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May 23, 2026
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महाकाल के नाम पर भी भ्रष्टाचार क्या यही है शिवराज सरकार ..... Featured

महाकाल के नाम पर भी भ्रष्टाचार क्या यही है शिवराज सरकार .....   महाकाल के नाम पर भी भ्रष्टाचार क्या यही है शिवराज सरकार .....
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शौर्यपथ /  भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात तो करती है किन्तु भ्रष्टाचार की आंच कही ना कही भाजपा के दामन पर भी लगा हुआ है वरना छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री पर नान घोटाले का पनामा पेपर मामले पर परिजनों का नाम नहीं आता ये अलग बात है कि भाजपा के राष्ट्रिय उपाध्यक्ष होने के कारण शायद अभी जाँच एजेंसी इस मामले पर उस तरह कार्यवाही की गति को अंजाम नहीं दे रही जिस तरह अन्य मामलो पर गति दी हुई है . इन्ही सबके बीच अब धर्म के सबसे बड़े स्थल महाकाल कारीडोर में हुए तजा मामले में जिस तरह की बात सामने आ रही है उस पर लीपापोती अंध भक्तो द्वारा शुरू कर दी गयी है . भारत ही नहीं विश्व में महाकाल मंदिर के प्रति हिंदुओं में कितनी आस्था है इसे शब्दों के जरिए बताया नहीं जा सकता. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के बड़े-बड़े नेता और कार्यकर्ता अपने आप को हिंदू धर्म के अनुयाई और सच्चे हिंदू बताते हुए थकते नहीं है वही भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सरकार के काल में भारत के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में करोड़ों का घोटाला सामने आ ही गया पूर्व में जब इस निर्माण के दौरान कांग्रेस पार्टी ने इसकी शिकायत की तब सोशल मीडिया में कई लोगों ने कांग्रेस पार्टी को धर्म विरोधी करार देते हुए कई अशोभनीय टिप्पणियां कर धर्म विरोधी करार दे दिया था कांग्रेस के विधायक ने इस मामले पर लिखित शिकायत भी की थी किंतु इस पर किसी तरह का कोई संज्ञान नहीं लिया गया महाकाल कारीडोर के उद्घाटन के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारीडोर की भव्यता और मजबूती एवं उच्च स्तरीय निर्माण को लेकर कई बड़ी-बड़ी बातें की थी किंतु उद्घाटन के 7 महीने के अंदर ही एक तेज आंधी ने शिवराज सरकार की पोल खोल कर रख दी .
   आज भले ही शिवराज सरकार इस भ्रष्टाचार का आरोप किसी के भी सिर पर रख दे किंतु पूरी जिम्मेदारी शिवराज सरकार की बनती है . आखिर क्यों शिवराज सरकार ने इस ऐतिहासिक कारीडोर पर हो रही अनियमितता के लिए प्रारंभ से ही कोई कदम क्यों नहीं उठाया .
   क्या इस भ्रष्टाचार के खेल में शिवराज सरकार के लोग भी शामिल है अपने आप को सच्चा हिंदुत्व की छाप के साथ समाज में प्रस्तुत करने वाली भारतीय जनता पार्टी क्या भगवान महाकाल के नाम पर भी हो रहे भ्रष्टाचार पर कोई कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगी या फिर भ्रष्टाचार के इस खेल का दूसरा पाठ भी भ्रष्टाचार में ही लिप्त रहेगा।
 बता दें कि महाकाल कारीडोर का प्रोजेक्ट लगभग 800 करोड रुपए का है महाकाल कारीडोर दो भागों में बनना तय हुआ है इसके प्रथम भाग में ३५० करोड़  खर्च करने के बाद लगभग डेढ़ सौ मूर्तियां लगाई गई किंतु मूर्तियों की हालत एक तेज आंधी से ही पता चल गई कि कितनी मजबूत और भरोसेमंद है वही आप एक दूसरा मामला भी सामने आ रहा है 7 महीने पहले पहले लगी मूर्तियां पहले ही गर्मी में अपने रंग रूप में परिवर्तित हो रही है महाकाल महाराज की मूर्तियों के रंग फीके पड़ गए हैं मजबूती की तो बात ही छोड़िए यहां पर रंग रोगन में भी भ्रष्टाचार की झलक देखी जा सकती है।
 पर आश्चर्य की बात यह है कि महाकाल के मंदिर में महाकाल कारीडोर पर हुए भ्रष्टाचार के बारे में ना तो आप भाजपा कुछ बोल रही है और ना ही कोई जिम्मेदारी ले रहा है वहीं जिला प्रशासन या कह रहा है कि मूर्तियां सिर्फ अल्प  समय के लिए लगी है इसे बाद में बदला जाना था जबकि उद्घाटन के समय इन्हीं मूर्तियों की तारीफ शिवराज सरकार करती रही इस भ्रष्टाचार के बारे में ना तो चाटुकार मीडिया चैनल कुछ कह रहा है और ना ही अब हिंदुत्व पर आघात की बात लग रही है .
   ऐसा ही कोई हादसा अगर किसी गैर भाजपा राज में होता तो अभी तक भाजपा के तमाम बड़े नेता तात्कालिक सरकारों को हिंदू विरोधी सरकार बता देते किंतु भाजपा के ही राज में यह घटना घटित हो गया कहते हैं महाकाल बाबा के दरबार में हर किसी की अर्जी की सुनवाई होती है भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल सभी लोगों को कानून सजा दे या ना दे पर महाकाल का न्याय कभी भेदभाव नहीं करेगा और अपना फैसला जरूर देगा। आस्था के नाम पर चोट पहुंचाने वालों जिम्मेदार लोगों पर अब क्या कार्यवाही  होती है यह देखना बाकी है.....
 वहीं दूसरी बात या निकल कर आ रही है कि किसी बड़े भाजपा नेता के कहने पर गुजरात की एक कंपनी को यह ठेका दिया गया था जिसमें प्रतिमूर्ति 20 लाख की लागत तक खर्च होना बताया गया था किंतु 7 महीने में ही और एक तेज आंधी नहीं महाकाल काली ढोल की पोल खोल कर रख दी है वही अब जांच का विषय है कि गुजरात के जिस कंपनी को या ठेका दिया गया था वह किसके कहने पर दिया गया था और निविदा में s-o-r  को किस बिना पर संशोधित किया गया था बस सच्चाई यह है कि जांच निष्पक्ष होगी या इस पर लीपापोती होगी क्योंकि जांच करने वाली प्रदेश एजेंसी और केंद्रीय एजेंसी दोनों ही भारतीय जनता पार्टी शाषित सरकार के अधीनस्थ है ऐसे में  बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या जांच किसी नतीजे पर पहुंचेगी या जांच मर भी लीपापोती जारी रहेगी

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