October 30, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    दक्षिण छत्तीसगढ़ में तूफान का ज्यादा असर, दंतेवाड़ा-सुकमा-बीजापुर के लिए रेड अलर्ट का दावा; रायपुर-दुर्ग समेत कई जिलों में सतर्कता की जरूरत

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव को लेकर मौसम की चिंता बढ़ गई है। राज्य के कई हिस्सों में बादल, तेज हवाओं और बारिश की स्थिति बनने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 28 और 29 अक्टूबर को मौसम का असर अधिक रहने की आशंका जताई गई है। दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में तेज हवाओं का खतरा बताया गया है, जबकि मध्य छत्तीसगढ़ के रायपुर और दुर्ग सहित कई जिलों में भी आंधी-बारिश की चेतावनी का दावा किया गया है।

    बताए गए पूर्वानुमान के अनुसार, बस्तर क्षेत्र में हवा की रफ्तार 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा और कुछ स्थानों पर 90 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। रायपुर, दुर्ग और आसपास के इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने तथा अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इन आंकड़ों और तूफान के नाम की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

    दक्षिण छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की आशंका

    प्राप्त विवरण में 28 अक्टूबर के लिए दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में रेड अलर्ट बताए जाने का उल्लेख है। रायपुर, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद सहित कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट का दावा किया गया है। अन्य जिलों में यलो अलर्ट की जानकारी दी गई है।

    29 अक्टूबर के लिए बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में रेड अलर्ट बताए जाने की बात कही गई है। कोरबा, कोरिया, सूरजपुर, बेमेतरा, राजनांदगांव और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई सहित कुछ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट तथा रायपुर-दुर्ग समेत अन्य क्षेत्रों के लिए यलो अलर्ट का उल्लेख है। इन जिलावार चेतावनियों की पुष्टि मौसम विभाग की आधिकारिक बुलेटिन से की जानी चाहिए।

    किसानों को सतर्क रहने की सलाह

    बारिश और तेज हवाओं की आशंका के बीच किसानों को धान की कटाई फिलहाल टालने, कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने तथा तिरपाल से ढंकने की सलाह दी गई है। इससे फसल को भीगने और नमी के कारण खराब होने से बचाया जा सकता है।

    नागरिक बरतें सावधानी

    तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, कमजोर मकानों, बिजली के खंभों और ट्रांसफार्मर से दूर रहें। आकाशीय बिजली चमकने पर खुले मैदानों में न रुकें और सुरक्षित पक्के भवन में शरण लें। जलभराव वाले रास्तों तथा उफनते नालों को पार करने से बचें। मौसम बिगड़ने पर प्रशासन की सलाह और मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर ध्यान दें।

    महत्वपूर्ण: मौसम संबंधी चेतावनी के दौरान जिला प्रशासन और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आधिकारिक अपडेट को प्राथमिकता दें।

    ठेकेदारों, नियोक्ताओं और फर्जी दस्तावेज बनाने वालों पर भी होगी कार्रवाई; किराएदारों का सत्यापन अनिवार्य, फेरीवालों के पंजीयन और निगरानी के लिए बनेगा विशेष सॉफ्टवेयर

    रायपुर । छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए राज्य सरकार 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक प्रदेशव्यापी सघन जांच अभियान चलाएगी। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने महानदी भवन में जिला नोडल अधिकारियों की बैठक लेकर औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों, किराए के मकानों, होटलों, लॉज और धर्मशालाओं में विशेष जांच के निर्देश दिए।

    ठेकेदारों से लेकर फर्जी दस्तावेज बनाने वालों तक जांच: अभियान में अवैध प्रवासियों को आश्रय देने, रोजगार उपलब्ध कराने, दूसरे राज्यों से लाने तथा फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज तैयार कराने वालों की भी जांच होगी। फर्जी पाए गए आधार कार्ड संबंधित प्राधिकरण के माध्यम से नियमानुसार निष्क्रिय कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    किराएदारों का सत्यापन, फेरीवालों का पंजीयन: मकान मालिकों को किराएदारों के दस्तावेजों का सत्यापन कराने तथा संबंधित ऐप का उपयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है। गांवों में ग्राम सभाओं और शहरों में पार्षदों के सहयोग से संदिग्ध मामलों की जानकारी जुटाई जाएगी। फेरीवालों के पंजीयन की व्यवस्था के लिए प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    विशेष सॉफ्टवेयर से होगी निगरानी: संदिग्ध व्यक्तियों के रिकॉर्ड, दस्तावेजों के सत्यापन और जिलों में हुई कार्रवाई की जानकारी साझा करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा। रायपुर, कोरबा और रायगढ़ सहित औद्योगिक क्षेत्रों के संभावित हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

    पहचान के बाद कानूनी प्रक्रिया से निर्वासन: विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय नागरिकता और निवास संबंधी दस्तावेजों की जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाए। अवैध प्रवासी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई, आवश्यकतानुसार होल्डिंग सेंटर में रखने और निर्वासन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जांच संबंधित व्यक्ति तक सीमित न रखकर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।

    बैठक में गृह सचिव नेहा चंपावत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, एडीजी (गुप्तवार्ता) अमित कुमार, डीआईजी ओ.पी. पाल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

    अपील: संदिग्ध अवैध प्रवास के संबंध में सूचना देने के लिए सरकार ने टोल फ्री नंबर 1800-233-1905 जारी किया है। प्राप्त सूचनाओं की संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की जाएगी।

    दुर्ग के सबसे पुराने बाजार में नियमों की अनदेखी पर सवाल; बड़े व्यापारियों की मनमानी से पार्किंग, यातायात और आम जनता की परेशानी बढ़ने का खतरा

    शौर्यपथ विशेष
    दुर्ग। शहर के सबसे पुराने और प्रमुख व्यावसायिक केंद्र इंदिरा मार्केट में नगर पालिक निगम की बाजार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। निगम के स्वामित्व वाली सैकड़ों दुकानों वाले इस बाजार में कहीं दुकानों की मूल संरचना में कथित तौर पर मनमाने बदलाव किए जा रहे हैं, तो कहीं दुकानों के सामने बने बरामदों और सड़कों तक व्यापार फैलाकर आम लोगों के आवागमन के लिए उपलब्ध जगह पर कब्जा किया जा रहा है। वहीं, निगम की आवंटन शर्तों के विपरीत दुकानों को किराए पर दिए जाने की शिकायतें भी बाजार व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठाती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन गतिविधियों पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ रही है?

    निगम की संपत्ति में बदलाव की छूट किसने दी?

    इंदिरा मार्केट की कई दुकानें वर्षों पुरानी हैं। समय के साथ इनके रखरखाव और सुरक्षा की जरूरत बढ़ी है, लेकिन बाजार में कुछ दुकानों की मूल संरचना में बदलाव किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि दुकानदारों ने सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना दीवारों, पिलर, छत या अन्य संरचनात्मक हिस्सों में परिवर्तन किया है, तो यह केवल बाजार की व्यवस्था का नहीं, बल्कि भवन की सुरक्षा और निगम की संपत्ति के संरक्षण का भी गंभीर विषय है।

    नगर निगम की दुकानों का आवंटन निर्धारित शर्तों के अधीन होता है। ऐसे में मूल संरचना में बदलाव, अतिरिक्त निर्माण या दुकान के निर्धारित क्षेत्र से बाहर कब्जे के प्रत्येक मामले की नियमानुसार जांच आवश्यक है। सवाल यह है कि बाजार विभाग ने अब तक ऐसी दुकानों का सर्वेक्षण कराया है या नहीं? यदि कराया है, तो नियम विरुद्ध पाए गए निर्माणों पर क्या कार्रवाई हुई? और यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

    सहायक ग्रेड-3 अभ्युदय मिश्रा की भूमिका पर सवाल

    नगर निगम के बाजार विभाग की जिम्मेदारी बाजार में व्यवस्था बनाए रखने, आवंटन शर्तों के पालन की निगरानी करने और सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण रोकने से जुड़ी है। इसके बावजूद इंदिरा मार्केट में दुकानों के सामने बरामदों और सड़कों तक व्यापार फैलने तथा दुकानों की मूल संरचना में बदलाव की शिकायतें बनी हुई हैं।

    बाजार विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सहायक ग्रेड-3 अभ्युदय मिश्रा की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर बाजार में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या नियमित निरीक्षण हो रहा है? क्या आवंटित दुकानों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है? क्या किराए पर दी गई दुकानों और निर्धारित सीमा से बाहर संचालित व्यापार की जांच की गई है?

    यदि इन गतिविधियों की जानकारी विभाग को है, तो कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। और यदि जानकारी नहीं है, तो यह बाजार निगरानी व्यवस्था की गंभीर कमजोरी मानी जाएगी। हालांकि, किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने से पहले संबंधित अभिलेखों और कार्रवाई की स्थिति की पुष्टि आवश्यक है।

    बड़े व्यापारियों के लिए अलग नियम, गरीबों के लिए सख्ती?

    इंदिरा मार्केट की व्यवस्था को लेकर सबसे तीखा सवाल कार्रवाई में समानता का है। एक ओर बड़े व्यापारी वाहन पार्किंग और यातायात की समस्या को लेकर अधिकारियों से शिकायत करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ दुकानदारों द्वारा बरामदों और सड़कों तक व्यापार फैलाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। यदि सार्वजनिक आवागमन के लिए बने बरामदों पर सामान रखकर या दुकान बढ़ाकर कब्जा किया जा रहा है, तो इससे पैदल चलने वाले नागरिकों को परेशानी होती है और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

    ऐसे में निगम प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई सभी के लिए समान है या नहीं। नियमों का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति छोटा पसरा संचालक हो या बड़ा दुकानदार, कार्रवाई का आधार उसकी आर्थिक हैसियत नहीं, बल्कि नियमों का उल्लंघन होना चाहिए।

    महापौर अलका बाघमार की जवाबदेही भी तय हो

    दुर्ग की महापौर श्रीमती अलका बाघमार सार्वजनिक मंचों और प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से शहर की व्यवस्था सुधारने तथा अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई की बात करती रही हैं। लेकिन इंदिरा मार्केट की स्थिति के बीच यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बाजार की बदहाली दूर करने के लिए केवल बयान पर्याप्त हैं?

    यदि छोटे व्यापारियों और सड़क किनारे पसरा लगाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है, तो निगम की दुकानों के सामने सार्वजनिक रास्तों पर कब्जे, कथित अवैध निर्माण और आवंटन शर्तों के उल्लंघन के मामलों में भी उसी तत्परता से कदम उठाए जाने चाहिए। महापौर के नेतृत्व वाली शहरी सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाजार व्यवस्था सुधारने का अभियान किसी एक वर्ग तक सीमित न रहे।

    त्योहारों से पहले नहीं चेते तो बढ़ेगी परेशानी

    त्योहारों के मौसम में इंदिरा मार्केट में खरीदारी करने वालों की आवाजाही बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे समय में यदि दुकानों के सामने सामान फैलाकर रखा गया, बरामदों पर कब्जा बना रहा और पार्किंग व यातायात व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो आम नागरिकों की परेशानी और बढ़ सकती है।

    निगम प्रशासन को बाजार की दुकानों का भौतिक सर्वेक्षण कराना चाहिए, मूल संरचना में हुए बदलावों की अनुमति की जांच करनी चाहिए, आवंटन शर्तों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए और सार्वजनिक बरामदों तथा सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए समान नीति लागू करनी चाहिए।

    अब सवाल साफ है—इंदिरा मार्केट में नियमों का राज चलेगा या मनमानी का? बाजार अधिकारी अभ्युदय मिश्रा और महापौर अलका बाघमार के सामने यह केवल बाजार प्रबंधन की चुनौती नहीं, बल्कि निगम की संपत्ति की सुरक्षा, सार्वजनिक रास्तों की उपलब्धता और आम नागरिकों के हितों से जुड़ा मामला है। दुर्ग की जनता को प्रेस विज्ञप्तियों से आगे बढ़कर जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई का इंतजार है।

    किसानों को बड़ी सौगात, सरकारी कर्मचारियों को कैशलेस इलाज; सड़क, रेल, पर्यटन और खेल विकास के लिए करोड़ों की योजनाओं को मंजूरी

    रायपुर । शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों, बिजली उपभोक्ताओं, शासकीय कर्मचारियों और प्रदेश के विकास से जुड़े 19 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें 15 नवंबर से धान खरीदी, बिजली बिल में राहत जारी रखने, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, नई रेल परियोजना और अधोसंरचना, पर्यटन एवं खेल विकास मिशन प्रमुख हैं।

    धान खरीदी 15 नवंबर से, 3100 केंद्रों पर व्यवस्था

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 27.50 लाख से अधिक किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जाएगा। पिछले वर्ष पंजीकृत एग्रीस्टेक आईडी वाले किसानों को दोबारा पंजीयन से छूट दी गई है। ऋण पुस्तिका लाने की जरूरत नहीं होगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे और बायोमेट्रिक व्यवस्था से खरीदी होगी। 360 नए केंद्र खुलने से कुल उपार्जन केंद्रों की संख्या 3100 हो जाएगी।

    कृषक उन्नति योजना में भी संशोधन को मंजूरी दी गई है। धान पर आदान सहायता अब प्रति क्विंटल के बजाय प्रति एकड़ के आधार पर देने का निर्णय लिया गया है।

    7.25 लाख उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत

    मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत 200 यूनिट तक बिजली बिल में रियायत जारी रहेगी। 400 यूनिट तक मासिक खपत वाले पात्र उपभोक्ताओं के लिए योजना की अवधि 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है। इससे लगभग 7.25 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ मिलता रहेगा।

    कर्मचारियों को कैशलेस इलाज

    शासकीय सेवकों और उनके आश्रित परिवारों के लिए सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। पूर्व-अनुमोदन और दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे गंभीर बीमारी और आपातकाल में आर्थिक राहत मिलेगी।

    सड़क, रेल और पर्यटन विकास को गति

    डामर की कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर ग्रामीण सड़क विकास कार्यों के लिए ₹130.88 करोड़ की राहत मंजूर की गई। राज्य वित्तपोषित सड़क कार्यों के लिए भी लगभग ₹70 से ₹100 करोड़ की अतिरिक्त राहत का अनुमान है।

    ‘मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026’ के लिए पांच वर्षों में ₹500 करोड़ तथा ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ के लिए भी पांच वर्षों में लगभग ₹500 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।

    करीब 295 किलोमीटर लंबी कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना को मंजूरी दी गई। इसकी अनुमानित लागत ₹8000 करोड़ है। परियोजना में लगभग ₹2000 करोड़ की इक्विटी में राज्य शासन और रेल मंत्रालय करीब ₹1000-1000 करोड़ का योगदान देंगे।

    खेल, उद्योग और रोजगार पर जोर

    ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ के लिए वर्ष 2026-27 में ₹100 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। प्रथम चरण में दुर्ग सहित छह शहरों में फीडर सेंटर स्थापित होंगे।

    ₹1000 करोड़ या उससे अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी गई। दुर्ग सहित पांच स्थानों की शासकीय भूमि एवं परिसंपत्तियों के पुनर्विकास को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है।

    राजनांदगांव के खपरीकला में केंद्रीय भंडारण निगम को 10 एकड़ भूमि तथा सोमनी में लगभग ₹400 करोड़ की फल प्रसंस्करण परियोजना के लिए 31.55 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सोमनी परियोजना से 1000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने का अनुमान है।

    कूंरा का नाम कुंवरगढ़, प्रशासनिक सुधारों को मंजूरी

    मंत्रिपरिषद ने रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने, सुशासन एवं अभिसरण विभाग में तीन नए पद सृजित करने और वन मुख्यालय में एक वर्ष के लिए विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का अस्थायी पद बनाने को मंजूरी दी।

    इसके अलावा विशुद्ध राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े नौ प्रकरणों को न्यायालय से वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति तथा स्वर्गीय डॉ. राकेश मोहन चंदोला के पात्र परिवारजनों को परिवार पेंशन, एरियर्स और नियमानुसार ब्याज के भुगतान को स्वीकृति दी गई। औद्योगिक भूमि प्रबंधन नियमों में संशोधन और पिछले दो खरीफ वर्षों के अतिशेष धान की नीलामी संबंधी निर्णय का भी अनुमोदन किया गया।

    बैठक के फैसलों में कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, परिवहन, पर्यटन, खेल, औद्योगिक निवेश और प्रशासनिक सुधारों को प्रमुखता दी गई है।

    भाजपा प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा ने मंत्रिपरिषद के फैसलों को बताया किसान हित, जनकल्याण और कर्मचारी कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

    रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार द्वारा किसानों, घरेलू बिजली उपभोक्ताओं और शासकीय सेवकों के हित में लिए गए निर्णयों का स्वागत करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा ने इन्हें जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी की तैयारियों, घरेलू बिजली बिल में राहत जारी रखने और शासकीय सेवकों एवं उनके आश्रित परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी देने जैसे फैसले सरकार की जनहितकारी प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।

    वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की मेहनत का सम्मान करने, आम परिवारों को आर्थिक राहत देने और शासकीय सेवकों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।

    15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा मूल्य

    जितेंद्र वर्मा ने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी प्रारंभ करने का निर्णय प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, प्रदेश के 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज का निर्धारित मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष पंजीकृत एग्रीस्टेक आईडी वाले किसानों को दोबारा पंजीयन से छूट देना भी राहतकारी निर्णय है। इससे अनावश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया कम होगी और किसानों के समय की बचत होगी। एग्रीस्टेक में पंजीयन होने पर धान विक्रय के लिए समिति में अलग से ऋण पुस्तिका लाने की आवश्यकता नहीं होगी।

    डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से रकबे का ऑनलाइन निर्धारण और बायोमेट्रिक आधारित धान खरीदी की व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने तथा वास्तविक किसानों से उपज खरीदी सुनिश्चित करने में सहायक होगी।

    360 नए उपार्जन केंद्रों से किसानों को मिलेगी सुविधा

    भाजपा प्रदेश मंत्री ने कहा कि इस वर्ष 360 नए धान उपार्जन केंद्र शुरू करने के निर्णय से प्रदेश में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी। इससे किसानों को नजदीकी केंद्रों पर उपज बेचने की सुविधा मिलने और खरीदी व्यवस्था पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

    उन्होंने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के अतिशेष धान की नीलामी के माध्यम से निराकरण संबंधी निर्णय के अनुसमर्थन को भी धान के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

    7.25 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत

    जितेंद्र वर्मा ने मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (एम-ऊर्जा) योजना के अंतर्गत घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में दी जा रही रियायत जारी रखने के निर्णय का स्वागत किया।

    उन्होंने बताया कि मासिक बिजली खपत 400 यूनिट तक होने पर योजना का लाभ लेने की पात्रता अवधि 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक करने का निर्णय लिया गया है। इससे लगभग 7.25 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को लाभ मिलता रहेगा।

    वर्मा ने कहा कि बिजली बिल में राहत से आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कम करने में सहायता मिलेगी। इससे परिवार अपनी आय का उपयोग अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए कर सकेंगे।

    शासकीय सेवकों और परिवारों को मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा

    शासकीय सेवकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने को जितेंद्र वर्मा ने महत्वपूर्ण जनहितकारी निर्णय बताया।

    उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार के दौरान चिकित्सा खर्च का भुगतान स्वयं करने और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता कम होगी। पूर्व-अनुमोदन और चिकित्सा दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन एवं डिजिटल माध्यम से संचालित होने से व्यवस्था अधिक सुविधाजनक बन सकेगी।

    विशेष रूप से गंभीर बीमारी और आपातकालीन परिस्थितियों में यह सुविधा शासकीय सेवकों और उनके आश्रितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने तथा तत्काल आर्थिक बोझ कम करने में सहायक होगी।

    किसान, परिवार और कर्मचारी कल्याण पर जोर

    जितेंद्र वर्मा ने कहा कि धान खरीदी की व्यापक व्यवस्था, बिजली बिल में राहत और कैशलेस चिकित्सा सुविधा जैसे निर्णय प्रदेश के अलग-अलग वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। किसानों को उपज का निर्धारित मूल्य दिलाने, घरेलू उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देने और शासकीय सेवकों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के प्रयास जनकल्याण की भावना को प्रदर्शित करते हैं।

    उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं मंत्रिपरिषद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य योजनाओं और सुविधाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना है। वर्मा ने विश्वास जताया कि इन निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों, आम नागरिकों और शासकीय सेवकों को लाभ मिलेगा तथा प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं को और मजबूती मिलेगी।

    विधायक की चेतावनी— आपत्तियों की अनदेखी हुई तो जाएंगे कोर्ट; मतदाताओं के वार्ड और मतदान केंद्र बदलने से निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवाल

    भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई की प्रारंभिक मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद वार्डों की सीमाओं और मतदान केंद्रों में बदलाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित सूची में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाते हुए भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव ने आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं हुई, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

    विधायक यादव के अनुसार, भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 33 वार्डों में से 13 वार्डों की सीमा रेखा में बदलाव किया गया है। उनका आरोप है कि कई इलाकों के मतदाताओं को दूसरे वार्डों और मतदान केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है। इससे मतदाताओं के सामने अपने वार्ड, मतदाता सूची में दर्ज विवरण और मतदान केंद्र की पहचान को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।

    चार वार्डों में बदलाव को लेकर विशेष आपत्ति

    विधायक ने चार वार्डों में सामने आई विसंगतियों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से बदलावों की स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।

    वार्ड 39 सुभाष नगर: विधायक के मुताबिक, सड़क नंबर 1, 2, 3, 5 तथा 6 से 10 तक के मतदाताओं को लेकर वार्ड 48 के बूथ में शामिल किए जाने और सड़क नंबर 6 से 10 तक के क्षेत्र को वार्ड 38 सोनिया गांधी नगर में जोड़े जाने का उल्लेख है। इस विवरण में स्पष्टता की कमी होने का आरोप लगाया गया है।

    वार्ड 70 हुडको: सड़क नंबर 1 से 4 तक के मतदाताओं को वार्ड 69 हॉस्पिटल सेक्टर के मतदान केंद्रों में स्थानांतरित किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।

    वार्ड 48 खुर्सीपार: जोन-3 के बूथ क्रमांक 175 और 176 के लगभग 200 मतदाताओं को वार्ड 46 स्थित दुर्गा मंदिर मतदान केंद्र में जोड़े जाने का मामला उठाया गया है।

    वार्ड 59 पूर्व सेक्टर-5: भाग संख्या 04 में सड़क नंबर 10 और 11 के मतदाताओं को विभाजित कर सेक्टर-2 स्थित भिलाई विद्यालय मतदान केंद्र में स्थानांतरित किए जाने तथा मार्केट क्षेत्र को वार्ड 60 सेक्टर-5 पश्चिम में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

    मतदाता सूची में पारदर्शिता जरूरी, ताकि मतदान के दिन न हो परेशानी

    विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है। इसमें किसी भी तरह की विसंगति या अस्पष्टता मतदाताओं के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को वार्डों की सीमाओं में किए गए बदलावों, मतदाताओं के स्थानांतरण और मतदान केंद्रों के निर्धारण की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

    उन्होंने मतदाताओं से भी अपील की कि वे प्रारंभिक मतदाता सूची में अपना नाम, वार्ड, भाग संख्या और मतदान केंद्र ध्यानपूर्वक जांच लें तथा किसी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज कराएं।

    अब अधिकारियों की भूमिका पर निगाहें

    प्रारंभिक मतदाता सूची पर उठी आपत्तियों के बीच अब निगाहें नगर निगम और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि वार्डों की सीमाओं और मतदान केंद्रों में किए गए बदलावों का स्पष्ट विवरण सामने आएगा या नहीं और विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों पर समय रहते सुनवाई होगी या नहीं।

    यदि आपत्तियों का नियमानुसार निराकरण नहीं होता है, तो मामला न्यायालय तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, मतदाताओं की सुविधा और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इन विसंगतियों की निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।

    वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर सुरक्षा में तैनात जवानों की संख्या कम करने का किया आग्रह; दुर्ग में पूर्व जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा और शासकीय आवासों के उपयोग की व्यवस्था पर भी चर्चा तेज

    दुर्ग। जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली शासकीय सुविधाओं और उन पर खर्च होने वाली सरकारी राशि को लेकर दुर्ग जिले में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने शासन को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा में तैनात शासकीय सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम करने और उन जवानों को प्रदेश की कानून-व्यवस्था मजबूत करने में लगाने का आग्रह किया है। उनके इस निर्णय ने जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली सुरक्षा, सरकारी संसाधनों के उपयोग और सार्वजनिक धन की बचत जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    ‘जनता ही मेरी सबसे बड़ी सुरक्षा’, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    विधायक रिकेश सेन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को प्रेषित पत्र में कहा है कि वे जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं और जनता ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। पत्र में उन्होंने भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी की कार्यशैली से प्रेरित होकर शासकीय सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम करने की इच्छा जताई है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उनकी सुरक्षा में तैनात जवानों की संख्या घटाकर उन्हें प्रदेश की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उपयोग में लिया जाए। विधायक की इस पहल को सरकारी संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग की दृष्टि से देखा जा रहा है।

    एक निर्णय से उठे कई सवाल

    रिकेश सेन के इस पत्र के बाद अब चर्चा केवल उनकी सुरक्षा तक सीमित नहीं है। दुर्ग जिले में यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन पूर्व जनप्रतिनिधियों के पास वर्तमान में कोई संवैधानिक या निर्वाचित पद नहीं है, उन्हें कौन-कौन सी शासकीय सुविधाएं मिल रही हैं और उनका खर्च किस आधार पर जारी है?

    पूर्व जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्णय खतरे के आकलन और निर्धारित नियमों के आधार पर लिया जाता है। इसलिए किसी पूर्व विधायक या अन्य व्यक्ति को सुरक्षा मिलना अपने आप में नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। लेकिन ऐसी सुरक्षा की समय-समय पर समीक्षा, उसकी आवश्यकता और उस पर होने वाले सरकारी खर्च की पारदर्शिता निश्चित रूप से महत्वपूर्ण विषय हैं।

    पूर्व विधायक अरुण वोरा की सुरक्षा भी चर्चा में

    दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा की सुरक्षा में जवानों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस संबंध में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उन्हें सुरक्षा किस श्रेणी में, किस आधार पर और कितनी अवधि के लिए प्रदान की गई है। यदि सुरक्षा की समीक्षा निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है, तो उसके निष्कर्षों के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाना चाहिए।

    सवाल किसी व्यक्ति विशेष को सुरक्षा देने या हटाने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि शासकीय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप हो और कानून-व्यवस्था के लिए उपलब्ध मानव संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए।

    स्वर्गीय हेमचंद यादव के सरकारी आवास पर भी उठ रहे सवाल

    दुर्ग के सिविल लाइन स्थित उस शासकीय आवास का मुद्दा भी चर्चा में है, जिसका उपयोग पूर्व मंत्री स्वर्गीय हेमचंद यादव करते थे। उनके निधन के वर्षों बाद भी उनके परिवार के पास इस आवास का उपयोग जारी होने की बात कही जा रही है।

    इस मामले में यह जानना आवश्यक है कि आवास वर्तमान में किस वैधानिक अनुमति या आवंटन के आधार पर उपयोग किया जा रहा है, क्या इसकी अवधि बढ़ाई गई है और क्या इसके लिए निर्धारित किराया अथवा अन्य शुल्क जमा किया जा रहा है। यदि आवास का उपयोग बिना वैध अनुमति के जारी है, तो शासन को नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, यदि कोई वैध अनुमति प्रभावी है, तो उसकी शर्तों और अवधि की जानकारी सार्वजनिक होना पारदर्शिता की दृष्टि से उचित होगा।

    सरकारी धन की बचत के लिए व्यवस्था की समीक्षा जरूरी

    शासकीय सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, सरकारी आवासों का आवंटन और पूर्व जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली सुविधाएं सार्वजनिक संसाधनों से जुड़ी व्यवस्थाएं हैं। इनका उद्देश्य आवश्यकता के अनुरूप सुविधा उपलब्ध कराना है, न कि अनिश्चितकाल तक बिना समीक्षा के संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करना।

    यदि सुरक्षा की समीक्षा और शासकीय आवासों के आवंटन की नियमित जांच की जाए, तो अनावश्यक व्यय पर नियंत्रण लगाने के साथ सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे कानून-व्यवस्था के लिए जवानों की उपलब्धता बढ़ाने और सार्वजनिक धन की जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी मदद मिल सकती है।

    क्या रिकेश सेन की पहल बनेगी व्यापक समीक्षा का आधार?

    वैशाली नगर विधायक की ओर से सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम करने का आग्रह एक व्यक्तिगत निर्णय है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस पत्र पर क्या निर्णय लेती है और क्या इसके साथ ही पूर्व जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा तथा शासकीय आवासों के उपयोग की व्यवस्था की भी समीक्षा होती है।

    बड़ा सवाल यही है कि क्या शासन सभी संबंधित मामलों में नियमों के अनुरूप पारदर्शी समीक्षा कर सार्वजनिक संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित करेगा, या रिकेश सेन की यह पहल केवल एक व्यक्तिगत उदाहरण बनकर रह जाएगी? जनहित में जरूरी है कि सुरक्षा की आवश्यकता का आकलन निष्पक्ष हो, शासकीय संपत्तियों का उपयोग नियमों के अनुसार हो और सरकारी धन के प्रत्येक व्यय की जवाबदेही तय की जाए।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया लोकार्पण, महिला स्व-सहायता समूहों और वन उपज संग्राहकों की आय बढ़ाने पर जोर; प्रीमियम और सामान्य श्रेणी में उपलब्ध होंगे उपहार पैक

    रायपुर । छत्तीसगढ़ की वन संपदा, पारंपरिक स्वाद और महिला स्व-सहायता समूहों के परिश्रम को नई पहचान देने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक का लोकार्पण किया। वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार इन उत्पादों को आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के साथ वन उपज संग्राहकों और ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का आधार है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय वनोपज का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन प्रदेश में ही हो, ताकि इसका आर्थिक लाभ सीधे संग्राहकों और महिला समूहों तक पहुंचे। उन्होंने प्रदेशवासियों से त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील भी की।

    प्रीमियम और सामान्य श्रेणी में गिफ्ट पैक

    ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के दिवाली गिफ्ट पैक दो श्रेणियों में तैयार किए गए हैं। प्रीमियम पैक में नौ प्रकार के चयनित उत्पाद, जबकि सामान्य पैक में पांच प्रकार के उत्पाद शामिल हैं। आम नागरिक इन्हें छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संचालित ‘संजीवनी’ विक्रय केंद्रों से खरीद सकेंगे।

    जामुन जूस से महुआ कुकीज़ तक, स्थानीय स्वाद की झलक

    गिफ्ट पैक में जामुन जूस, जामुन स्प्रेड, आंवला कैंडी, इमली कैंडी, कोदो एवं महुआ से बने कुकीज़, च्यवनप्राश, वाइल्ड फॉरेस्ट हनी, बस्तर के मसाला एवं नमकीन काजू, जशपुर की ग्रीन टी और एलोवेरा जेल जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों के जरिए प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक खाद्य संस्कृति और स्थानीय उद्यमिता को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है।

    सात वन धन केंद्रों में तैयार हो रहे उत्पाद

    इन गिफ्ट पैक में शामिल उत्पाद राजनांदगांव के कौरीनभाटा, कवर्धा के बोड़ला, जशपुर के पंचक्की, जगदलपुर के आसना, धमतरी के दुगली, कटघोरा के डोंगानाला स्थित वन धन विकास केंद्रों और दुर्ग के जामगांव (एम) स्थित केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई में तैयार किए जा रहे हैं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन वन धन विकास केंद्रों का वार्षिक कारोबार लगभग 60 से 70 लाख रुपये है। यहां वनोपज के प्रसंस्करण, निर्माण और पैकेजिंग के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। महिला स्व-सहायता समूह भी उत्पादन से लेकर विपणन तक की गतिविधियों में भागीदारी निभा रहे हैं।

    स्थानीय उत्पादों से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

    दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर स्थानीय उत्पादों को उपहार के रूप में बढ़ावा देने से उनकी मांग और बाजार तक पहुंच बढ़ने की संभावना है। इससे वन उपज संग्राहकों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को लाभ मिल सकता है। बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के जरिए ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ को व्यापक पहचान दिलाने की यह पहल स्थानीय संसाधनों को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    31 दिसंबर तक पहले बैच के 18,300 से अधिक अग्निवीरों की सेवा समाप्त होने की तैयारी; साय सरकार ने पुलिस आरक्षक, वनरक्षक और जेल प्रहरी भर्ती में आरक्षण का बनाया प्रावधान

    रायपुर। अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सशस्त्र सेनाओं में भर्ती हुए पहले बैच के 18,300 से अधिक अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल वर्ष 2026 के अंत तक पूरा होने जा रहा है। सेवा समाप्ति के बाद इन युवाओं के सामने रोजगार और भविष्य को सुरक्षित करने की चुनौती होगी। इस बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम-2026 को मंजूरी देते हुए तृतीय श्रेणी के चिन्हित पदों पर 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

    पुलिस, वन और जेल विभाग में मिलेगा अवसर

    राज्य सरकार के निर्णय के तहत पूर्व अग्निवीरों को पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर भर्ती में आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य सैन्य सेवा के दौरान अर्जित अनुशासन, शारीरिक दक्षता और प्रशिक्षण का उपयोग राज्य की सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में करना है।

    इस सुविधा का लाभ छत्तीसगढ़ के मूल निवासी उन पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा, जिन्होंने भारतीय सशस्त्र सेनाओं में चार वर्ष का निर्धारित कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया हो। इसके लिए सेवा समाप्ति का वैध डिस्चार्ज प्रमाणपत्र अथवा सर्विस सर्टिफिकेट आवश्यक होगा। आरक्षण का लाभ संबंधित भर्ती नियमों, निर्धारित पात्रता और चयन प्रक्रिया के अधीन मिलेगा।

    आरक्षक भर्ती में भी लागू होगा प्रावधान

    गृह विभाग के अंतर्गत आरक्षक पदों पर विशेष भर्ती की अनुमति दिए जाने के साथ पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित आरक्षण व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सैन्य सेवा पूरी कर लौटने वाले युवाओं को राज्य पुलिस में शामिल होने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अंतिम चयन के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, शारीरिक मापदंड और अन्य भर्ती शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा।

    अग्निवीर भर्ती के लिए युवाओं को प्रशिक्षण

    छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से युवाओं को सेना और अग्निवीर भर्ती के लिए तैयार करने हेतु रोजगार विभाग के माध्यम से पूर्व-भर्ती लिखित एवं शारीरिक प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है। इससे युवाओं को सैन्य भर्ती की तैयारी में सहायता मिलती है। अब पूर्व अग्निवीरों के लिए राज्य की सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की पहल को इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    ₹11.71 लाख की सेवा निधि, लेकिन नियमित सैन्य पेंशन नहीं

    अग्निपथ योजना के तहत चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को नियमानुसार लगभग ₹11.71 लाख की सेवा निधि मिलने का प्रावधान है। हालांकि, चार वर्ष की संविदा सेवा पूरी करने वाले और नियमित कैडर में शामिल नहीं होने वाले अग्निवीरों को नियमित सैन्य पेंशन नहीं मिलती। योजना के अनुसार, प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नियमित सैन्य सेवा में शामिल होने का अवसर मिलता है।

    ऐसे में सेवा समाप्ति के बाद रोजगार उपलब्ध कराना केंद्र और राज्य सरकारों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है। विभिन्न राज्यों में पूर्व अग्निवीरों को पुलिस, सुरक्षा सेवाओं और अन्य सरकारी पदों पर अवसर देने के लिए अलग-अलग प्रावधान किए जा रहे हैं।

    रोजगार और सम्मानजनक पुनर्वास पर टिकी निगाहें

    छत्तीसगढ़ में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है, जो सैन्य सेवा के बाद अपने गृह राज्य में रोजगार पाना चाहते हैं। इससे एक ओर पूर्व अग्निवीरों के अनुभव का लाभ राज्य को मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर युवाओं को सेवा समाप्ति के बाद नए करियर की दिशा मिल सकती है।

    अब इस पहल का वास्तविक लाभ भर्ती नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन, रिक्त पदों की उपलब्धता और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर निर्भर करेगा। पूर्व अग्निवीरों को समयबद्ध भर्ती और पर्याप्त अवसर मिलते हैं, तो यह कदम उनके सम्मानजनक पुनर्वास के साथ-साथ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भी उपयोगी साबित हो सकता है।

    पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक हर महीने 7,314 रुपये अतिरिक्त ब्याज भुगतान के निर्देश; बिना रेरा पंजीयन परियोजना विकसित करने पर धारा 59 के तहत अलग कार्रवाई होगी

    रायपुर। छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने रायपुर के सेजबहार स्थित ‘वात्सल्य गौरव-1, फेज-1’ परियोजना में विकास कार्य अधूरे रहने और पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किए जाने के मामले में प्रमोटर को आबंटी के पक्ष में 6,87,496 रुपये ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। प्राधिकरण ने यह भी निर्देश दिया है कि परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक 1 नवंबर 2026 से प्रतिमाह 7,314 रुपये ब्याज का भुगतान किया जाए। परियोजना का रेरा पंजीयन नहीं कराए जाने के मामले में प्रमोटर के विरुद्ध पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    2019 से अक्टूबर 2026 तक का ब्याज देना होगा

    प्राधिकरण के अनुसार, आबंटी द्वारा जमा की गई 8,12,643 रुपये की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की गणना करते हुए 6,87,496 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक निर्धारित मासिक ब्याज राशि का भुगतान करना होगा।

    अधूरे विकास कार्य और प्रमाण पत्र नहीं मिलने पर कार्रवाई

    सुनवाई के दौरान परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप विकास कार्य पूरे नहीं होने तथा सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किए जाने का मामला सामने आया। प्राधिकरण ने परियोजना को अपूर्ण मानते हुए भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के तहत विलंब के लिए ब्याज भुगतान का आदेश पारित किया।

    बिना पंजीयन परियोजना विकसित करने पर अलग प्रकरण

    CG-RERA ने परियोजना का पंजीयन नहीं कराए जाने को भी गंभीरता से लिया है। आदेश में धारा 3 के तहत पंजीयन की अनिवार्यता का उल्लेख करते हुए प्रमोटर के विरुद्ध धारा 59 के अंतर्गत पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रावधान के तहत बिना अनिवार्य पंजीयन परियोजना का विज्ञापन, विपणन, बुकिंग या विक्रय करने पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

    भूखंड बेचने के बाद भी विकास की जिम्मेदारी प्रमोटर की

    प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि भूखंडों का विक्रय कर देने मात्र से प्रमोटर की वैधानिक जिम्मेदारियां समाप्त नहीं होतीं। स्वीकृत ले-आउट के अनुसार सड़क, नाली, विद्युत, पेयजल और अन्य निर्धारित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करना प्रमोटर का दायित्व है।

    CG-RERA का यह आदेश उन आबंटियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें परियोजनाओं में विकास कार्य अधूरे रहने या आवश्यक प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह मामला रियल एस्टेट परियोजनाओं में समयबद्ध विकास, पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों के पालन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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