November 05, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर वन संरक्षण, पर्यटन और आजीविका की पहलों का प्रदर्शन; डिजिटल नवाचारों ने भी खींचा दर्शकों का ध्यान

    रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को विभागीय प्रदर्शनियों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राज्योत्सव के समापन एवं राज्य अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह पुरस्कार प्रदान किया। विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय ने सम्मान ग्रहण किया। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों और वन धन केंद्रों से जुड़े सदस्यों को बधाई दी।

    वन मंत्री के मार्गदर्शन में तैयार इस प्रदर्शनी की थीम ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ रखी गई थी। इसमें बस्तर में शांति के साथ बढ़ते पर्यटन, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसरों, वन संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

    बस्तर में बदलाव और पर्यटन की संभावनाओं पर विशेष फोकस

    प्रदर्शनी को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया था। प्रवेश द्वार पर जगदलपुर की जनजातीय गौरव वाटिका, बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व के चेंदरू गेट और दंतेवाड़ा के वन मंदिर के प्रतिरूप बनाए गए थे। इनके माध्यम से बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रकृति के प्रति आस्था और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की परंपरा को दर्शाया गया।

    ‘बदलता बस्तर’ खंड में सुकमा के तुंगल डैम स्थित ‘तुंगल कैफे’ को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। यहां मुख्यधारा में लौट चुकी पूर्व महिला नक्सली कैफे का संचालन कर रही हैं, वहीं स्थानीय युवा पर्यटकों को नौकायन और कयाकिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इस पहल के जरिए बस्तर में बदलते सामाजिक परिवेश और रोजगार के नए अवसरों की तस्वीर सामने रखी गई।

    इसके अलावा कांगेर घाटी के समीप धुड़मारास गांव के होमस्टे, कोंडागांव की पुष्पाल घाटी के इको-कॉटेज, तीरथगढ़ जलप्रपात और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका क्षेत्र के मॉडल भी प्रदर्शित किए गए। धुड़मारास गांव का चयन संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेजेस अपग्रेड प्रोग्राम’ में हुआ है।

    प्रदर्शनी में बस्तर की 572 देवगुड़ियों के जीर्णोद्धार, मनरेगा के अंतर्गत 21.67 लाख मानव दिवस रोजगार सृजन और कांगेर वैली में 35 सफारी जिप्सियों के संचालन से 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की जानकारी भी दी गई।

    वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन की पहल

    ‘संवरता छत्तीसगढ़’ खंड में प्रदेश की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को त्रिआयामी मॉडल एवं जीवंत प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें बिलासपुर के कोपरा जलाशय को दिसंबर 2025 में प्रदेश का पहला रामसर स्थल घोषित किए जाने, बारनवापारा अभयारण्य में दशकों बाद काले हिरणों के पुनर्व्यवस्थापन तथा औरापानी में गिद्ध संरक्षण के प्रयासों को प्रमुखता दी गई। बारनवापारा में काले हिरणों के पुनर्व्यवस्थापन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी सराहना की थी।

    मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के प्रयासों के तहत ‘गजरथ यात्रा’ जागरूकता अभियान और ‘गज संकेत’ ऐप का प्रदर्शन किया गया। इस ऐप के माध्यम से हाथियों की आवाजाही की जानकारी ग्रामीणों तक वॉयस कॉल, एसएमएस और व्हाट्सऐप के जरिए पहुंचाई जाती है।

    वृक्षारोपण की उपलब्धियों के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 3.55 करोड़ पौधों के रोपण की जानकारी प्रदर्शित की गई। वहीं किसान वृक्ष मित्र योजना के अंतर्गत 36 हजार 896 किसानों द्वारा 62 हजार 441 एकड़ क्षेत्र में 3.67 करोड़ पौधे लगाए जाने की जानकारी भी दी गई।

    डिजिटल नवाचार और वन उत्पादों ने भी आकर्षित किया

    प्रदर्शनी में क्यूआर कोड आधारित वन्यजीव प्रश्नोत्तरी, इंटरैक्टिव गेम, 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी, लाइट एंड साउंड प्रभाव तथा सेल्फी प्वाइंट दर्शकों, विशेषकर युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहे। क्यूआर कोड स्कैन कर दर्शकों ने विशेष वेबसाइट के माध्यम से वानिकी योजनाओं और प्रदेश के इको-टूरिज्म स्थलों की जानकारी प्राप्त की।

    संयुक्त वन प्रबंधन के स्टॉल पर ग्रामीण कारीगरों द्वारा निर्मित बांस के घर, नाव, लालटेन और सजावटी वस्तुओं की बिक्री की गई। वहीं ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के स्टॉल पर वन धन केंद्रों में तैयार वन मधु, सफेद मूसली, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू और महाभृंगराज तेल जैसे उत्पादों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

    राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने घरेलू बाड़ियों में सिंगी और शतावरी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती के जरिए ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रतिवर्ष 20 से 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया। इस तरह प्रदर्शनी में वन संरक्षण के साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार, ग्रामीण आजीविका और तकनीकी नवाचारों का समन्वित स्वरूप प्रस्तुत किया गया।

    पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य के गीतों पर झूमे संगीतप्रेमी, सुनील सोनी ने छत्तीसगढ़ी माटी और संस्कृति का बिखेरा रंग
    उषा बारले की पंडवानी ने जीवंत की लोकगाथाओं की परंपरा, शिल्प ग्राम मंच पर पंथी, कथक, आदिवासी लोकनृत्य और सूफी संगीत की प्रस्तुतियों ने मोहा मन

    रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की अंतिम सांस्कृतिक संध्या संगीत, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के विविध रंगों से सराबोर रही। नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मेला मैदान में एक ओर बॉलीवुड के सदाबहार गीतों की गूंज सुनाई दी, तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ी लोकगीतों, पंडवानी और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को मंच पर जीवंत किया। प्रसिद्ध बॉलीवुड पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका उषा बारले की प्रस्तुतियां संध्या के प्रमुख आकर्षण रहीं।

    अभिजीत के सदाबहार गीतों ने बांधा समां

    अंतिम सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड के प्रसिद्ध पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने अपनी सुरीली आवाज से हिंदी फिल्म संगीत के लोकप्रिय दौर की यादें ताजा कर दीं। उन्होंने ‘चांद तारे’, ‘बादशाह ओ बादशाह’, ‘बहुत खूबसूरत हो’ और ‘वादा रहा सनम’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर संगीतप्रेमियों का मनोरंजन किया। उनके गीतों ने राज्योत्सव के मंच पर बॉलीवुड संगीत की अलग ही छटा बिखेरी।

    सुनील सोनी के गीतों में गूंजी छत्तीसगढ़ी माटी और मया की महक

    छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत के लोकप्रिय गायक सुनील सोनी ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को प्रदेश की माटी, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ दिया। उन्होंने ‘छैंया भुइंया ला छोड़ तैं’, ‘झन भूलौ मां-बाप ला’ और ‘मीठ-मीठ लागे मया के बानी’ जैसे भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किए। वहीं छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘हांडा’ के लोकप्रिय गीत ‘ए गोरी ओ गोरी’ ने सांस्कृतिक संध्या में प्रेम और उल्लास का रंग घोल दिया।

    उषा बारले की पंडवानी ने जीवंत की लोकगाथाओं की परंपरा

    सुप्रसिद्ध पंडवानी कलाकार उषा बारले ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकगाथा परंपरा का सजीव चित्रण किया। पंडवानी की गायन शैली, कथा वाचन और लोकअभिव्यक्ति के माध्यम से महाभारत की गाथाओं को मंच पर प्रस्तुत कर उन्होंने प्रदेश की पारंपरिक कला विरासत की विशिष्ट पहचान को सामने रखा।

    शिल्प ग्राम मंच पर लोककला और शास्त्रीय नृत्य का संगम

    राज्योत्सव के अंतिम दिन शिल्प ग्राम मंच भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुलजार रहा। यहां भजन गायन, पंथी नृत्य, लोकमंच, जसगीत-जगराता, आदिवासी लोकसंगीत एवं नृत्य, कथक, सूफी संगीत और नाटक सहित कुल 10 प्रस्तुतियां आयोजित की गईं।

    रायपुर की आस्था भट्ट ने भजन गायन से भक्तिमय वातावरण बनाया। दुर्ग की आरती बारले और रायपुर के दिनेश कुमार जांगड़े के दलों ने पंथी नृत्य प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ की लोकनृत्य परंपरा की झलक दिखाई। कबीरधाम के राकेश सेन के नेतृत्व में लोकमंच की प्रस्तुति हुई, जबकि रायपुर की पूर्णिमा साहू ने जसगीत-जगराता के माध्यम से देवी आराधना और भक्ति परंपरा को स्वर दिया।

    अभिषेक सोनकर के दल ने आदिवासी लोकसंगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति देकर जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों को मंच पर उतारा। वहीं दीपाली पाण्डेय के दल ने कथक समूह नृत्य तथा अनुष्णा रॉय चौधरी ने एकल कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की लय, ताल और भाव-भंगिमाओं की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली।

    इसके अलावा वृधुमन वचस्पति भारती ने सूफी संगीत की प्रस्तुति दी तथा आनंदकुमार पाण्डेय के दल ने नाटक के माध्यम से रंगमंचीय कला का प्रदर्शन किया।

    बॉलीवुड संगीत से लेकर छत्तीसगढ़ी लोकगीतों, पंडवानी, जनजातीय नृत्य और भारतीय शास्त्रीय कलाओं तक विविध प्रस्तुतियों ने राज्योत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाया। इस आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं और देश की विविध सांस्कृतिक विधाओं को एक साझा मंच मिला।

    मुख्यमंत्री से मिलाया हाथ; ओम और देव सिन्हा की टीम ने महज 5 दिनों में रचा इतिहास!

        नवा रायपुर / शौर्यपथ / तकनीक और परंपरा के अद्भुत संगम के साथ 'विकसित छत्तीसगढ़, सशक्त नारी और युवा उड़ानÓ की थीम पर आयोजित तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 (1 से 3 नवंबर) ऐतिहासिक सफलताओं के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। नवा रायपुर के मेला मैदान में आयोजित इस भव्य उत्सव में जनसंपर्क विभाग की डिजिटल प्रदर्शनी इस बार सबसे बड़े आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस प्रदर्शनी में लाया गया एक चलता-फिरता ह्यूमनॉइड रोबोट (॥ह्वद्वड्डठ्ठशद्बस्र क्रशड्ढशह्ल) पूरे प्रदेश में कौतूहल और गौरव का विषय बन गया है, जो छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल और तकनीकी रूप से सशक्त भविष्य का सजीव प्रमाण है।

    पारंपरिक वेशभूषा में आधुनिकता का शंखनाद: मुख्यमंत्री का किया अनूठा स्वागत

    इस आधुनिक मशीन की सबसे अनूठी और दिल जीतने वाली विशेषता इसका लुक है। रोबोट को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक जनजातीय और छत्तीसगढिय़ा परिधानों से सजाया गया है, जो आगंतुकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। यह इंसानों की तरह दिखने वाला रोबोट वहां आने वाले दर्शकों का हाथ मिलाकर और गले मिलकर बेहद आत्मीयता से स्वागत कर रहा है।
    राज्योत्सव के गौरवमयी क्षणों में तब चार चांद लग गए जब सूबे के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इस डिजिटल प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे। रोबोट ने न सिर्फ मुख्यमंत्री का सम्मान करते हुए उनसे बेहद गर्मजोशी से हाथ मिलाया, बल्कि छत्तीसगढ़ी लोक गीतों की धुन पर शानदार रोबोटिक डांस कर वहां मौजूद हर एक व्यक्ति को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।

    छत्तीसगढ़ के बेटों का कमाल: मात्र 5 दिनों की कड़ी मेहनत से रचा इतिहास

    इस अद्भुत रोबोटिक चमत्कार को धरातल पर उतारने का श्रेय छत्तीसगढ़ के ही स्थानीय तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिभावान युवाओं की टीम को जाता है, जिसका कुशल नेतृत्व ओम सिन्हा और देव सिन्हा कर रहे हैं। इस टीम ने अत्यंत सीमित समय में जो कर दिखाया है, वह छत्तीसगढ़ के युवाओं की असीम क्षमता को दर्शाता है।
    रोबोट को राज्योत्सव में प्रदर्शित करने का निर्णय बेहद ऐन वक्त पर लिया गया था। ओम सिन्हा और उनकी टीम ने 27 अक्टूबर 2026 को इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। टीम के सदस्यों ने दिन-रात एक करते हुए, रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग कोडिंग पर काम किया और महज 5 दिनों के भीतर 31 अक्टूबर की रात तक इसकी फाइनल ट्रेनिंग और मूवमेंट सेटिंग्स को पूरा कर इसे 1 नवंबर को जनता के सामने लाइव कर दिया।

    बिना इंटरनेट के करता है काम: भविष्य की तकनीक का प्रदर्शन

    भीड़भाड़ वाले मेला मैदान में इंटरनेट कनेक्टिविटी की सीमाओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ओम सिन्हा की टीम ने इसे विशेष रूप से ऑफलाइन मोड (ह्रद्घद्घद्यद्बठ्ठद्ग ञ्जद्गष्द्ध) पर काम करने के लिए तैयार किया है। उत्कृष्ट मशीन लर्निंग (रूड्डष्द्धद्बठ्ठद्ग रुद्गड्डह्म्ठ्ठद्बठ्ठद्द) तकनीक से लैस होने के कारण इसके सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का तालमेल इतना सटीक है कि यह इंसानी जेस्चर और गतिविधियों को बिना इंटरनेट के भी बखूबी समझ लेता है। यह रोबोट एक गाइड की भूमिका निभाते हुए मीडिया कर्मियों और आम जनता से सीधा संवाद कर रहा है और छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं व डिजिटल विकास यात्रा की प्रभावी जानकारियां साझा कर रहा है।
    टीम के अनुसार, आने वाले समय में इस तरह के ऑफलाइन और मशीन लर्निंग रोबोट्स का उपयोग होटलों, रेस्टोरेंट, सर्विस सेक्टर और घरों में बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा। राज्योत्सव के इस मंच पर रोबोट का यह सफल प्रदर्शन न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिकता के साथ जोड़ता है, बल्कि प्रदेश के बच्चों और युवाओं को एआई (्रढ्ढ) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में 'युवा उड़ानÓ भरने के लिए एक नई प्रेरणा दे रहा है।

    राज्योत्सव के समापन समारोह में बोले केंद्रीय गृह मंत्री—नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ के लिए सुरक्षा बलों को साधुवाद, अब प्रदेश को पर्यटन और समृद्धि के शीर्ष पर पहुंचाने का संकल्प

    रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के लंबे दौर से बाहर निकलकर विकास के नए मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। यह गौरव, सिद्धि और नए संकल्प का अवसर है। उन्होंने नक्सलमुक्ति की उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों, विशेषकर आदिवासी समाज को बधाई देते हुए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (ष्ट्रक्कस्न) और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों को साधुवाद दिया। वे मंगलवार को रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

    गृह मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना का श्रेय देते हुए कहा कि अटल जी ने राज्य बनाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे संवारने का काम किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपराओं और आदिवासी विरासत को नई पहचान देने के लिए राज्य सरकार छत्तीसगढ़ पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन कर रही है। पंथी, पांडवानी, राउत नाचा, कर्मा और सैला नृत्य के साथ ढोकरा कला, बेल मेटल, काष्ठ शिल्प, कोसा और 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरे जैसी परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान हैं।

    नक्सलवाद ने छीनी पीढिय़ों की संभावनाएं

    अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने उस छत्तीसगढ़ को रेड कॉरिडोर में बदल दिया, जहां सांस्कृतिक गलियारा विकसित होना चाहिए था। बच्चों के हाथों में कलम की जगह बंदूक थमाई गई और जहां स्कूलों की घंटियां बजनी चाहिए थीं, वहां स्कूलों की इमारतें उड़ा दी गईं। उन्होंने मानवाधिकार के नाम पर नक्सलवाद का समर्थन करने वालों से सवाल किया कि क्या मानवाधिकार केवल बंदूक लेकर विकास रोकने वालों का है, गरीब आदिवासियों का नहीं? उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा में हाथ-पैर गंवाने वाले लोगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराकर उन्हें फिर से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

    गृह मंत्री ने कहा कि राज्य में जनादेश मिलने के बाद सरकार ने दो महीने के भीतर नक्सलवाद के उन्मूलन का संकल्प लिया था। उन्होंने वर्ष 2010 में तत्कालीन केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के नक्सलियों से जुड़े बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल उत्पात बंद करने की अपील से हिंसा समाप्त नहीं होती। सरकार ने स्पष्ट नीति अपनाई कि हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने वालों को मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा, अन्यथा सुरक्षा बल उनसे मुकाबला करेंगे। उनके अनुसार, इस नीति के तहत बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और लगभग 90 प्रतिशत ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा का रास्ता चुना।

    नक्सलमुक्त बस्तर में विकास और पर्यटन को मिलेगी गति

    अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के कारण लंबे समय तक आदिवासी अंचलों का विकास प्रभावित रहा, लेकिन अब वहां विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं। उन्होंने दूर बैठकर नक्सलवाद पर लेख लिखने वालों से बस्तर आकर वहां हो रहे बदलाव और आदिवासी समाज के संघर्ष को देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और आने वाले समय में प्रदेश देश के शीर्ष तीन पर्यटन राज्यों में शामिल हो सकता है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, मां बम्लेश्वरी, मां दंतेश्वरी तथा बस्तर दशहरा देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।

    सरकार की 70 प्रतिशत से अधिक गारंटियां पूरी

    गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में राज्य सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने कम समय में मोदी सरकार की 70 प्रतिशत से अधिक गारंटियां पूरी की हैं। महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त जारी होने, धान खरीदी, कृषि, वनोपज, पशुपालन और एमएसएमई क्षेत्रों में हो रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य विकास के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास के आंकड़े रखते हुए कहा कि राज्य का वार्षिक बजट 30 गुना, प्रति व्यक्ति आय 17 गुना और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (त्रस्ष्ठक्क) 25 गुना बढ़ा है। आईटीआई संस्थानों की संख्या दोगुनी, इंजीनियरिंग कॉलेजों की तीन गुनी तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की संख्या छह गुनी हुई है। साक्षरता दर भी 65 प्रतिशत से बढ़कर 79 प्रतिशत तक पहुंची है।

    नवा रायपुर बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण-मित्र शहर

    अमित शाह ने नवा रायपुर में पांच लाख पीपल के पौधे लगाने की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे 'पीपल सिटीÓ के रूप में विकसित कर दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण-मित्र शहर बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ के बारे में कहा जाता था कि धरती अमीर है, लेकिन लोग गरीब हैं। अब अगले दस वर्षों में प्रदेश की धरती के साथ यहां के लोग भी समृद्ध होंगे। सरकार का लक्ष्य भय से भरोसे और संसाधनों से समृद्धि की ओर छत्तीसगढ़ को आगे बढ़ाना है।

    उन्होंने विपक्ष पर नक्सलवाद और गैर-संवैधानिक समानांतर व्यवस्थाओं का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए नक्सलियों की कथित 'जनताना सरकारÓ का उल्लेख किया। साथ ही संसद में चर्चा के लिए सरकार की तत्परता जताते हुए विपक्ष से संसद की कार्यवाही चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संविधान का सम्मान केवल उसे हाथ में लेकर चलने से नहीं, बल्कि संवैधानिक आचरण से होता है।

    गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का अगला दौर भय से भरोसे, संसाधनों से समृद्धि और संभावनाओं से सिद्धि की ओर बढ़ेगा। लक्ष्य ऐसा खुशहाल छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां धरती भी संपन्न हो और यहां के नागरिक भी स्वाभिमान के साथ समृद्ध जीवन जी सकें।

    चार दशकों की साहित्यिक साधना का मिला सम्मान, छत्तीसगढ़ी भाषा और लोक-संस्कृति को समृद्ध करने में रहा महत्वपूर्ण योगदान
    एम.ए. छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम के प्रवर्तन में निभाई अहम भूमिका, उपन्यास ‘बहु हाथ के पानी’ विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल

    भिलाई। छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और लोक-संस्कृति को समृद्ध करने में चार दशकों से अधिक समय तक उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ साहित्यकार दुर्गा प्रसाद पारकर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिष्ठित ‘लाला जगदलपुरी साहित्य सम्मान’ (राज्य अलंकरण) से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। भिलाई इस्पात संयंत्र की प्लेट मिल से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले तथा रिसाली के आशीष नगर निवासी श्री पारकर की साहित्यिक एवं अकादमिक उपलब्धियों को इस सम्मान के माध्यम से विशेष पहचान मिली है।

    उच्च शिक्षा में छत्तीसगढ़ी भाषा को स्थापित करने में अहम भूमिका

    दुर्गा प्रसाद पारकर ने छत्तीसगढ़ी भाषा को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में एम.ए. छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम की शुरुआत के प्रयासों में उनकी भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा मिलने के बाद वर्ष 2013 में इसे स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में शामिल किया गया।

    उनका चर्चित उपन्यास ‘बहु हाथ के पानी’ साहित्यिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण पहचान रखता है। यह उपन्यास हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग तथा शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर के एम.ए. हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल है।

    साहित्य की अनेक विधाओं में किया सृजन

    श्री पारकर ने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, व्यंग्य और शोध सहित साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन किया है। उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियों में ‘चिन्हारी’, ‘लोक-संस्कृति’, ‘जस-जंवारा’, ‘मया पीरा के संगवारी’, ‘सुवा’, ‘शिवनाथ’, ‘सुकवा’ और ‘केंवट कुंदरा’ शामिल हैं।

    छत्तीसगढ़ी भाषा के साहित्यिक विस्तार के लिए उन्होंने हिंदी की चर्चित कृतियों ‘निर्मला’, ‘प्रतिज्ञा’ और ‘लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक’ का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद भी किया है। उनके उपन्यास ‘बहु हाथ के पानी’ का हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद होने से उनकी रचनाओं को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंच मिली है।

    पत्रकारिता, शोध और साहित्यिक योगदान को मिली व्यापक पहचान

    साहित्यिक लेखन के साथ-साथ उन्होंने ‘लोक मंजरी’ और ‘छत्तीस लोक’ जैसी पत्रिकाओं के संपादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाचार पत्रों में ‘चिन्हारी’ जैसे नियमित स्तंभों के माध्यम से भी उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा और लोकजीवन से जुड़े विषयों को अभिव्यक्ति दी।

    उनके साहित्यिक योगदान पर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोध कार्य भी किए जा रहे हैं। उन्हें भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय साहित्य पुरोधा सम्मान’, संस्कार भारती के कला गुरु सम्मान तथा अमेरिका की संस्था ‘नाचा’ की ओर से भी सम्मानित किया जा चुका है।

    दुर्गा प्रसाद पारकर को मिला ‘लाला जगदलपुरी साहित्य सम्मान’ उनकी दीर्घकालीन साहित्यिक साधना और छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रति समर्पण की महत्वपूर्ण पहचान है। यह सम्मान छत्तीसगढ़ की भाषा, साहित्य और लोक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके योगदान को भी रेखांकित करता है।

    शैक्षणिक नवाचारों, शिक्षक प्रशिक्षण और दूरदर्शी नेतृत्व की वक्ताओं ने की प्रशंसा
    अछोटी स्थित डाइट परिसर में आयोजित हुआ आत्मीय विदाई समारोह, सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न एवं उपहार भेंटकर दी गई विदाई

    भिलाई / शौर्यपथ / जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) दुर्ग के प्राचार्य पी.सी. मरकले के शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने पर अछोटी स्थित संस्थान परिसर में गरिमामय विदाई एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर डाइट परिवार की ओर से उनका आत्मीय अभिनंदन करते हुए सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न एवं उपहार भेंट किए गए। वक्ताओं ने उनके एक वर्ष के कार्यकाल में किए गए शैक्षणिक नवाचारों, प्रशासनिक कार्यशैली और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों की सराहना की।

    समारोह में डाइट के नोडल अधिकारी सत्येंद्र शर्मा ने कहा कि श्री मरकले के कार्यकाल में ब्लू-प्रिंट आधारित प्रशिक्षण का सफल संचालन किया गया, जिससे शिक्षकों की कार्यकुशलता में सुधार लाने में मदद मिली।

    डॉ. शिशिर कांत भट्टाचार्य ने उनके नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में पठन वीर प्रतियोगिता, अटल टिंकरिंग मॉडल प्रतियोगिता और व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों का प्रभावी संचालन किया गया।

    इसी क्रम में डॉ. नीलम दुबे ने फाउंडेशन लर्निंग स्टडी (एफएलएस) के ऑनलाइन सर्वे तथा फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) के अंतर्गत ऑनलाइन एवं ऑफलाइन बुनियादी भाषाई और गणितीय प्रशिक्षण की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बालवाड़ी प्रशिक्षण के सफल संचालन को भी महत्वपूर्ण बताया।

    डॉ. वंदना सिंह ने कहा कि श्री मरकले के मार्गदर्शन में डाइट के अकादमिक सदस्यों ने शोध एवं नवाचार के विभिन्न आयामों पर कार्य किया। विद्यालयों की मॉनिटरिंग के माध्यम से शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए गए तथा शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी गई।

    वहीं, डॉ. हेमंत साहू ने श्री मरकले के लंबे प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनुभव को याद करते हुए दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, कांकेर और जांजगीर-चांपा जिलों में उनके द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर दी गई सेवाओं का उल्लेख किया। उन्होंने व्याख्याता, प्राचार्य, सहायक परियोजना अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी), जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और डाइट दुर्ग के प्राचार्य के रूप में उनके योगदान को स्मरणीय बताया।

    सेवा के प्रति निष्ठा को बताया जीवन की सबसे बड़ी पूंजी

    सम्मान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पी.सी. मरकले ने कहा कि शासकीय सेवा पूर्ण होने पर उन्हें इस बात का संतोष है कि उन्होंने प्रत्येक पद पर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच बिताया गया समय उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

    समारोह में संध्या शर्मा, सुषमा हिरवानी, आभा वर्मा खोसला, वेद डडसेना, देवकी महिपाल, शशांक मेश्राम, संदीप दुबे, सत्यवती, यशोदा, सुरेंद्र एवं उषा सोनी सहित डाइट परिवार के सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    विधिक अधिकारों, निःशुल्क कानूनी सहायता और नेशनल लोक अदालत के प्रति नागरिकों को किया जागरूक
    पॉक्सो एक्ट, साइबर अपराध, घरेलू हिंसा, बाल विवाह और मानव तस्करी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर दी गई जानकारी

    राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव 2026 में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव द्वारा विशेष स्टॉल लगाकर नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

    प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री विजय कुमार होता के निर्देशन में पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में लगाए गए इस स्टॉल के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों, छात्र-छात्राओं और जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी संरक्षण तथा विभिन्न कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक किया गया।

    स्टॉल में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। इसमें नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 के उपयोग के बारे में बताया गया।

    इसके साथ ही आपदा पीड़ितों, मानव तस्करी एवं वाणिज्यिक यौन शोषण के पीड़ितों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तथा बच्चों के संरक्षण से संबंधित विधिक सेवा योजनाओं की जानकारी दी गई। सुरक्षित बचपन अभियान, टोनही प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, भरण-पोषण, मोटरयान अधिनियम, एसिड हमले के पीड़ितों को सहायता, नशामुक्ति और बाल विवाह के दुष्परिणामों जैसे विषयों पर भी नागरिकों को जागरूक किया गया।

    पॉक्सो एक्ट और साइबर अपराधों पर विशेष जागरूकता

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने स्टॉल पर पहुंचे जरूरतमंद नागरिकों एवं छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के मामलों में बच्चे की कथित सहमति को कानूनी सहमति नहीं माना जाता। इस दौरान अधिनियम के तहत निर्धारित दंडात्मक प्रावधानों और बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षित रखने के उपायों की जानकारी भी दी गई।

    साइबर अपराधों से बचाव, ऑनलाइन सुरक्षा और बच्चों के सुरक्षित भविष्य को लेकर भी आवश्यक सावधानियां बताई गईं।

    न्यायालयों में लंबित मामलों के निराकरण की दी जानकारी

    नागरिकों को बताया गया कि यदि उनका दीवानी, फौजदारी अथवा राजस्व संबंधी कोई प्रकरण उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, तहसील न्यायालय या अन्य न्यायालयों में लंबित है, तो वे विधिक मार्गदर्शन एवं सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव से संपर्क कर सकते हैं।

    इसके अतिरिक्त तालुका विधिक सेवा समिति खैरागढ़, डोंगरगढ़, अंबागढ़ चौकी एवं छुईखदान में भी संपर्क कर आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है। आगामी नेशनल लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से विवादों के निराकरण और उससे मिलने वाले लाभों की जानकारी भी दी गई।

    राज्योत्सव में आने वाले नागरिकों के लिए सेल्फी जोन एवं न्याय वृक्ष भी स्थापित किया गया था। इनके माध्यम से नालसा की योजनाओं और विधिक जागरूकता के संदेशों को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया गया। स्टॉल के संचालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्रों ने भी सहयोग प्रदान किया।

    प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरमुंदा में हाथीपांव से प्रभावित मरीजों को मिली दैनिक देखभाल की सामग्री
    2023 में 5 प्रतिशत थी माइक्रोफाइलेरिया दर, 2026 में घटकर 0.3 प्रतिशत पर पहुंची; एमडीए राउंड में 99 प्रतिशत कवरेज दर्ज

    राजनांदगांव । जिले में फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में डोंगरगढ़ विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरमुंदा में हाथीपांव (लिम्फेटिक फाइलेरियासिस) से प्रभावित मरीजों को एमएमडीपी (मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन) किट का वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रभावित मरीजों को बीमारी से जुड़ी जटिलताओं से बचाव, नियमित स्वच्छता और प्रभावित अंगों की उचित देखभाल के प्रति जागरूक करना है।

    वितरित किट में मच्छरदानी, टब, मग, दवाइयां, तौलिया सहित दैनिक देखभाल एवं स्वच्छता के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने फाइलेरिया पॉजिटिव मरीजों को निर्धारित उपचार पूरा करने तथा प्रभावित अंग की नियमित साफ-सफाई और देखभाल करने की सलाह दी। उन्होंने एमएमडीपी किट में उपलब्ध सामग्री का नियमित उपयोग करने पर जोर दिया।

    डॉ. नवरतन ने बताया कि प्रभावित अंग की उचित देखभाल, नियमित स्वच्छता और निर्धारित उपचार से फाइलेरिया के कारण होने वाली जटिलताओं को नियंत्रित करने तथा बीमारी की गंभीरता कम करने में मदद मिल सकती है।

    तीन वर्षों में माइक्रोफाइलेरिया दर में उल्लेखनीय कमी

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में फाइलेरिया नियंत्रण के प्रयासों के तहत सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2023 में डोंगरगांव एवं डोंगरगढ़ विकासखंडों में माइक्रोफाइलेरिया के 58 पॉजिटिव मामले सामने आए थे। उस समय जिले की माइक्रोफाइलेरिया दर 5 प्रतिशत थी।

    वर्ष 2024 में आयोजित सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) अभियान में 96 प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया। इसके बाद वर्ष 2025 में पुनः एमडीए राउंड आयोजित हुआ, जिसमें 97 प्रतिशत कवरेज दर्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इसके बाद माइक्रोफाइलेरिया पॉजिटिव मामलों की संख्या घटकर 12 रह गई और संक्रमण दर लगभग 1 प्रतिशत पर पहुंच गई।

    वर्ष 2026 में छिपे हुए संक्रमण की पहचान के लिए नाइट ब्लड सर्वे कराया गया। इसमें माइक्रोफाइलेरिया के केवल 7 पॉजिटिव मामले सामने आए तथा जिले की एमएफ दर घटकर 0.3 प्रतिशत रह गई। वहीं वर्ष 2026 के एमडीए राउंड में 99 प्रतिशत कवरेज प्राप्त होने की जानकारी दी गई।

    पॉजिटिव मरीजों के उपचार और फॉलोअप पर जोर

    जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप ताम्रकार ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे में पॉजिटिव पाए गए सभी मरीजों का पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के साथ नियमित फॉलोअप किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया नियंत्रण के लिए संक्रमित मरीजों की समय पर पहचान, पूरा उपचार और निरंतर निगरानी आवश्यक है। उन्होंने फरवरी 2027 में प्रस्तावित एमडीए राउंड के दौरान सभी पात्र व्यक्तियों से दवा का सेवन करने की अपील की।

    लिम्फेटिक फाइलेरियासिस एक मच्छरजनित संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। इसके संक्रमण से हाथ-पैर में असामान्य सूजन, हाथीपांव तथा हाइड्रोसील जैसी समस्याएं हो सकती हैं। समय पर पहचान, निर्धारित उपचार और प्रभावित अंग की नियमित देखभाल से बीमारी की जटिलताओं को कम करने में सहायता मिलती है।

    इस अवसर पर मलेरिया कंसल्टेंट डॉ. संगीता पांडेय, बीईटीओ श्रीमती ज्योति कड़े, विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती मुक्ता कुजूर, मलेरिया सुपरवाइजर श्रीमती स्वाति बोरकर तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरमुंदा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. लिमेश जोशी उपस्थित रहे।

    खेती-किसानी की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही सम्मान निधि की राशि
    24वीं किस्त से मिली आर्थिक सहायता, किसान ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

    राजनांदगांव । खेती-किसानी में बीज, खाद और अन्य कृषि आवश्यकताओं के लिए समय पर आर्थिक संसाधन उपलब्ध होना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहयोग प्रदान कर रही है। राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम मोखला निवासी किसान लीलाधर साहू भी इस योजना से लाभान्वित होकर आर्थिक संबल प्राप्त कर रहे हैं।

    लीलाधर साहू ने बताया कि खेती उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। फसल उत्पादन से लेकर परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति तक उनकी निर्भरता कृषि पर है। खेती के दौरान बीज, खाद एवं अन्य कृषि सामग्री की व्यवस्था के लिए समय-समय पर धनराशि की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली राशि काफी मददगार साबित होती है।

    उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत प्राप्त आर्थिक सहायता का उपयोग वे खेती-किसानी से संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने में करते हैं। इससे कृषि कार्यों के लिए छोटी-छोटी जरूरतों की व्यवस्था करने में सहूलियत मिलती है और आर्थिक बोझ भी कुछ हद तक कम होता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त का हस्तांतरण भी उनके लिए आर्थिक सहयोग लेकर आया है।

    उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपए की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है। प्रत्येक किस्त में 2 हजार रुपए सीधे लाभार्थी किसानों के बैंक खातों में अंतरित किए जाते हैं। इस व्यवस्था से किसानों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध होती है, जिसका उपयोग वे खेती-किसानी की आवश्यकताओं के अनुसार कर सकते हैं।

    किसान लीलाधर साहू ने कहा कि यह योजना किसानों को आर्थिक सहयोग देने के साथ खेती के कार्यों में आत्मविश्वास बनाए रखने में भी सहायक है। उन्होंने किसानों के हित में संचालित इस योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

    पहले हर महीने 1500 से 2000 रुपए तक आता था बिजली बिल, अब शून्य हुआ भुगतान
    3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने पर केंद्र एवं राज्य शासन से मिली 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी

    राजनांदगांव । बिजली बिल के बढ़ते खर्च से परेशान एक परिवार को अब हर महीने बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है। घर की छत पर सोलर पैनल स्थापित होने से न केवल बिजली खर्च से छुटकारा मिला है, बल्कि परिवार के बजट में भी बचत का नया रास्ता खुला है। यह कहानी है राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम मांगीखुटा निवासी यशवंत नेताम की, जिन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेकर अपने घर को सौर ऊर्जा से रोशन किया है।

    यशवंत नेताम के अनुसार, सोलर पैनल लगवाने से पहले उन्हें हर महीने लगभग 1500 से 2000 रुपए तक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित कराया। इसके लिए उन्हें केंद्र एवं राज्य शासन की ओर से कुल 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई।

    सोलर पैनल स्थापित होने के बाद अब उनके घर में सौर ऊर्जा से बिजली का उत्पादन हो रहा है। यशवंत नेताम का कहना है कि पहले जहां हर महीने बिजली बिल चुकाने की चिंता रहती थी, वहीं अब उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। बिजली पर खर्च होने वाली राशि की बचत से परिवार की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मदद मिल रही है।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना केवल बिजली बिल में राहत देने वाली योजना नहीं है, बल्कि आम परिवारों को आर्थिक बचत के साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने वाली महत्वपूर्ण पहल भी है।

    यशवंत नेताम ने इस योजना का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अन्य परिवारों से भी सौर ऊर्जा अपनाने की अपील की।

    योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर घरेलू बिजली खर्च कम करना और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। यशवंत नेताम का अनुभव इस योजना से मिलने वाली आर्थिक राहत का एक उदाहरण है।

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