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दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश सहित देश में कोरोना आपदा की मार से पूरा जनजीवन अस्त व्यस्त है . आम आदमी की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है . छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी यह स्पष्ट सन्देश दिया है कि ऐसी कोई मितव्यतिता से बचा जाए . कोरोना आपदा में राज्य सरकार के अधिकारियों और पदेन जनप्रतिनिधियों को मितव्यतिता से बचने के सन्देश दिए है . किन्तु इस सन्देश का असर दुर्ग निगम में पड़ा हो ये नजऱ नहीं आ रहा है . एक तरफ निगम प्रशासन फण्ड की कमी की बात कर रहा है निगम आयुक्त स्वयं अधिकारियों को निर्देशित कर रहे है कि सार्थक प्रयास कर राजस्व की बकाया राशि वसूली जाए .वही महापौर बाकलीवाल द्वारा शहर के ऐसे दुकाने , गुमठिया जो खाली पड़ी है किराये में देने , विक्रय करने के लिए शहर के व्यापारियों से , चिकित्सको से , अधिवाक्ताओ से चर्चा कर रहे है ताकि निगम की करोडो की संपत्ति ( ऐसी दुकाने जो सालो से बनी है और अभी तक विक्रय नहीं हुई है ) का सही तरीके से उपयोग कर राजस्व की बढ़ोतरी की जाये किन्तु वही दुर्ग का एम्आईसी भवन निरंतर नए नए सुविधाओ से लेस हो रहा है जिसकी वर्तमान में जरुरत भी नहीं .
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सारा कार्य प्रभारी ईई मोहनपुरी गोस्वामी के निरिक्षण में हो रहा है . एक तरफ जब इस बारे में मोहन पूरी गोस्वामी से जानकारी ली गयी तो उनके अनुसार सिर्फ पेंट पुताई की बात कही गयी किन्तु आम जनता को भी आसानी से दिख रहा है कि एमआईसी भवन में पेंट के साथ डिजाइनर वाल , नए नए परदे , एक दरवाज़ा होने के बाद भी दूसरा कांच का दरवाज़ा , खिड़की की सही हालत होने के बाद भी नयी-नयी खिडकिया , कई केबिनो में नए नए चेयर तक की व्यवस्था की जा रही है . विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी मंत्रियो के कमरे में एसी लगाने की तैयारी की जा रही है . यह सारा कार्य एम्आईसी के प्रभारी के निर्देश पर होने की बात बताई जा रही है . आखिर प्रभारी ईई मामले को छुपाने की कोशिश क्यों कर रहे है क्या अपने किसी ख़ास ठेकेदार से ये कार्य करवाने के लिए सारी जहमत उठाई जा रही है या कोई और बात है ? क्या मामले को संज्ञान लेंगे आयुक्त बर्मन ?
ये सही है कि निगम में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में आयी है और जनप्रतिनिधि होने के नाते ये उनका हक भी है कि अपनी केबिन की साज सज्जा उच्च स्तर की रखे ये अलग बात है कि 15 साल भाजपा सत्ता में रहने के बाद भी सिर्फ ज़रूरी सुविधाओ के साथ मंत्रालय में कार्य किया है जबकि तब स्थिति सामान्य थी कोई वैश्विक महामारी नहीं थी किन्तु वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री के सन्देश को भी दरकिनार करते हुए कार्य समझ से परे है . खैर सत्ता में कांग्रेस है और प्रदेश के मुखिया भी कांग्रेस से है तो कोई रोक टोक नहीं होगी सारी सुविधाए आ भी जाएँगी शायद इसे ही कहते है 15 साल बाद सत्ता में आने के बाद का सुख शायद यही है राजनितिक पद में विराजमान होने का लाभ , शायद यही कारण है कि पार्षद के चुनाव में लाखो खर्च करते है प्रत्याशी .
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में कोरोना संक्रमण से बचाव, नियंत्रण के उपायों और मरीजों के इलाज की व्यवस्थाओं की समीक्षा की साथ ही आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने क्वारेंटीन सेंटर्स की व्यवस्था, अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि संक्रमित व्यक्ति से अस्पताल आने वाले अन्य मरीजों में संक्रमण नहीं फैले। चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ के लोग संक्रमण से बचाव के लिए गाइड लाईन का पालन करें। मुख्यमंत्री बघेल ने वीडियो क्रांफ्रेंसिंग के माध्यम से एम्स रायपुर के निदेशक और बिलासपुर सिम्स के अधिकारियों से भी वहां की व्यवस्थाओं और आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जिलों में 141 कोविड केयर सेंटरों और कोविड के मरीजों के लिए 21 हजार 230 बिस्तर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
स्वास्थ्य सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने मुख्यमंत्री को विभिन्न अस्पतालों में उपचार की व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कोविड-19 नियंत्रण के लिए प्रदेश स्तर पर किए जा रहे उपायों की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में शामिल अधिकारियों से क्वारेंटाइन सेंटर्स की संख्या, वहां की व्यवस्था और रह रहे लोगों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में प्रदेश में पहुंच चुके प्रवासी मजदूरों के लिए संचालित क्वारेंटाइन सेंटर्स एवं वहां की व्यवस्था के बारे में चर्चा की और अगले कुछ दिनों में पहुंचने वाले मजदूरों को क्वारेंटाइन सेंटर्स में रखने की व्यवस्था के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों एवं वहां भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी ली। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में क्षेत्रीय स्तर पर डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल में 1770 बेड हैं, वहीं जिले स्तर पर डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल में 3470 बिस्तर की व्यवस्था है। इन सभी अस्पतालों में आईसीयू की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त बिना लक्षण वाले और कम लक्षण वाले मरीजों हेतु 141 कोविड केयर सेंटर जिलों में स्थापित किये जा रहे हैं, जहाँ 7234 बिस्तर उपलब्ध होंगे व 6500 बिस्तर के अतिरिक्त कोविड केयर यूनिट की स्थापना प्रक्रियाधीन है।
अधिकारियों ने बताया क्वारेंटीन सेंटर में पूर्व से उपलब्ध 4026 बिस्तरों को भी आवश्यकता पडऩे पर कोविड केयर सेंटर में परिवर्तित किया जायेगा। इस प्रकार प्रदेश में कोविड-19 मरीजों हेतु 21 हजार 230 बिस्तर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमितों के स्वास्थ्य की गंभीरता, लाक्षणिक और गैर-लाक्षणिक मरीजों की जांच व स्वास्थ्य की स्थिति एवं उपचार की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री बघेल ने आने वाले दिनों में कोविड-19 पर नियंत्रण के प्रभावी उपायों और इसका सामुदायिक प्रसार रोकने के संबंध में एम्स के निदेशक डॉ. नितिन एम. नागरकर से सुझाव मांगे। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच करने और इलाज के बारे में आगामी कार्ययोजना एवं रणनीति पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री ने सिम्स बिलासपुर के डीन और अधीक्षक से वहां कोरोना वायरस संक्रमित डॉक्टर एवं मेडिकल स्टॉफ के बारे में जानकारी ली।
डीन डॉ. पात्रा ने मुख्यमंत्री को डॉक्टरों के संक्रमण के कारणों की जानकारी दी। उन्होंने इससे बचने के लिए वहां की जा रही सावधानियों के बारे में भी बताया। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने सभी मेडिकल कॉलेजों को जरूरी सावधानी बरतने तथा इलाज के लिए आने वाले गंभीर मरीजों का गंभीरतापूर्वक उपचार करने के निर्देश दिए। उन्होंने इलाज और देखभाल के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों को अपनाने और सभी को इनका अनिवार्यत: पालन करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी. पिल्ले, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, स्वास्थ्य विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, खाद्य एवं परिवहन विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं नीरज बंसोड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एस.एल. आदिले और सिम्स बिलासपुर के डीन डॉ. पात्रा शामिल हुए । एम्स रायपुर के निदेशक डॉ. नितिन एम. नागरकर तथा सिम्स बिलासपुर के अधीक्षक डॉ. पुनीत भारद्वाज अपने-अपने कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेस में जुड़े।
दुर्ग / शौर्यपथ / विद्युत कंपनी ने परिवादी संस्थान के प्लॉट से 33 के.व्ही. विद्युत पोल हटाने के लिए बड़ी राशि जमा कराई और पूरी राशि मिलने बाद भी ना तो पोल हटाया और ना ही परिवादी संस्था को उसकी राशि वापस की। इस आचरण को व्यवसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नता ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के पद्मनाभपुर दुर्ग कार्यालय के कार्यपालन यंत्री एवं सहायक अभियंता पर 6 लाख 5 हजार रुपये हर्जाना लगाया।
परिवादी संस्था की शिकायत
परिवादी संस्था जुग महादेव एजुकेशनल सोसायटी के सचिव सुशील चंद्राकर ने उपभोक्ता फोरम के समक्ष ये परिवाद दायर किया कि पुलगांव चौक पर उनके संस्थान द्वारा निर्माण कराए जा रहे कालेज के प्लॉट से 33 के.वी. पोल लगा हुआ है, जिसके ऊपर से हाईवोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन गुजरती है। पत्र व्यवहार करने पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने कहा कि 554076 रुपये भुगतान करने पर उक्त पोल को परिवादी के प्लॉट से हटा दिया जाएगा, जिस पर सहमत होते हुए परिवादी ने दिनांक 31 मार्च 2008 को 554076 रुपये भुगतान कर दिया परंतु संपूर्ण राशि प्राप्त होने के बाद भी अनावेदकों द्वारा ना तो 33 के.वी. पोल को हटाया गया और ना ही राशि वापस की गई। इस बाबत लगातार पत्राचार किया गया परंतु अनावेदकगण ने कोई जवाब नहीं दिया।
अनावेदकगण का जवाब
अनावेदकगण ने लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा कि परिवादी के प्लाट में लगे विद्युत पोलों को हटाने हेतु दिनांक 28 अप्रैल 2008 को वर्क आर्डर जारी किया गया था और विद्युत पोल हटा दिया गया है। परिवादी ने समयसीमा के बाद प्रकरण पेश किया है इसीलिए प्रकरण खारिज किया जाए।
फोरम का फैसला
प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों तथा दोनों पक्षों के तर्को के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह निष्कर्षित किया कि अनावेदकगण ने पोल हटाने संबंधी कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है, पोल शिफ्टिंग का जो कार्य हुआ है वह पूर्व में किए गए शिफ्टिंग के संबंध में है ना कि वर्तमान शिफ्टिंग के संबंध में है। दिनांक 28 अप्रैल 2008 को वर्क आर्डर जारी करने के पश्चात शिफ्टिंग का कोई कार्य किया गया था यह प्रमाणित नहीं होता है। अनावेदकगण ने 554076 रुपये जमा करवाने के बावजूद परिवादी के परिसर से 33 के.वी. विद्युत पोल नहीं हटाया, जो व्यवसायिक कदाचार एवं सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के पद्मनाभपुर दुर्ग कार्यालय के कार्यपालन यंत्री एवं सहायक अभियंता पर 6 लाख 5 हजार 76 रुपये हर्जाना अधिरोपित किया, जिसके तहत अनावेदकगण को परिवादी की जमा राशि 554076 रुपये, मानसिक परेशानी की क्षतिपूर्ति स्वरूप 50000 रुपये तथा वाद व्यय 1000 रुपये का भुगतान करना होगा, साथ ही जमा राशि पर 31 मार्च 2008 से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।
भिलाईनगर / शौर्यपथ / भिलाई निगम क्षेत्र में पीलिया एवं जलजनित बीमारियों से बचाव हेतु निगम कर्मी घर-घर जाकर क्लोरीन टैबलेट वितरण कर रहे, स्वास्थ्य विभाग का अमला निगम क्षेत्र के वार्डों के गली-मोहल्लों के नाली सफाई कार्य में जुटे हुए हैं, ताकि पीलिया जैसी जल जल जनित बीमारी न हो ! निगम प्रशासन 674030 नग क्लोरीन टैबलेट घर घर में वितरण कर चुकी है। निगम की टीम एवं मितानीनें घरों में जाकर सर्दी, खांसी व बुखार से पीडि़त मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दे रही है। भिलाई निगम के सभी जोन के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए वार्डों में घर घर जाकर पानी की शुद्धता के लिए क्लोरीन टैबलेट बांटने के साथ ही बताया जा रहा है कि उबला हुआ एवं साफ छना हुआ पानी ही पीने हेतु उपयोग करे ताकि किसी प्रकार से जलजनित बीमार न हो।
जोन स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि नलकूल, बोरिंग एवं अन्य जल स्रोत से नमूना लेकर लैब में परीक्षण कराया जा रहा है और प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है! नगर निगम का अमला पीलिया जैसे जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए घरों में क्लोरीन टैबलेट का वितरण कर रही है, जोन 01 के 19323 घरों में 186030 नग टैबलेट, जोन 02 के 18500 घरों में 186000 नग क्लोरीन टैबलेट, जोन 03 के 19000 घरों में 110000 नग क्लोरीन टैबलेट तथा जोन 04 के 19137 घरों में 192000 नग क्लोरीन टैबलेट वितरण किया जा चुका है!
अब तक सभी जोन कार्यालयों के स्वास्थ्य विभाग द्वारा 674030 नग क्लोरीन टैबलेट वितरण किया जा चुका है। जलजनित बीमारयों से बचाव के लिए निगम के स्वास्थ्य विभाग के साथ मितानीनें व आंगनबाड़ी सहायिकाएं भी सहयोग कर रहीं हैं! विभिन्न जल स्रोतों से नमूना लेकर परीक्षण किया जा रहा है!
दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश में 75 दिन बाद सरकार द्वारा अनुमति मिलने के बाद खुले मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारे व चर्च में अब भक्तों को भगवान के दर्शन हो सकेगें। लेकिन उन्हे सोशल डिस्टेसिंग व मास्क लगाना अनिवार्य रहेगा। निगम क्षेत्रांतर्गत आने वाले धार्मिक स्थलों में विधायक अरुण वोरा व महापौर धीरज बाकलीवाल एवं अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा सैनिटाईजेशन का कार्य गणेश मंदिर इंदिरा मार्केट, सांई मंदिर कसारीडीह, चण्डी मंदिर, शीतला मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च, रहमान शाह बाबा का दरगाह एवं दादाबाड़ी जैन मंदिर मालवीय नगर में सुबह से ही प्रारंभ किया गया। वोरा ने कहा कि धार्मिक स्थलों में लॉकडाउन के बाद पुन: रौनक लौट आई है। दर्शनार्थियों के लिए अच्छी व्यवस्था देख जनता में हर्ष व्याप्त है। कोरोना महामारी के बचाव के लिए सैनिटाईजर एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य है लोग सुरक्षित रहेगें तो मंदिर परिसर भी सुरक्षित रहेगा। धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों की अपनी अस्था है इन स्थानों पर पहुंचने से मनोबल बढ़ता है। हम सभी धार्मिक भावनाओं से जुड़े है। धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर शहरवासियों के लिए सुख समृद्धि की कामना की। महापौर बाकलीवाल ने कहा कि काफी दिनों बाद मंदिरो के पट खोले गए है आमजनों में उत्साह है। नगर निगम के द्वारा लगातार धार्मिक स्थलों की मॉनिटरिंग एवं सेनेटाईजेशन का कार्य किया जाएगा।
धार्मिक स्थलों पर फिजीकल और सोशल डिस्टेसिंग के साथ पूजा- अर्चना प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत किया गया।
नई दिल्ली/ शौर्यपथ / पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार को 60 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई. इससे पहले रविवार को भी तेल के दामों में इतना ही इजाफा हुआ था. बताते चलें कि सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में किए जाने वाले रोजाना बदलाव को दोबारा शुरू कर दिया. सरकारी कंपनियों की ओर से जारी अधिसूचना के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 71.86 रुपये से बढ़कर 72.46 रुपये प्रति लीटर हो गई. इसी तरह डीजल की कीमत 69.99 रुपये से बढ़कर 70.59 रुपये प्रति लीटर हो गई. एक अधिकारी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में दैनिक बदलाव की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई है.
इससे पहले तेल कंपनियों ने रविवार को 83 दिनों के अंतराल के बाद कीमतों की समीक्षा करते हुए इसमें 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. इस तरह कीमतों में लगातार दूसरे दिन वृद्धि हुई है. एक तेल कंपनी के अधिकारी ने बताया कि दैनिक मूल्य संशोधन फिर से शुरू हो गया है. तेल कंपनियां हालांकि एटीएफ और एलपीजी की कीमतों की नियमित रूप से समीक्षा कर रही थीं, लेकिन 16 मार्च से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के लाभ को सोखने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद कीमतों की समीक्षा रोक दी गई थी. इसके बाद सरकार ने छह मई को एक बार फिर उत्पाद शुल्क को पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 13 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत और चीन सीमा विवाद को सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत के जरिये सुलझाने पर सहमत हुए हैं. इस बीच, कांग्रेस के पूर्व अधयक्ष राहुल गांधी ने अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सब को मालूम है ‘सीमा' की हक़ीक़त लेकिन, दिल के ख़ुश रखने को, ‘शाह-यद' ये ख़्याल अच्छा है. दरअसल, गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारत की रक्षा नीति की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ी है. पूरी दुनिया यह मानती है कि अमेरिका और इजराइल के बाद अगर कोई देश है जो अपनी सीमाओं की रक्षा करने में समर्थ है तो वो भारत है. राहुल गांधी ने गृह मंत्री के इसी बयान को लेकर ट्वीट किया है.
शाह ने रविवार को वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के जरिए बिहार में चुनावी शंखनाद करते हुए कहा कि एक समय था जब कोई भी हमारी सीमा के घुस जाता था, हमारे सैनिकों का सिर काट लेता था और दिल्ली में बैठे लोगों (दिल्ली दरबार) को कोई फर्क नहीं पड़ता था. हमारे समय में उरी और पुलवामा हमले हए, यह प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी सरकार थे, जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की.
भारत-चीन सीमा पर तनाव को दूर करने के लिए दोनों देश की सेनाओं के शीर्ष अधिकारियों के बीच 6 जून को बातचीत हुई. सीमा विवाद पर लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बातचीत के बाद विदेश मंत्रालय ने रविवार को आधिकारिक बयान जारी किया. बयान में कहा गया कि यह बैठक सौहर्दपूर्ण और सकारात्मक माहौल में हुई. विभिन्न द्विपक्षीय समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने पर सहमत हुए हैं. दोनों देशों के नेताओं के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में शांति आवश्यक है. दोनों पक्ष स्थिति को ठीक करने और सीमावर्ती इलाकों में शांति सुनिश्चित करने के लिए सैन्य एवं राजनयिक संपर्कों के माध्यम से बातचीत जारी रखेंगे.
बता दें कि करीब एक महीने से लद्दाख में दोनों सेनाओं में तनातनी है. पैंगोंग लेक के फिंगर 4 और फिंगर 8 को लेकर है ज़्यादा विवाद है. अप्रैल से पहले सेना फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करने जाती थी. अब चीनी सेना भारतीय सेना को फिंगर 4 से आगे बढ़ने नही दे रही है. चीनी सेना पहले फिंगर 4 तक पैट्रोलिंग करने आती थी. चीनी सेना की आपत्ति है भारत बॉर्डर पर सड़क क्यों बना रहा है जबकि भारत का कहना है सड़क वाली जगह बॉर्डर से दूर और उसका इलाका है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / लॉकडाउन की वजह से बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर शहरों से गांव की ओर पलायित हुए. अब सरकार इन मजदूरों के लिए बड़ी योजना की तैयारी में है. पीएमओ ने सभी मंत्रालयों से दो हफ़्तों के भीतर प्रस्ताव मांगे हैं. देश भर के ऐसे 116 जिलों की पहचान की हैं जहां सबसे अधिक श्रमिक वापस आए हैं. ये जिले 6 राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओड़िसा और राजस्थान में हैं. केंद्र सरकार की तरफ से चयनित 116 जिलों में सबसे ज्यादा 32 जिले बिहार के हैं. उसके बाद उत्तर प्रदेश के 31 जिले, मध्यप्रदेश के 24, राजस्थान के 22 जिले, झारखंड के 3 और ओड़िसा के 4 जिले हैं. इन जिलों के प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के कारण रोजी-रोटी और रोजगार गंवा चुके हैं.
सरकार की इस योजना के तहत कोरोना लॉकडाउन के दौरान अपने राज्यों और गांवों को लौटे मजदूरों के पुनर्वास और रोजगार के लिए इन 116 जिलों में केंद्र सरकार की सामाजिक कल्याण और डायरेक्ट बेनिफिट स्कीमों को तेजी से मिशन मोड में चलाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि घर लौटे श्रमिकों के लिए आजीविका, रोजगार और गरीब कल्याण सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके. इन जिलों में मनरेगा,जनधन योजना, किसान कल्याण योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, पीएम आवास योजना, कौशल विकास समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत मिशन मोड में काम होगा. इसके साथ ही हाल ही में घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भी इन जिलों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही बाकी केंद्रीय योजनाओं को भी टारगेटेड तरीके से लागू किया जाएगा.
सभी जिलों में वापस आए श्रमिकों का डाटा सरकार ने तैयार कर लिया है. हर जिले में कितने श्रमिक वापस आए हैं सरकार ने इसकी जानकारी भी जुटा ली है. यूपी के सिद्धार्थनगर और बिहार के पूर्वी चंपारण में सबसे अधिक डेढ़ लाख से भी ज्यादा श्रमिक वापस आए हैं. बिहार के आठ जिलों में एक लाख से भी अधिक श्रमिक वापस आए हैं. वहीं बात करें अन्य प्रदेशों की तो आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के दो, मध्य प्रदेश और ओड़िसा के एक-एक, राजस्थान के तीन जिलों में एक लाख से अधिक श्रमिक वापस आए हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / सरकार द्वारा संचालित सोवेरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम का सब्सक्रिप्शन सोमवार, 8 जून को शुरू हो रहा है. यह गोल्ड बॉन्ड स्कीम की तीसरी कड़ी है, जो सबसे पहले इसी साल अप्रैल में बाज़ार में उतारी गई थी. केंद्र सरकार की ओर से भारतीय रिज़र्व बैंक, यानी रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी किए गए यह बॉन्ड सरकार के बाज़ार से कर्ज़ उठाने की योजना का हिस्सा हैं, जिसमें प्रत्येक बॉन्ड की कीमत एक ग्राम सोने के बराबर है. RBI ने पिछले सप्ताह जानकारी दी थी कि SGB 2020-21 योजना की तीसरी किश्त या शृंखला में जारी किए जाने की कीमत 4,677 रुपये प्रति ग्राम रखी गई है. कोरोनावायरस महामारी के चलते दुनियाभर के वित्तीय बाज़ार संकट में हैं, लेकिन सुरक्षित निवेश के रूप में स्वर्ण के प्रति लगाव बढ़ा है.
गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने से पहले जान लें, सभी ज़रूरी बातें...
गोल्ड बॉन्ड ब्याज दर
SGB पर 2.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से निश्चित ब्याज दिया जाएगा, जिसका भुगतान छमाही आधार पर होगा.
कौन खरीद सकता है गोल्ड बॉन्ड...?
देश में बसे नागरिक, हिन्दू अविभाजित परिवार (HUF), ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी तथा चौरिटेबल संस्थान SGB योजना में निवेश कर सकते हैं.
गोल्ड बॉन्ड जारी होने पर कीमत
सब्सक्रिप्शन शुरू होने से पहले के सप्ताह के अंतिम तीन कार्यदिवसों के लिए मुंबई-स्थित इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित किए गए 999-शुद्धता सोने के दाम के औसत के आधार पर गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय की जाती है. डिजिटल माध्यम से भुगतान करने वाले ऑनलाइन सब्सक्राइबरों को 50 रुपये प्रति ग्राम का डिस्काउंट भी दिया जाता है.
गोल्ड बॉन्ड से जुड़ी अहम तारीखें
गोल्ड बॉन्ड स्कीम की दूसरी शृंखला 11 से 15 मई तक जारी रही थी, और अगली, यानी तीसरी शृंखला 8 जून को शुरू हो रही है. यह गोल्ड बॉन्ड योजना वर्ष में छह बार जारी की जाएगी.
गोल्ड बॉन्ड में निवेश कैसे करें...?
SGB की बिक्री वाणिज्यिक बैंकों, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन, चिह्नित डाकघरों तथा स्टॉक एक्सचेंजों BSE व NSE के ज़रिये की जाएगी. इन बॉन्ड को RBI बुक या डीमैट स्वरूप में रखा जा सकता है.
कितना है गोल्ड बॉन्ड लॉक-इन...?
गोल्ड बॉन्ड योजना आठ वर्ष की अवधि के साथ आती है, जिसमें पांचवें वर्ष के बाद बाहर निकल आने का विकल्प रहता है. इस विकल्प का प्रयोग ब्याज भुगतान तिथियों पर किया जा सकता है.
गोल्ड बॉन्ड में निवेश की सीमा
योग्य व्यक्तियों तथा HUF द्वारा एक वित्तवर्ष के दौरान न्यूनतम एक ग्राम तथा अधिकतम चार किलोग्राम सोना हासिल किया जा सकता है. ट्रस्ट तथा समान संस्थाएं एक वित्तवर्ष के दौरान 20 किलोग्राम तक सोना खरीद सकती हैं.
गोल्ड बॉन्ड का टैक्स पर पड़ने वाला असर
गोल्ड बॉन्ड पर हासिल होने वाला ब्याज करयोग्य है. हालांकि बॉन्ड बेच देने पर होने वाले कैपिटल गेन पर व्यक्तिगत निवेशकों को टैक्स नहीं देना होगा.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / बॉयज लॉकर रूम नाम से इंस्टाग्राम चैट के स्क्रीनशॉट को ट्वीट करने वाली लड़की की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एफआईआर (FIR) दर्ज की है. लड़की को सोशल मीडिया पर धमकियां मिल रही हैं और परेशान किया जा रहा है. लड़की की शिकायत पर साइबर सेल ने केस दर्ज कर लिया और जांच चल रही है. इससे पहले इसी लड़की का ट्वीट देखकर साइबर सेल ने एफआईआर की थी जिसमें लड़कों के एक ग्रुप की कथित चैट सामने आई थी.
इंस्टाग्राम पर बने एक ग्रुप 'बॉयज लाकर रूम' (Boys Locker Room) मामले की जांच में पिछले महीने बड़ा खुलासा हुआ था. दरअसल ग्रुप में जो रेप की बातें और रेप करने की धमकी दी जा रही थी वो बातचीत करने वाली एक नाबालिग लड़की थी, जो दिल्ली के ही एक स्कूल की छात्रा है और वो फर्जी आईडी बनाकर ग्रुप में एक्टिव थी. दिल्ली पुलिस ने इस ग्रुप के एडमिन को भी गिरफ्तार किया था, जो नोएडा के स्कूल का छात्र है, जबकि ग्रुप से जुड़े एक नाबालिग को भी पकड़ा गया था जो दक्षिणी दिल्ली के एक नामी स्कूल का छात्र है.
साइबर सेल की जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बने 'बॉयज लॉकर रूम' में 24 से ज्यादा सदस्य आपस मे चैट कर रहे थे और लड़कियों की अश्लील तस्वीरें ग्रुप में डालकर लड़की के रेप की बातें कर रहे थे. लेकिन जब ये चैट सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने केस दर्ज कर जांच शुरू की. दिल्ली पुलिस ने इंस्टाग्राम से भी ग्रुप के डिटेल्स मांगे थे.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
