August 20, 2026
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    रायपुर

    रायपुर (6096)

    *विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में हुआ जागरूकता कार्यक्रम*
    *रायपुर 9 अक्टूबर 2021।*
    संप्रेक्षण गृह में रह रहे  किशोरों  के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उनको जीवन कौशल के बारे में बताया गया ।  इस कार्यक्रम के माध्यम से संप्रेक्षण गृह में रह रहे  किशोरों को जीवन के संघर्षों और जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के साथ साथ तनाव को कम करने के गुण भी  बताए गए ।
    मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की जिला नोडल अधिकारी डॉक्टर सृष्टि यदु ने बताया, ‘’ स्पर्श क्लीनिक की मनोविज्ञानी ममता गिरी गोस्वामी द्वारा संप्रेक्षण गृह में रह रहे किशोरों के साथ  मानसिक स्वास्थ्य के विषय पर चर्चा कर जीवन कौशल के बारे में बताया गया। साथ ही मन में आ रहे बदलाव से पूर्व मिलने वाले संकेतों के बारे में भी जानकारी दी गयी।
    इस मौके पर ममता गिरी गोस्वामी ने कहा, “दुखी व्यक्ति व्यक्ति एकांत प्रिय होने लगता है, लोगों से कम बातचीत करता है और अपने आप में ही खोया रहता है, साथ ही वह संकेत भी देता है कि वह अपने जीवन को हानि पहुंचा सकता है।  हमें इन संकेतों को समय रहते पहचाना होता है, ताकि हम उसे उचित परामर्श देकर एक नये जीवन की ओर अग्रसर कर सकें और वह आत्मघाती विचार त्याग कर अपने अमूल्य जीवन का सदुपयोग करे ।“
    ममता गिरी गोस्वामी कहती है, ‘’इस अवसर पर किशोरों को जीवन कौशल के विषय में भी बताया गया कि किस प्रकार हम एक बेहतर जीवन जी सकते हैं । तनाव को कैसे कम करेंगे और आपसी मेलजोल के साथ हम कैसे अपने आसपास का वातावरण सुंदर कर सकते हैं । एक दूसरे की भावनाओं को समझने का प्रयास करें साथ ही मानसिक परिवर्तन क्या होता है मन: स्थिति का कैसे पता कर सकते हैं को भी किशोरों को बताया गया।“
    ममता कहती है ‘’हमको जीवन में एक ऐसा मितानिन बनाना चाहिए जो हमारे मन में हो रही जिज्ञासाओं को शांत करें और हमें एक बेहतर जीवन जीने की कला सिखाएं,  उन्होंने कहा आप सब लोग किशोर है अगर एक अच्छा जीवन जीना है तो हमको अपने जीवन में कुछ नियम बनाने होंगे वही नियम हमारे जीवन कौशल को बेहतर करेंगे ।‘’

    *मनोरोगी को सरल और खुशनुमा माहौल की होती है जरूरत- डॉ.अविनाश*
    *रायपुर 9 अक्टूबर 2021,* एनी (बदला हुआ नाम) को भूल जाने  के साथ ही उदास रहना, खाना कम खाना, किसी कार्य में मन नहीं लगना, एकाग्रता की कमी, और नींद न आना जैसी समस्याओं से घिर गयी थी । इसके अतिरिक्त चिड़चिड़ापन और गुस्सा भी काफी बढ़ गया था। इन सभी मानसिक समस्याओं के कारण एनी दो बार जीवन समाप्त करने का भी प्रयास कर चुकी थी। घर के सदस्य समझ नही पा रहे थे कि एनी को क्या हो गया है। परिवारजनों द्वारा काफी प्रयास करने के बाद भी एनी को  कोई फायदा नहीं मिल रहा था।
    इस बारे में एनी के पति बताते हैं,  ‘’ ऐनी अच्छी गृहणी है लेकिन पिछले 1 वर्ष से उसके व्यवहार में बहुत अंतर आ गया था। हसमुख एनी अब घर के बाहर ही नहीं निकलती थी। वह उदास रहती, बातें भूल जाती है और कभी भी गुस्सा हो जाती थी। इस कारण से घर पर सभी परेशान थे। ऐसी ही एक परेशानी से जूझ रहे मेरे मित्र ने मुझे जिला अस्पताल पंडरी में स्पर्श क्लीनिक जा कर परामर्श लेने का सुझाव दिया।  वहां पर स्टाफ द्वारा पूर्व में हुयी सभी घटनाओं के बारे में जानकारी मांगी गयी  तत्पश्चात एनी की काउंसलिंग और उपचार शुरू किया गया  जिसके परिणामस्वरूप एनी की तबियत में काफी सुधार देखने को मिला। इस तरह हमें स्पर्श क्लिनिक के माध्यम से उचित मार्गदर्शन मिल पाया।‘’
    स्पर्श क्लीनिक के मनोचिकित्सक डॉ.अविनाश शुक्ला ने बताया:‘’जब एनी  यहां आई तब हमने उसकी मानसिक जांच के साथ ही सुसाइड रिस्क एसेसमेंट(आत्महत्या जोखिम आकलन) भी किया। उसपर मानसिक दबाव बहुत ज्यादा था और  वह लंबे समय से डिप्रेशन(अवसाद) से ग्रस्त थी। हमें  साइकोसोशल इंटरवेंशन (मनोसामाजिक हस्तक्षेप) करना पड़ा। उच्च जोखिम होने के कारण रोगी के पति को पूरी प्रक्रिया से पहले ही अवगत कराया गया ताकि भविष्य में आत्मघात की कोशिश को रोका जा सके । साथ ही डिप्रेशन से उबरने के लिए एनी को दवाएं दीं गयीं और उसकी काउंसलिंग भी की गई ।‘’
    निश्चित रूप से मानसिक स्वास्थ्य संपूर्ण स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा है।  इसमें रोगी के मन को समझना होता है और उसके अनुरूप ही व्यवहार करना होता है। मनोरोग से पीड़ित व्यक्ति को सामाजिक परिवेश में सम्मिलित रखना और उनको प्रोत्साहित करना उपचार के लिए आवश्यक होता है, डाक्टर शुक्ला ने बताया ।
    स्पर्श क्लीनिक की साइकोलॉजिस्ट एवं परामर्शदाता ममता गिरी गोस्वामी कहती हैं:, ‘’ मनोरोगी को ठीक करने में परिवार का व्यवहार अनुकूल होना चाहिए। हमने जोखिम को कम करने के लिए सुरक्षित व्यवहार जैसे कार्य करने को कहा जिसमें नुकसान पहुंचाने वाली चीजों को मनोरोगी की पहुंच से दूर किया गया । सपोर्टिव परामर्श से परिवार और व्यक्ति दोनों को लाभ मिलता है। सपोर्टिव परामर्श का तात्पर्य लोगों को रोगी को खुशनुमा पलों को याद कराना और उसके मनोरंजन के साधन और उसके पसंद के विषय पर उसको केंद्रित करना अमूमन देखा गया है कि परामर्श पूर्व रोगी में एक अलग ही प्रकार की उथल-पुथल चलती है।‘’
    ममता कहती है, एनी के विषय में जब  उनसे विस्तार से चर्चा की तो पता चला कि उन्हें कुकिंग का बहुत ज्यादा शौक है उनकी उस पसंद को  उनके परामर्श का सहारा बनाया गया|  एनी को धीरे-धीरे एक सामान्य जीवन की तरफ लाने के  प्रयास से अब  वह  ठीक हो गयी है।
    एनी कहती हैं: ‘’ स्पर्श क्लिनिक आकर परामर्श मिलने से  मेरे  जीवन में बहुत परिवर्तन आया है। अब  मुझे  कुकिंग, मनोरंजन के साधन, पसंदीदा फिल्म,  पसंदीदा स्थान पर घूमने के साथ साथ परिवार के साथ समय बिताने में आनंद आता है। समय रहते मै सामान्य जिंदगी की तरफ वापस आयी हूँ।  उपचार के बाद मुझे अब एक नया जीवन प्राप्त हुआ है।“

    Nagri। नगर के समाजसेवी सन्नी छाजेड़ ने धमतरी पुलिस विभाग के अधिकारियों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि धमतरी पुलिस द्वारा लगातार चोरी के मामले हो या जुआ एवं सट्टा से जुड़े मामले, पुलिस विभाग द्वारा धमतरी एसपी के निर्देशन पर लगातार असामाजिक तत्वओं पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। जिसकी पूरे क्षेत्र में प्रशंसा की जा रही है। उन्होंने धमतरी पुलिस विभाग को इस बात के लिए बधाई प्रेषित की है।

    सहायक शिक्षक फेडरेशन ब्लॉक शाखा नगरी की ओर से सहायक शिक्षक संवेदना पुष्प राशि भेंट एवं नए विकास खंड शिक्षा अधिकारी का स्वागत सम्मान समारोह विकासखंड स्रोत समन्वयक कार्यालय के प्रशिक्षण हाल नगरी में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सहायक शिक्षक फेडरेशन के मीडिया प्रभारी गजानंद सोन ने बताया कि इस कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छाया चित्र पर माल्यार्पण, पूजन के साथ वंदना गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यकारिणी के समस्त सदस्यों के द्वारा नए विकास खंड शिक्षा अधिकारी सतीश प्रकाश सिंह का गुलाल, शाल एवं श्रीफल से सम्मानित किया गया। सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती माहेश्वरी ध्रुव का संगठन की ओर से साल एवं श्रीफल से सम्मानित किया गया एवं इस कार्यक्रम में स्वर्गीय श्री कोमल सोरी की धर्मपत्नी श्रीमती भूमिजा सोरी का शाल व श्रीफल के साथ सम्मानित करते हुए विकास खंड शिक्षा अधिकारी के कर कमलों से श्रीमती भूमिका सोनी जी को ₹30,000 हजार रू. का चेक प्रदान किया गया! कार्यक्रम के प्रथम वक्ता के रूप में श्रीमती ममता प्रजापति अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ सहायक शिक्षक फेडरेशन के द्वारा संवेदना पुष्प राशि के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दिया गया। संगठन की ओर से शरीफ बेक मिर्जा अध्यक्ष एवं भागवत राम साहू सचिव ने सहायक शिक्षकों की समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए संवेदना राशि पर संघ संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला गया उपाध्यक्ष प्रकाश चंद साहू एवं अंकेक्षक टिकेश्वर साहू ने संवेदना राशि व अन्य समस्याओं पर बातें रखी, गजानंद सोन मीडिया प्रभारी,प्रवक्ता ने संघ एवं संगठन को नए पेंशन सिस्टम को हटाकर पुरानी पेंशन बहाली पर ध्यान आकृष्ट कराया एवं सभी को एकजुट होकर झरने की बातें कहते हुए शोकाकुल परिवार को संवेदना व्यक्त किया गया। इसी क्रम में विकास खंड शिक्षा अधिकारी सतीश प्रकाश सिंह ने विकासखंड के अंतर्गत आने वाली समस्याओं को जल्द से जल्द सुलझाने एवं निकट भविष्य में शिविर के माध्यम से सविँस बुक संधारण संबंधी जानकारी दिया गया, व शोकाकुल परिवार को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया गया ।सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती महेश्वरी ध्रुव की ओर से भी सभा को आश्वस्त किया गया कि आपके लिखित समस्याओं पर त्वरित निराकरण किया जाएगा। सोरी जी के सुपुत्र के द्वारा संविदा पुष्प राशि के माध्यम से सहयोग करने के लिए सहायक शिक्षक फेडरेशन का धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रांतीय संगठन मंत्री सुरेंद्र प्रजापति के द्वारा समस्त आगंतुको एवं समस्त सहायक शिक्षकों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेंद्र टांडेश संगठन मंत्री, टिकेश्वर साहू, अनिल साहू अंकेक्षक ,चंपेश्वर साहू कोषाध्यक्ष, श्री मति छनीता साहू ,राजेश सोम, देवी राम निषाद ,पुरानीक ध्रुव, टीकाराम कुंजाम, कमलेश चंद्राकर, नरेंद्र ध्रुव का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।इस कार्यक्रम में व्ही.के सरोज,रोहित देवांगन, नरेन्द्र साहू, बीरसिंग बंजारे, शैलेन्द्र चंचल चाडक्य, एवं अन्य सहायक शिक्षक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सचिव भागवत राम साहू द्वारा किया गया।

    नगरी। ग्राम फरसियाँ के श्रद्धालु युवाओं की टोली मां बमलेश्वरी के दर्शन के लिए पैदल ही डोंगरगढ़ के लिए निकल पड़े। 06 अक्टूबर को प्रातः 6:00 बजे महामाई मंदिर, फरसिंया से प्रारंभ यह पदयात्रा अनुमान के अनुसार 10 अक्टूबर को, मां बमलेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़ दर्शन के लिए पहुंच जाएगी। क्षेत्रवासीयों द्वारा पदयात्रा पर निकले श्रद्धालु युवक खोमेश्वर सोन फरसियां, ओमकार श्रीमाली, अक्षय नाग, शिवा शांडिल्य संबलपुर की सरहाना की जा रही है।

    रायपुर/शौर्यपथ/प्रदेश में संचालित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन 28 और 29 अक्टूबर को रायपुर में किया जाएगा। राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में पांच संभाग रायपुर, दुर्ग, बस्तर, बिलासपुर और सरगुजा के चयनित खिलाड़ी शामिल होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि खेल प्रतियोगिताएं कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए संचालित की जाए।
    प्रतियोगिता पूर्व माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर बालक और बालिका वर्ग के लिए आयोजित होगी। पूर्व माध्यमिक स्तर पर बालक एवं बालिका वर्ग के लिए 100 मीटर, 200 मीटर की दौड़ और 100ग400 रिले रेस, कबड्डी, बैडमिंटन, शतरंज, खो-खो और सिर्फ बालिका वर्ग के लिए फुगड़ी की प्रतियोगिता होगी। इसी प्रकार उच्चतर माध्यमिक स्तर पर बालक और बालिका वर्ग के लिए 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर की दौड़ और 100ग400 रिले रेस, कबड्डी, बैडमिंटन, शतरंज, खो-खो, फुटबाल और व्हालीबॉल की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
    आयुक्त लोक शिक्षण डॉ. कमलप्रीत सिंह ने राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता के संबंध में सभी संभागीय संयुक्त संचालक, स्कूल शिक्षा को निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दें कि 22 अक्टूबर तक जिले की टीम बनाकर सूची संभागीय कार्यालय में प्रस्तुत करें। इसी प्रकार संभागीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन 24 से 26 अक्टूबर तक सम्पन्न कर चयन सूची लोक शिक्षण संचालनालय में प्रेषित की जाए। चयनित संभागीय दल 27 अक्टूबर को शाम 5 बजे तक रायपुर में उपस्थित होना सुनिश्चित करे।
    राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता के आयोजन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय के सहायक संचालक क्रीडा श्री अनिल मिश्रा और सहायक जिला क्रीडा अधिकारी रायपुर श्री आई.पी. वर्मा को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

    राहत आयुक्त ने कलेक्टरों को जारी किए दिशा-निर्देश

    राज्य आपदा मोचन निधि से दी जाएगी अर्थिक अनुदान सहायता

    रायपुर/शौर्यपथ/ राजस्व सचिव एवं राहत आयुक्त छत्तीसगढ़ शासन सुश्री रीता शांडिल्य ने सभी जिला कलेक्टरों एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को कोविड-19 के कारण मृत व्यक्तियों के परिजनों, आश्रितों को राज्य आपदा विमोचन निधि से 50 हजार रूपए की आर्थिक अनुदान सहायता देने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी कलेक्टरों को कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुक्रम में भारत सरकार के गृह मंत्रालय (आपदा प्रबंधन प्रभाग) तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देश एवं परिपत्र के अनुक्रम में प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल आर्थिक अनुदान सहायता देने के लिए समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करें। राहत आयुक्त ने दिशा-निर्देशों के साथ उच्चतम न्यायालय के आदेशों की छायाप्रति तथा गृह मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर तथा संशोधन की छायाप्रति कलेक्टरों को भेजी है।
    उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली द्वारा 30 जून 2021 तथा 04 अक्टूबर 2021 को पारित आदेश में कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के परिजनों को आर्थिक अनुदान सहायता किस आधार पर दिया जाना है, इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया गया है। उक्त आदेशों की छायाप्रति तथा भारत सरकार, गृह मंत्रालय, रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा उच्चतम न्यायालय के 30 जून 2021 के निर्णय के पालन में 03 सितंबर 2021 को जारी सर्कुलर तथा तत्संबंध में 11 सितंबर 2021 में संशोधन की छायाप्रति भी जिला कलेक्टरों को पत्र के साथ भेजी गई है।
    उच्चतम न्यायालय द्वारा 04 अक्टूबर 2021 को पारित निर्णय के अनुसार कोविड-19 के कारण मृत व्यक्ति के परिजन को 50 हजार रूपए अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाएगा, जिसे आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के प्रावधान के अंतर्गत अनुग्रह भुगतान माना जाएगा तथा यह भुगतान भारत संघ, राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न परोपकारी योजनाओं के तहत इस संबंध में घोषित अथवा प्रदान की जाने वाली राशि से अतिरिक्त होगा।
    उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार अनुग्रह सहायता राशि का भुगतान राज्य आपदा मोचन निधि से किया जाएगा। मृतक के परिजनों को अनुग्रह सहायता राशि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन द्वारा संवितरित की जाएगी। कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के परिजनों को अनुग्रह राशि दी जाएगी, जिसका जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन द्वारा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाएगा एवं इस संबंध में सूचना एक सप्ताह के भीतर प्रकाशित की जाएगी। ऐसी सूचना ग्राम पंचायत कार्यालय, तहसील, जनपद पंचायत कार्यालय, जिला पंचायत कार्यालय, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम कार्यालय तथा जिला कार्यालय में चस्पा कर प्रकाशित की जाएगी। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन द्वारा (कोविङ-19 के कारण मृत्यु तथा तत्संबंध में प्रमाण-पत्र के साथ) आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों की अवधि में अनुग्रह सहायता राशि 50 हजार रूपए का भुगतान किया जाएगा।
    राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा 11 सितंबर 2021 को जारी निर्देशों के अनुसार कोविड-19 से हुई मृत्यु के संबंध में मृत्यु प्रमाण-पत्र में उल्लेखित मृत्यु का कारण निर्णायक नहीं होगा तथा इस संबंध में ऐसे अन्य जांच एवं उपचार संबंधी दस्तावेज जिससे यह स्पष्ट होता है कि मृतक की मृत्यु कोविड-19 के कारण हुई है, ऐसी स्थिति में भी उसके परिजन को 50 हजार रूपए अनुग्रह राशि की पात्रता होगी। मृतक के परिजनों को 50 हजार रूपए की अनुग्रह सहायता से इस आधार पर इंकार नहीं किया जाएगा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण-पत्र में मृत्यु का कारण ‘कोविड-19 के कारण मृत्यु‘ के रूप में नहीं किया गया है। मृत्यु के प्रमाणीकरण संबंधी शिकायत होने पर पीड़ित व्यक्ति जिला स्तर पर समिति से संपर्क कर सकता है। समिति में अतिरिक्त जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, विभागाध्यक्ष मेडिसिन (यदि मेडिकल कॉलेज जिले में स्थित है) और एक विषय विशेषज्ञ होंगे, जो आवश्यक दस्तावेजों के परीक्षण एवं सत्यापन पश्चात् कोविड-19 से मृत्यु के संबंध में अधिकारिक प्रमाण-पत्र जारी कर सकेंगे कि मृतक की मृत्यु का कारण कोविड-19 है।
    सभी जिलों में इस प्रकार की समिति गठित की जाएगी तथा जिला स्तर पर उक्त समिति का पूर्ण पता और उससे संबंधित विवरण प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित एवं प्रसारित किया जाएगा। नगर निगम क्षेत्र में उसी प्रकार की एक समिति उपायुक्त नगर निगम (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य), मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष मेडिसिन (यदि मेडिकल कॉलेज स्थित है) तथा विषय-विशेषज्ञ की गठित की जाएगी तथा इस समिति का कार्यालय संबंधित नगर निगम कार्यालय होगा।
    यदि समिति का निर्णय आवेदक (दावेदार) के पक्ष में नहीं है, तब इसका स्पष्ट कारण शिकायत निवारण समिति द्वारा अभिलिखित किया जाएगा। भविष्य में कोविड-19 से होने वाली मृत्यु से प्रभावित परिवारों को भी अनुग्रह सहायता राशि प्रदान की जाएगी। कोविड-19 से मृत्यु के संबंध में सही कारण बताते हुए मृत्यु प्रमाण-पत्र, अधिकारिक प्रमाण-पत्र जारी करने के संबंध में 04 अक्टूबर 2021 को उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णयानुसार निर्देशित किया गया है- यदि मृतक की आरटीपीसीआर, मॉलिक्यूलर टेस्ट, आरएटी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई हो अथवा अस्पताल, रोगी सुविधा केन्द्र में चिकित्सक द्वारा जांच के माध्यम से चिकित्सकीय रूप से कोविड-19 निर्धारित किया गया हो। परीक्षण की तारीख से कोविड-19 अथवा चिकित्सकीय रूप से कोविड-19 निर्धारित होने के 30 दिन के भीतर होने वाली मृत्यु को कोविड-19 के कारण होने वाली मृत्यु माना जाएगा, भले ही मृत्यु अस्पताल, रोगी सुविधा केन्द्र के बाहर हुई हो। साथ-ही अस्पताल, रोगी सुविधा केन्द्र में कोविड-19 के ऐसे मामले जिनमें मरीज 30 दिनों से अधिक समय तक भर्ती रहा और बाद में उसकी मृत्यु हो गई, उन्हें भी कोविड-19 से मृत्यु माना जाएगा।
    कोविड-19 के ऐसे मामले जो हल नहीं हुए हैं तथा ऐसे व्यक्तियों की मृत्यु अस्पताल अथवा घर में हुई हो और जहाँ फॉर्म-4 एवं 4 (ए) में मृत्यु के कारण का मेडिकल प्रमाण-पत्र (एमसीसीडी) पंजीकरण प्राधिकारी को जारी किया गया हो, उसे कोविड-19 से मृत्यु के रूप में माना जाएगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि मृत्यु प्रमाण-पत्र में उल्लेखित मृत्यु के कारण पर ध्यान दिए बिना यदि मृतक के परिवार का सदस्य उपरोक्त में दर्शित पात्रता मानदण्डों को पूरा करता है, तब उसे अनुग्रह सहायता राशि दी जाएगी। सभी संबंधित अस्पतालों द्वारा जहाँ रोगी को भर्ती कराया गया था तथा उपचार दिया गया था, मृतक के परिवार के सदस्य को उसके द्वारा मांगे जाने पर उपचार संबंधी सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे। अस्पताल द्वारा दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में शिकायत निवारण समिति द्वारा संबंधित अस्पताल से मरीज के उपचार से संबंधित ऐसे दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे, जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि मृतक के मृत्यु का कारण कोविङ-19 है।
    कोविङ-19 पॉजिटिव पाए जाने के 30 दिनों के भीतर यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। उस स्थिति में भी परिवार के सदस्य को 50 हजार रुपए अनुग्रह सहायता राशि की पात्रता होगी। यदि कोविड-19 से मृत व्यक्ति के परिवार के सदस्य को अनुग्रह राशि प्राप्त नहीं होने के संबंध में यदि कोई शिकायत हो, तो वह अपनी शिकायत, शिकायत निवारण समिति के समक्ष दर्ज करा सकेगा तथा शिकायत निवारण समिति मृत व्यक्ति के चिकित्सा उपचार संबंधी दस्तावेजों की जाँच कर शिकायत प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर समुचित निर्णय लेगी। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन तथा शिकायत निवारण समिति को तकनीकी जटिलताओं को छोड़कर इस प्रकार कार्य करना चाहिए जिससे कोविड-19 से हुई मृत्यु के कारण प्रभावित परिवार को अनुग्रह सहायता राशि सुगमता से प्राप्त हो सके।
    पहले से जारी मृत्यु प्रमाण-पत्र के मामले में यदि मृतक के परिवार का कोई भी सदस्य मृत्यु प्रमाण-पत्र में उल्लेखित मृत्यु के कारण से व्यथित है, वह मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने वाले और, या पंजीकरण प्राधिकारी से संपर्क करेगा तथा जॉच एवं चिकित्सा उपचार संबंधी आवश्यक दस्तावेजों के परीक्षण के उपरांत सक्षम, पंजीकरण अधिकारी मृत्यु प्रमाण-पत्र को संशोधित करेगा। यदि परिवार का सदस्य पंजीकरण प्राधिकारी के आदेश से व्यथित हो, तब वह शिकायत निवारण समिति के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करेगा। संबंधित प्रकरण में शिकायत निवारण समिति द्वारा दिए गए निर्देश के अनुरूप मृत्यु प्रमाण-पत्र को संशोधित करेगा।
    कलेक्टरों को जारी निर्देश में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के 4 अक्टूबर 2021 के निर्णय के अनुक्रम में भारत सरकार, गृह मंत्रालय (आपदा प्रबंधन प्रभाग) तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देश, परिपत्र के अनुक्रम में प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल आर्थिक अनुदान सहायता देने हेतु समुचित कार्यवाही शीघ्र किया जाना सुनिश्चित करें।

     

    धमतरी जनपद के सीईओ और दो गौठानों के नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

    सारंगपुरी व देवपुर गौठान में नियमित रूप से गोबर खरीदी न होने का मामला

    भटगांव गौठान की महिलाएं लेमनग्रास से तैयार कर रही हैं आयल


    रायपुर/शौर्यपथ/ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में सर्वाधिक लोकप्रिय सुराजी गांव योजना के अंतर्गत संचालित नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी कार्यक्रम की हकीकत जानने मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों का लगातार जिलों में दौरा जारी है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने आज धमतरी जिले के भटगांव, सारंगपुरी एवं देवपुर गौठानों का निरीक्षण कर वहां समूह की महिलाओं से चर्चा की और उनके द्वारा संचालित आयमूलक गतिविधियांे का जायजा लिया। सारंगपुरी और देवपुर में गोबर की नियमित खरीदी न होने तथा गौठान की गतिविधियों के सुचारू संचालन में बरती जा रही उदासीनता को लेकर विशेष सचिव ने नाराजगी जताई और जनपद पंचायत धमतरी के सीईओ श्री अमित दूबे और सारंगपुरी व देवपुर गौठान के नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
    डॉ. एस. भारतीदासन ने भटगांव गौठान से जुड़ी समूह की महिलाओं को अधिक से अधिक वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन और विक्रय कर स्वावलम्बी बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भटगांव में महिला समूह के द्वारा लेमनग्रास की खेती और उससे ऑयल और अन्य उत्पादों बनाने की गतिविधियों का मुआयना किया और इसकी सराहना की। भटगांव गौठान परिसर में वर्किंग शेड बनाने प्रत्येक ब्लॉक के दो-दो गौठान में वर्किंग शेड स्थापित करने के निर्देश दिए। गोठान में गोबर खरीदी एवं उससे समूह को अर्जित आय की भी जानकारी ली। समूह की महिलाओं से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी आयमूलक गतिविधियों जितना अधिक विस्तार देेंगी और विविध उत्पाद तैयार करेंगी, समूह को उतना ज्यादा आर्थिक लाभ होगा। इस मौके पर उन्हांेने वहां पांच एकड़ क्षेत्र में की जा रही लेमनग्रास, एलोवेरा, फूल सहित विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती का भी अवलोकन किया। कलेक्टर ने बताया कि यहां लेमनग्रास ऑयल की प्रोसेसिंग यूनिट तीन लाख रूपए लागत से स्थापित की गई है, अब तक लगभग 25 लीटर ऑयल निकाला गया है। उन्होंने बताया कि लेमनग्रास ऑयल का बाजार मूल्य 1200 रूपए प्रतिलीटर है।
    डॉ. भारतीदासन ने सारंगपुरी और देवपुर गौठान में प्रतिदिन गोबर की खरीदी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान कलेक्टर श्री पी.एस. एल्मा एवं जिला पंचायत की सी.ई.ओ. श्रीमती प्रियंका महोबिया एवं संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

    रायपुर/शौर्यपथ/ जंगली हाथियों से हुई फसल क्षति के कारण जशपुर वनमंडल के कांसाबेल वन परिक्षेत्र अंतर्गत विगत दिनों 12 प्रकरण दर्ज किए गए है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा फसल क्षति के मूल्यांकन के पश्चात् शीघ्र क्षति पूर्ति की राशि के भुगतान की कार्रवाई की जाएगी।
    इस संबंध में वन मंडलाधिकारी जशपुर से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार दोकड़ा वृत्त परिसर चोंगरीबहार तथा दोकड़ा परिसर क्षेत्र में वन्यप्राणी तीन जंगली हाथी विचरण कर रहे हैं, हाथियों की सुरक्षा हेतु वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा प्रभावित ग्राम दोकड़ा, देवरी, कारंगाबहला, कटंगखार, चोंगरीबहार में मुनादी करवाकर जंगल में न जाने हेतु प्रचार-प्रसार कर ग्रामीणों को समझाईश दी जा रही है। रात को वन अमले के द्वारा गश्त की जा रही है तथा गश्ति दल के द्वारा लगातार जंगली हाथियों पर नजर रखी जा रही है। 26 सितंबर 2021 को फसल क्षति के 07 प्रकरण तथा 27 सितंबर 2021 को फसल क्षति के 05 प्रकरण दर्ज किया गया है। फसल क्षति का मूल्यांकन की कार्यवाही की जा रही है, मूल्यांकन प्रतिवेदन प्राप्त होते ही भुगतान की कार्यवाही की जा रही है।

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