August 03, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

      कोलकाता / एजेंसी / पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) ने राज्य में अपने सभी ऑपरेशन 20 दिनों के लिए रोक दिए हैं। इस फैसले की पुष्टि कंपनी के एक इंटरनल मेल से हुई है, जिसमें “कुछ कानूनी मुद्दों” का हवाला दिया गया है।

    इंटरनल मेल में क्या कहा गया?
    I-PAC की HR टीम द्वारा रविवार रात भेजे गए ईमेल में कहा गया है कि मैनेजमेंट ने पश्चिम बंगाल में सभी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कानूनी प्रक्रिया में सहयोग कर रही है और उम्मीद जताई है कि “न्याय अपना रास्ता खुद बनाएगा।”

    कर्मचारियों को 20 दिन की छुट्टी का निर्देश
    सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों और टीम के सदस्यों को 20 दिनों की छुट्टी लेने के लिए कहा गया है। कंपनी ने संकेत दिया है कि 11 मई के आसपास स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यह इंटरनल मेल सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, जिसकी प्रामाणिकता को कंपनी के अंदरूनी सूत्रों ने सही बताया है।

    TMC के चुनाव अभियान पर पड़ सकता है असर
    गौरतलब है कि I-PAC, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनावी अभियान का प्रमुख रणनीतिक साझेदार रहा है। ऐसे में मतदान (23 और 29 अप्रैल) से ठीक पहले ऑपरेशन रोकना TMC के प्रचार अभियान पर असर डाल सकता है और इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    ममता बनर्जी का बयान भी चर्चा में
    इस घटनाक्रम से एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने चुनावी सभा में I-PAC का समर्थन करते हुए कहा था कि अगर कंपनी के कर्मचारियों पर किसी तरह का दबाव बनाया गया या उनकी नौकरी पर असर पड़ा, तो उनकी सरकार उन्हें रोजगार देने के लिए तैयार है। उन्होंने इसे “साजिश” करार देते हुए विरोधियों पर निशाना साधा था।

    चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी हलचल
    I-PAC के इस फैसले ने बंगाल की चुनावी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर विपक्ष इसे TMC की चुनावी मशीनरी पर असर के रूप में देख सकता है, वहीं TMC इसे कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा अस्थायी कदम बताकर नुकसान को सीमित करने की कोशिश कर सकती है। आने वाले दिनों में इसका वास्तविक प्रभाव चुनावी नतीजों पर कितना पड़ता है, यह देखना अहम होगा।

       पटना / एजेंसी / बिहार की राजधानी पटना सोमवार को भगवा रंग और “नारी शक्ति” के नारों से गूंज उठी, जब बीजेपी और एनडीए के घटक दलों ने कारगिल चौक पर ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ का आयोजन किया। इस बड़े राजनीतिक प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं और महिला नेत्रियों ने भाग लेकर महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा।

    भीड़ और दावों की राजनीति
    बीजेपी ने दावा किया कि इस सम्मेलन में पूरे बिहार से करीब 50 हजार महिलाएं शामिल हुईं, जिन्होंने पटना की सड़कों पर मार्च कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समर्थकों ने महिला आरक्षण के समर्थन में विशेष टी-शर्ट पहन रखी थी। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है—जो अक्सर ऐसे राजनीतिक आयोजनों में देखा जाता है।

    सीएम सम्राट चौधरी का हमला
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में विपक्षी नेताओं—राहुल गांधी, लालू यादव और एम.के. स्टालिन—पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे “परिवारवाद की राजनीति” करते हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य “हर सामान्य महिला को सदन तक पहुंचाना” है।
    उन्होंने कहा कि यदि 33% आरक्षण पहले लागू हो गया होता, तो बिहार विधानसभा में 122 महिलाएं नेतृत्व कर रही होतीं।

    सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “बहनों के साथ अन्याय करने वालों को पाताल से भी खोजकर सजा दी जाएगी,” और राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बताने की कोशिश की।

    विपक्ष पर आरोप, महिलाओं को संदेश
    बीजेपी विधायक श्रेयसी सिंह ने विपक्ष को महिला आरक्षण में बाधा डालने का जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि विपक्ष नहीं चाहता कि साधारण पृष्ठभूमि की महिलाएं संसद और विधानसभा तक पहुंचें।
    प्रदेश उपाध्यक्ष अमृता भूषण ने भी महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

    NDA की एकजुटता का प्रदर्शन
    इस कार्यक्रम में जेडीयू, हम (HUM) और एलजेपी (रामविलास) की महिला नेताओं की मौजूदगी ने बिहार में एनडीए की एकजुटता का संकेत दिया। सभी दलों ने एक सुर में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का समर्थन करते हुए विपक्ष के रुख को “महिला विरोधी” बताया।

    चुनावी संदर्भ और आगे की रणनीति
    राजनीतिक तौर पर यह सम्मेलन आगामी चुनावों से पहले माहौल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ‘जीविका’ समूहों और स्थानीय निकायों में 50% आरक्षण के बाद अब केंद्र के 33% महिला आरक्षण को NDA बड़े मुद्दे के तौर पर आगे बढ़ा रहा है।
    कुल मिलाकर, यह आयोजन सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीतिक कवायद भी माना जा रहा है।

      नई दिल्ली / एजेंसी / ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव कम नहीं हुआ है। इस बीच भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। सोमवार को आयोजित अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में सरकार ने स्थिति पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए तनाव के 52 दिनों में अब तक 10 भारतीय जहाज होर्मुज पार कर चुके हैं, जबकि 14 जहाज अभी भी वहां फंसे हुए हैं।

    ‘देश गरिमा’ सुरक्षित, 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने की उम्मीद
    भारतीय ध्वज वाला क्रूड ऑयल टैंकर ‘देश गरिमा’ 18 अप्रैल को होर्मुज पार कर चुका है। इस जहाज में 97,422 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा है और इसमें 31 भारतीय नाविक सवार हैं। इसके 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    भारतीय जहाजों पर फायरिंग: चेतावनी के तौर पर चली गोलियां
    18 अप्रैल को दो भारतीय कार्गो जहाजों पर हुई फायरिंग को लेकर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह फायरिंग ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा चेतावनी के रूप में की गई थी, ताकि जहाज रुक जाएं। इस घटना को भारत सरकार ने गंभीरता से लिया है।

    कम्युनिकेशन गैप बना वजह, बड़ा नुकसान टला
    सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना ईरान सरकार और IRGC की स्थानीय यूनिट के बीच संचार की कमी के कारण हुई। फायरिंग में जहाजों को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा, हालांकि कुछ शीशे टूटने की जानकारी सामने आई है।

    राजनयिक स्तर पर सक्रिय भारत
    भारत इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशीलता से संभाल रहा है। एक ओर जहां 14 भारतीय जहाज अब भी होर्मुज के पास खड़े हैं, वहीं ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की मौजूदगी को देखते हुए सरकार राजनयिक स्तर पर लगातार संपर्क में है।

    सुरक्षा और सप्लाई चेन दोनों पर नजर
    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षा, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी चुनौती बना हुआ है। भारत सरकार ने संकेत दिए हैं कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर त्वरित कदम उठाए जाएंगे।

        नई दिल्ली / नोएडा में 13 अप्रैल को मजदूरों के वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगों को लेकर हुए उग्र विरोध-प्रदर्शन के बाद अब प्रशासन एक्शन मोड में नजर आ रहा है। हिंसा के कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है।

    पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कड़ी कार्रवाई करते हुए सेंट्रल नोएडा जोन की डीसीपी शैव्या गोयल और एसीपी उमेश कुमार को उनके पदों से हटा दिया है। इसके अलावा अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कानून-व्यवस्था में किसी भी तरह की चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    शैलेंद्र सिंह को सौंपी गई अतिरिक्त जिम्मेदारी
    नए आदेश के तहत डीसीपी ट्रैफिक शैलेंद्र कुमार सिंह को सेंट्रल नोएडा जोन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वे अब ट्रैफिक प्रबंधन के साथ-साथ क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

    गौरतलब है कि 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी शैव्या गोयल को महज 1 अप्रैल 2026 को ही सेंट्रल नोएडा और साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन सिर्फ 19 दिनों के भीतर ही उनका तबादला कर दिया गया। इससे पहले वे साइबर और नारकोटिक्स जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्य कर चुकी हैं।

    प्रशासनिक जरूरत या जवाबदेही का संदेश?
    पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह फेरबदल प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, लेकिन घटनाक्रम के समय और तेजी को देखते हुए इसे जवाबदेही तय करने की कार्रवाई के रूप में भी देखा जा रहा है।

    दोनों अधिकारियों ने अपनी नई जिम्मेदारियों का कार्यभार संभाल लिया है, वहीं प्रशासन अब पूरे मामले में आगे की जांच और शांति व्यवस्था बनाए रखने पर फोकस कर रहा है।

    राजनांदगांव/शौर्यपथ। छत्तीसगढ़ में जारी भीषण गर्मी और ‘लू’ (हीट वेव) के प्रकोप के बीच केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) द्वारा आयोजित रीजनल स्पोर्ट्स मीट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस खेल-कूद प्रकोष्ठ के शहर अध्यक्ष एवं महामंत्री मनीष सिंह गौतम ने इस आयोजन का कड़ा विरोध करते हुए इसे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। गौतम ने बयान जारी कर कहा कि जब पूरे प्रदेश में भीषण गर्मी के चलते रेड अलर्ट जैसी स्थिति बनी हुई है और प्रशासन द्वारा स्कूलों में अवकाश घोषित कर लोगों को घरों में रहने की सलाह दी जा रही है, ऐसे समय में छात्रों को लंबी दूरी की यात्रा कराकर और तेज धूप में खेल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बाध्य करना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने इसे “संवेदनहीनता की पराकाष्ठा” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त तैयारी और रिजर्वेशन के बच्चों को दूर-दराज के क्षेत्रों से बुलाया जा रहा है। स्टेशन से लेकर विद्यालय और फिर मैदान तक उन्हें तेज गर्मी में रहना पड़ रहा है, जिससे उनके बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। गौतम ने प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कलेक्टर, जो केंद्रीय विद्यालयों के स्थानीय अध्यक्ष होते हैं, उनकी जिम्मेदारी शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि क्या केंद्रीय विद्यालय हीट वेव के नियमों से ऊपर हैं। उन्होंने प्रदेश की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शिकायतों के बावजूद कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हो रही है, जो सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। गौतम ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि रीजनल स्पोर्ट्स मीट को तुरंत प्रभाव से रद्द या स्थगित किया जाए। साथ ही, नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और सभी जिलों के कलेक्टर ऐसी गतिविधियों को तुरंत बंद कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस लापरवाही के कारण किसी भी बच्चे के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय विद्यालय प्रबंधन, जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार की होगी।

    दुर्ग। दुर्ग की राजनीति हमेशा से छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख केंद्र रही है। लेकिन पिछले चार दशकों से यहाँ कांग्रेस का संगठन एक ही 'परिवार' और 'रिमोट कंट्रोल' की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। यह एक ऐसी व्यवस्था थी जहाँ निर्णय संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा नहीं, बल्कि एक खास दरबार में लिए जाते थे। परिणाम? जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी, निष्क्रिय कार्यकर्ता और जनता से दूरी।

    धीरज बाकलीवाल: ‘जमीनी संगठन’ और ‘बूथ मज़बूती’ का नया दौर

    लेकिन अब दुर्ग शहर कांग्रेस में एक 'नयी रोशनी' दिखाई दे रही है, जिसका श्रेय शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल को जाता है। बाकलीवाल ने पुरानी परिपाटी को चुनौती देते हुए संगठन को फिर से सक्रिय करने का काम शुरू किया है। उनका स्पष्ट विश्वास है कि एक 'सशक्त बूथ ही सशक्त संगठन की आधारशिला' है।

    संगठनात्मक कसावट: बाकलीवाल ने 5 ब्लॉक, 10 मंडल, 60 वार्ड और 275 बूथों पर संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने का अभियान चलाया है।

    सक्रिय विपक्ष: वह केवल संगठनात्मक कार्यों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जनता के मुद्दों को भी मजबूती से उठा रहे हैं। चाहे वो ई-चालान का मुद्दा हो या हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के छात्रों के भविष्य से जुड़ी लापरवाही, बाकलीवाल प्रशासन के सामने मजबूती से पक्ष रख रहे हैं।

    सामाजिक सरोकार: धीरज बाकलीवाल सामाजिक रूप से भी जनता से जुड़ रहे हैं। तिरुपति से लौटे तीर्थयात्रियों का स्वागत और ऐसी अन्य गतिविधियाँ उन्हें जनता के करीब ला रही हैं।

    अरुण वोरा की ‘गिरती साख’ और ‘गुटबाजी’ का घेरा

    दूसरी ओर, पूर्व विधायक अरुण वोरा की कार्यशैली अब चर्चा का विषय बनी हुई है। उनके समय में संगठन के निर्णय एक ही दरबार से लिए जाते थे। पुराने जिला अध्यक्षों को तो संगठन की गतिविधियों की जानकारी तक नहीं होती थी; हर छोटे-बड़े सवाल का जवाब 'वोरा जी से पूछकर बताएंगे' में सिमट जाता था। जानकार मानते हैं कि पूर्व की राजनीति केवल चुनाव के समय कार्यकर्ताओं को याद करने और संगठन को अपनी मुट्ठी में रखने तक सीमित थी। यह 'एकल ध्रुवीय' व्यवस्था दुर्ग में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई।

    चुनौतियां अभी बाकी हैं: ‘मतलबपरस्त’ नेताओं और ‘चाटुकारों’ की फौज

    यद्यपि यह 'नया उदय' सुखद है, लेकिन धीरज बाकलीवाल के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। संगठन में अभी भी ऐसे नेताओं की फौज है जो केवल सत्ता के लाभ के लिए मंचों पर आसीन हो जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उनकी कोई अहमियत नहीं है। चाटुकारों की यह फौज गुटबाजी को हवा देती है और संगठन के कार्यों में बाधा डालती है।

    निष्कर्ष: ‘नयी रोशनी’ से ‘भविष्य की जीत’ की ओर

    अगले 17-18 महीनों में चुनावी मोड शुरू हो जाएगा। बाकलीवाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन 'मतलबपरस्त' नेताओं से बचते हुए कर्मठ कार्यकर्ताओं की ऐसी टीम तैयार करना है, जो कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचा सके। यदि धीरज बाकलीवाल इसी तरह संगठन और कार्यालय को आबाद रखने में सफल रहे, तो दुर्ग शहर कांग्रेस के लिए यह 'नया उदय' न केवल सुखद होगा, बल्कि भविष्य की जीत का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

    यह राजनीतिक लेख दुर्ग कांग्रेस में चल रही इस बड़ी उथल-पुथल और 'नयी रोशनी' की शुरुआत को बयां करता है।

    रायपुर  ।
    छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास को नई गति देते हुए कोरबा जिले के दर्री तहसील अंतर्गत ग्राम गोपालपुर में 27 एकड़ में विकसित होने वाले नवीन औद्योगिक क्षेत्र का भूमिपूजन आज वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। करीब 10.59 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह औद्योगिक क्षेत्र न केवल निवेश को आकर्षित करेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर भी सृजित करेगा।

    मंत्री श्री देवांगन ने विधिवत पूजा-अर्चना कर अधोसंरचना विकास कार्यों की शुरुआत करते हुए कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि “विकसित कोरबा” के सपने की मजबूत नींव है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 1980 के बाद पहली बार कोरबा में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जो जिले के औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा देगा।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” विजन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में उद्योगों के विस्तार और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। नई औद्योगिक नीति के तहत सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन भूमि आवंटन और समयबद्ध प्रक्रियाओं ने निवेशकों के लिए माहौल को सरल, पारदर्शी और अनुकूल बनाया है।

    मंत्री ने विशेष रूप से बताया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के उद्यमियों को मात्र 1 रुपये में भूमि उपलब्ध कराने जैसी पहलें उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    44 औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा अवसर
    छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CSIDC) के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि गोपालपुर औद्योगिक क्षेत्र में 44 औद्योगिक इकाइयों को भूखंड आवंटित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी। उन्होंने यह भी बताया कि नई नीति के तहत पात्र इकाइयों को कुल निवेश का लगभग 65% तक अनुदान/सहायता प्रदान की जा रही है।

    सीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक श्री विश्वेश कुमार ने जानकारी दी कि लगभग 11 हेक्टेयर क्षेत्र में विकास कार्यों की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है और टेंडरिंग कार्य प्रगति पर है। “वन क्लिक सिंगल विंडो” प्रणाली के माध्यम से निवेशकों को सभी आवश्यक सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    कोरबा: ऊर्जा नगरी से बहुआयामी औद्योगिक हब की ओर
    इस परियोजना के माध्यम से कोरबा, जो अब तक कोयला और बिजली उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है, विविध उद्योगों के केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में अग्रसर होगा। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी और युवाओं के पलायन में कमी आएगी।

    कार्यक्रम में विधायक श्री प्रेमचंद्र पटेल, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह, कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

    यह भूमिपूजन कोरबा के औद्योगिक भविष्य की नई इबारत लिखने की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां निवेश, रोजगार और विकास की त्रिवेणी एक साथ बहती नजर आएगी।

    रायपुर /

    विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर आगामी 8 मई को राज्य स्तर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में रेडक्रॉस राज्य शाखा, रायपुर के चेयरमैन श्री तोमन साहू की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट परिसर स्थित रेडक्रॉस भवन में बैठक आयोजित की गई।
    बैठक में निर्णय लिया गया कि इस विशेष अवसर पर समूह नृत्य, प्रहसन एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर के रेडक्रॉस वालंटियर्स भाग लेंगे। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान के आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा।
    इस दौरान रेडक्रॉस की गतिविधियों के सुचारू संचालन हेतु विस्तृत कार्ययोजना भी तैयार कर जारी की गई। योजना में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, विशेष अवसरों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा अधिक से अधिक लोगों को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है। साथ ही, रक्तदान शिविरों का व्यापक आयोजन कर रक्त की आवश्यकता की पूर्ति सुनिश्चित करने और “रक्तदान महादान” के संदेश को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
    जूनियर रेडक्रॉस एवं यूथ रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से विद्यार्थियों को रचनात्मक और सेवा आधारित गतिविधियों से जोड़ने की भी योजना बनाई गई है, जिससे उनमें मानवीय मूल्यों और सेवा भाव का विकास हो सके। जिला शिक्षा अधिकारियों को माहवार गतिविधियों के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए गए हैं।
    कार्ययोजना में शैक्षणिक भ्रमण, प्राकृतिक अध्ययन, प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण, काउंसलर प्रशिक्षण, ट्रैकिंग कार्यक्रम, पर्यावरण संरक्षण जागरूकता, रक्तदाता दिवस, विश्व योग दिवस, जनसंख्या दिवस, साक्षरता दिवस, अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस, दिव्यांग दिवस, आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सहित विभिन्न कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। साथ ही, विद्यार्थियों को नई दिल्ली में लोकसभा एवं राज्यसभा की कार्यप्रणाली से अवगत कराने के लिए शैक्षणिक भ्रमण भी प्रस्तावित है। बैठक में चेयरमैन श्री तोमन साहू, कोषाध्यक्ष श्री संजय पटेल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    यह सम्मान निरंतर सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम: स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल

    रायपुर /
    भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा दिनांक 17 एवं 18 अप्रैल 2026 को पुणे (महाराष्ट्र) में आयोजित चिंतन शिविर में देश के सभी राज्यों को योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य को योजना के प्रभावी संचालन, सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था तथा पारदर्शी क्लेम प्रबंधन प्रणाली के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दो प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

    छत्तीसगढ़ को Best Performing Large State के रूप में निम्नलिखित श्रेणियों में चयनित किया गया—

    1. हाई ट्रिगर एफिकेसी

    इस श्रेणी में राज्य ने संदिग्ध क्लेम की पहचान एवं उनके प्रभावी विश्लेषण में उल्लेखनीय दक्षता प्रदर्शित की है। उन्नत आईटी आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली तथा सुदृढ़ ऑडिट व्यवस्था के माध्यम से अनियमितताओं की समयबद्ध पहचान सुनिश्चित की गई है।

    2. टाइमली प्रोसेसिंग ऑफ सस्पेसियस क्लेम्स

    इस श्रेणी में राज्य ने संदिग्ध दावों के त्वरित निपटान में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। निर्धारित समय-सीमा के भीतर क्लेम की जांच, निर्णय एवं निष्पादन सुनिश्चित कर पारदर्शिता एवं जवाबदेही को मजबूत किया गया है।

    राज्य में क्लेम ऑडिट तंत्र को सशक्त बनाने, ट्रिगर-आधारित निगरानी प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने तथा अस्पतालों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के कारण संदिग्ध प्रकरणों के निराकरण में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। इसके परिणामस्वरूप क्लेम प्रोसेसिंग की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है तथा अनावश्यक विलंब में कमी आई है, जिससे योजना के लाभार्थियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

    स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश के राज्य को मिली इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “यह सम्मान छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और निरंतर सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से हम प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित हैं। यह पुरस्कार हमारे स्वास्थ्यकर्मियों, प्रशासनिक टीम और सहयोगी संस्थानों के सामूहिक प्रयास का प्रतिफल है। हम भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते रहेंगे।”

    रायपुर ।
    भारत को कबड्डी विश्वकप और एशियन चैंपियनशिप जिताने में निर्णायक भूमिका निभाने वाली छत्तीसगढ़ की होनहार खिलाड़ी संजू देवी को राज्य सरकार ने 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया है। यह प्रदेश के खेल इतिहास में पहली बार है जब किसी खिलाड़ी को इतनी बड़ी राशि प्रदान की गई है। उप मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री श्री अरुण साव ने नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित समारोह में संजू को चेक सौंपा। इस अवसर पर बिलासपुर के चिंगराजपारा कबड्डी क्लब को कबड्डी मैट भी प्रदान किया गया।

    संजू देवी ने अपने दमदार प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया। नवंबर 2025 में बांग्लादेश में आयोजित कबड्डी वर्ल्ड कप में उन्हें “मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (MVP)” चुना गया। फाइनल मुकाबले में भारत के कुल 35 अंकों में से 16 अंक अकेले संजू ने अर्जित किए, जो उनकी निर्णायक भूमिका को दर्शाता है। सेमीफाइनल सहित पूरे टूर्नामेंट में उनके खेल ने टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में अहम योगदान दिया।

    कोरबा जिले के छोटे से गांव केराकछार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाली 23 वर्षीय संजू श्रमिक परिवार से आती हैं। उन्होंने जुलाई 2023 से बिलासपुर की बहतराई आवासीय बालिका कबड्डी अकादमी में प्रशिक्षण लेकर अपने खेल को निखारा। वे छत्तीसगढ़ की पहली महिला कबड्डी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया और दो प्रमुख प्रतियोगिताओं—एशियन चैंपियनशिप (ईरान, मार्च 2025) और वर्ल्ड कप—में भारत को स्वर्ण दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संजू की उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को हरसंभव मंच और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संजू जैसी बेटियां आज नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं और आने वाले समय में प्रदेश का नाम और ऊंचा करेंगी।

    उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि संजू देवी का प्रदर्शन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाने वाला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है और विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जा रहा है।

    संघर्ष से शिखर तक का सफर
    संजू देवी की कहानी संघर्ष, अनुशासन और अटूट जज्बे की मिसाल है। गरीबी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून, मानसिक मजबूती और कड़ी मेहनत के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया। ईस्ट जोन और ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं से लेकर इंडिया कैंप और फिर भारतीय टीम तक उनका चयन लगातार बेहतर प्रदर्शन का परिणाम रहा।

    आज संजू देवी केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा और परिश्रम के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

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