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राजनांदगांव, / शौर्यपथ /
कृषि विज्ञान केन्द्र सुरगी द्वारा जिले एवं आसपास के किसानों के लिए मौसम आधारित समसामयिक कृषि सलाह जारी की गई है। केन्द्र ने किसानों को खरीफ सीजन की तैयारी समय रहते पूरी करने, हरी खाद अपनाने और संतुलित कृषि प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मूंग, ढैंचा एवं सनई जैसी हरी खाद की फसलों की बुवाई 15 मई से जून अंत तक सबसे उपयुक्त रहती है। खरीफ की मुख्य फसल विशेषकर धान की रोपाई से लगभग 45 से 50 दिन पूर्व हरी खाद बोनी चाहिए। मानसून की पहली बारिश या सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर किसान इसकी बुवाई शुरू कर सकते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि 35 से 40 दिन बाद जब हरी खाद की फसल में फूल आने लगें, तब उसे रोटावेटर या हल की सहायता से मिट्टी में दबा देना चाहिए। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन एवं जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है और यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
कृषि विज्ञान केन्द्र ने किसानों को सलाह दी है कि खरीफ फसल की बोनी से पहले खेतों की मृदा जांच अवश्य कराएं और रिपोर्ट के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है तथा रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
साथ ही खेतों में उपयोग होने वाले कृषि यंत्रों एवं उपकरणों की मरम्मत समय रहते कर लेने तथा मिट्टी पलट हल (एमबी प्लाव) से गहरी जुताई करने की सलाह दी गई है। खेतों को पॉलिथीन से ढंकने से खरपतवार, मृदा जनित रोग एवं कीटों के अंडों को नष्ट करने में मदद मिलती है।
धान की सीधी बुवाई के लिए मई के अंतिम सप्ताह से जून के दूसरे सप्ताह तक का समय उपयुक्त बताया गया है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खरीफ सीजन के लिए उन्नत किस्मों के बीज समय पर उपलब्ध रखने की सलाह दी है। इनमें प्रमुख रूप से—
फल उद्यान लगाने के इच्छुक किसानों को 1×1×1 मीटर आकार के गड्ढे तैयार कर धूप में खुला छोड़ने की सलाह दी गई है। आम की दशहरी, लंगड़ा, छत्तीसगढ़ नंदीराज तथा अमरूद की इलाहाबाद सफेदा एवं लखनऊ-49 जैसी किस्मों के पौधे लगाने की अनुशंसा की गई है।
केला एवं पपीता में टपक सिंचाई होने पर प्रतिदिन शाम को एक घंटे सिंचाई तथा सामान्य स्थिति में 3-4 दिन के अंतराल पर सिंचाई करने की सलाह दी गई है। पपीता के लिए पूसा नन्हा एवं पूसा डवार्फ किस्म उपयुक्त बताई गई है।
वर्षाकालीन सब्जियों जैसे भिंडी, भटा, मिर्च, खीरा, कद्दू, लौकी, मूली एवं फूलगोभी की खेती के लिए खेत तैयार करने और बीज व्यवस्था करने को कहा गया है। भिंडी एवं भटे में फल बेधक कीट नियंत्रण हेतु प्रति एकड़ 10 फिरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है।
गर्मी के मौसम को देखते हुए दुधारू पशुओं को दिन में 4-5 बार ताजा पानी पिलाने और प्रतिदिन 50-60 ग्राम नमक खिलाने की सलाह दी गई है। अधिक दूध उत्पादन के लिए 25-30 किलो हरा चारा तथा सूखे और हरे चारे का अनुपात 3:1 रखने को कहा गया है।
पशुओं को प्रतिदिन 25-30 ग्राम मिनरल मिक्सचर खिलाने तथा पशु बाड़ों को हवादार एवं ठंडा रखने के लिए गीले बारदाने लटकाने की सलाह भी दी गई है।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
