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May 24, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

जबलपुर |  संस्कारधानी जबलपुर का प्रमुख पर्यटन स्थल बरगी बांध आज चीख-पुकार और मातम का केंद्र बन गया। गुरुवार शाम करीब 5:00 बजे आए एक भीषण चक्रवाती तूफान ने पर्यटकों से भरे क्रूज को जलसमाधि दे दी। तट से महज 300 मीटर की दूरी पर हुए इस हादसे में अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि प्रशासन की मुस्तैदी से 16 जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया।

कुदरत का तांडव: 74 किमी/घंटा की रफ्तार और डूबता क्रूज

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम को अचानक आसमान में काले बादल छा गए और देखते ही देखते 74 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज आंधी चलने लगी। लहरें इतनी ऊंची उठीं कि क्रूज अनियंत्रित होकर एक तरफ झुक गया और पलट गया। क्रूज पर सवार पर्यटक संभल पाते, उससे पहले ही सब कुछ पानी में समा गया।

भावुक कर देने वाली दास्तां: आखिरी सांस तक बेटे को बचाती रही मां

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया। एक मां ने अपने 4 साल के मासूम बेटे को डूबने से बचाने के लिए आखिरी वक्त तक अपने हाथों में ऊपर उठाए रखा, लेकिन कुदरत के आगे ममता हार गई। दोनों के शव एक साथ बरामद हुए हैं। मृतकों में दिल्ली से घूमने आया एक परिवार भी शामिल है, जिनकी छुट्टियां मातम में बदल गईं।

लापरवाही की 'लहरें': उत्तरजीवियों के गंभीर आरोप

हादसे में सुरक्षित बचे पर्यटकों ने क्रूज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक घायल पर्यटक ने बताया:

"जब मौसम खराब हो रहा था, हमने पायलट से वापस चलने को कहा, लेकिन उसने चेतावनी को नजरअंदाज किया। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि हमारे पास लाइफ जैकेट तक नहीं थे। अगर जैकेट समय पर मिल जाते, तो शायद इतनी जानें नहीं जातीं।"

प्रशासनिक एक्शन और मुआवजे का एलान

हादसे की सूचना मिलते ही कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित SDRF और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:

उच्च स्तरीय जांच: घटना के कारणों और सुरक्षा खामियों की जांच के लिए कमेटी गठित।

आर्थिक सहायता: प्रत्येक मृतक के परिजन को 4-4 लाख रुपये की राहत राशि।

कठोर कार्रवाई: क्रूज के पायलट और जिम्मेदार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।

पर्यटन पर उठते सवाल

यह हादसा एमपी टूरिज्म और निजी ऑपरेटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। आखिर क्यों खराब मौसम के अलर्ट के बावजूद क्रूज को पानी में उतारा गया? क्या लाइफ जैकेट की उपलब्धता केवल कागजों तक सीमित है?

वर्तमान में बरगी बांध पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और व्यक्ति लापता न हो। पूरा जबलपुर आज उन परिवारों के लिए प्रार्थना कर रहा है जिन्होंने अपनों को खोया है।

  लोरमी । शौर्यपथ / अरुण साव ने शासकीय उचित मूल्य दुकान विक्रेताओं को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की “मजबूत कड़ी” बताते हुए कहा कि वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी, भरोसेमंद और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे आज लोरमी के मानस मंच में आयोजित प्रदेश स्तरीय शासकीय उचित मूल्य दुकान विक्रेता एवं संचालक संघ के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

उप मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली सीधे आम जनता के जीवन से जुड़ी है और राशन विक्रेता हजारों परिवारों तक समय पर खाद्यान्न पहुंचाकर न केवल जिम्मेदारी निभाते हैं, बल्कि समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण दायित्व भी पूरा करते हैं। उन्होंने संघ की छह प्रमुख मांगों—कमीशन वृद्धि और क्षतिपूर्ति सहित—पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया और बताया कि इन मांगों को वित्त विभाग को भेजकर विस्तृत चर्चा शुरू कर दी गई है।

सम्मेलन के दौरान अरुण साव ने संघ के लिए सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 15 लाख रुपये की घोषणा की, जिससे उपस्थित विक्रेताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार गरीबों, किसानों और महिलाओं के हित में निर्णय ले रही है और विक्रेताओं की भूमिका इन योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर एक प्रेरणादायक पहल करते हुए उप मुख्यमंत्री ने लोरमी के मेधावी विद्यार्थियों—10वीं बोर्ड टॉपर अंशुल शर्मा और 12वीं मेरिट सूची में 8वां स्थान प्राप्त करने वाले चैतुराम साहू—के घर पहुंचकर उनका मुंह मीठा कराया और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने दोनों छात्रों को प्रदेश में लोरमी का मान बढ़ाने के लिए बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विक्रेता, संचालक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जहां सरकार और विक्रेताओं के बीच संवाद, सहयोग और विश्वास का मजबूत संदेश सामने आया।

नई दिल्ली / 
राजधानी दिल्ली में 1 मई 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी नवीनतम दरों के अनुसार, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹993 की सीधी बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब इसकी कीमत बढ़कर ₹3,071.50 प्रति सिलेंडर हो गई है।

यह वृद्धि खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और छोटे व्यवसायियों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि कमर्शियल गैस का सीधा असर खाद्य पदार्थों की लागत और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।

? क्या है पूरा गणित?

  • पुरानी कीमत: ₹2,078.50 (अनुमानित)
  • नई कीमत: ₹3,071.50
  • एकमुश्त बढ़ोतरी: ₹993
  • साल 2026 में अब तक कुल बढ़ोतरी: ₹993

⚠️ आम आदमी पर असर

हालांकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से बाजार में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह महंगाई की नई लहर को जन्म दे सकता है।

? क्यों बढ़ी कीमत?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और परिवहन लागत में वृद्धि को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।


? निष्कर्ष:
कमर्शियल LPG की इस बड़ी बढ़ोतरी ने व्यापारिक वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

  दुर्ग / शौर्यपथ / गजेन्द्र यादव ने आज लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सभाकक्ष में जिले में आगामी सुशासन तिहार की तैयारियों एवं विभागवार कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने बिजली, पानी, आवास, राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को जनहित के कार्यों को तेजी से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।
मंत्री ने 01 मई से शुरू होने वाले सुशासन तिहार को लेकर सभी तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि शिविरों में प्राप्त होने वाले आवेदनों का त्वरित और संवेदनशील निराकरण किया जाए, ताकि आम जनता को बिना किसी विलंब के लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को पूर्ण जवाबदेही के साथ कार्य करने की हिदायत दी और चेताया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि इस दौरान मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी शिविरों में शामिल होकर सीधे जनता से फीडबैक भी लेंगे।
राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए मंत्री ने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर जोर दिया और विशेष रूप से समय सीमा से बाहर हो चुके मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सभी कार्य पारदर्शिता से हों।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने एक स्कूल को “मॉडल स्कूल” के रूप में विकसित करने तथा आदर्श कन्या विद्यालय में विद्यार्थियों को जेईई और नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कराने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिल सकें। वहीं जिले के 34 छात्रावासों की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने आदिवासी विकास विभाग को सभी छात्रावासों का निरीक्षण कर भोजन, स्वच्छता और सुरक्षा की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।
खाद्य विभाग को निर्देशित करते हुए मंत्री ने उचित मूल्य दुकानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तीन महीने का राशन स्टॉक अनिवार्य रूप से बनाए रखने को कहा। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में उन्होंने प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा गांवों में बीपी और शुगर जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।
मनरेगा के तहत व्यापक पौधारोपण अभियान चलाने, कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने, किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए प्रेरित करने और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया। ऊर्जा विभाग को मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना के तहत सर्वे कर आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने के निर्देश दिए गए, ताकि निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
मंत्री यादव ने दोहराया कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखना चाहिए। बैठक में जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  दुर्ग / शौर्यपथ / माननीय उच्चतम न्यायालय, भारत द्वारा न्याय को आमजन तक सरल, सुलभ और सहभागी स्वरूप में पहुंचाने के उद्देश्य से “समाधान समारोह-2026” का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान के समापन चरण में 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को विशेष लोक अदालत आयोजित होगी, जिसमें उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों का आपसी सहमति, संवाद और सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्वरित निराकरण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पक्षकारों को प्रभावी, मानवीय और सहज न्याय उपलब्ध कराना है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने आम नागरिकों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों से अपील की है कि वे इस अभियान का अधिकतम लाभ उठाते हुए अपने लंबित प्रकरणों के समाधान के लिए सक्रिय भागीदारी करें। विशेष लोक अदालत में पक्षकार अपनी सुविधा अनुसार प्रत्यक्ष रूप से या वर्चुअल माध्यम से भी शामिल हो सकते हैं।

इच्छुक पक्षकार और अधिवक्ता निर्धारित गूगल फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, जिसका लिंक उच्चतम न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मई 2026 निर्धारित की गई है। अधिक जानकारी और सहायता के लिए वन स्टॉप सेंटर (वार रूम) से 011-23112428 और 011-23112528 नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाकर अपने मामलों का त्वरित, सुलभ और सौहार्दपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें।

दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग इन दिनों भ्रष्टाचार के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। निगम प्रशासन में 'शहरी सरकार' की मिलीभगत और ठेकेदारों की 'सेटिंग' का ऐसा खेल चल रहा…

रायपुर: सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि आम जनता के लिए वह हथियार है जो प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। इसका एक जीवंत उदाहरण हाल ही में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग द्वारा पारित आदेशों में देखने को मिला है, जहाँ जनसेवक विकास तिवारी की अपीलों पर सुनवाई करते हुए आयोग ने कड़ी कार्रवाई की है।

लापरवाही पर भारी दंड: 5 में से 4 मामलों में जुर्माना

जनसेवक विकास तिवारी द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय (रायपुर) के विरुद्ध प्रस्तुत की गई पाँच द्वितीय अपीलों में से चार में आयोग ने कड़ा फैसला सुनाया है। सूचना देने में कोताही बरतने और नियमों की अनदेखी करने पर तत्कालीन जन सूचना अधिकारी (PIO) पर कुल 1 लाख 17 हजार 500 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।

तीन मामलों में अधिकतम जुर्माना: आयोग ने तीन अलग-अलग प्रकरणों (A/3579/2024, A/3577/2024, A/3575/2024, और A/3570/2024) में पीआईओ पर 25,000 - 25,000 रुपये का अधिकतम जुर्माना लगाया है।

चौथे मामले में आंशिक दंड: एक अन्य प्रकरण (A/3574/2024) में 17,250 रुपये की शास्ति (Penalty) अधिरोपित की गई है।

ऐतिहासिक आदेश: अधिकारी की जेब से वसूलने होंगे 2.56 लाख रुपये

जुर्माने के अलावा, एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में आयोग ने सूचना के अधिकार के दुरुपयोग को रोकने और आवेदक को न्याय दिलाने के लिए बड़ा आदेश दिया है। इस मामले में कुल 1,26,000 पृष्ठों की विशाल जानकारी प्रदान करने के लिए लगने वाले 2,56,000 रुपये के शुल्क को जन सूचना अधिकारी से ही वसूलने के आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो जानकारी देने में जानबूझकर देरी करते हैं या प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं।

"शोषितों और वंचितों का हथियार है RTI" - विकास तिवारी

इस सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए जनसेवक विकास तिवारी ने कहा, "सूचना का अधिकार अधिनियम वंचितों, शोषितों और गरीबों को उनका हक दिलवाने के लिए एक अत्यंत मजबूत हथियार है। शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए हमारा यह संघर्ष जारी रहेगा। यह जीत आम जनता की जीत है जो व्यवस्था से जवाब मांगना चाहती है।"

शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की उम्मीद

विकास तिवारी द्वारा उठाए गए इस कदम की आम जनता और शिक्षाविदों द्वारा सराहना की जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर हुई इस बड़ी कार्रवाई से अन्य विभागों के लापरवाह अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े फैसलों से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता को सूचना पाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

RTI कार्यकर्ता और जनसेवक विकास तिवारी के इस निरंतर प्रयास ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो कानून की मदद से किसी भी व्यवस्था को सुधारा जा सकता है।

✍️ विशेष लेख | विचार विमर्श

डिजिटल क्रांति के इस दौर में, जहां आम नागरिक कुछ सौ रुपये में महीनेभर का अनलिमिटेड कॉल और इंटरनेट डेटा उपयोग कर रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के विधायकों को हर महीने ₹10,000 का टेलीफोन भत्ता दिया जाना एक गंभीर बहस का विषय बन गया है।

? पृष्ठभूमि क्या कहती है?

सितंबर 2022 में हुए संशोधन के बाद विधायकों का कुल मासिक वेतन और भत्ता लगभग ₹1.60 लाख तक पहुंच गया। इसके साथ ही उन्हें ₹10,000 का टेलीफोन भत्ता, ₹55,000 का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और ₹15,000 का चिकित्सा भत्ता भी मिल रहा है।

सरकार का तर्क है कि विधायकों को अपने क्षेत्र की जनता से लगातार संवाद बनाए रखना होता है, जिसके लिए यह भत्ता आवश्यक है।

? डिजिटल युग में सवाल

आज भारत में टेलीकॉम सेवाएं बेहद सस्ती हो चुकी हैं।

Reliance Jio, Airtel और Vi जैसी कंपनियां बेहद कम कीमत में अनलिमिटेड कॉलिंग और डेटा पैक उपलब्ध करा रही हैं।

ऐसे में सवाल उठता है—

? जब आम व्यक्ति ₹300-₹500 में पूरा महीना निकाल सकता है, तो ₹10,000 का भत्ता किस आधार पर तय किया गया है?

⚖️ तर्क और विरोध

समर्थन में तर्क:

विधायक 24×7 जनता के संपर्क में रहते हैं

सैकड़ों कॉल, मीटिंग और प्रशासनिक समन्वय की जरूरत

कई बार निजी और सरकारी संचार अलग-अलग माध्यमों से करना पड़ता है

विरोध में तर्क:

डिजिटल सेवाएं पहले से सस्ती और सुलभ

भत्ता वास्तविक खर्च से कहीं अधिक

सरकारी खर्चों में अनावश्यक बढ़ोतरी

? नैतिक और आर्थिक प्रश्न

यह मुद्दा सिर्फ एक भत्ते का नहीं, बल्कि सरकारी खर्चों की प्राथमिकता का भी है।

जब सरकार अन्य क्षेत्रों में खर्च कम करने के लिए कदम उठा रही है—जैसे मंत्रालय की कैंटीन सब्सिडी खत्म करना—तो ऐसे भत्तों की समीक्षा भी उतनी ही जरूरी हो जाती है।

? निष्कर्ष: सुधार की जरूरत या व्यवस्था की मजबूरी?

यह स्पष्ट है कि विधायकों को संचार के लिए संसाधन चाहिए, लेकिन क्या ₹10,000 प्रति माह की राशि आज के समय में उचित है, या इसे वास्तविक खर्च के आधार पर संशोधित किया जाना चाहिए?

लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग यही कहती है कि हर खर्च—चाहे वह छोटा हो या बड़ा—जनहित के तराजू पर तौला जाना चाहिए।

शौर्यपथ। मई महीने की शुरुआत कुछ राशियों के लिए बड़ी सफलता के द्वार खोलने वाली है, तो कुछ को सावधानी बरतने की सलाह दी जा…

रायपुर । शौर्यपथ। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में संकल्प प्रस्तुत करते हुए प्रदेश की महिलाओं के प्रति अपनी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 'डबल इंजन' की सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सर्वांगीण सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह समर्पित है।

लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी का नया युग

मुख्यमंत्री ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह पहल लोकतांत्रिक संस्थाओं को न केवल सुदृढ़ करेगी, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में आधी आबादी की भूमिका को भी प्रभावी बनाएगी। उन्होंने कहा, "जब महिलाएं नीति निर्धारण में शामिल होंगी, तभी विकास अधिक समावेशी और संतुलित होगा।"

सांस्कृतिक गौरव और प्रेरणा

छत्तीसगढ़ की माटी को माता शबरी, माँ दंतेश्वरी और माँ महामाया की पावन भूमि बताते हुए श्री साय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी सृजन और शक्ति की आधारशिला है। उन्होंने अपने संबोधन में भक्त माता कर्मा, तीजन बाई, और उषा बारले जैसी विभूतियों के साथ-साथ रानी लक्ष्मीबाई और रानी दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं का उल्लेख करते हुए उन्हें समाज का प्रेरणास्रोत बताया।

वर्ष 2026: "महतारी गौरव वर्ष"

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 को "महतारी गौरव वर्ष" के रूप में मनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मातृशक्ति के योगदान को रेखांकित करना और उनके आर्थिक व सामाजिक विकास को नई गति देना है।

सशक्तिकरण के जमीनी प्रयास

शासन की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:

आर्थिक आत्मनिर्भरता: स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ा जा रहा है।

सामाजिक सुरक्षा: आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य योजनाओं के जरिए महिलाओं के जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

पंचायती राज में नेतृत्व: स्थानीय निकायों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को निचले स्तर पर मजबूत कर रही है।

अंत में मुख्यमंत्री ने आह्वान किया:

"मातृशक्ति का सशक्तिकरण केवल एक नीतिगत विषय नहीं है, बल्कि यह एक समतामूलक और समृद्ध समाज के निर्माण का आधार है। हम एक ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए संकल्पित हैं जहाँ हर महिला आत्मनिर्भर और गौरवान्वित महसूस करे।"

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