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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
नई दिल्ली/ ।
दुनियाभर में तेजी से बढ़ती डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के दुरुपयोग के बीच यौन उत्पीड़न, डीपफेक और ब्लैकमेल से जुड़े मामलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अमेरिका के वित्तीय केंद्र वॉल स्ट्रीट से लेकर भारत के विभिन्न राज्यों तक हाल के महीनों में सामने आए सेक्स स्कैंडलों ने समाज, कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिका की दिग्गज वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन (JPMorgan) में एक बड़े यौन उत्पीड़न विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक के एक वरिष्ठ बैंकर ने अपनी महिला बॉस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला तब और अधिक चर्चा में आया जब इससे जुड़े कथित AI-निर्मित डीपफेक चित्र और सोशल मीडिया मीम्स इंटरनेट पर वायरल होने लगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते दुरुपयोग ने निजी छवि, प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की नकली तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें वायरल करना अब वैश्विक साइबर अपराध का बड़ा रूप लेता जा रहा है।
भारत में भी हाल के वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल मामले सामने आए हैं।
मई 2024 में कर्नाटक का चर्चित प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल देश के सबसे बड़े राजनीतिक विवादों में शामिल रहा। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक बहस को जन्म दिया था।
इसके अलावा, अप्रैल 2026 में महाराष्ट्र के अमरावती में सामने आए एक बड़े सेक्स स्कैंडल ने लोगों को झकझोर दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि 19-20 वर्ष के कुछ युवकों ने कई युवतियों के आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल और वसूली का कथित रैकेट चला रखा था।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एआई टूल्स और डिजिटल तकनीकों का गलत इस्तेमाल अब साइबर अपराधों को और अधिक खतरनाक बना रहा है। निजी डेटा की चोरी, मॉर्फ्ड फोटो, डीपफेक वीडियो और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त साइबर कानून, तेज जांच और डिजिटल साक्ष्यों की निगरानी बेहद जरूरी हो गई है। साथ ही लोगों को सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करते समय अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तकनीक जहां सुविधा और विकास का माध्यम बन रही है, वहीं उसका दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर खतरा भी बन सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर मजबूत नीतियों और जागरूकता की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, ।
19 मई का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं, महान व्यक्तित्वों और ऐतिहासिक उपलब्धियों के कारण विशेष महत्व रखता है। विज्ञान, उद्योग, राजनीति और सामाजिक इतिहास से जुड़े कई ऐसे प्रसंग आज के दिन दर्ज हैं जिन्होंने दुनिया और भारत की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।
वर्ष 1743 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक ज्यां पियरे क्रिस्टीन (Jean-Pierre Christin) ने तापमान मापने के लिए सेंटीग्रेड (सेल्सियस) पैमाना विकसित किया था। यह वैज्ञानिक उपलब्धि आज पूरी दुनिया में तापमान मापन की मानक प्रणाली के रूप में उपयोग की जाती है। मौसम विज्ञान, चिकित्सा, प्रयोगशालाओं और दैनिक जीवन में इसका व्यापक महत्व है।
भारत के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में शामिल टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा का निधन 19 मई 1904 को हुआ था। उन्होंने भारतीय उद्योग, शिक्षा और आधुनिक आर्थिक सोच की मजबूत नींव रखी। स्टील, ऊर्जा, होटल और शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी भारत के औद्योगिक विकास की आधारशिला माना जाता है।
भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी का जन्म 19 मई 1913 को हुआ था। वे भारतीय राजनीति के सरल, संतुलित और गरिमामय व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। वे देश के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे जिन्हें निर्विरोध चुना गया था। उनका राजनीतिक जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे का जन्म भी 19 मई 1910 को हुआ था। भारतीय इतिहास में यह नाम एक विवादास्पद और संवेदनशील अध्याय से जुड़ा रहा है। 30 जनवरी 1948 को गांधीजी की हत्या के बाद देशभर में गहरा आक्रोश फैल गया था और यह घटना भारतीय लोकतंत्र एवं सामाजिक समरसता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है।
19 मई केवल तिथियों का संयोग नहीं, बल्कि विज्ञान, राष्ट्रनिर्माण, लोकतंत्र और सामाजिक चेतना से जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्यायों का प्रतीक है। यह दिन हमें उन व्यक्तित्वों और घटनाओं को याद करने का अवसर देता है जिन्होंने किसी न किसी रूप में भारत और विश्व के इतिहास को प्रभावित किया।
नई दिल्ली, ।
देश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा पश्चिम बंगाल के साथ महत्वपूर्ण सुधार-संबंधी समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह पहल “विकसित भारत @2047” के विजन के अनुरूप ग्रामीण जल प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समुदाय आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
नई दिल्ली में आयोजित बैठकों में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल, राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना, डीडीडब्ल्यूएस सचिव श्री अशोक के.के. मीणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
नए समझौते के तहत जल प्रबंधन प्रणाली को ग्राम पंचायत आधारित और समुदाय-केंद्रित बनाया जाएगा। ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को गांव स्तर पर जल अवसंरचना के संचालन, रखरखाव और जल शुल्क संग्रह की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे ग्रामीण जल योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में गरिमा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण का जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि मिशन की मूल समयसीमा मई 2024 थी, जिसे अब बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया गया है ताकि देश के हर ग्रामीण घर तक शत-प्रतिशत नल जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
अंडमान और निकोबार प्रशासन ने वर्ष 2021 में ही सभी ग्रामीण घरों तक 100 प्रतिशत नल जल पहुंचाने की उपलब्धि हासिल कर ली थी। उपराज्यपाल एडमिरल डी.के. जोशी ने बताया कि अब मिशन 2.0 के तहत समुदाय आधारित जल प्रबंधन और विकेंद्रीकृत परीक्षण प्रणाली को लागू किया जा रहा है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि द्वीप समूह में स्थायी नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों की कमी के कारण यहां जल आपूर्ति मुख्य रूप से वर्षा जल संग्रहण पर निर्भर है, इसलिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार “हर घर जल” के लक्ष्य को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा करेगी। उन्होंने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और पुरुलिया जैसे पिछड़े क्षेत्रों में जल परियोजनाओं को तेज करने का भरोसा दिया।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से जल जीवन मिशन 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाने और जन शिकायतों के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
बैठक में जल योजनाओं के वित्तीय मिलान, नियमित पेयजल आपूर्ति, स्थानीय भागीदारी और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी और भरोसेमंद जल आपूर्ति व्यवस्था स्थापित करना है।
नई दिल्ली ।
देश में उभरते स्वास्थ्य खतरों, महामारी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन को और मजबूत बनाने की दिशा में नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कर्तव्य भवन-3 में आयोजित वैज्ञानिक संचालन समिति की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद ने की।
बैठक में स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मंत्रालयों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसमें विशेष रूप से पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (Zoonotic Diseases), जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य चुनौतियों और महामारी तैयारी पर व्यापक चर्चा हुई।
बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी भी महामारी या स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए सभी क्षेत्रों के बीच समन्वित रणनीति आवश्यक है। प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि हाल के वैश्विक स्वास्थ्य संकटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत अंतर-क्षेत्रीय सहयोग ही भविष्य की चुनौतियों से सुरक्षा का आधार बनेगा।
राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन ने पिछले एक वर्ष में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इनमें—
बैठक में राज्यों में वन हेल्थ शासन को मजबूत करने के लिए तैयार मॉडल ढांचे पर आधारित एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया।
विशेषज्ञों ने भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए AI-सक्षम रोगजनक पहचान, एकीकृत निगरानी प्रणाली, डेटा साझाकरण और आधुनिक प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा हुई।
समापन संबोधन में प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने नियमित मॉक ड्रिल, मजबूत तैयारी तंत्र और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उन्होंने सभी मंत्रालयों और विभागों से राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों का दस्तावेजीकरण करने और उन्हें व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का आग्रह किया, ताकि भारत भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए और अधिक सक्षम बन सके।
नई दिल्ली/राजस्थान, ।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने राजस्थान स्थित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के राजपुरा-दरीबा परिसर का दौरा करते हुए कहा कि कंपनी का आधुनिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित परिचालन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण है।
दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विश्व की सबसे बड़ी चांदी उत्पादक और तकनीकी रूप से उन्नत भूमिगत खानों में शामिल सिंदेसर खुर्द खदान तथा अत्याधुनिक दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि भारत का खनन क्षेत्र अब पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर आधुनिक, सुरक्षित, जिम्मेदार और तकनीक-संचालित विकास इंजन में बदल रहा है।
श्री रेड्डी ने कहा कि जस्ता, सीसा और चांदी जैसे खनिज भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान जिंक जैसे बड़े और तकनीक आधारित उद्योग आयात निर्भरता कम करने और घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार खनन भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
केंद्रीय मंत्री ने भूमिगत खदान में जाकर टेली-रिमोट संचालन, पेस्ट फिलिंग, डिजिटल नियंत्रण प्रणाली और सुरक्षा उपायों का अवलोकन किया। उन्होंने भारत की पहली महिला खदान बचाव दल के लाइव प्रदर्शन की भी सराहना की और कहा कि यह खनन क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
हिंदुस्तान जिंक में वर्तमान में लगभग 26.3 प्रतिशत महिला कार्यबल कार्यरत है, जिसे मंत्री ने समावेशी कार्य संस्कृति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
दौरे के दौरान श्री रेड्डी ने खदान की कैंटीन में संविदा कर्मचारियों, महिला खनन इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों के साथ भोजन कर संवाद किया। उन्होंने कर्मचारियों की मेहनत, सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और भारत के खनन विकास में उनके योगदान की सराहना की।
केंद्रीय मंत्री को कंपनी द्वारा जल संरक्षण, ऊर्जा परिवर्तन, कम कार्बन उत्सर्जन, संसाधन दक्षता और सतत खनन से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी दी गई। चर्चा में भारत की खनिज सुरक्षा, घरेलू विनिर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास में भारतीय खनन कंपनियों की भूमिका पर विशेष फोकस रहा।
इस अवसर पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ श्री अरुण मिश्रा, खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री विवेक बाजपेई और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
नई दिल्ली, ।
भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा नई दिल्ली स्थित ए.पी. शिंदे संगोष्ठी हॉल, NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा में एक दिवसीय “अखिल भारतीय राजभाषा समारोह-2026” का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में राजभाषा हिंदी के संवर्धन, प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन कार्यों में उसके प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन महानिदेशक (एनएसएस) सुश्री गीता सिंह राठौर ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं की सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दैनिक शासकीय कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।
समारोह में महानिदेशक (सीएस), अपर सचिव, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सहित मंत्रालय और क्षेत्र संकार्य प्रभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ अनुवाद अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित परिचर्चा सत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के निदेशक श्री श्याम सुंदर कथूरिया ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के सहज, सरल और प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। साथ ही देश के तीनों राजभाषा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे पैनल सदस्यों ने विभिन्न चुनौतियों और उनसे जुड़े समाधान प्रस्तुत किए।
समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि राजभाषा हिंदी देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। जिन कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं है, उन्हें हिंदी प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को अपने अधीनस्थ उप-क्षेत्रीय कार्यालयों में हिंदी में कार्य बढ़ाने तथा राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया।
नई दिल्ली ।
न्यायमूर्ति श्री यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की जांच कर रही न्यायाधीश जांच समिति ने सोमवार को अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को सौंप दी। यह रिपोर्ट संसद भवन में औपचारिक रूप से प्रस्तुत की गई। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए तैयार की गई इस रिपोर्ट को जल्द ही संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाएगा।
समिति के पीठासीन अधिकारी एवं सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने यह रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी। इस दौरान समिति के अन्य सदस्य — बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.वी. आचार्य — भी उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि इस जांच समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को किया गया था। समिति को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अब इस रिपोर्ट के संसद में पेश होने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा तेज होने की संभावना है। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
जगदलपुर/बस्तर ।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने रविवार को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के नेतानार गांव में “शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केन्द्र” का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि दशकों तक हिंसा और भय से जूझते बस्तर में विकास, विश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक बनकर सामने आया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक श्री तपन डेका सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि बस्तर की यह धरती केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव और प्रेरणा का केंद्र है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1910 में वीर गुण्डाधुर ने भूमकाल विद्रोह के माध्यम से अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी अस्मिता और स्वतंत्रता की लड़ाई छेड़ी थी।
शाह ने कहा—
“शहीद वीर गुण्डाधुर की जन्मभूमि और कर्मभूमि हर भारतीय के लिए तीर्थ समान है। उन्हीं की प्रेरणा से आज सुरक्षा कैंप को सेवा कैंप में बदला जा रहा है।”
अमित शाह ने भावुक स्वर में कहा कि यही वह क्षेत्र है जहां नक्सल हिंसा में 6 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या हुई थी। स्कूल, अस्पताल और विकास कार्यों को नष्ट किया गया, आदिवासियों को शिक्षा, रोजगार और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से दूर रखा गया।
उन्होंने कहा—
“आज उसी स्थान पर गरीब आदिवासियों की सेवा का तीर्थ बनाया जा रहा है। यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक परिवर्तन है।”
केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल नक्सलियों का सफाया करना नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासियों तक शहरों जैसी सुविधाएं पहुंचाना है।
उन्होंने बताया कि अब गांवों में—
जैसी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं।
अमित शाह ने नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा—
“नक्सलियों ने वर्षों तक यह भ्रम फैलाया कि विकास न होने के कारण उन्होंने हथियार उठाए। सच्चाई यह है कि विकास इसलिए नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने हथियार उठा रखे थे।”
उन्होंने कहा कि रायपुर जैसे शहरों में जो विकास हुआ है, वही सुविधाएं अब एक-एक गांव तक पहुंचाई जाएंगी।
गृह मंत्री ने घोषणा की कि बस्तर क्षेत्र में मौजूद लगभग 200 कैंपों में से 70 कैंपों को अगले डेढ़ वर्षों में इसी प्रकार के आधुनिक जनसेवा केंद्रों में बदला जाएगा।
इन केंद्रों में उपलब्ध होंगी—
एक ही स्थान पर।
अमित शाह का सबसे चर्चित बयान तब सामने आया जब उन्होंने कहा—
“देशभर में आजादी 1947 में आई थी, मगर बस्तर में 31 मार्च 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है।”
उन्होंने कहा कि दशकों की हिंसा और पिछड़ेपन से हुए नुकसान की भरपाई अगले पांच वर्षों में करने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है।
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार केवल सुरक्षा और सड़क तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आदिवासी संस्कृति, खेल और परंपराओं को भी विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का काम करेगी।
इसी उद्देश्य से—
जैसी पहल शुरू की गई हैं, जिनके माध्यम से आदिवासी खेल, साहित्य, संगीत, भाषा, कला और खानपान को बढ़ावा दिया जा रहा है।
नेतानार में शुरू हुआ यह जन सुविधा केंद्र बस्तर में उस परिवर्तन की तस्वीर बनकर उभरा है, जहां कभी भय और बंदूकें थीं, वहां अब विकास, सेवाएं और लोकतंत्र की पहुंच दिखाई दे रही है।
सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में बस्तर केवल नक्सलवाद से मुक्त क्षेत्र नहीं, बल्कि देश के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले आदिवासी क्षेत्रों में शामिल होगा।
रायपुर / शौर्यपथ /
कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में सुशासन तिहार के तहत ग्राम पंचायत झापरा में सुशासन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और शासन की विभिन्न योजनाओं तथा प्रशासनिक सेवाओं का लाभ प्राप्त किया।
शिविर में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया। साथ ही लोगों को शासकीय योजनाओं, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी भी दी गई।
सुकमा तहसीलदार श्री गिरीश निम्बालकर, सरपंच श्रीमती मुन्नी मड़कामी और उपसरपंच श्री प्रवीण बारसे की मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न प्रमाण पत्र वितरित किए गए। शिविर में 8 जाति प्रमाण पत्र, 12 निवास प्रमाण पत्र, 8 किसान किताब तथा 2 नामांतरण आदेश प्रदान किए गए। इससे ग्रामीणों, विद्यार्थियों और किसानों को बड़ी राहत मिली।
शिविर की एक खास उपलब्धि किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ना भी रही। यहां 5 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन किया गया। इससे किसानों को भविष्य में डिजिटल कृषि सेवाओं और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
ग्रामीणों ने शिविर में त्वरित समाधान और एक ही स्थान पर विभिन्न सेवाएं मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविरों से गांव में ही जरूरी काम पूरे हो रहे हैं, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।
सुशासन तिहार के तहत आयोजित ये शिविर शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहे हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
