August 03, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

      रायपुर/नारायणपुर । कभी नक्सल प्रभाव और भौगोलिक अलगाव के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र से आज एक नई पहचान उभर रही है—फुटबॉल प्रतिभाओं की नर्सरी के रूप में। वर्ष 1986 में स्थापित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम, नारायणपुर आज खेल और शिक्षा के माध्यम से सुदूर आदिवासी अंचल के बच्चों का भविष्य संवार रहा है।
    इस बदलाव की झलक इन दिनों आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) 2026 में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जहां छत्तीसगढ़ की पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी इसी आश्रम से प्रशिक्षण प्राप्त कर राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। महिला टीम जहां फाइनल में पहुंच चुकी है, वहीं पुरुष टीम ने भी सेमीफाइनल में अपनी जगह बना ली है।
    छत्तीसगढ़ फुटबॉल संघ (CFA) के सहायक महासचिव एवं एआईएफएफ कार्यकारी समिति सदस्य मोहन लाल के अनुसार, “दोनों टीमों में लगभग 12-13 खिलाड़ी रामकृष्ण मिशन अकादमी से हैं, जो इस संस्थान की गुणवत्ता और समर्पण को दर्शाता है।”

    शिक्षा के साथ खेल का मजबूत आधार
    घने जंगलों के बीच बसे दूरदराज गांवों के बच्चों के लिए यह आश्रम एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। यहां लगभग 2,700 से अधिक बच्चे निवास करते हैं, जिन्हें निःशुल्क शिक्षा के साथ-साथ खेल और संगीत में भी प्रशिक्षित किया जाता है।
    कम उम्र से ही बच्चों को विभिन्न खेलों से परिचित कराया जाता है और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के अवसर प्रदान किए जाते हैं। हर वर्ष लगभग 50-60 छात्र राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं।

    आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित
    आश्रम में खेल के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं—तीन फुटबॉल मैदान, जिनमें एक एस्ट्रो-टर्फ भी शामिल है। इसके अलावा बैडमिंटन, टेबल टेनिस, खो-खो और मल्लखंभ के लिए इनडोर एरेना भी मौजूद हैं।

    रामकृष्ण मिशन फुटबॉल अकादमी (RKM FA) को तब राष्ट्रीय पहचान मिली, जब यह राज्य का पहला क्लब बना जिसने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) द्वारा आयोजित अंडर-17 यूथ कप और आई-लीग 2 में भाग लिया।

    खेल से बदलती जिंदगी
    मोहन लाल बताते हैं कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले बच्चों के जीवन में खेल ने एक सकारात्मक और परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। यहां से निकले कई छात्र आज देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत हैं और शीर्ष संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं। यह आश्रम न केवल शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, खिलाड़ी और शिक्षाविद बनने के सपने देखने और उन्हें साकार करने का मंच भी दे रहा है।
    अबूझमाड़ की धरती से उठती यह कहानी साबित करती है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो संघर्ष की जमीन से भी सफलता के फूल खिल सकते हैं।

      दुर्ग / शौर्यपथ / भगवान महावीर जन्मोत्सव के पावन अवसर पर महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव समिति द्वारा समाज को Peace, Kindness और Humanity की ओर प्रेरित करने हेतु विभिन्न विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में आयोजित “अहिंसा यात्रा” ने शहर में एक सकारात्मक संदेश प्रसारित किया।
    यह अहिंसा यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सशक्त सामाजिक Movement के रूप में सामने आई—जिसका उद्देश्य है सोच में परिवर्तन लाना, नफरत की जगह प्रेम को चुनना और हिंसा के स्थान पर अहिंसा को अपनाना।
    सुबह 6:30 बजे गया नगर, चण्डी मंडी से प्रारंभ हुई यह यात्रा नसिया जी तीर्थ तक पहुंची। यात्रा में समाज के वरिष्ठ एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही, वहीं महिलाओं और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई, जिससे आयोजन का स्वरूप और भी व्यापक एवं प्रेरणादायी बन गया।
    यात्रा के दौरान भगवान महावीर के उपदेशों से सजी तख्तियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, जो आमजन को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और करुणा के संदेश से जागरूक करती नजर आईं। इन संदेशों ने उपस्थित लोगों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
    समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना और नई पीढ़ी को महावीर स्वामी के आदर्शों से जोड़ना है। इस प्रकार अहिंसा यात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में प्रेम, सौहार्द और मानवता के मूल्यों को भी नई ऊर्जा प्रदान की।

     विशेष रिपोर्ट:
    छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग में हाल ही में नई कंपनियों को दिए गए काम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, विभाग द्वारा ठेका देने की प्रक्रिया में कई अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ कंपनियों ने काम लेने के बाद स्वयं कार्य करने के बजाय इसे बाहरी लोगों को सौंप दिया है।

    सूत्रों के मुताबिक, जिन नई कंपनियों को काम दिया गया है उनमें Innov Source Services Pvt Ltd, Innovision, Team HR, Parragreen और Spectrum जैसी कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं। आरोप है कि इन कंपनियों ने काम हासिल करने के लिए भारी रकम ली और बाद में खुद काम करने के बजाय बाहरी लोगों या अन्य एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंप दी।

    बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में बड़ी मात्रा में पैसों का लेन-देन होने की भी चर्चा है। इस वजह से विभाग की कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यदि इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

    हालांकि, अभी तक इस मामले में विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन बढ़ते विवाद के बीच यह मांग तेज हो रही है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि टेंडर प्रक्रिया में हुई किसी भी संभावित अनियमितता की सच्चाई सामने आ सके।

    दुर्ग | शौर्यपथ समाचार

    दुर्ग शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख व्यावसायिक केंद्र इंदिरा मार्केट की बदहाल व्यवस्था, अवैध अतिक्रमण और पार्किंग ठेकेदारों की मनमानी वसूली को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए हैं। 1 अप्रैल से बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा के सामने अब इस अव्यवस्था को सुधारने की बड़ी चुनौती खड़ी है।

    अब तक राजस्व वसूली में व्यस्त रहने का हवाला देने वाले मिश्रा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वित्तीय वर्ष समाप्त होते ही बाजार व्यवस्था पर सख्ती बरती जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सख्ती जमीनी हकीकत में बदलेगी या फिर यह भी सिर्फ कागजी घोषणा बनकर रह जाएगी?

    ? अतिक्रमण से घिरा बाजार, सड़क तक पसरा कारोबार

    इंदिरा मार्केट में हालात यह हैं कि पसरा व्यापारियों ने सड़कों तक कब्जा जमा लिया है, जिससे न केवल बाजार की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि यातायात व्यवस्था भी चरमरा गई है। मुख्य मार्गों और प्रवेश द्वारों पर अतिक्रमण की वजह से आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    ? पार्किंग ठेकेदारों पर गंभीर आरोप

    बाजार में पार्किंग व्यवस्था सुधारने के नाम पर ठेकेदारों द्वारा मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इंदिरा गांधी मूर्ति के आसपास और प्रवेश द्वारों पर अवैध वसूली का खेल लंबे समय से जारी है।

    मिश्रा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि निगम द्वारा निर्धारित शुल्क की सूचना पट्टिकाएं लगाई जाएंगी और ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लगाई जाएगी।

    ? सामान्य सभा में भी गूंजा मुद्दा

    नगर निगम की सामान्य सभा में भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ा था, जहां सत्तापक्ष के पार्षदों ने ही बाजार की बदहाली और अवैध वसूली को प्रमुखता से उठाया। इससे यह स्पष्ट है कि समस्या सिर्फ आम जनता की नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की नजर में भी गंभीर है।

    ? रसूखदारों पर होगी कार्रवाई या सिर्फ गरीबों पर चलेगा डंडा?

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल छोटे ठेला व्यापारियों तक सीमित रहेगी, या फिर प्रभावशाली लोगों पर भी समान रूप से होगी?

    गणेश मंदिर के सामने “राम रसोई” के नाम पर सड़क पर संचालित होटल,

    ओम ज्वेलर्स द्वारा दुकान का सड़क तक विस्तार,

    जैसे मामलों में अब तक केवल कार्रवाई की बातें हुई हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए।

    यदि मिश्रा वास्तव में सख्ती दिखाते हैं, तो यह उनके लिए प्रभावशाली लोगों के अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलाने की पहली परीक्षा होगी।

    ? अनुभव से कम, जिम्मेदारी बड़ी – फैसले पर भी सवाल

    यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि बाजार विभाग के अन्य कर्मचारियों से जूनियर होने के बावजूद अभ्युदय मिश्रा को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में यह निर्णय भी अब उनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा कि सही था या सवालों के घेरे में आ जाएगा।

    ⚖️ अब नजर 1 अप्रैल पर…

    साल भर से दावे, घोषणाएं और बैठकों का दौर चलता रहा, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं।

    अब 1 अप्रैल से शुरू होने वाला समय अभ्युदय मिश्रा के लिए “अग्निपरीक्षा” से कम नहीं होगा।

    ? क्या इंदिरा मार्केट में व्यवस्था लौटेगी?

    ? क्या अवैध वसूली पर लगाम लगेगी?

    ? या फिर पर्दे के पीछे ‘कमीशन का खेल’ और तेज हो जाएगा?

    इन सवालों के जवाब अब कार्रवाई ही देगी, बयान नहीं।

    "शौर्यपथ : एक अखबार नहीं, एक बेटे का जीवित स्वरूप" समय का पहिया निरंतर चलता रहता है, लेकिन कुछ तिथियाँ, कुछ क्षण और कुछ स्मृतियाँ ऐसी होती हैं जो जीवन…

    संवाददाता – अजय देशमुख | गुंडरदेही
    भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर जैन श्री संघ गुंडरदेही द्वारा स्थानीय शारदा वाटिका में आयोजित भव्य समारोह श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आया। ‘जियो और जीने दो’ के संदेश को आत्मसात करते हुए आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों की सहभागिता ने इसे एक यादगार उत्सव में परिवर्तित कर दिया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ नन्हे-मुन्ने बच्चों की आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। बहु मंडल की सदस्याओं ने मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर भगवान महावीर के उपदेशों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इस दौरान समाज के वरिष्ठजनों की गरिमामयी उपस्थिति और उनके आशीर्वाद ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया।

    इस आयोजन की सफलता में मातृशक्ति और युवा वर्ग की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। महिलाओं के समर्पण और युवाओं के सुव्यवस्थित प्रबंधन ने कार्यक्रम को अनुशासन, उत्साह और भव्यता का उत्कृष्ट स्वरूप प्रदान किया।

    महोत्सव में आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कलंगपुर, सिकोसा और सिराभाठा श्री संघ के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता ने आयोजन की शोभा को और बढ़ाया। जैन श्री संघ गुंडरदेही ने सभी आगंतुक संघों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम के दौरान जीव दया के भाव को साकार करते हुए श्रद्धालुओं ने जीव दया पेटी में ₹21,000 की राशि समर्पित की। संघ ने यह निर्णय लिया कि उक्त राशि श्री कृष्ण गौशाला को सेवा कार्य हेतु प्रदान की जाएगी, जो समाज के सेवा भाव का प्रेरणादायक उदाहरण है।
    समापन अवसर पर जैन श्री संघ गुंडरदेही ने सभी सहयोगियों, दानदाताओं एवं श्रद्धालुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार धर्म और समाज सेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता और सेवा के आदर्शों को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत कर गया।

    शौर्यपथ, गुंडरदेही।
    गुंडरदेही क्षेत्र में एक वेब पोर्टल पर प्रकाशित और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही कथित अवैध गतिविधियों की खबर जांच में भ्रामक साबित हुई है। खबर में दावा किया गया था कि थाना गुंडरदेही अंतर्गत ग्राम ओटेबंद में दारू, गांजा और सट्टे का कारोबार संचालित हो रहा है, जिसका आधार एक संदिग्ध वीडियो बताया जा रहा था।
    हालांकि, वायरल वीडियो में न तो व्यक्ति का चेहरा स्पष्ट है और न ही यह पुष्टि हो पाई कि वीडियो उक्त स्थान का ही है। वीडियो में केवल कुछ पत्तियों को दिखाया जा रहा है, जिससे किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। इसके बावजूद वेब पोर्टल द्वारा बिना पुष्ट जानकारी के गंभीर आरोप प्रसारित कर दिए गए।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी (टीआई) नवीन बोरकर ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान न तो वहां शराब की कोई अवैध सामग्री मिली और न ही गांजा या सट्टा संचालन के कोई प्रमाण सामने आए। ग्रामीणों ने भी स्पष्ट रूप से बताया कि उक्त स्थान पर किसी प्रकार की अवैध गतिविधियां नहीं होती हैं।
    पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में फिलहाल ऐसी कोई गतिविधि नहीं पाई गई है, लेकिन भविष्य में यदि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि सामने आती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बिना सत्यापन के सनसनीखेज खबरें प्रसारित करने वाले कुछ वेब पोर्टल्स की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील विषयों पर इस प्रकार की भ्रामक खबरें न केवल आमजन में भ्रम फैलाती हैं, बल्कि पुलिस और शासन की छवि को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास करती हैं।
    आवश्यक है कि मीडिया संस्थान जिम्मेदारी के साथ तथ्यों की पुष्टि कर ही खबरों का प्रकाशन करें, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनी रहे और समाज में सही एवं संतुलित जानकारी पहुंच सके।

    दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड नंबर 38, मिलपारा में विकास के दावों की पोल खुल गई है। तीन-चार महीने पहले जिस 'आकांक्षा शौचालय' का उद्घाटन बड़े तामझाम और…

      रायपुर / शौर्यपथ / उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के लिए 30 मार्च 2026 एक ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा (अंबिकापुर) से देश की राजधानी दिल्ली और पूर्वी भारत के प्रमुख शहर कोलकाता के लिए नियमित हवाई सेवा का शुभारंभ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय प्रातः 10 बजे रायपुर से वर्चुअल माध्यम से इस सेवा का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर अंबिकापुर के पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम नागरिक उपस्थित रहेंगे।

    नई हवाई सेवा के तहत एलायंस एयर द्वारा 72-सीटर एटीआर विमान संचालित किया जाएगा। दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन—सोमवार और बुधवार—उड़ानें संचालित होंगी। सोमवार को फ्लाइट दिल्ली से बिलासपुर होते हुए अंबिकापुर पहुंचेगी और वहीं से वापस दिल्ली जाएगी। बुधवार को सीधी उड़ान दिल्ली से अंबिकापुर और फिर बिलासपुर होते हुए वापसी करेगी।

    इसी तरह कोलकाता के लिए भी सप्ताह में दो दिन—गुरुवार और शनिवार—उड़ानें उपलब्ध रहेंगी। शनिवार को फ्लाइट कोलकाता से बिलासपुर होते हुए अंबिकापुर पहुंचेगी, जबकि गुरुवार को सीधी उड़ान कोलकाता से अंबिकापुर और फिर बिलासपुर के रास्ते वापसी करेगी। इस शेड्यूल से यात्रियों को दोनों दिशाओं में बेहतर और नियमित कनेक्टिविटी मिलेगी।

    इस हवाई सेवा से सरगुजा संभाग सीधे दिल्ली और कोलकाता से जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार, निवेश और पर्यटन को नया बल मिलेगा। क्षेत्र के प्राकृतिक और पर्यटन स्थल—जैसे मैनपाट, तातापानी और जलप्रपात—अब देश-विदेश के पर्यटकों के लिए अधिक सुलभ हो जाएंगे। साथ ही, स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी आएगी।

    गौरतलब है कि माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा का विकास केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ योजना के अंतर्गत किया गया है। वर्ष 1950 में निर्मित इस हवाई पट्टी का विस्तार कर रनवे को 1500 मीटर से बढ़ाकर 1800 मीटर किया गया है। लगभग 365 एकड़ में फैले इस एयरपोर्ट के विकास हेतु 48.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जिससे इसे डीजीसीए मानकों के अनुरूप आधुनिक रूप दिया गया है। टर्मिनल भवन का उन्नयन 72 यात्रियों की क्षमता के अनुरूप किया गया है तथा 100 वाहनों की पार्किंग और फोरलेन सड़क की सुविधा भी विकसित की गई है।

    इस नई हवाई सेवा को सरगुजा के विकास की उड़ान के रूप में देखा जा रहा है, जो क्षेत्र को राष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

      रायपुर / शौर्यपथ / सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाली जशपुर जिले के इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट के मैदान में ऐसा प्रदर्शन किया कि आज वे जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी इसी उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को जशपुर नगर के मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में उनसे मुलाकात कर उन्हें क्रिकेट किट प्रदान की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
    ग्राम इचकेला के शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की 16 बालिका खिलाड़ियों ने क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, अनुशासन और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है और वे आगे भी इसी तरह राज्य और देश का नाम रोशन करती रहें।
    इचकेला एमसीसी एक क्रिकेट अकादमी के रूप में उभरकर सामने आई है, जहां से वर्तमान में 40 बालिकाएं नियमित रूप से क्रिकेट का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें से 17 खिलाड़ी अंडर-17 और अंडर-19 वर्ग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और बोर्ड मैचों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
    वर्ष 2025 में सरगुजा संभाग ने 25 वर्षों बाद राज्य स्तरीय अंडर-17 क्रिकेट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत में इचकेला एमसीसी की भूमिका निर्णायक रही। विजेता टीम के 11 खिलाड़ियों में से 9 खिलाड़ी इसी अकादमी की थीं। वहीं अंडर-19 वर्ग में भी सरगुजा संभाग ने रजत पदक जीता, जिसमें 11 में से 8 खिलाड़ी इचकेला एमसीसी से थीं। रायगढ़ में आयोजित वर्ष 2025 के इंटर-स्टेट क्रिकेट टूर्नामेंट में देशभर की टीमों के बीच इचकेला की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। अब तक इस समूह की 11 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले और राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इन उपलब्धियों के पीछे कोच श्री संतोष शंकर सोनी और श्रीमती पंडरी बाई का समर्पण और मार्गदर्शन प्रमुख रहा है।इचकेला की बेटियों की सफलता इस बात का सबूत है कि अगर मन में जुनून हो और सही मार्गदर्शन मिले तो संसाधनों की कमी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती।

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