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बिलासपुर / शौर्यपथ / एक तरफ राजस्व मामलों की पेंडेंसी बड़ा रही है और दूसरी तरफ नजूल विभाग सत्यम टॉकीज के सामने स्थित एक खाली प्लाट के सीमांकन के लिए अचानक सक्रिय हो गया 3 मई को एक दैनिक अखबार में नजूल अधिकारी बिलासपुर की सूचना प्रकाशित हुई जिसमें आवेदक जिले लाल पिता चुन्नीलाल सतनामी ने 16 लोगों को सूचना दी कि सीट नंबर 24 प्लाट नंबर 01 रकबा 39240 का सीमांकन 8 तारीख को निर्धारित है यह बात आसानी से समझ में आने योग्य नहीं है कि 2018 में लगाया गया प्रकरण 2020 में इतना जरूरी कैसे हो गया नजूल सीट नंबर 24 बिलासपुर शहर के मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र में शुमार है और इस सीट में चंद्रिका होटल, कैफेटेरिया, सत्यम टॉकीज, बिग बाजार जैसे बड़े व्यवसाई केंद्र संचालित हैं जब जिले लाल सतनामी बिना कब्जे की जमीन पर नामांतरण कराने वाला कौन सा खातेदार है सीट नंबर 24 का यह क्षेत्र एक अन्य कारण से भी महत्वपूर्ण है लिंक रोड के अलावा इमलीपारा मार्ग में केंद्र के रेल मंत्रालय की भूमि बड़े पैमाने पर निजी क्षेत्र के द्वारा दबा ली गई ये जमीन के वे टुकड़े हैं जिन पर मूल खाते द्वारा केंद्र से मुआवजा राशि ली जा चुकी है उस समय यहां से एक रेलवे लाइन प्रस्तावित थी जो बाद में भुला दी गई .
वर्ष 2020 में कहने के आधार पर लीज नवीनीकरण का आदेश मिलने पर इस तरह के खेल दोबारा शुरू हो गए हैं देखने लायक यह होगा कि 8 जून के दिन झूलेलाल सतनामी जो किसी अन्य का मोहरा मात्र है का सीमांकन फील्ड पर होता है अथवा गुपचुप तरीके से दफ्तर में होगा.....
बिलासपुर / शौर्यपथ / शहर का ऐतिहासिक अस्पताल अब इतिहास में दर्ज होने वाला है अस्पताल की हालत इतनी खराब है कि इसका ओपीडी, आईपीडी इमरजेंसी सहित प्राथमिक उपचार की सेवा भी बंद हो चुकी है अस्पताल परिसर के भीतर मेडिकल के नाम पर केवल एक दवाई दुकान चल रही है अस्पताल में हर प्रकार की सर्विस बंद है उसके बावजूद अस्पताल के स्वयंभू डायरेक्टर जोगी की दहशत सर चढ़कर बोलती है जिसके चलते व्यवस्था को चुप रहने बाध्य करती है बंद आईसीयू में टेबल की धूल साफ करती हुई नर्स ने अपना नाम तक नहीं बताया उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में नवीन सिंह नाम का आदमी होगा जो बताएगा वही सत्य होगी की क्यों ओपीडी में डॉक्टर निगम, डॉ सरकार, डॉ जोगी के कमरों में ताले डले है वही अस्पताल के पुरानी बिल्डिंग का प्रथम फ्लोर जर्जर हो चुका है और इस बार इसके पूर्व कोई दुर्घटना घट जाए इससे पहले इसे खतरनाक भवन घोषित कर दिया जाना चाहिए वही आपातकाल भवन की लाइट रात को मरीज को भ्रम में डालने का काम कर रही है अस्पताल के गेट पर शाम 7:00 बजे से ही सुबह 7:00 बजे तक के लिए ताला डल जाता है गेट के अंदर कोविड-19 के संबंध में 3 एक्ट का हवाला देते हुए यह सूचना लिखी है कि परिसर के भीतर रहने वाले शाम 7:00 से सुबह 7:00 बजे तक बाहर ना निकले यदि यह अस्पताल चालू है तो शाम 7:00 बजे से मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला कैसे डाला जा सकता है अस्पताल की अघोषित रूप से बंद हो जाने की कोई जानकारी स्वास्थ्य विभाग को क्यों नहीं है...
बिलासपुर/ शौर्यपथ / ऑल इंडिया ब्राह्मण संगठन के प्रदेशाध्यक्ष बबीता दुबे, कार्यकारी अध्यक्ष शिवाकान्त त्रिपाठी उपाध्यक्ष सरिता दुबे एवँ महासचिव सुरेश मिश्रा,अभिषेक त्रिपाठी द्वारा निम्नलिखित पदो हेतु मनोनयन पत्र देकर मनोनित किया साथ ही समाजहित और राष्ट्र हीत मे कार्य करने हेतु गठन प्रक्रिया पूर्ण किया गया इस टीम के सँरक्षक- सुनील दत्त मिश्रा, अमित गौतम ,जिला अध्यक्ष- अरुणा पांडेय,उपाध्यक्ष-आशुतोश शर्मा सचिव-स्मृति ओझा, सृष्टि शुक्ला,प्रतीक्षा अवस्थी,सहसचिव-रंजना पांडेय, नीतू मिश्रा, आरती पांडेय,कोषाध्यक्ष- विकास उपाध्याय
क्रिडा सचिव-सुप्रिया पांडेय, आकांक्षा दुबे,साँस्कृतिक सचिव-रवि शर्मा, अनुकृति पांडेय कार्यकारिणी सदस्य-हर्ष पांडेय, सौमित्र शर्मा , पूजा तिवारी ,सौम्या शुक्ला ,अक्षत पांडेय ,अभिजीत पांडेय है . युवा विंग पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण सप्ताह मना रहे है जिसमे कुछ प्रतियोगिताएं आयोजित किए हैं जो इस प्रकार है
1 जून - कविता / निबंध प्रतियोगिता
2 जून- पेंटिंग/पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता
3- जून स्लोगन लेखन प्रतियोगिता
4- जून चलो शाकाहार की ओर (इस में केवल शाकाहारी भोजन खाया जाएगा)
5- जून ग्रीन डे ( जिसमें एक दिन ग्रीन चीजे इस्तेमाल किए गए जिसमे भोजन, कपड़े इत्यादि)
6- जून रिसाइकिल और बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट
7 जून वृक्षारोपण दिवस|
अब तक हुई सभी प्रतियोगिताओं में सभी ने विशेष रुचि दिखाकर अपनी प्रतिभाओं को सामने लाया है सभी कार्य की सफलता का श्रेय अध्यक्षा ने पूरी टीम को समर्पित किया(फोटो अरुणा पांडे,आशुतोष शर्मा )
नई दिल्ली / शौर्यपथ / प्रवासी मजदूरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाया. अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''प्रवासियों को 15 दिनों में वापस भेजा जाए. प्रवासियों को नौकरी देने के लिए एक स्कीम तैयार हो. रोजगार प्रदान करने के लिए डेटा की जांच हो. साथ ही प्रवासियों की पहचान के लिए योजना निर्धारित हो. प्रवासियों की स्किल मैपिग हो ताकि तय करना आसान हो कि उन्हें कुशल या अकुशल कौन सा कार्य सौंपा जाए. प्रवासियों के खिलाफ सभी शिकायतों व मुकदमों को को वापस लिया जाए.
बताते चले कि मजदूरों को भेजे जाने, रजिस्ट्रेशन, और उनके रोजगार की व्यवस्था जैसे बिंदुओं पर केंद्र व राज्यों के लिए सुप्रीम कोर्ट दिशा निर्देश जारी किया. जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने आदेश सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''15 दिनों में सभी प्रवासियों को वापस भेजा जाए. प्रवासी मजदूरों के लिए काउंसलिंग सेंटर बनाए जाएं.''
सुप्रीम कोर्ट ने अन्य राज्यों से हलफनामा मांगा है. राज्य 15 दिन में बचे हुए श्रमिकों को अपने अपने गांवों तक भेजे. श्रमिक ट्रेन ज्यादा चलाई जाय ताकि उनको यात्रा के लिए अप्लाई करने के 24 घंटों में ही ट्रेन मिल जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने उन प्रवासी कामगारों के खिलाफ सभी पुलिस शिकायतों को वापस लेने का आदेश दिया, जिन्हें अपने कार्य स्थलों से घर वापस जाने का प्रयास करते हुए लॉकडाउन मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए दर्ज किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र/राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से प्रवासी श्रमिकों की पहचान करने के लिए कहा जो अपने कार्यस्थल से घर जाना चाहते हैं और उनकी यात्रा की व्यवस्था करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''सभी शेष प्रवासी श्रमिकों के परिवहन की प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी होनी चाहिए.''
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''सभी प्रवासी श्रमिकों को पंजीकरण के माध्यम से पहचाना जाएगा. सभी प्रवासियों को आज से 15 दिनों के भीतर वापस भेज दिया जाएगा. मांग के 24 घंटे के भीतर केंद्र को अतिरिक्त ट्रेनें देनी चाहिए. केंद्र और राज्य प्रवासियों को रोजगार देने के लिए योजनाएं प्रस्तुत करें. सभी राज्य सरकारें अपनी स्कीम कोर्ट को दें, जिसमें इस बात का जिक्र हो कि प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिये उनके पास क्या योजना है. रोजगार की योजना तैयार हो. स्किल मैपिंग हो.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से प्रवासियों के कल्याण के लिए योजना मांगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''राज्य और केंद्रशासित प्रदेश उन प्रवासी श्रमिकों की पूरी सूची तैयार करेंगे जो अपने राज्य में पहुंच चुके हैं. वो उस काम का उल्लेख करेंगे जो वो तालाबंदी से पहले कर रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से इन प्रवासी श्रमिकों के लिए तालाबंदी के बाद की योजनाओं को बताने को कहा. आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''पलायन करने का मन बना चुके प्रवासी श्रमिकों को आज से 15 दिनों के अंदर अपने गांव या जहां वो जाना चाहें भेजने का समुचित इंतज़ाम सुनिश्चित किया जाय. राज्य श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार देने की स्कीम तैयार करें. इसके लिए पलायन कर गए सभी श्रमिकों की पहचान कर पूरी विस्तृत जानकारी वाला डाटा तैयार किया जाए. फिर उनको समुचित रोजगार देने की स्किम बनाई जाए.
कोर्ट ने कहा, ''सभी श्रमिकों की स्किल मैपिंग का इंतजाम हो. डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के मुताबिक इंतजाम हो. श्रमिकों के खिलाफ लॉकडाउन के नियम तोड़ने के आरोप में दर्ज सारी शिकायतें और मुकदमे वापस/रद्द किए जाएं. अगर राज्य सरकारें प्रवासी मजदूरों को वापस भेजने के लिए ट्रेनें मांगे तो केन्द्र 24 घंटे में ट्रेन मुहैया कराए.
SC ने केंद्र और राज्यों से मौजूदा योजनाओं की पहचान करने को कहा जो उन प्रवासी श्रमिकों को रोजगार दे सकती है जो घर पहुंच चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन प्रवासी कामगारों की सूची तैयार करने को कहा जो अपने कार्यस्थल पर वापस जाना चाहते हैं और सरकारों से कहा है कि वे काम से पहले उन्हें उचित काउंसलिंग प्रदान करें. 8 जुलाई को अगली सुनवाई है, जिसमें राज्यों को प्रवासियों का पूरा ब्यौरा और रोजगार संबंधी जानकारी देनी है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / दिल्ली में 1,007 में नए मामले सामने आए और कुल मामले की संख्या करीब 30,000 हो गई है. वहीं मृतकों का आंकड़ा 8 सौ ज्यादा हो गया है. राष्ट्रीय राजधानी में अब यूक्रेन, पौलेंड, आयरलैंड, अर्जेंटीना, फिलीपीन, इज़रायल,और जापान समेत कई देशों से ज्यादा मामले हो गए हैं. वहीं मुंबई के अलावा, महाराष्ट्र के ठाणे और पुणे में भी बड़ी में संक्रमण के मरीज सामने आए हैं. राज्य में सोमवार को 2500 से ज्यादा मामले आए जिसके बाद कुल मामले 88,528 हो गए हैं जबकि मृतकों की संख्या 3,169 हो गई हैं. महाराष्ट्र में संक्रमण के मामले चीन, कतर, बांग्लादेश, बेल्जियम, बेलारूस समेत कई देशों से ज्यादा हैं. भारत में दूसरा सबसे बुरी तरह से प्रभावित राज्य तमिलनाडु है, जहां सोमवार को 1,562 नए मरीजों की पुष्टि हुई और 17 और रोगियों ने संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया. राज्य में कुल मामले 33,229 हो गए हैं और मृतकों का आंकड़ा 286 है. दक्षिण भारतीय राज्य में, कुवैत, इंडोनेशिया, स्विट्ज़रलैंड, यूक्रेन, पौलेंड, आयरलैंड, अर्जेंटीना और अफगानिस्तान समेत कई देशों से ज्यादा संक्रमित हैं.
महामारी से बुरी तरह से प्रभावित राज्य गुजरात में, 477 नए मरीज सामने और 31 और रोगियों की मौत हो गई. राज्य में 20,574 मरीज हैं और मृतकों की संख्या 1280 है. गुजरात में पुष्ट मामलों की संख्या, इजरायल, ओमान, जापान, ऑस्ट्रिया, पनामा और बहरीन सहित अन्य देशों से ज्यादा है.
गुजरात के अहमदाबाद में 346 नए मामले आए और 24 लोगों की मौत हुई. शहर में कुल मामले 14,631 हैं और जान गंवाने वालों की संख्या 1,039 है. अहमदाबाद में मामले, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया, नॉर्वे, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, फिनलैंड, लक्समबर्ग और थाइलैंड समेत अन्य देशों से अधिक हैं.
मुंबई और अहमदाबाद में ही देश के कुल मामलों के एक चौथाई मामले हैं. इसमें दिल्ली, पुणे और कोलकाता को भी मिला दिया जाए तो इन पांच बड़े शहरों में देशभर में कोरोना वायरस की मौतों का करीब दो-तिहाई है.
चेन्नई और जयपुर जैसे शहर भी बुरी तरहे से प्रभावित तो हैं लेकिन वहां मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, ओडिशा, असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम और नागालैंड, अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, रविवार सुबह आठ बजे से पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के रिकॉर्ड 9,983 नये मामले सामने आने के बाद देशभर में संक्रमितों की कुल संख्या 2,56,611 पर पहुंच गई है जबकि संक्रमण के कारण 271 और मौतें होने के साथ ही मरने वालों की संख्या 7,200 हो गई है. मंत्रालय के मुताबिक, 1.24 लाख मरीज संक्रमण का इलाज करा रहे हैं जबकि इतने ही मरीज संक्रमण से ठीक हो चुके हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / देश में कोरोना के मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं, पिछले कुछ दिनों में दिल्ली समेत कई राज्यों में कोविड-19 के मामलों में उछाल देखने को मिला है. सरकारी कर्मचारी भी इसकी चपेट में आ रहे हैं, लिहाजा केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए निर्देश जारी किए हैं. सरकारी निर्देश के अनुसार अब केवल वह कर्मचारियों ही दफ्तर आ सकते हैं जिनमें किसी प्रकार के लक्षण नहीं हैं. अगर किसी कर्मचारी को सर्दी, खांसी या बुखार है तो उसे घर पर ही रहना होगा. इसके अलावा कंटेनमेंट ज़ोन में रह रहे अधिकारी और कर्मचारी घर से ही काम करेंगे. जब तक उनका इलाका कंटेनमेंट ज़ोन से नहीं हट जाता तब तब वह घर पर ही रहकर काम करेंगे.
आदेश के अनुसार एक दिन में बीस से अधिक अधिकारी या कर्मचारी काम नहीं करेंगे. इसके लिए रोस्टर बनाया जाएगा. जो कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं वह अपने घरों से काम करते रहेंगे. अगर एक केबिन में दो अधिकारी हैं तो वे एक दिन छोड़ कर आएंगे. सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों को पूरे समय मास्क पहनना होगा, अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी. साथ ही निर्देशों में सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखने के लिए कहा गया है.
बता दें कि अनलॉक-1 के बीच देश में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कोरोनावायरस मरीज़ों की कुल संख्या 2,66, 598 हो गई है और जबकि इस वायरस से अब तक 7,466 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, पिछले 24 घंटों में कोरोना के 9987 नए मामले सामने आए हैं और 266 लोगों की जान गई है. 24 घन्टे में सबसे ज्यादा मामले आए हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि 1,29,215 मरीज़ कोरोना को मात देने में कामयाब हुए हैं. रिकवरी रेट 48.46 प्रतिशत पर पहुंच गया है. अनलॉक-1 का पहला चरण 8 जून को शुरू किया गया है. इसके तहत, धार्मिक स्थल, शॉपिंग माल और रेस्तरां आदि को फिर से खोलने की अनुमति दी गई है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / देश में कोरोनावायरस से संक्रमण के मामले तेजी से फैल रहे हैं. आपदा से मोर्चा संभालने वाला राष्ट्रीय आपदा मोचन बल भी इसकी चपेट में आ गया है. एनडीआरएफ के 76 जवान कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं. इसमें से 50 जवान अम्फान चक्रवात के दौरान पश्चिम बंगाल में तैनात थे. एनडीआरएफ के अनुसार, जिन 26 और जवानों के कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव आए हैं, वे दिल्ली में तैनात थे, जिनमें से कुछ मुख्यालय से जुड़े हैं. शेष 50 जवान कटक में संक्रमित पाए गए थे. वे पश्चिम बंगाल में अम्फान के दौरान अपना काम करके वापस आए थे.
एनडीआरएफ के महानिदेशक सत्य नारायण प्रधान ने एनडीटीवी को बताया, "राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के सभी कर्मचारियों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिख (Asymptomatic) हैं. सभी की निगरानी में रखा गया है." उनके मुताबिक, ओडिशा सरकार ने 190 जवानों का परीक्षण किया था, जिसमें से 50 कोरोना संक्रमित पाए गए हैं. ये 190 जवान अम्फान प्रभावित पश्चिम बंगाल से ओडिशा लौटे थे. तब इनका टेस्ट किया गया.
एनडीआरएफ के महानिदेशक ने आगे कहा, "संक्रमित पाए गए जवानों का उपचार चल रहा है और वह ठीक हैं." एनडीआरएफ के मुताबिक, एक कर्मचारी को कटक में अश्विनी कोविड-19 अस्पताल में भर्ती किया गया है जबकि कुछ अन्य को भुवनेश्वर के केआईआईएमस अस्पताल में भर्ती किया गया है.
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल ने साइक्लोन के दौरान और उसके बाद राहत और बचाव कार्य के लिए 19 टीमों को तैनात किया था. हर टीम में करीब 45 लोग थे. एक अधिकारी ने बताया, "एनडीआरएफ कई राज्यों में अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के टेस्ट कर रहा है लेकिन कुछ राज्य टेस्ट के लिए पैसा वसूल रह हैं. कुछ राज्य कोई चार्ज नहीं ले रहे हैं जबकि अन्य राज्यों में हमें भुगतान करना पड़ रहा है क्योंकि वे निजी टेस्ट करवा रहे हैं."
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फ्लेक्सिबल फोल्डर फीचर से आप अपनी चैट लिस्ट में किसी भी चैट पर होल्ड कर उसे एक फोल्डर में डाल सकते हैं।
अप्रैल तक टेलीग्राम के 400 मिलियन से ज्यादा एक्टिव यूजर्स थे। कंपनी का कहना है कि उसकी इस वर्ष सुरक्षित ग्रुप वीडियो कॉल लाने की योजना है।
सेहत /शौर्यपथ / आयुर्वेद के अनुसार अदरक एक ऐसी औषधि है, जो खाने में स्वाद बढ़ाने के साथ ही कई बीमारियों से दूर रखने में भी काफी मददगार है। ऐसे में आइए जानते हैं बदलते मौसम में आपके पेट को दुरुस्त रखने के अलावा अदरक सेहत के लिए कैसे वरदान है।
पेट के रोगों को ठीक करें अदरक-
भोजन पचने में दिक्कत आए तो अदरक को पीसकर इसके रस को घी या शहद के साथ लेना चाहिए। कई बार भोजन ठीक से न पचने पर पेट में गैस के कारण पेट व सीने में दर्द, भारीपन, ऐंठन, एसिडिटी और दस्त जैसी समस्या हो जाती है। अदरक के सेवन से पाचन क्रिया ठीक होती है। अदरक, काली मिर्च और छोटी पीपली का चूर्ण बराबर भाग में मिलाकर दो ग्राम मात्रा में पुराने गुड़ के साथ मिलाएं। इसके सेवन से फेफड़ों और पेट के रोगों के उपचार में लाभ होता है। भोजन से पहले यदि अदरक का सेवन सेंधा नमक के साथ किया जाए, तो भूख भी बढ़ती है।
सिरदर्द में राहत दिलाए-
सिरदर्द होने पर अदरक के चूर्ण या इसके रस को गर्म पानी में मिलाकर हल्दी के साथ सिर पर इसका लेप करने से लाभ मिलता है। सर्दी के मौसम में पेट या दांत में दर्द होने पर अदरक को चबाकर खाने से तत्काल लाभ मिलता है। दांत के दर्द में अदरक को लौंग के साथ चबाकर खाना चाहिए।
जॉन्डिस में लाभकारी-
जॉन्डिस में अदरक, त्रिफला और गुड़ को साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए।
जोड़ों के दर्द में-
अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो आथ्र्राइटिस यानी जोड़ों के दर्द में राहत दिलाता है। पुराने जोड़ों के दर्द में अदरक का रस, अश्वगंधा चूर्ण, शैलाकी चूर्ण, हल्दी का चूर्ण बराबर-बराबर भाग में मिलाकर शहद के साथ सेवन कर बाद में गर्म दूध, चाय या गर्म पानी पीने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है।
सर्दी, जुकाम, बुखार में फायदेमंद-
खांसी, जुकाम, गले में खराश, गला बैठने जैसी स्थिति में अदरक को पीसकर घी या शहद के साथ लेना चाहिए। हिचकी आने पर अदरक के रस का सेवन शहद व तुलसी के साथ करें। सांस के रोगी को शहद के साथ इसका रस देने से कफ पतला होता है, जिससे आराम मिलता है।
अदरक की चाय-
खासतौर पर ठंड के मौसम में अदरक व काली मिर्च के पांच दाने मिला कर तैयार की गई चाय पीने से लाभ होता है।
-बरतें सावधानी-
-ठंडी प्रकृति वाले लोगों को अदरक लाभ पहुंचाता है लेकिन जिन्हें अधिक गर्मी लगती हो या जो पित्त प्रकृति के हों तो उन्हें अदरक से बचना चाहिए।
-हृदय और किडनी के पुराने रोगियों के लिए भी यह नुकसानदायक होती है।
शौर्यपथ / कोरोना वायरस के चलते होटल व्यवसाय पर बुरी मार पड़ी है। शोधकर्ताओं का मानना है कि कोरोना संकट के बीच होटलों में रोबोट आधारित सर्विस शुरू करने से लोगों की सुरक्षित रखने के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने में और व्यवसाय को तेजी से पटरी पर लाने में मदद मिल सकती है।
ब्रिटेन में सरे विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्रमुख चुनौतियों की पहचान करने के लिए 19 होटल मानव संसाधन (एचआर) विशेषज्ञों से बात की। उन्होंने कहा कि रोबोट सर्विस को होटल की गतिविधियों की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन वे उच्च लागत, कौशल घाटे, होटल की संगठनात्मक संरचना और संस्कृति में महत्वपूर्ण बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कंटेम्परेरी हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में प्रकाशित शोध पत्र के मुताबिक, रोबोटिक तकनीक के प्रत्याशित उपयोगों के चलते हमें मानव और रोबोट के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
होटल उद्योग में रोबोट सर्विस का प्रयोग बढ़ रहा :
शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया कि मार्च, 2020 में कोविड-19 के चलते दुनिया भर में आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई। होटल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई उद्योगों को फिर से पटरी पर लाने के लिए उनकी कार्यप्रणाली में परिवर्तन करना होगा। शोध पत्र की मुख्य लेखक ट्रेसी जू कहती हैं कि होटल उद्योग में रोबोट सर्विस का प्रयोग बढ़ रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा, संभावना है कि पाबंदिया हटाने के बाद होटल प्रबंधक नए सिरे से शुरुआत करने की योजना बना रहे होंगे, ऐसे में रोबोट सर्विस अपनाना सकारात्मक कदम होगा।
होटल-रेस्तरां में सर्विस दे रहे हैं रोबोट :
लीशर होटल्स ग्रुप के निदेशक विभास प्रसाद ने कहा कि रोबोट सर्विस की शुरुआत कोविड-19 से पहले ही होटल उद्योग और हॉस्पिटैलिटी में हो गई थी। बोस्टन में 'स्पाईस रेस्तरां' इस तरह के मशीनीकरण का उपयोग करता है। वहीं सैन फ्रांसिस्को में 'निर्माता' रोबोट का उपयोग शुरू से अंत तक बर्गर बनाने के लिए करता है। लेकिन अभी तक सीधे मेहमानों की आवभगत करने में रोबोट का उपयोग नहीं किया या है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
