September 29, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    गरियाबंद दूसरे, बिलासपुर तीसरे और दुर्ग चौथे स्थान पर; साइबर ठगी से बचाव के लिए पुलिस का व्यापक जनजागरूकता अभियान

    रायपुर / शौर्यपथ / साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान में कोंडागांव जिले ने एक बार फिर प्रदेश में सर्वाधिक जागरूकता गतिविधियों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। अभियान के तहत लोगों को साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी लिंक, ओटीपी और डिजिटल अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।

    अभियान के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कोंडागांव में 55,157 जागरूकता गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिसके साथ जिला प्रदेश में शीर्ष पर है। गरियाबंद 46,930 गतिविधियों के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं बिलासपुर तीसरे और दुर्ग चौथे स्थान पर हैं।

    कोंडागांव पुलिस द्वारा लगातार स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच आम नागरिकों को साइबर अपराध के तरीकों और उनसे बचने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देना है।

    एक छोटी चूक, बड़ा नुकसान—पुलिस दे रही सतर्क रहने का संदेश

    जागरूकता अभियान के दौरान लोगों को अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, ओटीपी, एटीएम/बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने तथा संदिग्ध कॉल और मैसेज से सावधान रहने की सलाह दी जा रही है। साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देरी किए संबंधित माध्यम से शिकायत दर्ज कराने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।

    कोंडागांव का लगातार शीर्ष स्थान पर बने रहना जिले में चल रही साइबर जागरूकता गतिविधियों की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। पुलिस का प्रयास है कि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाला प्रत्येक नागरिक साइबर अपराधों के संभावित खतरे को समझे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल सतर्क कदम उठाए।

    दुर्ग / शौर्यपथ / महिला एवं बाल विकास विभाग दुर्ग द्वारा सेवा संकल्प योजना के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 स्थित शंकर नगर नौखोरिया बस्ती में जागरूकता एवं विविध गतिविधियों से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, एएनएम एवं मितानिन शामिल हुईं।

    कार्यक्रम में पार्षद खालिद रिजवी शेरू, महिला मोर्चा अध्यक्ष दिनेश्वरी पुरकर, पार्षद चंद्रशेखर चंद्राकर (वार्ड-10), अजीत वैद्य (वार्ड-12), ज्योति चौहान, छाया सोनी, बब्बीता चौधरी, जाकिर खोखर, वसीम कुरैशी एवं लक्ष्मता कुशरे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे। एएनएम श्रीमती पुष्पा धनकर और मितानिन कविता यादव ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

    सेवा संकल्प योजना के तहत बलून रेस, मेहंदी और रंगोली प्रतियोगिता सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम के दौरान स्वस्थ शिशुओं का चयन कर उन्हें सम्मानित किया गया। वहीं विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।

    कार्यक्रम में 2 स्वस्थ शिशु, 2 गोदभराई की महिलाएं, 2 अन्नप्राशन कार्यक्रम, 10 किशोरियां और 29 अन्य महिलाएं सहित हितग्राहियों ने सहभागिता की। इस दौरान महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

    मेहंदी एवं रंगोली प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले हितग्राहियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों में स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करना रहा।

    बिना निविदा लगातार कार्य दिए जाने का आधार क्या था? NULM कर्मचारी अपर्णा क्षत्रिय और पूर्व प्लेसमेंट अधिकारी मुक्तेश की भूमिका भी जांच के घेरे में; दो रेन बसेरों की अनियमितताओं की शिकायतें लंबित होने के बावजूद नई निविदा में ‘5 साल के अनुभव’ का आधार क्यों?

    शौर्यपथ विशेष /
    दुर्ग। जिला अस्पताल परिसर स्थित आश्रय स्थल की हालिया निविदा प्रक्रिया अब केवल एक संस्था की पात्रता का मामला नहीं रह गई है, बल्कि पिछले तीन वर्षों से चली आ रही कथित प्रक्रिया और पारदर्शिता के सवाल भी इसके केंद्र में आ गए हैं। शहर के कई महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा पिछले लगभग तीन वर्षों से राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) की कर्मचारी अपर्णा क्षत्रिय तथा पूर्व प्लेसमेंट अधिकारी मुक्तेश से आश्रय स्थल के संचालन और निविदा संबंधी जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई है।
    सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अन्य महिला समूह लगातार निविदा की जानकारी मांग रहे थे, तो पिछले तीन वर्षों के दौरान सार्थक महिला स्व-सहायता समूह को किस प्रक्रिया, आदेश अथवा प्राधिकरण के आधार पर लगातार कार्य दिया जाता रहा?
    यदि उस अवधि में विधिवत निविदा आमंत्रित नहीं की गई थी तो कार्य आवंटन का आधार क्या था? और यदि निविदा प्रक्रिया हुई थी तो उसकी सूचना अन्य इच्छुक महिला समूहों तक क्यों नहीं पहुंची? इन दोनों प्रश्नों का उत्तर संबंधित अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकता है।
    तीन साल की चुप्पी के बाद अचानक ‘5 साल का अनुभव’ क्यों महत्वपूर्ण?
    हालिया निविदा में सार्थक महिला स्व-सहायता समूह के पांच वर्ष के अनुभव को पात्रता के आधार के रूप में नोटशीट में स्वीकार किए जाने की बात सामने आई है। यहां प्रशासनिक जांच का महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि संबंधित पांच वर्षों के अनुभव का दस्तावेजी और भौतिक सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
    क्या संबंधित वर्षों के कार्यादेश, अनुबंध, भुगतान अभिलेख, कर्मचारी उपस्थिति, वेतन भुगतान, PF, दुर्घटना बीमा, शिफ्टवार ड्यूटी और आश्रयार्थियों के रजिस्टर की जांच की गई?
    यदि जांच की गई है तो उसका निरीक्षण प्रतिवेदन कहां है?
    और यदि जांच नहीं की गई तो केवल अनुभव के दावे के आधार पर पात्रता निर्धारित करने का आधार क्या था?
    पिछले तीन साल से दूसरे समूह पूछते रहे—निविदा कहां है?
    यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई महिला समूहों द्वारा लगातार निविदा संबंधी जानकारी मांगी जाती रही। यदि इच्छुक समूहों ने तीन वर्षों तक निविदा प्रक्रिया के बारे में जानकारी चाही, तो निगम और NULM के रिकॉर्ड में उनके आवेदन, पत्राचार और अधिकारियों द्वारा दिए गए जवाब उपलब्ध होने चाहिए।

    अब यह जांच का विषय है कि—
    पिछले तीन वर्षों में आश्रय स्थल के संचालन के लिए किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई?
    किस आदेश के आधार पर सार्थक महिला स्व-सहायता समूह को कार्य जारी रखा गया?
    क्या प्रत्येक वर्ष कार्य विस्तार अथवा संचालन जारी रखने का लिखित आदेश था?
    क्या किसी सक्षम समिति अथवा अधिकारी ने इसकी स्वीकृति बिना निविदा के किस आधार पर दी?
    अन्य इच्छुक महिला समूहों को समान अवसर देने के लिए कोई प्रक्रिया अपनाई गई?
    यदि निविदा नहीं हुई तो उसका प्रशासनिक कारण क्या था?
    और यदि निविदा हुई तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक अथवा संबंधित आवेदकों को उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए?
    इन सवालों के जवाब के बिना हालिया निविदा में पांच वर्ष के अनुभव को आधार बनाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    दो रैन बसेरों की शिकायतें भी बाजार विभाग में लंबित
    मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सार्थक महिला स्व-सहायता समूह द्वारा शहर के दो लाइन बसेरों के संचालन को लेकर भी कई अनियमितताओं की शिकायतें बाजार विभाग के समक्ष लंबित होने की बात सामने आई है।
    यदि किसी संस्था के पूर्व कार्यों के संबंध में शिकायतें लंबित थीं तो नई निविदा में उसी संस्था के अनुभव को पात्रता के महत्वपूर्ण आधार के रूप में स्वीकार करने से पहले उन शिकायतों का परीक्षण किया गया या नहीं—यह सवाल भी जांच का विषय होना चाहिए।
    यहां प्रशासनिक दृष्टि से मूल प्रश्न यह नहीं है कि संस्था दोषी है या निर्दोष, बल्कि यह है कि उसके पूर्व कार्यों से संबंधित शिकायतों का निस्तारण किए बिना उसके अनुभव को पात्रता के आधार के रूप में स्वीकार करने से पहले संबंधित अधिकारियों ने क्या सत्यापन किया?

    अपर्णा क्षत्रिय और पूर्व अधिकारी मुक्तेश से भी मांगा जाना चाहिए रिकॉर्ड
    पिछले तीन वर्षों में निविदा की जानकारी मांगने वाले महिला समूहों के आवेदन, उनके जवाब, संबंधित फाइलों की नोटशीट और अधिकारियों के बीच हुआ पत्राचार अब इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकते हैं।
    NULM से जुड़ी कर्मचारी अपर्णा क्षत्रिय तथा पूर्व प्लेसमेंट अधिकारी मुक्तेश के कार्यकाल से संबंधित रिकॉर्ड में यह स्पष्ट होना चाहिए कि आश्रय स्थल के संचालन के संबंध में कौन-कौन से प्रस्ताव आए, किन संस्थाओं ने जानकारी मांगी, उन्हें क्या जवाब दिया गया और सार्थक महिला स्व-सहायता समूह का कार्य किस आधार पर जारी रखा गया।
    यदि तीन वर्षों तक किसी वैकल्पिक निविदा प्रक्रिया के बिना कार्य जारी रहा है, तो उसकी प्रशासनिक वैधता और सक्षम स्वीकृति की जांच आवश्यक है।
    रात की ड्यूटी से लेकर मैनेजर तक—सिर्फ प्रमाणपत्र नहीं, जमीन पर सत्यापन जरूरी
    आश्रय स्थल के संचालन में पूर्णकालिक मैनेजर, शिफ्टवार केयरगिवर, महिला निवासियों के लिए महिला कर्मचारी, कर्मचारियों के भुगतान, PF, दुर्घटना बीमा और उपस्थिति जैसे विषय केवल कागजी औपचारिकताएं नहीं हैं।
    इसलिए पिछले चार-पांच वर्षों का—
    मैनेजर → केयरगिवर → शिफ्ट ड्यूटी → उपस्थिति → वेतन भुगतान → PF → बीमा → आश्रयार्थी रजिस्टर → प्रवेश-निकासी रिकॉर्ड → रात्रिकालीन सुरक्षा → भौतिक निरीक्षण
    का पूरा रिकॉर्ड जांच के दायरे में आना चाहिए।
    यदि रिकॉर्ड में कर्मचारी दर्ज हैं तो क्या वे वास्तव में ड्यूटी पर उपस्थित थे? यदि रात्रिकालीन चौकीदार की व्यवस्था थी तो उसका नाम, ड्यूटी चार्ट और भुगतान अभिलेख क्या कहते हैं? यदि आश्रय स्थल में महिलाओं के ठहरने की व्यवस्था थी तो पिछले वर्षों में कितनी महिलाएं वहां रुकीं?
    इन प्रश्नों का उत्तर कागज और मौके की वास्तविकता के मिलान से ही मिल सकता है।
    अब मामला केवल निविदा का नहीं, तीन साल की पूरी प्रक्रिया का है
    पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रश्न यही बनता है कि यदि तीन वर्षों से महिला समूह निविदा की जानकारी मांग रहे थे, तो उस अवधि में पारदर्शी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया क्यों नहीं दिखाई देती? और यदि प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी तो उसके दस्तावेज संबंधित समूहों और जांच के लिए उपलब्ध क्यों नहीं हैं?
    इसी तरह दो लाइन बसेरों के संचालन से संबंधित शिकायतें यदि बाजार विभाग में लंबित हैं, तो उनका परीक्षण किए बिना उसी संस्था के पूर्व अनुभव को नई निविदा में कितना और किस आधार पर महत्व दिया गया—यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

    निगम आयुक्त लीना कोसाम के सामने अब पूरी फाइल खोलने का सवाल
    दुर्ग नगर निगम की आयुक्त IAS लीना कोसाम के समक्ष अब इस मामले में केवल हालिया निविदा की जांच पर्याप्त नहीं होगी। निष्पक्ष जांच के लिए पिछले तीन वर्षों की पूरी प्रक्रिया, सभी निविदा/कार्यादेश, विस्तार आदेश, भुगतान, शिकायतें, निरीक्षण रिपोर्ट, अनुभव प्रमाणपत्र, कर्मचारी व्यवस्था और आश्रयार्थियों के रजिस्टर को एक साथ देखा जाना चाहिए।
    साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बाजार विभाग के अधिकारी अभ्युदय मिश्रा ने हालिया निविदा में पांच वर्ष के अनुभव को स्वीकार करने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज स्वयं जांचे और NULM स्तर पर अपर्णा क्षत्रिय द्वारा किस प्रकार का सत्यापन किया गया।
    यदि अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है तो दस्तावेज उन्हें सही साबित करेंगे। यदि प्रक्रिया में कमी रही है तो वही रिकॉर्ड जिम्मेदारी तय करने का आधार बन सकता है।
    आश्रय स्थल गरीब और बेघर लोगों के लिए है। इसलिए उसकी निविदा और संचालन में सबसे महत्वपूर्ण कसौटी किसी समूह का नाम या अनुभव प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि पारदर्शिता, पात्रता, वास्तविक सेवा और सार्वजनिक धन का जवाबदेह उपयोग होना चाहिए।
    अब दुर्ग नगर निगम प्रशासन के सामने मूल प्रश्न यही है—
    तीन साल से निविदा की जानकारी मांगने वाले महिला समूहों को जवाब क्यों नहीं मिला, बिना स्पष्ट निविदा प्रक्रिया के कार्य जारी रखने का आधार क्या था और लंबित शिकायतों के बीच ‘पांच साल के अनुभव’ को किस स्तर पर सत्यापित किया गया?

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की पहली आधिकारिक राज्य स्तरीय छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के पहले सीजन के लिए दो दिवसीय चयन ट्रायल सोमवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, रायपुर के पिच-1 पर शुरू हुआ। ट्रायल के लिए पंजीकृत 373 खिलाड़ियों में से 223 खिलाड़ी पहले दिन मैदान पर उतरे और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

    उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने ट्रायल स्थल पहुंचकर खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में हॉकी की जड़ें गहरी हैं और मैदान पर खिलाड़ियों का उत्साह इसका प्रमाण है। सीएचएल का उद्देश्य युवा खिलाड़ियों को ऐसा मंच देना है, जहां उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव मिले।

    छह टीमों के लिए होगा चयन

    खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा लीग की छह टीमों के खिलाड़ियों के चयन के लिए ट्रायल आयोजित किया गया है। चयन प्रक्रिया छत्तीसगढ़ हॉकी संघ द्वारा निर्धारित नियमों और मापदंडों के अनुसार खेल अधिकारियों, विशेषज्ञों, हॉकी संघ तथा वरिष्ठ खिलाड़ियों के पैनल की निगरानी में संचालित हो रही है।

    पैनल में खेल अधिकारी दीनू प्रसाद पटेल, वरिष्ठ प्रशिक्षक रश्मि संध्या एक्का और राकेश टोप्पो, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मृणाल चौबे, अनुराग श्रीवास्तव तथा वरिष्ठ खिलाड़ी अमिताभ मानिकपुरी शामिल हैं।

    29 सितंबर को सुबह 9 बजे से ट्रायल जारी रहेगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित खिलाड़ियों की सूची और प्रतिवेदन खेल संचालनालय को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर छह टीमों का गठन होगा।

    21 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होगा पहला सीजन

    छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का पहला सीजन 21 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, रायपुर में होगा। इसमें राजधानी रॉयल्स, चित्रकोट चैलेंजर्स, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स, चक्रधर चैंपियंस, न्यायधानी नाइट्स और मैनपाट टाइटन्स छह फ्रेंचाइजी टीमें खिताब के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी।

    प्रत्येक टीम में 22 खिलाड़ी होंगे, जिनमें छत्तीसगढ़ के 18 और राज्य के बाहर के चार राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल होंगे। लीग का उद्देश्य राज्य के हॉकी इकोसिस्टम को मजबूत करना, उभरती प्रतिभाओं को प्रतिस्पर्धी अनुभव देना और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके लिए अवसर बढ़ाना है।

    “चलो रे संगी, हॉकी खेलबो” टैगलाइन के साथ आयोजित यह लीग छत्तीसगढ़ में हॉकी के प्रति बढ़ती रुचि और क्षेत्रीय खेल प्रतिभाओं को बड़े मंच से जोड़ने की पहल के रूप में सामने आई है।

    मुख्यमंत्री साय ने किया सम्मान, कहा—छत्तीसगढ़ की बेटी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया देश-प्रदेश का मान
    रायपुर / शौर्यपथ / एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य और छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की बेटी सुश्री संजू देवी ने मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए 51 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संजू देवी ने उत्कृष्ट खेल, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। राज्य सरकार प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
    जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 की महिला कबड्डी स्पर्धा के फाइनल में भारत ने ईरान को हराकर स्वर्ण पदक जीता। भारतीय टीम की इस उपलब्धि में संजू देवी ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
    मुख्यमंत्री ने संजू देवी से प्रतियोगिता के अनुभव और टीम के प्रदर्शन पर चर्चा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धियां प्रदेश के गांवों और छोटे शहरों के युवाओं में खेल के प्रति विश्वास और उत्साह बढ़ाती हैं।
    संजू देवी ने सम्मान और प्रोत्साहन के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सहयोग उन्हें भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा।

    राहत शिविरों में सेवा एवं समपर्ण से किए जा रहे कार्य
    रायपुर / शौर्यपथ / धमतरी जिले में लगातार हो रही बारिश और जलभराव के बीच जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों के समन्वित प्रयासों से संकट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का सिलसिला लगातार जारी है।
    कुरुद क्षेत्र के लोमश ऋषि आश्रम में बाढ़ के पानी के बीच फंसे 9 लोगों को पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन एवं पुलिस की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और स्थानीय लोगों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी 9 लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर राहत दल, पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं।
    सलोनी राहत शिविर में बेहतर व्यवस्थाएं, राजस्व अमले ने सेवा और समर्पण से किया कार्य
    सलोनी स्थित बाढ़ राहत शिविर में साफ-सफाई, स्वच्छता एवं भोजन व्यवस्था संतोषजनक और व्यवस्थित रही। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरंतर जायजा ले रहे हैं। राहत शिविर में प्रभावित परिवारों के लिए सुबह नाश्ते के साथ नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। शिविर परिसर में स्वच्छता एवं हाईजीन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

    गैस से खाना जल्दी तैयार, बच्चों को स्कूल भेजने और काम पर जाने में बच रहा समय

    रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिले गैस कनेक्शन ने सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत सकोला निवासी श्रीमती चंपा पात्र की रोजमर्रा की जिंदगी आसान कर दी है। पहले वे लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाती थीं। बारिश में लकड़ी गीली होने से चूल्हा जलाने में काफी समय लगता था और धुएं से आंखों में आंसू आने जैसी परेशानी भी होती थी।

    गैस कनेक्शन मिलने के बाद अब गैस चालू करते ही खाना बनाना शुरू हो जाता है। इससे लकड़ी जुटाने और चूल्हा जलाने की मशक्कत खत्म हुई है। सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए भोजन तैयार करने से लेकर स्वयं समय पर काम पर निकलने में भी समय की बचत हो रही है।

    चंपा बताती हैं कि अचानक मेहमान आने पर भी अब लकड़ी और चूल्हा जलने का इंतजार नहीं करना पड़ता। जरूरत पड़ते ही भोजन तैयार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गैस मिलने से रसोई का काम आसान हुआ है और परिवार को समय देने के साथ अन्य कामों के लिए भी समय मिल रहा है।

    चंपा पात्र ने उज्ज्वला योजना की सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी बताती है कि रसोई गैस ने खाना बनाने के तरीके के साथ-साथ परिवार की रोजमर्रा की दिनचर्या को भी सहज बनाया है।

    सुकमा के बाढ़ प्रभावित इलाकों का मुख्यमंत्री ने किया दौरा, राहत शिविर में स्वयं भोजन परोसकर बढ़ाया हौसला; करीब 300 परिवारों को मिलेंगे 10-10 हजार रुपये अतिरिक्त

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को सुकमा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने शबरीनगर, श्रीनगर, लाइनपारा और कोंटा क्षेत्र का निरीक्षण कर पीड़ित परिवारों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और राहत एवं पुनर्वास में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।
    शबरीनगर स्थित राहत एवं स्वास्थ्य शिविर में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन, पेयजल सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली। प्रभावित लोगों के बीच पहुंचकर उन्होंने स्वयं भोजन परोसा और आत्मीयता से उनका हालचाल जाना। इसके बाद वे एक प्रभावित परिवार के घर भी पहुंचे और मकान, घरेलू सामान व अन्य संपत्ति को हुए नुकसान की जानकारी लेकर परिवार को ढांढस बंधाया।

    300 परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता

    मुख्यमंत्री ने बाढ़ में घरों में रखे सामान को हुए नुकसान से प्रभावित करीब 300 परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता देने के निर्देश दिए। यह सहायता आरबीसी 6-4 के तहत मिलने वाली पात्रता आधारित क्षतिपूर्ति के अतिरिक्त होगी।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ से मकानों, घरेलू सामान और अन्य परिसंपत्तियों को हुए नुकसान का शीघ्र आकलन कर पात्र प्रभावितों को आरबीसी 6-4 के तहत मुआवजा जल्द उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सहायता पहुंचाने में किसी भी प्रकार का विलंब न हो और कोई पात्र परिवार सहायता से वंचित न रहे।

    अतिवृष्टि से बिगड़े हालात, 19 राहत केंद्रों में व्यवस्था

    उल्लेखनीय है कि 23 एवं 24 सितंबर की अतिवृष्टि के बाद सुकमा के कई क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी थी। कोंटा में लगातार बारिश से शबरी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे के गांवों के अलावा नगर पालिका के चार वार्डों में पानी भर गया था। प्रभावितों के लिए कोंटा क्षेत्र में 19 राहत केंद्र बनाए गए, जहां ठहरने, भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।

    प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के साथ स्वास्थ्य शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं। जरूरतमंद परिवारों को तात्कालिक सहायता, सूखा राशन और गर्म वस्त्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, पेयजल स्रोतों का क्लोरीनेशन और स्वच्छता संबंधी उपाय किए जा रहे हैं।

    राहत के बाद पुनर्वास पर जोर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को सामान्य जीवन में वापस लाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को राहत से लेकर क्षति आकलन और सहायता राशि वितरण तक पूरी प्रक्रिया संवेदनशीलता एवं तत्परता से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों के बाद पुनर्वास के कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जाए और प्रत्येक प्रभावित परिवार की जरूरत के अनुसार शासन की सहायता समय पर पहुंचे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    धान खरीदी, जल प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों की समीक्षा; 30 सितंबर तक रिक्त पदों की जानकारी देने के निर्देश

    रायपुर / शौर्यपथ / मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य शासन के विभागीय सचिवों की बैठक हुई। इसमें विभिन्न योजनाओं और विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए गए।

    बैठक में धान खरीफ विपणन वर्ष की तैयारियों, पेयजल योजनाओं और शहरी एवं औद्योगिक क्षेत्रों में जल प्रबंधन एवं उपचार की समीक्षा की गई। नगरीय विकास विभाग को सिटी वाटर प्लान विकसित भारत-2047 के अनुरूप तैयार करने, परिवहन विभाग को ई-व्हीकल को बढ़ावा देने और खाद्य विभाग को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी तैयार करने के निर्देश दिए गए। 15 से 22 अक्टूबर की अवधि में ग्राम सभाओं के आयोजन की तैयारियां भी समय पर पूरी करने कहा गया।

    जिलों की निगरानी के लिए स्कोर कार्ड

    मुख्य सचिव ने योजनाओं की कलेक्टर स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग के लिए जिला स्कोर कार्ड को अंतिम रूप देने को कहा। कोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम को प्रभावी बनाने और पारस पोर्टल से जुड़े अक्टूबर माह के प्रस्तावों पर आईटी विभाग के साथ समन्वय के निर्देश दिए गए।

    शासन के सभी विधिक नियमों और निर्देशों की संदर्भ प्रतियां ई-गजट पर अपलोड करने, लंबित पेंशन प्रकरणों की विभागवार निगरानी तथा उनके निराकरण की समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। एपीएआर को आईगॉट से लिंक करने और कर्मचारियों के क्षमता निर्माण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

    30 सितंबर तक देनी होगी रिक्त पदों की जानकारी

    कर्मचारी चयन मंडल के लिए विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की जानकारी 30 सितंबर तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में लोक सेवा गारंटी अधिनियम, रिफॉर्म उत्सव, 2 अक्टूबर की ग्राम सभाओं और सेवा सेतु की प्रगति की भी समीक्षा हुई। बताया गया कि 38 विभागों की 907 सेवाएं वर्तमान में सेवा सेतु के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

    फायर सेफ्टी अधिनियम में आवश्यक सुधार, माय भारत पोर्टल की गतिविधियों में तेजी तथा विभागीय क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया गया।

    एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स करेगी समेकित रिपोर्टिंग

    गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत ने बताया कि एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स विभिन्न विभागों से सूचनाएं एकत्र कर उनकी समेकित रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे भारत सरकार को भेजा जाएगा।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, ऋचा शर्मा सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने अंत में सभी विभागों को स्पष्ट कार्ययोजना बनाकर निगरानी और लक्ष्यों की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

      रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर महानदी के बढ़ते जलस्तर और जांजगीर-चांपा जिले के तटीय क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। कलेक्टर जन्मेजय महोबे और पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने शिवरीनारायण पहुंचकर बैराज, पुल, तटीय क्षेत्रों और प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर राहत-बचाव तैयारियों का जायजा लिया। अधिकारियों को जलस्तर और बहाव की सतत निगरानी तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    कलेक्टर-एसपी ने श्री महंत लालदास महाविद्यालय में बनाए गए राहत शिविर का भी निरीक्षण किया। यहां प्रभावित नागरिकों के ठहरने के साथ भोजन, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

    पुल पर आवागमन बंद, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी

    महानदी पुल पर पानी का बहाव बढ़ने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से आवागमन बंद कर दिया गया है। पुल एवं आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और लोगों को तेज बहाव के पास जाने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

    स्वास्थ्य टीमें तैनात

    प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात हैं और नागरिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। आवश्यक दवाइयों के साथ जलभराव से संभावित बीमारियों और संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी उपाय किए जा रहे हैं।

    कलेक्टर-एसपी ने राजस्व, पुलिस, नगर सेना, जल संसाधन और स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए मानव संसाधन और अन्य जरूरी संसाधन तैयार रखे गए हैं।

    मुनादी कर लोगों को किया जा रहा सतर्क

    संवेदनशील और तटीय क्षेत्रों में मुनादी के माध्यम से लोगों को संभावित जलभराव और सुरक्षा सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। नदी, पुल, घाट और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने तथा सेल्फी या वीडियो बनाने का जोखिम नहीं उठाने की अपील की गई है। प्रशासन द्वारा बंद किए गए मार्गों पर जाने से भी बचने कहा गया है।

    जिला प्रशासन महानदी के जलस्तर और तटीय क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। पुलिस, राजस्व, नगर सेना, जल संसाधन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें राहत-बचाव के लिए मुस्तैद हैं।

    निरीक्षण के दौरान नगर पालिका शिवरीनारायण अध्यक्ष राहुल थवाईत, एसडीएम जांजगीर सुब्रत प्रधान, एसडीएम शिवरीनारायण भावना साहू, कार्यपालन अभियंता शशांक सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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