
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
ढाबों में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, कर्मचारियों का दावा- धमकाकर करवाए गए हस्ताक्षर, जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं; जांच की उठी मांग
बालोद। बालोद जिले के आबकारी विभाग में कथित अनियमितताओं और अवैध शराब कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग के उप निरीक्षक आसाराम के कार्यक्षेत्र में कई ढाबों पर अवैध रूप से शराब बेचने और पिलाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इन गतिविधियों के वीडियो भी मौजूद हैं, लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
इसी बीच देसी-विदेशी शराब दुकान से जुड़े मामले में पांच प्लेसमेंट कर्मचारियों को सेवा से हटा दिए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। हटाए गए कर्मचारियों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाकर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और बाद में पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर डालते हुए नौकरी से बाहर कर दिया।
कर्मचारियों के अनुसार सुपरवाइजर यशपाल, सेल्समैन चुम्मन लाल, टिकेश्वर निषाद, गार्ड दिलीप और ढालेंद्र को एडीओ तथा उप निरीक्षक आसाराम ने दुकान में बुलाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा। कर्मचारियों का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया और अगले ही दिन सेवा से हटा दिया गया। उनका यह भी कहना है कि उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि उन्होंने "नेतागिरी" की तो परिणाम ठीक नहीं होंगे।
पीड़ित कर्मचारियों का दावा है कि कई महीनों का सीसीटीवी फुटेज भी खंगाला गया, लेकिन कथित रूप से शराब निकालने या किसी अनियमितता का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। इसके बावजूद कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर की गई, जबकि वास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मामले को लेकर यह आरोप भी सामने आए हैं कि जिन क्षेत्रों की जिम्मेदारी उप निरीक्षक आसाराम के पास है, वहां कई ढाबों में लंबे समय से अवैध रूप से शराब बेची और परोसी जा रही है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और हटाए गए कर्मचारियों के परिजनों ने जिला कलेक्टर तथा आबकारी आयुक्त से पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अवैध शराब बेचने वाले ढाबों पर तत्काल छापेमारी, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा हटाए गए पांचों कर्मचारियों की बहाली की भी मांग की है।
विभाग का पक्ष प्रतीक्षित
इस संबंध में उप निरीक्षक आसाराम से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं बालोद के जिला आबकारी अधिकारी पलक नंदन से भी पक्ष जानने का प्रयास किया गया, किंतु उनका आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हो सका।
(नोट: यह समाचार संबंधित कर्मचारियों, स्थानीय सूत्रों और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
*जलापूर्ति योजनाओं के संचालन व रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री*
*पीएचई द्वारा यूनिसेफ और एसीई के सहयोग से हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए कार्यशाला का आयोजन*
रायपुर.शौर्यपथ. उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव आज जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए ग्रामीण पाइपलाइन जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RGNGWTRI) में आयोजित कार्यशाला में महिला सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि जल आपूर्ति की योजनाओं के लंबे समय तक सुचारू संचालन के लिए बारिश के पानी का संचय और जल संरक्षण आवश्यक है। यह भूजल को रिचार्ज करने के साथ ही दीर्घ काल तक जल स्रोतों में जल की उपलब्धता बनाए रखेगा।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यशाला में सरपंचों से गांवों में हर घर नल से जल पहुंचने के बाद ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली। उन्होंने नल जल योजनाओं के संचालन-संधारण के लिए पंचायतों द्वारा की गई व्यवस्था के बारे में पूछा। उन्होंने गांवों में जलस्रोतों, जल की गुणवत्ता के नियमित परीक्षण तथा रखरखाव शुल्क की भी जानकारी ली। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यूनिसेफ और एसीई (Action for Community Development) संस्था के सहयोग से इस एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 100 महिला सरपंच शामिल हुईं।
कार्यशाला में हर घर जल प्रमाणित गांवों में नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण और मरम्मत पर व्यापक विचार-विमर्श और बेस्ट प्रेक्टिसेस पर गहन चर्चा की गई। महिला सरपंचों ने इस दौरान जल जीवन मिशन के तहत अपनी-अपनी पंचायतों में जल आपूर्ति की व्यवस्था तथा नल जल योजना के संचालन-संधारण के अनुभव साझा किए। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने महिला सरपंचों को नल जल योजनाओं के सफल, निर्बाध और दीर्घकालीन संचालन के गुर बताए।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कार्यशाला में कहा कि जल आपूर्ति के लिए उपयोग हो रहे जल स्रोतों की देखभाल और सावधानीपूर्वक उपयोग जरूरी है। इसके टिकाऊपन (Sustainability) पर ही योजना की दीर्घकालीन सफलता निर्भर है। उन्होंने कहा कि नल जल योजनाओं के काम पूर्ण होने तथा पंचायतों को इसके हस्तांतरण के बाद इसका संचालन व संधारण ग्राम पंचायतों को करना है। जल जीवन मिशन हमारे घर और हमारे गांव के लिए योजना है। ग्राम पंचायतों को गांववालों के साथ मिलकर जल आपूर्ति की व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। श्री साव ने जल स्तर बनाए रखने तथा भू-जल स्रोतों को रिचार्ज करने स्टॉपडैम बनाने और बारिश के पानी को संग्रहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव के अवरोधों व अतिक्रमणों को हटाकर तालाबों को अच्छे से भरने की व्यवस्था सभी गांवों को करना चाहिए।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की निदेशक सुश्री रूबी मुखर्जी और यूनिसेफ की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ सुश्री श्वेता पटनायक ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री के.के. मरकाम और अधीक्षण अभियंता श्री समीर गौड़ भी कार्यशाला में मौजूद थे।
कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन को मिलेगी गति, रावघाट-जगदलपुर परियोजना की समीक्षा, नई रेल लाइनों के शीघ्र अनुमोदन का किया आग्रह
रायपुर । छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के व्यापक विस्तार और क्षेत्रीय विकास को नई गति देने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से विस्तृत चर्चा की। बैठक में प्रदेश की प्रमुख रेल परियोजनाओं, नई रेल लाइनों और लंबित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्हें शीघ्र गति देने पर जोर दिया गया। बैठक में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू तथा राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का प्रमुख औद्योगिक, खनिज और कृषि राज्य है। ऐसे में रेलवे नेटवर्क का विस्तार केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, व्यापार, पर्यटन, कृषि विपणन और जनजातीय क्षेत्रों के संतुलित विकास का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेलवे अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिसका लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है।
कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन बनेगी विकास की नई धुरी
बैठक में 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेलवे लाइन परियोजना पर विशेष चर्चा हुई। रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) के माध्यम से इस परियोजना के लिए स्पेशल परपज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा।
यह रेल लाइन कटघोरा, करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी। इससे पहली बार कई ऐसे क्षेत्रों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जहां अब तक रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्रीय विकास, औद्योगिक निवेश और लाखों लोगों की आवाजाही के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना को मिलेगी रफ्तार
बैठक में 140 किलोमीटर लंबी रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रेलवे की निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने का आग्रह किया ताकि बस्तर अंचल की रेल कनेक्टिविटी मजबूत हो सके।
सरगुजा सहित उत्तर छत्तीसगढ़ की तीन नई रेल लाइनों पर जोर
मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से प्रदेश की तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया—
सरडेगा–पत्थलगांव–अंबिकापुर (244 किमी)
धरमजयगढ़–पत्थलगांव–लोहरदगा (301 किमी)
अंबिकापुर–बरवाडीह (200 किमी)
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल संपर्क मजबूत होगा तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया।
बस्तर में दो नई रेल परियोजनाओं के सर्वे पर भी चर्चा
बैठक में किरंदुल–कोत्तागुडेम (180 किमी) तथा गढ़चिरौली–बीजापुर–किरंदुल (बचेली) (490 किमी) नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वे कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने सर्वे शीघ्र पूरा कर आगामी कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया ताकि बस्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी, विकास और सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को और मजबूती मिल सके।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास का नया दौर शुरू हुआ है। नई रेल परियोजनाएं औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, कृषि उत्पादों की आसान आवाजाही, पर्यटन संवर्धन और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी तथा 'विकसित छत्तीसगढ़' के लक्ष्य को नई गति देंगी।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की पहल पर छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच अहम बैठक, साझा जल प्रबंधन और दीर्घकालिक समझौते पर जोर
रायपुर । वर्षों से लंबित महानदी जल बंटवारे के मुद्दे को सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा देने के उद्देश्य से गुरुवार को नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा कि महानदी किसी विवाद का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की साझा समृद्धि का आधार है। उन्होंने कहा कि महानदी का जल दोनों राज्यों के किसानों, पेयजल व्यवस्था, उद्योगों, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। इसलिए इस विषय का समाधान टकराव नहीं, बल्कि सहयोग और आपसी विश्वास के आधार पर होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस बैठक को विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच बने संवाद और सहयोग के सकारात्मक माहौल से स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सिंचाई, पेयजल और हीराकुंड परियोजना की आवश्यकताओं का पूरा सम्मान करता है। उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी क्षेत्रों, सूखा प्रभावित इलाकों और भविष्य की विकास जरूरतों को भी समान संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के हित एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं।
मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञों द्वारा किए गए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर भविष्य उन्मुख जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाए। विशेष रूप से कम वर्षा वाले वर्षों के लिए साझा जल प्रबंधन प्रणाली तैयार करने और जल उपलब्धता, उपयोग तथा भविष्य की आवश्यकताओं की नियमित समीक्षा के लिए स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित करने पर उन्होंने जोर दिया।
उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर अधिकांश विषयों का समाधान आपसी समन्वय से किया जाए तथा केवल नीतिगत मामलों को ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर लाया जाए। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय जल आयोग से अनुरोध किया कि वे निष्पक्ष तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक सहमति आधारित समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद की भावना ने वर्षों पुराने जटिल मुद्दों के समाधान के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दोनों राज्य मिलकर ऐसा समाधान विकसित करेंगे, जिससे किसानों, नागरिकों, उद्योगों, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित एवं समृद्ध हो सके।
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
एनॉलॉग पनीर पर सख्ती के निर्देश, 375 नई एम्बुलेंस, 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू होंगे
रायपुर/ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य मलेरिया से होने वाली एक भी मृत्यु को रोकना है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच, त्वरित उपचार, सतत निगरानी और जनजागरूकता के जरिए मलेरिया नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनॉलॉग पनीर के उपयोग और बिक्री पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
रायपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत अब तक 34.29 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है, जो लक्षित आबादी का लगभग 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग, मुख कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर उपचार शुरू किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा 10,938 हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की रणनीतिक कार्ययोजना और जनसहभागिता के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बस्तर संभाग में मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है, जबकि प्रदेश का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य विभाग की बड़ी उपलब्धि बताया।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस शुरू की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक लोगों को समयबद्ध आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
उन्होंने बताया कि HLL Lifecare Limited के सहयोग से प्रदेश के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हब एंड स्पोक मॉडल, आईटी आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली और गुणवत्ता निगरानी के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक भी बेहतर जांच सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में दक्ष मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों को प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
खाद्य सुरक्षा पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग और विक्रय पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं और 209 सदस्यीय जनजातीय प्रतिनिधिमंडल का ऐतिहासिक अभिनंदन, राष्ट्रपति ने जताई बस्तर दशहरा में शामिल होने की इच्छा
नई दिल्ली / रायपुर । भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च संवैधानिक परिसर राष्ट्रपति भवन में गुरुवार को ऐसा ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जिसने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व व्यवस्था को राष्ट्रीय गौरव के शिखर पर स्थापित कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकारों, पारंपरिक मांझी-चालकी नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में विशेष सम्मान किया गया।इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। समारोह का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका स्वागत किया। उनकी इस आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावुक कर दिया और यह दृश्य राष्ट्रपति भवन के इतिहास में एक यादगार अध्याय बन गया।
राष्ट्रपति बोलीं— बस्तर अब शांति, विकास और समृद्धि की नई पहचान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, मांझी-चालकी व्यवस्था और बस्तर पंडुम के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है तथा यहां शिक्षा, सड़क, बिजली और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि मांझी-चालकी व्यवस्था सामाजिक समरसता, सामुदायिक नेतृत्व और सांस्कृतिक संरक्षण की मजबूत आधारशिला है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि "मांझी मेरे परिवार का हिस्सा हैं, मेरे पिता भी मांझी थे," जिससे उनका जनजातीय समाज से आत्मीय जुड़ाव झलकता है।
बस्तर दशहरा में आने की जताई इच्छा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराएं और भगवान जगन्नाथ से जुड़ी इसकी सांस्कृतिक विरासत उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करती है।
अमित शाह बोले— पहली बार राष्ट्रपति भवन में देखा बस्तर का ऐसा सांस्कृतिक वैभव
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक बार राष्ट्रपति भवन आए हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने यहां बस्तर की पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री: यह पूरे छत्तीसगढ़ के सम्मान का क्षण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल का सम्मान पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है और स्थानीय कलाकारों व लोक परंपराओं को नया मंच प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की कलाकृति की भेंट
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। यह कलाकृति प्रेम, त्याग, समर्पण और जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। बस्तर की लोकमान्यता के अनुसार झिटकू और मिटकी ने अकाल के समय अपने त्याग और प्रेम से अमिट मिसाल कायम की थी और आज भी उन्हें श्रद्धापूर्वक 'खोड़िया राजा' और 'गप्पा देई' के रूप में पूजा जाता है।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी प्राप्त की। यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता, जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था और लोककला को राष्ट्रीय मंच पर मिली अभूतपूर्व प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन को मिलेगा रचनात्मक विस्तार, देश के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट सिखाएंगे स्कूली विद्यार्थियों को कला के गुर
रायपुर / शौर्यपथ / बस्तर की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यटन और विकास की सकारात्मक छवि को रचनात्मक अभिव्यक्ति देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका 'कार्टून वॉच' द्वारा जगदलपुर में 'मुस्कुराता बस्तर' थीम पर विशेष कार्टून कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यशाला में स्कूली विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला का प्रशिक्षण देकर बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और बदलती पहचान को अपनी रचनात्मक कल्पनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सड़क, शिक्षा, पर्यटन और जनसुविधाओं के विस्तार के साथ बस्तर आज देश-दुनिया में अपनी नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा और जनजातीय लोक संस्कृति इस क्षेत्र की विशिष्ट पहचान हैं। कार्यशाला की थीम 'मुस्कुराता बस्तर' इन्हीं सकारात्मक बदलावों और सांस्कृतिक वैभव को कार्टून कला के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का प्रयास है।
कार्टून वॉच के संपादक त्र्यंबक शर्मा ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल चित्र बनाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की रचनात्मक सोच को विकसित करते हुए उन्हें अपनी मिट्टी, संस्कृति और समाज से जोड़ना भी है। प्रतिभागी विद्यार्थियों को कार्टून के माध्यम से सामाजिक संदेश देने, व्यंग्य की अभिव्यक्ति और सृजनात्मक संवाद की कला से भी परिचित कराया जाएगा।
कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट माधव जोशी और पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे लाइव डेमो के माध्यम से विद्यार्थियों को ऑन-द-स्पॉट कार्टून और कैरिकेचर बनाने की तकनीक सिखाएंगे। साथ ही वे कार्टून कला के सामाजिक, रचनात्मक और रोजगारपरक आयामों पर भी मार्गदर्शन देंगे।
इस पहल से बस्तर के युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का राष्ट्रीय मंच मिलेगा। साथ ही बस्तर की सकारात्मक छवि, सांस्कृतिक समृद्धि और पर्यटन संभावनाओं को कला के माध्यम से देशभर तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा। 'मुस्कुराता बस्तर' केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, लोक परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का एक सशक्त रचनात्मक अभियान है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में 29 जुलाई को डब्ल्यूबी-16 स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक (संकार्य) राकेश कुमार, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (सर्विसेज) तुषार कांत, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (एम एंड यू) बिजय कुमार बेहेरा, मुख्य महाप्रबंधक (ब्लास्ट फर्नेस) मनोज कुमार, महाप्रबंधक (एसएमएस-2) सुशांत कुमार घोषाल, मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-3) त्रिभुवन बैठा, मुख्य महाप्रबंधक (रिफ्रैक्ट्री) प्रोसेनजीत दास सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यपालक निदेशक (संकार्य) राकेश कुमार ने इस सफलता के लिए सभी संबंधित विभागों की टीमों को बधाई देते हुए कहा कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क के कारण ही यह उपलब्धि संभव हो सकी। उन्होंने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए रखते हुए लागत में कमी, परिचालन उत्कृष्टता और भविष्य में इससे भी बेहतर मानक स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
टीएलसी-207 की रिकॉर्ड लाइफ हासिल करने में रिफ्रैक्ट्री इंजीनियरिंग विभाग (आरईडी), ब्लास्ट फर्नेस, ट्रैफिक एंड डिस्पैच तथा एसएमएस-3 के बीच उत्कृष्ट समन्वय और प्रभावी कार्यप्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ब्लास्ट फर्नेस विभाग में मनोज कुमार के मार्गदर्शन में परिचालन का सफल संचालन किया गया, जबकि पी. आर. अजयन और दिनेश राव ने बेहतर परिचालन पद्धतियों को बनाए रखने में उल्लेखनीय योगदान दिया।
रिफ्रैक्ट्री अनुरक्षण एवं तकनीकी सुधार कार्य प्रोसेनजीत दास के नेतृत्व में संपन्न हुए। टॉरपीडो लैडल रिफ्रैक्ट्री अनुरक्षण का नेतृत्व मोहम्मद साबिर ने किया, जबकि जे. आर. मारकंडे और हर्ष वर्धन सिंह ने संबंधित एजेंसी के साथ समन्वय स्थापित कर तकनीकी नवाचार और कार्य निष्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह उपलब्धि भिलाई इस्पात संयंत्र की तकनीकी क्षमता, अनुशासित परिचालन, प्रभावी अनुरक्षण व्यवस्था और सामूहिक टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। इससे संयंत्र ने इस्पात उत्पादन के क्षेत्र में एक और नया मानक स्थापित किया है।
भिलाई-03। सावन के पहले ही दिन भिलाई-चरौदा नगर निगम ने स्वास्थ्य विभाग के महिला एवं पुरुष कर्मचारियों को रेनकोट वितरित किए। निगम महापौर निर्मल कोसरे, सभापति कृष्णा चंद्राकर एवं निगम आयुक्त डी.एस. राजपूत की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में कर्मचारियों को बरसात के दौरान सुरक्षित एवं निर्बाध रूप से कार्य करने के लिए रेनकोट उपलब्ध कराए गए।
महापौर निर्मल कोसरे ने कहा कि निगम के स्वास्थ्य कर्मचारी हर मौसम में शहर की स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए मैदान में रहते हैं। लगातार हो रही बारिश के बीच उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसी उद्देश्य से रेनकोट वितरित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रेनकोट कर्मचारियों को बारिश, नमी और कीट-पतंगों से बचाने में भी सहायक होंगे, जिससे वे अधिक सुरक्षित वातावरण में अपनी सेवाएं दे सकेंगे।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के सभी महिला एवं पुरुष कर्मचारी उपस्थित रहे। निगम प्रशासन ने कर्मचारियों के कार्य के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए भविष्य में भी उनकी सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
रिसाली / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम रिसाली में 'कैच द रेन' अभियान के तहत जल संरक्षण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। निगम आयुक्त मोनिका वर्मा के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र की महिलाओं को वर्षा जल संग्रहण और भूजल संरक्षण के महत्व की जानकारी दी गई।
उप अभियंता डिगेश्वरी चंद्राकर ने कहा कि जल बचाने और उसे संरक्षित करने में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि घरों में पानी का सबसे अधिक उपयोग महिलाएं करती हैं, इसलिए भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने के लिए उन्हें जल संरक्षण के प्रति जागरूक होकर समाज का नेतृत्व करना होगा।
कार्यशाला का उद्देश्य वर्षा जल को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से संग्रहित कर भूजल स्तर बढ़ाना और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति लोगों को प्रेरित करना था। कार्यक्रम में शामिल वूमेन फॉर ट्री से जुड़ी महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूह की सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया।
जल संरक्षण के लिए दिए गए प्रमुख सुझाव:
वर्षा जल को पात्रों में एकत्र कर घरेलू उपयोग में लें।
साफ वर्षा जल को पाइप के माध्यम से बोरवेल एवं कुओं में रिचार्ज करें।
घर के आसपास सोक पिट का निर्माण कर भूजल स्तर बढ़ाने में सहयोग करें।
अधिक से अधिक पौधरोपण कर जल संरक्षण को बढ़ावा दें।
आमजन को वर्षा जल संचयन और जल बचाने के लिए प्रेरित करें।
स्कूलों में स्वच्छता का संदेश, लेकिन जिला शिक्षा कार्यालय के बाहर गंदगी का ढेर; सूचना के बाद भी नहीं हुई सफाई
दंतेवाड़ा। एक ओर शिक्षा विभाग स्कूलों में स्वच्छता पखवाड़ा मनाकर विद्यार्थियों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय स्थित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के बाहर फैली गंदगी विभाग के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
कार्यालय परिसर के समीप बड़ी मात्रा में कचरा बिखरा हुआ है, जिसमें विभागीय कार्यों में उपयोग किए गए कागज, प्लास्टिक की पानी की बोतलें तथा अन्य सूखा कचरा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कचरा राहगीरों या आम नागरिकों द्वारा नहीं, बल्कि कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा ही फेंका गया है।
स्थिति को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि जिला शिक्षा कार्यालय में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग संग्रहित करने की कोई समुचित व्यवस्था दिखाई नहीं देती। डस्टबिन और कचरा प्रबंधन के बुनियादी इंतजाम तक न होने से स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता पखवाड़ा अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद ठाकुर को तत्काल सूचना भी दी गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक संबंधित स्थान की सफाई नहीं कराई गई थी। इससे विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
अब सवाल यह है कि जो विभाग स्कूलों में स्वच्छता का संदेश देने की जिम्मेदारी निभा रहा है, क्या वह पहले अपने कार्यालय परिसर को स्वच्छ रखने की पहल करेगा? या फिर DEO कार्यालय के बाहर पड़ा यह कचरा विभागीय दावों की वास्तविकता उजागर करता रहेगा।
(यदि संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
स्वच्छता अभियान के दावों पर सवाल, बदबू और मच्छरों से परेशान लोग; जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठी मांग
रिपोर्टर: कृष्णा मंडल
लोकेशन: दंतेवाड़ा (बचेली)
बचेली। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावे करने वाली बचेली नगरपालिका अपनी ही कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। एक ओर सड़क पर कचरा फेंकने वाले दुकानदारों और आम नागरिकों पर जुर्माना लगाकर कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नगरपालिका द्वारा तोड़ी गई नाली का मलबा पिछले 15 से 20 दिनों से मुख्य सड़क किनारे पड़ा हुआ है। इससे आसपास के लोगों को बदबू, मच्छरों और आवागमन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, पुरानी मार्केट स्थित पेट्रोल पंप के सामने नई नाली निर्माण के लिए पुरानी नाली तोड़ी गई थी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद निकला मलबा सड़क किनारे ही छोड़ दिया गया। कई दिन बीत जाने के बावजूद न तो निर्माण कार्य पूरा हुआ और न ही मलबा हटाया गया। बारिश के कारण नाली में पानी भरने से दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है।
गौरतलब है कि 17 जुलाई 2026 को नगरपालिका ने मुख्य मार्ग पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर सड़क पर कचरा फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की थी। उस दौरान शहर को स्वच्छ रखने और नियमों का कड़ाई से पालन कराने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। लेकिन वर्तमान स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आम लोगों द्वारा सड़क पर कचरा फेंकने पर तत्काल चालानी कार्रवाई की जाती है, तो नगरपालिका की इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उनका सवाल है कि क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं, या सरकारी विभागों पर भी समान रूप से लागू होते हैं?
अब शहरवासियों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि स्वच्छता अभियान के नाम पर जनता पर सख्ती दिखाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की इस लापरवाही पर भी कोई कार्रवाई होती है या मामला केवल दावों और कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।
(यदि नगरपालिका या संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
ग्रामीणों का आरोप— "24 घंटे नहीं, 24 मिनट भी लगातार नहीं मिल रही बिजली"; पेयजल, पढ़ाई और खेती प्रभावित
रिपोर्टर: कृष्णा मंडल
लोकेशन: दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा। मौसम विभाग द्वारा जिले में भारी बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बीच ग्राम पंचायत भांसी के ग्रामीण लगातार बिजली संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से बिजली विभाग मेंटेनेंस और तकनीकी खराबी का हवाला देकर रोज कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बंद रख रहा है, जिससे पूरे गांव का जनजीवन प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, शहरों में जहां लगभग निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं भांसी में हालात ऐसे हैं कि कई बार 24 मिनट तक भी लगातार बिजली नहीं रहती। उनका कहना है कि विभाग के अधिकारी हर बार "छोटा फॉल्ट" या "लाइन में तकनीकी खराबी" बताकर एक घंटे में बिजली बहाल करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन बिजली चार से पांच घंटे बाद भी नहीं आती।
लगातार हो रही बिजली कटौती का असर गांव की पेयजल व्यवस्था, विद्यार्थियों की पढ़ाई, किसानों के कृषि कार्य और दैनिक जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। बारिश के मौसम में अंधेरा और बिजली बाधित रहने से ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने गांव-गांव तक सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन भांसी में बार-बार हो रही बिजली कटौती इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। उनका सवाल है कि क्या विकास केवल शहरों तक सीमित है, जबकि गांवों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है?
ग्रामीणों ने बिजली विभाग और जिला प्रशासन से नियमित एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
(समाचार ग्रामीणों के आरोपों पर आधारित है। बिजली विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
पुरानी रंजिश में वारदात को दिया अंजाम, हथियार और बाइक जब्त; आरोपी न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया
धमतरी। धमतरी पुलिस ने स्कूल बस चालक पर चाकू से हमला करने के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। कार्रवाई पुलिस अधीक्षक धमतरी के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं एसडीओपी कुरूद के मार्गदर्शन में थाना कुरूद पुलिस द्वारा की गई।
पुलिस के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 3:15 बजे ए.जे. इंग्लिश स्कूल, कुरूद की स्कूल बस बच्चों को उनके घर छोड़ने जा रही थी। इसी दौरान सुनीलम सिनेमा के पास सार्वजनिक शौचालय के सामने मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने बस को रोक लिया। पुरानी रंजिश को लेकर दोनों ने बस चालक से विवाद किया, अश्लील गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी देते हुए धारदार हथियार से हमला कर चालक को घायल कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही थाना कुरूद में अपराध क्रमांक 228/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एवं आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण, साक्ष्य संकलित करने और गवाहों के बयान के आधार पर मुख्य आरोपी रोहन साहू (21 वर्ष), पिता सुरेन्द्र साहू, निवासी मोंगरा, थाना कुरूद, हाल पता अमृत विहार कॉलोनी, कुरूद को गिरफ्तार कर लिया। मामले में शामिल एक विधि से संघर्षरत बालक को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर किशोर न्याय अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई।
पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त स्प्लेंडर मोटरसाइकिल और धारदार हथियार भी बरामद कर जब्त कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
धमतरी पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में रहकर करें। हिंसा या कानून हाथ में लेने वालों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
