October 29, 2026
Hindi Hindi▼

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    12 पुल और 6 सड़कों का होगा निर्माण एवं उन्नयन, रायपुर के फुण्डहर चौक पर बनेगा 29.80 करोड़ का ओवरपास

    रायपुर । छत्तीसगढ़ में सड़क और पुल अधोसंरचना के विस्तार के लिए लोक निर्माण विभाग ने 243 करोड़ 81 लाख 11 हजार रुपये के 18 कार्यों की निविदाओं को मंजूरी दी है। इनमें 12 उच्च स्तरीय पुल और 6 सड़क निर्माण एवं उन्नयन कार्य शामिल हैं। विभाग ने चयनित निर्माण एजेंसियों को शीघ्र कार्यादेश जारी कर काम शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि मजबूत सड़कें और पुल आर्थिक विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान बनाते हैं। विशेषकर ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में बेहतर कनेक्टिविटी की अहम भूमिका है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराने के साथ गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    लोक निर्माण विभाग की निविदा समिति ने 12 अक्टूबर को आयोजित बैठक में इन कार्यों को मंजूरी दी। बरसात के बाद निर्माण कार्यों के अनुकूल मौसम का उपयोग करते हुए विभाग सड़क और पुल परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले पिछले महीने 24 कार्यों के लिए 672 करोड़ रुपये से अधिक की निविदाएं स्वीकृत की गई थीं।

    रायपुर में ओवरपास और सर्विस रोड का चौड़ीकरण

    राजधानी में यातायात सुधार के लिए वीआईपी रोड स्थित फुण्डहर चौक पर 29 करोड़ 80 लाख 12 हजार रुपये की लागत से ओवरपास बनाया जाएगा। वहीं रायपुरा चौक फ्लाईओवर के दोनों ओर रिंग रोड नंबर-1 (एनएच-30) की 3.66 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड के चौड़ीकरण के लिए 14 करोड़ 96 लाख 96 हजार रुपये की निविदा स्वीकृत की गई है।

    सड़क कार्यों में जांजगीर-चांपा जिले के देवरी-तनौद-भुईगांव-शुक्लाभाठा-ससहा मार्ग के 17.40 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण 31 करोड़ 7 लाख 83 हजार रुपये से किया जाएगा। सूरजपुर जिले में 16.85 किलोमीटर रिंग रोड के सुदृढ़ीकरण के लिए 16 करोड़ 8 लाख 59 हजार रुपये की निविदा मंजूर हुई है। रायपुर जिले के समोदा-बनरसी-तुलसी मार्ग के 8.20 किलोमीटर हिस्से तथा बेमेतरा जिले के बहिंगा-तिवरैया-सिमगा पहुंच मार्ग और मदराली-कटई-बेलटुकरी मार्ग के निर्माण एवं उन्नयन कार्य भी स्वीकृत किए गए हैं।

    इन्द्रावती और हान्दावाड़ा नदी पर बनेंगे पुल

    बस्तर संभाग में बारहमासी आवागमन मजबूत करने के लिए बीजापुर जिले में कुटरू-गुटमांगी मार्ग पर इन्द्रावती नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। इसके लिए 36 करोड़ 5 लाख 75 हजार रुपये की निविदा मंजूर हुई है। बस्तर जिले में भंवरडीह नदी और मांढेर नाला पर पुल निर्माण के लिए क्रमशः 12 करोड़ 74 लाख 95 हजार और 10 करोड़ 98 लाख 39 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। डीएमएफ मद से छिन्दनार-कौरगांव मार्ग पर हान्दावाड़ा नदी में पुल एवं पहुंच मार्ग के लिए 5 करोड़ 73 लाख 1 हजार रुपये की निविदा भी मंजूर की गई है।

    इसके अतिरिक्त राजनांदगांव जिले के सूखा नाला, कोंडागांव जिले के कलीबेड़ा नाला और परौदा नदी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के मोती नाला तथा कांकेर जिले की निब्रा (मेढकी) नदी और पासंगी नाला पर उच्च स्तरीय पुल बनाए जाएंगे। सरगुजा जिले में दाहीडांड-सोनवरसा मार्ग पर मछली नदी में पुल निर्माण भी इस सूची में शामिल है।

    विभाग ने संबंधित कार्यपालन अभियंताओं को निर्माण कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्वीकृत कार्यों को अन्य एजेंसी को सबलेट करने और कार्य संपादन के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी को मान्य नहीं किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने से विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर होने, बरसात में आवागमन की दिक्कतें घटने और स्थानीय लोगों को बाजार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निर्देश, 8,444 किसानों को मिलेंगे लगभग 3.8 करोड़ रुपये

    रायपुर । रबी सीजन 2025 के अंतर्गत उद्यानिकी फसलों के लंबित प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम का भुगतान आगामी तीन कार्य दिवस के भीतर किया जाएगा। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभागीय और बीमा अधिकारियों को लंबित स्वीकृत प्रकरणों का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इससे प्रदेश के 8,444 किसानों को लगभग 3.8 करोड़ रुपये की बीमा राशि मिलेगी।
    मंत्री नेताम ने 15 अक्टूबर को राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम चिद्दों के भ्रमण के दौरान किसानों से चर्चा की थी। इस दौरान किसानों ने उद्यानिकी फसलों के बीमा क्लेम का भुगतान नहीं होने की समस्या बताई और लंबित राशि दिलाने का आग्रह किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने अगले ही दिन, 16 अक्टूबर को संबंधित विभागीय एवं बीमा अधिकारियों की बैठक लेकर लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि भुगतान में अनावश्यक देरी न हो और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर तीन कार्य दिवस के भीतर पात्र किसानों के बैंक खातों में राशि अंतरित की जाए।

    14,344 आवेदन स्वीकृत
    पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत किसानों ने टमाटर, बैंगन, गोभी, प्याज और आलू सहित विभिन्न उद्यानिकी फसलों का बीमा कराया था। विभागीय जानकारी के अनुसार, रबी सीजन 2025 के लिए कुल 10,514 किसानों ने 15,298 आवेदन प्रस्तुत किए थे। परीक्षण के बाद 8,444 किसानों के 14,344 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। इन स्वीकृत प्रकरणों के अंतर्गत लगभग 3.8 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है।
    मंत्री नेताम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों के लंबित स्वीकृत बीमा क्लेम का त्वरित निराकरण किया जाए। उन्होंने पात्र किसानों को समय पर आर्थिक राहत उपलब्ध कराने और शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। निर्धारित समय-सीमा में भुगतान होने से लंबे समय से बीमा राशि की प्रतीक्षा कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    मुख्य सचिव विकासशील ने की नियद नेल्ला नार और बस्तर मुन्ने 2.0 की समीक्षा, समय-सीमा में योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने तथा ग्रामीण परिवारों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए नियद नेल्ला नार 2.0 और बस्तर मुन्ने 2.0 के तहत कार्य किए जा रहे हैं। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने मंत्रालय महानदी भवन में दोनों कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ निर्धारित समय-सीमा में पहुंचाया जाए। इन कार्यक्रमों के अंतर्गत ग्रामीणों को 31 व्यक्तिगत और 14 सामुदायिक योजनाओं का लाभ देने के लिए कार्ययोजना बनाई गई है।
    नियद नेल्ला नार 2.0 के तहत बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, बस्तर, कोंडागांव, गरियाबंद, मोहला-मानपुर और छुईखदान-अंबागढ़ चौकी सहित दूरस्थ एवं पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को व्यक्तिगत हितग्राहीमूलक योजनाओं से जोड़ने के लिए विभागों को समन्वित रूप से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
    योजना के अंतर्गत मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही व्यक्तिगत वनाधिकार पट्टा, श्रम कार्ड, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, पोषण आहार, टीकाकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन, गणवेश और पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हैं।
    इसके अलावा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, जाति, जन्म, विवाह, निवास, मृत्यु और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, मतदाता कार्ड, जननी सुरक्षा, वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और उज्ज्वला योजना जैसी सुविधाओं से भी पात्र परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है।

    सामुदायिक सुविधाओं के विकास पर भी जोर
    व्यक्तिगत योजनाओं के साथ गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए 14 सामुदायिक योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत पक्की सड़कों, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, मोबाइल टावर और बैंकिंग सुविधाओं सहित अन्य आवश्यक संसाधनों को योजनाबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने पर जोर है। इन सुविधाओं का उद्देश्य दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
    मुख्य सचिव विकासशील ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी तालमेल और समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचना चाहिए तथा क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
    बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, खनिज साधन विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कौशल विकास विभाग के सचिव बसवराजु एस., लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबंधित जिलों के कलेक्टर और जिला स्तरीय अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सख्त, बोले—गरीबों के हक से खिलवाड़ करने वालों को नहीं मिलेगी रियायत

      रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत गरीब और विशेष पिछड़ी जनजाति के हितग्राहियों की आवास राशि में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में नौ बैगा हितग्राहियों से आवास निर्माण के नाम पर कुल 5 लाख 9 हजार रुपये लेने और मकान नहीं बनाने की शिकायत पर दो ठेकेदारों के विरुद्ध अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि गरीबों के हक की राशि का दुरुपयोग और आवास निर्माण में धोखाधड़ी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।

    राजाढ़ार में पांच हितग्राहियों से 3.20 लाख लेने का आरोप

    ग्राम पंचायत राजाढ़ार के पांच हितग्राहियों से आवास निर्माण के नाम पर 3 लाख 20 हजार रुपये लेने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं करने की शिकायत पर ठेकेदार कुमार मेरावी के विरुद्ध 14 अक्टूबर को थाना चिल्फी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया। शिकायत के अनुसार देवसिंह, मंधोर बाई और पुसीया बाई से 60-60 हजार रुपये, कौशिल्या बाई से 80 हजार रुपये तथा ननकी बाई से 60 हजार रुपये लिए गए थे। हितग्राहियों का आरोप है कि लगभग डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी न तो आवास बनाए गए और न ही राशि लौटाई गई।

    आमानारा के चार हितग्राही भी हुए प्रभावित

    इसी तरह ग्राम पंचायत आमानारा के चार हितग्राहियों से 1 लाख 89 हजार रुपये लेने की शिकायत पर ठेकेदार तुमेश गोड़ के विरुद्ध 13 अक्टूबर को थाना तरेगांव जंगल में एफआईआर दर्ज की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बैसाखू बैगा से 64 हजार रुपये, सुकोर बाई से 60 हजार रुपये, सोनिया बाई से 45 हजार रुपये और रनो बाई से 20 हजार रुपये लिए जाने की शिकायत है।

    उप मुख्यमंत्री ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

    उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने की महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। आवास निर्माण के लिए स्वीकृत राशि पर हितग्राहियों का अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता गंभीर मामला है।
    उन्होंने अधिकारियों को हितग्राहियों के हितों की रक्षा करने तथा आवास निर्माण में लापरवाही और धोखाधड़ी के मामलों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का संदेश दिया। सरकार का उद्देश्य है कि पात्र परिवारों को समय पर पक्का आवास मिले और गरीबों के अधिकारों का हनन करने वालों को कानून के अनुसार जवाबदेह बनाया जाए।

    गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के एसएनसीयू में चिकित्सकों ने बचाई जान, ऑक्सीजन सपोर्ट और रक्त चढ़ाकर किया उपचार

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने गंभीर अवस्था में भर्ती महज 900 ग्राम वजन के नवजात शिशु को लगभग दो माह के उपचार और विशेष देखभाल से नया जीवन दिया। समय से पहले जन्मे इस शिशु को सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या थी। लगातार चिकित्सकीय निगरानी, आवश्यक उपचार और पोषण प्रबंधन से उसका वजन बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 8 अक्टूबर को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी श्रीमती गोमती के नवजात को जन्म के बाद गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया था। शिशु की नाजुक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया। सांस लेने में परेशानी के कारण उसे लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, जबकि गंभीर एनीमिया के उपचार के लिए दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया। इसके साथ ही शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, नियमित फीडिंग और कंगारू मदर केयर (केएमसी) के माध्यम से पोषण एवं विशेष देखभाल सुनिश्चित की गई।

    लगभग दो माह तक चले उपचार के दौरान शिशु के स्वास्थ्य और वजन की लगातार निगरानी की गई। चिकित्सकीय टीम के प्रयासों से उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम पहुंच गया। इस सफलता से परिवार को बड़ी राहत मिली। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के एक परिवार को जिला अस्पताल में ही गंभीर नवजात के उपचार की सुविधा मिलना शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता को भी रेखांकित करता है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। जिला अस्पतालों में संचालित एसएनसीयू जैसी इकाइयां समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले नवजातों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस मामले में भी विशेष देखभाल, नियमित निगरानी और समय पर उपचार से सकारात्मक परिणाम सामने आए।

    नवजात के उपचार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन तथा सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम और एसएनसीयू के नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे शिशु का स्वस्थ होकर घर लौटना चिकित्सकीय टीम के समर्पण और नवजात देखभाल सेवाओं के महत्व का प्रेरक उदाहरण है।

    पीडब्ल्यूडी सचिव ने कोरबा में निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण, बीटी पैच और क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की मरम्मत प्राथमिकता से कराने के निर्देश

      कोरबा / शौर्यपथ / लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने कोरबा जिले में निर्माणाधीन सड़कों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर सड़कों, पुल-पुलियों एवं भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा की और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से सड़कों की मरम्मत और बीटी पैच कार्यों में तेजी लाने तथा क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की मरम्मत प्राथमिकता से कराने पर जोर दिया, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
    सचिव बंसल ने कहा कि निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का समय पर निराकरण किया जाए, जिससे कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण एजेंसियों के कार्यों पर कड़ी नजर रखने और गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
    निरीक्षण के दौरान उन्होंने कटघोरा–हरदीबाजार–बलौदा–अकलतरा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तथा हरदीबाजार–तरदा–सर्वमंगला–इमलीछापर मार्ग की स्थिति देखी। इसके अलावा ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक तक निर्माणाधीन 2.84 किलोमीटर लंबी सीमेंट-कांक्रीट सड़क की प्रगति की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी को कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
    इस दौरान कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता आर.के. रात्रे, अधीक्षण अभियंता सुरेश भूपल, कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता जी.आर. जांगड़े सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन से नक्सली हिंसा से प्रभावित भाई-बहनों का बढ़ा आत्मविश्वास : मुख्यमंत्री साय
    छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच का आयोजन, महिला दर्शकों के लिए प्रवेश रहेगा निःशुल्क

        रायपुर / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास के संबंध में हमने राष्ट्रपति महोदया को बस्तर आने का आमंत्रण दिया था। पूर्व में बस्तर के मांझी-चालकी प्रतिनिधियों से भेंट के दौरान भी उनसे बस्तर आने का आग्रह किया गया था, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया था। उनका 22 एवं 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रवास प्रस्तावित है। 23 अक्टूबर को वे जगदलपुर जाएंगी और वहां मुरिया दरबार में शामिल होंगी। राष्ट्रपति महोदया का बस्तर आगमन हम सभी के लिए प्रसन्नता और गौरव का अवसर है।
    मुख्यमंत्री साय ने नक्सली हिंसा से प्रभावित एवं अन्य दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर को संबोधित किया है। सरकार का प्रयास है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता मिले और वे सम्मान एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
    प्रदेश में पहली बार आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के संबंध में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए प्रसन्नता का विषय है। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले इस मैच में महिला दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। इससे प्रदेश की माताओं-बहनों और बेटियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के साथ उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।

    नवा रायपुर में 150 करोड़ से अधिक का निवेश, 3500 से ज्यादा लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष रोजगार
    नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिली गति, छत्तीसगढ़ को मिले साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को रोजगार सृजन से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की प्रस्तावित नई औद्योगिक इकाई का भूमिपूजन किया। इस इकाई की स्थापना पर 150 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है, जिससे साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवचयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता उद्योगों के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और निवेश का लाभ आम परिवारों तक पहुंचाना है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ तभी है, जब उससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों, परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिले। यश फैन्स एंड एप्लायंसेस की प्रस्तावित इकाई इसी सोच का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे श्रम आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है, जिनमें अपेक्षाकृत कम पूंजी निवेश से बड़ी संख्या में रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। उद्योगों के विस्तार से युवाओं और महिलाओं को अपने ही प्रदेश में कौशल एवं योग्यता के अनुरूप काम मिलने के अवसर बढ़ेंगे। इससे रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन की आवश्यकता भी कम करने में मदद मिल सकती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के लिए औद्योगिक विकास, कौशल उन्नयन, आधुनिक अधोसंरचना और रोजगार सृजन पर एक साथ काम किया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा, मानव संसाधन और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश केंद्रों में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचे और स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर मिलें।

    नई औद्योगिक नीति से निवेशकों का बढ़ा भरोसा

    मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 में रोजगारपरक उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और अन्य श्रम आधारित क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ को साढ़े आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। अब सरकार का जोर इन प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलने, निर्माण कार्यों को गति देने और उत्पादन शुरू कराकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर है।

    उद्योगों की स्थापना एवं संचालन की प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए भी विभिन्न सुधार किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिलताओं से राहत देने के उद्देश्य से जनविश्वास से जुड़े सुधारों के अंतर्गत 279 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की पहल की गई है। अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाकर निवेशकों को सहयोग दिया जा रहा है, ताकि परियोजनाएं जल्द धरातल पर उतरें और उत्पादन तथा रोजगार सृजन की शुरुआत हो सके।

    निवेश के साथ रोजगार सृजन पर विशेष जोर : ओ.पी. चौधरी

    वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की औद्योगिक नीति में रोजगार को प्रमुख स्थान दिया गया है। अब औद्योगिक निवेश को केवल उसकी राशि के आधार पर नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसरों के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अधिक पूंजी निवेश और अपेक्षाकृत कम रोजगार देने वाले उद्योगों की प्रधानता रही है। नई नीति में श्रम आधारित उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देकर इस स्थिति में बदलाव लाने का प्रयास किया गया है।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वित्त एवं उद्योग विभाग के समन्वय से औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 तैयार की गई है। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए सब्सिडी के बजटीय प्रावधान को लगभग 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक किया गया है। उन्होंने कहा कि यश फैन्स एंड एप्लायंसेस की प्रस्तावित इकाई में 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना इस नीति की रोजगारपरक सोच को दर्शाती है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास से प्राप्त संसाधनों का उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत बनाने में किया जाएगा। सरकार सुशासन, अधोसंरचना, तकनीक और औद्योगिक विकास को गति देकर आर्थिक प्रगति के लाभ गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    तीन हजार से अधिक उद्योग स्थापित, 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार

    उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनके माध्यम से 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। आगामी औद्योगिक परियोजनाओं से डेढ़ लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि निवेश अनुकूल नीतियों और उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। यश ग्रुप की नई इकाई को प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उन्होंने कंपनी प्रबंधन को बधाई दी और परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिलाया।

    यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड के सीईओ ए.एन. रविचंद्रन ने प्रस्तावित औद्योगिक इकाई की गतिविधियों, उत्पादन योजनाओं और रोजगार संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध अनुकूल वातावरण तथा राज्य सरकार से मिल रहे सहयोग की सराहना की।

    कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, यश ग्रुप के चेयरमैन रितेश नरेडी, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि, कंपनी प्रबंधन के अधिकारी और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

    पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू एवं साथियों ने श्रद्धालुओं और गरबा प्रतिभागियों को दिलाया संकल्प, 24 वर्षों से चला रहे जनजागरूकता अभियान

    दल्ली राजहरा। नवरात्रि के पावन पर्व पर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से 15 अक्टूबर 2026 को दल्ली राजहरा स्थित बीएसपी हायर सेकेंडरी स्कूल क्रमांक-2 के मैदान में आयोजित गरबा उत्सव के पांचवें दिन जनजागरूकता अभियान चलाया गया। पर्यावरण प्रेमी प्रदीप साहू एवं उनके साथियों ने श्रद्धालुओं और गरबा प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों से पूजा सामग्री को नदी-तालाबों में विसर्जित नहीं करने तथा जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की अपील की।

    आयोजनकर्ता सूरज गुप्ता एवं प्रशांत बाला बोकडे के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में प्रदीप साहू ने कहा कि माता रानी की आराधना के साथ प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना भी आवश्यक है। पूजा में इस्तेमाल होने वाली फूल-मालाएं, पत्तियां और अन्य सामग्री जल स्रोतों में डालने से प्रदूषण बढ़ सकता है। उन्होंने फूल-पत्तियों को एकत्रित कर जैविक खाद बनाने तथा प्लास्टिक, पॉलीथिन और थर्मोकोल जैसी सामग्रियों का उचित निपटान करने का आग्रह किया।

    पर्यावरण प्रेमी टिकेश्वर साहू ने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। वहीं राजकुमार साहू ने बताया कि उनकी टीम पिछले 24 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और वन्यजीवों की रक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए लोगों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की।

    श्रद्धालुओं को दिलाई पर्यावरण संरक्षण की शपथ

    कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं और गरबा प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पूजा सामग्री जल स्रोतों में नहीं डालने, प्लास्टिक एवं पॉलीथिन का उचित निपटान करने, फूलों से जैविक खाद बनाने और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने का संकल्प दिलाया गया।

    आयोजनकर्ता प्रशांत बाला बोकडे ने पर्यावरण प्रेमियों की पहल की सराहना करते हुए आयोजन स्थल पर निकलने वाली प्लास्टिक और पूजा सामग्री के उचित निपटान का आश्वासन दिया। वहीं सूरज गुप्ता ने इस जागरूकता अभियान के लिए पर्यावरण प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    इस अवसर पर टिकेश्वर साहू, राजकुमार साहू, कौशल साहू, हेमशंकर साहू, चेला राम, ताराचंद रावटे, लोकेंद्र देवांगन सहित आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

     

    संदेश: माता रानी की भक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा करें, पूजा सामग्री को नदी-तालाबों में न डालें और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले—दूरस्थ अंचलों तक पहुंच रही शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं, सेवा डेरों से खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
    दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय शिविर का शुभारंभ, 768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण

    रायपुर । केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नक्सली हिंसा के पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है। अब बस्तर को भय और हिंसा की पहचान से बाहर निकालकर खुशहाल एवं समृद्ध क्षेत्र बनाना है।

    श्री शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

    दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 सहित कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।

    पांच दशकों की पीड़ा दूर करना सरकार की जिम्मेदारी

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी। आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिकों ने अपने हाथ-पैर गंवाए। नक्सलवाद समाप्त करना पहला लक्ष्य था, लेकिन अब प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना और उनके जीवन में आत्मविश्वास लौटाना भी उतना ही जरूरी है।

    उन्होंने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे, जिनमें 1,570 से अधिक बस्तर के थे। श्री शाह ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में स्थानीय जनजातीय समाज, सुरक्षा बलों और प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    उन्होंने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी भय का वातावरण था, वहां अब खेल, संस्कृति और विकास गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।

    आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं पर जोर

    श्री शाह ने बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। इनमें 7,328 लोगों के बैंक खाते खोलना, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि देना शामिल है। इसके अलावा 455 लोगों को नौकरी, 129 लोगों को भूमि आवंटन, 4,014 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास तथा 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है।

    उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए, 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली दी गई तथा सड़क संपर्क बढ़ाने के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं। साथ ही 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाना है।

    200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’

    केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों से स्थानीय लोगों को सरकारी सेवाएं, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका संबंधी अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम होगा।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्त हुआ है। यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के साहस, बलिदान और बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है। उन्होंने नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों और संघर्ष में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना सरकार का लक्ष्य है। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं तथा इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं। गांवों में राशन दुकानों की व्यवस्था से लोगों को खाद्यान्न प्राप्त करने में भी सुविधा हो रही है।

    सेवा डेरों से रोजगार और स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देने के साथ जंगलों में उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं। आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों के अनुरूप प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि बस्तर में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनके पूरा होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    दिव्यांगजनों को मिला आत्मविश्वास, पुनर्वास अभियान जारी रहेगा

    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने अंग और आंखों की रोशनी गंवाई। राज्य सरकार का प्रयास है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित कोई भी व्यक्ति पुनर्वास और आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।

    कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने लाभार्थियों से संवाद भी किया। सुकमा के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर चलने लगे हैं। बीजापुर के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में मछली पकड़ने जाते समय आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। कृत्रिम पैर मिलने से उन्हें दोबारा चलने का सहारा मिला है। वहीं दंतेवाड़ा के अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर प्रसन्नता जताई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन, संस्कृति और अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का संकल्प है कि बस्तर का प्रत्येक गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें और हिंसा से प्रभावित परिवार सम्मान एवं आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जी सकें।
    कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

    Page 10 of 3138

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision