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रायपुर/मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (मई दिवस) के अवसर पर प्रदेश के समस्त श्रमवीरों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए उनके सुखमय, सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 1 मई का यह महत्वपूर्ण दिवस उन परिश्रमी हाथों के सम्मान का प्रतीक है, जिनके अथक श्रम, समर्पण एवं निष्ठा से समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार सुदृढ़ होता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा कि श्रमिक वर्ग किसी भी राज्य और राष्ट्र की उन्नति का मूल आधार है। कृषि, उद्योग, निर्माण एवं सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में श्रमिकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि समावेशी एवं सतत विकास की संकल्पना तभी साकार हो सकती है, जब श्रमिकों को सम्मान, सुरक्षा एवं अवसर प्राप्त हों।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के सर्वांगीण विकास, सामाजिक सुरक्षा तथा आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है।छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड
के माध्यम से श्रमिकों एवं उनके परिवारों के हित में अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनसे उन्हें आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सुरक्षा, शिक्षा एवं सामाजिक संरक्षण प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर श्रमिकों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, कौशल उन्नयन के अवसरों का लाभ उठाएं और प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्रमिकों के परिश्रम, समर्पण और प्रतिबद्धता से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा।
रायपुर /
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सभी बौद्ध धर्मावलम्बियों सहित प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। अपने शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा है कि महात्मा बुद्ध ने लोगों को अहिंसा, समानता और विश्व बंधुत्व का संदेश दिया। उनकी शिक्षा को विदेशों में भी लोगों ने अपनाया और लाखों अनुयायी उनके दिखाये मार्ग पर चलकर देश-दुनिया को शांति का संदेश दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गौतम बुद्ध के उपदेश हर परिस्थिति और काल में प्रासंगिक हैं। उनकी दी गई शिक्षा हमें संयम से आगे बढ़ने का संदेश देती है। महात्मा बुद्ध के विचार और जीवन मूल्य एक बेहतर समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए हमेशा मार्गदर्शक रहेंगे।
रायपुर / छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान, समग्र विकास और सशक्तिकरण के लिए संसद और सभी विधानसभाओं में उनके लिए एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुदृढ़ करेगी, बल्कि समाज में समान अवसर और संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा में भी एक नई ऊर्जा प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रयासों से देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में सशक्त भूमिका मिलेगी और विकास अधिक समावेशी एवं प्रभावी बनेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह पावन धरती माता शबरी, मां दंतेश्वरी और मां महामाया की भूमि है, जहां नारी को सदैव शक्ति के रूप में सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी केवल सम्मान की पात्र नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति की आधारशिला है। नवरात्रि में जिस शक्ति की हम पूजा करते हैं, वही शक्ति समाज में मातृरूप में विद्यमान है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे शास्त्रों में वर्णित “या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता…” केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का मूल तत्व है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर भक्त माता कर्मा, तीजन बाई, उषा बारले जैसी विभूतियों ने अपनी प्रतिभा और समर्पण से प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया है। साथ ही, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती और अवंती बाई जैसी वीरांगनाओं के योगदान को भी उन्होंने प्रेरणास्रोत बताया। आधुनिक युग में कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महिलाओं ने देश का गौरव वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व का विस्तार समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के कार्यक्षेत्र के विस्तार और जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए समय-समय पर व्यवस्थागत सुधार और संतुलन पर विचार करना महत्वपूर्ण है, जिससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनसरोकारों के अनुरूप बन सके।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश में महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। स्वच्छता, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। इन प्रयासों ने महिलाओं की गरिमा और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देना और उनके सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता, स्वरोजगार के अवसर और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि वे समाज की मुख्यधारा से भी अधिक मजबूती से जुड़ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास, पेयजल, आजीविका और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, जो समाज में सकारात्मक
परिवर्तन का संकेत है।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाने का एक सशक्त उदाहरण है। बड़ी संख्या में महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में नेतृत्व कर रही हैं और स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को परिवार और समाज में सशक्त बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक पहल की जा रही हैं, जिससे वे निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मातृशक्ति का सशक्तिकरण केवल एक नीति का विषय नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास का आधार है। उन्होंने सभी वर्गों से इस दिशा में सहयोग और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया, ताकि एक समतामूलक, सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सके।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राजनांदगांव जिला क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रिपरिषद द्वारा आधुनिक खेल मैदान एवं अत्याधुनिक क्रिकेट अकादमी के निर्माण हेतु सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा के नाम दर्ज भूमि में से 5 एकड़ भूमि रियायती दर पर आबंटित करने के महत्वपूर्ण निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिले की खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी और क्रिकेट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित मांग पर मंत्री परिषद की बैठक में त्वरित निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राजनांदगांव में अत्याधुनिक स्टेडियम का निर्माण संभव होगा, जिससे प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का बेहतर मंच मिलेगा।
इस दौरान विधायक धरम लाल कौशिक, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विधायक ललित चंद्राकर, छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया, राजनांदगांव जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव योगेश बागड़ी सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
दीपक वैष्णव की खास रिपोर्ट
कोंडागांव- कोंडागांव जिला क्षेत्र के जैतपुरी के एक गांव में आयोजित विवाह समारोह के दौरान कुछ नाबालिग बालिकाओ के साथ छेड़छाड़ का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब बालिका विवाह समारोह में बाराती के रूप में मौजूद थी, तभी आरोपियों ने उसके साथ छेड़छाड़ की। इसकी जानकारी परिजनों को देने के पश्चात उक्त लड़को को परिजनों ने समझाई दी। इस पर ग्रामीण युवा औऱ उग्र हो गए उन्होंने हमारी शिकायत करोगी कहते हुए बालिकाओं एवं बीच बचाव करने वाले बारातियों के साथ मारपीट की।
घटना के बाद परिजनों ने इस बात की जानकारी ग्राम सभा को दी, फिर भी बात नही बनी। युवाओ को संरक्षण की बात स्थानीय जनप्रतिनिधि के द्वारा की गई जिसके बाद मामला सुलह की जगह बिगड़ गया। पीड़ित पक्ष नाबालिग लड़कियों एवं ग्रामीणों के साथ कोंडागांव कोतवाली पहुंचकर मामला दर्ज कराया।
*पुलिस की त्वरित कार्रवाई:*
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल टीम गठित कर दबिश दी। पुलिस ने इस मामले में कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिसमे एक आरोपी अब भी फरार चल रहा है
कोतवाली द्वारा उनके न्यायालय में पेश किया गया जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
*कानूनी कार्रवाई:*
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
अपील: प्रशासन और पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी सार्वजनिक या पारिवारिक कार्यक्रमों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें और किसी भी अप्रिय घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
किसके सह युवाओ में दबंगता ---
सारे मामले में एक बात निकल कर आई कि जब मामला समझाईस से या युवाओं को उनकी गलती स्वीकार करने से निपट सकता था। तो कौन इस प्रकार से युवाओ को झूठी आश बंधा गुमराह कर रहा है उन्हें अपराध की और धकेल रहा है। या यूं कहें अपने राजनीतिक केरियर की दमकाने के लिए इन अबोध को उकसाया एवँ भड़काया जा रहा है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में जनसुविधा, ऊर्जा, खेल और प्रशासनिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा और जनहित योजनाओं को मजबूत करना है।
शहरी गैस वितरण नीति 2026 को मंजूरी
कैबिनेट ने ''छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026ÓÓ को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत प्रदेश में पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ और सस्ती प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे आम उपभोक्ताओं को एलपीजी के मुकाबले किफायती विकल्प मिलेगा, वहीं शहरी क्षेत्रों में ईंधन की सुगम और सुरक्षित व्यवस्था विकसित होगी।
यह नीति न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि पाइपलाइन अधोसंरचना के विकास के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।
राजनांदगांव में आधुनिक क्रिकेट अकादमी को जमीन
खेल अधोसंरचना को बढ़ावा देते हुए मंत्रिपरिषद ने जिला क्रिकेट एसोसिएशन, राजनांदगांव को सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा की 5 एकड़ भूमि रियायती दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया है। यहां आधुनिक खेल मैदान और क्रिकेट अकादमी का निर्माण किया जाएगा।
स्वेच्छानुदान से जरूरतमंदों को राहत
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 6,809 व्यक्तियों एवं संस्थाओं को लगभग 11 करोड़ 98 लाख 84 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। यह सहायता विभिन्न जरूरतमंदों को त्वरित राहत और सामाजिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से दी जाएगी।
आईपीएस अधिकारियों के मामले में पुनर्विलोकन
मंत्रिपरिषद ने वर्ष 1988 बैच के तीन आईपीएस अधिकारियों—श्री संजय पिल्ले, श्री आर.के. विज और श्री मुकेश गुप्ता—से संबंधित 26 सितंबर 2019 के पदावनति आदेश को पुनर्विलोकन के बाद निरस्त करने का निर्णय लिया है। साथ ही 24 सितंबर 2019 के पूर्व निर्णय को भी अपास्त करते हुए उससे जुड़े सभी आदेशों को पूर्व स्थिति में पुनर्जीवित माना गया है।
राज्य सरकार के ये फैसले विकास, पारदर्शिता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिनका प्रभाव आने वाले समय में व्यापक रूप से दिखाई देगा।
रायपुर /
राज्य में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएँ जरूरतमंद वर्ग के लिए सशक्त सहारा बनकर उभर रही हैं। वृद्धजनों, दिव्यांगजनों एवं निराश्रित महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित ये योजनाएँ न केवल जीवन-यापन में सहूलियत दे रही हैं, बल्कि समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का आधार भी सुनिश्चित कर रही हैं।
प्रदेश में वर्तमान में कुल 6 पेंशन योजनाएँ प्रभावी रूप से संचालित हैं, जिनमें 3 राज्य योजनाएँ एवं 3 केंद्र प्रवर्तित योजनाएँ शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सुखद सहारा एवं मुख्यमंत्री पेंशन योजना के अंतर्गत मार्च 2026 तक सभी पात्र हितग्राहियों को भुगतान सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इससे लाखों परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है, जो उनके दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के अंतर्गत भी भुगतान की प्रक्रिया सुव्यवस्थित रूप से संचालित की गई है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन एवं दिव्यांग पेंशन योजनाओं में दिसंबर 2025 तक तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना में जनवरी 2026 तक भुगतान पूर्ण कर लिया गया है। यह दर्शाता है कि राज्य स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में निरंतरता और गंभीरता बनी हुई है।
पेंशन वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा नई तकनीकी प्रणाली एसएनए–स्पर्श (SNA-SPARSH) लागू की गई है। इस आधुनिक प्रणाली के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा हितग्राहियों को सीधे लाभ सुनिश्चित होगा। हालांकि, नई प्रणाली में संक्रमण के चलते केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के कुछ भुगतान वर्तमान में लंबित हैं।नई व्यवस्था के तहत अब भुगतान भारत सरकार से मदर सैंक्शन प्राप्त होने के बाद ही किया जा सकेगा। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही मदर सैंक्शन प्राप्त होगा, सभी लंबित भुगतान एरियर सहित प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र जारी कर दिए जाएंगे।
राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध भुगतान एवं तकनीकी नवाचार के माध्यम से प्रदेश में एक मजबूत, पारदर्शी और हितग्राही-केंद्रित सामाजिक सुरक्षा तंत्र स्थापित किया जा रहा है।
'सेवा सेतु’ से सुशासन और पारदर्शिता को मिलेगी नई मजबूती - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
आधुनिक तकनीक और AI से सशक्त हुआ सुशासन: ‘सेवा सेतु’ से 441 सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर
अब सेवाएं नागरिकों के हाथ में: ‘सेवा सेतु’ से घर बैठे मिलेगी 441 सरकारी सुविधाएं
ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी नागरिक सेवाओं की डिजिटल सुविधा
रायपुर, / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा आमजन तक प्रभावशाली, पारदर्शी और डिजिटल नागरिक सेवाओं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत संचालित ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना के उन्नत संस्करण ‘सेवा सेतु’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्रीद्वय श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा सहित मंत्रिमंडल के सभी मंत्रीगण उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से डिजिटल नागरिक सेवाएं और अधिक सशक्त और प्रभावी होंगी। वर्ष 2003 में प्रारंभ हुए चॉइस (CHOICE) मॉडल से लेकर वर्ष 2015 के ई-डिस्ट्रिक्ट और अब ‘सेवा सेतु’ तक छत्तीसगढ़ ने डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में एक लंबी और उल्लेखनीय यात्रा तय की है तथा यह प्लेटफॉर्म अब नागरिक सशक्तिकरण का एक मजबूत माध्यम बन चुका है, जिससे लाखों नागरिकों को लाभ मिला है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से अब एक ही पोर्टल पर 441 शासकीय सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 54 नई सेवाएं और 329 री-डायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब व्हाट्सएप के माध्यम से भी सेवाओं की जानकारी सहज रूप से प्राप्त की जा सकेगी। आय, जाति, निवास, राशन कार्ड और विवाह पंजीयन जैसे प्रमुख प्रमाण-पत्रों सहित अब तक 3.2 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं और इतने ही प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 30 से अधिक विभागों के एकीकरण के साथ यह प्लेटफॉर्म एक सशक्त “वन स्टॉप सॉल्यूशन” के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘सेवा सेतु’ राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को नई मजबूती प्रदान करेगा।
उल्लेखनीय है कि इस परियोजना का संचालन राज्य स्तर पर चिप्स (CHiPS) द्वारा किया जा रहा है, जबकि जिला स्तर पर जिला कलेक्टर के नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट ई-गवर्नेंस सोसाइटी (DeGS) के माध्यम से इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। नई प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधार, व्हाट्सएप और ‘भाषिणी’ जैसी उन्नत तकनीकों का एकीकृत उपयोग किया गया है, जिससे नागरिक व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे, सेवा की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और डिजिटल प्रमाण-पत्र भी प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही आधार आधारित ई-केवाईसी, डिजी लॉकर, ई-प्रमाण और उमंग जैसे प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण कर सेवाओं को और अधिक सरल, सुरक्षित और सुलभ बनाया गया है।
‘सेवा सेतु’ में ट्रेजरी और ई-चालान का एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन भुगतान कर तत्काल डिजिटल रसीद प्राप्त कर सकेंगे तथा डीबीटी के माध्यम से योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी, जिसकी रीयल-टाइम ट्रैकिंग एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से संभव होगी। पोर्टल में क्यूआर कोड आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, क्लाउड स्टोरेज, डिजिटल सिग्नेचर, रीयल-टाइम डैशबोर्ड और एमआईएस रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं तथा यह पोर्टल 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे भाषा की बाधा समाप्त हो गई है।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत सेवाओं की समय-सीमा सुनिश्चित करने के लिए ऑटोमेटिक पेनल्टी कैलकुलेशन, समय-सीमा संकेतक और स्वतः शिकायत पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी। राज्य में सेवाओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 800 से अधिक लोक सेवा केंद्र, 1000 से अधिक चॉइस सेंटर और 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर सक्रिय हैं, जहां से नागरिक आसानी से सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।
‘सेवा सेतु’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जनसेवा के केंद्र में रखते हुए आवेदन प्रक्रिया को सरल और तकनीकी रूप से बाधारहित बनाया गया है, जिससे शासन और नागरिकों के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है और सेवाएं सीधे नागरिकों के हाथों तक पहुंच रही हैं।व्हाट्सएप इंटरफेस के माध्यम से नागरिक विभिन्न सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे, पावती रसीद और दस्तावेजों के लिंक तुरंत प्राप्त कर सकेंगे तथा अनुमोदन के पश्चात डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र सीधे व्हाट्सएप पर प्राप्त कर सकेंगे।
वर्तमान में यह सुविधा 25 सेवाओं के लिए उपलब्ध है, जिसे शीघ्र ही सभी सेवाओं तक विस्तारित किया जाएगा। प्रत्येक प्रमाण-पत्र में क्यूआर कोड आधारित सत्यापन की सुविधा दी गई है, जबकि कैप्चा, ओटीपी और ईमेल आधारित प्रमाणीकरण जैसी व्यवस्थाएं सुरक्षा को सुदृढ़ करती हैं। नागरिकों की पहचान को विश्वसनीय बनाने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी की सुविधा प्रारंभ की गई है तथा सुरक्षित लॉगिन हेतु डिजिलॉकर और ई-प्रमाण जैसी प्रणालियों को एकीकृत किया गया है।
‘भाषिणी’ के सहयोग से यह पोर्टल 22 भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है, जिससे हर नागरिक अपनी भाषा में सेवाओं का लाभ ले सकेगा।
नागरिक ‘सेवा सेतु’ में उपलब्ध सेवाओं का लाभ वेब पोर्टल, लोक सेवा केंद्र, चॉइस सेंटर या कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे तथा फीडबैक सुविधा के माध्यम से अपने सुझाव भी दे सकेंगे, जिनके आधार पर इस परियोजना को निरंतर बेहतर बनाया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यसचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
पैदल और हाथों से उठाकर नेटवर्क क्षेत्र तक लाया गया, 108 एम्बुलेंस से पखांजूर, फिर जीएमसी कांकेर रेफर
रायपुर, /
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कांकेर की रिपोर्ट के अनुसार, एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को अत्यंत दुर्गम क्षेत्र बिनागुंडा से कठिन परिस्थितियों में निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। बिनागुंडा गांव अत्यंत दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है, जहां न तो सड़क संपर्क उपलब्ध है और न ही मोबाइल नेटवर्क की सुविधा। यह इलाका हाल ही में कैंप स्थापित होने के बाद पहुंच में आया है और कांकेर जिले की सीमा से लगा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, मरीज की तबीयत अचानक 22 अप्रैल 2026 को बिगड़ गई थी। प्रारंभ में परिजनों ने स्थानीय बैगा (पारंपरिक वैद्य) से उपचार कराया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने पर मरीज को अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया।
गांव में सड़क और संचार सुविधा के अभाव के चलते परिजनों ने मरीज को पैदल और हाथों से उठाकर उस स्थान तक पहुंचाया, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध था। वहां से 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी गई। इसके बाद मरीज को पहले नजदीकी कैंप तक लाया गया और फिर 108 एम्बुलेंस के माध्यम से पाखांजूर सिविल अस्पताल पहुंचाया गया।
प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर जांच एवं इलाज के लिए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (GMC) कांकेर रेफर किया है।
स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश जारी किए हैं।
साभार - धनंजय राठौर
संयुक्त संचालक जनसंपर्क
रायपुर, /आज के दौर में टिकाऊ खेती की ओर बढ़ना समय की मांग है। रसायनों के बोझ तले दबती मिट्टी को राहत देने के लिए हरी खाद एक बेहतरीन समाधान बनकर उभरी है। यह न केवल फसलों की पैदावार बढ़ाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन की उर्वरता को भी सुरक्षित रखती है। मिट्टी बचेगी, तो किसान बचेगा और किसान बचेगा, तो देश समृद्ध होगा।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को खेती में हरी खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और उत्पादन में सुधार लाने में मदद मिल सके। विभाग के अनुसार धान के खेतों में लगातार रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की गतिविधियां कम हो रही हैं और मिट्टी की संरचना भी प्रभावित हो रही है।
क्या है हरी खाद?
हरी खाद वह सहायक फसल है जिसे मुख्य फसल बोने से पहले खेत में उगाया जाता है और फूल आने की अवस्था में ही उसे हल चलाकर मिट्टी में दबा दिया जाता है। ढैंचा, सनई, लोबिया, मूंग और उड़द जैसी फसलें हरी खाद के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। हरी खाद के तहत कई फसलों का उपयोग किया जाता है जिनमें दलहनी और बिना दलहनी फसलें शामिल होती हैं। हरी खाद के लिए झाड़ियों और पेड़ों की पत्तियों, टहनियों को भी उपयोग में ला सकते हैं, लेकिन इसके लिए विशेष रूप से ढैंचा फसलों का उपयोग किया जाता है। इन फसलों को खेतों में लगाकर भूमि में सुधार किया जाता है।
मिट्टी की सेहत में सुधार
हरी खाद का सबसे बड़ा प्रभाव मिट्टी की भौतिक और रासायनिक संरचना पर पड़ता है। यह मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों (ह्यूमस) की मात्रा को तेजी से बढ़ाती है। हरी खाद मिट्टी को भुरभुरा बनाती है, जिससे हवा का संचार बढ़ता है और पौधों की जड़ें गहराई तक जा पाती हैं। इसके उपयोग से मिट्टी की पानी सोखने की शक्ति बढ़ जाती है, जो सूखे के समय फसलों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है।
उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी
जब मिट्टी स्वस्थ होती है, तो उत्पादन का बढ़ना निश्चित है। हरी खाद के प्रयोग से पैदावार में 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। यूरिया और अन्य रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो जाती है, जिससे किसान की फसल की लागत घटती है। मित्र कीटों से फसल का संरक्षण करता है। यह जमीन के भीतर लाभकारी सूक्ष्मजीवों और केंचुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करती है।
हरी खाद बनाने की सही विधि
क्षेत्र की जलवायु के अनुसार सनई या ढैंचा का चुनाव करें। बुवाई का समय मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) इसके लिए सबसे उपयुक्त है। जब फसल लगभग 40-50 दिन की हो जाए और उसमें फूल आने लगें, तब उसे पाटा लगाकर या रोटावेटर की मदद से मिट्टी में मिला दें। पलटने के बाद 10-15 दिनों तक खेत में नमी बनाए रखें ताकि खाद अच्छी तरह सड़कर मिट्टी का हिस्सा बन जाए।
हरी खाद के प्रयोग से बढ़ेगी आय
हरी खाद केवल एक उर्वरक नहीं है, बल्कि यह मिट्टी का उपचार है। यदि किसान हर दूसरे या तीसरे साल अपने खेत में हरी खाद का प्रयोग करें, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि हम समाज को रसायनों से मुक्त, शुद्ध और पौष्टिक अनाज भी उपलब्ध करा पाएंगे।
कृषि के लिए एक वरदान हरी खाद
हरी खाद का उपयोग कृषि के लिए एक ष्वरदानष् के समान है। वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है, ऐसे में हरी खाद (ळतममद डंदनतम) प्राकृतिक तरीके से मिट्टी को पुनर्जीवित करने का सबसे सुलभ विकल्प है।
कृषि विभाग द्वारा खरीफ फसल से पूर्व हरी खाद के बीज उपलब्ध कराने की भी पहल की जा रही है। इसके लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से किसानों से मांग लेकर बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
