August 05, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    दीपक वैष्णव की खास रिपोर्ट 

    कोंडागांव |  

    10 मार्च को कोंडागांव जिले के किसानों की समस्याओं को देखते हुए कोंडागांव की बेटी एवं कोंडागांव की विधायक सुश्री लता उसेंडी ने विधानसभा में मुख्यमंत्री के समक्ष लो वोल्टेज की समस्या को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की, जिससे खेती कार्य प्रभावित न हो।

    विधायक सुश्री लता उसेंडी ने विधानसभा में मुख्यमंत्री से पूछा कि कोंडागांव जिले में वर्षवार बिजली की खपत कितनी है, वर्तमान में कितने विद्युत सबस्टेशन संचालित हैं तथा उनसे कितनी बिजली की सप्लाई की जा रही है। साथ ही जिले में प्रस्तावित नए सबस्टेशनों की जानकारी एवं उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में भी जानकारी मांगी।

    इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि पिछले तीन वर्षों में कितने किसानों ने स्थायी कृषि बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया है और कितने किसान ऐसे हैं जिन्होंने डिमांड राशि जमा करने के बावजूद अभी तक कनेक्शन प्राप्त नहीं किया है। साथ ही यह भी जानना चाहा कि इन किसानों को कब तक स्थायी कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

    उन्होंने यह भी सवाल किया कि जिले में शासकीय संस्थाओं पर बिजली का कितना बकाया है तथा क्या सरकार सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली आपूर्ति की कोई योजना बना रही है।

    इस पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जवाब देते हुए बताया कि कोंडागांव जिले में वर्ष 2023-24 में 334.21 मिलियन यूनिट, वर्ष 2024-25 में 379.78 मिलियन यूनिट तथा वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 248.58 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई है।

    वर्तमान में जिले में 132/33 केवी का एक उपकेंद्र कोंडागांव (मसोरा) में संचालित है। इसके अलावा 33/11 केवी के 15 उपकेंद्रों से जिले को बिजली आपूर्ति की जा रही है, जबकि 9 अन्य उपकेंद्र ऐसे हैं जिनकी आपूर्ति जिले के बाहर से हो रही है। जिले में 1 नया 132/33 केवी और 4 नए 33/11 केवी सबस्टेशन प्रस्तावित हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में 13,381 किसानों ने स्थायी कृषि कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। इनमें से 7,484 कृषि सिंचाई पंपों का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 3,692 पंपों का कार्य पूरा हो चुका है और 3,792 पंपों का कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

    इसके अलावा कोंडागांव जिले में शासकीय संस्थाओं पर जनवरी 2026 तक लगभग 17.93 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। वहीं शासकीय संस्थानों में सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली आपूर्ति के लिए सोलर प्लांट स्थापित करने की कार्ययोजना पर भी काम किया जा रहा है।

    दुर्ग / शौर्यपथ समाचार

    छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर के लिए गौरव का क्षण तब सामने आया जब शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति एवं समाजसेवी मनीष पारख को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रिका Forbes India की प्रतिष्ठित सूची “Game-Changing Leaders” में स्थान मिला है। यह सम्मान उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में किए जा रहे उनके नवाचारी और प्रभावशाली कार्यों के लिए प्रदान किया गया है।

    फोर्ब्स इंडिया द्वारा जारी इस सूची में देशभर के उन चुनिंदा व्यक्तित्वों को शामिल किया जाता है जिन्होंने अपने कार्यों और दूरदर्शी नेतृत्व से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। ऐसे में दुर्ग शहर के निवासी मनीष पारख का इस सूची में शामिल होना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से दुर्ग जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल

    मनीष पारख मेघ गंगा ग्रुप के संस्थापक एवं चेयरमैन हैं। उनके नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लाइफ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर का संचालन किया जा रहा है, जो आधुनिक तकनीक और विश्वसनीय जांच सेवाओं के माध्यम से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में कार्यरत है।

    आज के समय में सटीक और समय पर जांच स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला मानी जाती है। ऐसे में लाइफ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर के माध्यम से मनीष पारख ने दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण डायग्नोस्टिक सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

    शिक्षा क्षेत्र में नए आयाम

    स्वास्थ्य के साथ-साथ मनीष पारख शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी संस्था Avish Educom के माध्यम से आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और नई पीढ़ी को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    शिक्षा के क्षेत्र में उनकी पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना है।

    “मोर शहर-मोर जिम्मेदारी” के तहत शहर सौंदर्यीकरण

    मनीष पारख केवल उद्योग और संस्थागत विकास तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दुर्ग शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

    “मोर शहर-मोर जिम्मेदारी” अभियान के तहत दुर्ग शहर के विभिन्न चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण और शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए वे लगातार पहल कर रहे हैं। उनका मानना है कि शहर की पहचान केवल विकास से नहीं बल्कि उसकी स्वच्छता, सौंदर्य और नागरिक जिम्मेदारी से भी बनती है।

    फोर्ब्स में स्थान मिलने पर क्या बोले मनीष पारख

    फोर्ब्स इंडिया की सूची में शामिल होने पर मनीष पारख ने इसे समाज के विश्वास और सहयोग का परिणाम बताया।

    उन्होंने कहा –

    “आप सभी के साथ और आपके विश्वास का यह परिणाम मेरे और मेरे परिवार के लिए हर्ष और उल्लास का विषय है। इस भरोसे को बनाए रखने के लिए मैं सदैव कर्तव्यबद्ध रहूँगा।”

    उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं बल्कि उन सभी सहयोगियों, कर्मचारियों और समाज के लोगों का है जिन्होंने उनके प्रयासों पर विश्वास किया और साथ दिया।

    समाज के लिए प्रेरणा

    फोर्ब्स जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक पत्रिका में नाम दर्ज होना इस बात का संकेत है कि दुर्ग जैसे शहरों से भी ऐसे नेतृत्व उभर रहे हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।

    स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्रों में किए जा रहे मनीष पारख के कार्य न केवल स्थानीय समाज के लिए लाभकारी हैं बल्कि युवा उद्यमियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।

    फोर्ब्स इंडिया की “Game-Changing Leaders” सूची में स्थान मिलने से यह स्पष्ट हो गया है कि दूरदर्शी सोच, सामाजिक प्रतिबद्धता और नवाचार के साथ किया गया कार्य किसी भी व्यक्ति को वैश्विक मंच तक पहुंचा सकता है।

    दुर्ग । नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम माह मार्च में राजस्व वसूली को गति देने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। निगम प्रशासन ने करदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्य निगम कार्यालय सहित सभी जोन कार्यालयों में टैक्स काउंटर खोल दिए हैं। साथ ही नागरिकों को राहत देने के लिए शनिवार और रविवार को भी काउंटर खुले रखने का निर्णय लिया गया है।

    निगम अधिकारियों ने बताया कि करदाता 31 मार्च 2026 से पहले चालू वित्तीय वर्ष का संपत्तिकर और अन्य कर बिना किसी अतिरिक्त अधिभार या जुर्माने के जमा कर सकते हैं। समय सीमा के बाद कर जमा करने पर नियमानुसार अधिभार लगाया जाएगा।

    निगम के सहायक राजस्व निरीक्षक (ARI) भी वार्डों में घर-घर जाकर करदाताओं से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें समय पर टैक्स जमा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

    इन करों का करना होगा भुगतान

    नगर निगम क्षेत्र के भवन एवं भूमि स्वामियों से अपील की गई है कि वे संपत्तिकर, यूजर चार्ज, जलकर, भू-भाटक तथा दुकान किराया सहित सभी बकाया कर 31 मार्च 2026 से पहले अनिवार्य रूप से जमा करें। जिन करदाताओं का पूर्व वर्षों का संपत्तिकर बकाया है, वे भी समय सीमा से पहले भुगतान कर अधिभार से बच सकते हैं।

    घर बैठे ऑनलाइन भुगतान की सुविधा ?

    नागरिकों की सुविधा के लिए नगर निगम द्वारा ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। करदाता नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से घर बैठे ही अपने करों का भुगतान कर सकते हैं:

    ? https://municipalcorporation.in/⁠�

    अवकाश के दिन भी खुलेंगे काउंटर ⏰

    निगम प्रशासन के अनुसार प्रत्येक शनिवार और रविवार को भी सभी जोन कार्यालयों और मुख्य कार्यालय में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संपत्तिकर काउंटर खुले रहेंगे, जिससे करदाता अवकाश के दिनों में भी आसानी से कर जमा कर सकेंगे।

    कमिश्नर की अपील

    नगर निगम कमिश्नर सुमित अग्रवाल ने शहर के सभी करदाताओं से अपील करते हुए कहा है कि वे 31 मार्च 2026 से पहले अपने सभी बकाया करों का भुगतान कर दें। इससे उन्हें अतिरिक्त अधिभार से बचने का लाभ मिलेगा और निगम को शहर के विकास कार्यों के लिए आवश्यक राजस्व प्राप्त होगा।

    उन्होंने बताया कि निगम के अधिकृत सहायक राजस्व निरीक्षक वार्डों में घर-घर पहुंचकर कर वसूली कर रहे हैं, जिनके पास भी नागरिक सुरक्षित रूप से कर राशि जमा कर सकते हैं।

    रायपुर/नई दिल्ली । 

    नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित “अमृत मित्र महोत्सव” में छत्तीसगढ़ की जल योद्धाओं ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराते हुए देशभर के सामने अपने कार्यों और अनुभवों को साझा किया। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की 75 “अमृत मित्र” महिलाओं ने भाग लिया।

    कार्यक्रम में बिलासपुर नगर निगम की श्रीमती रुक्मिणी गोस्वामी और लोरमी की श्रीमती हेमलता खत्री ने केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल की मौजूदगी में देशभर से आई लगभग 1000 अमृत मित्रों के साथ अपने अनुभव साझा किए और शहरी जल प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

    यह सम्मेलन अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT 2.0) के अंतर्गत महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से आई महिलाओं ने जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और शहरी विकास से जुड़े अपने-अपने नवाचार और अनुभव साझा किए।

    छत्तीसगढ़ से शामिल हुईं ये महिलाएं राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में वृक्षारोपण, जल गुणवत्ता परीक्षण, जल संरचनाओं के संचालन तथा सामुदायिक जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन तथा विकास मंत्री श्री अरुण साव ने 11 मार्च को रायपुर रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर इन महिलाओं के दल को नई दिल्ली के लिए रवाना किया था।

    “वीमेन फॉर ट्री” अभियान से पर्यावरण संरक्षण और आजीविका

    स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ये महिलाएं ‘वीमेन फॉर ट्री’ अभियान के तहत वृक्षारोपण, हरित क्षेत्रों के संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने का कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही वे शहरों में जल गुणवत्ता परीक्षण, जल उपचार संयंत्र (WTP) और वितरण नेटवर्क के संचालन में सहयोग भी कर रही हैं।

    साथ ही ये महिलाएं जल संरक्षण, स्वच्छता और ‘कचरे से कंचन’ जैसे अभियानों के माध्यम से आम नागरिकों को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

    राष्ट्रीय मंच पर साझा किए अनुभव

    महोत्सव में अपने अनुभव साझा करते हुए श्रीमती रुक्मिणी गोस्वामी ने कहा कि

    “हम केवल पौधे ही नहीं लगा रहे हैं, बल्कि अपने शहरों के पर्यावरण और भविष्य को सुरक्षित बनाने का काम भी कर रहे हैं। इस पहल से हमें आजीविका का अवसर मिला है, जिससे हम अपने परिवार की आय में भी योगदान दे पा रहे हैं।”

    वहीं श्रीमती हेमलता खत्री ने कहा कि

    “जल संरक्षण के लिए हम बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कर रहे हैं और पौधों की देखभाल अपने बच्चे की तरह करते हैं। उन्हें बढ़ते हुए देखकर हमें बेहद खुशी और संतोष मिलता है।”

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दी बधाई

    उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव ने इस उपलब्धि पर महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि भारत मंडपम जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा अपने कार्यों और अनुभवों को प्रस्तुत करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

    उन्होंने कहा कि “वीमेन फॉर ट्री – अमृत मित्र योजना” के माध्यम से महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका और आत्मनिर्भरता का अवसर मिल रहा है, जिससे वे समाज और पर्यावरण दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ /  ✈️

    देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में शामिल इंडिगो (IndiGo) ने विमान ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते 14 मार्च 2026 से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज लागू करने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को अब पहले की तुलना में अधिक किराया देना होगा।

    एयरलाइन कंपनी के अनुसार यह अतिरिक्त शुल्क नई टिकट बुकिंग पर ही लागू होगा, यानी 14 मार्च या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर यह सरचार्ज लिया जाएगा।

    दूरी और सेक्टर के आधार पर बढ़ा किराया

    इंडिगो द्वारा लागू किए गए फ्यूल सरचार्ज को यात्रा की दूरी और अंतरराष्ट्रीय सेक्टर के आधार पर तय किया गया है।

    घरेलू उड़ानें और भारतीय उपमहाद्वीप: ₹425 प्रति सेक्टर

    मिडल ईस्ट (Middle East): ₹900 प्रति सेक्टर

    दक्षिण पूर्व एशिया और चीन: ₹1,800 प्रति सेक्टर

    अफ्रीका और पश्चिम एशिया: ₹1,800 प्रति सेक्टर

    यूरोप: ₹2,300 प्रति सेक्टर

    इस निर्णय के बाद छोटी दूरी की उड़ानों से लेकर लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक यात्रियों के किराए में वृद्धि देखने को मिलेगी।

    ईंधन की कीमतों में 85% से अधिक उछाल

    इंडिगो ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और तनावपूर्ण हालात के कारण वैश्विक बाजार में एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 85 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    एयरलाइन उद्योग में ईंधन सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। इंडिगो के अनुसार कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर ही खर्च होता है, जिसके कारण कंपनी को यह अतिरिक्त शुल्क लागू करना पड़ा।

    पहले एयर इंडिया ने भी किया था ऐलान

    गौरतलब है कि इंडिगो से पहले एयर इंडिया ने भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला किया था। अब इंडिगो के इस कदम के बाद अन्य एयरलाइनों के भी इसी दिशा में कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है।

    यात्रियों पर पड़ेगा असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की लागत बढ़ेगी, जिससे यात्रियों के बजट पर असर पड़ सकता है। हालांकि एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच परिचालन संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी हो गया है।

    ✈️ विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और विमान ईंधन की कीमतें आगे भी बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में हवाई किराए में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / 

    भारतीय राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग का नोटिस प्रस्तुत किया है। जानकारी के अनुसार, यह भारत के इतिहास में किसी मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की पहल का पहला मामला माना जा रहा है।

    इस प्रस्ताव को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह कदम उठाया है।

    ममता बनर्जी की पहल पर तैयार हुआ प्रस्ताव

    सूत्रों के अनुसार इस महाभियोग प्रस्ताव की रणनीति और निर्णय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की पहल पर तैयार किया गया। टीएमसी का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखना लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसी उद्देश्य से यह प्रस्ताव लाया गया है।

    193 सांसदों के हस्ताक्षर

    महाभियोग प्रस्ताव पर कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, जिनमें

    लोकसभा के 130 सांसद

    राज्यसभा के 63 सांसद शामिल हैं।

    संवैधानिक नियमों के अनुसार महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। इस लिहाज से प्रस्ताव को प्रारंभिक समर्थन की आवश्यक संख्या प्राप्त हो चुकी है।

    17 विपक्षी दलों का समर्थन

    टीएमसी के इस कदम को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), द्रमुक (DMK), आम आदमी पार्टी (AAP), शरद पवार की एनसीपी सहित लगभग 17 विपक्षी दलों का समर्थन बताया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि हाल के समय में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्न खड़े हुए हैं, जिन्हें संसद के माध्यम से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

    लगाए गए गंभीर आरोप

    विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण के आरोप लगाए हैं। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    प्रमुख आरोपों में शामिल हैं –

    चुनावी अनियमितताओं की जांच में कथित रूप से बाधा उत्पन्न करना

    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव

    बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप

    विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम काटने को लेकर आपत्ति

    विपक्ष का दावा है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

    क्या कहता है संविधान

    भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया अत्यंत कठिन और कठोर होती है। यह प्रक्रिया लगभग उसी प्रकार होती है जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया।

    इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक होता है, जिसमें:

    सदन के कुल सदस्यों का बहुमत

    तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत का समर्थन शामिल होता है।

    आगे की प्रक्रिया क्या होगी

    अब यह महाभियोग नोटिस लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के पास जाएगा। यदि वे इसे स्वीकार करते हैं तो आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति गठित की जा सकती है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर संसद में आगे की कार्रवाई तय होगी।

    राजनीतिक और संवैधानिक महत्व

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि इससे चुनाव आयोग की स्वायत्तता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक बहस छिड़ सकती है।

    यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो यह आने वाले समय में भारतीय लोकतंत्र और चुनावी प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक परीक्षण साबित हो सकता है।

    नवा रायपुर / शौर्यपथ / 

    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत राज्य में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को गति देने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी कड़ी में गठित “छत्तीसगढ़ राज्य क्षमता निर्माण क्रियान्वयन एवं समन्वय समिति” की पहली बैठक 17 मार्च 2026 को अपराह्न 4 बजे मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर में आयोजित की जाएगी।

    यह बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाइब्रिड मोड (भौतिक एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के माध्यम से आयोजित होगी, जिसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

    मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन की होगी समीक्षा

    सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के प्रशासनिक मार्गदर्शन में गठित यह समिति राज्य में मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा करेगी। साथ ही विभिन्न विभागों में संचालित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा क्षमता निर्माण को संस्थागत रूप देने पर भी कार्य किया जाएगा।

    iGOT प्लेटफॉर्म के उपयोग की होगी समीक्षा

    राज्य नोडल अधिकारी (मिशन कर्मयोगी – iGOT), सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार बैठक में राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा iGOT डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म के उपयोग की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय के उपायों पर भी चर्चा होगी।

    नई तकनीकों के उपयोग पर होगा विचार

    बैठक के एजेंडे में राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों (ATI सहित अन्य संस्थानों) की भूमिका को सुदृढ़ करने, डिजिटल लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श भी शामिल है।

    इसके अलावा राज्य स्तर से प्राप्त सुझावों को संकलित कर आगामी राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के लिए अनुशंसाएँ तैयार की जाएंगी।

    बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

    अब तक 102 स्थानों से 741 गैस सिलेंडर जब्त, अफवाहों से सावधान रहने की अपील रायपुर / शौर्यपथ / 13 मार्च 2026 राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़…

    जनजातीय आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी ने किया शुभारंभ, रैंप शो में दिखा आदिवासी परिधानों का आकर्षण

    रायपुर / शौर्यपथ / 

    राजधानी रायपुर में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के उत्सव ‘आदि परब’ का रंगारंग आगाज हो गया। दो दिवसीय इस आयोजन में छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उत्सव को जीवंत बना रहे हैं।

    इस वर्ष आदि परब की थीम ‘परम्परा से पहचान तक’ रखी गई है। आयोजन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और जीवन शैली को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है।

    कार्यक्रम का शुभारंभ नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में छत्तीसगढ़ राज्य जनजातीय आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी ने किया। इस अवसर पर राज्य अंत्यावसायी आयोग के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार बेहरा, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, टीआरटीआई के संचालक श्री हिना अनिमेष नेताम, श्रीमती गायत्री नेताम सहित विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे।

    रैंप शो में दिखी जनजातीय संस्कृति की झलक

    आदि परब के उद्घाटन अवसर पर जनजातीय युवाओं ने पारंपरिक आदिवासी परिधानों में सजे-धजे रैंप शो के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपराओं का आकर्षक प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगे परिधान, आभूषण और पारंपरिक शैली ने दर्शकों का खूब मन मोह लिया और लोगों ने उत्साह के साथ इस प्रस्तुति का आनंद लिया।

    प्रदर्शनी और हाट बना आकर्षण का केंद्र

    आदि परब में जनजातीय समाज के खान-पान, वेशभूषा, पारंपरिक कलाकृतियों और हस्तशिल्प की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है, जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    कार्यक्रम के अंतर्गत “आदि रंग – जनजातीय चित्रकला महोत्सव” का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकला की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

    इसी तरह “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया गया है, जहां छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जा रहा है।

    समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री

    आदि परब का समापन 14 मार्च को होगा। समापन समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, जनजातीय समाज के पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।

    सहायक प्राध्यापक के 625, ग्रंथपाल के 50 और क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर होगी नियुक्ति

    रायपुर / शौर्यपथ /

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। विभाग द्वारा कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिसमें सहायक प्राध्यापक के 625 पद, ग्रंथपाल के 50 पद और क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद शामिल हैं।

    उच्च शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के तहत राज्य शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार आरक्षण रोस्टर और विषयवार रिक्तियों का निर्धारण कर उनका विस्तृत रोस्टर ब्रेक-अप तैयार कर लिया है। भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा 24 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) को विस्तृत जानकारी सहित पत्र भी भेजा जा चुका है।

    विषयवार पदों का विवरण

    प्राप्त जानकारी के अनुसार सहायक प्राध्यापक पदों के लिए विभिन्न विषयों में भर्ती की जाएगी, जिनमें—

    हिन्दी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, रसायन शास्त्र, वनस्पति शास्त्र एवं प्राणीशास्त्र के 50-50 पद

    अर्थशास्त्र, इतिहास और भूगोल के 25-25 पद

    कम्प्यूटर एप्लीकेशन के 15 पद

    वाणिज्य के 75 पद

    विधि (लॉ) के 10 पद

    इसके अलावा ग्रंथपाल के 50 पद तथा क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद भी भरे जाएंगे।

    जल्द जारी होगा विज्ञापन

    उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इन पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, भर्ती नियम, श्रेणीवार पदों की संख्या, परीक्षा का पाठ्यक्रम और विज्ञापन प्रारूप भी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को भेज दिया गया है। आयोग द्वारा आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद भर्ती संबंधी विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।

    महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मिलेगा बल

    इन पदों पर नियुक्ति होने से राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी।

    अतिथि प्राध्यापकों की व्यवस्था जारी

    यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य के महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक स्वीकृत पद के विरुद्ध अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था सहायक प्राध्यापक एवं प्राध्यापक पदों के साथ-साथ ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी के पदों पर भी लागू है।

    विभाग के अनुसार अधिकांश अतिथि शिक्षक पीएच.डी. उपाधिधारी हैं तथा नेट और सेट जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाओं में योग्य हैं। ये शिक्षक वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान कर रहे हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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