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दस्तावेजों और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई धीमी, पूर्व कर्मचारी मुक्तेश की भूमिका को लेकर भी उठ रहे सवाल; निगम प्रशासन की पारदर्शिता पर जनता की नजर
दुर्ग / शौर्यपथ विशेष।
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास के उद्देश्य से किए गए गुमटी आवंटन की योजना अब गंभीर सवालों के घेरे में है। विस्थापन और यातायात व्यवस्था सुधार के नाम पर दी गई गुमटियां आज कथित रूप से किराए और बिक्री के कारोबार का माध्यम बनती नजर आ रही हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इन अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज और शिकायतें सामने आने के बाद भी जांच प्रक्रिया बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान जिला अस्पताल परिसर के सामने और चर्चगेट मार्ग पर एनयूएलएम योजना के तहत गुमटियों का आवंटन किया गया था। उद्देश्य था कि सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले जरूरतमंद स्ट्रीट वेंडरों को व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराया जाए, जिससे अतिक्रमण कम हो और शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके।
लेकिन वर्तमान हालात योजना की मूल भावना पर ही प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। कई मामलों में आरोप सामने आए हैं कि जिन लोगों को पुनर्वास के तहत गुमटियां आवंटित की गईं, वे स्वयं वहां व्यवसाय नहीं कर रहे हैं। कुछ गुमटियां किराए पर संचालित होने और कुछ के कथित रूप से हस्तांतरण या बिक्री की शिकायतें सामने आई हैं।
आवंटन से लेकर उपयोग तक, हर चरण में उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गुमटियों के आवंटन में किसी प्रकार की आर्थिक अनियमितता हुई, तो उसका रिकॉर्ड कहां है? आवंटन के समय ली गई राशि किस मद में जमा हुई? क्या निगम के पास सभी लेन-देन का स्पष्ट विवरण उपलब्ध है?
इन सवालों का जवाब अभी तक सार्वजनिक नहीं हो पाया है। यही कारण है कि गुमटी आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर संदेह लगातार बढ़ रहा है।
बाजार विभाग को जानकारी, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
इस पूरे मामले में नगर निगम के बाजार विभाग की भूमिका सबसे अधिक चर्चा में है। शिकायतों और दस्तावेजों की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई सामने नहीं आई है।
बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा और बाजार प्रभारी शेखर चंद्राकर की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि गुमटियों के नियम विरुद्ध संचालन, किराए पर दिए जाने और कथित बिक्री जैसे मामलों की जानकारी होने के बाद भी जांच और निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हो सकी है।
जांच की धीमी गति से बढ़ रहा संदेह
सूत्रों के अनुसार गुमटी आवंटन से संबंधित मामलों की जांच प्रक्रिया वर्तमान में बेहद धीमी गति से चल रही है। संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच को गति नहीं दिए जाने से शिकायतकर्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।
जनता का सवाल है कि यदि दस्तावेज उपलब्ध हैं और अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो जांच पूरी करने और दोषियों पर कार्रवाई करने में इतना विलंब क्यों किया जा रहा है?
पूर्व कर्मचारी मुक्तेश की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस मामले में नगर निगम के पूर्व कर्मचारी मुक्तेश की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल से जुड़े कुछ मामलों में अनियमितताओं और कथित घोटाले के तथ्य सामने आ रहे हैं। हालांकि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन सामने आ रहे आरोपों ने निगम प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ा दी है।
पुरानी व्यवस्था की गलती या वर्तमान प्रशासन की जिम्मेदारी?
मामले को लेकर यदि जिम्मेदारी पूर्ववर्ती शासनकाल पर डाल दी जाए, तो भी वर्तमान प्रशासन की जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती। नई शहरी सरकार से नागरिकों को उम्मीद है कि पुरानी व्यवस्थाओं में यदि कोई खामी या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
महापौर और निगम प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
नगर निगम दुर्ग की महापौर अलका बाघमार और निगम प्रशासन के सामने अब यह बड़ा अवसर है कि वे इस मामले में पारदर्शी जांच कराकर जनता के सामने वास्तविक स्थिति रखें।
क्या अवैध रूप से किराए पर चल रही या नियम विरुद्ध हस्तांतरित गुमटियों का आवंटन निरस्त किया जाएगा?
क्या आवंटन प्रक्रिया में हुए कथित आर्थिक लेन-देन की जांच होगी?
क्या दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी?
इन सवालों के जवाब का इंतजार दुर्ग शहर की जनता कर रही है।
शौर्यपथ का सवाल
गरीब स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास के लिए बनी योजना यदि कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गई है, तो इसकी जिम्मेदारी तय कौन करेगा?
दस्तावेज सामने हैं, शिकायतें मौजूद हैं, विभाग को जानकारी है, फिर कार्रवाई की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है?
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन, महापौर और संबंधित विभाग पर टिकी हैं कि यह मामला भी केवल फाइलों तक सीमित रहेगा या फिर पारदर्शी जांच के साथ दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।
12वीं पेपर लीक, हरिका राव को न्याय और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन तेज
रायपुर, शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का अंबेडकर चौक इन दिनों छात्रों के आक्रोश का केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं युवा संगठन राज्य की शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के विरोध में सड़क पर उतर आए हैं। आंदोलनकारी स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों ने अब राज्य सरकार से भी जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है।
प्रदर्शन स्थल पर छात्र नारेबाजी, धरना, ज्ञापन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। कुछ आंदोलनकारियों ने खून से पत्र लिखकर भी सरकार तक अपनी पीड़ा पहुंचाने का प्रयास किया है।
आंदोलन के पीछे चार बड़े मुद्दे
1. 12वीं बोर्ड हिंदी पेपर लीक पर छात्रों में आक्रोश
आंदोलनकारियों का कहना है कि हाल ही में 12वीं बोर्ड परीक्षा का हिंदी विषय का प्रश्नपत्र लीक होने से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उनका आरोप है कि यह शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता है, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए।
2. शिक्षा मंत्री के बयान पर बढ़ा विवाद
छात्रों का कहना है कि शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का विरोध करते हुए कहा था कि विभागीय त्रुटि के लिए सीधे मंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। आंदोलनकारी इसी बयान को आधार बनाकर सवाल उठा रहे हैं कि यदि जवाबदेही की बात की जा रही है, तो राज्य में हुई घटनाओं पर भी समान मापदंड अपनाया जाना चाहिए।
3. हरिका राव प्रकरण पर न्याय की मांग
नीट (Re-NEET) विवाद के बाद जगदलपुर की छात्रा हरिका राव नाडु द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना को लेकर भी छात्रों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार को अब तक पर्याप्त सरकारी सहायता एवं न्याय नहीं मिला है।
4. जर्जर स्कूल और शिक्षकों की कमी
आंदोलनकारी छात्रों और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रदेश के कई शासकीय एवं स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। अनेक स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं का अभाव है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
छात्रों की तीन प्रमुख मांगें
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें।
पेपर लीक और परीक्षा में धांधली रोकने के लिए सख्त एवं प्रभावी कानून बनाया जाए तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
छात्रा हरिका राव के परिवार को उचित मुआवजा, सरकारी सहायता एवं न्याय प्रदान किया जाए।
आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार
रायपुर के अंबेडकर चौक पर चल रहे इस आंदोलन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र शामिल हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को पूरे छत्तीसगढ़ में जिला स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
शौर्यपथ विशेष
शिक्षा किसी भी राज्य के भविष्य की नींव होती है। प्रश्नपत्र लीक, शिक्षकों की कमी और विद्यार्थियों से जुड़े संवेदनशील मामलों पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार, शिक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियों के लिए पारदर्शी जांच एवं समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है। वहीं आंदोलनकारियों की मांगों और सरकार के पक्ष—दोनों पर लोकतांत्रिक संवाद एवं विधिसम्मत प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पोषण वाटिका में किया श्रमदान, फलदार पौधे और सब्जियों के बीज लगाकर बच्चों ने निभाई प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी
रायपुर।शौर्यपथ ।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत आयोजित 'नो बैग डे' को छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के बस्तामुक्त विद्यालय शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला रुनियाडीह में पर्यावरण संरक्षण और पोषण संवर्धन के अनूठे उत्सव के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत पौधरोपण किया, पोषण वाटिका में श्रमदान किया और प्रकृति संरक्षण का प्रेरक संदेश दिया।
सूरजपुर कलेक्टर श्रीमती रेना जमील के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय परिसर को और अधिक हराभरा बनाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण के साथ-साथ पोषण वाटिका की साफ-सफाई एवं रखरखाव का कार्य किया गया। विद्यार्थियों ने खरपतवार हटाकर पौधों की देखभाल की और श्रमदान के माध्यम से स्वच्छ एवं हरित वातावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय दिया।
संस्था प्रमुख श्री सीमांचल त्रिपाठी ने बताया कि यूथ एवं इको क्लब की प्रभारी श्रीमती एम. टोप्पो के नेतृत्व में क्लब अध्यक्ष वर्षा राजवाड़े सहित छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत विद्यालय से ही हो सकती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप शासकीय उद्यान दतिमा से प्राप्त पौधों का रोपण किया गया। विद्यालय परिसर में नीम, पीपल, आम, पपीता, मुनगा और केला जैसे फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए। वहीं पोषण वाटिका में बरबटी, लौकी और करेला के बीज बोकर विद्यार्थियों को पोषण एवं जैविक खेती का व्यावहारिक अनुभव भी दिया गया।
विद्यालय परिसर में पहले से मौजूद आम, जामुन, कटहल, अमरूद, पपीता, केला और अनानास जैसे फलदार वृक्ष विद्यार्थियों के पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत बने हुए हैं। यह पोषण वाटिका बच्चों में पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें प्रकृति से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बन रही है।
कार्यक्रम की सफलता में शिक्षक श्री रिजवान अंसारी, श्रीमती सुमित्रा राजवाड़े, नान दईया तथा बाल कैबिनेट के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। विद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता का अभियान निरंतर जारी रखा जाएगा।
*सुरक्षित, समावेशी और बाल-अनुकूल विद्यालयी वातावरण निर्माण पर दिया जोर*
रायपुर। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2, रायपुर में शुक्रवार को शिक्षकों के लिए "मानवाधिकार जागरूकता कार्यशाला" का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालय में सुरक्षित, समावेशी, संवेदनशील एवं बाल-अनुकूल वातावरण के निर्माण हेतु शिक्षकों को जागरूक एवं प्रशिक्षित करना था।
कार्यक्रम का शुभारम्भ विद्यालय के प्राचार्य श्री सुजीत सक्सेना द्वारा मुख्य अतिथि एवं प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. कन्हैया त्रिपाठी का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत कर किया गया। प्राचार्य ने अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. त्रिपाठी के मानवाधिकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं उपलब्धियों से शिक्षकों को अवगत कराया।
मुख्य वक्ता डॉ. कन्हैया त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भेदभाव-मुक्त वातावरण उपलब्ध कराना प्रत्येक शिक्षक का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने बच्चों के अधिकार, लैंगिक समानता, गरिमापूर्ण व्यवहार, बाल संरक्षण, संवेदनशील शिक्षण, डिजिटल सुरक्षा तथा जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने विद्यालयों में नियमित रूप से मानवाधिकार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, विद्यार्थियों में सहानुभूति एवं करुणा का विकास करने, बाल संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ बनाने तथा मानवाधिकार आधारित गतिविधियों को विद्यालयी जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में शिक्षकों ने विद्यालयों में मानवाधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. त्रिपाठी ने सरल एवं व्यावहारिक उत्तर दिए।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की उपप्राचार्या श्रीमती सुनीता खिरबाट ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और मुख्य अतिथि सहित सभी शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की।
विद्यालय प्रशासन ने बताया कि यह कार्यशाला शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी रही। यह विद्यालय में मानवाधिकारों पर आधारित सकारात्मक एवं सुरक्षित शैक्षिक वातावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
*अब तक 1 लाख 52 हजार से अधिक बच्चों की हो चुकी स्क्रीनिंग*
रायपुर । शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार, जिला प्रशासन रायपुर द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए संचालित “प्रोजेक्ट धड़कन” के अंतर्गत जिले भर में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की समय रहते पहचान कर उन्हें बेहतर एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना है।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन तथा श्री सत्य साई हॉस्पिटल के सहयोग से अभनपुर टीम बी द्वारा शासकीय हाई स्कूल कोलार में 131 बच्चों, आरंग टीम बी द्वारा शासकीय प्राथमिक शाला बोहारडीह में 48 बच्चों, धरसींवा टीम बी द्वारा शासकीय माध्यमिक शाला धरमपुरा में 126 बच्चों, तिल्दा टीम बी द्वारा हाई स्कूल भुमिया में 336 बच्चों, अर्बन टीम ए द्वारा पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1, रायपुर में 250 बच्चों, अर्बन टीम बी द्वारा बिन्नी बाई सोनकर, भाठागांव में 294 बच्चों तथा अर्बन टीम डी द्वारा हाई स्कूल तिलकनगर, गुढ़ियारी में 206 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। पूरे जिले में कुल 1391 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई।
इस प्रोजेक्ट के तहत अब तक जिले में कुल 1 लाख 52 हजार से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग, 14 बच्चों का मेडिकल उपचार एवं प्रबंधन तथा 18 बच्चों का निःशुल्क ऑपरेशन किया जा चुका है।
जीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम, कृषि विभाग के मार्गदर्शन से मिली नई दिशा
रायपुर, / कृषि विभाग द्वारा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। सरगुजा जिले के विकासखंड सीतापुर के ग्राम पेटला की कृषक श्रीमती एरिन भगत ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में जैविक खेती अपनाकर खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी लाई है और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
कृषि विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन के बाद एरिन भगत ने अपने खेतों में जीवामृत एवं वर्मी कम्पोस्ट का नियमित उपयोग शुरू किया। विभाग द्वारा उन्हें जीवामृत तैयार करने के लिए विशेष ड्रम उपलब्ध कराया गया, जिसकी सहायता से वे गाय के मूत्र से जीवामृत तैयार करती हैं। वहीं, गाय के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाकर खेतों में उपयोग कर रही हैं।
एरिन भगत वर्तमान में पूरी तरह जैविक खेती कर रही हैं। साथ ही वे वर्मी कल्चर के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद का उत्पादन भी कर रही हैं। इससे रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता काफी कम हुई है, जिसके परिणामस्वरूप खेती की लागत में कमी आई है और उत्पादन प्रणाली अधिक टिकाऊ बनी है।
उन्होंने बताया कि पहले रासायनिक उर्वरकों पर अधिक खर्च करना पड़ता था, लेकिन अब प्राकृतिक संसाधनों से तैयार जैविक खाद के उपयोग से आर्थिक बचत हो रही है। इसके साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी हुई है, जिससे भविष्य में बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ी है। उनका मानना है कि जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
कृषि विभाग किसानों को जैविक खेती, जीवामृत निर्माण, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन तथा प्राकृतिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। विभाग के वैज्ञानिक मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से जिले के किसान कम लागत, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने फाफाडीह में युवाओं और आमजनों के साथ सुनी ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत कोरबा में जल संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की
जल संचयन को जन-अभियान बनाने का किया आह्वान
मुख्यमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित दया भवन में युवा साथियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी का श्रवण किया।
कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद का एक ऐसा सशक्त मंच बन गया है, जो समाज के बीच हो रहे सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। देशभर के लोगों को प्रत्येक माह इस कार्यक्रम की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं, नवाचारों और जन-अभियानों को सामने लाते हैं, जो बिना किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के नवाचारों को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले कुछ महीनों में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लगातार छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत और नवाचारों का उल्लेख किया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले मल्हार की समृद्ध पुरातात्विक विरासत, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों का उल्लेख कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति, जनजातीय परंपराओं और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया था।
उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया गया। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की उपलब्धियों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख किए जाने से न केवल छत्तीसगढ़वासियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि राज्य के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को देशभर में नई पहचान भी मिलती है।
कोरबा के जल संरक्षण प्रयासों की प्रधानमंत्री ने की सराहना
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत देशभर में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों को उत्साहजनक बताते हुए उनकी सराहना की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोरबा में वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए भू-स्थानिक मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट, रिचार्ज वेल तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना और क्षेत्र में जल उपलब्धता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से बारिश की प्रत्येक बूंद को सहेजने का जो संदेश दिया है, वह वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकता है। जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।
जल संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएगी राज्य सरकार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों और अन्य परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण तथा वृक्षारोपण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जल संरक्षण के कार्य केवल सरकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से एक व्यापक जन-अभियान का स्वरूप लें।
कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए की। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अप्रतिम शौर्य, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की शौर्यगाथा सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साह से सहभागिता की अपील
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह और गौरव के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के इस उत्सव में सहभागी बनें।
स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी परंपराओं को बढ़ावा देने का संदेश
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, कोसा, हथकरघा वस्त्र, बेलमेटल, बांस शिल्प, माटी कला और वन उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं। इन्हें अपनाना स्थानीय कारीगरों के श्रम और सृजनशीलता का सम्मान है।
मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं अपनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री साय ने आगामी गणेशोत्सव के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण-अनुकूल उत्सव हमारी संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से स्थानीय कुम्हारों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलता है और जल स्रोतों को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में सहायता मिलती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग परंपरा, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था - तीनों के हित में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए वृक्षारोपण को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।
युवा शक्ति की उपलब्धियां देश का गौरव
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की। निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण, अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और खेल जगत में प्राप्त उपलब्धियां नए भारत की युवा शक्ति, प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का युवा आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, खेल और नवाचार के क्षेत्र में विश्व पटल पर देश का नाम रोशन कर रहा है। राज्य सरकार भी छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेल सुविधाएं और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ना विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राष्ट्र की युवा शक्ति ही आने वाले समय में भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाएगी।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में युवा, जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और गणमान्यजन उपस्थित थे।
दुर्ग में कार्यशाला संपन्न, वाराणसी से पवित्र माटी व जल लाकर प्रदेशभर के मंदिरों तक पहुंचाने की बनी रणनीति
दुर्ग। संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों तथा 10 से 15 अगस्त तक प्रस्तावित तिरंगा यात्रा की तैयारियों को लेकर भाजपा की महत्वपूर्ण कार्यशाला जिला भाजपा कार्यालय में संपन्न हुई। कार्यशाला में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय मुख्य अतिथि एवं जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक अध्यक्षता में शामिल हुए। इस दौरान संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और कार्यक्रमों को बूथ स्तर तक सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई।
कार्यशाला में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं संभाग प्रभारी जगन्नाथ पाणिग्रही, प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन, विधायक ललित चंद्राकर, ईश्वर साहू, प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, महापौर अलका बाघमार, जिला महामंत्री दिलीप साहू और विनोद अरोरा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व पदाधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने कहा कि संत रविदास का जीवन सामाजिक समरसता, समानता और बंधुत्व का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वाराणसी में संत रविदास का भव्य स्मारक बन रहा है। 27 जुलाई को भाजपा की विशेष टीम स्मारक स्थल से कलश में पवित्र माटी और जल लेकर छत्तीसगढ़ आएगी, जिसे प्रदेश के प्रमुख मंदिरों और देवस्थलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही सामाजिक समरसता यात्राएं, विचार गोष्ठियां, स्वच्छता अभियान, सेवा कार्य, निबंध, चित्रकला एवं विचार-विमर्श प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 10 से 15 अगस्त तक प्रदेशभर में तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी तथा हर बूथ और हर घर पर तिरंगा फहराने का अभियान चलाया जाएगा।
प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा कि यह अभियान केवल आयोजन नहीं, बल्कि संत रविदास के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प है। वहीं प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन ने बताया कि 25 से 27 जुलाई तक सभी जिलों में कार्यशालाएं आयोजित कर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं ताकि कार्यक्रम ऐतिहासिक बन सके।
जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने कहा कि संत रविदास की 650वीं जयंती भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर है। उन्होंने बताया कि जिला से मंडल और बूथ स्तर तक कार्यक्रमों के संचालन के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है और सभी कार्यकर्ताओं से समन्वय के साथ अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया।
कार्यशाला में भाजपा के जिला एवं मंडल पदाधिकारी, विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
भिलाई / शौर्यपथ / दुर्ग जिले के मोहन नगर थाना क्षेत्र में जमीन खरीदी-बिक्री के हिसाब-किताब को लेकर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त कार, मोटरसाइकिल और धारदार हथियार भी जब्त कर लिए हैं। मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार 25 जुलाई की दोपहर करीब 12 बजे प्रार्थी विनय कुमार सिंह अपने जीजा नरेंद्र सिंह और साथी रूपेश यादव के साथ देवभूमि लेआउट स्थित कार्यालय में जमीन के लेन-देन का हिसाब करने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां पहले से मौजूद विजय मेनन और उसके साथियों से विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए धारदार हथियार और हाथ-मुक्कों से हमला कर दिया। हमले में नरेंद्र सिंह सहित अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि नरेंद्र सिंह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।
घटना की शिकायत पर थाना मोहन नगर में मामला दर्ज कर तत्काल जांच शुरू की गई। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों के मेमोरेंडम के आधार पर घटना में प्रयुक्त कार क्रमांक CG 07 CP 6008, एक मोटरसाइकिल और धारदार हथियार बरामद किए गए।
विवेचना के दौरान पुलिस को घटना के पूर्व नियोजित षड्यंत्र और सामूहिक अपराध से जुड़े साक्ष्य भी मिले। इसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 109, 115(2), 296, 351(3), 61(2) एवं 111 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई है।
पुलिस के अनुसार फरार दो आरोपियों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि भूमि, वित्तीय अथवा व्यक्तिगत विवादों का समाधान कानून के दायरे में रहकर करें। कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाना या डायल-112 पर दें।
गिरफ्तार आरोपी
विक्की सिंह (41 वर्ष), निवासी सुपेला, भिलाई
रंजीत कुमार सिंह (43 वर्ष), निवासी हुडको, भिलाई
रोशन लाल साहू (44 वर्ष), निवासी गौरा चौक, मोहन नगर, दुर्ग
पप्पू कुमार सिंह (39 वर्ष), निवासी सेक्टर-7, भिलाई
तिलग मेलल रम (40 वर्ष), निवासी हाउसिंग बोर्ड, भिलाई
राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से मंजूर किया इस्तीफा, छात्रों के नाम संदेश में बोले धर्मेंद्र प्रधान—'युवाओं की आकांक्षाओं का हमेशा रहेगा सम्मान'
नई दिल्ली। केंद्र सरकार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके वर्तमान मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दे दी गई है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी संभालेंगे। हाल के दिनों में शिक्षा मंत्रालय NEET-UG परीक्षा, पेपर लीक के आरोपों और देशभर में छात्रों के आंदोलन को लेकर लगातार चर्चा में रहा है। ऐसे समय में सरकार ने मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी को सौंपते हुए नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है।
इस्तीफे के बाद क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान
अपने इस्तीफे के साथ जारी संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG के परिणाम संतोषजनक रहे और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसके बावजूद कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया।
प्रधान ने कहा कि उन्हें भारतीय लोकतंत्र की शक्ति पर पूरा विश्वास है और देश के युवाओं के सपनों, आकांक्षाओं और उम्मीदों का उन्होंने हमेशा सम्मान किया है। उनके अनुसार, युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भागीदार हैं।
NEET विवाद से शुरू हुआ देशव्यापी आंदोलन
देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हालिया आंदोलन की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद हुई। परीक्षा समाप्त होते ही पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद हजारों छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए। देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के छात्र आंदोलन में बदल गया।
इसी बीच 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी भी विवाद का विषय बन गई। उन्होंने कुछ लोगों के संदर्भ में 'कॉकरोच' शब्द का प्रयोग किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी छात्रों या युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री के आधार पर पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में थी।
अब सबकी नजर शिक्षा मंत्रालय की नई दिशा पर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब शिक्षा मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास बहाल करना, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और NEET विवाद से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान निकालना होगी। केंद्र सरकार के इस निर्णय को शिक्षा क्षेत्र में नई प्रशासनिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
