August 03, 2026
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    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैम्पा शासी निकाय की प्रथम बैठक सम्पन्न

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    लॉकडाउन में एक अप्रैल से अब तक कैम्पा में किया गया 42.44 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन
    आवर्ती चराई योजना में स्वीकृत किए जाए मनरेगा से कार्य: मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल
    हाथी को मानव का मित्र बनाने की हो पहल
    वनों में सितम्बर और अक्टूबर माह में प्राथमिकता से किया जाए हरे चारे की कटाई का कार्य: लोगों को मिलेगा रोजगार

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय में कैम्पा शासी निकाय की प्रथम बैठक आयोजित की गई। श्री बघेल ने बैठक में कैम्पा मद से कराये गए कार्यो की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2019-20 में कैम्पा के वार्षिक कार्ययोजना के तहत 429 करोड़ 21 लाख रूपए की राशि खर्च कर विभिन्न रोजगार मूलक कार्यो के जरिए 89.73 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित किया गया। वर्ष 2020-21 में कोरोना संकट काल के दौरान एक अप्रैल से अब तक 219 करोड़ 63 लाख रूपए की राशि व्यय कर 42.44 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजन किया गया। मुख्यमंत्री ने वनांचल में लोगों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए आवर्ती चराई योजना और वन अधिकार अधिनियम के तहत मनरेगा में अधिक से अधिक कार्य स्वीकृत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 4400 गौठानों का निर्माण पूरा हो गया है, जहां बड़ी संख्या में मवेशी डे-केयर में रखे जा रहे हैं। यहां बड़ी मात्रा में चारे की आवश्यकता होगी। इसे ध्यान में रखते हुए अभी सितम्बर और अक्टूबर माह में वन प्रबंधन समितियों द्वारा हरे चारे की कटाई का कार्य कराये जाए, जिससे लोगों को रोजगार भी मिले और गौठानों में चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इस अवसर पर वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर भी उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे काफी मात्रा में हरा और पौष्टिक चारा इक्कठा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सभी वन मंडलों में कुछ केन्द्रों में हरा चारा के गठ्ठर बना कर भंडारित किया जाए और इन केन्द्रों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करायी जाए, जिससे गौठान समितियां और निजी क्षेत्र के पशुपालक अपनी आवश्यकता अनुसार चारा निर्धारित दर पर क्रय कर सकें। मुख्यमंत्री बघेल ने हरे चारे के विक्रय की दर भी निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कई गौठानों में बड़ी मात्रा में गोबर एकत्र हो गया है। इससे वर्मी कम्पोस्ट के साथ-साथ गोबर के कण्डे और गौकाष्ठ जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक के दौरान नरवा योजना के अंतर्गत भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यो की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2019-20 की कार्ययोजना में नरवा विकास योजना के अंतर्गत 12 लाख 55 हजार 128 स्वीकृत संरचनाओं में से अब तक 8 लाख 49 हजार से अधिक संरचनाओं का विकास हो चुका है, इनमें चेक डैम, स्टॉप डैम, चेकडैम, एनिकट, डाइक वाल आदि शामिल है।
    मुख्यमंत्री बघेल ने कैम्पा मद के अंतर्गत वनांचलों में बड़े-बड़े तालाबों के निर्माण कार्य को भी प्राथमिकता से शामिल करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने वन्य प्राणियों के रहवास सुधार के अंतर्गत चारागाह विकास, फलदार वृक्षारोपण तथा वन क्षेत्रों में जल संरचनाओं के विकास पर विशेष जोर दिया। इस दौरान राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय पक्षी बस्तर मैना, बारहसिंगा, लकड़बग्गा, सोनकुत्ता, गिद्ध आदि के संरक्षण तथा संवर्धन के संबंध में चर्चा की गई। राज्य में शेरों की संख्या में वृद्धि और पक्षियों के भी रहवास सुधार के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने के संबंध में चर्चा हुई।
    मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि हाथी-मानव द्वन्द की स्थिति को रोकने के लिए हाथी को मानव का मित्र बनाने की पहल की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में हाथी के रहवास क्षेत्रों में पर्याप्त भोजन तथा पानी आदि की व्यवस्था का प्रबंध हो, जिससे हाथी-मानव द्वन्द में आसानी से नियंत्रण पाया जा सके। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने हाथी-मानव द्वन्द में नियंत्रण पाने के लिए जन-जागरूकता लाने सहित बेहतर कार्य योजना बनाने के संबंध में वन विभाग को विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार केरल में लगभग 6000 हाथी हैं, वहां यदा-कदा ही हाथी-मानव द्वन्द की स्थिति निर्मित होती है। हाथियों को मानव का मित्र बनाने की दिशा में आवश्यक पहल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हाथी एक बहुत ही शांत, समझदार तथा सामाजिक प्राणी होता है, इसके स्वभाव को समझकर तथा जन-जागरूकता से हाथी-मानव द्वन्द को कम किया जा सकता है।
    बैठक में अरपा नदी पुनरूद्धार योजना पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अरपा नदी के उद्गम पेण्ड्रा से शिवनाथ नदी में मिलने तक के मार्ग में नरवा ट्रीटमेंट का कार्य कार्ययोजना के अनुसार सुनिश्चित किया जाए, जिससे अरपा में प्राकृतिक रूप से सालभर जल का प्रवाह बना रहे। श्री बघेल ने यह भी कहा कि वन विभाग, राजस्व विभाग परस्पर समन्वय से भू-जल संवर्धन और संरक्षण का कार्य प्राथमिकता से करें। इस अवसर पर मुख्य सचिव आर.पी.मंडल, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, कैम्पा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व्ही. श्रीनिवास राव उपस्थित थे। अपर मुख्य सचिव अमिताभ जैन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती एम.गीता वीडियो कॉन्फ्रंेसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

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