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नई दिल्ली। शौर्यपथ। भारत के नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को होना है। नये संसद भवन के उद्घाटन के पहले ही उद्घाटन का मुद्दा विवादों मे घिर गया। नये संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होने वाला है उद्घाटन की तारीख और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों उद्घाटन का विरोध करते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों होना चाहिए। संवैधानिक स्थिति में राष्ट्रपति का पद प्रधानमंत्री से बड़ा होता है ऐसे में भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद भवन का उद्घाटन भी भारत की प्रथम नागरिक के द्वारा हो।
नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को होने वाला है किंतु इसके विरोध में 19 राष्ट्रीय दलों ने संयुक्त रूप से इस उद्घाटन के बहिष्कार का एलान कर दिया है. सभी विरोध करने वाले राष्ट्रीय दलों का क्या कहना है कि संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों हो वही 28 मई की तारीख को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. बता दें कि 28 मई को भारतीय जनता पार्टी सावरकर जयंती के रूप में मनाती है ऐसे में 28 मई का दिन चुनने पर विपक्षी पार्टी का विरोध जारी है ।
28 मई को नए संसद भवन का उद्घाटन होना है यह तय है और उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों ही होगा उद्घाटन की तैयारियां भी जोरों पर चल रही है इसी बीच खबर निकल कर आ रही है कि मामले मे विपक्ष के विरोध को शांत करने के उद्देश्य से भारत की राष्ट्रपति के द्वारा भी यह संदेश दिया गया है कि नये संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हो. सूत्रों कि माने तो संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रपति को निमंत्रण नहीं भेजा गया है. वही सोशल मीडिया और कई मीडिया चैनलों द्वारा नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हो इस बारे में पीएम मोदी के पक्ष मे खबर चलाने का कार्य शुरू भी हो चुका है. एक मीडिया चैनल में तो सिर्फ इस खबर को प्रमुखता से चलाना शुरु कर दिया है कि पिछले 3 सालों में निर्माण के दौरान तीन बार पीएम मोदी निरीक्षण के लिए गए इसलिए सबसे पहला हक उनका ही बनता है ने संसद भवन के उद्घाटन का. खैर मीडिया अपने अपने स्तर पर अपने अपने संबंधों के आधार पर समाचार प्रकाशित करना अपने अधिकारों के तहत कर रही है. वही आपको बता दें कि भारत के राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति क्या होती है और राष्ट्रपति के पास क्या-क्या शक्तियां हैँ....
भारत का राष्ट्रपति देश की सियासी और सैन्य दोनों शक्तियों से संबंध रखता है. तीनों सेनाओं का कमांडर इन चीफ भी देश का राष्ट्रपति ही होता है. देश की नई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद के लिए मैडम प्रेसिडेंट हैं, तो तीनों सेनाओं के लिए मैडम सर.
वैसे हमारे देश में राष्ट्रपति पद को रबर स्टैंप कह दिया जाता है. दरअसल इसके पीछे वजह ये है कि भारतीय संविधान में राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित हैं. लेकिन ये इतनी भी सीमित नहीं हैं कि इन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया जाए या इनकी गरिमा को हल्के में लिया जाए.
देश की संसद से पास हुआ कोई भी बिल, तब तक कानून नहीं बनता, जब तक राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर नहीं करते. राष्ट्रपति अपने चुने गए 12 उम्मीदवारों को राज्यसभा भी भेज सकते हैं. इन्हें नामित सदस्य कहा जाता है.
संसद से पास हुए Money Bill के अलावा राष्ट्रपति किसी भी बिल को पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं. इसे राष्ट्रपति के कड़े संदेश के तौर पर देखा जाता है. हालांकि दोबारा वही बिल भेजने पर राष्ट्रपति को हस्ताक्षर करने ही होते हैं.
देश के प्रधानमंत्री को पद की शपथ दिलाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है. मुख्य न्यायाधीश को भी राष्ट्रपति ही शपथ दिलाते हैं. किसी भी अपराधी की मौत की सज़ा को माफ करने का एकमात्र अधिकार राष्ट्रपति के पास है.
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
