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April 01, 2026
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दुर्ग शहर की अव्यवस्था से जनता निराश, अतिक्रमण और गंदगी ने बढ़ाई परेशानी; कैबिनेट मंत्री बने गजेंद्र यादव से विकास की नई गाथा लिखने की आस

दुर्ग / शौर्यपथ / नगरीय निकाय चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी श्रीमती अलका बाघमार ने शहरवासियों से अतिक्रमण मुक्त दुर्ग, स्वच्छ और व्यवस्थित बाजार, भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई जैसी कई बड़ी घोषणाएँ की थीं। इन वादों पर भरोसा जताते हुए दुर्ग की जनता ने मतदान के माध्यम से उन्हें महापौर के रूप में चुना। लेकिन महज़ कुछ महीनों के कार्यकाल में ही नगर सरकार की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
  शहर के मुख्य मार्गों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा, जवाहर नगर से सुराना कॉलेज तक फैली गंदगी और कचरे के ढेर, सड़कों के किनारे अवैध अतिक्रमण, जगह-जगह बुझी पड़ी स्ट्रीट लाइटें और थोड़ी-सी बारिश में ही पूरे शहर का जलभराव जैसी समस्याओं ने जनता को निराश किया है। दो महीने तक चले 'महासफाई अभियानÓ का परिणाम भी कुछ घंटों की बारिश में ही धुल गया।
  इन हालातों ने न केवल महापौर की कार्यशैली पर बल्कि महापौर चयन में निर्णायक भूमिका निभाने वाले दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। जनता का मानना है कि जिस प्रत्याशी को उन्होंने सांसद के प्रभाव से चुना, वही अब अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
जनता की आवाज़
  व्यापारीयो का कहना है – "बाजार क्षेत्र में हर दिन ट्रैफिक जाम और गंदगी से जूझना पड़ता है। हम उम्मीद कर रहे थे कि महापौर बनने के बाद कुछ सुधार होगा, परंतु हालात जस के तस हैं।"
  स्थानीय निवासियों ने कहा – "महज कुछ घंटों की बारिश में ही पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जनता पूछ रही है कि आखिर सफाई और नालों की देखरेख का जिम्मा किसका है?"

सुराना कॉलेज के छात्र बोले – "हमारे कॉलेज के सामने कचरे के ढेर और आवारा मवेशियों की समस्या महीनों से बनी हुई है। प्रशासन और नगर निगम दोनों ही सिर्फ आश्वासन देते हैं।"

अब नजरें टिकी हैं मंत्री गजेंद्र यादव पर
 ऐसे में अब उम्मीद की किरण दिख रही है दुर्ग शहर के विधायक गजेंद्र यादव से, जिन्हें हाल ही में प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। यह संयोग स्वर्गीय हेमचंद यादव के बाद पहली बार आया है जब दुर्ग शहर विधानसभा का कोई विधायक मंत्री पद से सुशोभित हुआ है।
  जनता को विश्वास है कि गजेंद्र यादव के मंत्री बनने से शहर के विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। बड़े पद के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है और अब नागरिकों की अपेक्षा है कि मंत्री गजेंद्र यादव गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर दुर्ग के लिए ठोस कार्य करेंगे।

दुर्ग की जनता चाहती है कि—
सड़कों और नालों की तत्काल मरम्मत हो,
अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई की जाए,
स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था को प्राथमिकता मिले,
और जिला मुख्यालय के रूप में दुर्ग का विकास पूरे प्रदेश में मिसाल बने।
  आज दुर्ग की जनता जिस अव्यवस्था और उपेक्षा से गुजर रही है, उससे निकलने का रास्ता केवल मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशील नेतृत्व ही दिखा सकता है। ऐसे में शहरवासियों की निगाहें एक बार फिर अपने विधायक और अब मंत्री बने गजेंद्र यादव पर टिकी हैं कि वे दुर्ग की तकदीर बदलने की दिशा में निर्णायक कदम उठाएँ।

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राजनीतिक समीकरण:दुर्ग महापौर चुनाव में विजय बघेल की भूमिका ने भाजपा की स्थानीय राजनीति में हलचल मचाई थी। महापौर पर सवाल खड़े होने से उनकी साख भी प्रभावित हो रही है। गजेंद्र यादव की सक्रियता अब भाजपा के भीतर संतुलन साधने में अहम साबित हो सकती है।

मुख्य चुनौतियाँ:
नगरीय निकाय में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर अंकुश लगाना
सफाई व्यवस्था और जलभराव की स्थायी समस्या का समाधान
शहर में अवैध अतिक्रमण और यातायात अव्यवस्था पर सख्त कार्रवाई
जनता की उम्मीदों को जल्द ठोस कामों में बदलना

संभावनाएँ:यदि गजेंद्र यादव अपने मंत्री पद का प्रभाव शहर के विकास में दिखा पाते हैं तो वे न केवल दुर्ग बल्कि प्रदेश स्तर पर भी एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकते हैं। वहीं, यदि अव्यवस्था जस की तस रही तो इसका सीधा राजनीतिक असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।

  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संभावित विदेश दौरे से पहले विस्तार की चर्चा तेज़
  90-सदस्यीय विधानसभा में संवैधानिक सीमा अनुसार अधिकतम 14 मंत्री (मुख्यमंत्री सहित) संभव—वर्तमान में 11
  क्या 33% महिला भागीदारी की ‘आदर्श परिपाटी’ मंत्रिमंडल में दिखेगी?

 रायपुर/विशेष संवाददाता शौर्यपथ
  छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की अटकलें एक बार फिर परवान चढ़ गई हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि 18 से 21 अगस्त के बीच किसी भी दिन मंत्रिमंडल में नए चेहरों को जगह मिल सकती है। फिलहाल सरकार में मुख्यमंत्री सहित 11 मंत्री हैं; संवैधानिक सीमा के अनुरूप तीन रिक्त पद भरे जा सकते हैं। चर्चा यह भी है कि इस विस्तार में महिला प्रतिनिधित्व को प्रमुखता दी जाएगी ताकि 33% आरक्षण की ‘आदर्श परिपाटी’ का संदेश कैबिनेट स्तर पर भी जाए।

मुख्य विवरण
संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 164(1A) के तहत 90-सदस्यीय विधानसभा में मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 14 तय है (मुख्यमंत्री सहित)।
वर्तमान स्थिति: सरकार में 11 मंत्री कार्यरत; 3 स्थान रिक्त।
चर्चा: 18–21 अगस्त के बीच विस्तार की संभावना—आधिकारिक घोषणा शेष।
राजभवन के ‘दरबार हॉल’ का नाम ‘छत्तीसगढ़ मंडपम’ किए जाने व यहीं शपथ समारोह की तैयारी की चर्चा—औपचारिक पुष्टि प्रतीक्षित।

महिला प्रतिनिधित्व: नारा नहीं, नीति
   वर्तमान मंत्रिपरिषद में महिला मंत्रियों की संख्या 1 है। यदि कैबिनेट 14 तक भरता है, तो 33% के आदर्श मानक के हिसाब से कम-से-कम 5 महिलाओं की हिस्सेदारी का लक्ष्य प्रतीकात्मकता से आगे बढ़कर नीतिगत भागीदारी का संकेत देगा। विस्तार में कम-से-कम 1–2 नई महिला चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है। बस्तर से लता उसेंडी और दुर्ग संभाग से भावना बोहरा (जिन्हें 2024 में ‘उत्कृष्ट विधायक’ के रूप में सम्मानित किए जाने का उल्लेख है) जैसे नाम सियासी चर्चा में हैं।
  केंद्र स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नारी शक्ति वंदन’ (33% आरक्षण) के पैरोकार रहे हैं और यह विधेयक संसद से पारित हो चुका है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लिए यह विस्तार ‘आदर्श राज्य’ की छवि गढ़ने का अवसर बन सकता है।

संभावित दावेदारों की भूमिका: दिए गए नाम सियासी चर्चाओं में चल रहे संभावित विकल्प हैं; आधिकारिक सूची/घोषणा शेष है। उद्देश्य सभी प्रमुख दावेदारों की भूमिका और संभावित संकेत को समग्रता से रखना है।

1) गजेन्द्र यादव: दुर्ग से कांग्रेस के पिछले तीस सालो से लगातार हार / जीत के बावजूद प्रत्याशी रहे अरुण वोरा को चुनावी मैदान में आसान शिकस्त दी आसान इसलिए कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ कांग्रेसी ही मैदान में परदे के पीछे खड़े रहे शहर की जनता भी लगातार एक ही कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन से उब चुकी थी निष्क्रियता और चाटुकारिता से घिरे विधायक की छवि के कारण दुर्ग विधान सभा में चुनावी मौसम में यह चर्चा रही कि भाजपा से कोई भी प्रत्याशी मैदान में होगा जीत निश्चित है ऐसे में भाजपा प्रत्याशी गजेन्द्र यादव को आसान और बड़ी जीत मिली.वर्तमान समय में विधायक यादव और महापौर बाघमार की राजनैतिक दुरी संगठन के कार्यकर्ताओ की विधायक से दुरी के साथ साथ दल्बद्लुओ की फौज का करीबी होना चर्चा का विषय है तो सामाजिक स्तर पर यादव समाज के प्रतिनिधितत्व एक बड़ा फेक्टर साथ दे रहा है .

2) राजेश अग्रवाल (सरगुजा)

क्षेत्रीय महत्व: सरगुजा संभाग का प्रतिनिधित्व मज़बूत करता है, जहाँ संतुलन साधना आवश्यक माना जा रहा है। उत्तरी छत्तीसगढ़ की प्राथमिकताओं—सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई—पर फोकस।
3) गुरु खुशवंत साहिब (रायपुर संभाग ): गुरु खुशवंत साहिब प्रदेश के एक बड़े वर्ग के धार्मिक guru के रूप में जाने जाते है ऐसे में प्रदेश सरकार इस बड़े वर्ग को भी साधने के लिए इन्हें मौका दे सकती है . एससी /एसटी वर्ग को प्रतिनिधितव मिलने से इस वर्ग के मतदाता का रुझान भी पार्टी की तरफ ज्यादा रहेगा ऐसे में इनकी दावेदारी की भी प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है और इन्हें केबिनेट में जगह मिलने की बात से चर्चो का बाजार गर्म है .
4) राजेश मूणत : लंबे समय से सक्रिय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ नेता।अनुभवी हाथों से विभागीय डिलीवरी में तेजी लाने का संकेत। किन्तु पिछली बार भाजपा की सत्ता में रहने के दौरान महत्तवपूर्ण विभाग कीई जिम्मेदारी सँभालने वाले पूर्व मंत्री राजेश मुड़त के कई विभागीय कार्यो में अनियमितता और कमीशनखोरी की चर्चो से पूर्व की भाजपा सरकार को काफी नुकसान हुआ था और सत्ता हाथ से जाने का एक बड़ा कारण भी मुड़त को माना गया .
5) अमर अग्रवाल: भाजपा के कद्दावर नेता के रूप में पहचान अनुभवी होने के साथ साथ प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ विधायक व लम्बे प्रशासनिक कार्यो का अनुभव किन्तु बड़ी अड़चन यह कि प्रदेश सरकार की वर्तमान राजनितिक गलियारों में चर्चा के अनुसार नए एवं युवा विधायको को यह मौका देने का जोर कही ना कही अमर अग्रवाल जैसे वरिष्ठ भाजपा विधायक को दरकिनार करता नजर आ रहा है वर्तमान समय में मंत्री मंडल में नए विधायको को जिम्मेदारी मिली जो सरकार की मंशा के अनुरूप जोश के साथ कार्य को अंजाम दे रहे है वही नै पीढ़ी को आगे करने की रणनीति कार्यकर्ताओ में भी उम्मीद की किरण के रूप में एक सार्थक माहौल को जन्म दे रही जो संगठन के लिए भी काफी महत्तवपूर्ण है भविष्य की राजनीती के
6) भावना बोहरा (दुर्ग संभाग ): भावना बोहरा : महिला सशक्तिकरण की नई पहचान

पंडरिया विधानसभा से पहली बार चुनाव जीतने वाली विधायक भावना बोहरा ने अपने सामाजिक और विकास कार्यों से जनता के बीच गहरी छाप छोड़ी है। धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली बोहरा को 2024 में उत्कृष्ट विधायक सम्मान भी मिला। व्यावसायिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं पर पकड़ बनाकर प्रशासनिक दक्षता दिखाई है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि प्रदेश सरकार उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान देती है तो यह न केवल महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम होगा, बल्कि भाजपा संगठन को भी महिलाओं के बीच सशक्त नेतृत्व प्रदान करेगा।
  निष्कर्षक संकेत: यदि तीन रिक्त स्थान में 2 पुरुष + 1 महिला या 1 पुरुष + 2 महिलाएँ का फार्मूला अपनता है, तो क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन के साथ महिला प्रतिनिधित्व का संदेश भी जाता है। दूसरी ओर 3 पुरुष विकल्प चुनने की स्थिति में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने का रोडमैप अगले फेरबदल में स्पष्ट करना होगा।
‘हरियाणा मॉडल’ का संदर्भ
 चर्चित ‘हरियाणा मॉडल’ का आशय संख्या-संतुलन और कार्य-वितरण वाले संकुचित-सक्षम कैबिनेट से है। छत्तीसगढ़ पहले से 14 की संवैधानिक सीमा में आता है; अतः यहाँ ‘मॉडल’ का अर्थ प्रशासनिक कार्यकुशलता और संतुलित प्रतिनिधित्व की कार्यशैली से है, न कि किसी कानूनी अपवाद से।
चुनावी गणित बनाम शासन-प्राथमिकताएँ
 विधानसभा चुनावों के चक्र में प्रायः अंतिम वर्ष चुनावी मोड में बीतता है। ऐसे में इस विस्तार के बाद नए मंत्रियों के पास करीब दो वर्ष होंगे—अपने विभागीय प्रदर्शन से संदेश देने के लिए। क्षेत्रीय संतुलन (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर), सामाजिक संतुलन (ST/SC/OBC/सामान्य/धार्मिक-भाषाई समुदाय) और राजनीतिक योगदान/संगठनात्मक सक्रियता—इन तीनों कसौटियों पर संतुलित चयन सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत देगा।

कैबिनेट विस्तार सरकार के राजनीतिक मनोविज्ञान और शासन-दृष्टि की परीक्षा है। यदि महिला प्रतिनिधित्व को अर्थपूर्ण ढंग से बढ़ाया जाता है, तो यह संदेश जाएगा कि छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय-निर्माण की मेज़ पर बराबरी से बैठी है।आधिकारिक निर्णय आते ही नामों/तिथियों/स्थल का उल्लेख अद्यतन किया जाएगा।

रायपुर / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और इसके पीछे सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं बड़ा कारण बन रही हैं। केंद्र सरकार की दो प्रमुख योजनाओं—फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड) एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स फेज-2 (FAME-II) और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम 2024 (EMPS-2024)—के तहत पिछले तीन वर्षों में राज्य के खरीदारों को 138 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली है।

केंद्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजु श्रीनिवास वर्मा ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

FAME-II योजना (अप्रैल 2019 – मार्च 2024) के तहत अप्रैल 2022 से मार्च 2024 के बीच छत्तीसगढ़ में 33,552 इलेक्ट्रिक वाहन बिके। इस अवधि में खरीदारों को 121.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी का लाभ दिया गया।

वहीं, EMPS-2024 योजना, जो सिर्फ छह महीने (अप्रैल–सितंबर 2024) के लिए प्रभावी रही, के दौरान 13,091 इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन बिके और खरीदारों को 16.74 करोड़ रुपये की राहत दी गई।

अधिकारियों के अनुसार, इन योजनाओं के तहत खरीदारों को अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती। सब्सिडी सीधे वाहन की खरीद कीमत से घटा दी जाती है और बाद में यह राशि भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा मूल उपकरण निर्माता कंपनियों (OEMs) को भुगतान कर दी जाती है। इस कारण राज्य में कोई भी भुगतान लंबित नहीं है।
  पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बैटरी चालित स्कूटर, तिपहिया और कारों की बढ़ती बिक्री न सिर्फ ईंधन पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि प्रदूषण घटाने में भी मददगार साबित होगी। सरकार के सतत सहयोग के साथ, छत्तीसगढ़ में स्वच्छ और हरित परिवहन की ओर बदलाव अब और तेज़ी पकड़ रहा है।

शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट

   "अगर केंद्र, राज्य और नगर निगम में एक ही पार्टी की सरकार होगी, तो विकास दौड़ेगा!"
    यह था भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पांडे का वादा, जब उन्होंने दुर्ग की जनता से "ट्रिपल इंजन" का समर्थन मांगा था।
   लेकिन आज, जब ट्रिपल इंजन से चलने वाला दुर्ग शहर गड्ढों, गंदगी और गुटबाजी के दलदल में फंसा है, जनता खुद सवाल पूछ रही है - "वादा किया था रोशनी का, फिर क्यों पसरा है अंधेरा?"

 जब सरोज पांडे थीं महापौर: दुर्ग बना था विकास का पर्याय
   महापौर रहते सुश्री सरोज पांडे ने दुर्ग नगर निगम को विकास की दिशा में एक नई पहचान दी थी।चौड़ी सड़कें,सुव्यवस्थित बाजार,सुंदर उद्यान,और सफाई व्यवस्था -
उस दौर में दुर्ग को "छोटा स्मार्ट सिटी" कहने लगे थे लोग।
  आज उसी शहर में, जहां उन्होंने विकास की नींव रखी, वहीं अब बदहाल व्यवस्थाएं और टूटी उम्मीदें एक कटु सच्चाई बन चुकी हैं।
 आज का दुगर्: नालियां जाम, सड़कों पर जान का खतरा ,अतिक्रमण से जकड़े बाजार ,आवारा पशुओं से भरा शहर ,अधूरी सड़कें , और राजेंद्र चौक जैसे व्यावसायिक हब पर सरकारी सुस्ती ,नगर निगम की 6 महीने की सत्ता और राज्य सरकार के 20 महीनों के कार्यकाल में सुधार की बजाय गिरावट ही सामने आई है।
 नालियों की सफाई अब भी "प्रक्रिया में" है, पार्कों की घास सूख रही है, और जनता धूल, दुर्गंध और दुश्वारियों के बीच जूझ रही है।
 गुटबाजी का गड्ढा: महापौर बनाम विधायक
  शहर के दो जिम्मेदार चेहरे - महापौर और स्थानीय विधायक – आमने-सामने हैं। कोई काम अगर हो भी गया, तो उसका श्रेय लेने की राजनीतिक होड़ जारी है। सामंजस्य और टीमवर्क जैसे शब्द शहरी प्रशासन की डिक्शनरी से नदारद हो चुके हैं। विपक्ष को परिषद में बोलने तक का मौका नहीं देना लोकतांत्रिक मर्यादा का खुला उल्लंघन है।

 गरीबों पर सख्ती, रसूखदारों को संरक्षण
  इंदिरा मार्केट हो या कपड़ा लाइन - जहां आम ठेलेवालों को हटाया जा रहा है, वहीं बड़े दुकानदारों द्वारा बरामदे पर कब्जा बरकरार है।
भाजपा नेता के संरक्षण में राम रसोई को गलत दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों की भूमि का आवंटन भी अब चर्चा में है, लेकिन कार्रवाई शून्य।

 जनता पूछ रही - "अब किससे लें जवाब?"
  क्या जवाब दें वो भाजपा संगठन जो विपक्ष में रहकर हर गड्ढे पर धरना देता था? या वो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे, जिन्होंने वादा किया था कि "ट्रिपल इंजन" से दुर्ग दौड़ेगा?"
अब जब वही इंजन धुएं में उलझ गया है, तो जनता सिर्फ इंतज़ार में है कि -"कोई आए, और इन सवालों का ईमानदारी से जवाब दे!"

 आईना देखिए, पोस्टर नहीं
  यह सिर्फ बदहाल दुर्ग की रिपोर्ट नहीं, बल्कि उन तमाम वादों का आइना है, जो वोट से पहले बड़े-बड़े मंचों पर बोले गए थे।
महापौर रहते सरोज पांडे का विकास मॉडल आज खुद सवाल कर रहा है - "क्या भाजपा की आज की नगर सरकार उस स्तर को भी छू पाई?"
अब जनता तय करेगी -बातों के ट्रिपल इंजन से शहर नहीं चलता, ज़मीन पर पसीने से काम करना होता है।

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