August 12, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    "जनहित मुद्दों पर संवाद न मिलने से देवतुल्य कार्यकर्ता खिन्न, पत्र हुआ वायरल"

    दुर्ग/रायपुर। भाजपा के चिकित्सा प्रकोष्ठ के एक समूह ने छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी से जनहित के महत्वपूर्ण विषयों पर मिलने की कई बार कोशिश की, लेकिन मिलने का समय न मिलने पर वे व्यथित होकर एक नाराज़गीपूर्ण पत्र मंत्री को प्रेषित कर गए। इस घटना से जुड़ा हस्तलिखित पत्र और उसकी फोटो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हो रही हैं तथा भाजपा के आंतरिक समीकरणों पर सवाल खड़े कर रही है।

    घटना के विवरण के अनुसार, प्रकोष्ठ के डॉक्टर और पदाधिकारी मंत्री के दरबार/सीट के बाहर एक घंटे तक इंतजार करते रहे। निर्धारित समय पर मंत्री से मिलने की उम्मीद थी, किन्तु वे मिलने नहीं आए। मशवरे और प्रतीक्षा के बाद चिकित्सक नेताओं ने अपना पत्र मंत्री के कार्यालय के हस्ताक्षरित प्रतिनिधि के माध्यम से सौंप दिया। स्थानीय अखबार में प्रमुख सुर्खियों के साथ इस मामले का संक्षिप्त वर्णन भी प्रकाशित हुआ है।

    पत्र में डॉक्टरों ने अपनी नाराज़गी व अपमान का उल्लेख किया है और जताया है कि जनहित के मुद्दों पर मिलने के लिए कई बार आग्रह किया गया था पर समय नहीं मिला। हस्तलिखित पत्र में उपस्थित डॉक्टरों के नाम व हस्ताक्षर भी पाए जा सकते हैं — तस्वीरों में यह पत्र स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया मिश्रित है — जहाँ कुछ उपयोगकर्ता डॉक्टरों के रुख़ को जायज़ ठहरा रहे हैं और इसे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार का प्रमाण बता रहे हैं, वहीं कुछ अन्य टिप्पणियाँ इस मामले को राजनीतिकरण करार दे रही हैं। कुछ पोस्टों ने घटना को भावनात्मक रूप में दर्शाते हुए टिप्पणी की है — “दरबार में खड़े रह गए देवतुल्य” — जो व्यापक स्नेह व चिंता दोनों का संकेत देती है। कई संदेशों में यह भी चिंता व्यक्त की जा रही है कि संगठनात्मक अनुशासन के नाम पर शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आशंका बनी रहती है।

    घटना से स्थानीय राजनीतिक गलियारे में भी हलचल मची हुई है; चिकित्सा प्रकोष्ठ के कई पदाधिकारी और स्थानीय नेताओं ने कहा है कि इस तरह के मौकों पर पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याओं को प्राथमिकता से सुना जाना चाहिए, वरना स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ सकता है।

    इस खबर के प्रकाशन तक मंत्री ओ.पी. चौधरी या उनके कार्यालय की ओर से इस मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है। संपर्क का प्रयास या आधिकारिक टिप्पणी सामने आने पर घटना के आगे के पहलुओं और आशय का संपूर्ण ब्यौरा प्रकाशित किया जाएगा।

    दुर्ग। शौर्यपथ विशेष।
       छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने 15 से 16 सितम्बर तक गुजरात प्रवास कर शिक्षा और तकनीक से जुड़े मॉडल का गहन अध्ययन किया। इस दौरान अहमदाबाद स्थित भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG), पुंद्राशन प्राथमिक शाला, गांधीनगर स्थित विद्या समीक्षा केंद्र सहित अनेक स्थानों का निरीक्षण कर तकनीक-आधारित स्मार्ट क्लास, डिजिटल लर्निंग टूल्स और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने वाले नवाचारों का अवलोकन किया।

    तकनीक से बदलेगा शिक्षा का स्वरूप

    BISAG में शिक्षा और विज्ञान के नवीनतम नवाचारों का अवलोकन करते हुए मंत्री यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस प्रकार की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। तकनीक के माध्यम से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि दूरस्थ और दुर्गम अंचलों में रहने वाले विद्यार्थियों तक बेहतर शैक्षणिक सामग्री पहुँच सकेगी।

    गांधीनगर की पुंद्राशन प्राथमिक शाला में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लर्निंग पद्धतियों को देखकर उन्होंने कहा कि गुजरात का यह मॉडल निश्चित ही छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।

    विद्या समीक्षा केंद्र का अनुभव

    विद्या समीक्षा केंद्र के निरीक्षण के दौरान श्री यादव ने माना कि डाटा आधारित निगरानी और विश्लेषण शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाता है। शिक्षक उपस्थिति, कक्षाओं की नियमितता और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जो प्रणाली गुजरात ने अपनाई है, उसका लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिलेगा।

    शिक्षा मंत्रियों और बुद्धिजीवियों से विमर्श

    गुजरात प्रवास के दौरान उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. कुबेर भाई डिन्डोर और राज्य मंत्री श्री प्रफुल पांसेरिया से मुलाकात कर शिक्षा की गुणवत्ता सुधार और तकनीकी नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा प्रख्यात अभिनेता, लेखक और निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ‘चाणक्य’ से भी भेंट की और उन्हें छत्तीसगढ़ आमंत्रित किया।

    छत्तीसगढ़ लौटकर जनता के बीच

    गृह क्षेत्र लौटने के बाद मंत्री यादव ने आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं से भेंट की। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस पर ‘स्वच्छता सेवा पखवाड़ा’ अंतर्गत दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित रक्तदान शिविर में सहभागी होकर रक्तदान को जीवनदायी सेवा बताया।
    इसके साथ ही दुर्ग शक्तिनगर वार्ड 18 में आयोजित विश्वकर्मा जयंती समारोह में शामिल होकर भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की और जनवादी राज मिस्त्री मजदूर संघ के लिए व्यवस्थित भवन की घोषणा भी की।

    नई सोच, नया संकल्प

    मंत्री यादव ने स्पष्ट किया कि गुजरात प्रवास से मिले अनुभवों के आधार पर छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बढ़ाने की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। आधुनिक तकनीक से जुड़े सुधारात्मक कदमों से विद्यार्थी डिजिटल भविष्य की ओर अग्रसर होंगे और राज्य की शिक्षा व्यवस्था नए आयाम हासिल करेगी।

    दुर्ग।शौर्यपथ ख़ास रिपोर्ट
        दुर्ग नगर पालिक निगम क्षेत्र आज "स्मार्ट सिटी" नहीं बल्कि "गंदगी सिटी" की पहचान से जाना जाने लगा है। जनता ने बड़े भरोसे के साथ भाजपा प्रत्याशी अलका बाघमार को महापौर और निगम की कमान सौंपी थी, परंतु अब यही जनता गंदगी, कचरे और दुर्गंध से जूझ रही है।

    महापौर की पोस्टरबाज़ी बनाम जनता की नाराज़गी

       महापौर अलका बाघमार ने चुनाव से पहले स्वच्छ और व्यवस्थित दुर्ग का सपना दिखाया था। लेकिन सत्ता में आते ही उनका ध्यान जनता की समस्याओं से हटकर केवल पोस्टरबाज़ी और उत्सवों की राजनीति तक सिमट गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर "स्वच्छता सेवा पखवाड़ा" का आयोजन कर निगम शहर को स्वच्छ बताने की कोशिश कर रहा है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि हर गली और मोहल्ले में गंदगी और बदबू ने डेरा जमा लिया है। जनता पूछ रही है—"पोस्टर से पेट नहीं भरता और बदबू से जीना दूभर है, महापौर साहिबा ये कैसा सुशासन?"

    स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल: अनुभवहीनता का प्रतीक

      महापौर ने सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी निगम के स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल को सौंपी है। लेकिन अग्रवाल का प्रदर्शन शहर के लिए निराशाजनक और शर्मनाक रहा है। शहर के प्रमुख स्थानों—पुलिस अधीक्षक का बंगला, छात्रावास, गर्ल्स हॉस्टल और आम नागरिकों के ठहरने-बैठने वाले स्थानों तक—हर जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। नालियों से निकलती दुर्गंध और सड़कों पर बिखरे कचरे ने नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है। स्वास्थ्य प्रभारी की भूमिका केवल बैठकों और बातों तक सीमित रह गई है।
      जनता कह रही है कि अगर पहली बार विधायक बने और शिक्षा मंत्री का पद संभालते ही गजेंद्र यादव सक्रियता से शिक्षा विभाग में नई ऊर्जा ला सकते हैं, तो फिर पहली बार पार्षद बने नीलेश अग्रवाल सफाई व्यवस्था में ऐसा असफल क्यों साबित हो रहे हैं? इसका जवाब शायद निगम की राजनीति के गलियारों में छिपा है।

    मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की सोच को आईना

       प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार "सुशासन" और "स्वच्छ भारत" की बात करते हैं। लेकिन उनके ही नाम पर चुनी गई शहरी सरकार जब गंदगी और बदबू फैलाने में अव्वल साबित हो रही है, तो यह न केवल शहर की छवि धूमिल कर रहा है बल्कि प्रदेश और केंद्र सरकार की सोच को भी कटघरे में खड़ा कर रहा है।

    सामान्य सभा की अग्निपरीक्षा

       अब पूरा शहर इस बात पर नज़र गड़ाए बैठा है कि दुर्ग नगर निगम की आगामी सामान्य सभा में क्या जनप्रतिनिधि जनता के स्वास्थ्य और सफाई जैसे गंभीर मुद्दे पर सवाल उठाएंगे? या फिर मौन रहकर केवल सत्ता सुख का आनंद लेंगे?

    कटाक्ष :

    "शहर डूबा कचरे में, पोस्टरों में चमक रही सरकार!"
    "जनता मांगे सफाई, निगम दे रहा बदबू की कमाई!"
    "अलका बाघमार की निष्क्रियता और नीलेश अग्रवाल की अनुभवहीनता ने दुर्ग को बना दिया बदबूगंज!"

    बहुप्रतीक्षित मांग हुई पूरी 9 करोड़ 18 लाख की लागत से होगा निर्माण

    रायपुर / शौर्यपथ /

     

     मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी बड़ी सौगात, ईब नदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिल रही है। लंबे समय से लंबित मांग अब पूरी होती जा रही है। जशपुर जिले के फरसाबहार क्षेत्र के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने धौरासांड से दाईजबहार मार्ग पर ईब नदी पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण के लिए 9 करोड़ 18 लाख रुपए की प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की है। यह निर्माण कार्य निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात शीघ्र ही प्रारंभ किया जाएगा। पुल बन जाने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा और वर्षों बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हो रही।

    मिलेगी आवागमन की बड़ी सुविधा

          इस उच्च स्तरीय पुल के निर्माण के बाद फरसाबहार क्षेत्र के दाईजबहार, बरकशपाली, साजबहार, बामहनमारा, तपकरा से धौरासांड, खुटगांव, बनगांव, हेटघिंचा और तुबा जैसे गांवों की दूरी काफी कम हो जाएगी। ग्रामीणों को अब लंबी दूरी का आवागमन नहीं करना पड़ेगा, जिससे समय और संसाधनों की भी बचत होगी।

    ओडिशा और झारखंड राज्य से होगा सीधा संपर्क

         ईब नदी पर बनने वाला यह उच्च स्तरीय पुल केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। यह मार्ग छत्तीसगढ़ को सीधे ओडिशा और झारखंड राज्यों से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग बन जाएगा, इससे व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

    क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का जताया आभार

            फरसाबहार क्षेत्र के ग्रामीणों ने ईब नदी में पुल निर्माण की मंजूरी मिलने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह पुल न केवल उनके जीवन को आसान बनाएगा बल्कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

    रायपुर / शौर्यपथ /
      मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति के उत्थान के लिए लगातार उन्हें आर्थिक मदद दी जा रही है। इसी सिलसिले में आज विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने दीदी ई-रिक्शा चालक भुनेश्वरी साहू और मनोज साहू से संवाद किया।
      मुख्यमंत्री साय ने रेजा श्रमिक भुनेश्वरी उनकी जीवन यापन के संबंध में जब पूछा तो मोवा रायपुर निवासी भुनेश्वरी ने बताया कि वे पहले रेजा कुली के काम करती थी। इसी दौरान उन्हें दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के बारे में जानकारी मिली। अब वह ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण और बच्चों के परिवरिश ठीक से कर रही है। भुनेश्वरी ने बताया कि उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी चल रही है। उन्होंने सरकार की इस महती योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
      इसी प्रकार राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखंड के मनोज कुमार साहू ने मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए कहा कि मेरी दो बच्ची है। बड़ी बेटी भूमिका साहू कक्षा 10 वीं के टॉप 10 में अपना स्थान बनाया है। श्रम विभाग द्वारा संचालित योजना से मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना का लाभ मिल जिसके अंतर्गत 1 लाख रूपए एवं स्कूटी के लिए अलग से सहायता राशि मिली। इसके लिए मैं प्रदेश के मुखिया श्री विष्णु देव साय एवं श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन के प्रति हृदय से धन्यवाद प्रकट करता हूं।

    8370 विद्यार्थियों को 6.2 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति व भोजन सहायता राशि ऑनलाइन जारी

    रायपुर / शौर्यपथ /
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित सड्डू के प्रयास आवासीय विद्यालय में आदि सेवा पखवाड़ा का शुभारंभ  किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान जनजातीय गांवों के जमीनी बदलाव की दिशा में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश की 3 करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दी और उनके शतायु एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री मोतीलाल साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
      मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जनजातीय गांवों का ट्राइबल विजन डाक्यूमेंट 2030 तैयार किया जाएगा, जो दीर्घकालीन विकास का रोडमैप बनेगा। आगामी 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में इसका अनुमोदन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज मध्यप्रदेश के धार से इस अभियान का राष्ट्रव्यापी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान का उद्देश्य जनजातीय गांवों में नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। इसके तहत ऐसे वालंटियर चिन्हांकित किए जाएंगे जो गांव की बेहतरी के लिए विजन रखते हों और उसे जमीनी स्तर पर लागू कर सकें। देशभर में 20 लाख वालंटियर तैयार करने का लक्ष्य है, जिनमें से छत्तीसगढ़ के 6,650 गांवों में 1 लाख 33 हजार वालंटियर तैयार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार ने आदि सेवा केंद्रों की स्थापना भी की है, जहां ग्रामीण शासन की सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे और अपनी शिकायतें भी दर्ज कर सकेंगे।
      मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे देश की जनजातीय विरासत गौरवशाली रही है। राज्य सरकार शहीद वीरनारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे जनजातीय नायकों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रही है। नवा रायपुर में जनजातीय नायकों की स्मृतियों को सहेजने के लिए म्यूजियम का निर्माण किया जा रहा है। वहीं ट्राइबल म्यूजियम में छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा जनजातीय गांवों के लिए पीएम जनमन योजना तथा धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष ग्राम अभियान के अंतर्गत दिए गए बजट के अनुरूप तेजी से कार्य हो रहा है। जिन क्षेत्रों तक विकास की गति अभी पूर्ण रूप से नहीं पहुँची है, वहाँ अब आदि कर्मयोगी अभियान के माध्यम से प्रत्येक घर तक विकास पहुँचाया जाएगा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
      आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि का परिणाम है। इसके माध्यम से देश के 11 करोड़ से अधिक आदिवासियों के विकास को नई दिशा और गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में लोकप्रिय नेता और नए भारत के निर्माता प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रयास से ही 2047 तक विकसित भारत का संकल्प अवश्य पूरा होगा। हमारी सरकार सेवा, समर्पण और मिशन मोड पर आदि कर्मयोगी अभियान को आगे बढ़ा रही है। रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी सबका साथ-सबका विकास के सिद्धांत पर कार्य कर रहे हैं और आदि कर्मयोगी अभियान से जनजातीय समाज का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।
      आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणी बोरा ने विभागीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रदेश के 6,650 गांवों में 1 लाख 33 हजार आदि साथी व आदि सहयोगी तैयार किए जा रहे हैं। ये सहयोगी आदिवासी परिवारों से उनकी भाषा में संवाद कर उनकी समस्याओं व अपेक्षाओं को समझेंगे और विकास की दिशा तय करने में सहभागी बनेंगे। उन्होंने कहा कि आगामी राज्योत्सव तक 50 हजार आदि कर्मयोगी तैयार करने का लक्ष्य है। साथ ही, शिष्यवृत्ति प्रदाय की समय-सीमा तय कर दी गई है ताकि विद्यार्थियों को राशि समय पर उनके खातों में प्राप्त हो सके।

    शिष्यवृत्ति और भोजन सहायता के तहत 6.2 करोड़ की राशि अंतरित

       मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आदि सेवा पखवाड़ा के शुभारंभ अवसर पर आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास तथा पिछड़ा वर्ग विभाग की योजनाओं के तहत प्रदेश के आश्रम-छात्रावासों में निवासरत 8,370 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं भोजन सहायता योजना की राशि 6 करोड़ 2 लाख 19 हजार 270 रुपये का ऑनलाइन अंतरण उनके खातों में किया।

    एक पेड़ मां के नाम 2.0 के तहत पौधरोपण

       मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रयास आदर्श आवासीय विद्यालय परिसर में एक पेड़ मां के नाम 2.0 के अंतर्गत जामुन का पौधा रोपा। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने पेंटिंग व रंगोली प्रदर्शित की, जिनका मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया और बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को उनके चित्र की पेंटिंग भेंट की।

    मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों के साथ किया भोजन

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रयास आवासीय विद्यालय सड्डू में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के छात्र किशन बैगा और छात्रा अंजुला बैगा को अपने बगल में बैठाकर विद्यार्थियों के साथ भोजन किया। मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ मुनगा की सब्जी, पूड़ी और दाल-भात का स्वाद लेते हुए उनसे आत्मीय बातचीत की। किशन ने बताया कि वह मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के लाखनटोला गांव का निवासी है और प्रयास विद्यालय सड्डू में कक्षा 11वीं में अध्ययनरत है। मुख्यमंत्री ने उससे गांव में प्रधानमंत्री जनमन योजना के कार्यों के बारे में पूछा। कक्षा 12वीं की छात्रा अंजुला ने बताया कि वह देवगढ़ गांव (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) की रहने वाली है और जीव विज्ञान विषय लेकर पढ़ाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने दोनों को मन लगाकर पढ़ाई करने की प्रेरणा दी और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।


    ?️ यह समाचार शौर्यपथ दैनिक समाचार एवं
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    ✍️ सम्पादक: शरद पंसारी    
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    रायपुर / शौर्यपथ।
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा जयंती की पूजा-अर्चना की।

    इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े तथा छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा भी उपस्थित रहीं।

    मुख्यमंत्री साय ने भगवान विश्वकर्मा को संसार का प्रथम वास्तुकार एवं सृजन-निर्माण का देवता बताते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा—

    “छत्तीसगढ़ के श्रमवीर प्रदेश की प्रगति और निर्माण के वास्तविक आधारस्तंभ हैं। श्रम की सार्थकता और सृजन की भावना को समाज में प्रतिष्ठित करने का श्रेय भगवान विश्वकर्मा को जाता है। विश्वकर्मा जयंती का यह अवसर हम सभी को समर्पण और ईमानदारी से कार्य करने की प्रेरणा देता है।”


    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी की सौजन्य भेंट

    रायपुर / शौर्यपथ।
    राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आज एक महत्वपूर्ण सौजन्य भेंट हुई, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने मुलाकात की।

    बैठक में मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा और बाल शिक्षा को लेकर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की साझी पहल से इन क्षेत्रों में और ठोस परिणाम सामने आएंगे।

    केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी प्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार बच्चों और महिलाओं के कल्याणकारी कार्यक्रमों को और मजबूती से आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग करेगी।

    इस अवसर पर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े और छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा भी उपस्थित रहीं।

      छत्तीसगढ़ / शौर्यपथ / भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी कुशल संगठन शिल्पी, अद्भुत प्रशासक और विश्व मंच पर भारत की पहचान को ऊँचाई देने वाले सशक्त नेतृत्वकर्ता हैं। मां भारती के वैभव को पुनः स्थापित कर भारत की छवि को विश्व शिखर तक पहुँचाने के उनके संकल्प और प्रयासों के लिए देशवासी सदैव उनके आभारी हैं।

    छत्तीसगढ़ में विश्वास और विकास का जो वातावरण बना है, वह प्रधानमंत्री मोदी जी की गारंटी का ही परिणाम है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के उनके संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना ही उनके जन्मदिन पर हमारी ओर से सच्चा उपहार होगा।

    छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके दीर्घायु और निरंतर नेतृत्व की कामना की।


    रायपुर / शौर्यपथ /  छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा बस्तर संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन प्रेरणा हॉल, कलेक्टरेट भवन, जगदलपुर में किया गया। इस सेमिनार में बस्तर संभाग के चार जिलों जगदलपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव के 43 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।

    छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी ने वर्चुअल माध्यम से सत्र का उद्घाटन किया। सेमिनार में श्री अमितेंद्र किशोर प्रसाद, न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, पोर्टफोलियो न्यायाधीश, जिला कांकेर की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

    मुख्य न्यायाधीश ने बस्तर संभाग के न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में न्यायपालिका से अपेक्षाएँ बहुत अधिक हैं। लोग हमसे अत्यधिक आशा रखते हैं। यह सेमिनार केवल सीखने का मंच ही नहीं, बल्कि न्याय, निष्पक्षता और विधि के शासन के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि भी है।

    मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायिक शिक्षा एक बार की प्रक्रिया नहीं है; बल्कि यह सतत प्रक्रिया है। आज के दौर में जहाँ कानून तेजी से विकसित हो रहे हैं और समाज नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, वहाँ न्याय के संरक्षक होने के नाते हमें निरंतर अपने ज्ञान को समृद्ध करना और अपनी न्यायिक क्षमता को धार देना अनिवार्य है। सतत प्रशिक्षण सुनिश्चित करता है कि हम अपने संवैधानिक दायित्वों को दक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभा सकें।

    मुख्य न्यायाधीश ने आगे यह भी कहा कि बस्तर क्षेत्र अपने विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के साथ न्यायपालिका के लिए चुनौतियाँ और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है। हमारा दायित्व है कि न्याय समाज के हर कोने तक पहुँचे, विशेष रूप से वंचित और कमजोर वर्गों तक। यहाँ के न्यायिक अधिकारियों की भूमिका जनता के विश्वास को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है कि न्याय न केवल किया जाए, बल्कि होता हुआ भी दिखाई दे।

    मुख्य न्यायाधीश ने सभी न्यायिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सहानुभूति, धैर्य और निष्पक्षता के साथ न्यायिक कार्य करें। याद रखें, प्रत्येक मामले के पीछे एक मानवीय कहानी होती है संघर्ष, आशा और न्यायपालिका में विश्वास की। हमें सदैव यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि न्याय समय पर, पारदर्शी और तर्कपूर्ण तरीके से दिया जाए।

    अंत में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार समकालीन विधिक मुद्दों पर विचार-विमर्श, अनुभवों के आदान-प्रदान और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने का मूल्यवान अवसर प्रदान करते हैं। इस सेमिनार में हुई चर्चाएँ न्यायिक अधिकारियों की दक्षता को बढ़ाएँगी और उन्हें न्यायिक कार्य की जटिलताओं को और अधिक कुशलता से संभालने योग्य बनाएँगी।

    इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के प्रभारी रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर एवं दंतेवाड़ा के जिलों के न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर द्वारा दिया गया, परिचयात्मक उद्बोधन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर द्वारा किया गया।

    सेमिनार में बस्तर संभाग के कुल 43 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामलों की कार्यवाही का अवलोकन तथा इनके निपटारे हेतु नवीन उपकरण और तकनीकें, मध्यस्थता में रेफरल जज की भूमिका, डिक्री का क्रियान्वयन गिरफ्तारी एवं सिविल कारागृह में निरुद्धि तथा संपत्ति की कुर्की द्वारा समयबद्ध और प्रभावी प्रवर्तन हेतु रणनीतियाँ, सलाखों के पीछे या स्वतंत्र रिमांड और जमानत के प्रावधानों का गहन विश्लेषण, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के नवीनतम निर्णयों के विशेष संदर्भ के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिए गए।

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