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May 13, 2026
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अप्रैल 2026 में भारतीय इस्पात उद्योग ने पकड़ी रफ्तार, उत्पादन-खपत में बढ़ोतरी और कीमतों में सुधार

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नई दिल्ली | (शौर्यपथ समाचार)

भारतीय इस्पात क्षेत्र ने अप्रैल 2026 में अपनी मजबूत वृद्धि की गति को बरकरार रखते हुए उत्पादन, खपत और कीमतों के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। घरेलू मांग में मजबूती और अवसंरचना व विनिर्माण क्षेत्रों में लगातार गतिविधियों के चलते उद्योग में स्थिरता और विस्तार का रुझान देखने को मिला।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में कच्चे इस्पात का उत्पादन 14.09 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5.8 प्रतिशत अधिक है। तैयार इस्पात का उत्पादन 13.05 मिलियन टन तक पहुंचा, जबकि इसकी खपत 12.99 मिलियन टन रही, जिसमें 8.1 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि देश में निर्माण और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में जारी तेजी को दर्शाती है।

हालांकि पिग आयरन का उत्पादन 0.69 मिलियन टन रहा, जिसमें सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन समग्र रूप से इस्पात क्षेत्र की स्थिति मजबूत बनी रही।

व्यापार के क्षेत्र में भारत अप्रैल 2026 में मामूली रूप से शुद्ध आयातक बना रहा। इस दौरान आयात 0.68 मिलियन टन और निर्यात 0.47 मिलियन टन रहा। पिछले वर्ष की तुलना में आयात में 30.8 प्रतिशत और निर्यात में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वैश्विक बाजार में भारत की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

क्षमता विस्तार के मोर्चे पर भारत 2030 तक 300 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में यह क्षमता लगभग 220 मिलियन टन प्रति वर्ष है। एसएआईएल, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, जेएसपीएल और एएमएनएस जैसी प्रमुख कंपनियां बड़े निवेश के साथ विस्तार कर रही हैं। टाटा स्टील द्वारा लुधियाना में 3,200 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित 0.75 मिलियन टन क्षमता वाला ग्रीन स्टील संयंत्र इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ग्रीन स्टील पहल के तहत भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। एनआईएसएसटी द्वारा 15 राज्यों के 90 उत्पादकों को ग्रीन स्टील प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, जिनमें अधिकांश उत्पादों को 5-स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है। यह पर्यावरण अनुकूल उत्पादन की दिशा में उद्योग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कीमतों के मोर्चे पर अप्रैल 2026 में सभी प्रमुख इस्पात उत्पादों में सुधार देखने को मिला। टीएमटी और रीबार की कीमतों में 2.6 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई, जबकि एचआर कॉइल और जीपी शीट की कीमतों में क्रमशः 6.3 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

कच्चे माल की कीमतों में मिश्रित रुझान रहा, लेकिन घरेलू लौह अयस्क की कीमतों में 10-11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं अंतरराष्ट्रीय कोकिंग कोयले की कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत पर दबाव बना हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बुनियादी ढांचे में बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के चलते भारतीय इस्पात उद्योग आने वाले समय में भी मजबूत बना रहेगा। हालांकि ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियां इस क्षेत्र के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी रहेंगी।

(स्रोत: अप्रैल 2026 के लिए अनंतिम जेपीसी डेटा)

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