November 04, 2026
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    ऊर्जा के नए पावरहाउस के रूप में उभरने की तैयारी में छत्तीसगढ़, 5.60 लाख करोड़ के निवेश का रोडमैप पेश

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    2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य, सौर, ताप विद्युत, पंप स्टोरेज और बैटरी परियोजनाओं में खुलेंगे निवेश के बड़े अवसर; वैश्विक मंच पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निवेशकों को दिया आमंत्रण

    नई दिल्ली, शौर्यपथ। ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ अपनी नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में अगले पांच वर्षों के दौरान लगभग 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाओं का रोडमैप वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है। वर्ष 2030 तक राज्य की हरित ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 3 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ को पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक ऊर्जा भंडारण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

    नई दिल्ली के भारत मंडपम में 2 से 5 नवंबर तक आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस वैश्विक सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में हिस्सा लेते हुए देश-विदेश के निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित किया। सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

    नवीकरणीय और ताप विद्युत परियोजनाओं में बड़े निवेश की योजना

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 23,923 मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये तथा ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार के लिए लगभग 3.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। इसके अतिरिक्त ऊर्जा क्षेत्र की अन्य परियोजनाओं सहित कुल निवेश संभावनाएं लगभग 5.60 लाख करोड़ रुपये आंकी गई हैं।

    उन्होंने कहा कि राज्य की बिजली मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी वर्तमान 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य है। छत्तीसगढ़ में पहले से 28 हजार मेगावाट से अधिक कोयला आधारित ताप विद्युत उत्पादन क्षमता है। अब सौर, जल विद्युत, बायोमास और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के संतुलित विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।

    12,300 मेगावाट की पंप स्टोरेज परियोजनाएं होंगी विकसित

    ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में 12,300 मेगावाट क्षमता की 10 पंप स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं की पहचान की गई है। इनमें लगभग 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है। राजनांदगांव में 100 मेगावाट की सौर परियोजना के साथ 40 मेगावाट क्षमता और 120 मेगावाट-घंटे भंडारण वाली बैटरी प्रणाली पहले से संचालित है।

    सौर ऊर्जा से गांवों और किसानों को जोड़ने की पहल

    मुख्यमंत्री ने राजनांदगांव जिले के खैरा गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि यह प्रदेश का पहला पूर्ण सौर ऊर्जा संचालित गांव बना है। यहां 141 घरों की छतों पर दो-दो किलोवाट के सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे कुल 282 किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में लगभग 1.26 लाख सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों से करीब 1.94 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई हो रही है।

    बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा में भी निवेश की तैयारी

    प्रदेश में कृषि अवशेष, गोबर और जैविक संसाधनों के उपयोग से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त निजी निवेशकों से लगभग 6 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने लगभग 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं में करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना भी प्रस्तुत की।

    वैश्विक निवेशकों के सामने छत्तीसगढ़ की ऊर्जा क्षमता का प्रदर्शन

    सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन कर ऊर्जा परियोजनाओं और निवेश की संभावनाओं की जानकारी ली। उन्होंने निवेशकों को राज्य की औद्योगिक नीतियों, उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और निवेश अनुकूल वातावरण से अवगत कराया।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश से नए उद्योगों की स्थापना, अधोसंरचना के विस्तार और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

    130 से अधिक देशों की भागीदारी वाला यह वैश्विक सम्मेलन छत्तीसगढ़ के लिए अपनी पारंपरिक ऊर्जा क्षमता के साथ हरित ऊर्जा और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने का महत्वपूर्ण अवसर बन रहा है।

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