August 03, 2026
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    नल से कीड़े, पार्षद से दूरी: वार्ड 28 में जल संकट बना स्वास्थ्य खतरा Featured

    • rounak group

    पार्षद नदारद, बदबूदार व कीड़ेयुक्त पानी पीने को मजबूर जनता अब निगम प्रशासन के दर पर

    दुर्ग | विशेष रिपोर्ट

    लोकतंत्र में आम जनता और प्रशासन के बीच सेतु माने जाने वाले जनप्रतिनिधि जब नदारद हो जाएं, तब समस्याएं केवल बढ़ती नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेती हैं।

    कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों दुर्ग नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 28 का है, जहां की जनता बदबूदार, कीड़ेयुक्त और अस्वच्छ पानी पीने को मजबूर है।

    नल से निकल रहा बदबूदार पानी, उबलाकर पीने को मजबूर लोग

    वार्ड नंबर 28 में पिछले कई दिनों से नलों से ऐसा पानी आ रहा है जिसमें—

    तेज दुर्गंध है

    कीड़े और गंदगी दिखाई दे रही है

    जिसे सीधे पीना तो दूर, उपयोग में लाना भी खतरे से खाली नहीं

    वार्डवासियों का कहना है कि मजबूरी में पानी को उबालकर, छानकर और अगले दिन इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक भी है।

    पार्षद नदारद, जनता असहाय

    इस गंभीर समस्या के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि— वार्ड की पार्षद आखिर कहां हैं?

    वार्ड नंबर 28 की निर्वाचित पार्षद श्रीमती ममता राकेश सेन (भाजपा) हैं।

    हालांकि उनका शासकीय निवास वार्ड में दर्ज है, लेकिन वर्तमान में वे वार्ड में नियमित रूप से निवास नहीं करतीं, जिससे आम जनता का उनसे संपर्क लगभग असंभव हो गया है।

    वार्डवासियों का कहना है कि—

    पार्षद वार्ड में दिखाई नहीं देतीं

    शिकायत करने पर या तो पुराना बस स्टैंड स्थित कार्यालय जाने को कहा जाता है

    या फिर अनिश्चित प्रतीक्षा ही एकमात्र विकल्प रह जाता है

    जनप्रतिनिधि की अनुपस्थिति, जनता को सीधे प्रशासन के भरोसे छोड़ा

    स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि—

    “जब पार्षद उपलब्ध नहीं हैं, तो अब हम सीधे निगम प्रशासन के पास ही जाएंगे।”

    यह कथन केवल आक्रोश नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की निष्क्रियता पर जनता का अविश्वास दर्शाता है।

    सोशल मीडिया में उठा मामला, जल विभाग सक्रिय लेकिन…

    सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद जल विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन अब तक—

    वार्ड में स्थायी समाधान नहीं हुआ

    पार्षद की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई

    यही कारण है कि वार्डवासियों की चिंता और बढ़ती जा रही है।

    स्वास्थ्य संकट की आहट, प्रशासन की परीक्षा

    यह मामला केवल पानी की आपूर्ति का नहीं, बल्कि—

    जनस्वास्थ्य

    लोकतांत्रिक जवाबदेही

    और जनप्रतिनिधि की भूमिका का है

    यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो वार्ड में जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी इंकार नहीं किया जा सकता।

    अब सवाल सीधे प्रशासन से

    क्या जल विभाग तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करेगा?

    क्या वार्ड की जनता को अभी भी बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ेगा?

    और सबसे अहम—

    क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता की पीड़ा के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?

    निष्कर्ष

    वार्ड नंबर 28 की यह स्थिति नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों के लिए चेतावनी है।

    जनता ने वोट देकर प्रतिनिधि चुना है, अनुपस्थिति और मौन देखने के लिए नहीं।

    अब देखना यह है कि— प्रशासन समय पर हस्तक्षेप करता है या नहीं,

    और जनप्रतिनिधि जनता के बीच लौटते हैं या नहीं।

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