August 08, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

            शौर्यपथ लेख ( शरद पंसारी )/ कोरोना एक ऐसी महामारी बनकर दुनिया के सामने आयी जिसे सदियों तक याद रखा जायेगा . एक छोटे से शहर से जन्म कोरोना आज पूरी दुनिया पर राज कर रहा है . दुनिया में क्षेत्रफल की तुलना के हिसाब से सर्वाधिक जनसँख्या वाला देश भारत ही है . भारत में कहने को कोरोना का आगाज जनवरी माह के अंत में ही हो गया था किन्तु तब संख्या ऊँगली पर गिनी जा सकती थी . आज देश में कोरोना मरीज संक्रमितो की संख्या लाखो में है देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है और ऐसी हालत में अर्थव्यवस्था सुधारने  की जिम्मेदारी देश के वित्त मंत्री की होती है किन्तु जिस तरह प्याज के दाम बढ़ने पर वित्त मंत्री ने कह दिया था कि वो तो प्याज खाती ही नहीं है . मतलब वो अगर प्याज ना खाए तो क्या आम इंसान भी प्याज का सेवन छोड़ दे . तब क्या प्याज के दाम बढ़ने से रोकने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं रही . ऐसे ही ब्यान वर्तमान में वित्त मंत्री ने दे दिया कि कोरोना का प्रकोप ईश्वर की देन है मतलब सरकार अब कुछ नहीं कर सकती जब सरकार कुछ कर नहीं सकती तो फिर सत्ता में क्यों है . सत्ता भी त्याग दे इस्श्वर सब देख लेगा . तिरुमाला मंदिर के वे पुजारी जो सालो से भगवन की सेवा कर रहे है और कोरोना संक्रमित होने के बाद भी ईश्वर को दोष नहीं दिए फिर प्रभु राम की तथाकथित अनुयायी ये कैसे कह सकते है कि महामारी में उनका कोई दोष नहीं . फ़रवरी में देश के एक बड़े नेता ने सरकार से कहा था कि अगर जल्द ही कोई सार्थक कदम नहीं उठाया जाएगा तो परिणाम भयंकर होंगे किन्तु तब भी सत्ता में बैठे जिम्मेदार इस बात को मजाक में लिए और हल्लो ट्रम्प , सत्ता परिवर्तन का खेल चलता रहा फिर एक दिन अचानक बिना किसी तैयारी के बिना किसी राज्य सरकार को सूचित किया ये फैसला आ गया कि देश लॉक डाउन में जायेगा और जो जहां है वही रहेगा . तैयारी के नाम पर खूब ताली बजी थाली बजी ईश्वर को प्रसन्न किया गया किन्तु क्या हुआ भुखमरी बढ़ी , बेरोजगारी बढ़ी , अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी इन सबके बीच अपने गृह ग्राम जाते हुए हजारो मौत के आगोश में समा गए , इधर संक्रमण का विस्तार होता रहा उधर संक्रमण का कारण एक समुदाय विशेष को दिया जाने लगा जिस पर बाद में कोर्ट की फटकार भी मिली किन्तु इसके बाद भी माहौल कोरोना का नहीं बना राफेल का स्वगत हुआ , राम मंदिर की चर्चा हुई ,20 लाख  हजार करोड़ से अर्थव्यवस्था पत्री पर उतारने का प्रचार हुआ जब सब खत्म हो गया और स्थिति बिगड़ने लगी तो देश का मुख्य मुद्दा सुशांत का हत्यारा कौन पर टिक गया . सुशांत की आत्महत्या से सभी दुखी है किन्तु क्या सिर्फ सुशांत की मौत हुई क्या उन हजारो लोगो की मौत जो सफ़र करते हुई , जो कोरोना संक्रमण से हुई , जो भुखमरी से हुई , जो दंगे से हुई की कोई कीमत नहीं . क्या उनका परिवार नहीं , बेरोजगारी पर चर्चा , व्यापार पर चर्चा , स्वास्थ्य पर चर्चा से ज्यादा जरुरी लगा विकाश दुबे कैसे मरा उसका एनकाउन्टर कैसे हुई , कितना दुर्दांत था . वाह क्या बात चली किन्तु इन सब बातो में उनकी बात नहीं चली जो रोजगार हीन हो गए उनकी बात नहीं चली जो भुखमरी में जी रहे है उनकी बात नहीं चली जो कोरोना काल में ड्यूटी करते हुए मौत के आगोश में चले गए .
             २० लाख हजार करोड़ तो पता नहीं कहा गए किसे मिले और किसे मिलेंगे किन्तु ५ किलो चलावल महिना देकर वाह वही का खेल चलता रहा , पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाकर देशभक्ति का परिचय दिया जाने लगा , तरह तरह के फोटो खिंचवाकर देश को उल्लू बनाने का खेल चलता रहा बस नहीं चला तो स्वास्थ्य की सेवा को कैसे बेहतर करे , रोजगार के लिए क्या कदम उठाये , शिक्षा के लिए क्या करे , भुखमरी से कैसे छुटकारा पाए . माना ऐसी महामारी १०० साल बाद आयी और पूरी दुनिया इसकी चपेट में है किन्तु जिस तरह से भारत में कोरोना संक्रमण तेजी से फ़ैल रहा है और बेकाबू होते जा रहा है ऐसे समय में सरकार के वित्त मंत्री जिसके एक एक फैसले से देश की व्यवस्था उपर नीचे होती है एक सर्वोच्च पद पर बैठकर इस तरह भगवान् को दोष देना कहा तक सही है क्या भगवान् अपनी औलाद को कभी तकलीफ दे सकता है जिन्दगी और मौत तो ईश्वर के हाँथ में है किन्तु बेहतर जिन्दगी देने का कार्य सुशासन का कार्य तो सत्ता में बैठे लोगो को ही करना है . सवाल तो उनसे ही पूछे जायेंगे जिनके पास सत्ता की शक्ति हो . जिनके पास फैसले लेने की ताकत नहीं हो उनसे कैसे सवाल करे . क्या देश में बेरोजगारी , महंगाई , स्वास्थ्य , शिक्षा , भुखमरी से निजात के लिए कोई कदम उठाएगी या अब सब भगवान् भरोसे ही चलेगा अगर ऐसा है तो ये लॉक डाउन - अनलाक का खेल किस लिए छोड़ दो भगवान् भरोसे जिसको जो करना हो वो करे जिसको जैसे जीना हो जिए क्या जरुरत कानून का , क्या जरुरत शासन का और क्या जरुरत सत्ता का जब सब भगवान् के ऊपर है तो भगवान् ही सब संभालेगा और बिगाड़ेगा .( लेखक के निजी विचार )

    शौर्य की बातें / कशिश कुकरेजा की आसमयिक निधन ने एक बार फिर जख्म को हरा कर दिया कशिश कुकरेजा कौन है ना मै इन्हें जानता हूँ ना कभी मुलाकात हुई है . सुनील कुकरेजा मेरे फेसबुक मित्र है उनकी धर्मपत्नी है कशिश कुकरेजा जो ३ दिनों पहले सदा के लिए इस लोक से विदा हो गयी . सुनील कुकरेजा के प्रोफाइल में सभी ने उनकी अर्धांग्नी की आसमयिक नधन पर अपनी संवेदना व्यक्त की और कई पुरानी यादो को एक बार फिर जीवंत करने का प्रयास किया उसमे से एक दृश्य ने फिर से मेरे लाल की कमी को दिल से आँखों पर उतार दिया . सुनील जी अपने परिवार पत्नी और दो बच्चो के साथ एक खुशहाल जिन्दगी जी रहे थे और अचानक भविष्य के सपने बुनते बुनते अन्धकार की ओर चले गए जिस अन्धकार से शारीरिक तौर पर और समाज के लिए तो बाहर निकल आयेंगे किन्तु अंतरात्मा से सदैव उसी अन्धकार में खोये रहेंगे .
    एक इन्सान के लिए उसकी दुनिया के अहम् किरदार उसका परिवार होता है मिया बीबी और बच्चे ये ऐसे रिश्ते है जो स्वयं के प्रयास से ही मजबूत बनते है और हर परिस्थिति में ये अपनी दुनिया में खुश रहते है . कुश रहने का सबसे बड़ा कारण होता है उनकी दुनिया में सब साथ है . किन्तु इस दुनिया से कोई एक भी अलग हो जाये तो करोडो अरबो की भीड़ में भी इंसान अकेला हो जाता है और ऐसा ही हाल वर्तमान में सुनील जी के साथ है उनके मासूम बच्चो के साथ है . सभी साथ है किन्तु उस साथ का कोई अर्थ ही नहीं होता जब उनका कोई अपना साथ ना हो . शायद इसी को कहते है मोहमाया की दुनिया . इस दुनिया में पैसे की भले कमी हो जिन्दगी खुशहाल रहती है किन्तु कोई अपना ना हो तो माया सिर्फ दिखावट का रूप ले लेती है . आज डेढ़ साल से उपर हो गए मेरी दुनिया का एक सितारा खो गया फिर भी जिन्दा है किन्तु सिर्फ दिखावट की दुनिया में जी रहे है . आज भी अंतर्मन वीरान है माया से जिन्दगी कट रही है किन्तु मोह तो अब लेश मात्र भी नहीं रहा फिर भी जी रहे है क्योकि इसी को शायद जिन्दगी कहते है . आज सुनील जी के साथ जो हुआ उसने दिल झंझोड़ दिया . दुःख की इस घडी में मेरी अंतरात्मा के साथ सुनील जी से संवेदनाये है ईश्वर कशिश भाभी जी को अपनी चरणों में स्थान दे और सुनील जी एवं उनके दोनों बच्चो को इतनी शक्ति दे कि जिन्दगी के बचे हुए इम्तिहान को सफलता पूर्वक पार करते रहे . जैसे हामरे जिन्दगी में शौर्य की जगह कोई नहीं ले सकता और उसकी याद को कोई नहीं मिटा सकता उसी तरह कशिश जी हमेशा सुनील जी के और उनके बच्चो के दिल में सदैव जीवित है और वही उनकी शक्ति है . निक्की बेटा तेरे पास कशिश आंटी आई है उन्हें उनके बच्चो जैसा प्यार देना . सुनील जी ईश्वर आपको दुःख की इस घडी में शक्ति प्रदान करे . ॐ शांति .

    लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / ईयरफोन लगाकर संगीत सुनते समय लोग अक्सर इस कदर मशगूल हो जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि आसपास…
    खाना खजाना / शौर्यपथ / वेज बिरयानी बहुत ही स्‍वादिष्‍ट होती है। वेज बिरयानी बनाने का तरीका बहुत आसान है। यह झटपट तैयार होने वाली…
    सेहत / शौर्यपथ / आमतौर पर वजन कम करने के लिए लोग सबसे पहले खाना छोड़ देते हैं या डाइटिंग करना शुरू कर देते हैं…

    खेल / शौर्यपथ / ऑस्ट्रेलिया के बायें हाथ के तेज गेंदबाज डेनियल सेम्स 19 सितंबर से यूएई में होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग के आगामी सत्र में दिल्ली कैपिटल्स की टीम में इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज जेसन रॉय की जगह लेंगे. अब तक अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का इंतजार कर रहे सेम्स पिछले साल बिग बैश लीग के सबसे सफल गेंदबाज थे. रॉय बायीं ओर की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण पाकिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला से बाहर हो गए हैं, जिसके कारण वह आईपीएल में भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे. सेम्स के टीम में शामिल होने से दिल्ली कैपिटल्स के तेज गेंदबाजी आक्रमण को विविधता भी मिलेगी क्योंकि उसकी मुख्य टीम में सिर्फ दायें हाथ के तेज गेंदबाज शामिल हैं.
    दिल्ली कैपिटल्स की टीम में शामिल होने पर सेम्स ने कहा, ‘‘आईपीएल किसी भी क्रिकेटर के लिए बड़ा मंच है और स्वदेश में हम सभी हर साल इस टूर्नामेंट पर करीबी नजर रखते हैं.' उन्होंने कहा, ‘‘मैं भाग्यशाली हूं कि इस साल इसका हिस्सा बन पाया और मैं दिल्ली कैपिटल्स प्रबंधन का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे यह मौका दिया. मैं यूएई में बाकी खिलाड़ियों के साथ जुड़ने का इंतजार नहीं कर सकता.' दिल्ली कैपिटल्स में ऑस्ट्रेलिया के मार्कन स्टोइनिस और एलेक्स कैरी भी शामिल हैं. सेम्स ने पिछले साल बिग बैश लीग के दौरान सुर्खियां बटोरी थी जब उन्होंने सिडनी थंडर्स की ओर से 17 मैचों में 30 विकेट चटकाए थे. बता दें कि यूएई में खिलाड़ियों का क्वारंटीन पीरियड बस खत्म होने को है और जल्द ही आपको सभी टीमों के खिलाड़ी नेट अभ्यास करते दिखाई पड़ेंगे.

    मनोरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित अपने डांस और एक्सप्रेशंस की वजह से बॉलीवुड में खास तौर पर पहचाना जाता है. 'तेजाब' फिल्म से बॉलीवुड में जबरदस्त पहचान बनाने वाली माधुरी दीक्षित अब भी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के साथ जुड़ी हुई हैं और फिल्मों के साथ ही टीवी पर भी नजर आती हैं. माधुरी दीक्षित के वीडियो और फोटो समय-समय पर सोशल मीडिया पर धूम मचाते रहते हैं. माधुरी दीक्षित का एक पुराना डांस वीडियो (Madhuri Dixit) सोशल मीडिया पर छाया हुआ है, जिसमें एक्ट्रेस अपने ही सुपरहिट सॉन्ग पर जमकर थिरक रही हैं.
    माधुरी दीक्षित का एक पुराना डांस वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें माधुरी दीक्षित 'लज्जा' फिल्म के 'बड़ी मुश्किल' गाने पर कुछ इस अंदाज में स्टेप्स कर रही हैं कि दर्शक खूब हंगामा मचा रहे हैं. इस वीडियो में माधुरी दीक्षित के एक्सप्रेशंस भी देखने लायक है, और यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब पसंद भी किया जा रहा है. बता दें कि माधुरी दीक्षित ऑनलाइन डांस क्लासेज भी चलाती हैं.

    धर्म संसार / शौर्यपथ / हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिक मास, मल…
    शौर्यपथ । पतितपावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा स्वर्ग से धरती पर आई है। मान्यता है कि गंगा…

    भोपाल । शौर्यपथ । मध्यप्रदेश के इंदौर में कोरोना के नाम पर लूट मचा रहे निजी अस्पतालों पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कोरोना मरीज के इलाज के लिए छह लाख का बिल दिए जाने के मामले में भंवरकुआं स्थित एप्पल अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही तीन सरकारी डॉक्टर्स को भी नोटिस दिए गए हैं, जो अनुमति नहीं होने के बाद भी वहां इलाज के लिए गए। एप्पल अस्पताल से जब्त रिकाॅर्ड की प्रारंभिक जांच में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके बाद अस्पताल का लाइसेंस भी निरस्त हो सकता है। कलेक्टर के आदेश पर पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार को अस्पताल में छापा मारा, इस दौरान बिल और रिकॉर्ड जब्त किए गए। रिकार्ड के आधार पर जूनी इंदौर एसडीएम और डॉ. अमित मालाकार ने जो जांच प्रतिवेदन तैयार किया। प्रतिवेदन में बताया गया है कि 22 दिन तक कोरोना मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती रखा गया और लगभग छह लाख रुपये का बिल थमा दिया। इतने भारी भरकम बिल के बावजूद एक लाख की दवाइयां अलग से मंगवाई। पीपीई किट, आइसोलेशन चार्ज और यूनिवर्सल प्रोटेक्शन के नाम पर प्रतिदिन 9,000 रुपये के हिसाब से राशि वसूल की गई। आईसीएमआर के निर्देश और डब्लूएचओ की गाइडलाइन के विपरीत एसिंप्टोमेटिक (बिना लक्षण वाले) मरीज होने के बावजूद चार बार आरटीपीसीआर कोविड टेस्ट निजी लैब से करवाया गया, इसमें भी निजी लैब में जो टेस्टिंग चार्ज लगता है, उससे अधिक शुल्क मरीज से वसूल किया गया।। एक बार भी ये टेस्ट करवाने की आवश्यकता नहीं थी, इसके बावजूद बार-बार करवाए गए। अस्पताल ने किस चार्ज के बदले वसूले कितने रुपये आइसोलेशन चार्ज (आइसोलेश में ही कोरोना मरीजों को रखा जाता है, फिर अलग से फीस क्यों)। 63 हजार रुपये यूनिवर्सल प्रोटेक्शन (अस्पताल को भी नहीं पता ये क्या है)। 63 हजार रुपये पीपीई किट के तीन हजार रुपये रोज के हिसाब से। 63 हजार रुपये डॉक्टर की विजिटिंंग फीस, सिर्फ 22 दिनों के लिए। 1 लाख रुपये सीटी स्कैन, नेबुलाइजेशन और अन्य जांच की फीस, जो हुई ही नहीं। 8850 रुपये डॉक्टरों की विजिट के नाम पर वसूले एक लाख रुपये हॉस्पिटल की लूट यही खत्म नहीं हुई बल्कि तीन से चार डॉक्टरों की रोजाना विजिट करवाकर प्रत्येक डॉक्टर की तीन हजार रुपये फीस चार्ज की गई और एक लाख की राशि तो डॉक्टरों की विजिट के ही रूप में मरीज से वसूली गई। छापे के दौरान हॉस्पिटल से जो बिल और रिकार्ड मिले थे, उनकी जांच में भी कई तरह की असमानता नजर आई। हर मरीज से लिए गए शुल्क की राशि में भी अंतर मिला। जांच में यह भी पता लगा कि मरीज से रोजाना तीन हजार रुपये प्रतिदिन यूनिवर्सल प्रोटेक्शन के नाम पर लिए गए। वहां भर्ती सभी मरीजों से यह राशि ली जा रही है। जांच समिति को जो बिल की कॉपी दी गई उसमें निजी लैब में करवाई गई कोरोना जांच का उल्लेख नहीं है। मरीज को दिए गए बिल में इसका भी शुल्क जोड़ा गया है। मरीज के परिजन ने कलेक्टर से की थी शिकायत सागर निवासी व्यक्ति के परिजन ने कलेक्टर से इसकी शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि 22 दिन तक भर्ती करने के बाद मरीज को छह लाख का बिल दिया गया। एक लाख रुपये की दवाई बाहर से मंगवाई, जिससे इलाज का कुल खर्च सात लाख हो गया। इसके बाद मंगलवार रात को जिला प्रशासन की समिति ने छापामार कार्रवाई की। शिकायत करने वाले मरीज के अलावा अन्य मरीजों के बिल का रिकाॅर्ड भी लिया गया था। लाइसेंस निरस्त करने का नोटिस सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया ने इस मामले में तीन दिन में स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। साथ ही कहा गया है कि जवाब न मिलने या असंतोषजनक होने पर मेडिकल एक्ट 2019 की धारा 27 में प्रोफेशनल एवं एथिकल मिसकंडक्ट मानकर मध्यप्रदेश उपचर्या अधि. 1973 एवं नियम 1997 में पंजीयन निरस्त/ एफआईआर कराई जाएगी।

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