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दुर्ग । शौर्यपथ । अमृत मिशन के तहत पाईप लाईन बिछाने जगह जगह खोदे गए गड्ढे के कारण बरसात में आम लोगों को हो रही भारी तकलीफों व उनमें गिर कर कई लोगो के चोटिल होने पर जिला भारतीय जनता युवा मोर्चा ने कड़ी नाराजगी वयक्त करते हुए निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन को वाट्स अप में शिकायत भेजकर शीघ्र ही सभी गड्ढे भरने व अमृत मिशन के अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही करने की मांग कि है। इस सम्बन्ध में जिला भाजयुमो अध्यक्ष दिनेश देवांगन,महामंत्री नितेश साहू,ओम यादव,उपाध्यक्ष राहुल पंडित,मंत्री राहुल दीवान,नितेश बाफना,प्रचार मंत्री राजा महोबिया,उत्तम साहू,गौरव शर्मा,अनुपम मिश्रा मंडल अध्यक्ष अजय चंद्राकर, तेखन सिन्हा,निलेश अग्रवाल,राकेश यादव ने संयुक्त रूप से कहा है कि पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश से अमृत मिशन के तहत पाईप लाईन डालने के कारण के खोदे गड्ढे वापस ढंग से पाटे नहीं जाने व खुला छोड़ने के कारण अब लोगो के लिए दुर्घटना का सबब बनता जा रहा है और यही नहीं अनेक जगह पानी भरे होने के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देने से कई छोटी बड़ी गाडियां फस जाती है जिसे निकालना बड़ी मुश्किल होता है और दुपहिया सवार गिर कर घायल हो रहे है ऐसा ही नजारा आज ढिल्लन हॉस्पिटल के सामने मुख्य मार्ग में संत कवर राम दरबार गेट मार्ग में देखने मिला जहां एक डी आई 307 पिकअप वाहन अमृत मिशन के आधे अधूरे पानी से भरे गड्ढे में धस गया जिसे बड़ी मुश्किल से निकाला गया इस बड़ी जानलेवा गड्ढे के कारण कई लोग चोटिल हो गए है इसी प्रकार हटरी बाजार,इंदिरा मार्केट,सहित शहर कई प्रमुख मार्गो में खुदाई की गड्ढे को पाटे नहीं जाने का कारण कई लोग चोटिल हो रहे है किंतु प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों व निगम चलाने वाले जिम्मेदारों को सुध लेने की जरा भी फुर्सत नहीं है कि उनके लापरवाही का खामियाजा कैसे आम लोग भुगत रहे है और जानलेवा हादसों का शिकार हो रहे है आज भी अनेक वार्डो में महीनों से पाईप लाइन डालने खोदे गढ्ढे में न तो लाईन बिछाया गया है और न ही उसका रिपेयर किया गया है अतः अब जिला भाजयुमो ने इस मुद्दे को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है और निगम प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए मांग कि है यदि शहर के प्रमुख मार्गो ने खोदे गए गड्ढे शीघ्र ही नहीं भरे गए तो भाजयुमो उग्र आंदोलन करेंगी।
बेमेतरा। शौर्यपथ । अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने श्री अमित शाह जी माननीय गृह मंत्री भारत सरकार नई दिल्ली को कोरोना के दृष्टिगत जेल में बंद 85 वर्ष के वयोवृध्द संत श्री आसाराम बापू जी को तत्काल रिहा करने हेतु ज्ञापन पत्र सौंपा। और स्वामी चक्रपाणि जी ने पत्र के माध्यम से बताया सनातन धर्म के संत महापुरुषों ने जो विश्व को मानवता एवं वसुधैव कुटुम्बकम् का मंत्र देकर भारत को विश्वगुरु पद पर प्रतिष्ठित किया। उसी परंपरा के वयोवृद्ध तपस्वी संत श्री आसाराम जी बापू जिन्होंने पूरा जीवन सनातन धर्म के उत्थान में लगाया । यह सर्वविदित है कि भारत प्राचीन काल से एक ऋषि एवं कृषि प्रधान देश रहा है लेकिन यह बहुत ही दुर्भाग्य हैं कि देश की आजादी के बाद हिंदू संतों का एक अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत कानून की आड़ में न सिर्फ उत्पीड़न किया गया बल्कि टी.वी. फिल्मों के माध्यम से भी संत परंपरा एवं आश्रम को दुष्टावरित करने को असफल प्रयास किया जाता रहा है । इसके बावजूद संत समाज इस देश की सेवा एवं विश्व कल्याण की भावना से मानवतावादी कार्य को आगे बढ़ाता रहा है । इसी कड़ी में हम आपको बताना चाहते हैं कि वयोवृद्ध तपस्वी संत श्री आसाराम बापू जी ने किस प्रकार से जन कल्याणकारी कार्य किए हैं जैसे सभी प्रकार की नशाबंदी, स्वच्छता अभियान, महिलाओं का उत्थान, वृक्षारोपण, किन्नरों का सम्मान, रक्तदान, नेत्रदान, देहदान, एवं देश के युवक युवतियों का चारित्रिक निर्माण एवं सेवा का जो अतुलनीय कार्य किया गया है यह अति सराहनीय है । इस कोरोना काल में भी इनके प्रेरणा से इनके लाखों शिष्यों द्वारा गरीब जरूरतमंदों को भोजन, कपड़ा, मकान, शिक्षा, चिकित्सा एवं हर प्रकार से जो जन कल्याणार्थ कार्य किया जा रहा है वह अपने आप में अतुलनीय हैं । संत श्री आसाराम जी बापू जी द्वारा जाति, क्षेत्र लिंग आदि से ऊपर उठकर जो मानवता की सेवा किया गया है । यह देश के लिये गौरवान्वित करने वाला है । यह सर्वविदित हैं की कोरोना काल के दृष्टिगत विश्व के अनेक देशों जैसे अमेरिका, ईरान, आदि जेलों में बंद लोगों को रिहा किया गया । भारत में भी सर्वोच्च न्यायालय ने जेलों में बंद लोगों की सुरक्षा रिहाई एवं जमानत पर सकारात्मक टिप्पणी किया है। अतः आपसे मेरा नम्र निवेदन है कि ऐसे विलक्षण पूज्य तपस्वी संत श्री आसाराम जी बापू ने जो इतने कम समय में हजारों वर्षों के बराबर सर्वागीण क्षेत्रों में अतुलनीय कार्य किया है को तत्काल ससम्मान रिहा किया जाये । इस हेतु सरकार की तरफ से ठोस कदम उठाया जाना देश व समाज के लिये अति आवश्यक हैं ताकि इस कोरोना काल में पूज्य संत अपने शिष्यों व भक्तों के साथ देश व मानवता की सेवा में और गति दे सकें । हमें आशा ही नही बल्कि पूर्ण विश्वास है कि इनकी रिहाई देश एवं समाज के लिए मंगलकारी होगा । धन्यवाद इस ज्ञापन के लिए विश्व के हरिओम साधक परिवार की ओर से अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि जी महाराज का युवा सेवा संघ जिला बेमेतरा अध्यक्ष सोनू साहू ने हृदय से खूब-खूब साधुवाद अभार वक्त किया ।
*- शास्त्री अस्पताल, सुपेला के औचक निरीक्षण पर पहुंचे कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, सफाई व्यवस्था की बदहाली पर जताई सख्त नाराजगी*
दुर्ग । शौर्यपथ । कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे आज औचक निरीक्षण के लिए सुपेला स्थित शास्त्री अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने साफ-सफाई और अस्पताल की व्यवस्था से सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि दुर्ग जिले का यह सबसे महत्वपूर्ण अस्पताल है लेकिन प्रबंधन द्वारा साफसफाई पर एकदम लचर रवैया अख्तियार किया गया है। टायलेट गंदे हैं। कई जगहों पर पान के पीक से दीवारें रंगी हैं। यह बिल्कुल ही लापरवाह व्यवस्था है। एक सप्ताह के भीतर साफ-सफाई की व्यवस्था मुकम्मल करें, अगले हफ्ते इसी समय पुनः आउंगा। सफाई की ऐसी स्थित कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर के दौरे के दौरान नगर निगम कमिश्नर श्री ऋतुराज रघुवंशी, सिविल सर्जन डा. बालकिशोर सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन को कहा कि अस्पताल की बेहतरी के लिए डीएमएफ द्वारा सहयोग प्रदाय किया गया है। समय-समय पर हमेशा इस बाबत समीक्षा की जाती है कि अस्पताल की बेहतरी के लिए हम किस तरह से सहयोग कर सकते हैं लेकिन इसके बावजूद भी अस्पताल में प्रभावी व्यवस्था का नजर नहीं आना प्रबंधन की लापरवाही दिखा रहा है। यह व्यवस्था ठीक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई के लिए यदि मौजूदा व्यवस्था सक्षम नहीं हो पा रही है तो इसकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कल ही जीवनदीप समिति की बैठक आहूत करने के बारे में कहा। कलेक्टर ने कहा कि डीएमएफ के माध्यम से अधोसंरचना मद में पर्याप्त फंड उपलब्ध कराया गया है। अस्पताल में आधारिक संरचना अच्छी है इसका प्रभावी लाभ मरीजों को मिलना चाहिए। अस्पताल के बेहतर संचालन के लिए और मरीजों को सुविधाएं मुहैया कराने में जीवनदीप समिति की प्रभावी भूमिका हो सकती है इसकी राशि का प्रयोग करें। कलेक्टर ने सुपेला अस्पताल में काम कर रहे चिकित्सकों तथा स्टाफ की विस्तृत जानकारी भी ली। उन्होंने प्रभारी अधिकारी से यहां कार्यरत लोगों की पदस्थापना अवधि के संबंध में आज ही शाम को जानकारी देने के लिए कहा। *कोविड को लेकर हो प्रभावी रिस्पांस-* कलेक्टर ने फीवर क्लीनिक, लैंब, मार्च्यूरी भी देखा। उन्होंने कहा कि फीवर क्लीनिक के संबंध में जो निर्देश पूर्व की बैठकों में दिये गए हैं। उनका प्रभावी रूप से पालन होना चाहिए। कोविड को लेकर जो प्रोटोकाल बताये गए हैं उनके मुताबिक ही काम हो। शवों को परिजनों को सौंपने के मामले में किसी तरह का विलंब नहीं हो। उन्होंने कहा कि कोविड से जुड़े हुए किसी भी तरह के कार्य में किसी तरह का विलंब नहीं होना चाहिए। शास्त्री अस्पताल में काफी संख्या में मरीज आते हैं इसके मुताबिक प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। *कबाड़ को लेकर जताई नाराजगी-* कलेक्टर ने अस्पताल परिसर में कबाड़ के यत्रतत्र रखे जाने को लेकर भी गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रबंधन को यह सब देखना चाहिए। अस्पताल परिसर में सफाई सबसे अहम होती है। मरीजों की बेडशीट उनको दी जाने वाली अन्य सुविधाओं पर प्रबंधन प्रभावी रूप से निगरानी रखे।
दुर्ग /शौर्यपथ/ धान की फसल जिले की मुख्य खरीफ फसल है। वर्तमान में कृषि क्षेत्र में आयी गति को दृष्टिगत रखते हुए कीट प्रबंधन इसका मुख्य हिस्सा है। धान की फसल को बचाने एवं कीट प्रबंधन के संबंध में कृषि विभाग द्वारा रोग प्रबंधन और निदान के उपाय जारी किये गए है। धान की फसल में कीट और रोग प्रबंधन एक आवश्यक कार्य होता है किसानों को अपने द्वारा लगाई गई फसल का लगातार निरीक्षण करते रहना चाहिए। साथ ही कीट एवं रोग प्रबंधन के उपाय समय समय पर करते रहना चाहिए। किसान समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन कर पौधों की संरक्षण कर अधिकतम उत्पादन प्राप्त कर सकते है। इसके लिए नियमित रूप से फसल का अवलोकन करते रहना चाहिए। जिससे की कीट एवं रोग का प्रारंभिक अवस्था में प्रबंधन व नियंत्रण किया जा सके। भूरा माहो एवं बंकी के नियंत्रण हेतु 24 घंटे के लिए पानी की निकासी करने से कीट नियंत्रण में सहायता मिलती है। खेत के बीच में अलग-अलग जगह ‘टी‘ आकर की खूटियां लगानी चाहिए, जिस पर पक्षी बैठकर हानिकारक कीटों को खा सके। धान की फसल पर रस्सी को दोनों किनारों से पकड़ कर घूमाना चाहिए जिस पर पक्षी बैठकर हानिकारक कीटों को खा सके। कीटों की निगरानी व नियंत्रण हेतु प्रकाश प्रपंच, फेरोमान प्रपंच तथा पीले चिपचिपे प्रपंच करना चाहिए। अनुसंशित मात्रा में रसायनिक खाद उपयोग करना चाहिए। अत्याधिक व अनावश्यक नत्रजन के उपयोग से रसचूचक कीट के आक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। फसलों पर पाए जाने वाले लक्षण के आधार पर कीट एवं रोग प्रबंधन करनी चाहिए। *कीट /रोग, लक्षण के आधार पर रसायनिक दवा की मात्रा -* *कीट*-तना छेदक (5 प्रतिशत प्रभावित कंसा) *लक्षण* -इस कीट की सुंडी अंडों से निकालकर मध्य कलकाओं की पत्ती में छेद कर अंदर घुस जाती है तथा तने को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे बालियां नहीं निकलती है। बाली अवस्था में प्रकोप होने पर बालियां सूखकर सफेद हो जाती हैं तथा दाने नहीं बनते हैं। *प्रति एकड़ दवा की मात्रा*-करटॉप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी, 8 किलोग्राम, करटॉप हाइड्रोक्लोराइड 50 एसपी, 200 ग्राम, ट्राईजोफास 25, 400-500 मिली, फ्लूबेनडियामाइड 30-35, एस.सी 70 ग्राम का उपयोग करना चाहिए। *कीट / रोग का नाम* - पत्ती लपेटक (चितरी) (2 प्रभावित पत्ती हील) *लक्षण*- इस कीट की सुंडियां पहले मुलायम पत्तियों को खाती है तथा अपनी लार द्वारा रेशमी धागा बनाकर पत्तियों को किनारे से मोड़ देती है यह प्रकोप को सितंबर माह में अधिक देखा जा सकता है। *प्रति एकड़ रासनायिक दवा की* मात्रा-फोसालोंन, ट्राईजोफास, लेम्ब्डा साईंलोथ्रिरीन 20 ई.सी, 400 मिली करटॉप हाइड्रोक्लोराइड 50 प्रतिशत एसपी, 200 ग्राम ,फ्लूबेनडियामाईड 32-35 प्रतिशत एससी 70 ग्राम का उपयोग करना चाहिए। *कीट /रोग का नाम* - भूरा माहो कीट (5-10 कीट प्रति पौधा) *लक्षण*- इस कीट के प्रौढ भूरे रंग के होते हैं ये पत्तियां एवं कल्लों के मध्य रस चूसकर हानि पहुंचाते हैं। अधिक प्रकोप होने पर फसल में अलग-अलग पैच में पौधे काले होकर सूखने लगते हैं जिसे हापर बर्न भी कहते हैं। *प्रति एकड़ रासनायिक दवा की मात्रा*- इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल, 80-100 मिली बिफेनथ्रिन, 10 प्रतिशत ई.सी. 100 मिली फेनोब्यूकार्न, 50 ई.सी. 400-500 मिली ब्यूप्रोफेजिन 25 प्रतिशत डब्लुपी 120-200 मिली का उपयोग करना चाहिए। *कीट /रोग का नाम* - ब्लास्ट रोग (5-10 प्रतिशत ग्रसित पत्ती) *लक्षण*- पत्तियों पर आंख के आकार के जंग युक्त भुरे धब्बे इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं। *प्रति एकड़ रासनायिक दवा की मात्रा*- ट्राईसाईक्लोजोल 75 प्रतिशत डब्लूपी 120 ग्राम कीटाजीन 250 मिली हेकजोकोनजोल 5 प्रतिशत ई.सी 500 ग्राम का उपयोग करना चाहिए। *कीट /रोग का नाम* - शीथ ब्लास्ट 10 प्रतिशत ग्रसित कंसा *लक्षण-* पौधे के आवरण पर अंडाकार स्लेट धब्बा पैदा होता है एवं भूरे रंग के रोगी स्थान बनते हैं। बाद में में ये तनों को चारों और घेर लेते हैं। *प्रति एकड़ रासनायिक दवा की मात्रा*- कार्बेडाजिम 50 प्रतिशत डब्लू पी 500 ग्राम, हेक्जकेनाजोल 5 प्रतिशत ईसी 1 लीटर 500 मिली का उपयोग करना चाहिए। *कीट / रोग का नाम*- जीवाणु जनित पर्ण झुलसा रोग *लक्षण*- पत्तियों पर पीली या पुआल के रंग का लहरदार धारियाँ बनती है तथा सिरे से शरू होकर नीचे की ओर बढ़ती है और पत्तियां सूख जाती है। *प्रति एकड़ रासनायिक दवा की मात्रा*-स्ट्रेटोंमाईसीन सल्फेट 90 प्रतिशत और टेट्रासाईक्लीन हाइड्रोक्लोरोड 10 प्रतिशत 15 ग्राम का उपयोग करना चाहिए।
*- नाबार्ड के अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन की बैठक में बनाई गई रणनीति* *- एफपीओ के प्रमोशन के लिए क्रेडिट गारंटी मिलेगी, इसके माध्यम से एफपीओ खर्च कर पाएगा, इसका उद्देश्य सीमांत और छोटे किसानों को सामूहिकता की ताकत देना ताकि आधुनिक तकनीक और बड़े बाजार तक अपनी पकड़ बना सकें*
दुर्ग । शौर्यपथ । देश भर में सीमांत और छोटे किसानों को जोड़कर एफपीओ बनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में पहल की जा रही है। दुर्ग जिले में इस संबंध में कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे की अध्यक्षता में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ नाबार्ड के अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में किसानों की कंपनी की संभावनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। कलेक्टर डाॅ. भुरे ने कहा कि हार्टिकल्चर और मत्स्यपालन में जिले में बड़ी संभावनाएं हैं। उद्यानिकी में केला, पपीता और ड्रैगन फ्रूट जैसी फसल किसान बड़ी मात्रा में लेते हैं। अगर किसानों को एफपीओ के माध्यम से संगठित किया जाए तो उन्हें एफपीओ को मिलने वाली सरकारी मदद मिल सकती है ताकि वे अपनी खेती को भी बेहतर तरीके से कर सकें और अपने उत्पादों के लिए भी बेहतर बाजार तय कर सकें। बैठक में नाबार्ड के प्रबंधक श्री बारा ने विस्तार से इस संबंध में जानकारी दी। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक, डीडीए श्री अश्विनी बंजारा, डीडी वेटरनरी श्री एमके चावला सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। *हार्टिकल्चर और मत्स्यपालन पर दें विशेष ध्यान-* कलेक्टर ने कहा कि हार्टिकल्चर से जुड़े किसान यदि कंपनी के माध्यम से जुड़ जाते हैं तो उनके लिए काफी अच्छी संभावनाएं बनेंगी। इस तरह के उत्पाद के एक जगह मिल जाने से इनकी प्रोसेसिंग से जुड़ी कंपनियां बल्क में खरीदी कर सकेंगी। चूंकि सरकार द्वारा एफपीओ को स्थापित करने में बड़ा सहयोग दिया जाएगा अतः किसानों के लिए भी यह अच्छा अवसर रहेगा। इस दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि मत्स्यपालन में जिले में बड़ी संभावनाएं हैं जहां कहीं भी वाटर बाडी है वहां इस तरह का काम होना चाहिए। साथ ही एफपीओ में जोड़ने की कोशिश होनी चाहिए। *क्या फायदा होगा एफपीओ से-* कोई सीमांत किसान यदि खेती करता है तो कुछ सीमाएं हैं जिसकी वजह से उसे पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इसके लिए उसे कल्टीवेटर चाहिए, कंबाइन हार्वेस्टर चाहिए, टिलर चाहिए। उद्यानिकी फसलों के लिए उसे स्प्रिंकलर सेट की जरूरत पड़ेगी। अकेले इसका खर्च वहन करना कठिन होता है। अब मान लीजिए कि वो किसी फार्मर प्रोड्यूसिंग कंपनी का हिस्सा बन जाता है तो यह कंपनी उसे तकनीकी साधन मुहैया कराएगी। चूंकि इसके लिए शासन द्वारा कंपनी को क्रेडिट गारंटी मिलती है अतएव कंपनी स्वयं अपने खर्च से यह तकनीकी साधन क्रय कर सकती है। दूसरा बड़ा सहयोग किसान को यह मिलेगा कि कंपनी उसके लाजिस्टिक का कुछ खर्च भी वहन कर सकती है क्योंकि कंपनी द्वारा बहुत से किसानों के उत्पाद को बल्क मात्रा में मार्केट में पहुंचाया जा रहा है। तीसरा बड़ा सहयोग बाजार को लेकर मिल पाएगा। कंपनी बाजार का चिन्हांकन करेगी तथा अधिक मात्रा में सप्लाई होने की वजह से किसान को अच्छा रेट भी मिल पाएगा जो चिल्हर की वजह से नहीं मिल पाता है।
नई दिल्ली /शौर्यपथ / तिरुचिरापल्ली तमिलनाडु के एक स्टोर में रखे गए एक ह्यूमनॉइड रोबोट यानी इंसान की शक्लो-सूरत वाली रोबोट की खूब चर्चा हो रही है. 'ज़फीरा' नाम की इस रोबोट को बकायदा भारतीय परिधानों में देखा जा सकता है. तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के एक कपड़ों की दुकान में 'काम करने वाली' वाली ज़फीरा यहां लोगों का स्वागत कर रही है. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस ज़फीरा कोरोनावायरस के बीच दुकान में आने वाले ग्राहकों को घूम-घूमकर सैनिटाइज़र तो देती ही हैं, वो उनका तापमान भी चेक करती है. ज़फीरा का काम दुकान में आने वाले ग्राहकों की संख्या का हिसाब रखना, उन्हें मास्क पहने रखने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने के लिए उत्साहिस करना है.
ज़फीरा को ऐसे डिजाइन किया गया है कि वो ग्राहकों का तामपान चेक करती है और सेंसर की मदद से ग्राहकों को सैनिटाइज़र डिस्पेंस करती है. इस रोबोट को स्टोर में कोरोनावायरस के खिलाफ लिए जा रहे एहतियाती कदमों के तहत रखा गया है.
ज़फीरा को Zafi Robots नाम की कंपनी ने बनाया है. कंपनी के CEO आशिक रहमान ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए बताया कि 'कोविड फैलने और लॉकडाउन लगने के साथ ही हमने रोबोट डेवलप करने शुरू कर दिए थे, ताकि फ्रंटलाइन पर काम कर रहे लोगों को मदद मिले. यह रोबोट इंटेलीजेंस सिस्टम से लैस है. यह रोबोट एक वक्त में स्टोर में आने वाले ग्राहकों की संख्या का भी हिसाब रखता है और रोज इसकी पूरी डिटेल्स स्टोर को मालिकों को ई-मेल के जरिए देता है.' आशिक रहमान ने बताया कि उनकी टीम को तमिलनाडु और केरल के कई स्टोर्स और शोरूम्स से ऑर्डर मिले हैं, जिसके बाद उनकी टीम ऐसे रोबोट्स का बड़े स्तर पर प्रोडक्शन कर रही है.
वॉइस-एक्टिवेटेड रोबोट ज़फीरा को तिरुचिरापल्ली के इस गारमेंट स्टोर में कई तरह के परिधानों में देखा जा सकता है. ऐसे में कोरोनावायरस गाइडलाइंस का पालन जो होता है वो अलग, वहीं ज़फीरा स्टोर की कूल मॉडल के तौर पर भी काम करती है.
औरंगाबाद / शौर्यपथ / महाराष्ट्र के औरंगादबाद केंद्रीय कारागार के कैदियों ने कोरोनावायरस के कारण लागू प्रतिबंधों में जून में ढील दिए जाने के बाद से अब तक 2,000 साड़ियां बुनी हैं. जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी. अधिकारी ने बताया कि यह काम जेल में पड़े पांच से छह पुराने बिजली करघों पर किया गया और इससे जेल के 25 कैदियों को रोजगार मिला है. यह जेल शहर के हरसूल इलाके में स्थित है.
उन्होंने बताया कि यह परियोजना पांच से छह महीने पहले शुरू हुई थी. इसके बारे में पहले लॉकडाउन के दौरान विचार किया गया और साड़ी बुनने की प्रक्रिया जून में शुरू हुई. उन्होंने बताया, ‘इस परियोजना पर 25 कैदी काम कर रहे हैं और प्रत्येक को इसके लिए हर दिन 55 रुपए मिल रहे हैं. अब हमारे पास 2,000 साड़ियों का भंडार है. इससे पहले कैदी शर्ट, पैंट और मास्क बनाया करते थे. अब वे सूती साड़ियां बना रहे हैं.'
अधिकारी ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत, 25 से 40 मीटर कपड़ा बुना जाता है जिसे बाद में साड़ी बनाने के लिए अलग-अलग रंगों में डाई किया जाता है. उन्होंने कहा, 'फिलहाल ये साड़ियां बिक्री के लिए नहीं हैं. कोविड-19 स्थिति नियंत्रण में आने के बाद हम इनकी बिक्री शुरू करेंगे.'
नई दिल्ली/ शौर्यपथ / कांग्रेस के 'लेटर बम' के बाद पार्टी की अंदरुनी कलह खुलकर सामने आई थी और कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इसपर मंथन भी खूब हुआ. इस चिट्ठी के सामने आने के बाद अब पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को निशाना बनाया जा रहा है. दरअसल कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को लिखे इस पत्र में जिन 23 नेताओं के दस्तखत थे, उनमें एक नाम जितिन प्रसाद का भी था. उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने अब उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. जिसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने इस मांग को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है.
कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, 'दुर्भाग्यपूर्ण है कि जितिन प्रसाद को उत्तर प्रदेश में आधिकारिक तौर पर निशाना बनाया जा रहा है. कांग्रेस को अपनी ही पार्टी के नेताओं को निशाना बनाने में एनर्जी खत्म करने के बजाय बीजेपी पर सर्जिकल स्ट्राइक की तरह टारगेट करने की जरुरत है.' चिट्ठी पर जिन लोगों के दस्तखत थे, उनमें से एक कपिल सिब्बल भी हैं. UPA सरकार में मंत्री रह चुके मनीष तिवारी ने कपिल सिब्बल के ट्वीट पर एक शब्द लिखा- प्रेसिएंट (भविष्य ज्ञानी). चिट्ठी लिखने वालों में मनीष तिवारी का भी नाम है.
बता दें कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस की लखीमपुर खीरी इकाई ने सोनिया गांधी को नामित करते हुए एक प्रस्ताव रखा है. उन्होंने जितिन प्रसाद पर कार्रवाई की मांग की है. इतना ही नहीं, उन्होंने चिट्ठी लिखने वाले सभी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. प्रस्ताव में लिखा है, 'पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले उत्तर प्रदेश के जितिन प्रसाद एकमात्र व्यक्ति हैं. उनका पारिवारिक इतिहास गांधी परिवार के खिलाफ रहा है और उनके पिता स्वर्गीय जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़कर इसे साबित किया था. इसके बावजूद सोनिया गांधी ने जितिन प्रसाद को लोकसभा का टिकट दिया और मंत्री बनाया.'
आगे लिखा है, 'उन्होंने जो किया वह घोर अनुशासनहीनता है और जिला कांग्रेस कमेटी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहती है और उनके कार्यों की निंदा करती है.'
नई दिल्ली / शौर्यपथ / विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक इंटरव्यू में भारत-चीन संबंधों पर बात करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच 1962 के युद्ध के बाद से सबसे ज्यादा गंभीर हालात बने हुए हैं. Rediff.com के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'यह निश्चित रूप से 1962 के बाद सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति है. यहां तक कि 45 सालों में पहली बार बॉर्डर पर जवानों की जान गई है. LAC पर दोनों सीमाओं पर जितनी बड़ी संख्या में सेना तैनात है, वो भी इसके पहले कभी नहीं हुआ है.' बता दें कि पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच तनाव के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई राउंड में बातचीत हुई है लेकिन इसके बाद अभी तक यहां से कुछ ही इलाकों में डिस्इंगेजमेंट प्रक्रिया पूरी हो पाई है. विदेश मंत्री अपनी किताब ''The India Way: Strategies for an Uncertain World'' के रिलीज होने के पहले यह बातचीत कर रहे थे.
दोनों देशों की सेनाएं 20 मई के बाद से ही स्टैंडऑफ की स्थिति में हैं. 15 जून को दोनों देशों के जवानों के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीयों जवानों ने अपना जान दे दी थी. इसके बाद चीन के खिलाफ गुस्सा भड़का और अब दोनों देशों की ओर से बातचीत करके मामला शांत करने की कोशिशें हो रही हैं.
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत चीन को 'साफ-साफ' बता चुका है कि सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के रिश्तों की आधारभूत शर्त है. उन्होंने कहा, 'अगर हम पिछले तीन दशकों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट है कि सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई राउंड की बातचीत के बावजूद भारत और चीन की सेनाएं पिछले साढ़े तीन महीनों से ज्यादा के वक्त से पूर्वी लद्दाख में आमने-सामने खड़ी हैं.'
उन्होंने कहा कि इतिहास में सीमा पर तनाव के मामलों में कूटनीति का सहारा लिया जाता रहा है. उन्होंने कहा, 'आप पिछले दशक को देखों तो सीमा विवाद को लेकर कई मामले सामने आए हैं- देस्पांग, चुमार और डोकलाम. हां, एक तरीक से देखें तो ये सारे मामले एक-दूसरे से अलग थे. यह मामला तो बिल्कुल अलग है, लेकिन जो एक बात सबमें एक जैसी है, वो ये कि ये सारे विवाद कूटनीति के सहरे सुलझाए गए हैं.'
एस जयशंकर ने कहा कि चीन के साथ निकलने वाला समाधान सभी समझौतों का सम्मान करते हुए और यथास्थिति को बरकरार रखने की कोशिश के तहत होना चाहिए. उन्होने कहा, 'जैसा कि आप जानते हैं, हम चीन से सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के जरिए बात कर रहे हैं. दरअसल, ये दोनों चीजें साथ चल रही हैं.'
बता दें कि चीन और भारत के बीच पश्चिम में लद्दाख की बर्फीली चोटियों से लेकर पूर्व में घने जंगलों और पहाड़ों तक फैली 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर विवाद है, इसपर सालों से बातचीत हो रही है, लेकिन अभी तक इसपर कोई हल नहीं निकल सका है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / कटक ओडिशा हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में एक समलैंगिक जोड़े को लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने की इजाजत दे दी है. कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अलग-अलग लैंगिक पहचान के बावजूद, हर इंसान को अपने अधिकारों का पूर्ण लाभ लेने का हक है. जस्टिस एस के मिश्रा और जस्टिस सावित्री राथो की खंड पीठ ने इस हफ्ते की शुरुआत में 24 साल के ट्रांसमैन (जो जन्म के वक्त महिला थी) की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (habeas corpus petition) पर सुनवाई करते हुए कहा कि, 'राज्य को उनको हर प्रकार का संरक्षण देना चाहिए जिसमें जीवन का अधिकार, कानून के समक्ष समानता का अधिकार और कानून का समान संरक्षण शामिल होना चाहिए.'
अपनी पहचान एक पुरुष के तौर पर करने वाले याचिकाकर्ता ने कहा कि उसके साथी की मां और रिश्तेदार उसे जबरन जयपुर ले गए थे और उसकी शादी दूसरे व्यक्ति के साथ तय कर दी जिससे उसे अदालत का रुख करना पड़ा.
बेंच की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति एस के मिश्रा ने फैसला दिया कि जोड़े को अपनी यौन प्राथमिकता पर फैसला लेने का अधिकार है और जयपुर पुलिस अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की साथी भुवनेश्वर में उसके साथ रह सके. उन्होंने कहा कि महिला की मां और बहन को याचिकाकर्ता के घर पर महिला से मिलने की इजाजत दी जाएगी.
जस्टिस सावित्री राथो ने कहा कि दोनों को पसंद की स्वतंत्रता मिली है, जिन्होंने साथ रहने का फैसला किया है. बेंच ने यह भी कहा कि न्यायिक हस्तक्षेप पर महिला भले ही याचिकाकर्ता के साथ रह सकती है लेकिन अगर वह याचिकाकर्ता के साथ न रहकर अपनी मां के पास वापस जाना चाहे तो उसपर कोई रोक नहीं होगी.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
