
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य के गीतों पर झूमे संगीतप्रेमी, सुनील सोनी ने छत्तीसगढ़ी माटी और संस्कृति का बिखेरा रंग
उषा बारले की पंडवानी ने जीवंत की लोकगाथाओं की परंपरा, शिल्प ग्राम मंच पर पंथी, कथक, आदिवासी लोकनृत्य और सूफी संगीत की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की अंतिम सांस्कृतिक संध्या संगीत, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के विविध रंगों से सराबोर रही। नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मेला मैदान में एक ओर बॉलीवुड के सदाबहार गीतों की गूंज सुनाई दी, तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ी लोकगीतों, पंडवानी और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को मंच पर जीवंत किया। प्रसिद्ध बॉलीवुड पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका उषा बारले की प्रस्तुतियां संध्या के प्रमुख आकर्षण रहीं।
अभिजीत के सदाबहार गीतों ने बांधा समां
अंतिम सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड के प्रसिद्ध पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने अपनी सुरीली आवाज से हिंदी फिल्म संगीत के लोकप्रिय दौर की यादें ताजा कर दीं। उन्होंने ‘चांद तारे’, ‘बादशाह ओ बादशाह’, ‘बहुत खूबसूरत हो’ और ‘वादा रहा सनम’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर संगीतप्रेमियों का मनोरंजन किया। उनके गीतों ने राज्योत्सव के मंच पर बॉलीवुड संगीत की अलग ही छटा बिखेरी।
सुनील सोनी के गीतों में गूंजी छत्तीसगढ़ी माटी और मया की महक
छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत के लोकप्रिय गायक सुनील सोनी ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को प्रदेश की माटी, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ दिया। उन्होंने ‘छैंया भुइंया ला छोड़ तैं’, ‘झन भूलौ मां-बाप ला’ और ‘मीठ-मीठ लागे मया के बानी’ जैसे भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किए। वहीं छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘हांडा’ के लोकप्रिय गीत ‘ए गोरी ओ गोरी’ ने सांस्कृतिक संध्या में प्रेम और उल्लास का रंग घोल दिया।
उषा बारले की पंडवानी ने जीवंत की लोकगाथाओं की परंपरा
सुप्रसिद्ध पंडवानी कलाकार उषा बारले ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकगाथा परंपरा का सजीव चित्रण किया। पंडवानी की गायन शैली, कथा वाचन और लोकअभिव्यक्ति के माध्यम से महाभारत की गाथाओं को मंच पर प्रस्तुत कर उन्होंने प्रदेश की पारंपरिक कला विरासत की विशिष्ट पहचान को सामने रखा।
शिल्प ग्राम मंच पर लोककला और शास्त्रीय नृत्य का संगम
राज्योत्सव के अंतिम दिन शिल्प ग्राम मंच भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुलजार रहा। यहां भजन गायन, पंथी नृत्य, लोकमंच, जसगीत-जगराता, आदिवासी लोकसंगीत एवं नृत्य, कथक, सूफी संगीत और नाटक सहित कुल 10 प्रस्तुतियां आयोजित की गईं।
रायपुर की आस्था भट्ट ने भजन गायन से भक्तिमय वातावरण बनाया। दुर्ग की आरती बारले और रायपुर के दिनेश कुमार जांगड़े के दलों ने पंथी नृत्य प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ की लोकनृत्य परंपरा की झलक दिखाई। कबीरधाम के राकेश सेन के नेतृत्व में लोकमंच की प्रस्तुति हुई, जबकि रायपुर की पूर्णिमा साहू ने जसगीत-जगराता के माध्यम से देवी आराधना और भक्ति परंपरा को स्वर दिया।
अभिषेक सोनकर के दल ने आदिवासी लोकसंगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति देकर जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों को मंच पर उतारा। वहीं दीपाली पाण्डेय के दल ने कथक समूह नृत्य तथा अनुष्णा रॉय चौधरी ने एकल कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की लय, ताल और भाव-भंगिमाओं की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली।
इसके अलावा वृधुमन वचस्पति भारती ने सूफी संगीत की प्रस्तुति दी तथा आनंदकुमार पाण्डेय के दल ने नाटक के माध्यम से रंगमंचीय कला का प्रदर्शन किया।
बॉलीवुड संगीत से लेकर छत्तीसगढ़ी लोकगीतों, पंडवानी, जनजातीय नृत्य और भारतीय शास्त्रीय कलाओं तक विविध प्रस्तुतियों ने राज्योत्सव की अंतिम सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाया। इस आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं और देश की विविध सांस्कृतिक विधाओं को एक साझा मंच मिला।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
