October 01, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    दुर्ग। अवैध शराब के भंडारण एवं बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दुर्ग पुलिस ने सारथी मोहल्ला क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के कब्जे से 24 नग देशी शोले मसाला मदिरा और 5 नग शेरा मसाला मदिरा, प्रत्येक 180 एमएल की सीलबंद बोतलें, कुल 5.220 बल्क लीटर शराब बरामद की गई।

    पुलिस के मुताबिक 20 सितंबर 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सारथी मोहल्ला स्थित टप्पा तालाब के पास पीपल पेड़ के सामने एक व्यक्ति झोले में शराब रखकर बिक्री कर रहा है। सूचना की तस्दीक और कार्रवाई के लिए पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को देखकर वहां से भागने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को घेराबंदी कर पकड़ा गया।

    पूछताछ में उसने अपना नाम देवेन्द्र सारथी उर्फ दाऊ अंडा (26), निवासी वार्ड क्रमांक 03, सारथी मोहल्ला, मठपारा, दुर्ग बताया। पुलिस के अनुसार आरोपी शराब रखने और बिक्री के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बरामद शराब की कीमत ₹2,900 तथा बिक्री की रकम ₹150, इस प्रकार कुल ₹2,950 का सामान जब्त किया है। मामले में पुलिस ने धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार धारा के तहत मामला अजमानतीय होने के कारण आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

    घटनास्थल: सारथी मोहल्ला, टप्पा तालाब के पास, पीपल पेड़ के सामने, दुर्ग।

    पुलिस कार्रवाई: दुर्ग पुलिस टीम द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी एवं प्रकरण से संबंधित साक्ष्यों के संकलन की कार्रवाई की गई।

    रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी कार्रवाई का रास्ता साफ; भारत समेत शीर्ष खरीदार निशाने पर, लेकिन शुल्क अभी लागू नहीं

    वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार यह कानून रूस के खिलाफ वैधानिक प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों का दायरा बढ़ाता है तथा ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है। 

    इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण और भारत के लिए संवेदनशील पहलू यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के अमेरिकी आयात पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। भारत और चीन जैसे देश इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। 

    सबसे पहले समझिए—क्या भारत पर 100% टैरिफ लग चुका है?

    नहीं।

    यह इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण तथ्यात्मक बात है। कानून ने 100% शुल्क को स्वतः लागू नहीं किया है। बल्कि ट्रंप प्रशासन को यह अधिकार दिया गया है कि वह रूसी ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले संबंधित देशों के खिलाफ टैरिफ कार्रवाई करे। कब, किस देश पर और कितनी दर से कार्रवाई होगी, यह आगे अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगा। 

    यानी फिलहाल स्थिति को “भारत पर 100% टैरिफ लागू” कहना सही नहीं होगा; अधिक सटीक बात है—“भारत पर 100% तक अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने का रास्ता कानून ने खोल दिया है।”

    भारत क्यों आया अमेरिकी निशाने पर?

    भारत लंबे समय से रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। अमेरिका की नई नीति का मूल उद्देश्य उन देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है जो रूसी ऊर्जा खरीदकर रूस की ऊर्जा आय को बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं।

    नए कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ उसके ‘शैडो फ्लीट’ यानी प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल पहुंचाने वाले टैंकर नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया है। इसके अलावा रूसी अधिकारियों, बैंकों और अन्य संस्थाओं पर प्रतिबंधों का प्रावधान है। 

    कानून को भारी बहुमत से मिली मंजूरी

    यह कानून अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ। सीनेट में इसे 86-11 वोट से मंजूरी मिली, जबकि प्रतिनिधि सभा में 262-159 वोट से पारित हुआ। इसके बाद 18 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर किए। 

    कानून का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। ग्राहम इस रूस-विरोधी प्रतिबंध पैकेज के प्रमुख समर्थकों में रहे थे। 

    भारत के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

    पहली—ऊर्जा सुरक्षा।

    यदि रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव बढ़ता है तो भारत को अपने ऊर्जा आयात के विकल्पों और कीमतों पर फिर से रणनीतिक विचार करना पड़ सकता है।

    दूसरी—अमेरिकी बाजार।

    यदि भविष्य में भारत पर ऊंचा अमेरिकी टैरिफ लगाया जाता है तो अमेरिका को निर्यात करने वाले भारतीय उद्योगों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन किस दर, किन उत्पादों और किस समयावधि के लिए शुल्क लागू करता है। 

    तीसरी—भारत-अमेरिका संबंध।

    रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंध और अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक एवं रणनीतिक संबंध—दोनों को संतुलित रखना नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती बन सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण तथ्य—यह सिर्फ भारत की कहानी नहीं

    कानून का निशाना केवल भारत नहीं है। चीन भी प्रमुख संभावित प्रभावित देशों में है, क्योंकि वह भी रूसी ऊर्जा का बड़ा खरीदार है। कानून का प्रभाव अन्य प्रमुख खरीदारों पर भी परिस्थितियों के अनुसार पड़ सकता है। 

    इसके अलावा कानून रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव को केवल तेल खरीद तक सीमित नहीं रखता। रूसी ऊर्जा एवं रक्षा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्कों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। 

    ईरान के लिए भी कड़ा संदेश

    कानून के शीर्षक में रूस के साथ ईरान भी शामिल है। इसके तहत मौजूदा ईरान प्रतिबंध व्यवस्था को पांच वर्ष के लिए आगे बढ़ाया गया है। इस तरह यह कानून केवल रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा आर्थिक दबाव नहीं, बल्कि अमेरिका की व्यापक रूस-ईरान प्रतिबंध नीति का हिस्सा बन गया है। 

    भारत के लिए असली सवाल अब शुरू होता है

    ट्रंप के हस्ताक्षर के साथ कानूनी अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति के हाथ में आ गया है, लेकिन भारत पर 100% शुल्क लगने का अंतिम निर्णय अभी अलग चरण है। इसलिए आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी प्रशासन इस अधिकार का इस्तेमाल करता है या नहीं, भारत को किस श्रेणी में रखता है और यदि कार्रवाई होती है तो किन भारतीय वस्तुओं पर कितनी दर लागू की जाती है।

    23 सितंबर को सुबह से दोपहर तक बंद रहेंगे प्रतिष्ठान, चंदा वसूली में दबाव और मारपीट के आरोप; व्यापारियों का दो टूक—चंदा देंगे तो स्वेच्छा से

    बिलासपुर। शहर में कथित जबरिया चंदा वसूली को लेकर व्यापारियों का आक्रोश अब सामूहिक विरोध के रूप में सामने आने जा रहा है। चंदा वसूली के नाम पर दबाव, धमकी और मारपीट किए जाने के आरोपों के विरोध में व्यापारिक संगठनों ने 23 सितंबर को सुबह से दोपहर तक बाजार बंद रखने का निर्णय लिया है। इस दौरान शहर के व्यापारी अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर जबरिया चंदाखोरी के खिलाफ एकजुटता का संदेश देंगे।

    कैट के राष्ट्रीय सचिव राजू सलूजा और छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नवदीप सिंह अरोरा ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा के दौरान बंद की घोषणा की। व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि शहर में चंदा वसूली के नाम पर कुछ लोगों द्वारा व्यापारियों पर कथित रूप से दबाव बनाया जा रहा है। विरोध करने पर विवाद और मारपीट की स्थिति बनने की बात भी व्यापारियों ने कही।

    व्यापारियों के अनुसार, कुछ मामलों में विवाद इतना बढ़ा कि कथित चंदा वसूली करने वालों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर तक दर्ज कराने की स्थिति बनी। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि किसी सामाजिक, धार्मिक अथवा अन्य आयोजन के लिए व्यापारी सहयोग करना चाहता है तो वह उसकी इच्छा और सामर्थ्य पर निर्भर होना चाहिए।

    चंदा देना है तो स्वेच्छा से, दबाव में नहीं

    व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में स्वेच्छा से सहयोग करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनका विरोध दुकान-दुकान पहुंचकर कथित दबाव बनाकर चंदा वसूलने की प्रवृत्ति से है।

    व्यापारियों का कहना है कि सहयोग मांगना अलग बात है, लेकिन किसी व्यापारी की इच्छा के विरुद्ध दबाव बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। कैट और चेंबर की स्थानीय इकाई ने इस मुद्दे को संगठित रूप से उठाने का निर्णय लिया है।

    व्यापारिक संगठनों का कहना है कि मामले की जानकारी प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को भी दी जाएगी, ताकि चंदा वसूली को लेकर उत्पन्न हो रहे विवादों और कथित दबाव की स्थिति पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

    बंद के जरिए देंगे एकजुटता का संदेश

    23 सितंबर का प्रस्तावित बाजार बंद केवल प्रतिष्ठान बंद रखने तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापारियों की सामूहिक एकजुटता का संदेश देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से व्यापारी अलग-अलग स्तर पर इस समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन अब सामूहिक रूप से आवाज उठाने का निर्णय लिया गया है।

    व्यापारियों ने दो टूक कहा कि सहयोग करना है तो अपनी इच्छा से करेंगे, लेकिन दबाव या कथित जबरिया वसूली के आधार पर चंदा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    शौर्यपथ विशेष दुर्ग। नगर निगम क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर महापौर श्रीमती अलका बाघमार द्वारा समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाना निश्चित रूप से…
    मछली पकड़ने गए दो युवकों का दावा—पहले गांजा पीने को कहा, मना किया तो लौटकर कनपटी पर बंदूक टिकाई और चाकू से किया हमला; नकदी, मोबाइल और बाइक की चाबी…

    गुंडरदेही*शौर्यपथ 

    ग्राम सरेखा की एक महिला सिकोसा उपस्वास्थ केंद्र स्वास्थ्य कार्यकर्ता पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि बिना सहमति के दवा देने से गर्भ में ही उसके बच्चे की मौत हो गई।

    पीड़िता निशा ने बताया कि उसे पिछले 10-15 दिनों से प्रसव पीड़ा जैसा दर्द हो रहा था। 11 सितंबर शुक्रवार को परिजनों ने जांच के लिए उपस्वास्थ केंद्र सिकोसा लेकर गयी l

    निशा का आरोप है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता नाम सरस्वती साहू साहू बताया जारहा है जिसने परिजनों से बिना पूछे ही उसे दवा दे दी और कहा कि 15 मिनट में डिलीवरी हो जाएगी, और गुंडरदेही लेकर जाओगे तो गाड़ी में ही बच्चा आ जाएगा। जिससे परिवार घबरा गया और अस्पताल नहीं जा पाया। करीब 3 घंटे तक तेज दर्द होता रहा। इसके बाद जब परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तो जांच में डॉक्टरों ने बताया कि अभी प्रसव का समय नहीं है। तीन बार जांच के बाद जब अंतिम बार हार्टबीट चेक किया गया तो पता चला कि बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो चुकी है।

    पीड़िता ने मीडिया के सामने रोते हुए कहा कि गांव में इस तरह के 7 से 10 मामले पहले भी हो चुके हैं। उसने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में किसी अन्य महिला के साथ ऐसी घटना न हो। इस सम्बन्ध मे खंड चिकित्सा अधिकारी सत्येंद्र कुमार मारकंडे ने बताया कि जांच चल रहा है जाँच प्रतिवेदन उच्चअधिकारी को भेज दिया है कार्यवाही की जाएगी

    दल्ली राजहरा में श्रमदान के साथ स्वच्छता अभियान, नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति किया जागरूक

    दल्ली राजहरा। विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर दल्ली राजहरा के वार्ड क्रमांक 13 में पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान में पर्यावरण प्रेमियों ने श्रमदान कर क्षेत्र की साफ-सफाई की तथा नागरिकों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

    अभियान के दौरान स्थानीय नागरिकों को ओजोन परत के महत्व, उसके संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता के संबंध में जागरूक किया गया। पर्यावरण प्रेमियों ने लोगों से पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने और प्रकृति के संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

    छोटे प्रयासों से बढ़ेगी बड़ी पर्यावरणीय जागरूकता

    इस अवसर पर पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू ने कहा कि आज आवश्यकता केवल बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की नहीं, बल्कि ऐसे छोटे-छोटे जन-जागरूकता अभियानों की है, जिनके माध्यम से लोगों से सीधे संपर्क कर उन्हें पर्यावरण और ओजोन परत के महत्व की जानकारी दी जा सके।

    उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण, जिम्मेदार उपभोग और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक को अपनाना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। अनावश्यक ऊर्जा खपत को कम करना, पुराने एसी एवं रेफ्रिजरेटर का जिम्मेदारीपूर्वक निपटान करना, पर्यावरण-अनुकूल उपकरणों को प्राथमिकता देना, पेड़-पौधों की रक्षा करना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

    उन्होंने कहा कि ओजोन संरक्षण को केवल वैज्ञानिकों या सरकार की जिम्मेदारी मानने के बजाय प्रत्येक नागरिक को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

    ‘ओजोन की रक्षा, सुरक्षित भविष्य’ का संकल्प

    अभियान में ओजोन परत को पृथ्वी की प्राकृतिक सुरक्षा ढाल बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि ओजोन परत की रक्षा मानव जीवन, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने लोगों से केवल विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर ही नहीं, बल्कि वर्षभर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास करने का आह्वान किया।

    इन पर्यावरण प्रेमियों ने किया श्रमदान

    अभियान में प्रदीप साहू, टिकेश्वर साहू, राजकुमार साहू, ताराचन्द रावटे, चेलाराम निर्मलकर, कौशल साहू, लोकेंद्र देवांगन, हेमशंकर, त्रिलोचन यादव एवं झंकार भारद्वाज ने श्रमदान किया।

    हमारा संकल्प

    “ओजोन की रक्षा करेंगे,

    पर्यावरण को स्वच्छ रखेंगे,

    प्रदूषण कम करेंगे,

    पेड़-पौधों की रक्षा करेंगे

    और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वस्थ पृथ्वी छोड़ेंगे।”

    करोड़ों के कामों में बार-बार एक ही समूह की हिस्सेदारी पर उठे सवाल, दूसरे ठेकेदारों की कड़ी जांच तो आरबीएस के कामों पर निगम की खामोशी क्यों?

    दुर्ग। नगर निगम में निर्माण कार्यों को लेकर महापौर अलका बाघमार लगातार सक्रिय नजर आ रही हैं। कहीं सड़क और पेवर ब्लॉक के निर्माण में बेस की जांच हो रही है तो कहीं निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को डांट-फटकार लगाई जा रही है। लेकिन इसी बीच निगम में काम पाने वाले आरबीएस ग्रुप को लेकर ठेकेदारों और निगम से जुड़े लोगों के बीच कई सवाल चर्चा में हैं।

    चर्चा का मुख्य विषय यह है कि महापौर अलका बाघमार के कार्यकाल में आरबीएस ग्रुप को नगर निगम के निर्माण कार्यों में लगातार काम मिलने की स्थिति क्यों बनी? निगम की निविदा प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद यदि अन्य ठेकेदार दस्तावेजी जांच में अपात्र होते हैं और किसी विशेष समूह को लगातार काम मिलता है, तो इसकी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक जांच के दायरे में क्यों नहीं लाई जानी चाहिए?

    तीन-चार करोड़ के काम में आधे काम का दावा—क्या है वास्तविकता?

    निगम से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आ रही है कि यदि किसी अवधि में लगभग तीन से चार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य निकलते हैं तो उनमें बड़ी हिस्सेदारी आरबीएस ग्रुप को मिल रही है। हालांकि इस दावे की वास्तविकता निगम के टेंडर रिकॉर्ड, वर्क ऑर्डर और भुगतान विवरण से ही स्पष्ट हो सकती है।

    यदि आंकड़े इस दावे की पुष्टि करते हैं तो सवाल केवल आरबीएस ग्रुप को काम मिलने का नहीं, बल्कि यह भी होगा कि अन्य वर्षों से निगम में काम कर रहे अनुभवी ठेकेदारों को समान अवसर मिल रहा है या नहीं।

    पोस्टरबाजी और ठेकेदारी का संयोग बना चर्चा का विषय

    महापौर अलका बाघमार के जन्मदिन के दौरान शहर में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए बधाई पोस्टरों ने भी निगम की ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया। जनप्रतिनिधि को जन्मदिन की शुभकामना देना अपने आप में कोई गलत बात नहीं है, लेकिन यदि उसी अवधि में संबंधित ठेकेदारों को बड़ी संख्या में निगम के काम मिलते हैं तो क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है?

    इसका जवाब आरोपों या चर्चाओं से नहीं, बल्कि निगम के निविदा रिकॉर्ड और ठेकेदारवार कार्य आवंटन के आंकड़ों से मिल सकता है।

    वार्ड 17-18 की नाली ने खड़ा किया गुणवत्ता का बड़ा सवाल

    सबसे गंभीर सवाल वार्ड क्रमांक 17-18 में हुए नाली निर्माण को लेकर सामने आ रहा है। आरोप है कि निर्माण में सरिया निर्धारित मानक के अनुरूप लगभग 8 इंच की दूरी पर लगाए जाने के बजाय करीब एक फीट की दूरी पर लगाया गया।

    यदि निर्माण स्वीकृत तकनीकी मापदंडों के विपरीत हुआ है तो इसकी तकनीकी जांच होना आवश्यक है। खासकर तब, जब महापौर स्वयं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच को लेकर सक्रिय दिखाई देती हैं।

    अब सवाल यह है कि क्या इस नाली के निर्माण की तकनीकी जांच, माप पुस्तिका (MB), स्वीकृत ड्राइंग, एस्टीमेट और भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी? क्या आवश्यकता पड़ने पर निर्माण को खोलकर वास्तविक स्थिति की जांच होगी?

    दूसरों के काम में सख्ती, आरबीएस के काम में भी वही पैमाना लागू होगा?

    महापौर द्वारा पेवर ब्लॉक के नीचे बेस की जांच करना और निर्माण गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को जवाबदेह बनाना स्वागत योग्य प्रशासनिक कदम हो सकता है। लेकिन इसी कसौटी को निगम के प्रत्येक ठेकेदार और प्रत्येक निर्माण पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।

    यही वह बिंदु है जहां आरबीएस ग्रुप से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर सवाल खड़ा होता है—क्या निगम प्रशासन आरबीएस के कार्यों की भी उसी कठोरता से जांच करेगा, जिस तरह अन्य ठेकेदारों के कार्यों की जांच की जा रही है?

    कसारीडीह नाला और सुराना कॉलेज का पाथवे भी सवालों में

    दुर्ग शहर में निर्माण कार्यों की संख्या भले ही बढ़ती दिखाई दे रही हो, लेकिन कई पुराने काम अब भी अधूरे हैं। कसारीडीह का नाला लंबे समय से पूर्णता की प्रतीक्षा में है। वहीं वर्ष 2024 में सुराना कॉलेज के सामने पाथवे पार्क का निर्माण जोर-शोर से शुरू हुआ था, लेकिन उसके पूर्ण होने को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।

    दूसरी ओर शहर की कई सड़कों पर गड्ढे अब भी नागरिकों के लिए परेशानी का कारण हैं। ऐसे में केवल नए निर्माणों की संख्या नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, समयसीमा और पूर्णता भी निगम की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण पैमाना होना चाहिए।

    अब सवाल महापौर से नहीं, व्यवस्था की पारदर्शिता से है

    नगर निगम में ठेकेदारी व्यवस्था पारदर्शी है तो फिर ठेकेदारवार कितने काम मिले, कितनी राशि के मिले, कितने काम पूरे हुए और कितने कार्यों में गुणवत्ता संबंधी शिकायतें आईं—इनका पूरा विवरण सार्वजनिक करने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

    यदि आरबीएस ग्रुप को लगातार काम मिलना पूरी तरह निविदा नियमों और तकनीकी पात्रता के आधार पर हुआ है तो दस्तावेज स्वयं सारी चर्चाओं का जवाब दे सकते हैं।

    और यदि किसी निर्माण में वास्तव में तकनीकी मानकों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारी, इंजीनियर और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होना चाहिए।

    जनता का सवाल सीधा है—निगम की जांच व्यवस्था क्या सभी ठेकेदारों के लिए समान है?

    क्या पोस्टर लगाने वाला ठेकेदार हो या पोस्टर से दूरी रखने वाला—दोनों के निर्माण कार्यों की जांच एक ही पैमाने से होगी?

    अब वार्ड 17-18 की नाली से लेकर आरबीएस ग्रुप को मिले कार्यों तक, निष्पक्ष तकनीकी जांच ही तय करेगी कि चर्चाओं में कितना तथ्य है और कितना भ्रम।

    पसरा लगाने वालों पर कार्रवाई, लेकिन अनमोल ज्वेलर्स के कथित अतिक्रमण पर मौन क्यों? — बाजार व्यवस्था को लेकर निगम प्रशासन से जवाब की मांग दुर्ग। शहर के सबसे व्यस्त…

    ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन-2026’ की ट्रॉफी का अनावरण, 132 प्रोफेशनल गोल्फर ले रहे हिस्सा

    रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से देश के प्रमुख स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। नवा रायपुर में आयोजित ‘डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन-2026’ आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनेगा और प्रदेश को देश-दुनिया के प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर स्थित फेयरवे गोल्फ एंड कंट्री क्लब रिजॉर्ट में प्रतियोगिता की ट्रॉफी का अनावरण किया। इस अवसर पर 1983 विश्वकप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान एवं पीजीटीआई अध्यक्ष कपिल देव विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने स्वयं गोल्फ खेलकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।

    प्रतियोगिता में देश-विदेश के 132 प्रोफेशनल गोल्फर, जिनमें 18 विदेशी खिलाड़ी शामिल हैं, हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने बड़े स्तर के आयोजन से प्रदेश की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी, खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। उन्होंने गोल्फ के विकास के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

    खेल अधोसंरचना का हो रहा विस्तार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ की भावना के अनुरूप प्रदेश में विभिन्न खेलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और नेशनल ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजनों ने ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मंच दिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के साथ युवाओं को खेलों के माध्यम से आगे बढ़ने के नए अवसर मिल रहे हैं। क्रिकेट, हॉकी, तीरंदाजी और एथलेटिक्स के साथ अब गोल्फ के बड़े आयोजन प्रदेश की खेल यात्रा को नया आयाम दे रहे हैं।

    खिलाड़ियों को बस्तर-सरगुजा आने का न्योता

    मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए गोल्फ खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए उन्हें प्रतियोगिता के साथ बस्तर और सरगुजा की प्राकृतिक सुंदरता एवं जनजातीय संस्कृति देखने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी छत्तीसगढ़ से टूर्नामेंट की यादों के साथ यहां के आतिथ्य और प्राकृतिक सौंदर्य की स्मृतियां भी लेकर लौटें।

    हर साल हो गोल्फ टूर्नामेंट : कपिल देव

    पीजीटीआई अध्यक्ष कपिल देव ने आयोजन के लिए मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ सरकार का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन खेल संस्कृति और नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने इच्छा जताई कि छत्तीसगढ़ में यह प्रतियोगिता हर वर्ष आयोजित हो और इसकी तारीखें पहले से तय की जाएं, ताकि देश-विदेश के खिलाड़ी अपने कैलेंडर के अनुसार यहां आने की योजना बना सकें।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का वातावरण गोल्फ के लिए अनुकूल है और आने वाले समय में दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता की तरह छत्तीसगढ़ भी देश के प्रमुख गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में पहचान बना सकता है।

    पीजीटीआई के सीईओ अमनदीप चहल ने भी छत्तीसगढ़ की व्यवस्थाओं और आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि यहां आने वाले खिलाड़ी दोबारा खेलने की इच्छा व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब पर्यटन और अन्य खेलों के साथ उभरते गोल्फ डेस्टिनेशन के रूप में भी पहचान बना रहा है।

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