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ओपिनियन /शौर्यपथ / केरल का एकमात्र मुस्लिम बहुल जिला मलप्पुरम पिछले दिनों गलत वजहों से सुर्खियों में आ गया। 70.2 फीसदी मुस्लिम और 27.6 प्रतिशत हिंदू आबादी वाला यह जिला अक्सर विवाद में घसीट लिया जाता है। हालांकि, स्थानीय बाशिंदे इसे सिरे से नकारते हैं और कहते हैं कि ‘जो लोग इस जिले या राज्य को अच्छी तरह से नहीं समझते, वही ऐसी बातें करते हैं’।
अभी यह जिला इसलिए चर्चा में आया, क्योंकि यहां एक गर्भवती जंगली हथिनी दुखद हालात में मृत पाई गई। उसने पास के पालक्काड जिले में पटाखों से भरा एक अनानास खा लिया था। ये पटाखे किसानों द्वारा उन जंगली सूअरों को मारने के लिए लगाए गए थे, जो उनकी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसा माना जाता है कि वह हथिनी विस्फोट से घायल होने के बाद साइलेंट वैली के जंगलों से कई किलोमीटर दूर चली गई। मन्नारकाड वन क्षेत्र के अंतर्गत कोट्टप्पडाम पंचायत के अंबलप्पारा में उसे घायल पाया गया। यह इलाका मलप्पुरम नहीं, पालक्काड जिले का हिस्सा है। फिलहाल, वन्य-जीव संरक्षण कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच और कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस घटना ने राज्य में सत्तासीन वाम मोर्चा सरकार के विरोधियों को हमलावर होने का मौका दे दिया। सोशल मीडिया पर बड़ा अभियान छेड़ते हुए राज्य सरकार पर हमला बोला गया और मलप्पुरम को निशाना बनाया गया, जबकि इस घटना से उसका कोई रिश्ता नहीं था। वास्तव में, न तो मलप्पुरम देश का सबसे हिंसक जिला है और न ही इस राज्य में हाथियों को निशाना बनाया जाता है। असलियत में हाथी तो देश भर में, विशेषकर दक्षिणी राज्यों में सबसे अधिक प्यारे और पूजनीय जानवरों में शामिल हैं। अनुमान है कि भारत में 28,000 हाथी हैं, जो किसी भी एशियाई देश से ज्यादा हैं।
केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में तो आमतौर पर ये मंदिरों का हिस्सा होते हैं। प्रशिक्षित मंदिर हाथी केरल में आम तौर पर देखे जाते हैं। सभी प्रमुख त्योहारों में यह राजसी जानवर आकर्षण का केंद्र होता है। इस सूबे में एक सालाना कैंप भी लगता है, जहां कुछ पालतू हाथियों को मानव-पशु संघर्ष कम करने के लिए ‘कुमकी’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षित किए गए ‘कुमकी’ हाथी की मदद से इंसान जंगली हाथियों को वापस जंगलों में भेजता है।
तमिलनाडु में राज्य सरकार हाथियों के लिए सालाना रिट्रीट रखती है, जहां राज्य भर के पालतू हाथियों को ट्रकों में लाया जाता है और उन्हें स्वस्थ माहौल में रखा जाता है। इस कैंप के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद उनका वजन मापा जाता है और पशु चिकित्सक उनकी सेहत की पड़ताल करते हैं। उन्हें अगले चार सप्ताह तक दवाइयां और पौष्टिक आहार दिए जाते हैं। उन्हें सुबह की सैर कराई जाती है और विशेष रूप से तैयार जंबो सॉवर में नहलाया जाता है। कैंप खत्म होने के बाद हाथी बेमन से अपने घर लौटते हैं।
मगर इंसान और जंगल में रहने वाले हाथियों के बीच संघर्ष भी लगातार जारी रहता है। जंगली हाथियों के लिए खास तौर पर जंगल संरक्षित किए गए हैं, फिर भी वे अमूमन खाने और पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकल आते हैं। इसी का नतीजा इंसान-हाथी संघर्ष के रूप में सामने आता है। कोई भी किसान कई तरह के उपाय अपनाकर अपनी फसल को बचाने की कोशिश करता है। उसका उद्देश्य हाथियों को मारना कतई नहीं होता। अनुमान है कि हाथियों की वजह से हर वर्ष 600 इंसान मारे जाते हैं, जबकि 100 से अधिक हाथी भी सालाना अकाल मौत पाते हैं। हाथियों पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स के प्रमुख महेश रंगराजन कहते हैं कि किसानों और हाथियों, दोनों के लिए माहौल को सुरक्षित बनाना जरूरी है, क्योंकि दोनों पीड़ित हैं। किसान की जरूरत अपनी फसल बचाना है, तो हाथी को उसके माहौल के मुताबिक निवास-स्थान मिलना चाहिए। वह कहते हैं, विभिन्न प्रशासनिक उपायों से दोनों का साथ-साथ अस्तित्व संभव है।
ऐसा अनुमान है कि भारत में हाथियों के लिए 80 गलियारे हैं। ये वे रास्ते हैं, जिनसे जंगली हाथी अपने प्राकृतिक वास के लिए गुजरते हैं, लेकिन विभिन्न निर्माण गतिविधियों को अंजाम देकर इंसान इन स्थानों या गलियारों पर कब्जा कर रहा है। नतीजतन, हाथियों के प्राकृतिक मार्ग खत्म हो रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें, तो हाथी ‘भोजन’ के लिए इंसानों को नहीं मारते। वे तब आक्रामक हो जाते हैं, जब उन्हें अपनी जान पर खतरा महसूस होता है। माना जाता है, जंगली जानवरों की वजह से हर साल पांच लाख से अधिक किसानों को फसलों का नुकसान उठाना पड़ता है। उनका स्वाभाविक प्रयास अपने खेतों की रक्षा करना होता है। इसके लिए कुछ जगहों पर वे बिजली वाले तार लगाते हैं, जिनमें हल्का करंट होता है, तो कुछ स्थानों पर जानवरों को फंसाने के लिए गड्ढा खोद देते हैं। वन्य-जीव संरक्षणवादी जानवर को फंसाने के इन तरीकों की भी मुखालफत करते हैं। हाथियों को किसी भी तरीके से मारना स्वीकार्य नहीं हो सकता। टास्क फोर्स ने किसानों को नुकसान से बचाने के लिए अतिरिक्त फसल बीमा का सुझाव दिया है।
अनुमान यह भी है कि हर साल कम से कम 40 हाथी अपने दांत के लिए शिकारियों के हत्थे चढ़ते हैं। केंद्र और राज्य, दोनों के वन्य-जीव विभागों ने इन घटनाओं को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। मगर अब भी इनके निवास-स्थान को सुरक्षित बनाने के लिए बहुत कुछ करने की दरकार है।
पौराणिक कथाओं में खूब उल्लेख के कारण हाथी हिंदुओं द्वारा पूजनीय है। लेकिन आमतौर पर अपने कद और चाल के लिए यह सभी का दुलारा है। बच्चों को तो खासतौर से हाथी पसंद है और वे उसकी तस्वीर भी खूब बनाते हैं। यह बताता है कि हाथी कितना लोकप्रिय है। इसीलिए जब उसकी दुखद मौत की खबर आई, तो यह किसी झटके से कम नहीं था। मगर इससे भी बड़ी त्रासदी थी, उसकी मौत को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश। मलप्पुरम ऐसा अद्भुत जिला है, जहां कई हिंदुओं की बारात मस्जिदों से निकलती है। मेरी नजर में यहां कम से कम एक हिंदू मंदिर ऐसा जरूर है, जिसका पुजारी मुस्लिम है और वह उस वंश का है, जिनके पूर्वज यहां पूजा-पाठ कराते आए हैं। जाहिर है, इंसानों को ही एक-दूसरे के संग और जानवरों के साथ भी सद्भाव से रहना सीखना होगा। हथिनी की मौत की जांच कर रहे रेंज ऑफिसर भी यही संकेत करते हैं, जब वह कहते हैं कि ‘यह मानव-पशु संघर्ष का नतीजा है, सांप्रदायिक संघर्ष का नहीं’।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) एस श्रीनिवासन, वरिष्ठ पत्रकार
दुर्ग / शौर्यपथ / पर्यावरण को संजोने आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण से जोडऩा बेहद आवश्यक है। इसके लिए एक नवाचारी प्रयोग वन विभाग द्वारा किया जाएगा। लगभग 120 बच्चों का समूह जंगल में टैंट में एक दिन का हाल्ट करेगा। यहां फारेस्ट विभाग के ट्रेनर बच्चों को जंगल के जानवरों के बारे में, पक्षियों के बारे में बताएंगे। वे यह बताएंगे कि किस प्रकार पारिस्थितिकी का संरक्षण करना मानवता के लिए उपयोगी होगा। जंगल में अलग-अलग तरह के पक्षियों की आवाजें, उनके आवास, उनके समूह में रहने का तरीका, खानपान की विधि आदि बताई जाएगी।
कैंप का समय माइग्रेटरी बर्ड का समय होगा, इसलिए उनके डिटेल्स भी बताए जाएंगे। इसमें फारेस्ट विभाग के प्रमुख अधिकारियों के साथ राजू वर्मा जैसे पक्षी विशेषज्ञ भी बच्चों को पक्षियों के बारे में तथ्य साझा करेंगे। आज कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे की अध्यक्षता में इस संबंध में बैठक हुई। यहां डीएफओ श्री केआर बढ़ाई ने विस्तार से प्रोजेक्ट की जानकारी दी और बताया कि ये प्रोजेक्ट किस तरह बच्चों की अभिरुचि जगाने में सहायक हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि स्कूली विद्यार्थियों में वन, वन्य प्राणी एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने हेतु वन मितान कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जिसके तहत कक्षा 6वीं से 12वीं के छात्र-छात्राओं को प्राकृतिक वातावरण का अनुभव प्रदान कर उन्हें इसके संरक्षण के लिए जागरुक किया जाएगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य- वन मितान कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को वन वन्य प्राणी एवं पर्यावरण की वन मितान बनाकर उन्हें इसके संरक्षण हेतु प्रेरित करना है। इच्छुक विद्यार्थियों को नेचुरल वॉलेंटियर फोर्स के रूप में विकसित करना है साथ ही विभाग एवं विभागीय अधिकारियों के कार्य उत्तरदायित्वों एवं चुनौतियों से इन विद्यार्थियों को अवगत कराना है।
विद्यालय एवं विद्यार्थियों का चयन- विद्यालय एवं विद्यार्थियों का चयन एवं निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। ऐसे विद्यार्थी जो पर्यावरण के प्रति अभिरूचि रखते हो। विद्यार्थी का चयन वन्य प्राणी पक्षी इत्यादि की समान्य जानकारी के आधार पर होगा। चयनित विद्यार्थी का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। शिविर हेतु कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को चनित किया जा सकता हैं किन्तु प्राथमिकता के आधार पर 8वीं एवं 12वीं के विद्यार्थी को सर्वप्रथामिकता दी जाएगी। प्रत्येक परिक्षेत्र में 120 विद्यार्थी का चयन किया जाकर दो चरणों में 60-60 विद्यार्थी हेतु वन मितान कार्यक्रम किया जाएगा।
शिविर स्थल का चयन- प्रशिक्षण सह जागरूकता शिविर का आयोजन वन्य परिक्षेत्र में स्थित प्राकृतिक सौन्दर्य के स्थल पर किया जाएगा। शिविर का चयन इस प्रकार से किया जाएगा कि विद्यालय से 25 से 30 किलोमीटर के परिक्षेत्र में स्थित हो।
गतिविधियॉ- वनमितान शिविर एक दिन का होगा। जिसमें विभिन्न प्रकार की गतिविधियॉ को शामिल किया गया है। शिविर दिवस पर विद्यार्थियों को पक्षी दर्शन, वन्य प्राणी दर्शन, सफारी, नौकायान, वन भ्रमण कराया जाएगा। प्राकृतिक पथ भ्रमण, प्रकृति की पाठशाला, स्थल पर विद्यमान वाणिकी गतिविधियों की जानकारी देने के साथ ही वन एवं वन्य प्राणी एवं पर्यावरण के महत्व से रूबरू कराया जाएगा। जिज्ञासा समाधान व चर्चा, परिचर्चा, वनाचार, प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया जाएगा। शिविर के आयोजन को ध्यान में रखते हुए साफ-सफाई, भोजन, सुरक्षा स्वास्थ्य, सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश सहित देश में कोरोना आपदा की मार से पूरा जनजीवन अस्त व्यस्त है . आम आदमी की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है . छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी यह स्पष्ट सन्देश दिया है कि ऐसी कोई मितव्यतिता से बचा जाए . कोरोना आपदा में राज्य सरकार के अधिकारियों और पदेन जनप्रतिनिधियों को मितव्यतिता से बचने के सन्देश दिए है . किन्तु इस सन्देश का असर दुर्ग निगम में पड़ा हो ये नजऱ नहीं आ रहा है . एक तरफ निगम प्रशासन फण्ड की कमी की बात कर रहा है निगम आयुक्त स्वयं अधिकारियों को निर्देशित कर रहे है कि सार्थक प्रयास कर राजस्व की बकाया राशि वसूली जाए .वही महापौर बाकलीवाल द्वारा शहर के ऐसे दुकाने , गुमठिया जो खाली पड़ी है किराये में देने , विक्रय करने के लिए शहर के व्यापारियों से , चिकित्सको से , अधिवाक्ताओ से चर्चा कर रहे है ताकि निगम की करोडो की संपत्ति ( ऐसी दुकाने जो सालो से बनी है और अभी तक विक्रय नहीं हुई है ) का सही तरीके से उपयोग कर राजस्व की बढ़ोतरी की जाये किन्तु वही दुर्ग का एम्आईसी भवन निरंतर नए नए सुविधाओ से लेस हो रहा है जिसकी वर्तमान में जरुरत भी नहीं .
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सारा कार्य प्रभारी ईई मोहनपुरी गोस्वामी के निरिक्षण में हो रहा है . एक तरफ जब इस बारे में मोहन पूरी गोस्वामी से जानकारी ली गयी तो उनके अनुसार सिर्फ पेंट पुताई की बात कही गयी किन्तु आम जनता को भी आसानी से दिख रहा है कि एमआईसी भवन में पेंट के साथ डिजाइनर वाल , नए नए परदे , एक दरवाज़ा होने के बाद भी दूसरा कांच का दरवाज़ा , खिड़की की सही हालत होने के बाद भी नयी-नयी खिडकिया , कई केबिनो में नए नए चेयर तक की व्यवस्था की जा रही है . विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी मंत्रियो के कमरे में एसी लगाने की तैयारी की जा रही है . यह सारा कार्य एम्आईसी के प्रभारी के निर्देश पर होने की बात बताई जा रही है . आखिर प्रभारी ईई मामले को छुपाने की कोशिश क्यों कर रहे है क्या अपने किसी ख़ास ठेकेदार से ये कार्य करवाने के लिए सारी जहमत उठाई जा रही है या कोई और बात है ? क्या मामले को संज्ञान लेंगे आयुक्त बर्मन ?
ये सही है कि निगम में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में आयी है और जनप्रतिनिधि होने के नाते ये उनका हक भी है कि अपनी केबिन की साज सज्जा उच्च स्तर की रखे ये अलग बात है कि 15 साल भाजपा सत्ता में रहने के बाद भी सिर्फ ज़रूरी सुविधाओ के साथ मंत्रालय में कार्य किया है जबकि तब स्थिति सामान्य थी कोई वैश्विक महामारी नहीं थी किन्तु वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री के सन्देश को भी दरकिनार करते हुए कार्य समझ से परे है . खैर सत्ता में कांग्रेस है और प्रदेश के मुखिया भी कांग्रेस से है तो कोई रोक टोक नहीं होगी सारी सुविधाए आ भी जाएँगी शायद इसे ही कहते है 15 साल बाद सत्ता में आने के बाद का सुख शायद यही है राजनितिक पद में विराजमान होने का लाभ , शायद यही कारण है कि पार्षद के चुनाव में लाखो खर्च करते है प्रत्याशी .
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में कोरोना संक्रमण से बचाव, नियंत्रण के उपायों और मरीजों के इलाज की व्यवस्थाओं की समीक्षा की साथ ही आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने क्वारेंटीन सेंटर्स की व्यवस्था, अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि संक्रमित व्यक्ति से अस्पताल आने वाले अन्य मरीजों में संक्रमण नहीं फैले। चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ के लोग संक्रमण से बचाव के लिए गाइड लाईन का पालन करें। मुख्यमंत्री बघेल ने वीडियो क्रांफ्रेंसिंग के माध्यम से एम्स रायपुर के निदेशक और बिलासपुर सिम्स के अधिकारियों से भी वहां की व्यवस्थाओं और आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जिलों में 141 कोविड केयर सेंटरों और कोविड के मरीजों के लिए 21 हजार 230 बिस्तर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
स्वास्थ्य सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने मुख्यमंत्री को विभिन्न अस्पतालों में उपचार की व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कोविड-19 नियंत्रण के लिए प्रदेश स्तर पर किए जा रहे उपायों की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में शामिल अधिकारियों से क्वारेंटाइन सेंटर्स की संख्या, वहां की व्यवस्था और रह रहे लोगों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में प्रदेश में पहुंच चुके प्रवासी मजदूरों के लिए संचालित क्वारेंटाइन सेंटर्स एवं वहां की व्यवस्था के बारे में चर्चा की और अगले कुछ दिनों में पहुंचने वाले मजदूरों को क्वारेंटाइन सेंटर्स में रखने की व्यवस्था के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों एवं वहां भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी ली। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में क्षेत्रीय स्तर पर डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल में 1770 बेड हैं, वहीं जिले स्तर पर डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल में 3470 बिस्तर की व्यवस्था है। इन सभी अस्पतालों में आईसीयू की व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त बिना लक्षण वाले और कम लक्षण वाले मरीजों हेतु 141 कोविड केयर सेंटर जिलों में स्थापित किये जा रहे हैं, जहाँ 7234 बिस्तर उपलब्ध होंगे व 6500 बिस्तर के अतिरिक्त कोविड केयर यूनिट की स्थापना प्रक्रियाधीन है।
अधिकारियों ने बताया क्वारेंटीन सेंटर में पूर्व से उपलब्ध 4026 बिस्तरों को भी आवश्यकता पडऩे पर कोविड केयर सेंटर में परिवर्तित किया जायेगा। इस प्रकार प्रदेश में कोविड-19 मरीजों हेतु 21 हजार 230 बिस्तर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमितों के स्वास्थ्य की गंभीरता, लाक्षणिक और गैर-लाक्षणिक मरीजों की जांच व स्वास्थ्य की स्थिति एवं उपचार की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री बघेल ने आने वाले दिनों में कोविड-19 पर नियंत्रण के प्रभावी उपायों और इसका सामुदायिक प्रसार रोकने के संबंध में एम्स के निदेशक डॉ. नितिन एम. नागरकर से सुझाव मांगे। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच करने और इलाज के बारे में आगामी कार्ययोजना एवं रणनीति पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री ने सिम्स बिलासपुर के डीन और अधीक्षक से वहां कोरोना वायरस संक्रमित डॉक्टर एवं मेडिकल स्टॉफ के बारे में जानकारी ली।
डीन डॉ. पात्रा ने मुख्यमंत्री को डॉक्टरों के संक्रमण के कारणों की जानकारी दी। उन्होंने इससे बचने के लिए वहां की जा रही सावधानियों के बारे में भी बताया। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने सभी मेडिकल कॉलेजों को जरूरी सावधानी बरतने तथा इलाज के लिए आने वाले गंभीर मरीजों का गंभीरतापूर्वक उपचार करने के निर्देश दिए। उन्होंने इलाज और देखभाल के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों को अपनाने और सभी को इनका अनिवार्यत: पालन करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी. पिल्ले, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, स्वास्थ्य विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, खाद्य एवं परिवहन विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं नीरज बंसोड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. एस.एल. आदिले और सिम्स बिलासपुर के डीन डॉ. पात्रा शामिल हुए । एम्स रायपुर के निदेशक डॉ. नितिन एम. नागरकर तथा सिम्स बिलासपुर के अधीक्षक डॉ. पुनीत भारद्वाज अपने-अपने कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेस में जुड़े।
दुर्ग / शौर्यपथ / विद्युत कंपनी ने परिवादी संस्थान के प्लॉट से 33 के.व्ही. विद्युत पोल हटाने के लिए बड़ी राशि जमा कराई और पूरी राशि मिलने बाद भी ना तो पोल हटाया और ना ही परिवादी संस्था को उसकी राशि वापस की। इस आचरण को व्यवसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नता ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के पद्मनाभपुर दुर्ग कार्यालय के कार्यपालन यंत्री एवं सहायक अभियंता पर 6 लाख 5 हजार रुपये हर्जाना लगाया।
परिवादी संस्था की शिकायत
परिवादी संस्था जुग महादेव एजुकेशनल सोसायटी के सचिव सुशील चंद्राकर ने उपभोक्ता फोरम के समक्ष ये परिवाद दायर किया कि पुलगांव चौक पर उनके संस्थान द्वारा निर्माण कराए जा रहे कालेज के प्लॉट से 33 के.वी. पोल लगा हुआ है, जिसके ऊपर से हाईवोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन गुजरती है। पत्र व्यवहार करने पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने कहा कि 554076 रुपये भुगतान करने पर उक्त पोल को परिवादी के प्लॉट से हटा दिया जाएगा, जिस पर सहमत होते हुए परिवादी ने दिनांक 31 मार्च 2008 को 554076 रुपये भुगतान कर दिया परंतु संपूर्ण राशि प्राप्त होने के बाद भी अनावेदकों द्वारा ना तो 33 के.वी. पोल को हटाया गया और ना ही राशि वापस की गई। इस बाबत लगातार पत्राचार किया गया परंतु अनावेदकगण ने कोई जवाब नहीं दिया।
अनावेदकगण का जवाब
अनावेदकगण ने लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा कि परिवादी के प्लाट में लगे विद्युत पोलों को हटाने हेतु दिनांक 28 अप्रैल 2008 को वर्क आर्डर जारी किया गया था और विद्युत पोल हटा दिया गया है। परिवादी ने समयसीमा के बाद प्रकरण पेश किया है इसीलिए प्रकरण खारिज किया जाए।
फोरम का फैसला
प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों तथा दोनों पक्षों के तर्को के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह निष्कर्षित किया कि अनावेदकगण ने पोल हटाने संबंधी कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है, पोल शिफ्टिंग का जो कार्य हुआ है वह पूर्व में किए गए शिफ्टिंग के संबंध में है ना कि वर्तमान शिफ्टिंग के संबंध में है। दिनांक 28 अप्रैल 2008 को वर्क आर्डर जारी करने के पश्चात शिफ्टिंग का कोई कार्य किया गया था यह प्रमाणित नहीं होता है। अनावेदकगण ने 554076 रुपये जमा करवाने के बावजूद परिवादी के परिसर से 33 के.वी. विद्युत पोल नहीं हटाया, जो व्यवसायिक कदाचार एवं सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के पद्मनाभपुर दुर्ग कार्यालय के कार्यपालन यंत्री एवं सहायक अभियंता पर 6 लाख 5 हजार 76 रुपये हर्जाना अधिरोपित किया, जिसके तहत अनावेदकगण को परिवादी की जमा राशि 554076 रुपये, मानसिक परेशानी की क्षतिपूर्ति स्वरूप 50000 रुपये तथा वाद व्यय 1000 रुपये का भुगतान करना होगा, साथ ही जमा राशि पर 31 मार्च 2008 से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।
भिलाईनगर / शौर्यपथ / भिलाई निगम क्षेत्र में पीलिया एवं जलजनित बीमारियों से बचाव हेतु निगम कर्मी घर-घर जाकर क्लोरीन टैबलेट वितरण कर रहे, स्वास्थ्य विभाग का अमला निगम क्षेत्र के वार्डों के गली-मोहल्लों के नाली सफाई कार्य में जुटे हुए हैं, ताकि पीलिया जैसी जल जल जनित बीमारी न हो ! निगम प्रशासन 674030 नग क्लोरीन टैबलेट घर घर में वितरण कर चुकी है। निगम की टीम एवं मितानीनें घरों में जाकर सर्दी, खांसी व बुखार से पीडि़त मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दे रही है। भिलाई निगम के सभी जोन के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए वार्डों में घर घर जाकर पानी की शुद्धता के लिए क्लोरीन टैबलेट बांटने के साथ ही बताया जा रहा है कि उबला हुआ एवं साफ छना हुआ पानी ही पीने हेतु उपयोग करे ताकि किसी प्रकार से जलजनित बीमार न हो।
जोन स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि नलकूल, बोरिंग एवं अन्य जल स्रोत से नमूना लेकर लैब में परीक्षण कराया जा रहा है और प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है! नगर निगम का अमला पीलिया जैसे जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए घरों में क्लोरीन टैबलेट का वितरण कर रही है, जोन 01 के 19323 घरों में 186030 नग टैबलेट, जोन 02 के 18500 घरों में 186000 नग क्लोरीन टैबलेट, जोन 03 के 19000 घरों में 110000 नग क्लोरीन टैबलेट तथा जोन 04 के 19137 घरों में 192000 नग क्लोरीन टैबलेट वितरण किया जा चुका है!
अब तक सभी जोन कार्यालयों के स्वास्थ्य विभाग द्वारा 674030 नग क्लोरीन टैबलेट वितरण किया जा चुका है। जलजनित बीमारयों से बचाव के लिए निगम के स्वास्थ्य विभाग के साथ मितानीनें व आंगनबाड़ी सहायिकाएं भी सहयोग कर रहीं हैं! विभिन्न जल स्रोतों से नमूना लेकर परीक्षण किया जा रहा है!
दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश में 75 दिन बाद सरकार द्वारा अनुमति मिलने के बाद खुले मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारे व चर्च में अब भक्तों को भगवान के दर्शन हो सकेगें। लेकिन उन्हे सोशल डिस्टेसिंग व मास्क लगाना अनिवार्य रहेगा। निगम क्षेत्रांतर्गत आने वाले धार्मिक स्थलों में विधायक अरुण वोरा व महापौर धीरज बाकलीवाल एवं अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा सैनिटाईजेशन का कार्य गणेश मंदिर इंदिरा मार्केट, सांई मंदिर कसारीडीह, चण्डी मंदिर, शीतला मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च, रहमान शाह बाबा का दरगाह एवं दादाबाड़ी जैन मंदिर मालवीय नगर में सुबह से ही प्रारंभ किया गया। वोरा ने कहा कि धार्मिक स्थलों में लॉकडाउन के बाद पुन: रौनक लौट आई है। दर्शनार्थियों के लिए अच्छी व्यवस्था देख जनता में हर्ष व्याप्त है। कोरोना महामारी के बचाव के लिए सैनिटाईजर एवं फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य है लोग सुरक्षित रहेगें तो मंदिर परिसर भी सुरक्षित रहेगा। धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों की अपनी अस्था है इन स्थानों पर पहुंचने से मनोबल बढ़ता है। हम सभी धार्मिक भावनाओं से जुड़े है। धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर शहरवासियों के लिए सुख समृद्धि की कामना की। महापौर बाकलीवाल ने कहा कि काफी दिनों बाद मंदिरो के पट खोले गए है आमजनों में उत्साह है। नगर निगम के द्वारा लगातार धार्मिक स्थलों की मॉनिटरिंग एवं सेनेटाईजेशन का कार्य किया जाएगा।
धार्मिक स्थलों पर फिजीकल और सोशल डिस्टेसिंग के साथ पूजा- अर्चना प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत किया गया।
नई दिल्ली/ शौर्यपथ / पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सोमवार को 60 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई. इससे पहले रविवार को भी तेल के दामों में इतना ही इजाफा हुआ था. बताते चलें कि सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में किए जाने वाले रोजाना बदलाव को दोबारा शुरू कर दिया. सरकारी कंपनियों की ओर से जारी अधिसूचना के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 71.86 रुपये से बढ़कर 72.46 रुपये प्रति लीटर हो गई. इसी तरह डीजल की कीमत 69.99 रुपये से बढ़कर 70.59 रुपये प्रति लीटर हो गई. एक अधिकारी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में दैनिक बदलाव की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई है.
इससे पहले तेल कंपनियों ने रविवार को 83 दिनों के अंतराल के बाद कीमतों की समीक्षा करते हुए इसमें 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. इस तरह कीमतों में लगातार दूसरे दिन वृद्धि हुई है. एक तेल कंपनी के अधिकारी ने बताया कि दैनिक मूल्य संशोधन फिर से शुरू हो गया है. तेल कंपनियां हालांकि एटीएफ और एलपीजी की कीमतों की नियमित रूप से समीक्षा कर रही थीं, लेकिन 16 मार्च से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के लाभ को सोखने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद कीमतों की समीक्षा रोक दी गई थी. इसके बाद सरकार ने छह मई को एक बार फिर उत्पाद शुल्क को पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 13 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / भारत और चीन सीमा विवाद को सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत के जरिये सुलझाने पर सहमत हुए हैं. इस बीच, कांग्रेस के पूर्व अधयक्ष राहुल गांधी ने अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सब को मालूम है ‘सीमा' की हक़ीक़त लेकिन, दिल के ख़ुश रखने को, ‘शाह-यद' ये ख़्याल अच्छा है. दरअसल, गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारत की रक्षा नीति की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता बढ़ी है. पूरी दुनिया यह मानती है कि अमेरिका और इजराइल के बाद अगर कोई देश है जो अपनी सीमाओं की रक्षा करने में समर्थ है तो वो भारत है. राहुल गांधी ने गृह मंत्री के इसी बयान को लेकर ट्वीट किया है.
शाह ने रविवार को वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के जरिए बिहार में चुनावी शंखनाद करते हुए कहा कि एक समय था जब कोई भी हमारी सीमा के घुस जाता था, हमारे सैनिकों का सिर काट लेता था और दिल्ली में बैठे लोगों (दिल्ली दरबार) को कोई फर्क नहीं पड़ता था. हमारे समय में उरी और पुलवामा हमले हए, यह प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी सरकार थे, जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की.
भारत-चीन सीमा पर तनाव को दूर करने के लिए दोनों देश की सेनाओं के शीर्ष अधिकारियों के बीच 6 जून को बातचीत हुई. सीमा विवाद पर लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बातचीत के बाद विदेश मंत्रालय ने रविवार को आधिकारिक बयान जारी किया. बयान में कहा गया कि यह बैठक सौहर्दपूर्ण और सकारात्मक माहौल में हुई. विभिन्न द्विपक्षीय समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने पर सहमत हुए हैं. दोनों देशों के नेताओं के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में शांति आवश्यक है. दोनों पक्ष स्थिति को ठीक करने और सीमावर्ती इलाकों में शांति सुनिश्चित करने के लिए सैन्य एवं राजनयिक संपर्कों के माध्यम से बातचीत जारी रखेंगे.
बता दें कि करीब एक महीने से लद्दाख में दोनों सेनाओं में तनातनी है. पैंगोंग लेक के फिंगर 4 और फिंगर 8 को लेकर है ज़्यादा विवाद है. अप्रैल से पहले सेना फिंगर 8 तक पेट्रोलिंग करने जाती थी. अब चीनी सेना भारतीय सेना को फिंगर 4 से आगे बढ़ने नही दे रही है. चीनी सेना पहले फिंगर 4 तक पैट्रोलिंग करने आती थी. चीनी सेना की आपत्ति है भारत बॉर्डर पर सड़क क्यों बना रहा है जबकि भारत का कहना है सड़क वाली जगह बॉर्डर से दूर और उसका इलाका है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / लॉकडाउन की वजह से बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर शहरों से गांव की ओर पलायित हुए. अब सरकार इन मजदूरों के लिए बड़ी योजना की तैयारी में है. पीएमओ ने सभी मंत्रालयों से दो हफ़्तों के भीतर प्रस्ताव मांगे हैं. देश भर के ऐसे 116 जिलों की पहचान की हैं जहां सबसे अधिक श्रमिक वापस आए हैं. ये जिले 6 राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओड़िसा और राजस्थान में हैं. केंद्र सरकार की तरफ से चयनित 116 जिलों में सबसे ज्यादा 32 जिले बिहार के हैं. उसके बाद उत्तर प्रदेश के 31 जिले, मध्यप्रदेश के 24, राजस्थान के 22 जिले, झारखंड के 3 और ओड़िसा के 4 जिले हैं. इन जिलों के प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के कारण रोजी-रोटी और रोजगार गंवा चुके हैं.
सरकार की इस योजना के तहत कोरोना लॉकडाउन के दौरान अपने राज्यों और गांवों को लौटे मजदूरों के पुनर्वास और रोजगार के लिए इन 116 जिलों में केंद्र सरकार की सामाजिक कल्याण और डायरेक्ट बेनिफिट स्कीमों को तेजी से मिशन मोड में चलाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि घर लौटे श्रमिकों के लिए आजीविका, रोजगार और गरीब कल्याण सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सके. इन जिलों में मनरेगा,जनधन योजना, किसान कल्याण योजना, खाद्य सुरक्षा योजना, पीएम आवास योजना, कौशल विकास समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत मिशन मोड में काम होगा. इसके साथ ही हाल ही में घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भी इन जिलों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही बाकी केंद्रीय योजनाओं को भी टारगेटेड तरीके से लागू किया जाएगा.
सभी जिलों में वापस आए श्रमिकों का डाटा सरकार ने तैयार कर लिया है. हर जिले में कितने श्रमिक वापस आए हैं सरकार ने इसकी जानकारी भी जुटा ली है. यूपी के सिद्धार्थनगर और बिहार के पूर्वी चंपारण में सबसे अधिक डेढ़ लाख से भी ज्यादा श्रमिक वापस आए हैं. बिहार के आठ जिलों में एक लाख से भी अधिक श्रमिक वापस आए हैं. वहीं बात करें अन्य प्रदेशों की तो आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के दो, मध्य प्रदेश और ओड़िसा के एक-एक, राजस्थान के तीन जिलों में एक लाख से अधिक श्रमिक वापस आए हैं.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
