November 05, 2026
Hindi Hindi▼

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    फाइलेरिया मरीजों को एमएमडीपी किट वितरित, नियमित उपचार और स्वच्छता पर दिया जोर

    • doing of business

    प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरमुंदा में हाथीपांव से प्रभावित मरीजों को मिली दैनिक देखभाल की सामग्री
    2023 में 5 प्रतिशत थी माइक्रोफाइलेरिया दर, 2026 में घटकर 0.3 प्रतिशत पर पहुंची; एमडीए राउंड में 99 प्रतिशत कवरेज दर्ज

    राजनांदगांव । जिले में फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में डोंगरगढ़ विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरमुंदा में हाथीपांव (लिम्फेटिक फाइलेरियासिस) से प्रभावित मरीजों को एमएमडीपी (मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन) किट का वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रभावित मरीजों को बीमारी से जुड़ी जटिलताओं से बचाव, नियमित स्वच्छता और प्रभावित अंगों की उचित देखभाल के प्रति जागरूक करना है।

    वितरित किट में मच्छरदानी, टब, मग, दवाइयां, तौलिया सहित दैनिक देखभाल एवं स्वच्छता के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने फाइलेरिया पॉजिटिव मरीजों को निर्धारित उपचार पूरा करने तथा प्रभावित अंग की नियमित साफ-सफाई और देखभाल करने की सलाह दी। उन्होंने एमएमडीपी किट में उपलब्ध सामग्री का नियमित उपयोग करने पर जोर दिया।

    डॉ. नवरतन ने बताया कि प्रभावित अंग की उचित देखभाल, नियमित स्वच्छता और निर्धारित उपचार से फाइलेरिया के कारण होने वाली जटिलताओं को नियंत्रित करने तथा बीमारी की गंभीरता कम करने में मदद मिल सकती है।

    तीन वर्षों में माइक्रोफाइलेरिया दर में उल्लेखनीय कमी

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में फाइलेरिया नियंत्रण के प्रयासों के तहत सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2023 में डोंगरगांव एवं डोंगरगढ़ विकासखंडों में माइक्रोफाइलेरिया के 58 पॉजिटिव मामले सामने आए थे। उस समय जिले की माइक्रोफाइलेरिया दर 5 प्रतिशत थी।

    वर्ष 2024 में आयोजित सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) अभियान में 96 प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया। इसके बाद वर्ष 2025 में पुनः एमडीए राउंड आयोजित हुआ, जिसमें 97 प्रतिशत कवरेज दर्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इसके बाद माइक्रोफाइलेरिया पॉजिटिव मामलों की संख्या घटकर 12 रह गई और संक्रमण दर लगभग 1 प्रतिशत पर पहुंच गई।

    वर्ष 2026 में छिपे हुए संक्रमण की पहचान के लिए नाइट ब्लड सर्वे कराया गया। इसमें माइक्रोफाइलेरिया के केवल 7 पॉजिटिव मामले सामने आए तथा जिले की एमएफ दर घटकर 0.3 प्रतिशत रह गई। वहीं वर्ष 2026 के एमडीए राउंड में 99 प्रतिशत कवरेज प्राप्त होने की जानकारी दी गई।

    पॉजिटिव मरीजों के उपचार और फॉलोअप पर जोर

    जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप ताम्रकार ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे में पॉजिटिव पाए गए सभी मरीजों का पूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के साथ नियमित फॉलोअप किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया नियंत्रण के लिए संक्रमित मरीजों की समय पर पहचान, पूरा उपचार और निरंतर निगरानी आवश्यक है। उन्होंने फरवरी 2027 में प्रस्तावित एमडीए राउंड के दौरान सभी पात्र व्यक्तियों से दवा का सेवन करने की अपील की।

    लिम्फेटिक फाइलेरियासिस एक मच्छरजनित संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। इसके संक्रमण से हाथ-पैर में असामान्य सूजन, हाथीपांव तथा हाइड्रोसील जैसी समस्याएं हो सकती हैं। समय पर पहचान, निर्धारित उपचार और प्रभावित अंग की नियमित देखभाल से बीमारी की जटिलताओं को कम करने में सहायता मिलती है।

    इस अवसर पर मलेरिया कंसल्टेंट डॉ. संगीता पांडेय, बीईटीओ श्रीमती ज्योति कड़े, विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती मुक्ता कुजूर, मलेरिया सुपरवाइजर श्रीमती स्वाति बोरकर तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरमुंदा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. लिमेश जोशी उपस्थित रहे।

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision