September 11, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    शासकीय बंगलों में कार्यालय या सत्ता का विशेषाधिकार? स्व. हेमचंद यादव के परिवार के कब्जे वाले आवास पर भी सवाल

    दुर्ग// जिला मुख्यालय दुर्ग की सिविल लाइन और आसपास का इलाका अधिकारियों के लिए बनाए गए शासकीय आवासों के कारण जाना जाता है। दूसरे जिलों से पदस्थ होकर आने वाले अधिकारियों के लिए ये आवास प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन जब यही शासकीय आवास जनप्रतिनिधियों के कार्यालय अथवा ऐसे लोगों के कब्जे में दिखाई दें, जिनकी पात्रता पर सवाल उठ रहे हों, तो व्यवस्था और नियम दोनों पर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।

    सबसे ज्यादा चर्चा दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर को लेकर है। ग्रामीण क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे विधायक का कार्यालय जिला मुख्यालय की सिविल लाइन स्थित शासकीय आवासीय परिसर में संचालित होना अब ग्रामीण क्षेत्र में भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय चर्चाओं में सवाल उठ रहा है कि जिस जनता ने ग्रामीण क्षेत्र से अपना प्रतिनिधि चुना, उसके बीच कार्यालय खोलने के बजाय शहरी क्षेत्र के शासकीय परिसर को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?

    बताया जा रहा है कि सिविल लाइन में लगभग तीन बंगलों के बड़े भूभाग को कार्यालय के रूप में उपयोग किए जाने की स्थिति बनी हुई है। यदि यह वास्तव में शासकीय आवासीय परिसरों का उपयोग है, तो बड़ा सवाल यह है कि क्या नियमों के तहत किसी विधायक को इस प्रकार शासकीय आवासीय संपत्ति का कार्यालय के लिए उपयोग करने की अनुमति है? यदि अनुमति है तो उसका आधार, अवधि और शर्तें क्या हैं? और यदि अनुमति नहीं है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

    मामला केवल विधायक के कार्यालय तक सीमित नहीं है। जिला मुख्यालय में वर्षों से कुछ शासकीय आवास ऐसे भी बताए जाते हैं, जिनका आवंटन स्थानांतरित हो चुके अधिकारियों के नाम पर बना हुआ है। सवाल यह है कि जब कोई अधिकारी दूसरे जिले में पदस्थ हो चुका है, तो उसके नाम पर दुर्ग का शासकीय आवास कितने समय तक रखा जा सकता है? ऐसे आवास खाली नहीं होने से नए पदस्थ होने वाले अधिकारियों को किराए के मकान में रहने की मजबूरी क्यों आती है?

    इसका उदाहरण नगर निगम के पूर्व आयुक्त के मामले से भी जुड़ता है, जिन्हें पदभार ग्रहण करने के बाद शुरुआती दौर में किराए के आवास का सहारा लेना पड़ा और बाद में प्रयासों के बाद शासकीय आवास उपलब्ध हो सका। अब नए अधिकारियों की पदस्थापना के साथ फिर वही स्थिति सामने आने की आशंका प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

    इसी कड़ी में स्वर्गीय हेमचंद यादव को आवंटित शासकीय आवास को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वर्षों बाद भी उक्त आवास उनके परिवार के उपयोग में है। यदि वर्तमान में परिवार का कोई सदस्य शासकीय आवास की पात्रता रखने वाले संवैधानिक अथवा विभागीय पद पर नहीं है, तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि आवास किस नियम और किस आदेश के आधार पर अब तक आवंटित है।

    चार आवास खाली हों तो कितने अधिकारियों को मिल सकती है सुविधा?

    यदि सिविल लाइन के ऐसे शासकीय आवास, जिनका उपयोग वर्तमान पात्र अधिकारियों के बजाय अन्य प्रयोजनों के लिए हो रहा है, नियमानुसार मुक्त कराए जाएं तो जिला मुख्यालय में पदस्थ कई वरिष्ठ अधिकारियों को आवास की सुविधा मिल सकती है। इससे अधिकारियों को किराए के मकान की तलाश से राहत मिलेगी और शासन द्वारा निर्मित आवासों का वास्तविक उद्देश्य भी पूरा होगा।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि शासकीय आवास अधिकारियों के लिए हैं या सत्ता से जुड़े लोगों के प्रभाव के लिए?

    चुनाव के दौरान जनता, व्यवस्था और सिद्धांतों की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि सत्ता में आने के बाद भी वे उन्हीं सिद्धांतों का पालन करें। ग्रामीण क्षेत्र से चुने गए प्रतिनिधि का जिला मुख्यालय के शासकीय परिसर में कार्यालय होना यदि नियमसम्मत है तो प्रशासन को आदेश सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि नियमसम्मत नहीं है तो कार्रवाई कौन करेगा?

    ग्रामीण जनता के बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है—विधायक ग्रामीण क्षेत्र से जीते हैं, लेकिन कार्यालय के लिए पसंद शहरी सिविल लाइन ही क्यों?

    दुर्ग प्रशासन को अब शासकीय आवासों के आवंटन, कब्जे, पात्रता और वर्तमान उपयोग की निष्पक्ष समीक्षा कर स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शासकीय संपत्ति का उपयोग नियमों के अनुसार हो रहा है या फिर सत्ता और प्रभाव के चलते नियमों की परिभाषा बदल रही है।

    निगम के अपने पत्र में किराये पर देने पर रोक, फिर भी ‘शंभवी कंप्यूटर’ का संचालन—अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल दुर्ग। सरकारी संपत्ति के आवंटन में नियम इसलिए…

    वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने पांच जिलों की वर्चुअल बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की; ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’ सहित होंगी विविध गतिविधियां

    रायपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा, नेतृत्व एवं समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करने तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी का स्वरूप देने के उद्देश्य से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जाएगा। अभियान के माध्यम से केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के साथ समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिए वित्त मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सरगुजा, जशपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की प्रशासनिक बैठक ली।
    उन्होंने नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, कार्ययोजना, विभागीय दायित्वों तथा प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी लेते हुए सभी कार्यक्रमों का समयबद्ध और बेहतर विभागीय समन्वय के साथ क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम, वार्ड, विकासखंड एवं जिला स्तर पर अधिकतम जनभागीदारी हो तथा जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को अभियान से जोड़ा जाए।

    17 सितंबर की शाम हर घर जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’

    अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर की शाम ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगा। प्रत्येक परिवार को दीप प्रज्वलन से जोड़ते हुए इसे 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प का प्रतीक बनाया जाएगा। मैदानी टीमें घर-घर पहुंचकर नागरिकों को सहभागी बनने के लिए प्रेरित करेंगी।

    बच्चों के सपनों से सामने आएगा विकसित भारत का विजन

    17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक शासकीय एवं निजी विद्यालयों में ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ पहल के तहत विकसित भारत और 25 वर्षों की सेवा यात्रा पर आधारित ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा तथा बच्चों की कल्पनाओं को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।

    ‘नमो सेवा गाथा’ बताएगी सेवा और बदलाव की कहानी

    ‘नमो सेवा गाथा’ के तहत 17 सितंबर से गांव-गांव नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से 25 वर्षों की सेवा यात्रा, जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आए बदलाव की कहानियां प्रस्तुत की जाएंगी। 2 अक्टूबर को देश के 100 प्रमुख स्थलों पर विशेष मंचन प्रस्तावित है।

    ‘आंगन का उत्सव’ में माताओं से संवाद, कार्यकर्ताओं का सम्मान

    25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘आंगन का उत्सव’ आयोजित होगा। इसमें माताओं एवं बच्चों की सहभागिता के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा। पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

    ‘कहानी बदलाव की’ से सामने आएंगी सफलता की कहानियां

    शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की वास्तविक सफलता की कहानियां ‘कहानी बदलाव की’ पहल के तहत संकलित की जाएंगी। इनका डिजिटल डेटा बैंक तैयार किया जाएगा, जिसमें हितग्राही, स्थान, जिला, संबंधित योजना और जीवन में आए बदलाव की जानकारी दर्ज होगी।

    ‘सेवा ज्योति यात्रा’ से जुड़ेगा जन-जन

    25 वर्षों की सेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प को मजबूत करने के लिए गांव, जिला एवं राज्य स्तर पर ‘सेवा ज्योति यात्रा’ आयोजित की जाएगी। इसके साथ ‘सेवा मेरा योगदान’ पहल के तहत नागरिकों और संस्थाओं को स्वच्छता सहित विभिन्न सेवा गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिलेगा।

    ‘सरकार आपके द्वार’ पहुंचाएगा योजनाओं का लाभ

    ‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ के तहत विधानसभा एवं विकासखंड स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता में पात्र नागरिकों को शासकीय योजनाओं की जानकारी देने, उन्हें योजनाओं से जोड़ने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

    विविध गतिविधियों से अभियान को मिलेगा जनआंदोलन का स्वरूप

    अभियान में ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘जल जन सेवा संकल्प’, ‘रंगोली राष्ट्र/भारत मंडल’, ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज’ तथा ‘जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट’ जैसी गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के अंतर्गत परिवर्तनकारी स्थलों का भ्रमण तथा 7 अक्टूबर को सेवा ज्योति यात्रा आयोजित करने की रूपरेखा है। बैठक में संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

    राज्य गठन के बाद पहली बार एक साथ 21 सहायक संचालकों की नियुक्ति, CM साय ने सौंपे नियुक्ति पत्र; बोले—जनहित, पारदर्शिता और संवेदनशीलता को दें सर्वोच्च प्राथमिकता

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के तेजी से बढ़ते शहरीकरण को अब नई पीढ़ी के प्रोफेशनल टाउन प्लानर्स की ताकत मिलेगी। राज्य गठन के बाद पहली बार नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक साथ 21 सहायक संचालकों (योजना) की नियुक्ति हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में सभी नवचयनित अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहरों का विकास केवल आज की जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। भविष्य के छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों को आकार देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अब इन युवा टाउन प्लानर्स के कंधों पर है।

    25 वर्षों में 17 नियुक्तियां, अब एक साथ 21 युवा अधिकारी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में कुल 17 सहायक संचालकों की नियुक्ति हुई थी, जबकि अब पहली बार एक साथ 21 युवा अधिकारियों को नियुक्ति दी गई है।

    उन्होंने कहा कि यह सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसके तहत भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विभागों को पर्याप्त मानव संसाधन और प्रोफेशनल क्षमता से मजबूत किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने नवचयनित अधिकारियों के माता-पिता एवं परिजनों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षित और योग्य बनाकर उन्हें जिम्मेदार पद पर प्रदेश एवं जनता की सेवा करते देखना माता-पिता के लिए गर्व का क्षण होता है। इन युवाओं के जीवन में आज नई जिम्मेदारी की शुरुआत हुई है, जिसके साथ परिवार की अपेक्षाएं और प्रदेश की आशाएं भी जुड़ी हैं।

    नक्शे बनाने तक सीमित नहीं है टाउन प्लानिंग

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। गांवों से शहरों की ओर आबादी का विस्तार हो रहा है, नगरों की सीमाएं बढ़ रही हैं और प्रमुख सड़कों व शहरों के आसपास नई बसाहटें विकसित हो रही हैं। आने वाले वर्षों में यह गति और तेज होगी।

    ऐसे में आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक गतिविधियां, सड़कें, सार्वजनिक स्थल, परिवहन, जल निकासी और नागरिक सुविधाओं के लिए दीर्घकालीन एवं वैज्ञानिक योजना जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि टाउन प्लानिंग केवल नक्शे बनाने या भू-उपयोग तय करने का काम नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और शहरों के भविष्य से है। अच्छी योजना शहर को व्यवस्थित बनाती है, नागरिक सुविधाओं को सुलभ करती है और अनियोजित विस्तार से पैदा होने वाली समस्याओं को रोकती है।

    ‘जनहित सर्वोपरि’—अधिकारियों को CM साय की नसीहत

    मुख्यमंत्री ने नवचयनित अधिकारियों से कहा कि शासकीय सेवा जनता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। अधिकारियों द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय किसी न किसी रूप में आम नागरिक के जीवन को प्रभावित करता है।

    उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, निष्ठा, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ दायित्व निभाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें आम नागरिक को अपने छोटे से छोटे काम के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए नागरिक सुविधा और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अधिकारियों का दायित्व है।

    उन्होंने युवा अधिकारियों से अपनी तकनीकी शिक्षा, आधुनिक ज्ञान और नवाचार का उपयोग प्रदेश के बेहतर नियोजन में करने को कहा।

    ‘छत्तीसगढ़ अंजोर : विजन 2047’ से जुड़ी विकास की दिशा

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों के विकास की स्पष्ट दिशा तय करते हुए ‘छत्तीसगढ़ अंजोर : विजन 2047’ तैयार किया है। सरकार का लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां आधुनिक अधोसंरचना, बेहतर नागरिक सुविधाएं और युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों तथा विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं होगा। इसमें शासन-प्रशासन, युवाओं और प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

    ढाई साल में 15 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार और आगे बढ़ने के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में विभिन्न विभागों में 15 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्तियां दी गई हैं।

    पुलिस विभाग में 7 हजार से अधिक और शिक्षा विभाग में 3 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। बिजली विभाग में भी 1200 से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया निरंतर जारी है।

    उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए अवसर केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं हैं। नई औद्योगिक विकास नीति में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। रोजगार मेलों, निजी क्षेत्र, स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से भी रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

    ‘जिस पारदर्शिता से नियुक्ति मिली, वही जनता तक पहुंचाएं’—ओ.पी. चौधरी

    वित्त तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने नवचयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सुनियोजित शहरीकरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के विकास के साथ शहरी आबादी और शहरों का विस्तार स्वाभाविक है। इसलिए भविष्य की आवश्यकताओं का पहले से आकलन कर आधुनिक एवं वैज्ञानिक टाउन प्लानिंग करना समय की आवश्यकता है।

    श्री चौधरी ने कहा कि पहले नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक बार में तीन-चार सहायक संचालकों की नियुक्तियां होती थीं, लेकिन इस बार एक साथ 21 अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। इससे विभाग की प्रोफेशनल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उनकी भर्ती पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया से हुई है। अब उनकी नैतिक जिम्मेदारी है कि इसी पारदर्शिता और ईमानदारी को अपनी कार्यशैली का आधार बनाएं। नागरिक जब नक्शा स्वीकृति या किसी अन्य कार्य के लिए कार्यालय आए, तो उसे व्यवस्था में सरलता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता का अनुभव होना चाहिए।

    नई पीढ़ी की ऊर्जा से विकास को मिलेगी नई गति—केदार कश्यप

    वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने नवचयनित अधिकारियों एवं उनके परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों की नियुक्ति प्रदेश के सुनियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नई पीढ़ी के अधिकारियों का ज्ञान, ऊर्जा और आधुनिक दृष्टिकोण विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नवचयनित अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण सहभागी बनेंगे।

    कार्यक्रम में विभागीय सचिव श्री अंकित आनंद, आयुक्त श्री अवनीश शरण सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, नवचयनित सहायक संचालक एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।

    युवाओं के सपनों को पंख, छत्तीसगढ़ के विकास को नई उड़ान

    रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के युवाओं, रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता, निर्यात और न्यायिक अधोसंरचना को मजबूत करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट के फैसलों से छत्तीसगढ़ में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसरों के साथ-साथ कौशल, निर्यात और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    500 करोड़ का ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ मंजूर

    मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के युवाओं को जॉब-सीकर से जॉब-क्रिएटर बनाने और छत्तीसगढ़ को स्टार्टअप, नवाचार एवं नई तकनीक आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ को मंजूरी दी है।
    मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों में ₹500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
    इसके साथ ही NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास तथा औपचारिक रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। मिशन का लक्ष्य युवाओं को बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाना है।

    ‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’ को मंजूरी

    प्रदेश को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने ‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’ को मंजूरी प्रदान की है। नई नीति के माध्यम से प्रदेश में मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच और व्यापार सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों के मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित किया जाएगा।
    ई-कॉमर्स, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों एवं निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। नीति का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के निर्यात में गुणात्मक और मात्रात्मक वृद्धि लाते हुए प्रदेश को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों से और मजबूती से जोड़ना है।

    नवा रायपुर में बनेगा नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट

    मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को ग्राम तेंदुवा में 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। लगभग 200 करोड़ की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं छात्रावास सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    NSTI में प्रतिवर्ष 1,000 प्रशिक्षुओं को दीर्घकालिक पाठ्यक्रम तथा 3,000 प्रशिक्षुओं को अल्पकालीन कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। संस्थान की स्थापना से प्रदेश के युवाओं के लिए उन्नत कौशल प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही नवा रायपुर को देश में कौशल एवं तकनीकी शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

    सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष

    मंत्रिपरिषद ने राज्य शासन के अधीन कार्यरत स्थायी एवं अस्थायी शासकीय सेवकों, निगम-मंडल एवं स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों तथा नगर सैनिकों को बड़ी राहत दी है। अब अन्य शासकीय सेवाओं एवं उच्च पदों के लिए आवेदन करने की निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस निर्णय से शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को अन्य सेवाओं और उच्च पदों पर आगे बढ़ने के लिए अधिक और समान अवसर मिल सकेंगे। इस संबंध में राज्य शासन द्वारा एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

    दुर्ग में बनेगा नया जिला न्यायालय परिसर

    मंत्रिपरिषद ने दुर्ग जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण के लिए ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के समीप 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के नाम दर्ज उक्त भूमि के बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों भूखंडों का वर्तमान मूल्य लगभग समान है।

    इस निर्णय से दुर्ग में आधुनिक एवं सुव्यवस्थित जिला न्यायालय परिसर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा और जिले की न्यायिक अधोसंरचना को और मजबूती मिलेगी।

    युवा, रोजगार, कौशल और विकास पर सरकार का फोकस

    मंत्रिपरिषद के इन फैसलों से एक ओर जहां प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल, स्टार्टअप और उद्यमिता के नए द्वार खुलेंगे, वहीं दूसरी ओर निर्यात, तकनीकी शिक्षा और न्यायिक अधोसंरचना के क्षेत्र में भी विकास को गति मिलेगी। ये निर्णय छत्तीसगढ़ को कौशल, नवाचार, उद्योग और वैश्विक व्यापार के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

    सरकार की मंशा अच्छी, लेकिन अफसर की कार्यप्रणाली पर सवाल; गुमठी घोटाले से लेकर इंदिरा मार्केट की दुकानों तक शिकायतें, फिर भी नतीजा सिफर शौर्यपथ विशेष दुर्ग। सरकार शहर की…

    कोंडागांव, शौर्यपथ। कल पूरे देश में शिक्षक दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया और बनाया भी जाना चाहिए क्योंकि शिक्षा ही इस देश का मूल आधार है शिक्षा के बिना जग अंधेरा है पर क्या आप किसी ने सोचा की हमारी शिक्षा व्यवस्था में कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जो बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिनको उस कुर्सी में बैठने के लिए और बच्चों की जीवन को बचाने व सुरक्षित करने के लिए सरकार उनके ऊपर 100000 ₹150000 का खर्चा कर रही है पर वो सोचते हैं पर जब बच्चों की को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने और उन्हें न्याय दिलाने की बात आती है तब ये अपना दरवाज़ा बंद कर लेते है। कभी बहाना करते हैं कि सीट फुल हो गया, तो कभी बहाना करते हैं कि आपका यह कागज नहीं है। वो ऐसा ही मामला ग्राम कोरोबेड़ा का है। यहां के बच्चो के सिर्फ माँ बाप नहीं होने का सजा इन्हें मिल रहा है और ये सजा, ये अपनी किस्मत से नहीं भोग रहे है हमारे शिक्षकों की वजह से भोग रहे हैं, कभी उन बच्चों को आधार कार्ड के कारण स्कूल से निकाल दिया गया जब आधार कार्ड बन गया तो जिला कलेक्टर के आदेश को नजरअंदाज करते हुए उन बच्चों को फिर से गाँव भेज दिया गया। गाँव के हॉस्टल में जब जाकर वह बोले कि इन्हें यहां रख के ही पढ़ाना है तो वहां के टीचर बोले कि हमारे पास सीट फूल हो गया है। आप अपने घर से पैदल आ जाओ, जो कि उनका घर 4 km दूर है टीचर को यह शब्द बोलने से पहले ये सोचना चाहिए कि यह सिर्फ दूर नहीं बीच में जंगल है, नदी है, नाले हैं। और बच्चों की उम्र मात्र 5 -6 साल है, यह घटना न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर आवाज़ उठाती है। ये घटना यह भी बताती है कि बिना माँ बाप के बच्चों का जीना इस समाज में इस देश में कितना मुश्किल है जहां इन्हें हर कदम पर यह एहसास दिलाया जाता है कि तुम्हारे लिए कोई नहीं है तुम अकेले हो यही दुनिया का सबसे बड़ा हकीकत है कि जहां पूरे समाज को पूरे प्रशासन को इनका परिवार बनके इनके लिए काम करना था वह इन्हें गली गली भटकने पर मजबूर कर दिया गया।

    जिला कलक्टर ने कोशिश भी किया। आदेश भी किया पर जो जवाबदार अधिकारी है, उन्हें कोई मतलब नहीं सिर्फ उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ लें, डॉ इंजीनियर कमिश्नर बन जाए।हमें गरीबों के बच्चों से क्या लेना है?इन्हें मानसिकता के साथ आज पुरा सिस्टम कार्य कर रहा है, यह मात्र सिर्फ दो बच्चों की कहानी नहीं है।यह उन तमाम जरूरतमंद, यह तमाम अनाथ तमाम गरीब और गरीबी से जूझ रहे उन बच्चों की कहानी है जो पढ़ना तो चाहते हैं, पर उन्हें मजबूर किया जाता है कि तुम्हारे लिए शिक्षा नहीं बनी है।और यही बच्चे जब शिक्षा से वंचित रह जाते हैं कोई गलत काम करते हैं नशा करते हैं या किसी और घटना को अंजाम दे देते हैं। तो यही प्रशासन अपने लाखों और करोड़ों की बिल्डिंग में बैठकर तक चर्चा करते हैं। ये हमारे क्षेत्र का हमारे जिले का लॉयन ऑर्डर कैसे बिगड़ रहा है कौन है यह है ये गुंडा कौन है यह नशेड़ी है, और उठाकर उसे जेल भेज दिया जाता है पर क्या उसकी आपबीती जानने का या उसे पहचानने का या किस कारण से आज उसका यह हालत हुई है इसके ऊपर कभी किसी ने सोचा है किसी ने चर्चा किया है इसका कारण भी यही समाज है यही प्रशासन है जब वो न समझ था तो स्कूल स्कूल घूम रहा था कि मुझे कोई पढ़ा लो उस समय कोई पढ़ाने वाला नही था और ना ही कोई सहारा देने वाला था हमें उन चीजों में भी विचार करना और सोचने की उतनी ही जरूरी है की हम प्रशासन के सबसे बड़े पद और प्रतिष्ठा में बैठकर। हमने उन नौजवान, वो अनाथ, उन गरीब जरूरतमंद बच्चों के लिए क्या किया है। कि आज वो बर्बादी के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंच गये। वो नहीं पहुंचे, उन्हें हमारे सिस्टम ने हमारे समाज भी उतना ही जिम्मेदार है जितना उस बच्चे की मजबूरी जिम्मेदार थी ये हम सभी के लिए प्रश्नवाचक चिन्ह है।क्या हमने अपने समाज के लिए अपने बच्चों के लिए क्या किया है?

    अंबिकापुर/सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत शिवपुर स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में अव्यवस्थाओं को लेकर छात्राओं का आक्रोश सोमवार को सड़क पर दिखाई दिया। स्कूल और हॉस्टल की कथित बदहाली से नाराज 30 से अधिक छात्राएं सुबह करीब 8 बजे पैदल ही जिला मुख्यालय अंबिकापुर में कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़ीं।

    छात्राओं का कहना है कि स्कूल और हॉस्टल में लंबे समय से कई तरह की समस्याएं बनी हुई हैं। बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उन्होंने खुद प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का फैसला लिया।

    एक महीने से बिजली की समस्या, पढ़ाई प्रभावित

    छात्राओं की सबसे बड़ी शिकायत स्कूल और हॉस्टल में बिजली व्यवस्था को लेकर है। उनका आरोप है कि करीब एक महीने से बिजली की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। खासतौर पर हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    मेस के खाने और सफाई व्यवस्था पर भी सवाल

    छात्राओं ने हॉस्टल के मेस में गंदगी और खराब भोजन पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल रहा है और मेस की साफ-सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।

    इसके अलावा छात्राओं ने फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी की शिकायत की है। उनका कहना है कि शिक्षकों की कमी के चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

    प्राचार्य के व्यवहार को लेकर भी शिकायत

    छात्राओं ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं के साथ-साथ प्राचार्य के व्यवहार और कथित मनमानी को लेकर भी गंभीर शिकायतें प्रशासन के सामने रखी हैं। छात्राओं का कहना है कि कई समस्याओं के बावजूद उनकी शिकायतों का उचित समाधान नहीं किया गया।

    अधिकारियों ने रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्राएं रहीं अडिग

    सुबह शिवपुर से अंबिकापुर के लिए निकली छात्राओं को रास्ते में प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों ने रोकने और समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उन्हें वापस लौटने के लिए समझाया, लेकिन छात्राएं अपनी मांग पर अड़ी रहीं।

    छात्राओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे कलेक्टर से प्रत्यक्ष मुलाकात कर अपनी शिकायत रखना चाहती हैं।

    बैठक छोड़कर छात्राओं से मिलने पहुंचे कलेक्टर

    छात्राओं का जत्था जब लमगांव पहुंचा, तब सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत प्रशासनिक बैठक में मौजूद थे। छात्राओं की स्थिति की जानकारी मिलने पर उन्होंने बैठक बीच में रोककर स्वयं छात्राओं से मुलाकात की।

    कलेक्टर ने छात्राओं से उनकी समस्याएं सुनीं और उनका शिकायती पत्र भी प्राप्त किया। उन्होंने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि हॉस्टल और स्कूल में सामने आई शिकायतों की जांच कराई जाएगी तथा यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    सवाल यह कि आखिर छात्राओं को सड़क पर क्यों उतरना पड़ा?

    एकलव्य आवासीय विद्यालयों में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के रहने और पढ़ने की व्यवस्था होती है। ऐसे में बिजली, भोजन, स्वच्छता और शिक्षकों जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर छात्राओं का इस तरह पैदल कलेक्टर तक पहुंचना स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    अब देखने वाली बात होगी कि कलेक्टर के आश्वासन के बाद जांच में क्या सामने आता है और छात्राओं की शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी होता है।

    बिलासपुर। लोकभवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गरिमामय वातावरण में हुआ। इस अवसर पर श्री कृष्ण राम महापात्र ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की।

    मुख्य न्यायाधीश के रूप में नवीन दायित्व संभालने पर श्री कृष्ण राम महापात्र को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की गई। न्यायपालिका के इस महत्वपूर्ण दायित्व के साथ उनसे न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की अपेक्षा जताई गई।

    शपथ ग्रहण समारोह में महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री सुनील सोनी एवं श्री अनुज शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, न्यायिक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

    समारोह में उपस्थित अतिथियों ने श्री महापात्र को नए दायित्व के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    दंतेवाड़ा की शिक्षा व्यवस्था का ‘जमीनी रिपोर्ट कार्ड’: बच्चों ने गुलदस्ता देकर किया स्वागत, प्रार्थना में नंगे पैर खड़े रहे; विभाग बोला—‘जूते मंगाए हैं, जल्द मिलेंगे’

    शौर्यपथ संवाददाता कृष्णा मंडल

    दंतेवाड़ा / तस्वीर कभी-कभी वह सच बोल देती है, जिसे फाइलों में दर्ज आंकड़े और सरकारी दावे भी नहीं बता पाते। दंतेवाड़ा में शिक्षा मंत्री के स्कूल-आश्रम निरीक्षण के दौरान सामने आई एक तस्वीर ने जिले की शिक्षा व्यवस्था के दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए। मंत्री के स्वागत में बच्चों के हाथों में छिंद से बने खूबसूरत गुलदस्ते थे, चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन कई बच्चों के पैरों में जूते नहीं थे।

    प्रार्थना सभा में मंत्री बच्चों के साथ खड़े होकर उनकी मधुर आवाज सुनते रहे। बच्चे अनुशासन के साथ प्रार्थना करते रहे, लेकिन नीचे नजर गई तो किसी के पैर खाली थे तो कोई हवाई चप्पल में खड़ा था। दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के अधिकारी पूरी वर्दी और चमचमाते जूतों में मंत्री को जिले की शिक्षा व्यवस्था का हाल बताते नजर आए।

    यही दृश्य अब एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है—क्या दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था की चमक बच्चों के चेहरों तक पहुंचने से पहले ही अफसरों के जूतों में सिमट गई?

    बच्चों ने दिया गुलदस्ता, बदले में कब मिलेगा पूरा हक?

    मंत्री के स्वागत के लिए बच्चों ने पूरी तैयारी की। हाथों में गुलदस्ते लेकर उन्होंने अतिथि का अभिनंदन किया। प्रार्थना सभा में भी उत्साह के साथ शामिल हुए। लेकिन सवाल यह है कि जिन बच्चों से व्यवस्था अनुशासन, उपस्थिति और बेहतर परिणाम की उम्मीद करती है, क्या उनकी बुनियादी जरूरतों की जिम्मेदारी भी उसी व्यवस्था की नहीं है?

    बच्चों के हाथ में स्वागत का गुलदस्ता था, मगर पैरों में जूते नहीं। यह विरोधाभास सरकारी शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।

    DMF-CSR के करोड़ों के बीच बच्चों के पैरों में चप्पल क्यों?

    दंतेवाड़ा को DMF और CSR मद से मिलने वाले बड़े संसाधनों वाले जिलों में गिना जाता है। शिक्षा और आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर योजनाएं और बजट होने के बावजूद यदि स्कूल के बच्चों को अभी तक पूरी यूनिफॉर्म और जूते नहीं मिल पाए हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

    आखिर बजट की फाइलों से जूते निकलकर बच्चों के पैरों तक पहुंचने में इतना समय क्यों लग रहा है?

    अगर स्कूल की प्रार्थना सभा में ही बच्चे नंगे पैर खड़े दिखाई दें, तो शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बच्चों के पैरों से भी करनी पड़ेगी।

    शिक्षा अधिकारी बोले—‘जूते मंगाए गए हैं, जल्द मिलेंगे’

    मामले को लेकर जब हमारी टीम ने दंतेवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद ठाकुर से फोन पर जानकारी ली, तो उन्होंने बताया कि जूते मंगाए गए हैं और जल्द उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

    हालांकि, शिक्षा सत्र शुरू हुए कई महीने गुजर चुके हैं और यदि अब तक विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म का पूरा सेट उपलब्ध नहीं हो पाया है, तो विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है।

    खास बात यह है कि शिक्षा मंत्री करीब दो-तीन माह पहले सार्वजनिक मंच से यह दावा कर चुके हैं कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार बच्चों को यूनिफॉर्म और पाठ्य सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। ऐसे में अलग-अलग स्थानों से पाठ्य सामग्री और अब यूनिफॉर्म के पूरे सेट उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आना सरकारी दावे और जमीनी स्थिति के बीच अंतर की ओर इशारा करता है।

    मंत्री ने बच्चों की आवाज सुनी, अब पैरों की खामोशी भी सुनेंगे?

    मंत्री ने बच्चों के साथ प्रार्थना की। बच्चों की मधुर आवाज सुनी और उनके उत्साह को करीब से देखा। लेकिन इस दौरान बच्चों के नंगे पैर भी शायद किसी सवाल की तरह सामने खड़े थे।

    अब सवाल यह है कि क्या मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारी इस खामोश सवाल को भी सुनेंगे?

    क्योंकि बच्चे शिकायत नहीं कर रहे थे।
    वे बस नंगे पैर प्रार्थना में खड़े थे।

    100 प्रतिशत उपस्थिति, लेकिन 100 प्रतिशत सुविधा कब?

    बच्चे तमाम परिस्थितियों के बावजूद स्कूल पहुंच रहे हैं। उनकी नियमित उपस्थिति, अनुशासन और पढ़ाई के प्रति लगन निश्चित रूप से सराहनीय है। मगर सरकार से सवाल है कि क्या बच्चों को सिर्फ स्कूल तक पहुंचा देना ही जिम्मेदारी है?

    उनके पैरों में जूते, शरीर पर पूरी यूनिफॉर्म, हाथों में पाठ्य सामग्री और पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी तो व्यवस्था का दायित्व है।

    दंतेवाड़ा का ‘जमीनी रिपोर्ट कार्ड’ आखिर क्या कह रहा है?

    सरकार आदिवासी अंचलों में शिक्षा की तस्वीर बदलने, बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात करती है। दूसरी तरफ मंत्री के सामने ही बच्चों का नंगे पैर खड़ा होना इस दावे की जमीनी तस्वीर पर सवाल खड़ा कर रहा है।

    फाइलों में यूनिफॉर्म पूरी हो सकती है, लेकिन बच्चों के शरीर पर भी पूरी है या नहीं—इसका जवाब तस्वीर दे रही है।

    और तस्वीरों को किसी प्रेस नोट की जरूरत नहीं होती।

    सवाल सिर्फ जूतों का नहीं... व्यवस्था की प्राथमिकता का है

    मंत्री के स्वागत में बच्चों ने गुलदस्ता दिया। उन्होंने पूरे अनुशासन से प्रार्थना की और अपनी जिम्मेदारी निभाई। अब बारी व्यवस्था की है।

    सवाल सिर्फ इतना नहीं कि बच्चों को जूते कब मिलेंगे। सवाल यह है कि जिस व्यवस्था के पास DMF-CSR जैसे संसाधन हैं, वहां बच्चों की इतनी छोटी-सी बुनियादी जरूरत पूरी करने में महीनों क्यों लग जाते हैं?

    मंत्री और अधिकारी महंगे जूतों में खड़े होकर शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर समझाते रहें और बच्चे नंगे पैर भविष्य की प्रार्थना करते रहें—यह तस्वीर दंतेवाड़ा की शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रशंसा से ज्यादा आत्ममंथन का विषय है।

    अब देखना होगा कि यह तस्वीर सिर्फ एक निरीक्षण की तस्वीर बनकर रह जाती है या फिर दंतेवाड़ा के बच्चों के पैरों में जूते और उनके हाथों में बेहतर भविष्य पहुंचाने की शुरुआत बनती है।

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