November 05, 2026
Hindi Hindi▼

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को राज्योत्सव में प्रथम पुरस्कार

    • doing of business

    ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर वन संरक्षण, पर्यटन और आजीविका की पहलों का प्रदर्शन; डिजिटल नवाचारों ने भी खींचा दर्शकों का ध्यान

    रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को विभागीय प्रदर्शनियों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राज्योत्सव के समापन एवं राज्य अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह पुरस्कार प्रदान किया। विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय ने सम्मान ग्रहण किया। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों और वन धन केंद्रों से जुड़े सदस्यों को बधाई दी।

    वन मंत्री के मार्गदर्शन में तैयार इस प्रदर्शनी की थीम ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ रखी गई थी। इसमें बस्तर में शांति के साथ बढ़ते पर्यटन, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसरों, वन संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

    बस्तर में बदलाव और पर्यटन की संभावनाओं पर विशेष फोकस

    प्रदर्शनी को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया था। प्रवेश द्वार पर जगदलपुर की जनजातीय गौरव वाटिका, बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व के चेंदरू गेट और दंतेवाड़ा के वन मंदिर के प्रतिरूप बनाए गए थे। इनके माध्यम से बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रकृति के प्रति आस्था और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की परंपरा को दर्शाया गया।

    ‘बदलता बस्तर’ खंड में सुकमा के तुंगल डैम स्थित ‘तुंगल कैफे’ को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। यहां मुख्यधारा में लौट चुकी पूर्व महिला नक्सली कैफे का संचालन कर रही हैं, वहीं स्थानीय युवा पर्यटकों को नौकायन और कयाकिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इस पहल के जरिए बस्तर में बदलते सामाजिक परिवेश और रोजगार के नए अवसरों की तस्वीर सामने रखी गई।

    इसके अलावा कांगेर घाटी के समीप धुड़मारास गांव के होमस्टे, कोंडागांव की पुष्पाल घाटी के इको-कॉटेज, तीरथगढ़ जलप्रपात और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका क्षेत्र के मॉडल भी प्रदर्शित किए गए। धुड़मारास गांव का चयन संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेजेस अपग्रेड प्रोग्राम’ में हुआ है।

    प्रदर्शनी में बस्तर की 572 देवगुड़ियों के जीर्णोद्धार, मनरेगा के अंतर्गत 21.67 लाख मानव दिवस रोजगार सृजन और कांगेर वैली में 35 सफारी जिप्सियों के संचालन से 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की जानकारी भी दी गई।

    वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन की पहल

    ‘संवरता छत्तीसगढ़’ खंड में प्रदेश की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को त्रिआयामी मॉडल एवं जीवंत प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें बिलासपुर के कोपरा जलाशय को दिसंबर 2025 में प्रदेश का पहला रामसर स्थल घोषित किए जाने, बारनवापारा अभयारण्य में दशकों बाद काले हिरणों के पुनर्व्यवस्थापन तथा औरापानी में गिद्ध संरक्षण के प्रयासों को प्रमुखता दी गई। बारनवापारा में काले हिरणों के पुनर्व्यवस्थापन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी सराहना की थी।

    मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के प्रयासों के तहत ‘गजरथ यात्रा’ जागरूकता अभियान और ‘गज संकेत’ ऐप का प्रदर्शन किया गया। इस ऐप के माध्यम से हाथियों की आवाजाही की जानकारी ग्रामीणों तक वॉयस कॉल, एसएमएस और व्हाट्सऐप के जरिए पहुंचाई जाती है।

    वृक्षारोपण की उपलब्धियों के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 3.55 करोड़ पौधों के रोपण की जानकारी प्रदर्शित की गई। वहीं किसान वृक्ष मित्र योजना के अंतर्गत 36 हजार 896 किसानों द्वारा 62 हजार 441 एकड़ क्षेत्र में 3.67 करोड़ पौधे लगाए जाने की जानकारी भी दी गई।

    डिजिटल नवाचार और वन उत्पादों ने भी आकर्षित किया

    प्रदर्शनी में क्यूआर कोड आधारित वन्यजीव प्रश्नोत्तरी, इंटरैक्टिव गेम, 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी, लाइट एंड साउंड प्रभाव तथा सेल्फी प्वाइंट दर्शकों, विशेषकर युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहे। क्यूआर कोड स्कैन कर दर्शकों ने विशेष वेबसाइट के माध्यम से वानिकी योजनाओं और प्रदेश के इको-टूरिज्म स्थलों की जानकारी प्राप्त की।

    संयुक्त वन प्रबंधन के स्टॉल पर ग्रामीण कारीगरों द्वारा निर्मित बांस के घर, नाव, लालटेन और सजावटी वस्तुओं की बिक्री की गई। वहीं ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के स्टॉल पर वन धन केंद्रों में तैयार वन मधु, सफेद मूसली, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू और महाभृंगराज तेल जैसे उत्पादों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

    राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने घरेलू बाड़ियों में सिंगी और शतावरी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती के जरिए ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रतिवर्ष 20 से 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया। इस तरह प्रदर्शनी में वन संरक्षण के साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार, ग्रामीण आजीविका और तकनीकी नवाचारों का समन्वित स्वरूप प्रस्तुत किया गया।

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision