August 03, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    रायपुर, 

    ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। कलेक्टोरेट परिसर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) रायपुर, जिला प्रशासन धमतरी और बीआरपी शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के बीच ‘STREE’ (Skill Development through Technological Resources for Empowering Economic Growth of Women) परियोजना के सफल क्रियान्वयन हेतु त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
    इस महत्वपूर्ण अवसर पर NIT रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमणा राव, कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा तथा पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य ने संयुक्त रूप से MoU पर हस्ताक्षर कर परियोजना का विधिवत शुभारंभ किया।कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित अनेक शिक्षाविद् एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
    यह परियोजना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के TDUPW-A2K+ कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 90 लाख रुपये की सहायता से संचालित होगी। 36 माह की अवधि में 300 ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।परियोजना के तहत महिलाओं को कोसा रेशम प्रसंस्करण, फाइबर निष्कर्षण, आधुनिक बुनाई, उत्पाद डिजाइन, उद्यमिता विकास एवं मार्केट लिंकेज जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेष रूप से आदिवासी एवं वंचित वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और मूल्य संवर्धन संभव हो सके।
    ज्ञात हो कि धमतरी में हैंडलूम और कृषि आधारित आजीविका की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें इस परियोजना के माध्यम से तकनीकी सहयोग से सशक्त किया जाएगा। वहीं, NIT रायपुर के निदेशक डॉ. रमणा राव ने इसे समावेशी नवाचार और जमीनी विकास की दिशा में एक मजबूत कदम बताते हुए महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने की बात कही। यह पहल न केवल महिलाओं को कौशल विकास का अवसर देगी, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और लघु उद्योगों की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। STREE परियोजना धमतरी में महिला सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल स्थापित करते हुए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगी।

    आरटीई के तहत 14,403 बच्चों को निजी स्कूलों में मिला प्रवेश, ऑनलाइन लॉटरी बनी सुशासन का उदाहरण

       रायपुर /छत्तीसगढ़ में समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सशक्त आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत निजी विद्यालयों में प्रवेश हेतु ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से 14,403 बच्चों का चयन सुनिश्चित किया। मंत्रालय महानदी भवन से वर्चुअल माध्यम से प्रारंभ हुई यह प्रक्रिया पारदर्शिता, समान अवसर और डिजिटल सुशासन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

    राज्यभर से प्राप्त कुल 38,439 आवेदनों में से 27,203 आवेदन निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र पाए गए, जिनमें से ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 14,403 बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश प्रदान किया गया। यह पूरी प्रक्रिया पूर्व निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार राज्य स्तर पर सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि किसी भी बच्चे की प्रगति आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। हमारी प्राथमिकता है कि हर बच्चे को समान अवसर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो।

    उल्लेखनीय है कि आरटीई प्रावधानों के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित की गई हैं। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का सतत प्रयास कर रही है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 3 लाख 63 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
    राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के अंतर्गत शुल्क प्रतिपूर्ति राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके और निजी विद्यालयों में उनके प्रवेश की प्रक्रिया और सुदृढ़ हो।
    पूरी प्रवेश प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है, जिसमें आवेदन से लेकर दस्तावेज सत्यापन और चयन तक के सभी चरण पूर्णतः पारदर्शी और तकनीक आधारित हैं। अभिभावक स्वयं या चॉइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान ही सिस्टम द्वारा निवास क्षेत्र से 1.5 किलोमीटर के दायरे में स्थित निजी विद्यालयों की जानकारी एवं उपलब्ध सीटों का विवरण प्रदर्शित किया जाता है, जिससे अभिभावकों को सूचित एवं सहज चयन का अवसर प्राप्त होता है। पात्रता के अनुसार 5.5 से 6.5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश दिया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति, दिव्यांग एवं अन्य कमजोर वर्गों को प्राथमिकता प्रदान की जाती है। जिन विद्यालयों में सीटें रिक्त रह जाती हैं, वहाँ जिला स्तर पर ऑफलाइन लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिसकी जानकारी आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।

    यह पहल न केवल हजारों बच्चों के शिक्षा के सपनों को साकार कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ में एक समावेशी, पारदर्शी और उत्तरदायी शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत आधार प्रदान कर रही है। राज्य सरकार का यह प्रयास शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त और दूरदर्शी परिवर्तन का संकेत है।

     

      रायपुर / अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में क्रेडा विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों ने आमजन के जीवन में उल्लेखनीय और सकारात्मक परिवर्तन लाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियों के बेहतर उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे विकास की गति को नई दिशा मिली है। विभाग की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप अब लोगों को बुनियादी सुविधाएं अधिक सरलता और सहजता से उपलब्ध हो रही हैं। सौर ऊर्जा के उपयोग से जहां एक ओर स्वच्छ पेयजल और सिंचाई व्यवस्थाएं सुदृढ़ हुई हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिना बिजली बिल के निरंतर रोशनी सुनिश्चित हो रही है। इससे न केवल लोगों का दैनिक जीवन अधिक सुविधाजनक हुआ है, बल्कि उनके जीवन स्तर में स्थायी और सकारात्मक सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    114 सोलर ड्यूल पंप से पेयजल और सिंचाई सुविधा सुदृढ़

    ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की पहल पर प्रत्येक परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। क्रेडा विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में जल जीवन मिशन अंतर्गत जशपुर जिले में 114 सोलर ड्यूल पंप स्थापित किए गए हैं। इनसे पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सिंचाई के लिए सस्ती एवं सुलभ ऊर्जा उपलब्ध हो रही है। सोलर पंपों के उपयोग से किसानों की डीजल एवं बिजली पर निर्भरता कम हुई है, जिससे उनकी लागत में कमी आई है और आय में वृद्धि हुई है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसान वर्षभर खेती कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। वहीं घर के समीप जल उपलब्ध होने से महिलाओं को दूर से पानी लाने की परेशानी से राहत मिली है।

    80 सोलर हाई मास्ट से रोशन हुए गांव और शहर

    जशपुर जिले में सार्वजनिक स्थलों पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था के लिए सोलर हाई मास्ट योजना के तहत ग्रामों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों के प्रमुख चौक-चौराहों पर संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों में 80 सोलर हाई मास्ट लगाए जा चुके हैं। इन सौर ऊर्जा आधारित लाइटों से रात्रिकालीन आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है। साथ ही, दुर्घटनाओं और अपराधों में भी कमी आई है। जहां बिजली आपूर्ति सीमित या बाधित रहती है वहां भी ये हाई मास्ट निर्बाध रूप से रोशनी प्रदान कर रहे हैं।

    800 सोलर पंप से किसानों को मिली बड़ी राहत

    कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में सौर सुजला योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत जशपुर जिले में पिछले दो वर्षों में 800 सोलर पंप स्थापित किए गए हैं, जिनसे सिंचाई सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। सोलर पंपों के उपयोग से किसानों को बिजली बिल से मुक्ति मिली है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। साथ ही कृषि उत्पादन में वृद्धि, भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन, तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

    रायपुर / sहौर्यपथ 

    छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा राज्य में “रक्षक (RAKSHAK) पाठ्यक्रम” को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।
    इस पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए पूर्व में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े तथा उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा के सहयोग से एमओयू संपन्न किया गया था। यह समझौता राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में “रक्षक” पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।
    इसी क्रम में बुधवार को रायपुर स्थित होटल बेबिलोन में “रक्षक” पाठ्यक्रम के अंतर्गत तैयार उप-इकाइयों (सब-यूनिट्स) को अंतिम रूप देने हेतु विश्वविद्यालय स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद आयोग के सचिव श्री प्रतीक खरे और डायरेक्टर श्रीमती संगीता बिंद ने अतिथियों का स्वागत किया।
    आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है। हमारा प्रयास है कि इसे प्रभावी रूप से लागू कर आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और जागरूक बनाया जाए।”
    बैठक में राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों—पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय (सरगुजा), श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (भिलाई), एमिटी यूनिवर्सिटी और अंजनेय यूनिवर्सिटी—के कुलपति, कुलसचिव, प्रतिनिधि एवं विषय विशेषज्ञ शामिल हुए।
    परामर्श बैठक का मुख्य उद्देश्य पाठ्यक्रम की उप-इकाइयों पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें अंतिम स्वरूप प्रदान करना था, ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र से इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा सके। इस दौरान विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम की संरचना, उपयोगिता और व्यवहारिक पहलुओं पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए आयोग की सराहना की और इसके सफल क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। आयोग को विश्वास है कि “रक्षक” पाठ्यक्रम जल्द ही राज्य के महाविद्यालयों में लागू होगा, जिससे विद्यार्थियों के माध्यम से बाल अधिकारों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित होगा।

      बिलासपुर / बिलासपुर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन के संबंध में खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में खाद्यान्न भंडारण एवं वितरण कार्य सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

    खाद्य नियंत्रक, जिला बिलासपुर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 तक तीन माह के खाद्यान्न के भंडारण एवं वितरण की व्यवस्था की गई है। इसके तहत जिले में संचालित 695 शासकीय उचित मूल्य दुकानों में आबंटन के विरुद्ध 70 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न का भंडारण किया जा चुका है।

    विभाग ने बताया कि किसी भी उचित मूल्य दुकान में तीन माह के खाद्यान्न भंडारण हेतु स्थान की कोई समस्या नहीं आई है। साथ ही, एपीएल मद के चावल का बीपीएल मद में समायोजन या वितरण नहीं किया जा सकता, जिसका पालन किया जा रहा है।

    राशन वितरण प्रक्रिया के तहत हितग्राहियों को तीन माह का राशन प्राप्त करने के लिए ई-पॉस मशीन में छह बार फिंगरप्रिंट सत्यापन करना पड़ रहा है। विभाग के अनुसार, जिले में अब तक 37 प्रतिशत हितग्राहियों को तीन माह का खाद्यान्न वितरित किया जा चुका है तथा वितरण कार्य निरंतर जारी है।

    खाद्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-पॉस मशीन में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या नहीं है तथा एपीएल राशनकार्डधारियों के लिए मासिक आबंटन नियमित रूप से प्राप्त हो रहा है। जिले में राशन वितरण कार्य पूर्णतः व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

       रायपुर / कोबरा जिले में राशन वितरण कार्य में अनियमितता को लेकर प्राप्त शिकायतों पर प्रशासन ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए कई उचित मूल्य दुकानों के संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। शिकायतों पर खाद्य विभाग द्वारा जांच कराई गई। जांच में ग्राम पंचायत कोरकोमा, खोड्डल एवं पटपरा की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जिन शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में अनियमितताएं पाई गई है उन संचालकों के विरूद्ध प्रथम सूचना प्रतिवेदन दर्ज कराया गया है।

    कोरकोमा स्थित दुकान में संचालक संस्था द्वारा लगभग 197.45 क्विंटल चावल एवं 22.82 क्विंटल नमक का व्यपवर्तन किया जाना सामने आया है। साथ ही लगभग 435 राशन कार्डधारियों को निर्धारित अवधि में राशन वितरण नहीं किया गया। इस मामले में संबंधित संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रकरण दर्ज किया गया है।

    इसी प्रकार खोड्डल की उचित मूल्य दुकान में 334.98 क्विंटल चावल एवं 6 क्विंटल शक्कर के व्यपवर्तन का मामला सामने आया है। यहां दुकान का नियमित संचालन नहीं होने एवं सीमित दिनों में ही वितरण किए जाने की शिकायतें भी सही पाई गईं। इस पर छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    वहीं पटपरा (विकासखंड पाली) की दुकान में भी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच में पाया गया कि लगभग 422 हितग्राहियों का बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण होने के बावजूद उन्हें राशन वितरित नहीं किया गया। इस प्रकरण में संचालकों के विरुद्ध थाना पाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है । विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि मार्च 2026 में भंडारण में विलंब एवं एई-पीडीएस सर्वर मेंटेनेंस के कारण कुछ स्थानों पर समय पर वितरण प्रभावित हुआ।

    खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवितरित राशन के वितरण के लिए अप्रैल माह में आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं तथा बैकलॉग वितरण शीघ्र सुनिश्चित किया जाएगा। जिला प्रशासन ने कहा है कि राशन वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का किया वर्चुअल शुभारंभ

    प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर हुई 2 हजार 573

    किसानों को आसानी से मिलेगी खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण की सुविधा

       रायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन से प्रदेश की नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया।उन्होंने इसे प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह कदम ऐतिहासिक है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नई समितियों के शुरू होने से अब पूरे प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 2 हजार 573 हो गई है। उन्होंने प्रदेश के अन्नदाता किसानों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार खेती-किसानी में आधुनिक तकनीक और सहकारिता के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दे रही है, ताकि गांव और किसान समृद्ध बन सकें। उन्होंने बताया कि अब पैक्स समितियां बहुउद्देश्यीय सोसायटी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं उनके गांव के पास ही उपलब्ध होंगी। साथ ही धान बेचने की प्रक्रिया भी आसान होगी और किसान अपनी नजदीकी समिति में ही धान बेच सकेंगे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले से कार्यरत 2058 समितियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए कंप्यूटरीकृत किया गया है और इनमें माइक्रो एटीएम भी लगाए गए हैं, जिनसे किसान 20 हजार रुपये तक की राशि निकाल सकते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नवगठित 515 समितियों में से 197 समितियां आदिवासी क्षेत्रों में स्थापित की गई हैं, जिससे दूर-दराज के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि ये समितियां केवल खाद-बीज वितरण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य में दुग्ध उत्पादन, मछली पालन जैसे सहायक कृषि गतिविधियों से भी जुड़ेंगी। साथ ही समितियों में लोक सेवा केंद्र भी शुरू किए जाएंगे, जहां एक ही स्थान पर 25 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे इन समितियों के सदस्य बनकर इसका अधिकतम लाभ उठाएं और इनके संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
    इस अवसर पर सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप वर्चुअल उपस्थित रहे, साथ ही कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी श्री केदारनाथ गुप्ता, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत तथा सचिव सहकारिता श्री सी.आर. प्रसन्ना, सहकारिता विभाग के प्रबंध संचालक श्री के.एन. कांडे सहित विभिन्न जिलों से लगभग 2500 जनप्रतिनिधिगण, किसान और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने (NSTFDC) को जनजातीय उद्यमिता के लिए एक उत्प्रेरक बताया


    रायपुर, /केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने देश भर में अनुसूचित जनजाति समुदायों को सशक्त बनाने में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (NSTFDC) द्वारा निभाई गई परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि (NSTFDC) का दृष्टिकोण केवल रोजगार सृजन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और व्यक्तियों को रोजगार चाहने वाला बनने के बजाय रोजगार देने वाला बनने में सक्षम बनाना है। नई दिल्ली में (NSTFDC) के 10 अप्रैल 2026 को आयोजित 25 वें स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए श्री ओराम ने इस निगम को जनजातीय उद्यमिता के लिए एक उत्प्रेरक बताया।

    केंद्रीय जनजाति मंत्री श्री जुएल ओराम द्वारा छत्तीसगढ़ से चयनित लाभार्थी जिला बेमेतरा से किशन ध्रुव ग्राम कुआं (किराना व्यवसाय) एवं धनराज ठाकुर ग्राम गातापार (फोटो स्टूडियो व्यवसाय) सहित छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के प्रतिनिधि (कार्यपालन अधिकारी) प्रवीण कुमार लाटा का स्वागत किया और (NSTFDC) सावधि ऋण योजना के तहत व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित करने में उनके प्रयासों की सराहना की। मंत्री जी द्वारा लाभार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

    इसके जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए श्री ओराव ने निगम के उस मुख्य उद्देश्य को रेखांकित किया जिसके तहत वह बिना किसी गारंटी (collateral-free) के वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिससे जनजातीय लाभार्थियों तक इसकी पहुँच और अधिक व्यापक हो सके। मीडिया से बात करते हुए श्री ओराम ने कहा कि निगम ने लाभार्थियों को 16 लाख से अधिक ऋण वितरित किए हैं और अब तक कुल संवितरण (वितरित राशि) 4,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

    भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (NSTFDC) ने नई दिल्ली के विश्व युवा केंद्र में अपना 25 वां स्थापना दिवस मनाया। इस कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा, संयुक्त सचिव श्री अनंत प्रकाश पांडे और (NSTFDC) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) श्री टी. रौमुआन पाइते, (NSTFDC) के प्रबंधक और मध्य क्षेत्र के प्रमुख श्री विकास रंजन साथ ही निगम के पूर्व CMD और देश भर की राज्य चौनलिंग एजेंसियों के प्रतिनिधियों उपस्थित रहे।

     

    स्वास्थ्य मंत्री भी निरंतर जिला प्रशासन के संपर्क में

    रायपुर ।
    सक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता प्लांट में बॉयलर फटने से हुए भीषण हादसे के बाद जिला प्रशासन त्वरित रूप से सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय घटना एवं घायलों के उपचार को लेकर कलेक्टर श्री अमृत विकास टोपनो तथा पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल ठाकुर से लगातार संपर्क में हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल भी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और कलेक्टर के साथ समन्वय बनाए हुए हैं।
    घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर, एसपी तथा प्रशासन की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया। घायलों को प्राथमिकता के साथ रायगढ़ के फोर्टीस हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज एवं अपेक्स अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार हेतु रायपुर के कालड़ा अस्पताल रेफर किया गया। प्रशासन द्वारा घटनास्थल को बैरिकेड कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
    कलेक्टर श्री टोपनो ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। पोस्टमार्टम उपरांत पार्थिव देह को उनके गृहग्राम तक एम्बुलेंस के माध्यम से भेजने और तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
    हादसे में घायल अथवा प्रभावित श्रमिकों को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक बिना उपस्थिति के वेतन देने पर भी सहमति बनाई गई है। कलेक्टर ने बताया कि मुआवजा राशि को लेकर देर रात तक चर्चा कर सहमति स्थापित की गई है। घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं तथा जांच टीम जल्द ही घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। रेस्क्यू कार्य में एसडीआरएफ की टीम भी सक्रिय है।
    मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों हेतु 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है।
    पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल ठाकुर ने जानकारी दी कि इस हादसे में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 17 की मृत्यु हो चुकी है तथा 19 घायल हैं, जिनका उपचार जारी है।
    कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग, तथा घायलों को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रहेगा और परामर्श (काउंसलिंग) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    मृतकों के नाम
    हादसे में मृतकों में छत्तीसगढ़ के 5, बिहार के 2, झारखंड के 3, पश्चिम बंगाल के 5 तथा उत्तर प्रदेश के 2 मजदूर शामिल हैं। मृतकों के नाम इस प्रकार हैं--
    रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार),
    अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़),
    थंडा राम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़),
    तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड),
    आकिब खान (दरभंगा, बिहार),
    सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल),
    अब्दुल करीम (झारखंड),
    उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़),
    शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल),
    पप्पू कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश),
    अशोक परहिया (पलामू, झारखंड),
    मनस गिरी (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल),
    बृजेश कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश),
    रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर–चांपा, छत्तीसगढ़),
    कार्तिक महतो (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल),
    नदीम अंसारी (सक्ती, छत्तीसगढ़),
    शिबनाथ मुर्मू (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल)।

    दुर्ग। शौर्यपथ।

    शहर की होनहार छात्रा रमा पाण्डेय ने CBSE कक्षा 10वीं की परीक्षा में 93.4% अंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे दुर्ग शहर का नाम रोशन किया है। रमा पाण्डेय ने बेथनी विद्यालय बोरसी भाटा दुर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त कर टॉपर बनने का गौरव हासिल किया।

    रमा पाण्डेय, रौनक ग्रुप के डायरेक्टर गणेश तिवारी की भांजी हैं। उनके पिता अवधेश कुमार पाण्डेय और माता मनीषा पाण्डेय ने अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    मेहनत, लगन और परिवार का सहयोग बना सफलता का आधार

    रमा पाण्डेय ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और नियमित अध्ययन को दिया। सीमित संसाधनों में भी उन्होंने निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ यह मुकाम हासिल किया, जो अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गया है।

    बेटियों की शिक्षा का सशक्त संदेश

    रमा की यह सफलता समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि यदि बेटियों को अवसर, समर्थन और प्रोत्साहन मिले तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।

    आज भी कई क्षेत्रों में बेटियों की शिक्षा को लेकर जागरूकता की आवश्यकता है, ऐसे में रमा पाण्डेय की यह उपलब्धि एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।

     पृष्ठभूमि

    रमा पाण्डेय  अपनी प्रारंभिक शिक्षा से ही उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और कक्षा 10वीं में यह उपलब्धि हासिल कर अपने उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रख दी है।

    शहर में खुशी की लहर

    रमा की इस सफलता से परिवार, रिश्तेदारों और स्कूल में हर्ष का माहौल है। शिक्षकों ने भी उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

    निष्कर्ष

    रमा पाण्डेय की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा है। यह साबित करती है कि बेटियां यदि ठान लें, तो हर ऊंचाई को छू सकती हैं।

    ऐसी बेटियों को प्रोत्साहित करना ही एक सशक्त और शिक्षित समाज की नींव है।

    हमारा शौर्य

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