August 07, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    नई दिल्ली/कोलकाता।
    प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रहा कानूनी टकराव अब देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच चुका है। 14 और 15 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने इस विवाद को संवैधानिक, प्रशासनिक और राजनीतिक संकट के रूप में स्थापित कर दिया है।


    कलकत्ता हाई कोर्ट: TMC की याचिका खारिज, ED ने लगाए गंभीर आरोप

    14 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में मांग की गई थी कि I-PAC कार्यालय पर छापेमारी के दौरान जब्त किए गए पार्टी के संवेदनशील चुनावी डेटा को सुरक्षित रखा जाए।

    हालांकि, ED के वकील ने अदालत को स्पष्ट किया कि छापेमारी के दौरान कोई भी डेटा या दस्तावेज जब्त नहीं किया गया। इस बयान के बाद न्यायमूर्ति सुभ्रा घोष ने TMC की याचिका को निपटा दिया।

    इसी सुनवाई के दौरान ED ने अभूतपूर्व और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोयला तस्करी मामले की जांच के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं I-PAC कार्यालय पहुंचीं और जांच से जुड़े अहम सबूत—एक लैपटॉप और एक ‘हरा फोल्डर’—अपने साथ ले गईं।

    ED ने इसे जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताते हुए मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की। लेकिन, चूंकि इसी विषय पर ED पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी थी, इसलिए हाई कोर्ट ने अपनी कार्यवाही स्थगित कर दी।


    सुप्रीम कोर्ट: FIR पर रोक, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

    15 जनवरी 2026 को मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आया। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले को “अत्यंत गंभीर” करार दिया।

    शीर्ष अदालत ने—

    • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी,

    • पश्चिम बंगाल सरकार,

    • पुलिस महानिदेशक (DGP) और

    • कोलकाता पुलिस कमिश्नर

    को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

    साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR पर तत्काल अंतरिम रोक लगा दी और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक ED अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

    कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि 8 जनवरी 2026 को I-PAC कार्यालय और उसके आसपास की सभी CCTV फुटेज व इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।


    अदालत की कड़ी टिप्पणियाँ

    सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि—

    “केंद्रीय जांच एजेंसियों के काम में राज्य एजेंसियों का हस्तक्षेप अराजकता (lawlessness) की स्थिति पैदा कर सकता है।”

    ED की ओर से अदालत में कहा गया कि यह मामला केवल ‘दखल’ का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई ‘चोरी’ और ‘डकैती’ का है, क्योंकि वह सशस्त्र पुलिस बल के साथ जांच में बाधा डालने पहुंचीं।

    वहीं, मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ममता बनर्जी वहां पार्टी के गोपनीय और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए गई थीं और ED की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण व राजनीतिक रूप से प्रेरित है।


    अब क्या तय करेगा सुप्रीम कोर्ट?

    सुप्रीम कोर्ट अब इस मूल प्रश्न पर विचार करेगा कि—

    • क्या किसी मुख्यमंत्री का छापेमारी स्थल पर पहुंचना,

    • और वहां से कथित रूप से दस्तावेज ले जाना,
      कानूनी रूप से “जांच में बाधा” और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है या नहीं।

    मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।


    राजनीतिक और संवैधानिक मायने

    यह मामला केवल कानून तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह केंद्र बनाम राज्य, संवैधानिक मर्यादा, और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाली सुनवाई देश की राजनीति और संघीय ढांचे के लिए दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

    27% ओबीसी आरक्षण सहित 28 सूत्रीय मांगों पर ओबीसी महासभा जिला इकाई दुर्ग का ज्ञापन

    दुर्ग/पाटन।
    अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ओबीसी महासभा जिला इकाई दुर्ग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

    यह ज्ञापन प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी महासभा श्री राधेश्याम साहू के निर्देशानुसार, माननीय तहसीलदार महोदय पाटन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन में छत्तीसगढ़ राज्य में लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करने सहित कुल 28 बिंदुओं पर आधारित मांगें रखी गईं।


    जनकल्याणकारी योजनाओं में समानुपातिक हिस्सेदारी की मांग

    ज्ञापन में यह प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग को केंद्र एवं राज्य शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं में उनकी जनसंख्या के अनुपात में समुचित हिस्सेदारी प्रदान की जाए, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा को साकार किया जा सके।


    इनके नाम रहा संबोधित ज्ञापन

    ज्ञापन की प्रतिलिपि—

    • माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार,

    • माननीय गृह मंत्री भारत सरकार,

    • माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, तथा

    • महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़

    के नाम भी प्रेषित की गई है।


    कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित

    इस अवसर पर ओबीसी महासभा जिला दुर्ग के जिलाध्यक्ष श्री भानु प्रताप यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे, जिनमें—

    अधिवक्ता रेखराम साहू, ओमप्रकाश यादव, हीरालाल, राहुल यादव, दीपक कुमार यादव, पीताम्बर साहू, योगेश कुमार, चोवाराम, विजय मेश्राम, रमन साहू, शिवकुमार सोनवानी, नंदू वर्मा, सुरेश सिंगोर, वागेस वासा, शंकर, इंदा, हिमांशी नायक सहित अन्य कार्यकर्ता एवं समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


    ओबीसी समाज के अधिकारों को लेकर सतत संघर्ष

    जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने कहा कि ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा एवं उन्हें उनका वास्तविक हक दिलाने के लिए महासभा का संघर्ष निरंतर और संगठित रूप से जारी रहेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शासन स्तर पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

    बालोद / शौर्यपथ /
    जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की तत्परता एवं मुश्तैदी से गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम कचांदुर में प्रस्तावित बाल विवाह को समय रहते रोक लिया गया।

    इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री समीर पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार 12 जनवरी को ग्राम कचांदुर में बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही विभागीय टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए वर विशाल पिता राजकुमार के निवास स्थल पर पहुँचकर आवश्यक हस्तक्षेप किया गया। मौके पर उपस्थित राजकुमार एवं उनके परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराते हुए समझाइश दी गई।

    समझाइश के उपरांत नाबालिक युवक राजकुमार (उम्र 19 वर्ष) एवं उनके माता-पिता द्वारा अपनी त्रुटि स्वीकार की गई तथा युवक की 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात ही विवाह करने की सहमति व्यक्त की गई।

    जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री पाण्डेय ने बताया कि इस कार्रवाई के माध्यम से जिले में बाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित की गई है। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच, उप सरपंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी में नियमानुसार पंचनामा भी तैयार किया गया

    महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में बाल विवाह रोकने हेतु सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई का कार्य निरंतर जारी है।

    बालोद / शौर्यपथ /
    बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डी स्थित धान खरीदी केन्द्र में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य सुव्यवस्थित एवं सुचारू रूप से जारी है। अब तक 1266 किसानों द्वारा कुल 53 हजार 144 क्विंटल 80 किलोग्राम धान की बिक्री की जा चुकी है, जिसके एवज में किसानों को 13 करोड़ 58 लाख 33 हजार रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है।

    धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है। निर्धारित अवधि के भीतर धान बिक्री से शेष रह गए किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं

    इस संबंध में नोडल अधिकारी एवं जनपद पंचायत डौण्डी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री डीडी मण्डले ने जानकारी देते हुए बताया कि धान खरीदी केन्द्र डौण्डी के अंतर्गत शामिल गांवों के 907 किसानों द्वारा 315.48 हेक्टेयर क्षेत्रफल का रकबा समर्पित किया गया है। उन्होंने बताया कि शेष कृषकों के धान की खरीदी सुनिश्चित करने के साथ-साथ अवैध धान की आवक रोकने हेतु भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं

    धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और सुचारू संचालन बनाए रखने के लिए राजस्व, खाद्य एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों, साथ ही गठित निगरानी दल द्वारा धान खरीदी कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।

    पार्षद नदारद, बदबूदार व कीड़ेयुक्त पानी पीने को मजबूर जनता अब निगम प्रशासन के दर पर

    दुर्ग | विशेष रिपोर्ट

    लोकतंत्र में आम जनता और प्रशासन के बीच सेतु माने जाने वाले जनप्रतिनिधि जब नदारद हो जाएं, तब समस्याएं केवल बढ़ती नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेती हैं।

    कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों दुर्ग नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 28 का है, जहां की जनता बदबूदार, कीड़ेयुक्त और अस्वच्छ पानी पीने को मजबूर है।

    नल से निकल रहा बदबूदार पानी, उबलाकर पीने को मजबूर लोग

    वार्ड नंबर 28 में पिछले कई दिनों से नलों से ऐसा पानी आ रहा है जिसमें—

    तेज दुर्गंध है

    कीड़े और गंदगी दिखाई दे रही है

    जिसे सीधे पीना तो दूर, उपयोग में लाना भी खतरे से खाली नहीं

    वार्डवासियों का कहना है कि मजबूरी में पानी को उबालकर, छानकर और अगले दिन इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक भी है।

    पार्षद नदारद, जनता असहाय

    इस गंभीर समस्या के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि— वार्ड की पार्षद आखिर कहां हैं?

    वार्ड नंबर 28 की निर्वाचित पार्षद श्रीमती ममता राकेश सेन (भाजपा) हैं।

    हालांकि उनका शासकीय निवास वार्ड में दर्ज है, लेकिन वर्तमान में वे वार्ड में नियमित रूप से निवास नहीं करतीं, जिससे आम जनता का उनसे संपर्क लगभग असंभव हो गया है।

    वार्डवासियों का कहना है कि—

    पार्षद वार्ड में दिखाई नहीं देतीं

    शिकायत करने पर या तो पुराना बस स्टैंड स्थित कार्यालय जाने को कहा जाता है

    या फिर अनिश्चित प्रतीक्षा ही एकमात्र विकल्प रह जाता है

    जनप्रतिनिधि की अनुपस्थिति, जनता को सीधे प्रशासन के भरोसे छोड़ा

    स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि—

    “जब पार्षद उपलब्ध नहीं हैं, तो अब हम सीधे निगम प्रशासन के पास ही जाएंगे।”

    यह कथन केवल आक्रोश नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की निष्क्रियता पर जनता का अविश्वास दर्शाता है।

    सोशल मीडिया में उठा मामला, जल विभाग सक्रिय लेकिन…

    सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद जल विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन अब तक—

    वार्ड में स्थायी समाधान नहीं हुआ

    पार्षद की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई

    यही कारण है कि वार्डवासियों की चिंता और बढ़ती जा रही है।

    स्वास्थ्य संकट की आहट, प्रशासन की परीक्षा

    यह मामला केवल पानी की आपूर्ति का नहीं, बल्कि—

    जनस्वास्थ्य

    लोकतांत्रिक जवाबदेही

    और जनप्रतिनिधि की भूमिका का है

    यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो वार्ड में जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी इंकार नहीं किया जा सकता।

    अब सवाल सीधे प्रशासन से

    क्या जल विभाग तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करेगा?

    क्या वार्ड की जनता को अभी भी बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ेगा?

    और सबसे अहम—

    क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता की पीड़ा के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?

    निष्कर्ष

    वार्ड नंबर 28 की यह स्थिति नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों के लिए चेतावनी है।

    जनता ने वोट देकर प्रतिनिधि चुना है, अनुपस्थिति और मौन देखने के लिए नहीं।

    अब देखना यह है कि— प्रशासन समय पर हस्तक्षेप करता है या नहीं,

    और जनप्रतिनिधि जनता के बीच लौटते हैं या नहीं।

    लेख - शरद पंसारी (संपादक - शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र )

    रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर में नक्सलवाद उन्मूलन और विकास की दिशा में पिछले दो वर्षों में ऐतिहासिक काम किए हैं। यह केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं है, बल्कि यह “विश्वास, विकास और सुरक्षा” के त्रिकोणीय मॉडल का प्रतीक है, जिसने बस्तर को अबूझमाड़ और दुर्गम इलाकों में भी बदलाव की मिसाल बनाने में सक्षम किया है।


    नक्सल समस्या में उल्लेखनीय कमी: निर्णायक चरण की ओर

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि नक्सलवाद उन्मूलन अब निर्णायक चरण में है और मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है।

    • सुरक्षा शिविरों का विस्तार: दिसंबर 2023 से अब तक 65 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति मजबूत हुई।

    • नक्सली नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई: प्रमुख माओवादी विचारकों और कमांडरों को निष्क्रिय कर उनके नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर किया गया।

    • सटीक आंकड़े:

      • आत्मसमर्पण: 2,386+ नक्सली

      • गिरफ्तार: 1,901+ नक्सली

      • निष्क्रिय/मारे गए: 505+ नक्सली

    इन कदमों से नक्सलियों की कमांड और नियंत्रण प्रणाली टूट चुकी है और स्थानीय लोग अब खुले तौर पर सरकारी पहलों का समर्थन कर रहे हैं।


    सुरक्षा और सामरिक रणनीति: कोर एरिया में प्रभावी नियंत्रण

    सरकार ने नक्सलियों के “कोर एरिया” (अबूझमाड़ और घोर जंगली इलाके) में सक्रिय रूप से अभियान चलाकर उनके गढ़ों को निशाना बनाया।

    • फॉरवर्ड लिंक कैंप: पिछले दो वर्षों में 50+ नए कैंप स्थापित, जिन्हें विकास केंद्र के रूप में विकसित किया गया।

    • इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन: अब मुठभेड़ें केवल गश्त पर नहीं होतीं, बल्कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष ऑपरेशन किए जाते हैं।

    • आधुनिक हथियार और तकनीक: ड्रोन, एन्टी-माइन वाहन, और अत्याधुनिक संचार उपकरणों से जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई, हताहत दर में भारी कमी आई।

    इन रणनीतियों के परिणामस्वरूप नक्सलियों के बीच भय और अविश्वास का माहौल उत्पन्न हुआ और कई कमांडर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए।


    ‘नियद नेल्लानार’ योजना: विकास का मॉडल और सामाजिक सशक्तिकरण

    मुख्यमंत्री की प्रमुख पहल ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना ने सुरक्षा शिविरों के आसपास के गांवों में शत-प्रतिशत विकास की दिशा में काम किया।

    • सुविधाओं का विस्तार: राशन दुकान, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेल का मैदान, मुफ्त बिजली, पक्के आवास, स्वास्थ्य क्लिनिक और 25+ बुनियादी सुविधाओं का वितरण।

    • शिक्षा और स्वास्थ्य: बंद 300+ स्कूलों को पुनः खोला गया, और ‘छू लो आसमान’ जैसी कोचिंग संस्थाओं के माध्यम से IIT/NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध।

    • स्थानीय सहभागिता: ग्रामीण अब स्वयं सुरक्षा शिविरों की मांग करने लगे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विकास और सुरक्षा का मॉडल सफल हुआ है।


    आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार: बस्तर की अर्थव्यवस्था में नवजीवन

    बस्तर को केवल सुरक्षा के मोर्चे तक सीमित नहीं रखा गया; सरकार ने इसे स्थानीय उद्यमिता, वनोपज और पर्यटन से जोड़ा।

    • वनोपज आधारित समर्थन: इमली, महुआ, कोसा वनोपजों का MSP बढ़ाया गया और बिचौलियों को खत्म किया गया।

    • स्थानीय रोजगार: ‘बस्तर कैफे’ ब्रांड और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिला।

    • पर्यटन और इको-टूरिज्म: ‘बस्तर पांडुम’, ‘बस्तर ओलंपिक’ और सुरक्षित पर्यटन स्थलों से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा।

    • कौशल विकास: आत्मसमर्पित नक्सलियों और युवाओं को ट्रैक्टर रिपेयरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, सोलर पंप तकनीशियन और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान।


    मुख्यधारा में वापसी और लोकतंत्र में विश्वास

    • भरोसे का संकेत: 2025 में ‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत 2,000+ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कई अब ‘बस्तर फाइटर्स’ के रूप में पुलिस और प्रशासन की मदद कर रहे हैं।

    • राजनीतिक भागीदारी: ग्राम सभाओं और स्थानीय चुनावों में मतदान प्रतिशत में वृद्धि, जो लोकतंत्र में विश्वास की बढ़ती दर को दर्शाती है।


    ढांचागत क्रांति: कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में सुधार

    • सड़कों और पुलों का निर्माण: इंद्रावती नदी पर नए पुल और ग्रामीण सड़कों का निर्माण, जिससे मानसून के दौरान भी बस्तर का संपर्क टूटने का खतरा नहीं।

    • स्वास्थ्य सेवाएं: ‘हाट बाजार क्लिनिक’ योजना के तहत जंगलों और दुर्गम इलाकों में डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध।

    • शिक्षा और कौशल: बच्चों के लिए गुणवत्ता शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मार्गदर्शन।


    निष्कर्ष: गोली का जवाब गोली से, विकास का रास्ता हर दरवाजे तक

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में दो वर्षों में सुरक्षा, विकास और विश्वास का त्रिकोणीय मॉडल सफल हुआ है। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और विकास की मुख्यधारा के प्रति स्थानीय लोगों के विश्वास ने बस्तर को 'लाल आतंक' से मुक्त कर 'हरी-भरी संस्कृति और तेजी से बढ़ते विकास' की पहचान दिलाई है।

    मार्च 2026 तक बस्तर को पूर्ण नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य अब within reach है, और यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनकी सरकार ने बस्तर को न केवल सुरक्षित, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

     

    नई दिल्ली / : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने जा रही है। वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। चुनाव की औपचारिक घोषणा अगले दिन, 20 जनवरी, को की जाएगी।

    नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रस्तावक के रूप में मौजूद रहेंगे। नितिन नबीन वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं और बिहार की बांकेपुर सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं। 46 वर्ष की आयु में वे भाजपा के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे।

    भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन हेतु किसी भी व्यक्ति के पास कम से कम 15 वर्षों की सदस्यता और 12 वर्षों का सक्रिय कार्यकाल होना आवश्यक है। इसके अलावा, नामांकन के लिए कम से कम 5 राज्यों की प्रदेश परिषदों के 20 सदस्यों का संयुक्त प्रस्तावक होना अनिवार्य है।

    वर्तमान में नितिन नबीन सबसे प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पूर्व में वरिष्ठ नेताओं धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र यादव के नाम चर्चा में रहे थे, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद अन्य दावेदारों द्वारा नामांकन की संभावना कम है।

    इस चुनाव में छत्तीसगढ़ की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश इकाइयों की सक्रिय भागीदारी होती है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव 19 जनवरी को दिल्ली में होने वाली नामांकन प्रक्रिया में उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी रहे हैं और उनके कार्यकाल में भाजपा ने राज्य में सत्ता वापसी की थी। उनके अध्यक्ष बनने से राज्य भाजपा में उत्साह देखा जा रहा है।

    चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ को नया प्रदेश प्रभारी मिलने की संभावना है, क्योंकि नितिन नबीन अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे।

    कांकेर | नरहरपुर | 

    छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक अंतर्गत बागाबारी गांव से मानव तस्करी का एक गंभीर और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। इस घटना में गांव के ही एक व्यक्ति ने विश्वासघात करते हुए दो महिलाओं और एक 11 वर्षीय बच्ची को धोखे से राजस्थान ले जाकर बेच दिया।

    काम का झांसा, फिर तस्करी

    प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी ने पीड़ित महिलाओं और बच्ची को काम दिलाने के बहाने अपने साथ राजस्थान ले गया। भरोसे और जान-पहचान का फायदा उठाकर आरोपी ने उन्हें मानव तस्करी के जाल में फंसा दिया और वहां बेच दिया।

    परिजनों की सतर्कता से खुला मामला

    जब लंबे समय तक पीड़ितों से संपर्क नहीं हो सका, तब परिजनों और ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद नरहरपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांकेर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक विशेष टीम राजस्थान रवाना की।

    राजस्थान से सुरक्षित रेस्क्यू

    छत्तीसगढ़ पुलिस ने राजस्थान पुलिस के सहयोग से दोनों महिलाओं और नाबालिग बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। सभी को सकुशल कांकेर लाया गया है, जहां उनका चिकित्सकीय परीक्षण और काउंसलिंग कराई जा रही है।

    मुख्य आरोपी गिरफ्तार

    इस मामले में शामिल मुख्य आरोपी (पीड़ोसी) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि —

    • क्या इस तस्करी के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है

    • क्या पहले भी ग्रामीण इलाकों से महिलाओं और बच्चों की तस्करी की गई है

    • राजस्थान में किन लोगों को पीड़ितों को सौंपा गया था

    कानूनी धाराएं और आगे की कार्रवाई

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मानव तस्करी, धोखाधड़ी और नाबालिग के अपहरण से संबंधित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

    ग्रामीण इलाकों के लिए चेतावनी

    यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में परिचितों पर आंख मूंदकर भरोसा न करने और रोजगार के नाम पर बाहर ले जाने वालों की सघन जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

    आजीवन कानूनी छूट, मतदाता सूची और नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल**

    नई दिल्ली | 

    भारतीय लोकतंत्र की निष्पक्षता की प्रहरी मानी जाने वाली संस्था भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक साथ कई अहम संवैधानिक सवालों पर सुनवाई चल रही है। जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में हुई सुनवाइयों ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, जवाबदेही और निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    चुनाव आयुक्तों को ‘आजीवन कानूनी छूट’ पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

    12–13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों को दी गई आजीवन कानूनी छूट (Immunity) पर जवाब मांगा है।
    याचिका में CEC एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें) अधिनियम 2023 की धारा 16 को चुनौती दी गई है, जिसके तहत आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान किए गए फैसलों के लिए सिविल और आपराधिक कार्रवाई से सुरक्षा दी गई है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रावधान संविधान के समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) और जवाबदेही के सिद्धांत के खिलाफ है।
    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस धारा पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन इसकी संवैधानिक वैधता की गहन समीक्षा करने पर सहमति जताई है।

    मतदाता सूची और नागरिकता जांच पर गंभीर सवाल

    13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सहित अन्य राज्यों में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)’ के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों पर सुनवाई की।
    कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्ट पूछा कि —

    “क्या कोई निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय से पहले ही किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह के आधार पर उसका नाम मतदाता सूची से हटा सकता है?”

    कोर्ट ने संकेत दिया कि मताधिकार एक संवैधानिक अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक जल्दबाजी लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है।

    नियुक्ति प्रक्रिया पर भी न्यायिक जांच

    सुप्रीम कोर्ट उस 2023 के कानून की भी समीक्षा कर रहा है, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है।

    याचिकाकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना है कि इससे निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता कमजोर हो सकती है और कार्यपालिका का प्रभाव बढ़ सकता है।

    मार्च 2023 का ऐतिहासिक फैसला फिर चर्चा में

    गौरतलब है कि मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक संसद कानून न बनाए, तब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति
    प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश की समिति द्वारा की जाए।
    बाद में केंद्र सरकार ने कानून बनाकर CJI को इस समिति से बाहर कर दिया, जिसे अब फिर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

    लोकतंत्र के भविष्य से जुड़ा मामला

    विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह सुनवाई केवल कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और चुनावी निष्पक्षता के भविष्य से जुड़ा अहम पड़ाव है।

    नई दिल्ली | 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 13 जनवरी 2026 का दिन राजनयिक गतिविधियों, राष्ट्रनिर्माण से जुड़े संवाद और सांस्कृतिक उत्सवों के संदेशों से भरपूर रहा। इस दिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से लेकर युवाओं के सशक्तिकरण और भारतीय परंपराओं के उत्सव तक कई अहम कार्यक्रमों में सहभागिता की।

    फ्रांस के राष्ट्रपति के सलाहकार से अहम मुलाकात

    प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में फ्रांस के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार मिस्टर इमैनुएल बोने से मुलाकात की। इस दौरान भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक मुद्दों और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक दोनों देशों के बीच गहरे होते कूटनीतिक संबंधों का संकेत मानी जा रही है।

    लोहड़ी पर देशवासियों को शुभकामनाएं

    प्रधानमंत्री ने लोहड़ी के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए समृद्धि, खुशहाली और एकता का संदेश दिया। उन्होंने इस पर्व को कृषि, प्रकृति और सामूहिक उत्सव का प्रतीक बताया।

    ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में युवाओं को संदेश

    पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में दिए गए अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं। उन्होंने युवाओं को विकसित भारत के संकल्प में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्रसेवा पर जोर दिया।

    संस्कृत सुभाषित से प्रेरणा

    प्रधानमंत्री ने नागरिकों को उच्च उद्देश्यों के लिए प्रेरित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें आत्मविश्वास, परिश्रम और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने का संदेश निहित था।

    भारत–जर्मनी संबंधों में नई ऊर्जा

    इसी दिन जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का समापन हुआ। इससे पहले 12 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ ने अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित पतंग उत्सव में भाग लिया था। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई, जिसमें व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को लेकर सहमति बनी।


    समग्र संदेश

    13 जनवरी का दिन प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कार्यशैली को दर्शाता है, जहां एक ओर वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को सशक्त किया गया, वहीं दूसरी ओर युवाओं, संस्कृति और परंपराओं को भी समान महत्व दिया गया।

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