाया जाता है।
    3. बांसुरी प्राकृतिक आवाजों की नकल करने में निपुण है, उससे कई तरह के पक्षियों के आवाज की हू-ब-हू नकल की जा सकती है।
    4. बांसुरी घर के वातावरण में मौजूद समस्त नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करके सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय करने का कार्य करती है।
    5. बांसुरी बांस से बनी होती है तथा इसके पौधे को दिव्य माना जाता है। अत: घर में बांसुरी का प्रयोग करके कई तरह से लाभ उठाया जा सकता है।
    6. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति अपनी नौकरी से परेशान रहता हैं, वह अपने घर में बांसुरी रखें , बांसुरी उसकी सारी मुश्किलें आसान कर सकती है।
    7. अगर कोई काफी मेहनत के बाद भी अपने बिजनेस में सफलता हासिल नहीं कर पा रहा है तो उसे बांस की बनी बांसुरी अपने दुकान में रखनी चाहिए इससे व्यापार में उन्नति होती है।
    8. नए व्यवसाय का आरंभ और ईश्वर का पूजन करते समय अपने दुकान की छत पर दो बांसुरी चिपकानी चाहिए या टांग देनी चाहिए। यह बांसुरी अच्छी सफलता दिलाने में मददगार साबित होता है।
    9. बांसुरी से निकलने वाला स्वर प्रेम की बरखा करता है। जिस घर में बांसुरी रखी होती है वहां प्रेम और धन की कोई कमी नहीं रहती है।
    10. बांसुरी के संबंध में एक धार्मिक मान्यता है कि जब बांसुरी को हाथ में लेकर हिलाया जाता है तो बुरी आत्माएं दूर हो जाती हैं और जब इसे बजाया जाता है तो घरों में शुभ चुंबकीय प्रवाह का प्रवेश होता है।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / नवरात्रि में कैसे करें पूजन - आइए जानें नवरात्रि में पूजन कैसे करना चाहिए और इसके क्या नियम हैं?
    * आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
    * घर के ही किसी पवित्र स्थान पर स्वच्छ मिट्टी से वेदी बनाएं।
    * वेदी में जौ और गेहूं दोनों को मिलाकर बोएं।
    * वेदी पर या समीप के ही पवित्र स्थान पर पृथ्वी का पूजन कर वहां सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का कलश स्थापित करें।
    * इसके बाद कलश में आम के हरे पत्ते, दूर्वा, पंचामृत डालकर उसके मुंह पर सूत्र बाधें।
    * कलश स्थापना के बाद गणेश पूजन करें।
    * इसके बाद वेदी के किनारे पर देवी की किसी धातु, पाषाण, मिट्टी व चित्रमय मूर्ति विधि-विधान से विराजमान करें।
    * तत्पश्चात मूर्तिका आसन, पाद्य, अर्ध, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन, पुष्पांजलि, नमस्कार, प्रार्थना आदि से पूजन करें।
    * इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा स्तुति करें।
    * पाठ स्तुति करने के बाद दुर्गाजी की आरती करके प्रसाद वितरित करें।
    * इसके बाद कन्या भोजन कराएं। फिर स्वयं फलाहार ग्रहण करें।
    प्रतिपदा के दिन घर में ही जवारे बोने का भी विधान है। नवमी के दिन इन्ही जवारों को सिर पर रखकर किसी नदी या तालाब में विसर्जन करना चाहिए। अष्टमी तथा नवमी महातिथि मानी जाती हैं।
    इन दोनों दिनों में पारायण के बाद हवन करें फिर यथा शक्ति कन्याओं को भोजन कराना चाहिए।
    नवरात्रि में क्या करें, क्या न करें
    * इन दिनों व्रत रखने वाले को जमीन पर सोना चाहिए।
    * ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
    * व्रत करने वाले को फलाहार ही करना चाहिए।
    * नारियल, नींबू, अनार, केला, मौसमी और कटहल आदि फल तथा अन्न का भोग लगाना चाहिए।
    * व्रती को संकल्प लेना चाहिए कि हमेशा क्षमा, दया, उदारता का भाव रखेगा।
    * इन दिनों व्रती को क्रोध, मोह, लोभ आदि दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए।
    * देवी का आह्वान, पूजन, विसर्जन, पाठ आदि सब प्रातःकाल में शुभ होते हैं, अतः इन्हें इसी दौरान पूरा करना चाहिए।
    * यदि घटस्थापना करने के बाद सूतक हो जाएं, तो कोई दोष नहीं होता, लेकिन अगर पहले हो जाएं, तो पूजा आदि न करें।
    दस महाविद्याओं के उत्पत्ति की पौराणिक कथा
    पुराणों में दस महाविद्याओं के उत्पत्ति की अलग अलग कथाएं मिलती हैं। कई जगहों पर उन्हें माता सती या माता पार्वती की बहनें बताई गई हैं तो कुछ जगहों पर उन्हें माता सती का ही रूप बताया गया है। यह भी कहा जाता है कि उनमें से कुछ माता की बहनें हैं तो कुछ उनका ही रूप हैं। उनकी उत्पत्ति कथाओं में से एक कथा पढ़ें।
    पुराणों अनुसार जब भगवान शिव की पत्नी सती ने दक्ष के यज्ञ में जाना चाहा तब शिवजी ने वहां जाने से मना किया। इस इनकार पर माता ने क्रोधवश पहले काली शक्ति प्रकट की फिर दसों दिशाओं में दस शक्तियां प्रकट कर अपनी शक्ति की झलक दिखला दी। इस अति भयंकरकारी दृश्य को देखकर शिवजी घबरा गए। क्रोध में सती ने शिव को अपना फैसला सुना दिया, 'मैं दक्ष यज्ञ में जाऊंगी ही। या तो उसमें अपना हिस्सा लूंगी या उसका विध्वंस कर दूंगी।'
    हारकर शिवजी सती के सामने आ खड़े हुए। उन्होंने सती से पूछा- 'कौन हैं ये?' सती ने बताया,‘ये मेरे दस रूप हैं। आपके सामने खड़ी कृष्ण रंग की काली हैं, आपके ऊपर नीले रंग की तारा हैं। पश्चिम में छिन्नमस्ता, बाएं भुवनेश्वरी, पीठ के पीछे बगलामुखी, पूर्व-दक्षिण में धूमावती, दक्षिण-पश्चिम में त्रिपुर सुंदरी, पश्चिम-उत्तर में मातंगी तथा उत्तर-पूर्व में षोड़शी हैं और मैं खुद भैरवी रूप में अभयदान देने के लिए आपके सामने खड़ी हूं।' यही दस महाविद्या अर्थात् दस शक्ति है। बाद में मां ने अपनी इन्हीं शक्तियां का उपयोग दैत्यों और राक्षसों का वध करने के लिए किया था।
    दस महा विद्या : 1.काली, 2.तारा, 3.त्रिपुरसुंदरी, 4.भुवनेश्वरी, 5.छिन्नमस्ता, 6.त्रिपुरभैरवी, 7.धूमावती, 8.बगलामुखी, 9.मातंगी और 10.कमला।
    प्रवृति के अनुसार दस महाविद्या के तीन समूह हैं। पहला:- सौम्य कोटि (त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी, कमला), दूसरा:- उग्र कोटि (काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी), तीसरा:- सौम्य-उग्र कोटि (तारा और त्रिपुर भैरवी)।
    जानिए राशिनुसार किस शुभ ग्रंथ से घर में आएगी समृद्धि
    मेष-मेष राशि वाले प्रात:काल रुद्राष्टक के 11 पाठ करें।
    वृषभ- वृषभ राशि वाले प्रात:काल देवी-कवच का पाठ करें।
    मिथुन- मिथुन राशि वाले प्रात:काल गणपति-अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
    कर्क- कर्क राशि वाले गौरी-जी की आराधना करें।
    सिंह- सिंह राशि वाले आदित्य-ह्रदय-स्तोत्र के 11 पाठ करें।
    कन्या- कन्या राशि वाले गायत्री-मंत्र जाप करें।
    तुला- तुला राशि वाले श्री-सूक्तम का पाठ करें।
    वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले मंगला-स्तोत्र का पाठ करें।
    धनु- धनु राशि वाले साई-चरित्र का पाठ करें।
    मकर- मकर राशि वाले हनुमान चालीसा के 11 पाठ नौ दिन करें।
    कुंभ- कुंभ राशि वाले सुंदरकांड का पाठ करें।
    मीन- मीन राशि वाले राम-रक्षास्तो‍त्र का पाठ करें।
    विशेष- उपरोक्त आराधना नवरात्रि में प्रात:काल करने से विशेष लाभ मिलेगा।

    सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की दवा खाकर कोरोना संक्रमित डॉक्टर स्वस्थ हो गए। उन्हें कोरोना संक्रमण के बाद सांस लेने में दिक्कत और बुखार भी था। उनकी पत्नी भी इस बीमारी से पीडि़त थीं। उन्होंने भी इलाज के लिए इन्हीं दवाओं का उपयोग किया। दोनों अब स्वस्थ हैं।
    सुपर स्पेश्यलिटी शिशु अस्पताल के कोरोना वार्ड में एक महीने मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. प्रमोद कश्यप खुद होम्योपैथी के डॉक्टर हैं। 20 दिन पहले वह कोरोना संक्रमित हो गए। दो दिन बाद उनकी पत्नी दिव्या भी कोरोना से पीडि़त मिली। दोनों को शुरू में एलोपैथी दवाएं नहीं मिलीं, ऐसे में उन्होंने आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की दवाओं का सेवन किया। करीब 10 दिन के बाद उनकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। अब दोनों स्वस्थ हैं और होम क्वारंटाइन हैं।
    कश्यप ने बताया कि मुझे होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं पर पूरा विश्वास था। इसकी जानकारी भी थी। ऐसे में मैंने आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवाएं लेनी शुरू कर दी। दो-तीन दिन मुझे बुखार भी था, लेकिन इससे घबराया नहीं। पॉजिटिव होने के बाद बुखार आया। एक दिन बाद सांस लेने भी थोड़ी परेशानी आई थी। दोनों चिकित्सा पद्धति की दवाओं का सेवन जारी रखा। धीरे-धीरे तबीयत सुधरती गई। अब पूरी तरह से स्वस्थ हूं।
    पत्नी को भी यहीं दवाएं दी। एलोपैथी की दवा के नाम पर सिर्फ विटामिन बी काम्पलेक्स दवा ली। हालांकि लोगों को मेरी सलाह है कि कोरोना संक्रमण होने की स्थिति में डॉक्टरों के परामर्श के आधार पर ही दवाओं का सेवन करें। मैं खुद डॉक्टर था, इसलिए ये दवाएं लीं।
    प्रतिदिन एक घंटे छत पर टहले-
    कि कोरोना संक्रमण होने के बाद भी नियमित रूप से एक घंटे छत पर टहलने जरुर जाया करता था। जो प्रतिरोधक क्षमता को ठीक रखने के लिए जरुरी था। सुबह आधा घंटा और शाम को आधा घंटा टहला। जिसका फायदा भी मिला। पहले भी मैं प्रतिदिन टहला करता था। इसके लिए पार्क या सड़क के किनारे चलता था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण बाहर नहीं जा सकता था। इसलिए छत को ही पार्क बना लिया।
    आयुर्वेदिक और होम्यापैथी में इन दवाओं का सेवन किया-
    कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए कि आयुर्वेदिक दवाओं में गिलोय, हल्दी, तुलसी, आंवला, अश्वगंधा, ब्राह्मणी, आदि से बनी आयुर्वेदिक तरल का उपयोग किया। यह दिन में दो-तीन बार लिया करता था। वहीं होम्योपैथी में आर्सेनिक 200, सहित अन्य दवाएं ली। ताकि बुखार नियंत्रित रहे।
    आजकल इन दवाओं की मांग भी बढ़ी है-
    प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए वर्तमान में आयुर्वेदिक दवाओं की मांग बाजार में काफी बढ़ गई है। गिलोय, अश्वगंधा सहित अन्य औषधीय पौधों से बनी दवाओं की मांग पांच गुना से अधिक बढ़ गई हैं। कई आयुर्वेदिक दवाओं की बाजार में कमी हो गई है। वहीं होम्योपैथी में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आर्सेनिक 30 भी उपयोग में है।

    रायपुर / शौर्यपथ / हर्षीता पांडेय के बयान पर कटाक्ष करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार के समय महिला एवं बाल विकास विभाग के अध्यक्ष रही उनके कार्यकाल में प्रदेश में बहुत सी हृदय विदारक जघन्य आपराधिक घटनाएँ हुई थी तब उनकी आत्माएँ रोई नहीं।
    पूर्ववर्ती रमन सरकार के ओएसडी रहे ओपी गुप्ता के द्वारा नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार जैसे जघन्य अपराध किया उस पर उनकी आत्मा सोई हुई थी ।
    भाजपा के राजनितिक सहयोगी भाजपा नेत्री बस्तर के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा आरोपी को संरक्षण देने एवं पीडि़ता एवं परिवार को न्यायालयीन प्रक्रिया में दखल देते हुए गवाहों एवं सबूतों को बदलने एवं हटाने का अनैतिक प्रयास किये थे तब उनकी आत्मा सोई हुई थी। कभी हर्षिता ने सोची कि जब बीजापुर में आदिवासी महिलाओं के साथ सामूहिक अनाचार हुआ उस पर उनकी आत्माएँ सोई थी। मीना खल्खों के साथ बलात्कार व हत्या हुई उस पर भी उसकी आत्मा सोई थी। झलियामारी के शासकीय आश्रमों में मासूमों के साथ अनाचार हुआ तो उनकी आत्मा सोई थी। पैसों के लिए माताओं के गर्भाशय निकाल लिये जा रहे थे तब उनकी आत्मा सोई थी। नसबंदी जैसे मामूली आपरेशन में जब महिलाओं की मौत हो जाती थी जब उनकी आत्मा सोई थी। भिलाई खुर्सीपार में बलात्कार पीडि़ता युवती की आत्महत्या की घटना को समूचे प्रदेश के माथे पर कलंक है यह घटना विदारक और मानवता को शर्मशार कर देने वाली घटना थी।
    इस मामले मे पूर्ववर्ती रमन सिंह का बयान बेहद आपत्तिजनक और असंवेदनशील था उस समय उनकी आत्मा सोई थी। बलात्कारियों को बचाने और पीडि़ता को सताने के लिये पूरा तंत्र लगा होता था, तब हर्षिता पांडे मौन क्यों थी?
    राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष हर्षिता पांडे को इतना अच्छा अवसर था कि पूर्ववर्ती रमन सरकार के समय हो रहे महिलाओं के अत्याचार पर करारा जवाब देने का लेकिन वहां पर भी महिलाओं को हताशा और निराशा हुई।
    महिला एवं बाल विकास विभाग में महिलाएं बड़ी आश और विश्वास के साथ परेशानी के समाधान के लिए आती है लेकिन कई सालों तक चप्पल घिंसने के बाद भी न्याय नहीं मिल पाती थी। हजारों मामले लंबित थे जिसे वर्तमान में कितने मामलों का निपटारा किया गया, कितने बहनों को न्याय मिला, कांग्रेस की सरकार में अपराधियों के साथ नहीं देते तुरन्त कड़ी कार्यवाही करके जेल पहुंचाया जाता हैं।
    प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि हर्षिता जी यदि आप गहरी निद्रा से जग गई हो तो उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री जी को जाकर सलाह दे कि बलात्कारियों को बचाने नेतागण संरक्षण ना दे और उत्तरप्रदेश के सरकार से पूछे कि क्यों मनीषा के परिवार वालों के साथ योगी जी अन्याय कर रहे हैं? पीडि़ता के माता-पिता अभी कैसी स्थिति से गुजर रहे है ये सोच कर रूह कांप जाती है क्या छिपाना चाहता है योगी जी? क्यों मीडिया वाले एवं अन्य लोगों से मुलाकात करने जाने पर एफआईआर करवा रही है? क्यों हिटलरशाही पर उतर आयी है योगी जी।
    प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि उन्नाव और कठुआ में हुए रेप की घटना में भी भाजपा के कार्यकर्ता झंडा लेकर रेपीस्ट को बचाने निकले थे ठीक उसी तरह हाथरस में भी हो रहा है क्योंकि हमेशा से भाजपा और अपराधियों का चोली दामन का साथ रहा है ।

    -शंकराचार्य कोविड हॉस्पिटल में बेहतरीन इलाज से बेहद गंभीर मरीजों को भी मिल रही संजीवनी
    -गंभीर मरीजों में से चार मरीज जो वेंटिलेटर में रखे गए थे शनिवार को स्वस्थ होकर पहुंचे घर

    दुर्ग / शौर्यपथ / फोटो में दिख रहा दृश्य शंकराचार्य हॉस्पिटल का है। यह जश्न का समय है शिवकुमारी के लिए भी और इनके इलाज के लिए पूरी तन्मयता से कार्य कर रहे चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्स का। हो भी क्यों न, बेहद गंभीर हालत से जूझती हुई 54 वर्षीय साई नगर दुर्ग निवासी शिवकुमारी ने अपने मनोबल से और शंकराचार्य कोविड हॉस्पिटल के चिकित्सकों के शानदार ट्रीटमेंट से और स्टाफ नर्सों की लगातार मॉनिटरिंग से कोविड से बाहर आ गई है। जब उनका सीटी स्कैन कराया गया था तो इनका स्कोर था 25/25। यह बेहद गंभीर स्थिति होती है और केवल बेहद कुशल इलाज और मॉनिटरिंग से ही मरीज के जीवन के लिए संभावना बनती है। शंकराचार्य कोविड हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने पूरी तन्मयता और गंभीरता से इलाज किया। आक्सीजन सपोर्ट दिया गया, वेंटिलेटर में भी रखना पड़ा। आज जब वो अपने पैरों पर खड़े हुईं और चुनिंदा कदम चली तो लगा कि मनोबल और अच्छे इलाज से हर गंभीर बीमारी का मुकाबला संभव है परिस्थिति कितनी ही खराब क्यों न हो।
    जब शिवकुमारी स्टाफ नर्स के सहारे खड़ी होकर चलने लगी तो उनके आंखों में आंसू थे और स्टाफ के मन में गहरी खुशी। सभी ने चीयरफुल मुद्रा बनाई, शिवकुमारी ने भी विक्ट्री साइन बनाया। यह बेहद कठिन क्षण था उनके लिए भी और स्टाफ के लिए भी। संकल्प और उचित मानिटरिंग के बूते चिकित्सकों ने यह कर दिखाया। शिव कुमारी की हेल्थ हिस्ट्री के मुताबिक दवाइयों का निर्णय लिया गया। उन्हें 26 सितंबर को भर्ती किया गया था और अब वे रिकवरी के मोड में हैं और जल्द ही उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
    शंकराचार्य हॉस्पिटल में इलाज की मॉनिटरिंग कर रही डॉ सुगम सावंत ने बताया कि चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्स द्वारा लगातार की जा रही मॉनिटरिंग और सबसे अच्छा इलाज देने की कोशिश से मरीजों की रिकवरी तेज हो रही है। उन्होंने कहा कि इनके बेहतर स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग के लिए स्पेशलिस्ट डॉ. कौशल, डॉ. राजू माहूले एवं डॉ. बसंत चैरसिया की निगरानी में इलाज चल रहा है। इसके साथ मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रफुल्ल, डॉ. अभिलाष, डॉ. राजेन्द्र, डॉ. मयंक एवं आईसीयू के स्टाफ इनकी मॉनिटरिंग करते रहें। इन सबके समन्वय से बेहद गंभीर परिस्थितियों में जूझ रहे मरीजों को तेजी से रिकवरी मोड में लाया जा सका।
    चार गंभीर केस जिनमें रिकवरी हुई और अब सुकून से घर पहुंच रहे पेशेंट- शनिवार को चार गंभीर मरीज भी कोविड संक्रमण से मुक्त होकर घर पहुंच गये। इन सभी को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। विनोद हरदेव 38 साल के हैं इन्हें 25 सितंबर को एडमिट किया गया था, वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। अंजोरा मिंज 63 साल की पेशेंट हैं जिन्हें 21 सितंबर को भर्ती किया गया था। वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया और अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसी तरह तरुण सिंह और उत्तम कुमार 27 सितंबर को एडमिट हुए और पूरी तरह स्वस्थ हो कर शनिवार को घर चले गए।
    बहुत अच्छा इलाज, पूरा ध्यान रख रहे स्टाफ- आज डिस्चार्ज होकर घर जा रहीं निर्मला चंद्राकर ने बताया कि मुझे बहुत अच्छा इलाज मिला। भोजन भी अच्छा मिला। स्टाफ ने घर के सदस्य की तरह ख्याल किया। अब घर जा रही हूँ तो बहुत अच्छा लग रहा है। निर्मला वार्ड 13 दुर्ग की निवासी हैं उन्हें 30 सितंबर को एडमिट कराया गया था। अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

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