August 03, 2026
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    दुर्ग।शौर्यपथ ख़ास रिपोर्ट
        दुर्ग नगर पालिक निगम क्षेत्र आज "स्मार्ट सिटी" नहीं बल्कि "गंदगी सिटी" की पहचान से जाना जाने लगा है। जनता ने बड़े भरोसे के साथ भाजपा प्रत्याशी अलका बाघमार को महापौर और निगम की कमान सौंपी थी, परंतु अब यही जनता गंदगी, कचरे और दुर्गंध से जूझ रही है।

    महापौर की पोस्टरबाज़ी बनाम जनता की नाराज़गी

       महापौर अलका बाघमार ने चुनाव से पहले स्वच्छ और व्यवस्थित दुर्ग का सपना दिखाया था। लेकिन सत्ता में आते ही उनका ध्यान जनता की समस्याओं से हटकर केवल पोस्टरबाज़ी और उत्सवों की राजनीति तक सिमट गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर "स्वच्छता सेवा पखवाड़ा" का आयोजन कर निगम शहर को स्वच्छ बताने की कोशिश कर रहा है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि हर गली और मोहल्ले में गंदगी और बदबू ने डेरा जमा लिया है। जनता पूछ रही है—"पोस्टर से पेट नहीं भरता और बदबू से जीना दूभर है, महापौर साहिबा ये कैसा सुशासन?"

    स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल: अनुभवहीनता का प्रतीक

      महापौर ने सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी निगम के स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल को सौंपी है। लेकिन अग्रवाल का प्रदर्शन शहर के लिए निराशाजनक और शर्मनाक रहा है। शहर के प्रमुख स्थानों—पुलिस अधीक्षक का बंगला, छात्रावास, गर्ल्स हॉस्टल और आम नागरिकों के ठहरने-बैठने वाले स्थानों तक—हर जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। नालियों से निकलती दुर्गंध और सड़कों पर बिखरे कचरे ने नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है। स्वास्थ्य प्रभारी की भूमिका केवल बैठकों और बातों तक सीमित रह गई है।
      जनता कह रही है कि अगर पहली बार विधायक बने और शिक्षा मंत्री का पद संभालते ही गजेंद्र यादव सक्रियता से शिक्षा विभाग में नई ऊर्जा ला सकते हैं, तो फिर पहली बार पार्षद बने नीलेश अग्रवाल सफाई व्यवस्था में ऐसा असफल क्यों साबित हो रहे हैं? इसका जवाब शायद निगम की राजनीति के गलियारों में छिपा है।

    मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की सोच को आईना

       प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार "सुशासन" और "स्वच्छ भारत" की बात करते हैं। लेकिन उनके ही नाम पर चुनी गई शहरी सरकार जब गंदगी और बदबू फैलाने में अव्वल साबित हो रही है, तो यह न केवल शहर की छवि धूमिल कर रहा है बल्कि प्रदेश और केंद्र सरकार की सोच को भी कटघरे में खड़ा कर रहा है।

    सामान्य सभा की अग्निपरीक्षा

       अब पूरा शहर इस बात पर नज़र गड़ाए बैठा है कि दुर्ग नगर निगम की आगामी सामान्य सभा में क्या जनप्रतिनिधि जनता के स्वास्थ्य और सफाई जैसे गंभीर मुद्दे पर सवाल उठाएंगे? या फिर मौन रहकर केवल सत्ता सुख का आनंद लेंगे?

    कटाक्ष :

    "शहर डूबा कचरे में, पोस्टरों में चमक रही सरकार!"
    "जनता मांगे सफाई, निगम दे रहा बदबू की कमाई!"
    "अलका बाघमार की निष्क्रियता और नीलेश अग्रवाल की अनुभवहीनता ने दुर्ग को बना दिया बदबूगंज!"

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास और वैश्विक निवेश को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 10 दिवसीय विदेश यात्रा पर आज जापान और दक्षिण कोरिया के लिए रवाना हुए। मुख्यमंत्री के पदभार संभालने के 18 माह बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा है, जिसे प्रदेश के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
      मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जापान के ओसाका में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो में शामिल होंगे तथा वहां इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेंगे। इन क्षेत्रों में जापान और दक्षिण कोरिया दोनों ही देश वैश्विक स्तर पर अग्रणी हैं और छत्तीसगढ़ में इन क्षेत्रों में उद्योगों के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
       पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत अब तक करीब 6.30 लाख करोड़ रुपये के एमओयू (MoU) हो चुके हैं। इनमें से कई परियोजनाओं पर काम भी प्रारंभ हो चुका है और शेष को भी शीघ्र गति दी जाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन निवेश प्रस्तावों के जरिए प्रदेश में न केवल औद्योगिक ढांचा मजबूत होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा –
    "छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल्स और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में हम राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान दिलाएंगे। हमारी कोशिश है कि यहां के संसाधनों और क्षमता को उद्योगों के माध्यम से विकास का मजबूत आधार बनाया जाए।"
    प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल प्रदान कर रही है, जिसके चलते देश-विदेश की प्रमुख कंपनियां छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित हो रही हैं। मुख्यमंत्री की इस यात्रा से प्रदेश और एशियाई औद्योगिक महाशक्तियों—जापान व दक्षिण कोरिया—के बीच आर्थिक सहयोग और निवेश की नई राह खुलने की संभावना प्रबल हो गई है।
      छत्तीसगढ़, जो अब तक अपनी खनिज संपदा और कृषि उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध रहा है, अब उच्च तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक औद्योगिक साझेदारी का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की यह विदेश यात्रा निश्चित ही प्रदेश के औद्योगिक एवं आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

    20 अगस्त को तीन नए चेहरों ने ली शपथ, विभाग भी आवंटित — पूर्व CM बोले, कांग्रेस सरकार को नहीं मिली थी अनुमति, अब भाजपा ने कैसे कर लिया विस्तार?

    रायपुर। शौर्यपथ ।
       छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमाती दिख रही है। प्रदेश में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री के साथ कुल 14 मंत्रियों की सरकार अब सत्ता संचालन कर रही है। 20 अगस्त को शपथ ग्रहण के साथ ही तीन नए चेहरों – दुर्ग से गजेंद्र यादव, आरंग से गुरु खुशवंत सिंह एवं सरगुजा संभाग से राजेश अग्रवाल – को कैबिनेट मंत्री बनाया गया और देर शाम इन्हें विभाग भी आवंटित कर दिए गए।
    लेकिन, इस विस्तार के तुरंत बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “मौजूदा मंत्रिमंडल अवैधानिक है।” बघेल के मुताबिक, कांग्रेस सरकार ने 2018 से ही 14 मंत्री शामिल करने की कोशिशें की थीं और इस विषय को न केवल विधानसभा में उठाया गया बल्कि केंद्र को भी प्रस्ताव भेजा गया था, मगर तत्कालीन केंद्र शासन ने अनुमति नहीं दी।
       अब सवाल यह उठ रहा है कि भाजपा सरकार ने किस आधार पर 14 मंत्रियों का मंत्रिमंडल गठित किया और क्या इसे केंद्र की औपचारिक मंजूरी मिली है?
    "हरियाणा मॉडल" की तर्ज पर छत्तीसगढ़
       सूत्र बताते हैं कि राज्य में "हरियाणा मॉडल" अपनाते हुए 14 सदस्यों की कैबिनेट बनाई गई है। लेकिन पूर्व CM के आरोपों ने यह बहस शुरू कर दी है कि क्या इस मॉडल को प्रदेश में लागू करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई है, या फिर यह सिर्फ़ राजनीतिक प्रयोग है?
    सियासी गर्माहट और आने वाले सवाल
       भूपेश बघेल के बयान के बाद से कांग्रेस हमलावर है और भाजपा को इस पर स्पष्टीकरण देना होगा कि आखिर अब जो संख्या बढ़ाई गई, उसकी संवैधानिक वैधता क्या है। प्रदेश की सियासत में अब चर्चाओं का नया दौर शुरू हो गया है—“क्या राज्य सरकार ने केंद्र की मंजूरी लेकर ही यह कदम उठाया है या फिर यह निर्णय सिर्फ़ राजनीतिक दबाव और दिखावे के तहत लिया गया?”
    आगे की राजनीतिक दिशा
      एक तरफ भाजपा सरकार अपने नए मंत्रियों के साथ प्रशासनिक गति पकड़ने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस “ग़ैरक़ानूनी मंत्रिमंडल” के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई की रणनीति बना रहा है। आने वाले दिनों में इस मसले पर न केवल विधानसभा में तेज़ हलचल देखने को मिलेगी, बल्कि प्रदेश की जनता भी सरकार और विपक्ष दोनों की राजनीतिक चालों पर कड़ी नज़र बनाए रखेगी।
    ? यह खबर राजनीतिक निहितार्थों से भरपूर है और सीधे तौर पर जनता के विश्वास बनाम संवैधानिक वैधता की बहस खड़ी करती है।

    दुर्ग शहर की अव्यवस्था से जनता निराश, अतिक्रमण और गंदगी ने बढ़ाई परेशानी; कैबिनेट मंत्री बने गजेंद्र यादव से विकास की नई गाथा लिखने की आस

    दुर्ग / शौर्यपथ / नगरीय निकाय चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी श्रीमती अलका बाघमार ने शहरवासियों से अतिक्रमण मुक्त दुर्ग, स्वच्छ और व्यवस्थित बाजार, भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई जैसी कई बड़ी घोषणाएँ की थीं। इन वादों पर भरोसा जताते हुए दुर्ग की जनता ने मतदान के माध्यम से उन्हें महापौर के रूप में चुना। लेकिन महज़ कुछ महीनों के कार्यकाल में ही नगर सरकार की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
      शहर के मुख्य मार्गों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा, जवाहर नगर से सुराना कॉलेज तक फैली गंदगी और कचरे के ढेर, सड़कों के किनारे अवैध अतिक्रमण, जगह-जगह बुझी पड़ी स्ट्रीट लाइटें और थोड़ी-सी बारिश में ही पूरे शहर का जलभराव जैसी समस्याओं ने जनता को निराश किया है। दो महीने तक चले 'महासफाई अभियानÓ का परिणाम भी कुछ घंटों की बारिश में ही धुल गया।
      इन हालातों ने न केवल महापौर की कार्यशैली पर बल्कि महापौर चयन में निर्णायक भूमिका निभाने वाले दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। जनता का मानना है कि जिस प्रत्याशी को उन्होंने सांसद के प्रभाव से चुना, वही अब अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
    जनता की आवाज़
      व्यापारीयो का कहना है – "बाजार क्षेत्र में हर दिन ट्रैफिक जाम और गंदगी से जूझना पड़ता है। हम उम्मीद कर रहे थे कि महापौर बनने के बाद कुछ सुधार होगा, परंतु हालात जस के तस हैं।"
      स्थानीय निवासियों ने कहा – "महज कुछ घंटों की बारिश में ही पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जनता पूछ रही है कि आखिर सफाई और नालों की देखरेख का जिम्मा किसका है?"

    सुराना कॉलेज के छात्र बोले – "हमारे कॉलेज के सामने कचरे के ढेर और आवारा मवेशियों की समस्या महीनों से बनी हुई है। प्रशासन और नगर निगम दोनों ही सिर्फ आश्वासन देते हैं।"

    अब नजरें टिकी हैं मंत्री गजेंद्र यादव पर
     ऐसे में अब उम्मीद की किरण दिख रही है दुर्ग शहर के विधायक गजेंद्र यादव से, जिन्हें हाल ही में प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। यह संयोग स्वर्गीय हेमचंद यादव के बाद पहली बार आया है जब दुर्ग शहर विधानसभा का कोई विधायक मंत्री पद से सुशोभित हुआ है।
      जनता को विश्वास है कि गजेंद्र यादव के मंत्री बनने से शहर के विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। बड़े पद के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है और अब नागरिकों की अपेक्षा है कि मंत्री गजेंद्र यादव गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर दुर्ग के लिए ठोस कार्य करेंगे।

    दुर्ग की जनता चाहती है कि—
    सड़कों और नालों की तत्काल मरम्मत हो,
    अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई की जाए,
    स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था को प्राथमिकता मिले,
    और जिला मुख्यालय के रूप में दुर्ग का विकास पूरे प्रदेश में मिसाल बने।
      आज दुर्ग की जनता जिस अव्यवस्था और उपेक्षा से गुजर रही है, उससे निकलने का रास्ता केवल मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवेदनशील नेतृत्व ही दिखा सकता है। ऐसे में शहरवासियों की निगाहें एक बार फिर अपने विधायक और अब मंत्री बने गजेंद्र यादव पर टिकी हैं कि वे दुर्ग की तकदीर बदलने की दिशा में निर्णायक कदम उठाएँ।

    ?? विश्लेषण बॉक्स

    राजनीतिक समीकरण:दुर्ग महापौर चुनाव में विजय बघेल की भूमिका ने भाजपा की स्थानीय राजनीति में हलचल मचाई थी। महापौर पर सवाल खड़े होने से उनकी साख भी प्रभावित हो रही है। गजेंद्र यादव की सक्रियता अब भाजपा के भीतर संतुलन साधने में अहम साबित हो सकती है।

    मुख्य चुनौतियाँ:
    नगरीय निकाय में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर अंकुश लगाना
    सफाई व्यवस्था और जलभराव की स्थायी समस्या का समाधान
    शहर में अवैध अतिक्रमण और यातायात अव्यवस्था पर सख्त कार्रवाई
    जनता की उम्मीदों को जल्द ठोस कामों में बदलना

    संभावनाएँ:यदि गजेंद्र यादव अपने मंत्री पद का प्रभाव शहर के विकास में दिखा पाते हैं तो वे न केवल दुर्ग बल्कि प्रदेश स्तर पर भी एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकते हैं। वहीं, यदि अव्यवस्था जस की तस रही तो इसका सीधा राजनीतिक असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।

      मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संभावित विदेश दौरे से पहले विस्तार की चर्चा तेज़
      90-सदस्यीय विधानसभा में संवैधानिक सीमा अनुसार अधिकतम 14 मंत्री (मुख्यमंत्री सहित) संभव—वर्तमान में 11
      क्या 33% महिला भागीदारी की ‘आदर्श परिपाटी’ मंत्रिमंडल में दिखेगी?

     रायपुर/विशेष संवाददाता शौर्यपथ
      छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की अटकलें एक बार फिर परवान चढ़ गई हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि 18 से 21 अगस्त के बीच किसी भी दिन मंत्रिमंडल में नए चेहरों को जगह मिल सकती है। फिलहाल सरकार में मुख्यमंत्री सहित 11 मंत्री हैं; संवैधानिक सीमा के अनुरूप तीन रिक्त पद भरे जा सकते हैं। चर्चा यह भी है कि इस विस्तार में महिला प्रतिनिधित्व को प्रमुखता दी जाएगी ताकि 33% आरक्षण की ‘आदर्श परिपाटी’ का संदेश कैबिनेट स्तर पर भी जाए।

    मुख्य विवरण
    संवैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 164(1A) के तहत 90-सदस्यीय विधानसभा में मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या 14 तय है (मुख्यमंत्री सहित)।
    वर्तमान स्थिति: सरकार में 11 मंत्री कार्यरत; 3 स्थान रिक्त।
    चर्चा: 18–21 अगस्त के बीच विस्तार की संभावना—आधिकारिक घोषणा शेष।
    राजभवन के ‘दरबार हॉल’ का नाम ‘छत्तीसगढ़ मंडपम’ किए जाने व यहीं शपथ समारोह की तैयारी की चर्चा—औपचारिक पुष्टि प्रतीक्षित।

    महिला प्रतिनिधित्व: नारा नहीं, नीति
       वर्तमान मंत्रिपरिषद में महिला मंत्रियों की संख्या 1 है। यदि कैबिनेट 14 तक भरता है, तो 33% के आदर्श मानक के हिसाब से कम-से-कम 5 महिलाओं की हिस्सेदारी का लक्ष्य प्रतीकात्मकता से आगे बढ़कर नीतिगत भागीदारी का संकेत देगा। विस्तार में कम-से-कम 1–2 नई महिला चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है। बस्तर से लता उसेंडी और दुर्ग संभाग से भावना बोहरा (जिन्हें 2024 में ‘उत्कृष्ट विधायक’ के रूप में सम्मानित किए जाने का उल्लेख है) जैसे नाम सियासी चर्चा में हैं।
      केंद्र स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नारी शक्ति वंदन’ (33% आरक्षण) के पैरोकार रहे हैं और यह विधेयक संसद से पारित हो चुका है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लिए यह विस्तार ‘आदर्श राज्य’ की छवि गढ़ने का अवसर बन सकता है।

    संभावित दावेदारों की भूमिका: दिए गए नाम सियासी चर्चाओं में चल रहे संभावित विकल्प हैं; आधिकारिक सूची/घोषणा शेष है। उद्देश्य सभी प्रमुख दावेदारों की भूमिका और संभावित संकेत को समग्रता से रखना है।

    1) गजेन्द्र यादव: दुर्ग से कांग्रेस के पिछले तीस सालो से लगातार हार / जीत के बावजूद प्रत्याशी रहे अरुण वोरा को चुनावी मैदान में आसान शिकस्त दी आसान इसलिए कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ कांग्रेसी ही मैदान में परदे के पीछे खड़े रहे शहर की जनता भी लगातार एक ही कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन से उब चुकी थी निष्क्रियता और चाटुकारिता से घिरे विधायक की छवि के कारण दुर्ग विधान सभा में चुनावी मौसम में यह चर्चा रही कि भाजपा से कोई भी प्रत्याशी मैदान में होगा जीत निश्चित है ऐसे में भाजपा प्रत्याशी गजेन्द्र यादव को आसान और बड़ी जीत मिली.वर्तमान समय में विधायक यादव और महापौर बाघमार की राजनैतिक दुरी संगठन के कार्यकर्ताओ की विधायक से दुरी के साथ साथ दल्बद्लुओ की फौज का करीबी होना चर्चा का विषय है तो सामाजिक स्तर पर यादव समाज के प्रतिनिधितत्व एक बड़ा फेक्टर साथ दे रहा है .

    2) राजेश अग्रवाल (सरगुजा)

    क्षेत्रीय महत्व: सरगुजा संभाग का प्रतिनिधित्व मज़बूत करता है, जहाँ संतुलन साधना आवश्यक माना जा रहा है। उत्तरी छत्तीसगढ़ की प्राथमिकताओं—सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई—पर फोकस।
    3) गुरु खुशवंत साहिब (रायपुर संभाग ): गुरु खुशवंत साहिब प्रदेश के एक बड़े वर्ग के धार्मिक guru के रूप में जाने जाते है ऐसे में प्रदेश सरकार इस बड़े वर्ग को भी साधने के लिए इन्हें मौका दे सकती है . एससी /एसटी वर्ग को प्रतिनिधितव मिलने से इस वर्ग के मतदाता का रुझान भी पार्टी की तरफ ज्यादा रहेगा ऐसे में इनकी दावेदारी की भी प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है और इन्हें केबिनेट में जगह मिलने की बात से चर्चो का बाजार गर्म है .
    4) राजेश मूणत : लंबे समय से सक्रिय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ नेता।अनुभवी हाथों से विभागीय डिलीवरी में तेजी लाने का संकेत। किन्तु पिछली बार भाजपा की सत्ता में रहने के दौरान महत्तवपूर्ण विभाग कीई जिम्मेदारी सँभालने वाले पूर्व मंत्री राजेश मुड़त के कई विभागीय कार्यो में अनियमितता और कमीशनखोरी की चर्चो से पूर्व की भाजपा सरकार को काफी नुकसान हुआ था और सत्ता हाथ से जाने का एक बड़ा कारण भी मुड़त को माना गया .
    5) अमर अग्रवाल: भाजपा के कद्दावर नेता के रूप में पहचान अनुभवी होने के साथ साथ प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ विधायक व लम्बे प्रशासनिक कार्यो का अनुभव किन्तु बड़ी अड़चन यह कि प्रदेश सरकार की वर्तमान राजनितिक गलियारों में चर्चा के अनुसार नए एवं युवा विधायको को यह मौका देने का जोर कही ना कही अमर अग्रवाल जैसे वरिष्ठ भाजपा विधायक को दरकिनार करता नजर आ रहा है वर्तमान समय में मंत्री मंडल में नए विधायको को जिम्मेदारी मिली जो सरकार की मंशा के अनुरूप जोश के साथ कार्य को अंजाम दे रहे है वही नै पीढ़ी को आगे करने की रणनीति कार्यकर्ताओ में भी उम्मीद की किरण के रूप में एक सार्थक माहौल को जन्म दे रही जो संगठन के लिए भी काफी महत्तवपूर्ण है भविष्य की राजनीती के
    6) भावना बोहरा (दुर्ग संभाग ): भावना बोहरा : महिला सशक्तिकरण की नई पहचान

    पंडरिया विधानसभा से पहली बार चुनाव जीतने वाली विधायक भावना बोहरा ने अपने सामाजिक और विकास कार्यों से जनता के बीच गहरी छाप छोड़ी है। धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली बोहरा को 2024 में उत्कृष्ट विधायक सम्मान भी मिला। व्यावसायिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं पर पकड़ बनाकर प्रशासनिक दक्षता दिखाई है।
    राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि प्रदेश सरकार उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान देती है तो यह न केवल महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम होगा, बल्कि भाजपा संगठन को भी महिलाओं के बीच सशक्त नेतृत्व प्रदान करेगा।
      निष्कर्षक संकेत: यदि तीन रिक्त स्थान में 2 पुरुष + 1 महिला या 1 पुरुष + 2 महिलाएँ का फार्मूला अपनता है, तो क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन के साथ महिला प्रतिनिधित्व का संदेश भी जाता है। दूसरी ओर 3 पुरुष विकल्प चुनने की स्थिति में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने का रोडमैप अगले फेरबदल में स्पष्ट करना होगा।
    ‘हरियाणा मॉडल’ का संदर्भ
     चर्चित ‘हरियाणा मॉडल’ का आशय संख्या-संतुलन और कार्य-वितरण वाले संकुचित-सक्षम कैबिनेट से है। छत्तीसगढ़ पहले से 14 की संवैधानिक सीमा में आता है; अतः यहाँ ‘मॉडल’ का अर्थ प्रशासनिक कार्यकुशलता और संतुलित प्रतिनिधित्व की कार्यशैली से है, न कि किसी कानूनी अपवाद से।
    चुनावी गणित बनाम शासन-प्राथमिकताएँ
     विधानसभा चुनावों के चक्र में प्रायः अंतिम वर्ष चुनावी मोड में बीतता है। ऐसे में इस विस्तार के बाद नए मंत्रियों के पास करीब दो वर्ष होंगे—अपने विभागीय प्रदर्शन से संदेश देने के लिए। क्षेत्रीय संतुलन (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर), सामाजिक संतुलन (ST/SC/OBC/सामान्य/धार्मिक-भाषाई समुदाय) और राजनीतिक योगदान/संगठनात्मक सक्रियता—इन तीनों कसौटियों पर संतुलित चयन सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत देगा।

    कैबिनेट विस्तार सरकार के राजनीतिक मनोविज्ञान और शासन-दृष्टि की परीक्षा है। यदि महिला प्रतिनिधित्व को अर्थपूर्ण ढंग से बढ़ाया जाता है, तो यह संदेश जाएगा कि छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय-निर्माण की मेज़ पर बराबरी से बैठी है।आधिकारिक निर्णय आते ही नामों/तिथियों/स्थल का उल्लेख अद्यतन किया जाएगा।

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