August 11, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    रायपुर/शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय मधुकर खेर की पुण्यतिथि (31 मार्च) पर उन्हें स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता को समृद्ध करने में उनका योगदान अमूल्य है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्व. मधुकर खेर ने अपनी निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनहितकारी पत्रकारिता के माध्यम से समाज को जागरूक करने, जनसमस्याओं को सामने लाने और सकारात्मक बदलाव को प्रेरित करने का कार्य किया। उनकी लेखनी न केवल सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रही, बल्कि जनचेतना को प्रखर बनाने का माध्यम भी बनी।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खेर का समर्पण और उनकी पत्रकारिता की विरासत आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है। उनके विचार, सिद्धांत और मूल्य हमें निष्पक्ष, सशक्त और समाजोन्मुखी पत्रकारिता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

    प्रधानमंत्री ने अभनपुर-रायपुर मेमू ट्रेन सेवा का किया शुभारंभ
         रायपुर/शौर्यपथ / रायपुर से नया रायपुर राजधानी क्षेत्र रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। अब यहां आवागमन के लिए मेमू ट्रेन नियमित रूप से चला करेगी। रायपुर रेल्वे स्टेशन से मंदिर हसौद होते हुए नया रायपुर सीबीडी, केन्द्री होते हुए अभनपुर और अभनपुर से रायपुर ट्रेन के जरिए आवागमन हो सकेगा। इससे मंदिर हसौद, मंत्रालय, सचिवालय, नया रायपुर, अभनपुर आवागमन में सस्ता और आसान होगा। इससे शासकीय कर्मचारियों सहित नया रायपुर के नागरिकों और विद्यार्थियों को एक नई सुविधा सुलभ हो गई है।
     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ के मोहभट्ठा बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभनपुर-रायपुर मेमू ट्रेन सेवा का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर छत्तीसगढ़ में 2,695 करोड़ रूपए की लागत से पूरी हो चुकी चार रेल परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करने के साथ ही उन्होंने 7 रेल परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
    रायपुर अभनपुर मेमू ट्रेन का ठहराव मंदिर हसौद, सीबीडी, केंद्री और अभनपुर स्टेशनों पर होगा। रेल यात्री रायपुर से नवा रायपुर और अभनपुर की यात्रा कर सकेंगे, वो भी महज दस रुपये में। अभनपुर-रायपुर के बीच चलने वाली मेमू ट्रेन अत्याधुनिक थ्री-फेज़ है। बड़ी और खास बात ये है कि ये अत्याधुनिक ट्रेन ऊर्जा दक्षता, उच्च गति और बेहतर आराम के साथ यात्रियों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में भी कई रेल सेक्शनों में थ्री-फेज़ मेमू ट्रेनें चलाई जा रही हैं। हर कोच में सौंदर्यपूर्ण इंटीरियर, कुशन वाली सीटें, बड़ी खिड़कियां, स्लाइडिंग दरवाजे और मोबाइल चार्जिंग सॉकेट उपलब्ध है। जीपीएस-आधारित पीएपीआईएस के तहत डिस्प्ले स्क्रीन और लाउडस्पीकर प्रत्येक कोच में लगाए गए हैं, जिससे यात्रियों को स्टेशन की जानकारी मिलेगी। सीसीटीवी निगरानी प्रणाली भी उपलब्ध कराई गई है। प्रत्येक ट्रेलर कोच में पर्यावरण-अनुकूल बायो-टॉयलेट्स की सुविधा है।

    प्रधानमंत्री जनमन योजना बनी आत्मसम्मान की छत – एक सजीव संवाद की प्रेरक कहानी
    तीन लाख गरीबों का सपना हुआ पूरा, पहुंचे खुद के पक्के मकानों में
    सोमारी पुनेम, दल्लुराम बैगा और जगतपाल राम को प्रधानमंत्री ने अपने हाथों से सौंपी नए आवास की चाबी
    दूरस्थ वनांचलों में भी गरीबों और वंचितों के अब खुद के पक्के घर, सुरक्षा और सम्मान के साथ चिंतामुक्त रह रहे अपने सपने के आशियानों में
      रायपुर/शौर्यपथ /प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब बिलासपुर जिले के ग्राम मोहभट्ठा में आयोजित आमसभा एवं विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास समारोह के दौरान हितग्राहियों से संवाद किया, तो मंच पर एक विशेष क्षण आया – प्रधानमंत्री और दल्लु राम बैगा के बीच सरल, संक्षिप्त किन्तु सजीव, आत्मीय एवं सारगर्भित संवाद।
    प्रधानमंत्री ने मुस्कराकर पूछा –
    “पक्का मकान बन गया है?”
    दल्लु राम ने हाथ जोड़कर जवाब दिया –
    “हां, बन गया है।”
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने फिर स्नेहपूर्वक पूछा –
    “अच्छा लग रहा है की नहीं?”
    भावुक दल्लु राम ने जवाब दिया
    “अच्छा लग रहा है।”
    प्रधानमंत्री ने अंत में पूछा –
    “बाकी सब ठीक है?”
    दल्लु राम ने आत्मविश्वास के साथ कहा –
    “ठीक है।”
    यह संवाद कोई औपचारिक प्रश्नोत्तर नहीं था, बल्कि विश्वास, संवेदना और साझेदारी का साक्षात चित्रण था।
    छत्तीसगढ़ के तीन लाख गरीब परिवारों के लिए आज का दिन बेहद खास और अविस्मरणीय है। आज चैत्र नवरात्रि के पहले दिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें उनके सपनों के आशियानों में गृहप्रवेश कराया। इनमें बड़ी संख्या में दूरस्थ वनांचलों के गरीब और वंचित परिवार भी शामिल हैं। ये ऐसे परिवार हैं जो प्रधानमंत्री आवास जैसी योजना नहीं होती तो शायद ही कभी अपने खुद के पक्के मकान का सपना पूरा कर पाते। यह योजना प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों का बड़ा सपना पूरा कर रही है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बिलासपुर के मोहभट्ठा में दूरस्थ अंचलों के तीन आदिवासी परिवारों को खुद अपने हाथों से नए आवासों की चाबी सौंपी। बीजापुर जिले के चेरपाल पंचायत की श्रीमती सोमारी पुनेम, कबीरधाम जिले के ग्राम हाथीडोब के   दल्लुराम बैगा और जशपुर जिले के करदना पंचायत के पहाड़ी कोरवा श्री जगतपाल राम को जब प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रतीक रूप में मंच से उनके नवनिर्मित पक्के आवासों की चाबी सौंपी तो उनकी खुशियां देखते ही बनती थी।
     रोटी, कपड़ा और मकान हर इंसान की सबसे बुनियादी जरूरतें हैं। पिछड़े ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जहां आज भी संसाधनों की भारी कमी है, वहां एक पक्का घर सिर्फ एक दीवार और छत नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
      विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के दल्लुराम बैगा कभी कच्ची मिट्टी और खपरैल के घर में भय और असुरक्षा के साये में रहते थे। बरसात में छत से टपकते पानी, कमजोर मिट्टी की दीवारें और रात के सन्नाटे में रेंगते जहरीले जीव-जंतु... ऐसे हालात में पूरे परिवार के साथ रहना रोज का संघर्ष था।
      प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत दल्लुराम का आवास स्वीकृत होने के बाद उसके सपनों के घर का सफर शुरू हुआ। आवास निर्माण के लिए दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता के साथ ही 95 दिनों की मनरेगा मजदूरी के रूप में 23 हजार रुपए भी मिले। अन्य योजनाओं से रसोई गैस, शौचालय और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी मिलीं। अब दल्लुराम और उसका परिवार न केवल सुरक्षित मकान में रह रहा है, बल्कि आत्मसम्मान और गर्व के साथ समाज में अपनी पहचान भी बना रहा है।
    दीवारों की नहीं सपने के पूरे होने की मुस्कान
    राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरबा समुदाय के जशपुर जिले के सुदूर अंचल में बसे ग्राम करदना के श्री जगतपाल राम वर्षों से एक टूटी-फूटी झोपड़ी में अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता था, चारों ओर कीचड़ और भीतर डर का माहौल बना रहता था। सांप-बिच्छुओं का डर, हर साल झोपड़ी की मरम्मत का बोझ, और बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का भी अभाव था।
    प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना जगतपाल के लिए उम्मीद की रोशनी लेकर आई। योजना के तहत मिली दो लाख रुपए की सहायता से जगतपाल ने साफ-सुथरा, मजबूत पक्का घर बनवाया जहां न केवल रहने के लिए कमरे हैं, बल्कि शौचालय और बिजली भी है। अब उनका परिवार मूसलाधार बारिश के थपेड़ो, जंगली जानवर और रात के अंधेरे के खतरों से सुरक्षित है।
    आज जब जगतपाल अपने घर के सामने बैठते हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष की मुस्कान होती है। यह मुस्कान सिर्फ दीवारों की नहीं, बल्कि सपने के पूरे होने की मुस्कान है। जगतपाल की ही तरह हजारों गरीब और वंचित आदिवासी परिवारों की भी ऐसी ही कहानी है जिनका जीवन प्रधानमंत्री आवास योजना ने खुशियों से भर दिया है।
    टूटे सपनों को मिला सहारा और मिट्टी के आंगन में उग आई उम्मीद की छत
    वर्षों तक संघर्ष करते हुए सोमारी पुनेम ने कभी नहीं सोचा था कि उसके सिर पर एक दिन पक्की छत होगी। पति के निधन के बाद वह अपने बेटे के साथ एक छोटे से टपकते छप्पर के नीचे जीवन की अनगिनत कठिनाइयों के बीच अपना जीवन-यापन कर रही थी। नियद नेल्ला नार योजना शुरू होने के बाद जब उसे प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली, तो उसकी आंखें चमक उठी। वह बताती है - "मैंने अपने पास जो थोड़ी-बहुत बचत थी, वही लगाई। हर दिन मजदूरों के साथ बैठकर खुद ईंटें उठाई। घर बनता गया... और मेरा आत्मविश्वास भी। आखिरकार महीनों की मेहनत के बाद पक्का आवास बनकर तैयार हो गया। अब बारिश की बूंदें डर नहीं, राहत देती हैं... रातें भी सुकूनभरी लगती हैं। धूप से अब सिर्फ दीवारें नहीं, सम्मान भी बचता है।"
    बीजापुर के चेरपाल में रहने वाली 60 साल की सोमारी कहती है - "आज जब मैं अपने घर के दरवाजे से अंदर जाती हूं, तो लगता है कि मैं अकेली नहीं हूं। मेरे साथ मेरे स्वर्गीय पति का सपना भी इस घर में सांस ले रहा है।" प्रधानमंत्री आवास योजना ने सोमारी को सिर्फ एक मकान नहीं दिया। यह योजना उसके जीवन में भरोसे की नींव, आत्मसम्मान की दीवारें और भविष्य की छत बनकर उतरी है।

    जगदलपुर, शौर्यपथ। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के हितग्राही परिवारों को रविवार को चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर पक्के आवास की सौगात मिलने पर इन हितग्राहियों में अपार खुशी दिखाई दी। इस मौके पर जिले के सातों विकासखण्डों के 9839 हितग्राहियों का उनके नए आवासों में गृह प्रवेश करवाने हेतु कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हितग्राहियों द्वारा विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर गृह प्रवेश किया गया और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के मैदानी अमलों ने हितग्राहियों को पुष्प गुच्छ भेंटकर बधाई दी। इस दौरान हितग्राहियों ने स्वयं का पक्का घर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा अब खुद के पक्के घर में रहने से सुकून मिलेगी। बस्तर ब्लॉक के बाकेल निवासी बुजुर्ग महिला सयती बघेल ने कहा अब बारिश के दिनों में ज्यादा सहूलियत होगी और पानी टपकने की चिंता से मुक्ति मिलेगी। ज्ञात हो कि रविवार को जिले के सातों विकासखण्डों बकावंड ब्लॉक में 3684, बास्तानार में 475, बस्तर में 2392, दरभा ब्लॉक में 436, जगदलपुर ब्लॉक में 1571, लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक में 1087 और तोकापाल में 194 हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री आवास योजनांतर्गत नवनिर्मित पक्के आवासों में गृह प्रवेश किया। इस दौरान सम्बन्धित गांवों में खुशी का अलग ही माहौल दिखाई दी।

         रायपुर/शौर्यपथ /प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज छत्तीसगढ़ के मोहभट्ठा बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर अभनपुर-रायपुर मेमू ट्रेन सेवा का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस अवसर  पर 2,695 करोड़ रूपए की लागत से पूरी हो चुकी चार रेल परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करने के साथ ही  7 रेल परियोजनाओं की आधारशिला रखी। छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं के विकास और यात्रियों को किफायती एवं सुगम परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन परियोजनाओं से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
    रायपुर और अभनपुर के बीच मेमू ट्रेन शुरू होने से आम लोगों के लिए आवागमन किफायती और आसान होगा। इस ट्रेन का ठहराव मंदिर हसौद, सीबीडी, केंद्री और अभनपुर स्टेशनों पर होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 747 करोड़ की लागत से राजनांदगांव-बोरतलाव तक बिछाई गई तीसरी रेल लाइन, 353 करोड़ की लागत से मंदिर हसौद-केन्द्री-अभनपुर नई रेल लाइन, 88 करोड़ की लागत से दुर्ग-रायपुर स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली के साथ ही छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण का लोकार्पण किया।
    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने खरसिया-झाराडीह पांचवीं रेल लाइन, सरगबुंदिया-मड़वारानी तीसरी-चौथी रेल लाइन, दाधापारा-बिल्हा-दगोरी चौथी रेल लाइन, निपनिया-भाटापारा-हथबंद चौथी रेल लाइन, भिलाई-भिलाई नगर-दुर्ग लिंक केबिन चौथी रेल लाइन, राजनांदगांव-डोंगरगढ़ चौथी रेल लाइन, और करगी रोड-सल्का रोड तीसरी रेल लाइन का शिलान्यास किया।  
    वन मंत्री केदार कश्यप इस मौके पर अभनपुर रेल स्टेशन पर आयोजित एक संक्षिप्त कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि रेल सुविधाओं का विकास राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। रेल संपर्क का विस्तार दूरदराज के क्षेत्रों में रोजगार और व्यापार के नए अवसर खोलेगा, जिससे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों को विशेष रूप से लाभ मिलेगा।
    सांसद  बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर से अभनपुर के बीच शुरू की गई मेमू ट्रेन का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय व्यापार और परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि भविष्य में रेल सुविधाओं का विस्तार बस्तर, सरगुजा और जशपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक  किया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ का बड़ा हिस्सा रेल्वे नेटवर्क से जुड़े। कार्यक्रम में विधायक राजेश मूणत,  सुनील कुमार सोनी,  पुरन्दर मिश्रा,  मोतीलाल साहू,  गुरु खुशवंत साहेब, इंद्र कुमार साहू, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, नगर निगम कमिश्नर  विश्वदीप, ज़िला पंचायत सीईओ  कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।

    देश की जनता को जागरूक और सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है ‘मन की बात’ : मुख्यमंत्री श्री साय
    रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में नवगुरुकुल और नेतृत्व साधना केंद्र की बालिकाओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 120वीं कड़ी का श्रवण किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री  मनोहर लाल खट्टर, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, विधायक  किरण देव और विधायक श्री पुरंदर मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
    मुख्यमंत्री साय ने चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर बालिकाओं के साथ आत्मीय संवाद किया और उन्हें उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मन की बात कार्यक्रम आज देश की जनता को जागरूक बनाने का सशक्त मंच बन चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम के माध्यम से विशेष रूप से छात्रों और युवाओं को कड़ी मेहनत, नवाचार और सकारात्मक सोच की प्रेरणा देते हैं। यदि हम सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ें, तो समाज और जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है।
    भारतीय संस्कृति, नवाचार और सामाजिक समरसता का संवाहक
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाला मंच है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम जनता से सीधे जुड़ने का सशक्त माध्यम बन चुका है, जिसमें देश के नवाचार, जन भागीदारी, प्रेरक कहानियाँ, जल संरक्षण, योग, आयुर्वेद और वीर सैनिकों सहित खिलाड़ियों और वैज्ञानिकों के योगदान को उजागर किया जाता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चियों से अपील की कि वे इस कार्यक्रम से प्रेरणा लेकर अपने सपनों को आकार देने के लिए संकल्पबद्ध होकर आगे बढ़ें।
    नवगुरुकुल और नेतृत्व साधना केंद्र की बालिकाओं से आत्मीय भेंट
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बालिकाओं से संवाद करते हुए उनके मेहनत और संकल्प की सराहना की। उन्होंने कहा कि आप सभी तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी बेटियाँ जीवन में अवश्य सफल होंगी। आप सबकी उपलब्धियों में सहभागी बनना मेरे लिए गर्व का विषय है। बालिकाओं ने भी मुख्यमंत्री श्री साय से संवाद करते हुए अपने अनुभव साझा किए और मुख्यमंत्री निवास में बिताए गए इन खास पलों को यादगार बताया।
    तकनीकी प्रशिक्षण और प्रशासनिक तैयारी की नई उड़ान
    नवगुरुकुल संस्था की छात्रावास अधीक्षिका सुश्री रेणुका चंदन ने जानकारी दी कि नवगुरुकुल से निकले कई छात्र-छात्राएं आज बैंगलोर और हैदराबाद की प्रमुख आईटी कंपनियों में कार्यरत हैं। इसी तरह नेतृत्व साधना केंद्र में सीजीपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है। यहाँ रहने वाले बच्चों को निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा दी गई है। इस वर्ष केंद्र के 11 बच्चों ने पीएससी की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है और वे अब मुख्य परीक्षा में भाग लेंगे। उल्लेखनीय है कि रायपुर जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित नवगुरुकुल संस्थान में बच्चों को सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कोडिंग एवं डिकोडिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने बीजापुर जिले में एक साथ 50 नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर सुरक्षाबलों को दी बधाई
    रायपुर /शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजापुर जिले में एक साथ 50 नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर सुरक्षाबलों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति – 2025 के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर स्पष्ट दिखने लगे हैं।
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  कहा कि नक्सलवाद के कुचक्र में फंसे लोग अब बंदूक छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं, यह परिवर्तन स्वागतयोग्य है। हमारी सरकार हर उस व्यक्ति के पुनरुत्थान के लिए तत्पर है, जो लाल आतंक छोड़ शांति का रास्ता चुनता है।
    मुख्यमंत्री साय ने यह भी दोहराया कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2026 तक वामपंथी उग्रवाद के समूल उन्मूलन के संकल्प का ही परिणाम है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के तहत सुदूर अंचलों में सड़कों का निर्माण, स्कूलों और अस्पतालों की स्थापना ने बस्तर क्षेत्र में सरकार के प्रति विश्वास और उम्मीद की लौ जगाई है।मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, यह भरोसे की वापसी है। जो कल भय का प्रतीक थे, वे आज भविष्य की उम्मीद बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ अब शांति, विकास और नवचेतना के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद का खात्मा तय है। इसके तहत डबल इंजन की सरकार में प्रदेश में अब तक 2200 से ज्यादा नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है और आत्मसमर्पण किया है, साथ ही अब तक 350 से अधिक नक्सली मारे जा चुके हैं।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में हमारी सरकार द्वारा लगातार नए सुरक्षा कैंप स्थापित करने, नियद नेल्ला नार योजना से सड़क निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से लोगों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। हमारी सरकार, लाल आतंक का दामन छोड़ शांति के रास्ते पर लौटने वाले इन लोगों के पुनरुत्थान के लिए तत्पर है।

    रायपुर /शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा और जनजातीय परंपराओं की जीवंत प्रस्तुति के रूप में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिलासपुर जिले के ग्राम मोहभट्ठा में आयोजित आमसभा और लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह में एक विशेष मोमेंटो भेंट किया, जो बांस से निर्मित अनूठे जनजातीय वाद्ययंत्र "उसुड़" का प्रतीक है। यह मोमेंटो छत्तीसगढ़ की गोंडी संस्कृति, बस्तर की कला और नारी शक्ति की विविध परंपराओं का संगम है।
    "उसुड़": बांस से बना जीवंत संगीत वाद्ययंत्र
    गोंडी बोली में "उसुड़" कहा जाने वाला यह वाद्ययंत्र पूरी तरह बांस से निर्मित होता है। लगभग ढाई से तीन फीट लंबा यह वाद्य, हाथों से पकड़कर घुमाकर बजाया जाता है, जिससे एक विशेष कंपन और ध्वनि उत्पन्न होती है। इसके ऊपरी भाग में लोहे के तीन गोल वासर लगाए जाते हैं और बाहरी सतह को गर्म लोहे से दागकर पारंपरिक शैली में सजाया जाता है। यह वाद्ययंत्र एक सांस्कृतिक प्रतीक है, जो छत्तीसगढ़ की जनजातीय आत्मा को दर्शाता है।
    जनजातीय शिल्पगुरु  बुटलूराम मायरा का योगदान
    इस वाद्ययंत्र को नारायणपुर जिले के देवगांव निवासी जनजातीय शिल्पकार श्री बुटलूराम मायरा ने अपने हाथों से निर्मित किया है। श्री मायरा विगत चार दशकों से जनजातीय कला के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय हैं। उनके योगदान की सराहना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी स्वयं ‘मन की बात’ के 115वें एपिसोड में कर चुके हैं।
    बस्तर की कला को राष्ट्रीय मंच पर पहुँचाया
    बांस शिल्प और तुमा (सूखी लौकी) शिल्प में पारंगत श्री मायरा ने न केवल बस्तर की लोककला को जीवित रखा, बल्कि 60 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा। इसके साथ ही उन्होंने जनजातीय नृत्य दलों का गठन कर देशभर में छत्तीसगढ़ की संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया। उनके इस प्रेरणादायक कार्य हेतु उन्हें वर्ष 2024 में "शहीद वीर नारायण सिंह सम्मान" से सम्मानित किया गया।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया गया यह मोमेंटो केवल एक सांस्कृतिक उपहार नहीं, बल्कि भारत की विविधता, नारी शक्ति, जनजातीय आत्मनिर्भरता और स्थानीय प्रतिभा के उत्थान का प्रतीक है। यह प्रधानमंत्री जी की "वोकल फॉर लोकल" और "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की परिकल्पना से गहराई से जुड़ा हुआ है।
    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा भेंट किया गया यह मोमेंटो छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपरा, बांस शिल्प, सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में चल रहे प्रयासों का जीवंत प्रतीक है। यह भेंट प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में स्थानीय कौशल, सांस्कृतिक समरसता और महिला सशक्तिकरण को राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक सार्थक योगदान है।

    रायपुर /शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर जिले के ग्राम मोहभट्टा में आयोजित आमसभा एवं विकास कार्यों के लोकार्पण शिलान्यास समारोह में  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को आज एक विशेष मोमेंटो भेंट किया, जो छत्तीसगढ़ की वीरांगना बिलासा देवी केवट की स्मृति में तैयार किया गया है। यह मोमेंटो न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि नारी शक्ति, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता की जीवंत अभिव्यक्ति भी है।
    छत्तीसगढ़ की बिलासा देवी एक साहसी, परिश्रमी और दूरदर्शी महिला थीं, जिनके नाम पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहर बिलासपुर का नाम पड़ा। वे केवट समुदाय से संबंध रखती थीं—एक ऐसा समुदाय, जो भारतीय इतिहास में जल परिवहन, सेवा भाव और ईमानदारी के लिए जाना जाता है। भगवान श्रीराम के जीवन में केवट समुदाय की भूमिका आज भी आदर्श के रूप में स्मरण की जाती है।
    महिला सशक्तिकरण की प्रेरणास्रोत
    बिलासा देवी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि महिलाएँ सीमाओं को पार कर इतिहास रच सकती हैं। उनके नेतृत्व, परिश्रम और कौशल ने यह सिद्ध किया कि चाहे वह प्रशासन हो या सामाजिक नेतृत्व—नारी कहीं भी पीछे नहीं। यह मोमेंटो उन्हीं मूल्यों और प्रेरणाओं का दर्पण है।
    यह भेंट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दूरदर्शी नेतृत्व के साथ प्रतिध्वनित होती है, जिसके केंद्र में नारी शक्ति और राष्ट्र निर्माण में सहभागिता की संकल्पना है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘उज्ज्वला योजना’, ‘महिला स्वयं सहायता समूह’, ‘नारी शक्ति मिशन’ जैसी योजनाएँ इसी दिशा में उठाए गए ऐतिहासिक कदम हैं। यह मोमेंटो केवल एक शिल्पकृति नहीं, बल्कि एक वैचारिक प्रतीक है—जो दर्शाता है कि भारत का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा, जब उसकी महिलाएँ सशक्त होंगी। यह भेंट छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत, वर्तमान प्रयासों और भविष्य की संभावनाओं का समन्वय है।
    बिलासा देवी केवट का यह प्रतीक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  को भेंट कर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने महिलाओं के सामर्थ्य और भारतीय संस्कृति के यशस्वी मूल्यों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित भी किया है।

     रायपुर/शौर्यपथ /मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आमसभा को संबोधित करते हुए कहा कि  हिंदू नववर्ष के शुभारंभ के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर विकास की नई रोशनी फैली है, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राज्य को 33,700 करोड़ रुपए से अधिक की बहुआयामी परियोजनाओं की सौगात दी है।  उन्होंने जनसभा में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की ओर से हार्दिक स्वागत और अभिनंदन किया।
    जनकल्याण और अधोसंरचना के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा लोकार्पित एवं शिलान्यास की गई परियोजनाएं रेल, सड़क, ऊर्जा, ईंधन, आवास और शिक्षा से जुड़ी हैं, जो न केवल लोगों के जीवन में खुशहाली और सुविधा का नया सूर्याेदय लाएंगी, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की नींव भी मजबूत करेंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी पर लोगों ने भरोसा किया जिससे विधानसभा और लोकसभा चुनावों में डबल इंजन की सरकार बनी और अब स्थानीय निकाय चुनावों में तीसरा इंजन भी जुड़ गया है।
    2047 के विकसित भारत की ओर छत्तीसगढ़ का मजबूत कदम
    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भावी पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखकर 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ इसमें ऊर्जा, खनिज और कृषि के क्षेत्र में राष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक बनेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि जैसे कार्यक्रमों के जरिए अंतिम छोर तक लाभ पहुंचा है। साथ ही रेल, सड़क, एयर कनेक्टिविटी और डिजिटल नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है।
    आदिवासी विकास में विशेष योगदान
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री जन-मन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने जनजातीय बहुल छत्तीसगढ़ को एक नई दिशा और दशा दी है। भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर है।
     मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मंदिर बना और प्रयागराज महाकुंभ में भारत की संस्कृति की भव्यता को दुनिया ने देखा।
    छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
      मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के सशक्तिकरण के लिए सरकार पूरी शक्ति से जुटी है।
      मुख्यमंत्री साय ने अंत में प्रधानमंत्री जी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि जब-जब छत्तीसगढ़ के विकास के लिए हमने मांग की, आपने अपेक्षा से अधिक दिया। इसके लिए हम सदैव आभारी रहेंगे। उन्होंने प्रदेश की जनता की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

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