August 07, 2026
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    विलुप्त हो रही लोधी साड़ी बुनकारी कला को मिला पुनर्जीवन शासन की पहल पर मिला संरक्षण, बुनकरों की आर्थिक स्थिति बनी सशक्त

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    मोहक डिजाइन के समृद्ध फैब्रिक की बढ़ी मांग,फेब इंडिया नई दिल्ली में किया जा रहा निर्यात ,150 बुनकरों को 70 लाख 64 हजार की आमदनी

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की बहुमूल्य धरोहर समृद्ध हाथकरघा के रूप में अभिव्यक्त हो रही है और अपनी विविधता, गुणवत्ता एवं सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध है। राजनांदगांव जिले के बुनकरों के हाथों के हुनर ने बेजोड़ कारीगरी से अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। शासन की पहल से विलुप्त हो रही छत्तीसगढ़ी परम्परागत लोधी बुनकारी कला को पुनर्जीवन मिला है। छुईखदान एवं गंडई के बुनकर मोहक डिजाइन के लोधी साड़ी का निर्माण कर रहे हैं, जिसकी अभी मार्केट में अच्छी डिमांड है। लोधी साड़ी को बड़ेभौराई साड़ी भी कहा जाता है। जिसमें खाप का प्रयोग करते हुए सिंघोलिया बूटी, मेयूर बूटी एवं डमरू की डिजाइन बनी हुई है, साथ ही पंचोलिया एवं प्रताप पर डिजाइन से सुसज्जित किया गया है। यह साड़ी शादी-विवाह के अवसर पर बहुतायत उपयोग किया जाता है। छुईखदान बुनकर सहकारी समिति मर्यादित के तहत निर्मित हाथकरघा उत्पाद फेब इंडिया नई दिल्ली में निर्यात किये जा रहे हैं। अनोखे रंग संयोजन से बने उम्दा फेब्रिक लोगों की पसंद बन रही है। इस वर्ष 150 बुनकरों को 70 लाख 64 हजार राशि की प्राप्त हुई है, जिनसे उनकी आर्थिक स्थिति सशक्त हुई है। शासन द्वारा बेडशीट एवं गणवेश के लिए वस्त्र क्रय किया गया है, वहीं कोरोना संक्रमण के बावजूद 10 लाख वस्त्र तैयार किए गए हैं, जो फेब इंडिया को भेजे जा रहे हैं। वहीं वस्त्रों का शासकीय कार्यों के लिए सप्लाई किया गया है।
    छुईखदान, गंडई एवं खैरागढ़ में डोंगरगढ़ एवं राजनांदगांव में कुशल बुनकरों द्वारा खुबसूरत डिजाइनदार साड़ी, ऊलन, स्पायडल चादर, जेकार्ड चादर, साल, रंगीन चेक, प्लेन चादर, प्रिटेंड चादर, पिलो कव्हर, फर्श दरी, फर्निशिंग क्लाथ, शर्ट क्लाथ, पेसेंट डे्रस, सर्जन गाउन, ग्रीन वर्दी, यूनिफार्म, डे्रस के लिए वस्त्र, धोती, गमछा, पंछा, नेपकीन, रूमाल एवं उपयोगी वस्त्र तैयार किये जा रहे है। उप संचालक हाथकरघा श्री इन्द्रराज सिंह ने बताया कि विलुप्त हो रही परम्परागत लोधी साड़ी का वेल्यू एडीशन करने के साथ ही इसमें नया प्रयोग करते हुए नई डिजाइन का समावेश भी किया जा रहा है। छुईखदान बुनकर सहकारी समिति मर्यादित के प्रबंधक श्री लालचंद देवांगन ने बताया कि छुईखदान प्रदेश में एकमात्र संस्था है, जिसे जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित से 54 लाख रूपए की ऋण स्वीकृति प्राप्त है। जिससे संस्था अपना व्यवसाय करती है। उन्होंने बताया कि संस्था के जीर्णोद्धार के लिए शासन की ओर प्रस्ताव भेजा गया है जो प्रक्रियाधीन है। बुनकर लोधी साड़ी का निर्माण करने वाले श्री ईश्वरराम ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह अंचल की परंपरागत प्राचीन कला है, जिसे शासन के प्रयासों से संरक्षण मिला है। धागा रंगाई का कार्य मेहनत का कार्य है, जिसे खैरागढ़ में किया जा रहा है। चरखा चलाकर महिलाएं बाबिन भरने का कार्य कर रही है। वही मशीन से भी बाबिन भरने का कार्य छुईखदान में किया जा रहा है। बुनकर श्री रामखिलावन देवांगन हरे एवं स्लेटी रंग का समन्वय करते हुए नया प्रयोग कर रंगीन बार्डर की साड़ी बना रहे थे। श्री मयाराम देवांगन किसानों के लिए पटका बना रहे है। वही श्री सीताराम कुर्ते का कपड़ा बना रहे है।
    उल्लेखनीय है कि छुईखदान, खैरागढ़, डोंगरगढ़, कबीरधाम, गंडई, मलाजखंड, राजनांदगांव, घुमका में हथकरघा के शो रूम है। वर्ष 2018-19 में एक करोड़ 45 लाख 62 हजार रूपए की राशि प्राप्त हुई। वर्ष 2018-19 में 25 लाख रूपए के कपड़े फेब इंडिया में निर्यात किए गए। वहीं 2019-20 में 56 लाख रूपए के कपड़े निर्यात किए गए। इस वर्ष कोरोना के बावजूद 10 लाख वस्त्र तैयार किए गए हंै, जो फेब इंडिया में भेजे जा रहे हैं।

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