August 05, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

       शौर्यपथ लेख ( डॉ. सिद्धार्थ शर्मा ) /बाबा रामदेव द्वारा कोरोना के उपचार के दावे के साथ एक आयुर्वेदिक दवा बाजार में उछाल दी गयी. उस दवा के बाजार में आते ही रामदेव के समर्थकों और विरोधियों ने उस दवा के विरोध और समर्थन में गजब हंगामा और हुड़दंग शुरू कर दिया है. दवा के पक्ष और विपक्ष में हो रहा यह हंगामा किसी अंधेर नगरी का आभास करा रहा है.
    विरोधियों की बात बाद में पहले बात समर्थकों के हंगामे और हुड़दंग की... इस बार यही वर्ग ज्यादा दोषी दिख रहा है.
    ध्यान रहे कि एक अमेरिकी कम्पनी ने 6 जून तक कोरोना के उपचार की वैक्सीन की 20 लाख खुराक बना कर रख ली है और वैक्सीन का उत्पादन युद्ध स्तर पर रात दिन लगातार किया जा रहा है. लेकिन अमेरिका में अब तक हो चुकी एक लाख से अधिक मौतों के बावजूद वह वैक्सीन बाजार में नहीं उतारी गयी है. ऐसा इसलिए है क्योंकि कम्पनी की उस वैक्सीन का त्रिस्तरीय परीक्षण पूर्णतया सफल रहा है किन्तु वैक्सीन का अन्तिम परीक्षण अभी चल रहा है. यह प्रक्रिया सम्भवतः अगस्त/सितम्बर के अन्त में पूर्ण होगी. क्योंकि कम्पनी अपनी वैक्सीन की सफ़लता के प्रति पूर्णतया आश्वस्त है इसलिए उसने भारी आर्थिक जोखिम उठा कर उस वैक्सीन का उत्पादन कर के स्टॉक जमा करना प्रारम्भ कर दिया है. क्योंकि वैक्सीन उत्पादन की प्रक्रिया बहुत जटिल और धीमी होती है इसलिए कम्पनी ने यह आर्थिक जोखिम उठाया है. अगर अपने अन्तिम परीक्षण में वह वैक्सीन सफल हुई तो उसी दिन से वह वैक्सीन बाजार में उपलब्ध हो जाएगी और यदि अन्तिम परीक्षण में वह वैक्सीन सफल नहीं हुई तो सारा तैयार स्टॉक नष्ट कर दिया जाएगा. यह होती है एक सभ्य शिक्षित जागरूक समाज की सोच.
            अब बात बाबा रामदेव की... ज्ञात रहे कि आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने और बेंचने का धंधा बाबा रामदेव द्वारा पिछले लगभग डेढ़ दशक से किया जा रहा है. अतः हमको आपको, किसी आम आदमी को भले ही ज्ञात नहीं हो लेकिन बाबा रामदेव को यह भलीभांति ज्ञात है कि किसी भी रोग के उपचार की दवा को बाजार में उतारने से पहले कुछ परीक्षणों की औपचारिकताओं की पूर्ति करना अनिवार्य है. अतः इस बार उन औपचारिकताओं की पूर्ति के बिना बाबा रामदेव अपनी दवा लेकर बाजार में क्यों कूद गए.? ध्यान रहे कि केन्द्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव की दवा के गुण-दोष, गुणवत्ता पर कोई टिप्पणी नहीं की है इसके बजाय उन औपचारिकताओं की पूर्ति नहीं किए जाने पर अपनी आपत्तियां दर्ज करायी हैं. आयुष मंत्रालय की वह आपत्तियां शत प्रतिशत सही हैं. उन आपत्तियों को बाबा रामदेव भी नकार नहीं पा रहे हैं. उन आपत्तियों का तार्किक तथ्यात्मक उत्तर देने के बजाय बातों के बताशे फोड़ रहे हैं. ध्यान रहे कि देश में आयुर्वेदिक दवाएं बनाने वाली वैद्यनाथ डाबर, ऊंझा ,झंडू सरीखी बहुत पुरानी और बहुत बड़ी लगभग दर्जन भर कम्पनियां हैं. इन. कम्पनियों की एक साख है देश में. मंझोले और छोटे स्तर की हज़ारों आयुर्वेदिक कम्पनियां भी देश में हैं. एकबार बाबा रामदेव को उन अनिवार्य परीक्षणों की औपचारिकताओं की पूर्ति से छूट देने का अर्थ उन सभी कम्पनियों को ऐसा करने की खुली छूट दे देना होगा. इससे जो अराजकता फैलेगी वह बहुत भयानक होगी.
            रही बात स्वदेशी की तो यह याद रखिए कि कोरोना के उपचार के लिए जिस ग्लेनमार्क कम्पनी की दवा सामने आयी है वो ग्लेनमार्क शत प्रतिशत भारतीय कम्पनी ही है, जो आज दुनिया के कई देशों में व्यापार कर रही है.
    अतः बाबा रामदेव की दवा के पक्ष में लाठी भांज रहे समर्थक यह ध्यान रखें कि परीक्षण की औपचारिकताओं की पूर्ति के बिना दवा को बाजार में उतार देना बहुत घातक होगा. जो लोग यह तर्क दे रहे हैं कि वो दवा कोई ज़हर नहीं है तो वो यह भी समझ लें कि दवा पर विश्वास कर 15 दिन खाने वाले व्यक्ति पर यदि दवा प्रभाव नहीं डालेगी तो तब तक बहुत देर हो चुकेगी. अतः परीक्षण की औपचारिकताएं अत्यन्त आवश्यक हैं. या फिर बाबा रामदेव वह दावा वापस लें कि यह कोरोना की दवा है उसके पश्चात उसे बेचे. देश को ऐसी अंधेर नगरी ना बनाये जहां ना खाता ना बही... जो रामदेव कहे वही सही.
           दवा का विरोध कर रहा वर्ग वो है जिसे भारतीय संस्कृति सभ्यता की कोख से उपजी किसी भी विद्या और विधा से ही घृणा है. उसकी यह घृणा इतनी पाशविक हो चुकी है कि उस वर्ग को अब किसी दवा का भी विरोध करने में कोई हिचक नहीं है. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा. इससे पूर्व अतीत में भी बाबा रामदेव की दवाओं और यहां तक कि योग विद्या का तीव्र विरोध भी यह वर्ग करता रहा है. अतः इसबार भी उसका विरोध उसकी पाशविक प्रवृति और प्रकृति के ही अनुरूप है. 

    व्यंग लेख ( डॉ. सिद्धार्थ शर्मा - दुर्ग ) / एक दिन #बादशाह दरबार लगाकर शिकार की कहानी सुना रहे थे, जोश में आकर बोले :- एकबार तो ऐसा हुआ मैंने आधे किलोमीटर दूर से निशाना लगाकर जो एक हिरन को तीर मारा तो तीर सनसनाता हुआ हिरन की बाईं आंख में लगकर दाएं कान से होता हुआ पिछले पैर के दाएं खुर में जा लगा..!

    #जनता ने कोई दाद नहीं दी, वो इस बात पर यकीन करने को तैयार ही नहीं थे..!

    ?इधर बादशाह भी समझ गया कि मैंने ज़रूरत से ज़्यादा लम्बी छोड़ दी,और अपने #रफूगर की तरफ देखने लगा..!

    #रफूगर उठा और कहने लगा:- हज़रात, मैं इस वाक़ये का चश्मदीद गवाह हूँ, दरसल बादशाह सलामत एक पहाड़ी के ऊपर खड़े थे, हिरन काफी नीचे था, हवा भी मुआफ़िक चल रही थी वरना तीर आधा किलोमीटर कहाँ जाता है..?
    ?जहां तक बात है 'आंख' , 'कान' और 'खुर' की है, तो अर्ज़ करदूँ, जिस वक्त तीर लगा था, उस वक़्त हिरन दाएं खुर से दायाँ कान खुजला रहा था, इतना सुनते ही जनता जनार्दन ने दाद के लिए तालियां बजाना शुरू कर दीं..!

    ?अगले दिन रफूगर बोरिया बिस्तरा उठाकर जाने लगा, तो बादशाह ने परेशान होकर पूछा कहाँ चले..!

    रफूगर बोला:- बादशाह सलामत, मैं छोटी मोटी तुरपाई कर लेता हूँ, शामियाना सिलवाना हो तो #भारतीय_गोदी मीडिया को रख लीजिए..!! ( डॉ. सिदार्थ शर्मा के फेसबुक पेज से ..)

    धमतरी ब्यूरो /शौर्य पथ

    बिहार रेजिमेंट के कर्नल संतोष बाबू शहीद 2 दिसंबर 2019 से रेजिमेंट में थे पोस्टेड
    भारत और चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प में भारत के एक अफसर और दो सैनिक शहीद हुए हैं. इनमें 16 बिहार रेजिमेंट के जांबाज अफसर कर्नल बी संतोष बाबू भी शामिल हैं. बी संतोष बाबू 16 बिहार रेजिमेंट में 2 दिसंबर 2019 से पोस्टेड थे.

    बता दें, लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई. इस झड़प में भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो जवान शहीद हो गए. 70 के दशक के बाद पहली बार एलएसी पर भारतीय जवानों की शहादत हुई है.

    सूत्रों की मानें तो सीमा विवाद को लेकर जब बॉर्डर पर कमांडरों की बैठक हुई तो उसमें तय हुआ कि PP14-15-17 पर चीन LAC के उस ओर जाएगा, लेकिन चीनी सैनिकों ने इसे मानने से इनकार कर दिया. भारत की ओर से बार-बार चीन को समझाया गया, लेकिन चीन ने इस दौरान हमला कर दिया. सूत्रों ने कहा कि चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थरबाजी की. लोहे के नाल, कीलें लगी लठ से भारत की सेना पर हमला किया. जो अफसर इस मामले को लीड कर रहे थे, उन्हें पथराव-झड़प में काफी गहरी चोटें आई हैं.

    ये भी पढ़ें: LAC पर हिंसक झड़प, भारत के 20 जांबाज शहीद, 45 चीनी सैनिक भी ढेर

    इस घटना के बाद चीनी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान सामने आया है. बीजिंग ने उलटे भारत पर घुसपैठ करने का आरोप लगाया है. अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, बीजिंग का आरोप है कि भारतीय सैनिकों ने बॉर्डर क्रॉस करके चीनी सैनिकों पर हमला किया था. चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत ऐसी स्थिति में एकतरफा कार्रवाई न करे.

    पूरे देश ने लद्दाख की गलवान घाटी में शहीद जवानो को श्रद्धांजलि दी सही जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक संदेश में कहा कि शहीद जवानों द्वारा किए गए अंतिम बलिदान के लिए बहादुर दिलों को सलाम करते हैं, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में शहादत प्राप्त की. शहीदों के परिवारों के सदस्यों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की.

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    खेल / शौर्यपथ / वेस्टइंडीज के खिलाफ 8 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड के सिलेक्टर्स टॉप ऑर्डर के बल्लेबाजों के सिलेक्शन को लेकर दुविधा में पड़ गए हैं। सिलेक्टर एड स्मिथ, जेम्स टेलर और कोच क्रिस सिल्वरवुड पहले टेस्ट के लिए टॉप ऑर्डर को लेकर रॉरी बर्न्स, डोम सिबली, जो डेनली और जैक क्राउली के नामों पर विचार कर सकते हैं। बर्न्स ने पिछले करीब 18 महीनों के दौरान दो शतकों के साथ शानदार प्रदर्शन कर टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज के रूप में अपनी दावेदारी मजबूत की है।


    दक्षिण अफ्रीका दौरे में लगी चोट से बर्न्स पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और ऐसा माना जा रहा है कि वो सलामी बल्लेबाज के रूप में इंग्लैंड की ओर से पारी की शुरुआत करेंगे। वहीं दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार तीन टेस्ट जीतने में क्राउली, सिबली और डेनली ने इंग्लिश टीम की ओर से शानदार प्रदर्शन किया था। सिबली ने उस सीरीज में अपने करियर का पहला शतक जमाया था। इंग्लैंड का टॉप ऑर्डर इस समय उतना मजबूत नहीं है, जितना कि पहले था। एंड्रयू स्ट्रॉस और फिर उसके बाद जॉनाथन ट्रॉट के संन्यास लेने के बाद इंग्लैंड की टीम में सलामी बल्लेबाज की कमी खलती रही है।


    विशेषज्ञों का मानना है कि सिबली और बर्न्स सलामी जोड़ी के रूप में इंग्लिश पारी की शुरुआत कर सकते हैं, जबकि क्राउली या डेनली तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कर टीम के बैटिंग ऑर्डर को मजबूती दे सकते हैं। क्राउली ने टीम में खुद के सिलेक्शन की संभावना को लेकर कहा, 'मुझे नहीं लगता कि अभी तक कोई फैसला लिया गया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले कुछ सप्ताह में प्रैक्टिस मैच में बेहतर प्रदर्शन कर मैं अपनी दावेदारी को मजबूत कर सकता हूं।'

    मनोरंजन / शौर्यपथ / सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद से नेपोटिज्म को लेकर बड़ी बहस चल रही है। सोनू निगम ने कुछ दिनों पहले म्यूजिक इंडस्ट्री के माफिया को लेकर वीडियो शेयर किया था। उन्होंने भूषण कुमार पर आरोप लगाए थे कि वह नए टैलेंट को मौका नहीं देते और सिर्फ अपने सिंगर्स के साथ काम करते हैं। सोनू के आरोपों पर भूषण कुमार की पत्नी दिव्या खोसला कुमार ने हाल ही में वीडियो शेयर कर सोनू की हर बातों का जवाब दिया। इतना ही नहीं, दिव्या ने सोनू से पूछा कि आपने खुद कितने नए टैलेंट को मौका दिया है।

    दिव्या के इस वीडियो के अपलोड करने के बाद सभी को सोनू के जवाब का इंतजार था, लेकिन सोनू ने जवाब देने की बजाय दिव्या का वीडियो ही अपने अकाउंट पर पोस्ट कर दिया और लिखा- प्रेजेंटिंग दिव्या खोसला कुमार। लगता है अपने कॉमेंट्स सेक्शन को खोलना भूल गईं। आइए इसमें उनकी मदद करें।

    क्या कहा दिव्या ने

    वीडियो में दिव्या कहती हैं, 'कुछ दिनों से सोनू निगम जी टी सीरीज और भूषण कुमार के खिलाफ कैंपेन चला रहे हैं। मैं बता दूं कि टी सीरीज ने कई नए लोगों को मौका दिया है जिसमें एक्टर्स, गायक, संगीतकार, डायरेक्टर शामिल हैं। मैंने खुद अपनी फिल्म यारियां में 10 नए लोगों को चांस दिया था जिसमें 4 लोग नेहा कक्कड़, हिमांश कोहली, रकुल प्रीत और कंपोजर आरको आज बड़े स्टार हैं।'

    सोनू जी से मैं पूछना चाहती हूं कि आप तो बहुत बड़े कलाकार हैं तो आपने कितनो लोगों की मदद की है। आप तो कभी टी सीरीज में नहीं आए कि इस न्यूकमर के पास टैलेंट है आप इन्हें लॉन्च कीजिए। कैमरे के पीछे बोलना बहुत आसान है, लेकिन आपने कितने टैलेंट को इंडस्ट्री में चांस दिया जबकि टी सीरीज में 97 प्रतिशत लोग जो काम कर रहे हैं, वो आउटसाइडर थे। हम सभी को चांस देते हैं।

    दिव्या ने कहा, सोनू निगम खुद दिल्ली की रामलीला में 5 रुपये के लिए गाना गाते थे। वहां से गुलशन कुमार जी ने इन्हें स्पॉट किया, इन्हें मुंबई की फ्लाइट की टिकट दी और इनसे कहा कि मैं तुम्हें बहुत बड़ा स्टार बनाऊंगा। बताइए सोनू निगम जी आपसे ये बात कही गई थी या नहीं। गुलशन जी ने आपको इतने ऊंचे मुकाम पर पहुंचाया और आपने क्या किया।

    दिव्या ने आगे कहा, सोनू जी ने अपने वीडियो में कहा कि भूषण जी इनके पास आए और कहा कि प्लीज मुझे अबू सलेम से बचा लो। अब मैं आपसे ये पूछना चाहती हूं सोनू निगम जी कि अबू सलेम से बचने के लिए वह आपके पास मदद मांगने क्यों आए। प्लीज इस बात की तहकीकात की जाए कि क्या सोनू निगम के अबू सलेम से रिश्ते थे?

     

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