August 03, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / कांग्रेस में सामूहिक नेतृत्व और पूर्णकालिक अध्यक्ष की मांग को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल कुछ ने मंगलवार को कहा कि उन्हें विरोधी नहीं समझा जाए और उनको पार्टी नेतृत्व पर पूरा भरोसा है. कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की हंगामेदार और मैराथन बैठक के एक दिन बाद इन नेताओं ने यह भी कहा कि पत्र लिखने का मकसद कभी भी सोनिया गांधी या राहुल गांधी के नेतृत्व पर अविश्वास जताना नहीं था और अब सोनिया गांधी जो भी फैसला करेंगी, उन्हें मंजूर होगा.
    पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह किसी पद के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए है जो उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है. उन्होंने ट्वीट किया, 'यह पद के लिए नहीं है. यह मेरे देश के लिए है, जो सबसे ज्यादा महत्व रखता है.'

    गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिब्बल ने यह टिप्पणी उस वक्त की है कि जब एक दिन पहले ही कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी की एक कथित टिप्पणी और फिर उन पर सिब्बल की तरफ से निशाना साधे जाने के बाद विवाद हो गया था. बाद में सिब्बल ने कहा कि खुद राहुल गांधी ने उन्हें सूचित किया कि उनके हवाले से जो कहा गया है वो सही नहीं हैं और ऐसे में वह अपना पहले का ट्वीट वापस लेते हैं.

    पत्र लिखने वाले नेताओं में शामिल राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने ट्वीट किया, 'हम विरोधी नहीं हैं, बल्कि पार्टी को फिर से मजबूत करने के पैरोकार हैं. यह पत्र नेतृत्व को चुनौती देना नहीं था, बल्कि पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से कदम उठाने के लिए था. चाहे अदालत हो या फिर सार्वजनिक मामले हों, उनमें सत्य ही सर्वश्रेष्ठ कवच होता है. इतिहास बुजदिल को नहीं, बहादुर को स्वीकारता है.'

    इनके इस ट्वीट के जवाब में कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक ने कहा कि इस पत्र को अपराध के तौर पर देखने वालों को आज नहीं तो कल, इसका अहसास जरूर होगा कि पत्र में उठाए गए मुद्दे विचार योग्य हैं. वासनिक ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं.

    दूसरी तरफ, इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले एक अन्य नेता ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, 'सीडब्ल्यूसी की बैठक में जो नतीजा निकला, उससे हम संतुष्ट हैं. पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कई नेता सीडब्ल्यूसी की बैठक में मौजूद थे और सबने प्रस्ताव पर सहमति जताई.' हमने कभी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व पर कोई अविश्वास नहीं जताया और सोनिया जी जो भी कदम उठाएंगी , वो हमें मंजूर होगा.'

    पत्र लिखने वालों पर निशाना साधने वाले कांग्रेस नेताओं पर बरसते हुए इस नेता ने कहा, 'हम पार्टी को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं, किसी के खिलाफ काम नहीं कर रहे हैं. जो हम पर आरोप लगा रहे हैं वो सिर्फ चापलूसी कर रहे हैं। अगर यह जारी रहा तो पार्टी का नुकसान होगा.'

    यह पूछे जाने पर कि क्या पत्र को अब सार्वजनिक रूप से जारी कर दिया जाएगा तो उन्होंने कहा, 'पत्र को जारी करने का मतलब नहीं है जब इसे बैठक में रख दिया गया और उस पर चर्चा हो गई.' पत्र लिखने वाले कई अन्य नेताओं से भी संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

    सीडब्ल्यूसी ने सोमवार को करीब सात घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद सोनिया गांधी से पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बने रहने का आग्रह किया और उन्हें जरूरी संगठनात्मक बदलाव के लिए अधिकृत किया. पार्टी के 23 नेताओं की ओर से नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया को लिखे गए पत्र से खड़े हुए विवाद की पृष्ठभूमि में हुई यह बैठक हंगामेदार रही और इसमें तकरीबन सभी नेताओं ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में विश्वास जताया.

    कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई ने नेताओं को कांग्रेस का अनुशासन एवं गरिमा बनाए रखने के लिए अपनी बातें पार्टी के मंच पर रखने की नसीहत दी और कहा कि किसी को भी पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / बक्सर रेलवे के निजीकरण के विरोध में बिहार के बक्सर में सड़कों पर उतरे राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने बक्सर रेल परिसर में धरना दिया और विरोध प्रदर्शन किया. उनका कहना है कि कोरोना का भय दिखाकर हमें गुमराह किया जा रहा है. राजनीतिक दलों के प्रदर्शनकारी नेताओं ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार देश को निजी हाथों में बेच रही है.
    रेलवे के निजीकरण की लगातार आ रही खबरों के बाद बक्सर में राजनीतिक पार्टियों ने बक्सर स्टेशन के रेलवे परिसर में धरना दिया और प्रदर्शन किया. बिहार में जहां लॉकडाउन की प्रक्रिया 9 सितंबर तक बदस्तूर जारी है, ऐसे में लॉकडाउन कानून की परवाह न करते हुए सभी विपक्षी दलों ने रेलवे के निजीकरण के विरोध में धरना दिया और प्रदर्शन किया.
    प्रदर्शन कर रहे नेताओं का कहना था कि सरकार लॉकडाउन को लेकर मनगढ़ंत बातें फैला रही है जबकि दूसरी तरफ अपने मंसूबों पूरे कर रही है. इसी कड़ी में निजीकरण का मामला है. इसी बात को लेकर हम लोग विरोध कर रहे हैं, जो होगा देखा जाएगा.
    बहरहाल इस पूरे प्रकरण में एक तरफ जहां बिहार सरकार की लॉकडाउन की प्रक्रिया अनवरत जारी है, वहीं ऐसे में इन पार्टियों का इस प्रकार से धरना प्रदर्शन करना सोशल डिस्टेंसिंग की पाबंदियों का उल्लंघन है.

     

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / नरेंद्र मोदी सरकार चीनी आयात को नया झटका देने की तैयारी में है. सरकार चीनी ऐप के बाद अब चीनी खिलौनों के आयात पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है. मोदी सरकार इससे चीन को करीब 2000 करोड़ की चोट देने की तैयारी में है. देश में आयातित खिलौनों में से 80 फीसदी खिलौने चीन से आते हैं जिसकी कीमत करीब 2000 करोड़ है. सरकारी सूत्रों के अनुसार चीन घटिया और खराब खिलौने भारत भेजता है. चीनी खिलौने क्वालिटी कंट्रोल में फेल हुए हैं. इसी तरह पिछले कुछ दिनों में चीनी खिलौनों की बारीकी से जांच की गई तो पता चला कि चीनी खिलौने भारतीय मापदंड में पूरी तरफ फेल हैं. वे बच्चों के लिए असुरक्षित साबित हुए हैं.
    चीन से प्लास्टिक के खिलौनों का सबसे अधिक आयात होता है. खिलौनों में प्लास्टिक का इस्तेमाल बच्चों के लिए खतरनाक है. छोटे बच्चे चीनी खिलौनों को मुंह में लेते हैं तो उनसे उनको नुकसान हो सकता है. खिलौनों में जिस रंग का इस्तेमाल किया जाता है वह भी घटिया स्तर के हैं और बच्चों के लिए नुकसानदेह हैं.
    चीनी खिलौनों की फिनिशिंग अच्छी नहीं है जिसकी वजह से बच्चों को चोट लग सकती है. जो केमिकल इस्तेमाल होता है वह भी बच्चों के लिए खतरनाक है. इन खिलौनों पर ये नहीं लिखा होता है कि वे किस देश में बने हैं.

    पीएम मोदी ने लोकल पर वोकल की बात कही है. मोदी सरकार चीनी खिलौनों की जगह टेराकोटा, लकड़ी और मिट्टी के पारंपरिक खिलौनों के उत्पादन को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है. पीएम मोदी ने पिछले हफ्ते ही इंडस्ट्री के जुड़े लोगों से बात करते हुए कहा था कि पारंपरिक चीजों को आगे बढ़ाने से बड़ी संख्या में नौकरियां होंगी और लोग अपनी संस्कृति और परंपरा से जुड़ेंगे. उन्होंने इस बारे में शनिवार को एक बैठक भी बुलाई थी.
    हालांकि भारत में खिलौना इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में बड़ी बाधाएं भी हैं. पहली चुनौती है सस्ते खिलौने तैयार करना. आजकल ज्यादातर खिलौने रिमोट वाले या बैटरी वाले आ रहे हैं जो बच्चों को पसंद हैं. इसके लिए सेंसर, रिमोट और बैटरी वाली मशीनें सस्ते में तैयार करनी होंगी क्योंकि वे सस्ती नहीं होंगी तो खिलौने की कीमत कम नहीं होगी. यही वजह है कि मोदी सरकार बच्चों को पारंपरिक खेलों और खिलौनों से जोड़ना चाहती है जो ना तो नुकसानदेह हैं और न ही बच्चों के लिए खतरनाक. साथ ही अपनी परंपरा की पहचान भी बनी रहेगी.
    हालांकि टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया और अधिक पाबंदी लगाने के खिलाफ है. भारत में खिलौना उत्पादन की 30000 इकाइयां काम करती हैं. इनका वार्षिक टर्नओवर 7000 करोड़ रुपये है. यह असंगठित क्षेत्र है. वाणिज्य मंत्रालय कह चुका है कि भारत में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत है. भारत में खिलौने बनाने के लिए जरूरी प्लास्टिक, टैक्सटाइल, बोर्ड और पेपर उपलब्ध है. लेकिन इलेक्ट्रॉनिक खिलौने बनाने में भारत के पास तकनीकी कुशलता और क्षमता की कमी है. कम श्रम लागत भी दूसरे देशों के मुकाबे भारत के पक्ष में है. चीन की फैक्ट्रियों में काम करने के खतरनाक माहौल के कारण बड़ी वैश्विक कंपनियां खिलौना बनाने के लिए दूसरे देशों की तलाश में हैं. ऐसे में भारत एक उपयुक्त स्थान हो सकता है.

     

    राजनांदगांव एवं कबीरधाम जिलें के आठ 33 के.व्ही. उपकेन्द्रों के पाॅवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि तथा सड़क चिरचारी उपकेन्द्र में 3.15 एम.व्ही.ए. का अतिरिक्त पाॅवर ट्रांसफार्मर की मिली स्वीकृति, कुल लागत 3.09 करोड़ रूपये

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ स्टेट पाॅवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, राजनांदगांव क्षेत्र के अंतर्गत राजनांदगांव जिले के चार 33 के.व्ही. उपकेन्द्रों भैंसातरा, मंडला, बघेरा, पैलीमेटा तथा कबीरधाम जिले के चार 33 के.व्ही. उपकेन्द्रों कोलेगांव, मोहगांव, बाजारचारभांटा एवं गोपालभावना में पाॅवर टांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि के साथ सड़कचिरचारी में 3.15 एम.व्ही.ए. का अतिरिक्त पाॅवर ट्रांसफार्मर की स्वीकृति मिली है। विद्युत विकास के कार्याे के लिए कंपनी प्रबंधन द्वारा 3 करोड़ 9 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। विद्युत विकास के लिए स्वीकृत कार्यो का लाभ क्षेत्र के अनेक गांवों के किसानों तथा उपभोक्ताओं को मिलेगा। राजनांदगांव क्षेत्र के मुख्य अभिंयता श्री टी.के. मेश्राम ने बताया कि कबीरधाम जिले के अंतर्गत कोलेगांव, मोहगांव, बाजारचारभांटा एवं गोपालभावना में स्थापित 3.15 एम.व्ही.ए. पाॅवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता में वृद्धि करते हुए 5 एम.व्ही.ए. किया जाएगा।
    इसी प्रकार राजनांदगांव जिले के अंतर्गत भैंसातरा, मंडला, बघेरा, एवं पैलीमेटा उपकेन्द्रों में स्थापित 3.15 एम.व्ही.ए. पाॅवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता में वृद्धि करते हुए 5 एम.व्ही.ए. के साथ ही सड़क चिरचारी में 3.15 एम.व्ही.ए. का अतिरिक्त पाॅवर ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा।

    लखनऊ / शौर्यपथ / यूपी के बलिया जिले में एक निजी न्‍यूज चैनल के पत्रकार रतन सिंह की गोली मारकर हत्‍या कर दी गई. पत्रकार को गांव के प्रधान के घर बुलाकर लाठी-डंडों से जमकर पीटया और फिर गोली मार दी गई. मामले में नामजद 10 आरोपियों में से 6 पकड़े गए हैं, इलाके के थाना इंचार्ज को सस्‍पेंड कर दिया गया है. मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने पत्रकार के परिवार के लिए 10 लाख रुपये की सहायता राशि का ऐलान किया है.बेटे की मौत पर पिता विनोद सिंह कहते हैं, 'हमारे दो लड़के थे, दोनों तीन वर्ष के अंतराल में गुजर गए.' उन्‍होंने कहा कि एक बूढ़े बाप के लिए इससे बड़ा सदमा क्‍या होगा कि उसके दो जवान बेटे दो साल के अंदर कत्‍ल कर दिए जाएं.कत्‍ल की वजह बनी सड़क के किनारे की उनकी जमीन.
    आरोप है कि गांव के प्रधान के भाई सोनू सिंह बुलाकर रतन सिंह को घर ले गए, वहां पहले लाठी-डंडों से पीटा फिर तीन गोली मारी गईं. पिता विनोद सिंह कहते हैं, उस लड़कों को 10 आदमी घेर करके लाठियों से पीटने लगे. उसने तुरंत थाना इंचार्ज शशिमौली को फोन किया. शशिमौली वहां गए और फिर तुरंत गाड़ी बैक करके थाने चले गए. अगर वे वहां रुक गए होते तो घटना नहीं होती. हमारा लड़का बच जाता. गौरतलब है कि बलिया के एक मुख्‍य मार्ग पर रतन सिंह के परिवार की जमीन के लिए आरोपियों से उनका 4-5 साल से विवाद चल रहा था लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि इसके लिए रतन सिंह की हत्‍या हो सकती है. तीन साल पहले रतन के बड़े भाई की भी हत्‍या हो गई थी.

    रतन सिंह के चाचा कौशल कुमार कहते हैं, 'कम से कम चार-पांच साल से पहले से विवाद चल रहा था, जमीन मेन रोड पर थाने के बगल में है. उसी जगह हम लोगों की जमीन महर्षि अरविंद इंटर कॉलेज के नाम से कब्‍जा कर लिए थे. उसी जमीन के लिए बड़े भाई को मरवा दिया गया. पत्रकार की हत्‍या की यूपी में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, लोगों ने रास्‍ता जाम करके प्रदर्शन किया. यूपी कांग्रेस अध्‍यक्ष अजय कुमार लल्‍लू लखनऊ से फौरन बलिया रवाना हुए उन्‍हें रायबरेली में पुलिस ने रोक दिया.

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, '19 जून - शुभममणि त्रिपाठी की हत्या,20 जुलाई - विक्रम जोशी की हत्या, 24 अगस्त- श्री रतन सिंह की हत्या, बलिया, पिछले 3 महीनों में 3 पत्रकारों की हत्या, 11 पत्रकारों पर खबर लिखने के चलते FIR. यूपी सरकार का पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतन्त्रता को लेकर ये रवैया निंदनीय है.'मामले को लेकर बलिया के एडीशनल एसपी संजय यादव ने कहा कि घटना के संबंध में रात में अभियोग पंजीकृत किया गया है, जिसमें 10 नामजद अभियुक्‍त है, इसमें से पुलिस ने दबिश देकर छह को गिरफ्तार किया है. शेष की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई हैं. शेष बचे आरोपियो भी जल्‍द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

     

    मुंबई / शौर्यपथ / सुशांत सिंह राजपूत मामले में केंद्रीय जांच ब्‍यूरो ने जांच में शामिल रहे मुंबई पुलिस के दो अधिकारियों को पूछताछ के लिए गेस्‍ट हाउस बुलाया है. जहां वह जांच से जुड़े दस्‍तावेजों के संबंध में लोगों से पूछताछ कर रही है. सूत्रों के अनुसार, इन दो अधिकारियों में से एक इस समय अस्‍पताल में है जबकि दूसरा क्‍वारंटाइन है. सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच वैसे तो सीबीआई कई मोर्चों पर कर रही है, लेकिन उसका सबसे ज्यादा जोर उन 4 लोगों से पूछताछ पर है जो 14 जून के दिन सुशांत सिंह राजपूत के घर में मौजूद थे और दूसरा 15 करोड़ की हेराफेरी पर.
    सुशांत 14 जून को अपने बेडरूम में मृत पाए गए थे. उस दिन कुल 4 लोग घर में थे. उनमें से घर के नौकर नीरज सिंह को आज लगातार पांचवे दिन DRDO गेस्ट हाउस लाया गया.नीरज सुशांत को फंदे से लटकते हुए देखने वालो में से एक है. क्रिएटिव आर्ट डिजायनर सिद्धार्थ पीठानी से भी लगातार पूछताछ हो रही है. सिद्धार्थ ने ही दरवाजा नहीं खुलने पर चाभी वाले को बुलाया था. लॉक तोड़ने के बाद चाभी वाले को बेडरूम में जाने नहीं दिया था.

    सुशांत को पंखे से बंधे फंदे पर लटकते देख सुशान्त की बहन मीतू सिंह को फोन पर बताया और फिर मीतू सिंह के कहने पर सुशान्त सिंह राजपूत का शव नीचे उतारा था. हाउस कीपर दीपेश सावंत भी उस दिन सुशान्त कमरे में सिद्धार्थ के साथ गया था और सुशान्त का शव उतारने में मदद की थी. कुक केशव ने सुबह सुशांन्त को केला ,जूस और नारियल पानी देने का दावा किया था. केशव के मुताबिक 8 जून को रिया के जाने के बाद सुशांत सिंह ने भोजन करना कम कर दिया था. केशव से आज दूसरे दिन सीबीआई पूछताछ कर रही है.

     

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / भागती दौड़ती जिंदगी में जीवनशैली अस्त-व्यस्त हो चुकी है, ऐसे में अक्सर हम सेहत से जुड़ी परेशानियों से जूझते रहते हैं। लेकिन फिर भी ऐसे कई तरीके हैं, जिससे हम स्वस्थ रह सकते हैं। आज हम आपको ऐसे डांस स्टाइल बताने जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ आपका वजन भी कंट्रोल में रहेगा बल्कि आपको टेंशन से भी मुक्ति मिलेगी-
    हिप हॉप डांस
    हिप हॉप डांस एक तरह का स्ट्रीट डांस स्टाइल, जिसे हिप हॉप म्यूजिक पर परफॉर्म किया जाता है। इसमें पॉपिंग, लॉकिंग से लेकर ब्रेकिंग स्टाइल तक शामिल है। यह एक ऐसा डांस फॉर्म है जो वजन घटाने के लिए सबसे बेस्ट है क्योंकि इसमें सबसे ज्यादा कैलरी बर्न होती हैं। हिप हॉप स्टाइल को आमतौर पर क्लब में किया जाता है, लेकिन आप इसे घर पर भी आसानी से कर सकते हैं।
    बेली डांस
    हिप्स, बैक और ऐब्स को टोन करना चाहती हैं और कमर से चर्बी घटाना चाहती हैं तो फिर बेली डांस बेस्ट है। इसमें मूवमेंट एक नियंत्रित तरीके से और स्लो मोशन में की जाती हैं। फोकस कमर और हिप्स पर ही रहता है।
    फ्री स्टाइल
    यह डांस फॉर्म दुनिया के कई हिस्सों में पॉप्युलर है और वजन घटाने के लिए सही ऑप्शन हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि फ्री स्टाइल में आपको डांस स्टेप्स या बॉडी मूवमेंट्स पर खास ध्यान देने की जरूरत नहीं होती और आप जिस भी दिशा में चाहें और जैसे भी चाहें डांस कर सकते है।
    जुंबा डांस
    यह एक मिक्स्ड डांस फॉर्म है जिसमें सालसा, रुंबा और हिप हॉप भी शामिल है। इस डांस फॉर्म में बॉडी सबसे ज्यादा मूव होती है। यह एक तरह का कार्डियो वर्कआउट माना जा सकता है। यह डांस फंकी बीट्स पर किया जाता है, जिसमें ऐब्स से लेकर लेग्स और बाजुओं की भी एक्सर्साइज होती है। इस डांस फॉर्म को युवा काफी पसंद कर रहे हैं।

     

    खाना खजाना / शौर्यपथ / समोसे किसे पसंद नहीं होते। आप चाय के साथ कितने ही स्नैक्स खा लीजिए लेकिन समोसे की बात ही कुछ और होती है। आइए, आज जानते हैं कैसे बनाएं मटर के समोसे-
    साम्रगी
    आलू- 2 उबले हुए
    हरे मटर के दाने - 1/4 कप
    पनीर - 1 1/2 इंच का चौकोर टुकड़ा
    काजू - 4-5 ( छोटे छोटे कटे हुए)
    किशमिश - 1 टेबल स्पून
    अदरक की पेस्ट 1 छोटी चम्मच
    धनिया पाउडर 1 छोटी चम्मच
    हल्दी का पाउडर 1/2 छोटी चम्मच
    जीरा पावडर 1 छोटी चम्मच
    नमक स्वाद के लिए
    चीनी 1 छोटी चम्मच
    हरी मिर्च - 1 (बारीक कटी हुई)
    लाल मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच से आधी
    गरम मसाला - 1/4 छोटी चम्मच से आधा
    हरा धनियां - 2 टेबल स्पून (बारीक कतरा हुआ)

     

    विधि: पोटली समोसा बनाने के लिए पहले आप 2 कप मैदा में एक चुटकी नमक मिलाए और 1/2 टेबल स्पून तेल या घी के साथ गूंथ लें। गूंथे हुए आटे को कुछ देर के लिए रख दें। एक नॉन स्टिक पैन में एक बड़ा चम्मच तेल गरम करें। उसमें अदरक पेस्ट, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, जीरा पाउडर, नमक, चीनी, काजू और किशमिश को अच्छे से मिला कर 2 मिनट तक भूनें। फिर डालें हरे मटर, अच्छे से मिलायें और भूनें। गूंथे हुए आटे को फिर से मसल कर थोड़ा और चिकना कीजिये और गूंथे आटे से छोटी छोटी लोई बनाकर तैयार कर लीजिए। अगर आपको पोटली बनाना है तो इसे गोल रहने दें नहीं तो इसे समोसे की पट्टी में बदल सकते हैं। इन बेली गई पट्टियों में तैयार की गई स्टफिंग भरें और इसी प्रकार बाकी के समोसे बना लें। एक कढ़ाई में जरूरत के मुताबिक तेल गरम करें और इसमें समोसों के गोल्डन ब्राउन और करारे होने तक तलें।

     

    शौर्यपथ / पंचांग शब्द सुनकर यह जिज्ञासा होती है कि इसके पंच अंग कौन-कौन से हैं। पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को शामिल किया जाता है। तिथियां, प्रतिपदा से पूर्णिमा-अमावस्या सहित, कुल 16 हैं। वहीं अभिजित को मिलाकर कुल 28 नक्षत्र होते हैं। योग की संख्या 27 और करण की 16 है।

    वार सात हैं। जन्म के नक्षत्रों से पता चल जाता है कि आदमी किस ग्रह की दशा के प्रभाव में है। नौ ग्रह- केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्रमा, मंगल, राहु, गुरु, शनि और बुध 27 नक्षत्रों के स्वामी हैं। अभिजित नक्षत्र, जो हर दिन दोपहर में सदैव विराजमान होता है, उसका स्वामी सूर्य-चंद्रमा को माना जाता है। देवी-देवताओं में प्रथम पूज्य विनायक का जन्म शतभिषा नक्षत्र में, भगवान राम का जन्म पुष्य नक्षत्र, तो कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।

    अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्र के स्वामी केतु हैं। शुक्र स्वामी हैं भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा के, वहीं सूर्य कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा के स्वामी हैं। चंद्रमा राोहिणी, हस्त और श्रवण के स्वामी हैं, तो मंगल मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा के स्वामी हैं। राहु आद्र्रा, स्वाति और शतभिषा नक्षत्र के स्वामी हैं, जबकि गुरु पुनर्वसु,विशाखा और पूर्वाभाद्रपद के। शनि पुष्य,अनुराधा और उत्तराभाद्रपद के और बुध अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र के स्वामी हैं। सभी नक्षत्रों के राजा पुष्य हैं।
    नक्षत्रों के देवता इस प्रकार हैं- देव वैद्य अश्विनी कुमार अश्विनी नक्षत्र के देवता हैं। भरणी के देवता यम, तो कृतिका के अग्निदेव हैं। रोहिणी के ब्रह्मा, तो मृगषिरा के देवता चंद्रमा हैं। आद्र्रा के देवता रुद्र-शिव, तो पुनर्वसु की देवी अदिति हैं। पुष्य के देवता बृहस्पति और अश्लेषा के सर्प हैं। मघा के देवता पितर, पूर्वा फाल्गुनी के भग और उत्तराफाल्गुनी के अर्यमा हैं। हस्त के देवता सूर्य हैं, चित्रा के विश्वकर्मा व स्वाति के वायु हैं। विशाखा के देवता इंद्राग्नि, अनुराधा के मित्र और ज्येष्ठा के इंद्र हैं। मूल नक्षत्र के देवता निऋर्ित (राक्षस) हैं। पूर्वाषाढ़ा के देवता जल और उत्तराषाढ़ा के विष्वदेव हैं। अभिजित नक्षत्र के देवता सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी हैं। श्रवण के देवता विष्णु और धनिष्ठा के वसु हैं। शतभिषा के देवता वरुण, पूर्वाभाद्रपद के अजैकपाद, उत्तराभाद्रपद के देवता अहिर्बुधन्य और रेवती के देवता पूषा हैं।

     

    धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, सतयुग में उत्तर प्रदेश के हरदोई में ही नरसिंह व वामन अवतार हुआ था। कथा है कि देव व दैत्यों के युद्ध में दैत्य पराजित होने लगे। दैत्य राज बलि भी इंद्र के वज्र से मृत हो गए। तब दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य ने अपनी मृत संजीवनी विद्या से बलि और दूसरे दैत्यों को जीवित कर दिया। राजा बलि के लिए गुरु शुक्राचार्य ने एक यज्ञ का आयोजन किया और अग्नि से दिव्य रथ, वाण व अभेद्य कवच प्राप्त किए। इससे असुरों की शक्ति बढ़ गई। असुर सेना ने इंद्र की राजधानी अमरावती पर आक्रमण कर दिया। देवराज इंद्र को पता चला कि सौ यज्ञ पूरा करने के बाद बलि स्वर्ग को पाने में सक्षम हो जाएगा।

    तब देवराज इंद्र सहायता के लिए श्रीहरि के पास पहुंचे। भगवान विष्णु ने उनकी सहायता के लिए आश्वासन दिया और माता अदिति के गर्भ से वामन रूप में जन्म लेने का वचन दिया। बलि द्वारा देवों के पराभव के बाद ऋषि कश्यप के कहने पर माता अदिति ने पयोव्रत का अनुष्ठान किया। तब भगवान विष्णु भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी को माता अदिति के गर्भ से जन्मे और ब्राह्मण रूप धारण किया।

    इस दिन भगवान वामन की पूजा-आराधना की जाती है। विष्णु के 10 अवतारों के क्रम में पांचवां अवतार वामन का था और 24 अवतारों के क्रम में 15वां अवतार था। वामन अवतार पिता से आज्ञा लेकर राजा बलि के पास दान मांगने के लिए गए। उस समय राजा बलि नर्मदा के तट पर अंतिम यज्ञ कर रहे थे। राजा बलि ने भगवान का आतिथ्य सत्कार कर आसन प्रदान किया। तब राजा बलि को भगवान ने दान की महत्ता को समझाकर यज्ञ के लिए तीन पग भूमि की याचना की। वामन भगवान की शिक्षा से प्रभावित होकर राजा बलि ने और अधिक मांगने का आग्रह किया। लेकिन भगवान अपनी तीन पग भूमि की याचना पर ही अड़े रहे।

    गुरु शुक्राचार्य ने बलि को सतर्क भी किया, पर बलि ने इस पर ध्यान नहीं दिया। फिर वामन भगवान ने विराट रूप धारण कर दो पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया और बलि से पूछा- राजन अब मैं अपना तीसरा पैर कहां रखूं? राजा बलि के समक्ष संकट उत्पन्न हो गया कि वचन न पूरा करने पर अधर्म होगा। इसलिए बलि ने कहा- ‘भगवान अब तो मेरा सिर ही बचा है। आप इस पर पैर रख दीजिए, क्योंकि संपत्ति का मालिक संपत्ति से बड़ा होता है।’ राजा की इस बात से वामन प्रसन्न हो गए। बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे चिरंजीवी रहने का वरदान देकर पाताललोक का स्वामी बना दिया और बलि के साथ सदा पाताल लोक में द्वारपाल बनकर रहने का वर भी दिया।

    इस दिन भगवान वामन की मूर्ति या चित्र की पूजा करें। मूर्ति है तो दक्षिणावर्ती शंख में गाय का दूध लेकर अभिषेक करें। चित्र है तो समान्य पूजा करें। इस दिन भगवान वामन का पूजन करने के बाद कथा सुनें और बाद में आरती करें। अंत में चावल, दही और मिश्री का दान कर किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराएं।

     

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