July 30, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    नोकिया, वीटीटी, केओएनई और केम्पी के साथ 5जी-6जी, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, अनुसंधान और निवेश पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड के बीच प्रौद्योगिकी, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने फिनलैंड की प्रमुख प्रौद्योगिकी एवं औद्योगिक कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन चर्चाओं में डिजिटल तकनीक, उन्नत विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, स्मार्ट अवसंरचना और सतत विकास के क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर विशेष जोर दिया गया।

    नोकिया के साथ 5जी और 6जी तकनीक पर चर्चा

    श्री गोयल ने नोकिया कॉरपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों, 5जी और 6जी नेटवर्क, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा अनुसंधान एवं नवाचार सहयोग को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया। बैठक में भारत के तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल इकोसिस्टम और नोकिया की दीर्घकालिक भूमिका पर भी चर्चा हुई।

    वीटीटी के साथ अनुसंधान एवं नवाचार साझेदारी को बढ़ावा

    यूरोप के अग्रणी अनुसंधान संस्थानों में शामिल वीटीटी टेक्निकल रिसर्च सेंटर के साथ हुई बैठक में उन्नत प्रौद्योगिकियों, औद्योगिक परिवर्तन, डिजिटलीकरण, नई सामग्रियों और सतत विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने भारतीय और फिनिश संस्थानों के बीच अनुसंधान सहयोग तथा तकनीक हस्तांतरण को और प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

    स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में केओएनई की बढ़ेगी भागीदारी

    केओएनई कॉरपोरेशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ हुई बैठक में स्मार्ट शहरी अवसंरचना, लिफ्ट एवं एस्केलेटर तकनीक, हरित निर्माण समाधान और उन्नत विनिर्माण पर फोकस रहा। भारत के तेजी से विस्तार करते बुनियादी ढांचे और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत स्थानीयकरण के अवसरों पर भी विचार किया गया।

    केम्पी के साथ औद्योगिक नवाचार और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर पर मंथन

    श्री गोयल ने केम्पी समूह के शीर्ष नेतृत्व के साथ उन्नत औद्योगिक मशीनरी, वेल्डिंग तकनीक, विनिर्माण नवाचार और स्मार्ट औद्योगिक समाधानों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक औद्योगिक तकनीकों में निवेश के अवसरों को भी तलाशा गया।

    भारत बना वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का भरोसेमंद केंद्र

    इन बैठकों के दौरान भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। उद्योग जगत के नेताओं के साथ हुए सीधे संवाद ने दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की।

    भारत-फिनलैंड सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत

    फिनलैंड दौरे के दौरान हुई ये रणनीतिक बैठकें भारत-फिनलैंड व्यापार मंच की सफलता को आगे बढ़ाते हुए तकनीक, निवेश, अनुसंधान और सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर खोलने वाली साबित हुई हैं। दोनों देशों ने भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    नई दिल्ली । देशभर में बांधों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस) की 12वीं बैठक नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुई। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, बांध सुरक्षा विशेषज्ञों तथा राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया।

    बैठक में बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए नियमों की अधिसूचना, तकनीकी दिशानिर्देशों के प्रकाशन और बांध सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तैयारी में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। साथ ही आपातकालीन कार्य योजनाओं (ईएपी), व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन, संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) मैनुअल तथा जोखिम आकलन अध्ययनों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

    नए खतरों से निपटने के लिए बनेंगे विशेष नियम

    समिति ने जल संरचनाओं के सामने उभर रहे नए खतरों को देखते हुए महत्वपूर्ण बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए नए नियम तैयार करने, सुरक्षा जांच चेकलिस्ट में संशोधन करने तथा बांध निर्माण और संशोधन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में बांध सुरक्षा अध्याय को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया।

    इसके अलावा जांच, डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों के मान्यता मानकों को तय करने, बांध विफलता रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित करने और विशेषज्ञों के पैनल के गठन पर भी सहमति बनी। समिति ने जोखिम वर्गीकरण, खतरा मूल्यांकन, उपकरण स्थापना, आपातकालीन कार्य योजना और जलाशय संचालन के लिए तकनीकी दिशानिर्देश तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।

    आईआईटी और एनआईटी संस्थानों के सहयोग से बढ़ेगी विशेषज्ञता

    बैठक में बांध सुरक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञ मानव संसाधन विकसित करने के लिए आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु द्वारा संचालित पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रमों में इंजीनियरों की नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईटी सूरत, एनआईटी कालीकट, एनआईटी नागपुर, एनआईटी गुवाहाटी और एनआईटी शिलांग को भी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    गाद जमाव और बांध विफलताओं पर विशेष चर्चा

    समिति ने जलाशयों में बढ़ती गाद (सिल्टेशन) की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके समाधान के लिए नए नियामकीय प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार किया। बैठक में हाल के वर्षों में हुई कुछ प्रमुख बांध विफलताओं और तकनीकी चुनौतियों पर भी विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए गए।

    इनमें छत्तीसगढ़ के लुटी टैंक और राजाडेरा बांध, सिक्किम के तीस्ता स्टेज-III बांध, पंजाब के माधोपुर बैराज तथा राजस्थान के बीसलपुर बांध में चल रही ड्रेजिंग गतिविधियों से जुड़े तकनीकी अनुभव साझा किए गए।

    दिसंबर 2026 तक सुरक्षा ऑडिट और जोखिम मूल्यांकन पूरा करने का लक्ष्य

    बैठक के समापन पर अध्यक्ष ने सभी राज्यों से आह्वान किया कि वे दिसंबर 2026 तक निर्धारित बांधों की व्यापक सुरक्षा जांच, आपातकालीन कार्य योजनाओं की तैयारी और जोखिम मूल्यांकन अध्ययन जैसे सभी अनिवार्य कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें, ताकि देश के बांधों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत बनाया जा सके।

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए एक 6 वर्षीय मासूम की जान बचा ली है। बैगा जनजाति के इस बालक ने खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया था, जो उसकी आहार नली (अन्ननली) में फंस गया था। डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और आपातकालीन स्थिति में सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर सिक्के को बाहर निकाला।
    पेंड्रा से सिम्स बिलासपुर किया गया था रेफर
    जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड का निवासी 6 वर्षीय बालक नरेंद्र खेलते समय सुबह करीब 7 बजे अचानक सिक्का निगल गया। इसके तुरंत बाद उसे कुछ भी निगलने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। परिजन आनन-फानन में उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।
    डॉक्टरों के समन्वित प्रयास से मिली सफलता
    बालक को शाम करीब 6.30 बजे सिम्स लाया गया, जिसके बाद अस्पताल का पूरा अमला सक्रिय हो गया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर अन्ननली के ऊपरी भाग (श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे) में फंसे सिक्के की सटीक लोकेशन की पहचान की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया दिया। इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के जरिए अत्यंत सावधानी से सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति पूरी तरह सामान्य और संतोषजनक है।
    विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का परिणाम
    इस सफल उपचार पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता, आधुनिक तकनीकों और आपसी तालमेल के कारण ही इस जटिल आपातकालीन मामले को समय पर सुलझाया जा सका। सिम्स का लक्ष्य हर मरीज को सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देना है।
    चिकित्सा अधीक्षक और डॉक्टरों ने अभिभावकों के लिए जारी की सलाह
    चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने आगाह किया कि छोटे बच्चों द्वारा सिक्का, बटन, बैटरी या चुंबक जैसी चीजें निगलना एक गंभीर आपात स्थिति है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय सीधे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचना चाहिए। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से सिक्के, छोटी बैटरी और छोटे खिलौने दूर रखें। यदि बच्चा कोई वस्तु निगल लेता है और उसे लार टपकने, गले में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।

    छेरा पहरा की पावन परंपरा का निर्वहन कर दिया सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश

    रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित ग्राम दोकड़ा में आयोजित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव-2026 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ परंपरागत गजपति महाराजा की भूमिका का निर्वहन करते हुए भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
    मुख्यमंत्री साय ने छेरा पहरा की पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए सोने की झाड़ू से भगवान के रथ के आगे मार्ग का प्रतीकात्मक रूप से मार्जन किया तथा चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव किया। इसके बाद उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं के साथ भगवान श्री जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ किया। पूरे दोकड़ा क्षेत्र में "जय जगन्नाथ" के जयघोष, शंखध्वनि, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
    मुख्यमंत्री साय ने सभी श्रद्धालुओं को रथयात्रा की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा आस्था, संस्कृति और सनातन परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1942 से चली आ रही यह गौरवशाली परंपरा आज भी जनआस्था को नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। जनसहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और वर्ष 2025 में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी भव्य रथयात्रा आयोजित हो रही है। उन्होंने गजपति महाराजा की परंपरा निभाने का अवसर देने के लिए दोकड़ावासियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्री जगन्नाथ से प्राचीन और आत्मीय संबंध रहा है। देवभोग का चावल आज भी पुरी के महाप्रसाद में उपयोग किया जाता है, जो इस सांस्कृतिक संबंध का जीवंत प्रमाण है।
    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की गारंटी के अनुरूप प्रदेश में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। महतारी वंदन योजना की 29 किस्तें जारी की जा चुकी हैं तथा रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं। राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरचार्ज माफी योजना की अवधि तीन माह बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से चौबीसों घंटे नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। वहीं अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं सहित 520 से अधिक शासकीय सेवाएँ उनके गाँव में ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।
    उन्होंने कहा कि जशपुर जिले को शीघ्र ही रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं।धरमजयगढ़-लोहरदगा रेल परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। साथ ही जशपुर जिले में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति से स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ विकसित होंगी।
    रथयात्रा के दौरान ओडिशा की प्रसिद्ध कीर्तन मंडलियों ने भजन एवं संकीर्तन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ढोल, मृदंग, झांझ और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालु भगवान के जयघोष लगाते हुए रथयात्रा में शामिल हुए। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस आयोजन को आस्था और लोक संस्कृति के विराट उत्सव में बदल दिया।
    इस अवसर पर पद्मश्री जागेश्वर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा सहित श्री जगन्नाथ मंदिर आयोजन समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

    16 जुलाई को केंद्र सरकार ने ऊर्जा, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम फैसले लिए। ईंधन निर्यात कर में बदलाव, यूरिया उत्पादन बढ़ाने की नई नीति और झारखंड-ओडिशा में रेल नेटवर्क विस्तार को मंजूरी दी गई।

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने गुरुवार को देश की ऊर्जा सुरक्षा, कृषि आत्मनिर्भरता और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इन फैसलों का उद्देश्य ईंधन निर्यात व्यवस्था को संतुलित करना, उर्वरक उत्पादन बढ़ाना और रेल संपर्क का विस्तार करना है।

    सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विंडफॉल टैक्स) में संशोधन किया है। इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और घरेलू आवश्यकताओं के अनुरूप कर व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना है।

    कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति’ को मंजूरी दी। इस नीति के माध्यम से देश में घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    इसी क्रम में बुनियादी ढांचे के विकास को गति देते हुए झारखंड और ओडिशा में लगभग ₹397 करोड़ लागत की दो नई रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं से दोनों राज्यों में रेल संपर्क बेहतर होगा, माल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    16 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकता, मध्यस्थता और लंबित मामलों के त्वरित निपटारे से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई करते हुए निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया और समयबद्ध न्याय पर जोर दिया।

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को नागरिकता निर्धारण, वाणिज्यिक मध्यस्थता (Arbitration) और वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। अदालत ने कई अहम कानूनी सिद्धांतों को स्पष्ट करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    नागरिकता से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फॉरेनर्स एक्ट, 1946 की धारा 9 के तहत भारतीय नागरिकता साबित करने का दायित्व संबंधित व्यक्ति पर होता है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने जैसा गंभीर निर्णय बिना उचित जांच, पर्याप्त सुनवाई और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाए नहीं किया जा सकता। ट्रिब्यूनल को एकतरफा (एक्स-पार्टी) कार्रवाई से बचते हुए प्रत्येक मामले में तर्कसंगत और न्यायसंगत प्रक्रिया का पालन करना होगा।

    मध्यस्थता (Arbitration) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें गैर-हस्ताक्षरकर्ता कंपनियों के विरुद्ध मध्यस्थता कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Tribunal) के क्षेत्राधिकार से संबंधित आदेशों को सीधे संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे मामलों में अंतिम मध्यस्थता निर्णय आने के बाद ही उपयुक्त कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं।

    इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय ने वर्षों से लंबित लगभग 800 पुराने सिविल और आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की। इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष रोस्टर और विशेष पीठों (Special Benches) के गठन की प्रक्रिया पर चर्चा हुई, ताकि लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

    मानसून सत्र के चौथे दिन सदन में तीखी बहस और हंगामे के बीच 63 से अधिक ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। कांग्रेस ने 1,000 से अधिक प्रश्नों के जरिए साय सरकार को कानून-व्यवस्था, किसानों, बिजली, खनन और प्रशासनिक मामलों पर घेरा।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कानून-व्यवस्था, नवा रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई, अवैध उत्खनन, स्मार्ट बिजली मीटर और किसानों को खाद वितरण जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए जवाब मांगा।

    सदन में 63 से अधिक ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जबकि कांग्रेस ने 1,000 से अधिक प्रश्नों के माध्यम से विभिन्न जनहित के विषय उठाए। प्रश्नकाल के दौरान नवा रायपुर के सेवाग्राम से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक मामलों पर विधायक अजय चंद्राकर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच तीखी बहस ने सदन का माहौल गर्मा दिया।

    विपक्ष ने राज्य में बढ़ते अपराध, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, अवैध रेत उत्खनन, हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई तथा नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। बस्तर क्षेत्र में फर्जी ग्राम सभाओं के आधार पर उद्योगों की स्थापना के आरोप भी सदन में गूंजे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।

    किसानों से जुड़े मुद्दों में उर्वरक वितरण में कमी, सहकारी और निजी संस्थाओं द्वारा लक्ष्य के अनुरूप खाद उपलब्ध नहीं कराने तथा मछली पालन के पट्टा आवंटन की प्रक्रिया पर भी विस्तृत चर्चा हुई। वहीं, स्मार्ट बिजली मीटर योजना और बिजली आपूर्ति की पारदर्शिता को लेकर विपक्ष ने सरकार से जवाब तलब किया।

    विधायी कार्यों के तहत सरकार ने कई महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों पर चर्चा आगे बढ़ाई। इनमें छत्तीसगढ़ जीएसटी (संशोधन) विधेयक-2026, वैट (संशोधन) विधेयक-2026, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026 तथा निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 प्रमुख रहे। इन विधेयकों का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देना तथा उच्च शिक्षा क्षेत्र में आवश्यक सुधार करना बताया गया।

    सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल भी तेज रही। विपक्ष ने बढ़ते अपराध, कर्मचारियों की हड़ताल और विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की संभावनाओं पर भी चर्चा तेज कर दी।

    रायपुर / शौर्यपथ / बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और गैर-कृषि आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विकासखंड बलौदाबाजार के ग्राम लाहौद में स्व-सहायता समूह की 40 महिलाओं को धान एवं पैरा (पुआल) आर्ट का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

    प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को धान और पैरा से आकर्षक हस्तशिल्प, 3डी चित्र, महापुरुषों तथा देवी-देवताओं के कलात्मक पोर्ट्रेट तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। यह कला कृषि अवशेषों के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी प्रभावी माध्यम बन रही है।

    प्रशिक्षण पूर्ण होने पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने प्रतिभागी महिलाओं को प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों का अवलोकन कर उनके कौशल की सराहना की और इस कला को स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

    जिला पंचायत के अनुसार, बिहान की पहल से जिले में गैर-कृषि आजीविका गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ महतारी संकुल संगठन, लाहौद के माध्यम से महिलाओं को यह प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पैरा और धान जैसे कृषि अवशेषों से उपयोगी एवं आकर्षक उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

    यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण हस्तशिल्प को नई पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

    शिकायत दर्ज होते ही सक्रिय हुआ प्रशासन, समयबद्ध कार्रवाई से परिवार को मिला योजनाओं का लाभ

    दुर्ग/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 प्रदेश के नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान का भरोसेमंद माध्यम बनकर सामने आ रही है। दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम ओरी निवासी अभिषेक चतुर्वेदी और उनके परिवार की कहानी इस व्यवस्था की प्रभावशीलता का प्रेरक उदाहरण है।

    अभिषेक चतुर्वेदी अपनी पत्नी श्रीमती शीतल चतुर्वेदी के नाम से राशन कार्ड बनवाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे। संबंधित विभाग में आवश्यक आवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद विभिन्न कारणों से राशन कार्ड जारी नहीं हो पा रहा था। इसके कारण परिवार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले खाद्यान्न सहित अन्य शासकीय योजनाओं और सुविधाओं से वंचित था।

    जब लगातार प्रयासों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तब अभिषेक चतुर्वेदी ने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने मामले को प्राथमिकता से लेते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और कुछ ही दिनों में आवेदन स्वीकृत कर श्रीमती शीतल चतुर्वेदी के नाम से राशन कार्ड जारी कर दिया।

    राशन कार्ड मिलने के बाद चतुर्वेदी परिवार ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का इतनी शीघ्र समाधान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई हुई और बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के उन्हें आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हो गया।

    अभिषेक चतुर्वेदी और उनकी पत्नी शीतल चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा दुर्ग जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों के लिए वास्तव में उम्मीद की किरण बनकर उभरी है, जो लोगों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित कर रही है।

    यह उदाहरण दर्शाता है कि शासन की शिकायत निवारण प्रणाली यदि संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ कार्य करे, तो आम नागरिकों को न केवल राहत मिलती है बल्कि शासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत होता है।

    कोतवाली हत्याकांड में लाइन अटैच की कार्रवाई का फिर हो रहा उल्लेख, विभागीय जांच के बीच अगले प्रशासनिक निर्णय पर निगाहें

    दुर्ग, शौर्यपथ। कुंदरापारा में हुए चर्चित गैंगवार और लेखराम कोठारी हत्याकांड के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली प्रशासनिक समीक्षा के दायरे में आ गई है। नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) हर्षित मेहर(आईपीएस) ने पद्मनाभपुर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया को कर्तव्य निर्वहन में कथित लापरवाही के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में घटना से पहले और बाद की पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
    सीएसपी कार्यालय से जारी नोटिस के अनुसार, हत्या की सूचना समय पर वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई गई। साथ ही, थाना प्रभारी के तत्काल घटनास्थल पर नहीं पहुंचने के कारण घटनास्थल का निरीक्षण और शव को मर्च्युरी भेजने जैसी प्रारंभिक कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं करनी पड़ी। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि गैंगवार के बाद अस्पताल ले जाए गए आरोपियों में से एक आरोपी लक्ष्मी चेलक पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था, जिसे बाद में एसीसीयू टीम ने गिरफ्तार किया।
    विभागीय नोटिस में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु 12 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे हुई प्रारंभिक हिंसक झड़प को माना गया है। उल्लेख किया गया है कि दोनों पक्ष थाना पहुंचे थे, लेकिन तत्काल गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज करने के बजाय केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। विभाग का मानना है कि यदि उस समय उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाती और वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर जानकारी दी जाती, तो बाद में हुई गंभीर घटना की संभावना कम हो सकती थी। यह विभागीय जांच का विषय है।
    इसी घटनाक्रम के बीच वर्ष 2025 के संतोष आचार्य हत्याकांड का मामला भी पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। उस समय सिटी कोतवाली थाना प्रभारी तापेश्वर सिंह नेताम को प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर रक्षित केंद्र भेज दिया गया था। हालांकि, उसी मामले में कोतवाली पुलिस ने देर रात हुई घटना के चंद घंटो में ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था ।वही गिरफ्तारी के तीन से चार घंटो के भीतर ही कोतवाली प्रभारी के लाइन अटैच के आदेश तब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ था . यहाँ यह बताना अत्यंत आवश्यक है कि गत नवरात्री में देर रात तक चली चुनरी यात्रा भी निर्विवाद रूप से सराहनीय चर्चा का विषय रही जिसके बाद तात्कालिक कोतवाली प्रभारी सहित नगर पुलिस अधीक्षक एवं जिले के कप्तान की आम जनता ने खुले मन से प्रशंसा की थी .
    पुलिस विभाग के जानकारों का कहना है कि अलग-अलग मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई संबंधित परिस्थितियों, उपलब्ध तथ्यों और विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाती है। ऐसे में वर्तमान मामले में भी अंतिम निर्णय विभागीय जांच और वरिष्ठ अधिकारियों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।
    फिलहाल पद्मनाभपुर थाना प्रभारी से कारण बताओ नोटिस का जवाब मांगा गया है। इसके बाद जांच प्रतिवेदन और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इस कारण पुलिस महकमे और शहरवासियों की निगाहें अब दुर्ग पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।
    नोट: समाचार लिखे जाने तक वर्तमान में पद्मनाभपुर थाना प्रभारी के विरुद्ध केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनके विरुद्ध किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का निर्णय अभी विभागीय जांच पूर्ण होने के बाद ही लिया जाएगा।

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