August 03, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पारदर्शी, जवाबदेह एवं किसान-हितैषी धान खरीदी व्यवस्था के लिए सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार…

     

    बंग समाज के 135 ग्रामों की प्राथमिक शालाओं में नये शिक्षा सत्र से बांग्ला भाषा में शिक्षा प्रांरभ करने सहित कई घोषणाएं

    रायपुर, 16 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि बस्तर अंचल का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और इसके बाद बस्तर अंचल में तेजी से विकास दृष्टिगोचर होगा। मुख्यमंत्री श्री साय आज कांकेर जिले पखांजूर में आयोजित कार्यक्रम में 284 करोड़ रूपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने नेताजी सुभाष स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में परलकोट क्षेत्रवासियों के विकास के लिए विभिन्न घोषणाएं भी की गई, जिनमें नए शिक्षा सत्र से बंग समाज के 135 ग्रामों की प्राथमिक शालाओं में नये शिक्षा सत्र से बांग्ला भाषा में शिक्षा प्रांरभ करने की घोषणा की। उन्होंने संबलपुर से दुर्गूकोंदल होते हुए पखांजूर तक सड़क निर्माण, पखांजूर के मंडी गेट से अंजाड़ी नाला तक गौरवपथ, मछली मार्केट पखांजूर से नर-नारायण सेवा आश्रम तक सीसी सड़क, शासकीय कन्या शाला मैदान में बाउण्ड्रीवॉल निर्माण, पखांजूर में फायर ब्रिगेड वाहन सेवा शुरू करने तथा सिविल अस्पताल पखांजूर में धनवंतरि जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स स्थापित करने की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री ने जनसमुदाय को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार प्रशासनिक कार्याेें में स्वच्छता एवं पारदर्शिता के साथ कार्य करने की इच्छा शक्ति के साथ लगातार विकास की ओर आगे बढ़ रही है। श्री साय ने बताया कि प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों का अनुसरण करते हुए प्रदेश सरकार तेजी से कार्य कर रही है। दो साल की अल्पावधि में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख आवास की स्वीकृति दी है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 08 लाख हितग्राहियों ने गृह प्रवेश भी कर लिया है। इसी तरह महतारी वंदन योजना में 70 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में नियद नेल्लानार, धरती आबा अभियान, पीएम जनमन जैसी अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही है, जिससे विकास कार्याे कों गति मिली है। मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना को पुनः प्रारंभ किया गया। मेहनतकश किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी की जा रही है। कार्यक्रम को कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग अंतागढ़ विधायक श्री विक्रमदेव उसेण्डी ने भी सम्बोधित किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने नर नारायण सेवा आश्रम पहंुचे और वहां पूजा अर्चना कर तथा प्रदेशवासियांे की समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण की सेवा है ध्येय से स्थापित किए गए इस आश्रम में आस्था और परंपरा को आगे बढ़ाने का पुण्य कार्य किया जा रहा है। उन्होंने वहां आश्रम के संस्थापक स्वामी सत्यानंद परमहंस के तैलचित्र एवं प्रतिमा का विधिविधानपूर्वक पूजन किया। इसके पश्चात वे पखांजूर के मुख्य मार्ग पर स्थित परकोट विद्रोह के क्रांतिकारी शहीद गैंद सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनकी शहादत को नमन किया।

    इस अवसर पर विधायक श्री आशाराम नेताम, राज्य हस्तशिल्प बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी, पूर्व सांसद श्री मोहन मण्डावी, पूर्व विधायक श्री मंतूराम पवार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

    60 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगा

    20 परिवारों को बिजली बिल में मिलने लगी बड़ी राहत

    रायपुर / छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने देशभर में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत एक नई मिसाल कायम की है। इस योजना के तहत रायपुर की पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी में वर्चुअल नेट मीटरिंग (व्हीएनएम) का सफल संचालन होने से सोसायटी के फ्लैट में रहने वाले 20 परिवारों को बिजली बिल में बड़ी राहत मिलने लगी है। वर्चुअल नेट मीटरिंग सिस्टम स्थापित करने वाला रायपुर देश का पहला शहर बन गया है।

    वर्चुअल नेट मीटरिंग की इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को हो रहा है, जो अपार्टमेंट या बहुमंजिला इमारतों में रहते हैं और जिनके पास छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती। वर्चुअल नेट मीटरिंग के जरिए एक ही सोलर प्लांट से कई फ्लैट या परिवार बिजली का लाभ ले सकते हैं, जिससे उनका बिजली बिल काफी कम हो जाता है। पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी में वर्चुअल नेट मीटरिंग की सफलता को देखते हुए छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी अब इस मॉडल को प्रदेश के अन्य शहरों और क्षेत्रों में भी स्थापित करने की पहल शुरू कर दी है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का कहना है कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता और अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ और हरित भारत के विजन से जुड़कर अब अधिक से अधिक लोग सौर ऊर्जा का लाभ उठा सकेंगे।
    पार्थिवी पैसिफिक रिहायशी सोसायटी में एक ही सोलर प्लांट से 20 फ्लैटों में रहने वाले परिवार बिजली का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बिजली खर्च में भी बड़ी बचत हो रही है। यह सोलर प्रोजेक्ट कैपेक्स मॉडल पर लगाया गया है। यानी 20 परिवारों ने अपनी-अपनी राशि लगाकर सोलर प्लांट स्थापित किया और यह प्लांट पूरी तरह उन्हीं की संपत्ति है। पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 24 लाख रुपये आई। प्रत्येक परिवार ने लगभग 1.20 लाख रुपये का निवेश किया है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस योजना को और आकर्षक बनाते हुए अपनी ओर से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दे रही है। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ और कम होगा।

    पार्थिवी पैसिफिक सोसायटी सोलर सिस्टम लगने के बाद इसका सीधा लाभ बिजली बिल में दिखने लगा। इस सिस्टम से सभी फ्लैट के बिजली बिल में सालाना 6 लाख 30 हजार रूपए की बचत होने की उम्मीद है। इसका मतलब यह है कि प्रत्येक परिवार को अपने बिजली बिल पर लगभग 31500 रूपए की बचत होगी। प्रत्येक परिवार को लगभग 300 यूनिट तक बिजली का क्रेडिट मिलने लगा है, जिससे मासिक बिजली खर्च में अच्छी-खासी कमी आई है।

    छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग सचिव डॉ. रोहित यादव का कहना है कि वर्चुअल नेट मीटरिंग शहरी उपभोक्ताओं के लिए गेम-चेंजर है। इससे साझा रूप से सोलर ऊर्जा का लाभ मिलता है, बिजली बिल घटता है और राज्य में स्वच्छ ऊर्जा को तेजी से अपनाने में मदद मिलती है।

    वर्चुअल नेट मीटरिंग सिस्टम क्या है

    वर्चुअल नेट मीटरिंग के तहत मान लीजिए किसी अपार्टमेंट में 200 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया गया है। हर फ्लैट के मीटर के साथ एक कंबाइंड मीटर जिसे एक्सपोर्ट मीटर भी कहते हैं, उसके जरिए बिजली ग्रिड में जाती है। बाद में, जितनी हिस्सेदारी जिस फ्लैट की होती है, उसी हिसाब से बिजली का लाभ सभी को उनके बिल में मिल जाता है।

    44 हैंडपंप तकनीशियनों को मिला नियुक्ति पत्र

    छत्तीसगढ़ में पेयजल समस्याओं के निदान के लिए नया नंबर 1916 किया जारी

    रायपुर / उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव ने आज व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से चयनित 44 नए हैंडपंप तकनीशियनों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। श्री साव ने नवनियुक्त तकनीशियनों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्री साव ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में पेयजल समस्याओं के निदान के लिए नया नंबर 1916 जारी किया।

    उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने नवनियुक्त तकनीशियनों को नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज से आपके नए जीवन की शुरुआत हो रही है, आप अपने सपनों को सच होते देख रहे हैं। घरवाले बेसब्री से आपकी राह देख रहे होंगे, आज आप शासकीय नौकरी की नियुक्ति पत्र लेकर घर लौटेंगे। यह आप सभी के लिए भावुक पल है। उन्होंने कहा कि यह आपकी मंज़िल नहीं है। आपको जीवन का पड़ाव मिला है। आपको बहुत दूर तक जाना है। जीवन के अनेक सोपान तय करना है। यहां से आपके लिए नई जिम्मेदारी, नई चुनौती, नया फील्ड एवं नया परिवेश मिलने वाला है।ऐसे में आपको ख़ुदको मानसिक रूप से तैयार करना है। श्री साव ने कहा कि शासकीय नौकरी, सपनों को साकार करने की दिशा में पहला कदम है।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक ने समारोह में कहा कि 29 हजार से ज्यादा नल जल योजनाएं स्वीकृत हैं, जिनमें से 7000 से अधिक पूर्ण हो चुकी हैं। आप सभी विभाग के ग्राउंड रूट के हिस्से होंगे, इसलिए नए तकनीशियन फील्ड में प्रदेशवासियों की सेवा में पूरे समर्पण से कार्य करें। कार्यक्रम को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री ओंकेश चंद्रवंशी ने भी सम्बोधित किया।

      रायपुर / राजा मोरध्वज की त्याग, धर्म और सत्यनिष्ठा की गौरवगाथा को समर्पित मोरध्वज आरंग महोत्सव–2026 का समापन समारोह ऐतिहासिक गरिमा और भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राजा मोरध्वज का जीवन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों का अमर प्रतीक है, जो आज भी समाज को सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आरंग की यह पुण्यभूमि त्रेता युग में प्रभु श्रीराम के चरण-स्पर्श से तथा द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से अनुप्राणित रही है। उन्होंने बागेश्वर बाबा में विधिवत जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और सतत विकास की कामना की।

    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को गति देने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। उन्होंने समोदा उप तहसील को पूर्ण तहसील का दर्जा देने और वहाँ पूर्णकालिक तहसीलदार की पदस्थापना की घोषणा की। इसके साथ ही मोरध्वज महोत्सव के लिए दिए जाने वाले शासकीय अनुदान को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में प्रस्तावित खेल परिसर सहित अन्य अधोसंरचना विकास कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने का आश्वासन भी दिया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार “मोदी की गारंटी” के अनुरूप जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को सरकार की विकास नीति का प्रमुख आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि संवेदनशील शासन, त्वरित निर्णय और जनता से सीधा संवाद ही सरकार की पहचान है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सैंड आर्टिस्ट श्री हेमचंद साहू को रेत से भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्रीराम एवं भगवान बागेश्वरनाथ की दिव्य आकृतियाँ उकेरने के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कलाकार की सृजनशीलता और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी उत्कृष्ट कला न केवल हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करती है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्रदान करती है। उन्होंने कलाकार को भविष्य में भी इसी प्रकार अपनी कला के माध्यम से प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए शुभकामनाएँ दीं।

    समापन अवसर पर जनप्रतिनिधियों, साधु-संतों, मातृशक्ति, युवाओं एवं बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों की सहभागिता ने समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। मुख्यमंत्री ने आयोजन समिति को सफल और भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए प्रदेशवासियों को मोरध्वज महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

    समारोह में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल, श्री गुरु बालकदास साहेब, सांसद श्री विजय बघेल, श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक श्री इंद्रकुमार साहू, श्री मोतीलाल साहू, श्री रोहित साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

    बिलासपुर / दुर्ग / शौर्यपथ /छत्तीसगढ़ के एक नगर निगम से जुड़ा बेहद चौंकाने वाला और नजीर बन सकने वाला मामला अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के दरवाजे तक पहुँच गया…

    दुर्ग | शौर्यपथ

    दुर्ग नगर पालिक निगम क्षेत्र इन दिनों किसी विकासशील शहर जैसा नहीं, बल्कि “उपेक्षित नगर” की प्रयोगशाला जैसा प्रतीत हो रहा है। बदबूदार पानी, अवैध अतिक्रमण, शासकीय भूमि पर कब्जा, आवारा जानवरों का आतंक, अंधेरे रास्ते और ठप पड़े विकास कार्य—ये सब आज दुर्ग की पहचान बनते जा रहे हैं। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, इन समस्याओं के बीच महापौर मैडम अलका बाघमार पूरी तरह “पार्टी मोड” में नजर आ रही हैं।

    भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में दुर्ग नगर निगम का इतिहास अगर पलटकर देखा जाए, तो वर्तमान कार्यकाल को “आयोजन प्रधान, विकास विहीन” कहना शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी। कांग्रेस पार्षद तो छोड़िए, अब भाजपा पार्षद भी अपने-अपने वार्डों में जनता को जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। वार्डवासी बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं, लेकिन नगर सरकार के मुखिया को शहर की बदहाली नहीं, बल्कि आयोजन की सजावट ज्यादा आकर्षित कर रही है।

    चुनाव के समय विकास के जो सुनहरे सपने दिखाए गए थे, वे अब प्रेस विज्ञप्तियों तक सिमट कर रह गए हैं। एमआईसी बैठकों में कागजों पर सैकड़ों करोड़ की योजनाएं जरूर पास हो गईं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि प्रदेश सरकार से फंड लाने के मामले में दुर्ग नगर निगम प्रदेश में सबसे पीछे खड़ा नजर आता है।

    वहीं दूसरी ओर, भोज और पार्टी आयोजन अब महापौर की दिनचर्या का हिस्सा बनते जा रहे हैं। हाल ही में 15 जनवरी को हुए एक आयोजन ने न सिर्फ भाजपा कार्यकर्ताओं बल्कि शहर के पत्रकारों को भी असमंजस में डाल दिया—आयोजन का उद्देश्य क्या था, यह किसी को समझ नहीं आया। हां, इतना जरूर स्पष्ट था कि जब भोजन अच्छा हो और मुफ्त हो, तो भीड़ अपने आप जुट जाती है। अनुमान है कि इस एक आयोजन में लाखों रुपये भोजन पर खर्च हुए होंगे, लेकिन उसी शहर में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।

    शहर की बदहाल व्यवस्था को आयोजनों के शोर में दबाने की यह कोशिश अगर छवि सुधार का माध्यम है, तो महापौर को यह भी समझना होगा कि जनता अब सवाल पूछने लगी है—हमने आखिर किन वादों पर भरोसा किया था? आज हालात यह हैं कि पार्षद अपने ही वार्ड के विकास कार्यों के लिए दर-दर भटक रहे हैं और नगर सरकार उत्सव मनाने में व्यस्त है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही, तो इसका सीधा असर आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी को भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि शहर की जनता अब भोज से नहीं, बुनियादी सुविधाओं से संतुष्ट होना चाहती है।

    फिलहाल दुर्ग की तस्वीर साफ है—

    शहर बदहाली में है, और महापौर मैडम पार्टी में मस्त।

    मुंगेली । कस्टम मिलिंग में अनियमितताओं के खिलाफ छत्तीसगढ़ शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मुंगेली जिले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। जिले में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप में…
    नई दिल्ली/ज्योतिष डेस्क। आज 16 जनवरी 2026 को ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कई राशियों के लिए नए अवसर, धन लाभ और करियर में प्रगति के संकेत…

      रायपुर / शौर्यपथ 

                राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान की प्रतीक के रूप में, भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईएमएस), रायपुर के दो प्रतिष्ठित संकाय सदस्यों को प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के संस्थान मंडलों में सदस्य के रूप में नामित किया है। डॉ. एलि मोहनपात्र, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, जैव रसायन (बायोकेमिस्ट्री) और डीन (अकादमिक्स), एआईएमएस रायपुर को एआईएमएस गुवाहाटी के संस्थान मंडल का सदस्य नियुक्त किया गया है, जबकि डॉ. निघत हुसैन, प्रोफेसर, विभाग पाथोलॉजी और एसोसिएट डीन (अकादमिक्स), एआईएमएस रायपुर को एआईएमएस पटना के संस्थान मंडल का सदस्य बनाया गया है। ये नियुक्तियां 30 दिसंबर 2025 को जारी अलग-अलग राजपत्र नोटिफिकेशन्स के माध्यम से औपचारिक रूप से की गईं।
    संस्थान मंडल संस्थान का सर्वोच्च वैधानिक निकाय है, जो समग्र संचालन, रणनीतिक दिशा और नीतिगत ढांचे के निर्धारण के लिए उत्तरदायी है। यह चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, रोगी देखभाल और संस्थागत विकास जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी करता है और अकादमिक मानक, वित्तीय प्रबंधन और संकाय चयन जैसी विशेष जिम्मेदारियों के लिए गवर्निंग बॉडी और फाइनेंस कमेटी जैसे उपसमितियों के साथ समन्वय करता है।
    डॉ. मोहनपात्र और डॉ. हुसैन की इस प्रतिष्ठित संस्थान मंडल में नियुक्ति उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक नेतृत्व, प्रशासनिक क्षमता और चिकित्सा शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान का प्रमाण है। यह एआईएमएस रायपुर के संकाय की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती प्रतिष्ठा और भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।
    एआईएमएस रायपुर ने विश्वास व्यक्त किया है कि दोनों सदस्यों का अनुभव और दृष्टिकोण एआईएमएस गुवाहाटी और एआईएमएस पटना के अकादमिक, प्रशासनिक और रणनीतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। पूरी एआईएमएस रायपुर टीम डॉ. एलि मोहनपात्र और डॉ. निघत हुसैन को इस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी के लिए बधाई देती है और उनके नए कार्यभार में सफलता की शुभकामनाएं देती है।

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