
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
नई दिल्ली / शौर्यपथ / देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों अभूतपूर्व परिचालन संकट से जूझ रही है, जहां पिछले चार-पांच दिनों में सैकड़ों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और लाखों यात्री परेशान हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित ओपन लेटर में पायलटों ने सीईओ पीटर एल्बर्स सहित शीर्ष प्रबंधन पर वर्षों की बदइंतजामी, कर्मचारियों की थकान नजरअंदाज करना और टॉक्सिक वर्क कल्चर फैलाने का आरोप लगाया है।
पत्र का दावा है कि 2006 में स्थापित इंडिगो की प्रारंभिक सफलता लालच और अहंकार में बदल गई, जिससे कंपनी डूबने की कगार पर पहुंच गई।
पायलटों के आरोप: थकान, डर और अपमान की संस्कृतिअनाम लेखक ने खुद को लंबे समय से इंडिगो का गवाह बताया और कहा कि पायलटों की नाइट ड्यूटी बिना अतिरिक्त वेतन के बढ़ा दी गई, जबकि थकान की शिकायत पर उन्हें धमकाया-डराया गया।
पत्र में प्रबंधन द्वारा अपमानजनक टिप्पणियां जैसे "भिखारी विकल्प नहीं चुन सकते" का जिक्र है, जो टॉक्सिक माहौल को उजागर करता है।इसके अलावा, योग्यता की अनदेखी कर अनाड़ी लोगों को बड़े पद दिए जाने से संकट गहराया।
जिम्मेदार नामों की सूची: आठ शीर्ष अधिकारियों पर इल्जामकथित पत्र ने संकट के लिए आठ अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया:
पीटर एल्बर्स (सीईओ): संकट के दौरान नीदरलैंड में छुट्टी पर।
जेसन हर्टर, अदिति कुमारी, तपस डे, राहुल पाटिल।
इसिडोर पोरक्वेरास (सीओओ), असीम मित्रा (एसवीपी फ्लाइट ऑपरेशंस), अक्षय मोहन।
ये निर्णयों ने मिलकर उड़ानों को प्रभावित किया, जहां 2 दिसंबर से 850 से अधिक उड़ानें प्रतिदिन रद्द हुईं।
डीजीसीए का नोटिस और सरकारी हस्तक्षेप
डीजीसीए ने सीईओ एल्बर्स को शो-कॉज नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा, जिसमें योजना, निगरानी और संसाधन प्रबंधन में चूक का उल्लेख है। सरकार ने किरायों पर सीमा लगाई और रिफंड तुरंत शुरू करने का आदेश दिया, जबकि इंडिगो ने एफडीटीएल नियमों का हवाला देकर रोस्टर सुधार का भरोसा दिया।
विपक्ष ने 65% बाजार हिस्सेदारी वाली इंडिगो की मोनोपोली को जेट, किंगफिशर और गो फर्स्ट के बंद होने से जोड़कर सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए।
मोनोपोली का सबक: आत्मनिर्भर भारत के लिए खतरा?इंडिगो की 62-65% हिस्सेदारी ने पूरे हवाई यातायात को बंधक बना लिया, जहां अन्य एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया समूह (27%) के किराए चढ़ गए। जेट एयरवेज (2019), किंगफिशर (2012) और गो फर्स्ट (2023) के पतन से निजीकरण के दुष्परिणाम सामने आ चुके हैं।यह संकट अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल कर रहा है और सरकार को एकाधिकार रोकने पर पुनर्विचार करने का संकेत दे रहा है।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
