August 04, 2026
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    लॉकडाउन में जिंदगी से हार गया था उम्मीद, स्पर्श क्लीनिक ने फिर लौटाया आत्मविश्वास

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    रायपुर / शौर्यपथ / एक तरफ पूरी दुनिया में विभिन्न तरह की बीमारियों से लाखों लोगों की जानें जाती है तो दूसरी तरफ लाखों लोग ऐसे भी हैं जो खुद ही अपनी जान के दुश्मन बन आत्महत्या तक कर लेते हैं। आत्महत्या, बहुत ही डरावना शब्द है। एक ऐसा शब्द जो आंखों के सामने मौत का भयावह मंजर खड़ा कर देता है। ऐसा करने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक हर 40 सेकेंड में एक जिंदगी खत्म हो रही है। स्पर्श क्लीनिक रायपुर के मनोरोग चिकित्सक डॉ. अविनाश शुक्ला कहते हैं, मेंटल इलनेस का इलाज पूरी तरह संभव है। इससे आत्महत्याओं को रोका जा सकता है। बहुत से लोग काउंसलिंग और इलाज कराने के बाद सफल हैं यानी अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। अलग-अलग तरह के कारणों से लोगों के मन में आत्महत्या का ख्याल आता है। लोग आत्महत्या से बचें इसलिए परिजनों को ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। प्राइवेसी बनाए रखने के लिए उनके नाम बदल दिए गए हैं।

    डॉ. शुक्ला ने बताया राजधानी के पुरानी बस्ती निवासी राजेश कुमार (परिवर्तित नाम) 4 माह पहले स्पर्श क्लिनिक रायपुर में परामर्श के लिए आये थे। परामर्श का कारण कुछ दिन पूर्व आत्महत्या का प्रयास था। काउंसिलिंग से पता चला राजेश पिछले कुछ सालों से शराब का सेवन आदी बन गया था। और एक साल से यह मात्रा काफी बढ़ गयी थी। उनकी कमाई का लगभग आधे से ज्यादा पैसा शराब पर खर्चा हो जाता था।

    ``डॉक्टर ने मेरी काउंसलिंग की। उसके बाद से मैंने खुद को खत्म करने का ख्याल मन से निकाल दिया है,’’ राजेश कहते हैं। राजेश ने बताया कोरोना महामारी के दौरान लॉडकाडन के दिनों में उनका ऑटो मेकेनिक का व्यवसाय बंद हो गया और शराब भी मिलना बंद हो गया। शादी के बाद दो बच्चें परिवार चलाने की चिंता की वजह से वह परेशान रहने लगा। शुरुवात में उन्हें नींद नहीं आना, भूख न लगना और शारीर में छटपटाहट, बेचैनी जैसी समस्या रही और कुछ दिन बाद घर वालों ने देखा कि वह उदास रहने लगा। परिवार के सदस्यों से पत्नी व बच्चों से भी बात कम करने लगा और किसी भी कार्य में रूचि नहीं थी। पड़ोस के लोगों से सलाह ले कर परिवार वालों ने झाड़ फूक करवाने ले गए पर कोई भी फायदा नहीं मिला। समस्या धीरे-धीरे बढ़ते रही और परेशान हो कर राजेश ने आत्महत्या का प्रयास किया।

    ``मुझे इस हाल देखकर मम्मी-पापा दुखी हुए। मम्मी-पापा और दोस्त ही मुझे स्पर्श क्लिनिक मनोचिकित्सक के पास ले गए। डॉक्टर ने कई सेशन में मेरी काउंसलिंग की और दवाई खाने को भी कहा। इस सबसे मेरा कॉन्फिडेंस वापस आने लगा। राजेश को शराब की आदत के साथ-साथ डिप्रेशन भी था,’’ ।

    पिछले 4 माह से राजेश नियमित रूप से स्पर्श क्लिनिक इलाज के लिए आ रहे है। राजेश बताते है कि आत्महत्या का प्रयास उनके जीवन का सब से गलत निर्णय था। उन्होंने अपनी समस्या का समाधान खोजने के बजाय उनको अनदेखा किया । शराब पर खर्चा इतना ज्यादा हो जाता था कि बचत कुछ नहीं था। लॉडाउन के समय आर्थिक परेशानी बढ़ गयी और मूलभूत ज़रूरतों को पूरा करना भी मुश्किल पड़ रहा था।

    इससे परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया लेकिन अब समझ आ गया कि हार व नाराशा नहीं उम्मीदों की रोशनी से सही रास्ता मिलने से मंजील मिलती है। तनाव में आकर उन्होंने गलत रास्ता चुन लिया था । पिछले 4 माह से वह शराब से दूर है और उपचार के बाद उदासी भी गायब हो गई। पहले से अब काम भी बेहतर कर पाते है और अब बचत पर भी ध्यान देने लगा। शराब का सेवन बंद करने के बाद पारिवारिक झगडे़ भी नहीं होते और बच्चों से भी रिश्ता बेहतर हुआ है ।

    राजेश सभी लोगों को संदेश देना चाहते है ताकि ऐसे लोगों को आत्महत्या जैसा कदम उठाने से बचाया जा सके। किसी को भी जीवन में होने वाले समस्याओं से भागना नहीं चाहिए बल्कि उनको शांत मन से समाधान खोजने कि ज़रूरत है। यह सभी के लिए ज़रूरी है कि शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव से अवगत रहे और इनका उपयोग ना करें। ऐसे ही मानसिक रोगों से भी डरने कि ज़रूरत नहीं। अगर उन्हें स्पर्श क्लिनिक के मुफ्त परामर्श और उपचार के बारे में पता होता तो शायद समस्या इतनी ना बढती। राजेश कहते है कि बिना किसी डर और संकोच के लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के लिए सरकार द्वारा संचालित स्पर्श क्लिनिक में संपर्क करना चाहिए ।

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