July 30, 2026
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    स्व. अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में IEM पर सीएमई का सफल आयोजन

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    राजनांदगांव/शौर्यपथ/ भारत रत्न स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, राजनांदगांव के बायोकेमेस्ट्री विभाग द्वारा दिनांक 17 दिसंबर 2025 को Inborn Errors of Metabolism (IEM): From Bench to Bedside विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सी.एम.ई.) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी आयोजित हुआ, जिसमें राज्य के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सा शिक्षक एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. पी.एम. लुका (अधिष्ठाता, चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव) एवं अतिथि डॉ. अतुल मनोहर राव देशकर (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट) द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर किया गया। अतिथियों का स्वागत बायोकेमेस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल बरन चौधुरी द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. पी.एम. लुका ने अपने संबोधन में कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध एवं बदलावों से अपडेट रहने के लिए ऐसे शैक्षणिक आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। वहीं डॉ. अतुल मनोहर राव देशकर ने IEM जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सीएमई आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस बीमारी की समय पर पहचान एवं उपचार में प्रयोगशाला जांच की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    कार्यक्रम में एम्स रायपुर से आमंत्रित मुख्य वक्ता डॉ. अतुल जिंदल (विभागाध्यक्ष एवं शिशु रोग विशेषज्ञ) ने The Nonspecific Clues: Recognizing IEM Across the Lifespan विषय पर व्याख्यान देते हुए IEM से जुड़े न्यूरोलॉजिकल लक्षणों एवं आवश्यक जांचों की विस्तृत जानकारी दी। एम्स रायपुर की डॉ. सुप्रवा पटेल (प्राध्यापक, बायोकेमेस्ट्री) ने IEM की पहचान हेतु होने वाली रक्त एवं जेनेटिक जांचों पर प्रकाश डाला। चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव के डॉ. अजय कोसम (विभागाध्यक्ष एवं शिशु रोग विशेषज्ञ) ने नवजात शिशुओं में मेटाबोलिक विकारों के नवीनतम निदान एवं उपचार तकनीकों की जानकारी दी। एम्स रायपुर की डॉ. तृप्ति सिंह नाइक (प्राध्यापक, शिशु रोग विभाग) ने बताया कि जीवनशैली एवं आहार में उचित बदलाव से IEM से पीड़ित मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

    डॉ. रोहित डेविड (सह प्राध्यापक, पी.एस.एम. विभाग) ने कहा कि भारत में IEM एक गंभीर और तेजी से बढ़ती समस्या बनती जा रही है, जिस पर गंभीरता से विचार आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में बायोकेमेस्ट्री विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. पुष्पेन्द्र नरेटी ने सभी अतिथियों एवं आयोजन से जुड़े सदस्यों का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव में IEM से संबंधित जांच एवं उपचार सुविधा शीघ्र प्रारंभ होने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि यह संस्थान भविष्य में IEM जांच एवं उपचार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

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