
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
न्यू आजाद गणेशोत्सव समिति का 42वां आयोजन देगा पर्यावरण और पक्षी संरक्षण का संदेश
भिलाई / शौर्यपथ / न्यू आजाद गणेशोत्सव समिति, सेक्टर-2 भिलाई द्वारा गणेशोत्सव का 42वां वर्ष इस बार भव्यता, श्रद्धा और सामाजिक सरोकार के साथ मनाया जा रहा है। समिति की ओर से भगवान श्री गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापना के साथ पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तारापीठ स्थित मनोकामना मंदिर की तर्ज पर आकर्षक पंडाल और झांकी तैयार की जा रही है।
आयोजन की जानकारी देने आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद जे. श्रीनिवास राव ने बताया कि इस वर्ष झांकी को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और पक्षी संरक्षण की थीम पर तैयार किया जा रहा है। झांकी के माध्यम से लोगों को पेड़-पौधों, हरियाली और प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ पक्षियों का संरक्षण भी बेहद जरूरी है। गणेशोत्सव जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के माध्यम से यदि समाज को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया जाए तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी उद्देश्य से समिति ने प्रकृति रक्षा, वृक्षारोपण और पक्षी संरक्षण को इस वर्ष की झांकी का मुख्य विषय बनाया है।
श्री राव ने कहा कि समिति का प्रयास है कि श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी लेकर लौटें। उन्होंने भिलाईवासियों और श्रद्धालुओं से सेक्टर-2 स्थित गणेश पंडाल में पहुंचकर दर्शन करने तथा पर्यावरण संरक्षण के संकल्प में सहभागी बनने की अपील की।
निर्दलीय प्रत्याशियों का आरोप—एनओसी जमा होने के बावजूद नामांकन रद्द किया गया, निष्पक्ष जांच की मांग
सदस्यों का सवाल—पिछले कार्यकाल का लेखा-जोखा पूरा हुए बिना नए चुनाव की घोषणा क्यों?
बचेली/किरंदुल, दंतेवाड़ा। बैलाडीला ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन (बीटीओए) के वार्षिक चुनाव 2026-27 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त किए जाने के बाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। प्रभावित प्रत्याशियों का आरोप है कि नामांकन के साथ जमा किए गए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) को कथित रूप से नजरअंदाज अथवा छिपाकर उनके नामांकन निरस्त किए गए।
मामला केवल नामांकन निरस्तीकरण तक सीमित नहीं है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान बीटीओए कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे बंद होने तथा निगरानी फुटेज या संबंधित दस्तावेजों से कथित छेड़छाड़ के आरोप भी सामने आए हैं। दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों ने अनुविभागीय अधिकारी को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके अलावा तहसीलदार और फम्र्स एंड सोसायटीज विभाग से भी जांच की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सिर्फ दो नामांकन पर सवाल
सदस्यों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि यदि नामांकन नियमों के तहत निरस्त किए गए हैं तो इसकी पूरी प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही? खासतौर पर यह सवाल उठ रहा है कि सिर्फ दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन ही क्यों निरस्त किए गए?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि उनके द्वारा एनओसी सहित आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे, तो उनकी जांच किस आधार पर की गई और नामांकन निरस्त करने का स्पष्ट कारण क्या था, इसे सामने लाया जाना चाहिए।
लेखा-जोखा पूरा हुए बिना चुनाव की घोषणा?
वहीं, संस्था के कुछ सदस्यों ने 2025-26 के कार्यकाल से जुड़े लेखा-जोखा और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पिछले कार्यकाल का हिसाब-किताब और संस्था से जुड़ी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी किए बिना 2026-27 के चुनाव की घोषणा कैसे कर दी गई?
सदस्यों का तर्क है कि नए चुनाव से पहले पिछले कार्यकाल की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि संस्था के सदस्यों के बीच पारदर्शिता बनी रहे।
सीसीटीवी जांच की मांग
सीसीटीवी को लेकर सामने आए आरोपों ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कैमरे बंद किए गए या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई है, तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक है। इसके लिए सीसीटीवी रिकॉर्ड, डीवीआर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।
पहले जांच या पहले मतदान?
अब पूरा विवाद इस सवाल पर केंद्रित हो गया है कि पहले शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी या विवादों के बीच ही मतदान कराया जाएगा?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोपों और कथित अनियमितताओं की जांच किए बिना चुनाव करा दिया गया, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल बने रहेंगे। वहीं, जल्दबाजी में चुनाव कराने से पिछले कार्यकाल से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
दो निर्दलीय प्रत्याशियों की शिकायत के बाद अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग की जांच तथा निर्णय पर टिकी हैं। यदि जांच होती है तो नामांकन निरस्तीकरण, एनओसी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अन्य दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय दल ने देखा लक्ष्मण मंदिर, बौद्ध विहार और प्राचीन स्थापत्य
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की पहल से सिरपुर को वैश्विक अकादमिक और पर्यटन संवाद से जोडऩे की कोशिश
रायपुर / शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने महत्वपूर्ण पहल की है। जापान के मत्सुयामा स्थित एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के लिए सिरपुर में विशेष विरासत भ्रमण आयोजित किया गया। एनआईटी रायपुर के आतिथ्य में 12 से 14 सितंबर तक छत्तीसगढ़ आए जापानी प्रतिनिधिमंडल ने 14 सितंबर को सिरपुर पहुंचकर प्रदेश की प्राचीन विरासत को करीब से जाना और इसके ऐतिहासिक वैभव से परिचित हुए।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष भ्रमण व्यवस्था के साथ स्थानीय विशेषज्ञ गाइड की सेवाएं उपलब्ध कराईं। गाइड ने जापानी विद्यार्थियों और शोधार्थियों को सिरपुर के इतिहास, स्थापत्य, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक-सांस्कृतिक विविधता की जानकारी दी। जापानी मेहमानों की खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष भोजन एवं आतिथ्य की व्यवस्था भी की गई।
लक्ष्मण मंदिर ने खींचा विशेष ध्यान
प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण का प्रमुख आकर्षण लक्ष्मण मंदिर रहा। लगभग सातवीं शताब्दी से संबद्ध यह मंदिर भारत के प्राचीन ईंट निर्मित मंदिरों की उत्कृष्ट परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। मंदिर की स्थापत्य संरचना, बारीक अलंकरण और ईंटों पर की गई कलात्मक कारीगरी ने प्रतिनिधिमंडल को विशेष रूप से प्रभावित किया। सदस्यों ने मंदिर के गर्भगृह, अंतराल और मंडप सहित विभिन्न स्थापत्य विशेषताओं का अवलोकन किया और इसके ऐतिहासिक संदर्भों की जानकारी ली।
बौद्ध विरासत से भी हुए परिचित
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने आनंद प्रभु कुटी विहार का भ्रमण किया। केंद्रीय प्रांगण के चारों ओर बने कक्षों और कलात्मक स्थापत्य वाले इस परिसर ने जापानी विद्यार्थियों की विशेष रुचि जगाई। यहां बुद्ध और पद्मपाणि अवलोकितेश्वर से संबंधित कलात्मक अवशेषों के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल ने सिरपुर की बौद्ध विरासत को समझा।
स्वास्तिक विहार में प्रतिनिधिमंडल ने इसकी विशिष्ट वास्तु योजना और बौद्धकालीन अवशेषों का अवलोकन किया। वहीं तीवरदेव महाविहार में बौद्ध और हिंदू कला परंपराओं के अद्भुत समन्वय ने सदस्यों को प्रभावित किया। यहां बुद्ध प्रतिमाओं के साथ गंगा-यमुना, गजलक्ष्मी और अन्य अलंकरणात्मक शिल्प भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं।
इतिहास, धर्म और स्थापत्य का संगम है सिरपुर
महानदी के तट पर स्थित सिरपुर प्राचीनकाल में 'श्रीपुरÓ के नाम से जाना जाता था और दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा। पुरातात्विक उत्खननों से यहां बौद्ध विहारों, हिंदू मंदिरों, जैन अवशेषों तथा अन्य प्राचीन संरचनाओं का विशाल संसार सामने आया है।
सिरपुर में अब तक मिले पुरातात्विक अवशेष यह प्रमाणित करते हैं कि यह क्षेत्र कभी धार्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा। प्रतिनिधिमंडल ने यहां प्राचीन ईंट निर्माण, मूर्तिकला, विहारों की संरचना और मंदिर स्थापत्य का बारीकी से अवलोकन किया।
पर्यटन के साथ अकादमिक संवाद को बढ़ावा
एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर दिलीप सिंह सिसोदिया ने जापानी प्रतिनिधिमंडल के सिरपुर भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा की गई व्यवस्थाओं और सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के विरासत भ्रमण केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक, शैक्षणिक और अकादमिक संवाद को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।
जापानी प्रतिनिधिमंडल के लिए सिरपुर का भ्रमण विशेष महत्व रखता है, क्योंकि जापान की सांस्कृतिक परंपरा में भी बौद्ध दर्शन और कला की गहरी छाप रही है। ऐसे में सिरपुर की बौद्ध विरासत को प्रत्यक्ष देखना उनके लिए अध्ययन और अनुभव का महत्वपूर्ण अवसर बना।
वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर सिरपुर को पहचान दिलाने की पहल
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का यह प्रयास सिरपुर को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन, शोध और सांस्कृतिक संवाद के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सिरपुर में इतिहास, धर्म, कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की ऐसी समृद्ध कहानी मौजूद है, जो दुनिया भर के शोधार्थियों, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों को आकर्षित कर सकती है।
एहिमे यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल का यह भ्रमण छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत और जापान की अकादमिक दुनिया के बीच एक नए सांस्कृतिक सेतु के रूप में सामने आया। इससे सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने और प्रदेश की विरासत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
जिला पंचायत कोंडागांव में मनीष पटेल की नियुक्ति पर गंभीर सवाल, बिना नए विज्ञापन के प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति का उल्लेख
जांच प्रतिवेदन में संविदा भर्ती नियम 2012 के पालन न होने की बात, जिम्मेदारों पर एफआईआर और विभागीय कार्रवाई अब भी लंबित
कोंडागांव / शौर्यपथ / जिला पंचायत कोंडागांव में पदस्थ मनीष कुमार पटेल की नियुक्ति को लेकर सामने आए जांच प्रतिवेदन ने भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में निर्धारित संविदा भर्ती नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने का उल्लेख होने के बावजूद अब तक एफआईआर अथवा ठोस विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, जिला पंचायत कोंडागांव ने इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर डाटा एंट्री ऑपरेटर के एक रिक्त पद के लिए विज्ञापन क्रमांक 1057, दिनांक 4 फरवरी 2014 जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया के बाद तैयार चयन सूची में सरित साहू का चयन हुआ, जबकि प्रतीक्षा सूची में मनीष कुमार पटेल प्रथम स्थान पर थे। चयन एवं प्रतीक्षा सूची के अनुमोदन की तारीख 23 अगस्त 2014 बताई गई है।
इसके बाद डीआरडीए योजना के अंतर्गत डाटा एंट्री ऑपरेटर का एक पद रिक्त हुआ। जांच में उल्लेख है कि वर्ष 2012 के विज्ञापन के आधार पर इस पद पर ममता देवांगन की नियुक्ति हुई थी। उन्होंने 30 अगस्त 2014 को पटवारी प्रशिक्षण के लिए त्यागपत्र दिया, जिसके बाद पद रिक्त हो गया।
बिना नए विज्ञापन के प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति
जांच में सामने आया महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि डीआरडीए योजना के रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए न तो नया विज्ञापन जारी किया गया और न ही विभागीय अनुमति ली गई, बल्कि इंदिरा आवास योजना की प्रतीक्षा सूची के आधार पर मनीष कुमार पटेल को नियुक्त कर दिया गया।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, उनकी नियुक्ति कार्यालयीन आदेश क्रमांक 8972/जि.पं. (डीआरडीए)/अधी./स्था./2014, दिनांक 16 सितंबर 2014 के माध्यम से की गई। अभिलेखों के परीक्षण के बाद जांच में यह भी उल्लेखित किया गया है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में संविदा भर्ती नियम 2012 के निर्धारित नियमों एवं निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
जांच के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
जांच प्रतिवेदन में भर्ती प्रक्रिया को लेकर अनियमितताओं का उल्लेख होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई? यदि जांच में नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका तय करने की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी?
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि बिना नए विज्ञापन और विभागीय अनुमति के एक अलग योजना के रिक्त पद पर दूसरी योजना की प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति किए जाने के लिए जिम्मेदारी किसकी थी और इस संबंध में अब तक कोई ठोस विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
प्रशासन के अगले कदम पर निगाह
जांच प्रतिवेदन उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई लंबित रहने से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करते हुए आगे क्या कदम उठाता है।
मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा, नियुक्ति प्रक्रिया की वैधानिकता तथा आवश्यक विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई पर प्रशासन का निर्णय अब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बाँधाटोला, विचारपुर और बीजा बैरागी पहुंचकर दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि, घायलों के उपचार की ली जानकारी
रायपुर / शौर्यपथ। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने महाराष्ट्र के भंडारा जिले में नागपुर-रायपुर राजमार्ग पर हुए सड़क हादसे में मृत कबीरधाम जिले के लोगों के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवारों को ढांढस बंधाया और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। साथ ही हादसे में घायल लोगों के परिजनों से मिलकर उनके उपचार की जानकारी ली।
उप मुख्यमंत्री ग्राम बाँधाटोला पहुंचे, जहां हादसे में दिवंगत गनेशिया पटेल (26) के निवास पर श्रद्धांजलि अर्पित की। हादसे में घायल मुकेश पटेल (5) और डाली पटेल (2) के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली। इसी गांव में उन्होंने घायल ललिता पटेल (26), तन्मय पटेल (2) और रामप्यारी पटेल (50) के परिजनों से मुलाकात कर उपचार की जानकारी ली और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
इसके बाद विचारपुर पहुंचकर उन्होंने एक ही परिवार के हादसे में दिवंगत मीनाक्षी वर्मा (25), सरिता वर्मा (25) और ग्रीशा वर्मा (2) के निवास पर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा परिजनों को ढांढस बंधाया।
उप मुख्यमंत्री ने पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के बीजा बैरागी पहुंचकर हादसे में दिवंगत कुमारी बाई पटेल (40) के परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की। वहीं लोहारा के बाँधाटोला में सूरत में एक बड़ी इमारत से गिरने से दिवंगत मायाराम पटेल के निवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
शर्मा ने कहा कि अपनों को खोने का दुख अत्यंत पीड़ादायक होता है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
गोल बाजार में विराजे विघ्नहर्ता के किए दर्शन-पूजन, प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की
रायपुर / शौर्यपथ / गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर का ऐतिहासिक गोल बाजार आज गणपति बप्पा की भक्ति और उत्सव के उल्लास से सराबोर रहा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज रात्रि गोल बाजार पहुंचे और यहां श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति द्वारा विराजित विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान गणेश से छत्तीसगढ़ के प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने गोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर के समीप गणेशोत्सव पंडाल में विराजित भगवान श्री गणेश को मुकुट पहनाया और तिलक लगाकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश की आरती उतारी और विघ्नविनायक से प्रदेश की प्रगति, समृद्धि तथा प्रदेशवासियों के मंगलमय जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं। गणेशोत्सव हमारी आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व होने के साथ समाज को एक सूत्र में जोडऩे वाली हमारी समृद्ध परंपरा का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गणपति बप्पा की कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़े तथा प्रदेश के हर घर-परिवार में सुख और खुशहाली का वास हो, यही उनकी कामना है।
मुख्यमंत्री ने गोल बाजार में 117 वर्षों से निरंतर चली आ रही गणेशोत्सव की गौरवशाली परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी आस्था और सामाजिक सहभागिता के साथ किसी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखना अपने आप में विशेष है। ऐसी परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जोड़ती हैं।
उल्लेखनीय है कि राजधानी के ऐतिहासिक गोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर के समीप श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति द्वारा पिछले 117 वर्षों से गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यहां विराजित होने वाली गणेश प्रतिमा अपनी भव्यता और आकर्षक स्वरूप के कारण गोल बाजार ही नहीं, पूरे रायपुर में श्रद्धालुओं की आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती है। गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय के गोल बाजार पहुंचने पर गणेशोत्सव समिति के पदाधिकारियों, स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की मंगलध्वनि और गणपति बप्पा के जयकारों के बीच मुख्यमंत्री का फूल-मालाओं से अभिनंदन किया गया। समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें गजमाला पहनाकर स्वागत किया। पूरे परिसर में गणेशोत्सव का उल्लास और भक्तिमय वातावरण दिखाई दिया।
भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना के पश्चात मुख्यमंत्री श्री साय गोल बाजार में ही स्थित 150 वर्ष से अधिक पुराने हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने यहां भगवान हनुमान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने राजधानी की इस प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
इस अवसर पर रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, श्री श्रीचंद सुंदरानी, श्री केदार गुप्ता, श्री छगन मूंदड़ा, श्री अमरजीत छाबड़ा सहित गणेशोत्सव समिति के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, व्यापारीगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
लक्ष्मीपति राजू की ओबीसी दावेदारी पर उठी नजरें, केंद्रीय सूची और छत्तीसगढ़ की आरक्षण व्यवस्था के बीच पात्रता का पेच
शौर्यपथ राजनितिक विश्लेषण
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई नगर निगम के आगामी महापौर चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। महापौर पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद कांग्रेस के भीतर संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। इन्हीं नामों में सेक्टर-7 के पार्षद लक्ष्मीपति राजू का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। हालांकि उनकी दावेदारी के साथ ही अब एक ऐसा सवाल भी चर्चा में है, जिसका संबंध सीधे जाति प्रमाण-पत्र और ओबीसी आरक्षण की पात्रता से है।
लक्ष्मीपति राजू आंध्र प्रदेश मूल के बताए जाते हैं और उनकी जाति किंतल कलिंगा बताई जा रही है। उनका कहना है कि उनके पास सक्षम एसडीएम द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र मौजूद है और वे महापौर पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे।
यहीं से चुनावी गणित का महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है—क्या राज्य के सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र अपने आप नगर निगम की ओबीसी आरक्षित सीट पर चुनाव लडऩे की पात्रता सुनिश्चित करता है, या उम्मीदवार की जाति का छत्तीसगढ़ की लागू ओबीसी आरक्षण व्यवस्था में होना भी जांच का विषय बनेगा?
केंद्रीय ओबीसी सूची और राज्य की सूची—दोनों का महत्व अलग
आरक्षण व्यवस्था में केंद्रीय और राज्य स्तर की सूचियां अलग-अलग प्रयोजनों के लिए लागू होती हैं। किसी जाति का केंद्रीय ओबीसी सूची में होना अपने आप यह नहीं बताता कि संबंधित व्यक्ति को छत्तीसगढ़ की राज्य स्तरीय आरक्षण व्यवस्था में भी वही लाभ मिलेगा।
27 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में सुमन कुमारी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने राज्य-विशिष्ट आरक्षण के सिद्धांत पर विस्तार से विचार किया। न्यायालय ने कहा कि आरक्षण लाभ और सामाजिक स्थिति का प्रमाण-पत्र संबंधित राज्य की व्यवस्था से जुड़ा होता है तथा दूसरे राज्य में प्रवास मात्र से आरक्षण का अधिकार स्वत: प्राप्त नहीं होता। मामले में यह भी देखा गया कि संबंधित भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ के सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी जाति प्रमाण-पत्र की आवश्यकता थी। ?
ढ्ढठ्ठस्रद्बड्डठ्ठ ्यड्डठ्ठशशठ्ठ +1
लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फैसला शिक्षा विभाग में नियुक्ति से जुड़े मामले में आया था। इसलिए इसे भिलाई नगर निगम महापौर चुनाव पर सीधे लागू मान लेना उचित नहीं होगा। नगर निगम चुनाव के लिए लागू निर्वाचन कानून, आरक्षण संबंधी प्रावधान, उम्मीदवार की सामाजिक स्थिति और सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र—इन सभी की जांच के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
लक्ष्मीपति राजू की दावेदारी मजबूत, लेकिन सवाल का जवाब जरूरी
राजनीतिक रूप से देखें तो लक्ष्मीपति राजू भिलाई की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चेहरा हैं। वे सेक्टर-7 से लगातार चार बार पार्षद रहे हैं। छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति में आए राजू ने अपने क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई है। वे दो बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं।
जनता के बीच सक्रियता और संगठन में प्रभाव के चलते महापौर पद के लिए उनका नाम मजबूत दावेदारों में लिया जाना स्वाभाविक है। लेकिन आरक्षित सीट पर दावेदारी केवल राजनीतिक स्वीकार्यता से नहीं, बल्कि वैधानिक पात्रता से भी तय होती है।
इसीलिए जाति प्रमाण-पत्र को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट समाधान चुनावी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगा।
सवाल प्रमाण-पत्र के अस्तित्व से आगे का है
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण अंतर यही है कि "जाति प्रमाण-पत्र है या नहीं" और "उस प्रमाण-पत्र के आधार पर संबंधित आरक्षित पद के लिए उम्मीदवार कानूनी रूप से पात्र है या नहीं"—ये दोनों अलग-अलग प्रश्न हैं।
यदि लक्ष्मीपति राजू के पास छत्तीसगढ़ के सक्षम अधिकारी द्वारा जारी वैध प्रमाण-पत्र है, तो उस प्रमाण-पत्र की वैधानिकता, उसमें दर्ज जाति तथा प्रमाण-पत्र जारी करने के आधार की जांच संबंधित प्रक्रिया के अनुसार होगी।
वहीं, यदि किसी जाति की केंद्रीय सूची और राज्य की लागू आरक्षण सूची में स्थिति अलग है, तो उसका प्रभाव भी चुनावी पात्रता की जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है।
बाहरी राज्य से आए उम्मीदवारों की पात्रता पर भी उठ सकता है सवाल
यह मुद्दा केवल लक्ष्मीपति राजू तक सीमित नहीं है। भिलाई-दुर्ग की राजनीति में दूसरे राज्यों से आकर लंबे समय से रहने वाले कई लोग सक्रिय राजनीति में हैं। ऐसे में आरक्षित सीटों पर चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों की सामाजिक स्थिति और आरक्षण पात्रता भविष्य में भी राजनीतिक बहस का विषय बन सकती है।
सिर्फ यह तथ्य कि कोई व्यक्ति लंबे समय से छत्तीसगढ़ में रह रहा है, अपने आप आरक्षित वर्ग की चुनावी पात्रता का अंतिम आधार नहीं माना जा सकता। लागू कानून, संबंधित आरक्षण सूची, सामाजिक स्थिति प्रमाण-पत्र और निर्वाचन नियमों का परीक्षण ही निर्णायक होगा।
अधिवक्ता की नजर में भी नियम-कानून ही आधार
इस विषय पर वरिष्ठ अधिवक्ता रविशंकर सिंह का कहना है कि आरक्षण से संबंधित मामलों में नियम और कानून का पालन ही मूल आधार है। उनके अनुसार केवल प्रमाण-पत्र होना ही पूरी प्रक्रिया का अंतिम आधार नहीं माना जा सकता। प्रमाण-पत्र किस आधार पर जारी हुआ, उसमें कौन-सी जाति दर्ज है और संबंधित राज्य की आरक्षण व्यवस्था में उस जाति की स्थिति क्या है—इन पहलुओं को देखना आवश्यक होगा।
कांग्रेस के सामने भी आसान नहीं होगा फैसला
महापौर पद के लिए कांग्रेस में कई नामों की चर्चा है और लक्ष्मीपति राजू उनमें प्रमुख दावेदार बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी ने अभी किसी नाम पर अंतिम फैसला नहीं किया है।
ऐसे में जाति प्रमाण-पत्र और ओबीसी आरक्षण से जुड़ा सवाल पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रत्याशी चयन से पहले यदि संबंधित उम्मीदवार की चुनावी पात्रता पूरी तरह स्पष्ट हो जाए तो भविष्य में किसी कानूनी विवाद की संभावना भी कम की जा सकती है।
फिलहाल स्थिति दो अलग-अलग दावों के बीच खड़ी दिखाई देती है—एक ओर लक्ष्मीपति राजू के पास एसडीएम द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र होने का उनका दावा है, दूसरी ओर उनकी जाति की राज्य एवं केंद्रीय आरक्षण व्यवस्था में स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अब निगाह चुनावी प्रक्रिया पर
अंतत: यह तय करना कि लक्ष्मीपति राजू भिलाई नगर निगम की ओबीसी आरक्षित महापौर सीट से चुनाव लडऩे के लिए पात्र हैं या नहीं, सक्षम निर्वाचन प्राधिकारी और लागू कानून-नियमों के आधार पर ही संभव होगा।
इसलिए फिलहाल इसे किसी व्यक्ति की पात्रता पर अंतिम फैसला नहीं, बल्कि चुनाव से पहले उठे एक महत्वपूर्ण वैधानिक सवाल के रूप में देखा जाना चाहिए।
भिलाई की महापौर की कुर्सी के लिए सियासी दौड़ अभी शुरू ही हुई है, लेकिन लक्ष्मीपति राजू की दावेदारी ने एक अहम प्रश्न जरूर सामने ला दिया है—
"क्या राज्य के सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण-पत्र ही पर्याप्त है, या ओबीसी आरक्षित महापौर पद की पात्रता के लिए संबंधित जाति का छत्तीसगढ़ की लागू आरक्षण व्यवस्था में होना भी आवश्यक है?"
*इस सवाल का आधिकारिक और कानूनी जवाब सामने आने के बाद ही भिलाई महापौर चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।*
तीजा पर रिकेश सेन की पहल से उठे सवाल
दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के लोकपर्व तीजा के अवसर पर वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने 14 सितंबर को तीजा पर मायके गईं बहनों के भाइयों के लिए नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था कर एक अलग तरह की जनसेवा की पहल की है। इस व्यवस्था में केवल भोजन उपलब्ध कराने की बात नहीं, बल्कि तीजा की पारिवारिक परंपरा, भाई-बहन के रिश्ते और सामाजिक सरोकार को जोडऩे का प्रयास भी दिखाई देता है।
दिन के भोजन की व्यवस्था श्रीराम रसोई, नेहरू नगर, विधायक कार्यालय के सामने तथा राम रसोई, हनुमान मंदिर के पास सुपेला में की गई। वहीं रात्रि भोजन के लिए वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न रेस्टोरेंट में नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई। इसके लिए श्वेतांबर जैन मंदिर के सामने, जीरो रोड, शांतिनगर स्थित विधायक रिकेश सेन के कार्यालय से कूपन वितरित किए गए। इच्छुक भाई कूपन प्राप्त कर निर्धारित रेस्टोरेंट में कूपन दिखाकर रात्रि भोजन का लाभ ले सकते हैं।
रिकेश सेन की इस पहल ने जहां क्षेत्र में चर्चा बटोरी है, वहीं अब इसका राजनीतिक असर पड़ोसी विधानसभा क्षेत्रों तक दिखाई देने लगा है। सवाल यह नहीं कि एक विधायक ने भोजन की व्यवस्था क्यों की, बल्कि सवाल यह भी है कि जब एक जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर ऐसी पहल कर सकता है तो दूसरे जनप्रतिनिधियों से भी जनता इसी तरह की संवेदनशीलता की अपेक्षा क्यों न करे?
अब नजर दुर्ग विधानसभा पर
दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं विधायक गजेंद्र यादव के सामने भी अब एक स्वाभाविक राजनीतिक सवाल खड़ा हो गया है। दुर्ग शहर में राम रसोई जैसी व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं। ऐसे में क्या तीजा पर्व की तर्ज पर अथवा आगामी 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में भी जरूरतमंदों और आम नागरिकों के लिए नि:शुल्क भोजन की कोई विशेष व्यवस्था की जाएगी?
यह सवाल किसी विधायक की पहल को कमतर आंकने के लिए नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के बीच सेवा की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के रूप में भी देखा जा सकता है।
दुर्ग ग्रामीण और रिसाली पर भी टिकी नजर
इसी तरह दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश सरकार में दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री ललित चंद्राकर की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। खासकर इसलिए कि आने वाले समय में रिसाली नगर निगम चुनाव होने हैं और रिसाली क्षेत्र दुर्ग ग्रामीण विधानसभा का महत्वपूर्ण शहरी इलाका है।
ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र, विशेषकर रिसाली में भी किसी बड़े स्तर पर नि:शुल्क भोजन अथवा जनसेवा की पहल सामने आएगी?
रिकेश सेन की पहल ने बढ़ाई अपेक्षाएं
रिकेश सेन पिछले कुछ समय से अपने विधानसभा क्षेत्र में ऐसी पहलों को लेकर चर्चा में रहे हैं, जिन्हें उनके समर्थक जनसेवा का नया मॉडल बताते हैं। यही कारण है कि उनकी ताजा भोजन व्यवस्था को भी केवल एक दिन के आयोजन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे जनप्रतिनिधि की व्यक्तिगत सक्रियता और जनता से सीधे जुडऩे की राजनीति के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों की ओर से विधायक द्वारा किए जा रहे खर्च और इन व्यवस्थाओं के आर्थिक स्रोत को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इन सवालों का उत्तर संबंधित आयोजकों द्वारा दिया जाना ही उचित होगा। बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या संस्था पर आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
सुविधा के साथ जवाबदेही भी जरूरी
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि द्वारा जनता को सुविधा देना निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है। लेकिन इसी के साथ एक दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है—क्या ऐसी सुविधाएं और जनसेवा की पहल सभी क्षेत्रों में जनता तक पहुंच रही हैं?
यदि एक विधायक अपने स्तर पर पर्व-त्योहार को जनसेवा से जोड़कर नई परंपरा शुरू करता है, तो दूसरे विधायकों के सामने भी जनता की अपेक्षाएं बढऩा स्वाभाविक है। यही लोकतांत्रिक जवाबदेही है।
अब निगाहें 17 सितंबर पर रहेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस और सेवा गतिविधियों के बीच क्या दुर्ग विधानसभा में मंत्री गजेंद्र यादव तथा दुर्ग ग्रामीण विधानसभा में ललित चंद्राकर भी इसी तरह नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था करेंगे? क्या वहां भी कूपन बांटे जाएंगे? या फिर इस मुद्दे पर मौन ही कायम रहेगा?
राजनीति में चर्चाओं का दौर लगातार चलता रहता है, लेकिन अंतत: जनता परिणाम देखती है। एक विधायक ने पहल करके सुविधा उपलब्ध कराई है, अब दूसरे जनप्रतिनिधियों की बारी है कि वे इस चुनौती को किस रूप में लेते हैं—सेवा की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, राजनीतिक संदेश या फिर मौन।
आगामी रिसाली नगर निगम चुनाव की पृष्ठभूमि में यह सवाल और भी दिलचस्प हो गया है कि जनसेवा की ऐसी पहल चुनावी राजनीति से कितनी अलग और कितनी जुड़ी हुई है। इसका जवाब आने वाला समय और जनता दोनों देंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने परिवार के साथ की पूजा-अर्चना
प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना
रायपुर / शौर्यपथ / गणेश चतुर्थी के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से स्थापना की गई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने परिवारजनों के साथ गणपति की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं। गणेशोत्सव हमारी आस्था के साथ-साथ प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता का पर्व भी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार हमारी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ समाज में सामूहिकता और लोकमंगल की भावना को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के परिवारजन, सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी, प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह सहित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
रायपुर, / शौर्यपथ / छत्तीसगढ के बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड स्थित तारापुर गांव की महिलाओं ने अपनी लगन और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। 'मिट्टी के गणेश मूर्ति निर्माण सिद्धि स्व सहायता समूह' की ग्रामीण महिलाओं ने इस गणेश चतुर्थी पर पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) प्रतिमाएं बनाकर महज कुछ हफ्तों में 1.80 लाख रुपये की बंपर कमाई की है।
शांति नागवंशी, दसो भारती और रोमा नागवंशी के नेतृत्व में समूह की महिलाओं ने शुद्ध मिट्टी से बिना किसी हानिकारक केमिकल और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किए 52 मनमोहक गणेश प्रतिमाएं तैयार की थीं। बाजार में आते ही इन पर्यावरण-हितैषी मूर्तियों की भारी मांग देखने को मिली और पूरा स्टॉक हाथों-हाथ बिक गया।
समूह की सदस्य शांति नागवंशी ने खुशी जताते हुए कहती हैं कि अपनी मेहनत से गढ़ी मूर्तियों की पूजा होते देखना और स्वयं की कमाई हासिल करना उनके लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा है। उन्होंने बताया कि इस राशि का उपयोग वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने और बच्चों की शिक्षा में करेंगे।
सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुई तारापुर की इन महिलाओं की यह पहल न केवल पूरे जिले में सराही जा रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने की प्रेरणा दे रही है l
13.70 करोड़ से अधिक युवा और 10.64 करोड़ महिलाएं अभियान से जुड़ीं
1.67 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र बने अभियान का हिस्सा, 31.40 लाख जागरूकता गतिविधियां आयोजित
पिछले दो वर्षों में 755 से अधिक नए नशामुक्ति केंद्र स्थापित
नई दिल्ली / एजेंसी / केंद्र सरकार के ‘नशामुक्त भारत अभियान’ ने देशभर में व्यापक जनभागीदारी के साथ महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। अभियान के तहत अब तक 34.54 करोड़ से अधिक नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई जा चुकी है। इनमें 13.70 करोड़ से अधिक युवा और 10.64 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने बताया कि नशे के दुरुपयोग की पहचान, परामर्श और देखभाल के लिए 1.67 लाख से अधिक स्वयंसेवकों, सामुदायिक नेताओं और कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए 1.67 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र भी अभियान से जुड़े हैं।
देशभर में अब तक 31.40 लाख से अधिक जागरूकता एवं संपर्क गतिविधियां आयोजित की गई हैं। उपचार सुविधाओं का विस्तार करते हुए पिछले दो वर्षों में 755 से अधिक नए नशामुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें जिला नशामुक्ति केंद्र, नशा उपचार केंद्र और जेलों में संचालित नशामुक्ति केंद्र शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि नशामुक्ति, जागरूकता, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, गैर सरकारी संगठनों और सरकारी अस्पतालों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
10 करोड़ नागरिकों को सामूहिक संकल्प से जोड़ने का लक्ष्य
अभियान के तहत अब तक 34 लाख से अधिक नशामुक्ति संकल्प लिए जा चुके हैं। मंत्रालय का लक्ष्य प्रत्यक्ष और ऑनलाइन सहभागिता के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक नागरिकों को मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय सामूहिक संकल्प से जोड़ना है। अभियान की छठी वर्षगांठ के अवसर पर इस माह के अंत तक राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
उपचार सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए मंत्रालय ने ‘नशामुक्त भारत 2.0’ मोबाइल अनुप्रयोग भी शुरू किया है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने निकटतम नशामुक्ति केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि समुदायों को साथ जोड़कर नशामुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी को मजबूत करना भी है।
नई दिल्ली / एजेंसी / भारत और मर्कोसुर के बीच तरजीही व्यापार समझौते (PTA) के विस्तार के लिए वार्ता शुरू हो गई है। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता कर रहे उरुग्वे के विदेश मंत्री श्री मारियो लुबेटकिन ने वार्ता शुरू करने की घोषणा की।
दोनों पक्षों ने आपसी हित के नए क्षेत्रों को शामिल करते हुए मौजूदा समझौते का विस्तार करने पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य भारत और मर्कोसुर के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना तथा दोनों पक्षों के निजी क्षेत्रों के लिए व्यापार एवं निवेश के नए अवसर बढ़ाना है।
भारत और मर्कोसुर प्रस्तावित विस्तारित समझौते के दायरे और संरचना को तय करने वाली संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर की संध्या हर घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने का आह्वान
सेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंदों की सहायता के कार्यों से जुड़ने की प्रदेशवासियों से अपील
‘आशीर्वाद का दीया’ बने सेवा, जनकल्याण और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ से पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ जुड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सेवा भावना और जनभागीदारी की परंपरा इस अभियान को व्यापक जनसेवा के उत्सव में बदल सकती है।
प्रदेशवासियों के नाम जारी अपनी अपील में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किए हैं। प्रधानमंत्री के जन्मदिवस 17 सितंबर के अवसर पर देशभर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सेवा छत्तीसगढ़ की संस्कृति और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा है। प्रत्येक नागरिक अपनी सहभागिता से इस अभियान को जनसेवा और जनभागीदारी का व्यापक उत्सव बनाए। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने गांव, शहर और आसपास स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंदों की सहायता तथा जनसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने और अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण और विकास की योजनाओं से लाखों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पक्का आवास, स्वच्छ पेयजल, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। विकास की इन उपलब्धियों के केंद्र में आम नागरिकों के पूरे होते सपने, बढ़ता आत्मविश्वास और जीवन में आती खुशहाली है।
17 सितंबर की संध्या जलाएं ‘आशीर्वाद का दीया’
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर प्रदेशवासियों से विशेष अपील करते हुए कहा कि 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रत्येक परिवार अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाए और अपने आसपास के लाभार्थी परिवारों को भी इस पहल से जोड़े।
उन्होंने कहा कि यह दीया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ एवं सुदीर्घ जीवन के लिए छत्तीसगढ़वासियों की शुभकामनाओं के साथ-साथ सेवा, जनकल्याण और विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प का प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के दौरान समाज का प्रत्येक वर्ग अपनी क्षमता के अनुसार सेवा का कोई न कोई कार्य करे। जब सेवा का भाव जनभागीदारी से जुड़ता है, तो वह समाज में व्यापक और स्थायी परिवर्तन का माध्यम बनता है।
विकसित भारत के संकल्प में विकसित छत्तीसगढ़ की सशक्त भागीदारी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ अपनी सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संकल्पित है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब गांव विकसित हों, शहर आगे बढ़ें और प्रत्येक परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े। सेवा संकल्प अभियान इस सामूहिक संकल्प को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने प्रदेशवासियों का आह्वान करते हुए कहा, “आइए, हम सभी मिलकर सेवा संकल्प अभियान को छत्तीसगढ़ में जनभागीदारी का उत्सव बनाएं। सेवा और जनकल्याण के कार्यों से जुड़कर विकसित भारत के निर्माण में विकसित छत्तीसगढ़ की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करें।”
जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की सौजन्य मुलाकात
मुख्यमंत्री ने जापानी विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद, छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत से कराया परिचित
एनआईटी रायपुर के स्टार्टअप और तकनीकी नवाचारों में जापानी विद्यार्थियों ने दिखाई विशेष रुचि
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी से आए 17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। भारत-जापान इंटर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर छत्तीसगढ़ पहुंचे विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री ने आत्मीय संवाद किया। इस दौरान भारत-जापान के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों, बौद्ध विरासत, शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं के बीच बढ़ते संवाद पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री साय ने जापानी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान की मित्रता की जड़ें दोनों देशों की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत में गहराई से जुड़ी हैं। समय के साथ यह संबंध संस्कृति और आध्यात्मिकता से आगे बढ़कर शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक सहयोग तक विस्तृत हुआ है। उन्होंने कहा कि युवाओं और विद्यार्थियों के बीच ऐसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान से दोनों देशों के संबंध आने वाली पीढ़ियों में और मजबूत होंगे।
साझा बौद्ध विरासत भारत-जापान को जोड़ती है
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, मैत्री और मानव कल्याण के संदेश ने दुनिया को प्रभावित किया है। जापान की संस्कृति में भी बौद्ध दर्शन की गहरी छाप दिखाई देती है। यह साझा आध्यात्मिक विरासत भारत और जापान को विशिष्ट सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक विरासत की जानकारी देते हुए सिरपुर, मैनपाट और भोंगापाल जैसे स्थलों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी के तट पर स्थित सिरपुर प्राचीन सभ्यता, कला, स्थापत्य और बौद्ध विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सिरपुर को विश्वस्तरीय ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।
जापान की कार्यसंस्कृति और तकनीकी प्रगति से सीखने की जरूरत
मुख्यमंत्री साय ने अपनी जापान यात्रा के अनुभव साझा करते हुए वहां की अनुशासित कार्यसंस्कृति, तकनीकी प्रगति और परंपराओं के प्रति सम्मान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जापान ने आधुनिक विज्ञान और तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को जिस तरह सहेजकर रखा है, वह प्रेरणादायी है।
उन्होंने कहा कि भारत भी अपनी प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आधुनिक तकनीक, नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारत और जापान के युवाओं के बीच बढ़ता संवाद दोनों देशों के भविष्य के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है।
शिक्षा, अनुसंधान और स्टार्टअप में सहयोग की नई संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और तकनीक विकास के प्रमुख आधार हैं। भारत और जापान के शैक्षणिक संस्थानों के बीच बढ़ता सहयोग विद्यार्थियों को नई तकनीकों और शोध से जुड़ने के अवसर प्रदान कर सकता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एहिमे यूनिवर्सिटी और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों के बीच संवाद से भविष्य में संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी सहयोग, स्टार्टअप और इनोवेशन के नए अवसर विकसित होंगे। ऐसे कार्यक्रम संस्थागत संबंधों के साथ-साथ युवाओं के बीच मित्रता और आपसी समझ को भी मजबूत करते हैं।
छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आत्मीयता से प्रभावित हुए जापानी विद्यार्थी
जापानी विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा किए। उन्होंने रायपुर की संस्कृति, परंपराओं और लोगों के सहज एवं आत्मीय व्यवहार की सराहना की। विद्यार्थियों ने भारतीय खान-पान की भी प्रशंसा की।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि उन्हें गणेश उत्सव की परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व को करीब से जानने का अवसर मिला। जापानी छात्राओं ने उत्साहपूर्वक बताया कि उन्होंने मेहंदी लगवाई और भारतीय परिधानों की खरीदारी भी की। विद्यार्थियों ने कहा कि इस यात्रा से उन्हें भारत को पुस्तकों और कक्षाओं से आगे बढ़कर यहां के समाज, संस्कृति और जीवनशैली के माध्यम से समझने का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के अनुभवों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी सहजता, आत्मीयता और अतिथि सत्कार के लिए जाना जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रदेश की सुखद स्मृतियां साथ ले जाने और भविष्य में पुनः छत्तीसगढ़ आने के लिए आमंत्रित किया।
एनआईटी रायपुर के स्टार्टअप और नवाचारों ने खींचा ध्यान
छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल ने एनआईटी रायपुर के विभिन्न रिसर्च सेंटरों और इन्क्यूबेशन सेंटर का भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने स्टार्टअप गतिविधियों, अनुसंधान परियोजनाओं और विकसित की जा रही नई तकनीकों की जानकारी ली। विशेष रूप से आम लोगों की दैनिक समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप ने विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित किया। प्रतिनिधिमंडल ने इन नवाचारों की सराहना करते हुए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, अनुसंधान और नवाचार आधारित सहयोग की संभावनाओं में रुचि दिखाई।
भारत-जापान इंटर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत आया यह 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अपने प्रवास के दौरान शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहा है। प्रतिनिधिमंडल ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल सिरपुर का भी भ्रमण करेगा, जहां विद्यार्थी छत्तीसगढ़ की प्राचीन बौद्ध विरासत, स्थापत्य, कला और सांस्कृतिक इतिहास को करीब से जानेंगे।
मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसी यात्राएं नई पीढ़ी को एक-दूसरे की संस्कृति, उपलब्धियों और संभावनाओं से परिचित कराने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और जापान के युवाओं के बीच यह संवाद भविष्य में मित्रता, ज्ञान, नवाचार और साझी प्रगति के नए अध्याय लिखेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर दिलीप सिंह सिसोदिया, डॉ. समीर बाजपेयी, आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर सी.के. मोहन, उद्योग विभाग के अतिरिक्त संचालक संजय गजघाटे, उपसंचालक अमय त्रिपाठी, चिप्स के ज्वाइंट सीईओ अनुपम आशीष टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
